हमास leader के बेटे ने कहा ‘इजरायल का एक्शन पूरी तरह जायज’

बेरुत इजरायली सेना हमास के बाद अब लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों पर मौत बन कर बरस रही है. लेबनान पर इजरायल की तरफ से लगातार हिजबुल्लाह आतंकियों को निशाना बनाकर बमबारी की जा रही है. इस बमबारी में अब तक टॉप कमांडर नसरल्लाह के अलावा हिजबुल्लाह के कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं. इन हमलों में अबतक सैकड़ों नागरिकों की भी मौत हो चुकी है, जिसकी वजह से कई सारे देश इजरायल की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन इन सब से उलट  मोसाब हसन यूसुफ ने इजयरायल के द्वारा किए जा रहे हमलों को सही बताया है. मोसाब हसन आतंकी संगठन हमास का को-फाउंडर रहा शेख हसन यूसुफ का बेटा है. 'इजरायल का एक्शन पूरी तरह जायज' मोसाब ने एक टीवी डिबेट में हिस्सा लेते हुए कहा कि, फिलिस्तीन में इजरायल सबसे वैध जातीय समूह है, जिसके पास उस भूमि से अपने संबंधों के मजबूत सबूत हैं. मुसलमान पिछले 1,400 सालों से उस जमीन से यहूदी लोगों का सफाया करने की कोशिश कर रहे हैं. मोसाब ने आगे कहा कि इजरायल को अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है. हिजबुल्लाह और हमास के खिलाफ इजरायल का एक्शन पूरी तरह से जायज है. हसन नसरल्लाह मौत पर मोसाब ने कहा कि ये उसकी सजा है. वहीं मोसाब ने आगे कहा कि मैं फिलिस्तीन संघर्ष का गवाह रहा हूं. मोसाब ने बताया कि कैसे फिलिस्तीन में राजनीतिक और वित्तीय लाभ के लिए बच्चों की बलि दी जाती है. दुनिया भर में इजरायल की आलोचना पर मोसाब ने पूछा कि इजरायल में खून बह रहा था, तब किसी ने हिजबुल्लाह के एक्शन का विरोध क्यों नहीं किया?. अपने ही पिता के खिलाफ की जासूसी आपको जानकर हैरानी होगी कि इजरायल का इतनी मजबूती के साथ पक्ष रखने वाला मोसाब एक समय पर फिलिस्तीनी मिलिटेंट था. लेकिन 1997 में वो इजरायल चला गया और इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी करने लगा. हमास आतंकियों के द्वारा इजरायल के अंदर घूस कर हमला किया और कई सारे लोगों को बंधक बना लिया गया. उस वक्त मोसाब ने इजरायल से सभी हमास नेताओं के खात्मे की अपील की थी. मोसाब ने कहा था कि अगर सभी बंधक रिहा नहीं किए जाते हैं तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को खत्म कर देना चाहिए. इन नेताओं में मोसाब के पिता का नाम भी शामिल था. फिलहाल लेबनान में इजरायल की सेना ने जमीनी हमला शुरू कर दिया है. इजरायल की सेना की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक सोमवार-मंगलवार की रात में आईडीएफ लेबनान के अंदर घुस गई है. आईडीएफ हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ सीमित, स्थानीय और लक्षित जमीनी हमले कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मैं मौजूदा घटनाक्रम पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं. मैंने संघर्ष को दिया है. मैं फिलिस्तीन संघर्ष का गवाह रहा हूं. मैंने अपना आधा जीवन तथाकथित फिलिस्तीनी समाज में जिया है और आधा जीवन यहूदी समुदाय के साथ बिताया है. फिलिस्तीन की संस्कृति मौत की संस्कृति है, जो राजनीतिक और वित्तीय लाभ के लिए बच्चों की बलि देती है. जब इजरायल के साउथ में खून बह रहा था, तब किसी ने हिजबुल्लाह के एक्शन का विरोध क्यों नहीं किया? जब खेल के मैदान में 12 बच्चे मरे थे, तब हसन नसरल्लाह को किसी ने क्यों नहीं रोका? नसरल्लाह पूरी तरह से गलत था और उसे उसके किए की सजा मिली. दरअसल, मोसाब हसन यूसुफ एक पूर्व फिलिस्तीनी मिलिटेंट थे. 1997 में उन्होंने इसराइल जाने का फैसला किया. इसके बाद 2007 में अमेरिका जाने तक वे इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी करते रहे. उनके पिता शेख हसन यूसुफ हमास के संस्थापकों में से एक थे. पिछले साल उन्होंने इजरायल से सभी हमास नेताओं के खात्मे की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि अगर सभी बंधक रिहा नहीं किए जाते हैं तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को खत्म कर देना चाहिए. इसमें उनके पिता भी शामिल हैं. यानी मोसाब ने इजरायल से अपने पिता के खात्मे की भी अपील की थी. recent visitors 60

