Kolkata Doctor Murder Case: कोलकाता हादसे के बाद पूरे देश में Doctors ने किया हड़ताल का ऐलान

कोलकाता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर से बलात्कार के बाद हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस वारदात के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन 'फेडरेशन ऑफ आल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन' ने 12 अगस्त से पूरे देश में हड़ताल का ऐलान किया है. उन्होंने सभी सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन से इस हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया है. इस दौरान ओपीडी, इलेक्टिव सर्जरी और लैब में कामकाज बंद रखने की बात कही गई है. आरडीए ने भी अपनी तरफ से डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने का नोटिस दे दिया है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर भी पीड़िता के लिए इंसाफ की मांग करते हुए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अस्पताल में कामकाज बंद है. जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस ने केवल एक आरोपी को पकड़ा है, जबकि इस जघन्य कांड में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं. उनका दावा है कि आरोपी संजय रॉय की गिरफ्तारी के पीछे किसी बड़ी बात को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की जा रही है. अभी तक घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज को भी देखने नहीं दिया गया है. जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अस्पताल में काम बंद रखेंगे. मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट को पद से हटाया इस खौफनाक कांड के बाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट डॉक्टर संजय वशिष्ठ को स्वास्थ्य विभाग ने हटाने का आदेश दिया है. वो लंबे समय से वहां के प्रभारी थे. उनकी जगह अस्पताल की डीन बुलबुल मुखोपाध्याय को जिम्मेदारी सौंपी गई है. शुक्रवार को लेडी डॉक्टर का शव बरामद होने के बाद से ही सुपरिटेंडेंट को हटाने की मांग हो रही थी. लेकिन 48 घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनको हटाने का आदेश जारी किया. 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया आरोपी कोलकाता पुलिस ने शनिवार को एक आरोपी संजय रॉय को गिरफ्तार कर लिया. उसे अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. आरोपी अब 23 अगस्त तक पुलिस की कस्टडी में रहेगा, जहां उससे इस केस के बारे में पूछताछ की जाएगी. आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 64 (बलात्कार) और 103 (हत्या) के तहत केस दर्ज किया गया है. एक ब्लूटूथ ईयरबड के जरिए पुलिस उस तक पहुंच पाई. गिरफ्तार आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग आरोपी की गिरफ्तारी के बाद वेस्ट बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौत की सजा की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि पीड़िता का परिवार सीबीआई जांच की मांग करता है, तो वो उसका समर्थन करेंगी. उनको इससे कोई आपत्ति नहीं हैं. उन्होंने कहा, "यदि उन्हें वेस्ट बंगाल सरकार पर भरोसा नहीं है, तो वे किसी भी जांच एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं. हमें कोई आपत्ति नहीं है. केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने के निर्देश दिए गए हैं.'' राज्यपाल ने तत्काल कार्रवाई का दिया आदेश वेस्ट बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है. उन्होंने इस मामले को भारत सरकार के सामने उठाने की बात भी कही है. लेडी डॉक्टर का शव शुक्रवार को उत्तरी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में मिला था. प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संकेत मिला है कि लेडी डॉक्टर की बेरहमी से हत्या से पहले उसका यौन शोषण किया गया था. आरोपी को अधिकतम सजा सुनिश्चित करेगी पुलिस कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल के अनुसार, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और नाइट ड्यूटी के दौरान मौजूद डॉक्टरों की गवाही के आधार पर आरोपी पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया गया है. उन्होंने कहा, "यह एक जघन्य अपराध है. गिरफ्तार व्यक्ति परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर इसमें शामिल है, जिसमें रात्रि ड्यूटी के दौरान मौजूद अन्य डॉक्टरों के बयान भी शामिल हैं. पुलिस सुनिश्चित करेगी कि आरोपी को अधिकतम सजा मिले.'' IMA का अल्टीमेटम, देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी वेस्ट बंगाल के कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए एक लेडी डॉक्टर से दरिंदगी के मामले में चल रहे विरोध की आग दिल्ली पहुंच गई है. इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकाला. इसके साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने जांच पूरी करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. इसके साथ ही देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है. इस क्रूर हत्या से स्तब्ध है पूरा चिकित्सा समुदाय आईएमए ने कहा, "हम मांग करते हैं कि पुलिस अधिकारी 48 घंटे के भीतर और सटीकता से कार्रवाई करें, अन्यथा हमको देशव्यापी कार्रवाई शुरू करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. एक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील जांच की जरूरत है. दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया जाता है. इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा. भारत का पूरा चिकित्सा समुदाय इस क्रूर हत्या से स्तब्ध है.''   recent visitors 86