राज्यपाल के हाथों स्वर्ण पदक विजेता और उपाधि प्राप्तकर्ता हुए सम्मानित

आजीवन शिक्षा पाने का महत्वपूर्ण साधन है दूरस्थ शिक्षा पद्धति: राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने प्रख्यात विभूतियों को प्रदान कीं मानद उपाधियां राज्यपाल के हाथों स्वर्ण पदक विजेता और उपाधि प्राप्तकर्ता हुए सम्मानित राजा भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय का सातवॉ दीक्षांत समारोह संपन्न भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में दूरस्थ शिक्षा, जीविका उपार्जन के साथ आजीवन शिक्षा पाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। समाज के अत्यंत पिछड़े, दूरस्थ क्षेत्रों, दिव्यांगजन, घरेलू, कामकाजी स्त्री-पुरुष और युवाओं तक शिक्षा पहुंचाने का यह सहज और सरल माध्यम है। राज्यपाल पटेल मंगलवार को राजा भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में हुये समारोह में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सराहनीय पहल की है। जरूरी है कि दूरस्थ शिक्षा से वंचित वर्गों के लिए सामाजिक सेवाएं और उनके अधिकारों की रक्षा के प्रयासों में और मजबूती आये। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षित विद्यार्थी, अपने माता-पिता और गुरुजनों के योगदान को कभी नहीं भूले। हमेशा उनके त्याग और तपस्या के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थियों ने दूरस्थ शिक्षा के जरिये अपने लक्ष्यों की पूर्ति और सपनों को साकार करने का पहला पड़ाव पार कर लिया है। अब इस ज्ञान और कौशल से जीवन में सफलता पाने के लिए आगे बढ़ें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि अपनी प्रगति के मूल्यांकन एवं सुधार के साथ क्षमताओं को पहचानें। अनुशासन और समय प्रबंधन के साथ निरंतर प्रयास करें। बिना आत्म विश्वास खोये सतत् प्रयास करें, क्योंकि जीत हमेशा प्रयास करने वालों की ही होती है।     रामचरित मानस और गीता में डिप्लोमा देने की पहल सराहनीय राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा रामचरित मानस से सामाजिक विकास एवं भगवत गीता में डिप्लोमा प्रदान करना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा सिकल सेल एनीमिया जागरूकता के लिए ग्रामीण अंचलों में किए जा रहे उन्मुखीकरण प्रयासों की सराहना की। पटेल ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में उच्च मानकों के पाठ्यक्रमों के साथ विश्वविद्यालय विषय विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार कराये। पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता की निरंतर समीक्षा भी की जानी चाहिए। कौशल उन्नयन और भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपने कार्यक्रमों को डिजाइन करें। विद्यार्थियों को ज्ञान एवं कौशल के सहज आदान-प्रदान का प्लेटफार्म भी उपलब्ध करायें।     प्रख्यात विभूतियां मानद उपाधि से सम्मानित राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दीक्षांत समारोह में डॉ. होमी जहांगीर भाभा इंस्टीट्यूट के चान्सलर पद्मविभूषण डॉ. अनिल काकोड़कर, इन्टरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स के भौतिक विज्ञानी डॉ. आतिश श्रीपाद दाभोलकर, परमाणु ऊर्जा शिक्षा सोसायटी बीएआरसी के डॉ. जे.व्ही. याख्मी, आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर पद्मडॉ. अशोक झुनझुनवाला और इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल नई दिल्ली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डॉ. ओमप्रकाश शर्मा को डॉक्टर ऑफ साइन्स (डी.एस.सी.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया। इसी प्रकार शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति (इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) प्रो. नागेश्वर राव को डॉक्टर ऑफ डिस्टेंस एजुकेशन (डी.डी.ई.) की मानद उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को राजा भोज उत्कृष्टता पदक और दीक्षित विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं।       उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने संबोधन में विद्वान और प्रतापी और विद्वान राजा भोज के शिक्षा प्रसार, जल संरक्षण और प्रजाहितैषी कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे राजा भोज के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लें। भारतीय दर्शन, गौरवशाली ज्ञान परम्परा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सहयोग कर विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें। कार्यक्रम को डॉ. होमी जहाँगीर भाभा इंस्टीट्यूट के चान्सलर पद्मविभूषण डॉ. अनिल काकोड़कर और भौतिक विज्ञानी डॉ. आतिश श्रीपाद दाभोलकर ने भी संबोधित किया।          राज्यपाल मंगुभाई पटेल का स्वागत तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया। शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से अभिनंदन किया गया। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय की स्मारिका का लोकार्पण किया। स्वागत उद्बोधन कुलगुरू प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने दिया। कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया ने दीक्षांत समारोह की कार्यवाही का संचालन और आभार व्यक्त किया। दीक्षांत समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, भोज मुक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, दीक्षित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक भी मौजूद रहे।         recent visitors 75

राजपुर में 192 करोड़ 60 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन

‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ का शुभारंभ बलरामपुर-रामानुजगंज के राजपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय होंगे शामिल राजपुर में 192 करोड़ 60 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश में जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास के लिए 02 अक्टूबर को ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान‘ का झारखण्ड के हजारीबाग से शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और अन्य अतिथिगण शामिल होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राजपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हांेगे। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के सीधा प्रसारण दिखाने की व्यवस्था विकासखण्ड राजपुर के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल ग्राउंड बूढ़ा बगीचा में की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस मौके पर वे राजपुर में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिलान्यास सहित जिले में 192 करोड़ 60 लाख रूपये के 108 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इस मौके पर श्री साय विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में सामग्री तथा सहायता राशि का भी वितरण करेंगे और विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जा रही योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में देश में आदिवासी बहुल क्षेत्रों के 63,000 गांव शामिल किया गया है, जिससे 5 करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों को लाभ होगा। इसमें 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय बहुल 549 जिले और 2,740 ब्लॉक के गांव शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ में इस अभियान के क्रियान्वयन के लिए 32 जिलों के 138 विकासखण्डो के 6691 आदिवासी बहुल गांव का चयन किया गया है। चयनित गांव में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक, उन्नति के कार्य किए जाएंगे। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 25 कार्यक्रम शामिल हैं। यह योजना केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से क्रियान्वित की जाएगी। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान का उद्देश्य भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका के क्षेत्र से जनजातीय परिवारों को जोड़कर उनके समग्र और सतत विकास को सुनिश्चित करना है। recent visitors 70

इजरायल ने जने कैसे किया लेबनान पर हमला? आर्मी चीफ ने बताई तैयारी वाली वो बात

तेल अवीव लेबनान के अंदर घुसकर हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को इजरायल की ओर से मार गिराने की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस तथ्य से हो रही है कि ईरान के ही एक जासूस ने इजरायल के लिए काम किया और नसरल्लाह का पता उसे बता दिया। फ्रांसीसी अखबार ले पैरिसियन की रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ घंटे पहले ईरानी दूत ने इजरायल को नसरल्लाह का पता बताया और फिर इजरायल ने उस इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया, जहां वह अपने कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहा था। कहा जा रहा है कि वह बंकर में छिपा था, लेकिन इमारत गिरने की दहशत से ही वह मारा गया। आखिर इजरायल ने कैसे इतनी मजबूत तैयारी की थी कि तेहरान में हमास कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया और फिर लेबनान में हिजबुल्लाह के लीडर को मार डाला। यह अहम सवाल है। दरअसल 2006 में जब इजरायल की हिजबुल्लाह से जंग हुई थी तो यह 34 दिनों तक चली थी। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के आगे इजरायल की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन यहीं से इजरायल ने सबक सीखा और 2006 के बाद से ही अगली जंग की प्लानिंग शुरू कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने तब से ही जंग की तैयारी शुरू कर दी थी और खासतौर पर खुफिया मिशन पर उसका जोर था। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है। इजरायल ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को भी मार दिया। इसका खुलासा खुद इजरायली सेना ने किया। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इजरायल ने लेबनान में कैसे तैयारी के साथ हमला किया। उन्होंने कहा कि जो शेल कंपनी बनाई गई, वो ही इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। 'इजरायल का मास्टर स्ट्रोक' आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान पर कहा, 'जो शेल कंपनी बनाई गई है, वह इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। इसके लिए उसे सालों-साल की तैयारी की जरूरत है। इसका मतलब है कि वे इसके लिए तैयार थे और यही बात मायने रखती है। युद्ध उस तरह से शुरू नहीं होता जिस तरह से आप लड़ना शुरू करते हैं, यह उस दिन से शुरू होता है जिस दिन आप योजना बनाना शुरू करते हैं।' 'हमास को खत्म करने पर अड़ गया इजरायल' आर्मी चीफ ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि इजरायल ने हमास को अपना पहला टारगेट बनाया और उसे जड़ से खत्म करने पर अड़ गया। जनरल द्विवेदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक किताब का हवाला देते हुए इजरायल की रणनीति की तुलना महाभारत के एक प्रसंग से की, जहां अर्जुन, अगर चक्रव्यूह में प्रवेश करते, तो जीवित बच सकते थे और अभिमन्यु भी बच जाता। इसी तरह, इजरायल ने हमास को पहले निपटाने का फैसला किया है। खासतौर पर इजरायल ने यूनिट 8200 को तैनात किया। यह इजरायली सेना की ही एक यूनिट है, जो मोसाद के साथ मिलकर काम करती है। इसके तहत उसने साइबर वारफेयर पर काम किया। इसी एजेंसी की देन थी कि उसने हिजबुल्लाह पर पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के जरिए हमले कराए। इसी के तहत ईरान की इंटेलिजेंस यूनिट में घुसपैठ की गई और उसके 20 लोगों से सारी सूचना हासिल की गई। ईरान के परमाणु ठिकानों से लेकर हिजबुल्लाह, हमास के लीडर्स तक के बारे में पूरी जानकारी इजरायल को मिल गई। इजरायल के इस इंटेलिजेंस वारफेयर का पहला नतीजा 2008 में आया था। तब मोसाद ने सीआईए के साथ मिलकर हिजबुल्लाह के टॉप लीडर इमाद मुगनियाह को ढेर कर दिया था। इसके बाद 2020 में ईरानी कुद्स फोर्स के नेता कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मार गिराया था। सुलेमानी की लोकेशन की पूरी जानकारी इजरायली एजेंसी ने ही अमेरिका को दी थी, जिसे इराक में मारा गया था। इसी दौरान इजरायल नसरल्लाह को मार गिराने वाला था, लेकिन तब ऐसा नहीं किया। इसकी वजह थी कि इजरायल तब युद्ध नहीं चाहता था। अब इजरायल की वह 18 साल पुरानी तैयारी काम आ रही है। उसने 7 दिनों में हिजबुल्लाह के सात कमांडरों को मार गिराया है। इसके अलावा हमास के लीडर्स को भी उसने ढेर किया है। recent visitors 87

वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक- राज्यमंत्री अहिरवार

वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता एवं दया भावना का विकास आवश्यक है : राज्यमंत्री अहिरवार राज्यमंत्री अहिरवार ने राज्यस्तरीय वन्यप्राणी सप्ताह-2024 का शुभारंभ  वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक- राज्यमंत्री अहिरवार भोपाल वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार ने कहा है कि वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक है। वन विभाग राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आम लोगों में वन्यजीव के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपनत्व की भावना विकसित करने की दृष्टि से प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में वन्य जीव सप्ताह मनाया जाता है। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में जनता की भागीदारी को भी यथोचित स्थान मिलना अति आवश्यक है। जन-जागरूकता का अभाव, वन्यजीवों के प्रति अज्ञानता एवं अंधविश्वास भी वन्यजीवों के संरक्षण में बाधक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण विषय को अनिवार्य किया जाना चाहिए। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिये पंचायत स्तर पर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित कर वन्यजीव संरक्षण को काफी हद तक सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह-2024 का समारोह प्रत्येक जिले में किया जा रहा है। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि सम्राट अशोक के शासनकाल में भी वन्यजीवों के लिये अभय वन बनाये जाते थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों में सिर्फ वन्य जीवों का संरक्षण भर नहीं होता है बल्कि जैव विविधता का भी संवर्द्धन होता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में राष्ट्रीय उद्यान ही देश के ऐसे संरक्षित वन हैं, जहां वनस्पति एवं वन्य जीव दोनों सुरक्षित है। राज्यमंत्री अहिरवार ने वन्यजीवों पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और उसका अवलोकन किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री अहिरवार ने वनों और वन्यप्राणियों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा की शपथ भी दिलाई। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 का आयोजन एक अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित किया जायेगा। आज शुभारंभ अवसर पर स्कूली बच्चों के पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।‍जिसमें विभिन्न स्कूलों के सैकड़ो विद्यार्थियों ने भाग लिया। वन्यजीव सप्ताह में प्रतिदिन विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की जायेगी। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक व्ही एन अंबाडे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) एच. यू. खान, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) यू.के. सुबुद्धि, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (समन्वय) सुदीप सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट) मोहनलाल मीना, संचालक वन विहार और विभिन्न स्कूलों के शिक्षक – विद्यार्थी उपस्थित रहे।   recent visitors 50

जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में मनाया जाएगा ’जनजातीय गौरव दिवस’ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए  जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया  : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय परम्परा रही है जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में ’जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की। विधायक भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। recent visitors 77

जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया, जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता : साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में जनजातीय गौरव दिवस मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में झ्जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदानझ् विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने की। विधायक श्री भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। श्री कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढि?ों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख श्री वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष श्री उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। recent visitors 67