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन

 टोरंटो पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए हजारों कनाडाई लोगों ने रविवार को डाउनटाउन टोरंटो में विरोध प्रदर्शन किया। हिंदू, ईसाई, बौद्ध और यहूदी मूल के कनाडाई लोग डाउनटाउन टोरंटो में एकत्र हुए। डाउनटाउन टोरंटो में आयोजित विरोध प्रदर्शन में लोग नारे लगाते देखे गए, "हमें न्याय चाहिए – बांग्लादेश बांग्लादेश।'' प्रदर्शनकारियों ने कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार से बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए ढाका सरकार पर दबाव डालने का आग्रह किया। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में से एक ने अफसोस जताया कि उन्होंने टोरंटो में बांग्लादेशी मस्जिदों को भी ईमेल भेजे, लेकिन उन्होंने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा, "हमने टोरंटो में बांग्लादेशी मस्जिदों को भी ईमेल भेजे हैं। अभी तक, हमें उनसे कोई जवाब नहीं मिला है, शायद वे वीकेंड के कारण व्यस्त हों।" उन्होंने आगे कहा, "बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह उनके ही भाइयों के साथ हो रहा है।'' बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को हिला दिया है। हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना, धार्मिक स्थलों पर हमले, और शारीरिक हिंसा शामिल है। इस हिंसा का विरोध करते हुए, ब्रिटेन (Britain) और अमेरिका (USA) में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। लंदन में, प्रदर्शनकारियों ने हाउस ऑफ पार्लियामेंट के सामने जमा होकर, "सेव हिंदुस", 'हिंदू लाइफ मैटर्स' और "न्याय दो" जैसे स्लोगन लिखे हुए प्लेकार्ड लहराए। उन्होंने बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की। अमेरिका में भी, व्हाइट हाउस के सामने लोगों ने प्रदर्शन किया। वहां के प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की और अमेरिकी सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की अपील की। इन प्रदर्शनों में विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोगों ने भाग लिया, जो एकजुटता और मानवाधिकार की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठा रहे थे। इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता है। प्रदर्शनकारी ने आगे कहा कि समुदाय अभूतपूर्व संख्या में इकट्ठा हुआ है, जो एक अच्छा संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि हमें खुशी होगी अगर वे भी एकजुटता से खड़े हों। समुदाय अभूतपूर्व संख्या में यहां है जो एक अच्छा संकेत है। जो निराशाजनक है वह कनाडाई राजनीति की भागीदारी है। ईमेल, ट्वीट और कॉल के बाद भी वे हमारी बात नहीं सुन रहे हैं। इसके अलावा, समुदाय के नेताओं ने हिंदुओं पर हमलों पर अपनी चिंता व्यक्त की। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक्स पर एक संदेश में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और संरक्षण का आह्वान किया। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को उनकी नई जिम्मेदारियों को संभालने पर मेरी शुभकामनाएं। हम हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करते हुए जल्द ही सामान्य स्थिति में लौटने की उम्मीद करते हैं। भारत शांति, सुरक्षा और विकास के लिए हमारे दोनों लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बांग्लादेश के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। recent visitors 96

बांग्लादेश में फैली अशांति के कारण अल कायदा खुश, भारत के लिए कैसे बढ़ेगी टेंशन?

ढाका  बांग्लादेश में अस्थिरता देखी जा रही है। शेख हसीना के जाते ही कट्टरपंथी और आतंकी संगठन एक्टिव हो गए हैं। बांग्लादेश में शेख हसीना कट्टरपंथियों और भारत विरोधी ताकतों पर लगाम लगाकर रखती थीं। लेकिन उनके इस्तीफे के बाद आतंकी संगठन अल-कायदा ने बयान दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक अल कायदा दक्षिण एशियाई ब्रांच (AQIS) के चीफ ओसामा महमूद ने 12 पन्नों का संदेश दिया है। इसमें शेख हसीना सरकार गिरने की सराहना की गई। इसके अलावा धार्मिक कार्यकर्ताओं से देश में 'इस्लामिक शासन' स्थापित करने के प्रयासों में तेजी लाते हुए नई सरकार से बचने का आग्रह किया गया है। अल कायदा के इस संदेश से साफ है कि बाहरी ताकतें पूरी तरह से बांग्लादेश पर कंट्रोल करने में लगी हैं। आतंकी संगठनों के लिए यह सबसे अच्छा मौका है। बांग्लादेश में पहले से ही कई संगठन हैं जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अल कायदा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अल कायदा की ओर से इस्लामिक शासन को लाने की बात कहना भारत के लिए टेंशन वाली बात है। बांग्लादेश में खालिदा जिया की बीएनपी सत्ता में आ सकती है। जिया के शासन में बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतें देखी गई थी। शेख हसीना भाग कर भारत आई हैं और बीएनपी ने दिखाया है कि वह इससे नाखुश है। बांग्लादेश से जुड़े पोस्ट पर असम में गिरफ्तारी बांग्लादेश में अशांति का समर्थन करने वाले असम का रिजुवान उल्ला मजरभुइया को एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण गिरफ्तार किया गया है। इसके अल-कायदा के संबंधओं की जांच चल रही है। असम की पुलिस ने आरोपी को हलियाकांडी जिले के रंगपुर में उसके घर से गिरफ्तार किया। उसने कथित तौर पर बंगाली में किए अपने पोस्ट में अशांति फैलाने की भविष्यवाणी की थी। रिजुवान का दावा है कि बांग्लादेश का प्रभाव जल्द ही असम में देखा जाएगा। उसके इस पोस्ट ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। 'सभी देशों से संतुलन चाहता है बांग्लादेश' बांग्लादेश की नवगठित अंतरिम सरकार ने शुक्रवार को ‘बड़े देशों’ के साथ ढाका के संबंधों में ‘संतुलन’ बनाये रखने से जुड़ा बयान दिया। विदेश मामलों के सलाहकार एवं पूर्व विदेश सचिव मोहम्मद तौहीद हुसैन ने संवाददाताओं से कहा कि कानून एवं व्यवस्था बहाल करना इस समय अंतरिम सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है तथा पहला लक्ष्य हासिल करने के बाद अन्य कार्य भी हो जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश को सभी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने की जरूरत है। recent visitors 73

CM ने सैनेटरी पैड के लिए छात्राओं के खातों में ट्रांसफर किये 57 करोड़, इस योजना को शुरू करने वाला MP देश का पहला राज्य

भोपाल आज रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 लाख से अधिक छात्राओं के खातों में सैनिटरी पैड के लिए 57 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए. इसके साथ ही मध्य प्रदेश अब पहला राज्य बन गया है, जहां छात्राओं के खातों में सैनिटरी पैड के लिए पैसे ट्रांसफर किए गए हैं. भोपाल के रवीन्द्र भवन में छात्रओं को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा, हमारी 1 बेटी 10 पुत्रों के बराबर है। उनके सशक्तिकरण के लिए हम अनेक योजनाएं चला रह हैं। लोकसभा-विधानसभा में भी 33% आरक्षण देने जा रहे हैं। ताकि, बेटियां सांसद, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री बनें। सीएम ने कहा, 9 करोड़ आबादी वाले प्रदेश में साढ़े 4 करोड़ बहनें हैं। इनमें 1.39 करोड़ लाड़ली बहनें हैं। महिलाओं और छात्राओं ने इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव को राखी बांधकर सुरक्षा का संकल्प लिया। सीएम ने उन्हें मिठाई खिलाई और उपहार दिए।   मेधावी छात्राएं सम्मानित मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस दौरान मेरिट लिस्ट में शामिल छात्राओं, एनसीसी, NSS, खेल प्रतियोगिताओं में देश दुनिया में नाम रोशन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भी उनका मनोबल बढ़ाया। 19 लाख से अधिक छात्रों के खाते में भेजे 300-330 रुपए मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक में 7वीं और 9वीं क्लास के 19 लाख से अधिक छात्राओं के खाते में 300-300 रुपए ट्रांसफर किए. आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन 19 तारीख को है, लेकिन हमने अभियान चलाया है 1 करोड़ 39 लाख तो लाड़ली बहन है, 9 करोड़ के प्रदेश में 4.50 करोड़ तो बहनें हैं. मध्य प्रदेश सीएम ने मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया मुख्यमंत्री ने मेरिट लिस्ट में आने वाली छात्राओं, एनसीसी, NSS, खेल प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया. कार्यक्रम को स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भी संबोधित किया. सीएम के भाषण के मुख्य बिंदु     12 महीनों में सावन का पर्व खास माना जाता है। न हमारे राज्य में ज्यादा तूफान आता है न सूखा पड़ता है।     देश का दिल मध्यप्रदेश इन सबसे आबाद है। इसमे बेटियों का बड़ा योगदान है। रक्षाबंधन पर आपको सम्मनित किया गया हौ।     रानी दुर्गावती को पाठ्यक्रम में लाने वाले हैं। दुर्गावती ने 51 लड़ाई लड़ी सब जीतीं। झांसी की रानी के अलावा मध्यप्रदेश की दो वीरांगना रानियां रहीं। अकबर की सेना को 3-3 बार दुर्गावती ने धूल चटाई। मांडव में बाज बहादुर का बड़ा नाम था। बाज बहादुर की कब्र रानी दुर्गावती ने खोदने का काम किया। 51वां युद्ध जब रानी लड़ रही थीं।     ये समझने की बात है कि तकनीक को समय के हिसाब से धारण करना चाहिए। उस दौर में आखिरी युद्ध मे जब तोप के आक्रमण हुए उन्हें लगा कि मैं युद्ध नहीं जीत पाऊंगी तो एक तीर से आंख निकल गई फिर भी बहादुरी से युद्ध लड़ी और सैनिक से कहा मैं दुश्मन के हाथ नहीं आऊंगी मेरी गर्दन काट दे। सैनिक के हाथ कांपने लगे तो कतार से खुद की जीवन लीला समाप्त कर ली।     अहिल्या बाई की वीरता और सामाजिक कार्यों की गाथाएं सब जानते हैं। आज भी बनारस में गंगा जी के सामने विश्वनाथ मंदिर में रामेश्वरम से समुद्र जल चढ़वाने की व्यवस्था अहिल्याबाई के शासन में होती थी।     दुर्भाग्य से हमारे पाठ्यक्रम में पढ़ाई केवल सिलेबस तक सीमित रखते हैं सीता गीता केवल नाम रखने के लिए नहीं उनके जीवन को धारण करने की जरूरत है। PS सुखवीर सिंह बोले-     उच्च शिक्षा विभाग के पीएस सुखवीर सिंह ने छात्राओं में उड़ान भरने की शक्ति कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा, मुख्यमंत्री व्यवहारिक व्यक्ति हैं। उनकी सोच है कि शिक्षा के साथ बच्चों में कौशल विकास हो। सीएम राइज स्कूल की तर्ज पर हर जिले में एक्सीलेंस कॉलेंज शुरू किए हैं। जो गुणवत्ता का केंद्र बनेंगे।     पीएस ने कहा, मुख्यमंत्री जब उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब MP उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बना। ग्रॉस एनरोलमेंट रेट में हम 50 पॉइंट आगे हैं। समीपवर्ती राज्यों में महाराष्ट्र ही है, जो हमसे थोड़ा आगे है। शेष राज्य पीछे हैं। छात्राओं में उड़ान भरने की शक्ति कार्यक्रम की शुरुआत में उच्च शिक्षा विभाग के पीएस सुखवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री व्यवहारिक व्यक्ति हैं। उनकी हमेशा यह सोच रहती है कि बच्चों का शिक्षा के साथ कौशल विकास हो। छात्राओं में उड़ान भरने की शक्ति होती है। स्कूल शिक्षा में सीएम राइज स्कूल खुल रहे हैं। उसी तरह हर जिले में पीएम कॉलेंजे ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की है। ये गुणवत्ता का केंद्र बनेंगे। उन्होंने कहा कि जब सीएम उच्च शिक्षा मंत्री थे तब एमपी अग्रणी राज्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दर्ज हुआ था। ग्रॉस एनरोलमेंट रेट से हम 50 पॉइंट आगे हैं। एमपी के समीपवर्ती राज्यों में GER से आगे हैं अकेला महाराष्ट्र थोड़ा सा आगे है। सीएम ने मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया मेरिट लिस्ट में आने वाली छात्राओं, एनसीसी, NSS, खेल प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाली छात्राओं को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। कार्यक्रम को स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भी संबोधित किया। recent visitors 74

गुना में एविएशन एकेडमी का टू सीटर प्लेन क्रैश, टेस्ट फ्लाइट के लिए भरी थी उड़ान , दोनों पायलट घायल; इंजन फेल होने की आशंका

गुना  गुना में रविवार को एक टू-सीटर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह विमान कर्नाटक के बेलगावी एविएशन ट्रेनिंग इंटीट्यूट का बताया जा रहा है, जिसे मेंटेनेंस के लिए शा-शिब अकादमी में लाया गया था। इसे दो पायलट परीक्षण उड़ान के लिए लेकर निकले थे। करीब 40 मिनट तक हवा में रहने के बाद अचानक विमान का संतुलन बिगड़ गया और यह लहराते हुए जमीन पर आ गिरा। आशंका जताई जा रही है कि विमान का इंजन फेल होने की वजह से हादसा हुआ। इस दुर्घटना में दोनों पायलटों के घायल होने की खबर है। सूचना मिलने पर कैंट पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। फ्लाइंग अकादमी का स्टाफ भी घटनास्थल पर मौजूद है। जानकारी के अनुसार कर्नाटक के बेलगावी एविएशन ट्रेनिंग इंटीट्यूट के एयरक्राफ्ट 152 ने रविवार दोपहर करीब एक बजे टेस्टिंग के लिए उड़ान भरी थी। कैप्टन वी चंद्र ठाकुर और पायलट नागेश कुमार करीब 40 मिनट तक एयरक्राफ्ट को उड़ाते रहे, लेकिन फिर वह एयर स्ट्रिप पर क्रैश हो गया। हादसे में दोनों पायलट घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विज्ञापन बताया जा रहा है कि बेलगावी एविएशन ट्रेनिंग इंटीट्यूट के एयरक्राफ्ट 152 को टेस्टिंग और मेंटेनेंस के लिए गुना की शा-शिब एकेडमी में लाया गया था। इसकी टेस्टिंग के लिए पायलट वी चंद्र ठाकुर और नागेश कुमार को हैदराबाद से बुलाया गया था। दोनों बीते दिन 10 अगस्त को गुना पहुंचे थे। आज रविवार को टेस्टिंग के लिए एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी, लेकिन 40 मिनट बाद वह क्रैश हो गया।   टेस्टिंग और मेंटेनेंस के लिए लाया गया था दुर्घटनाग्रस्त एयरक्राफ्ट कर्नाटक के बेलगावी एविएशन ट्रेनिंग इंटीट्यूट का है। दोनों पायलट हैदराबाद के रहने वाले हैं। ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ने दोनों पायलट हायर किए थे। एयरक्राफ्ट टेस्टिंग और मेंटेनेंस के लिए गुना की शा-शिब एकेडमी में लाया गया था। पायलट 10 अगस्त को गुना आए थे। कैंट थाने के टीआई दिलीप राजोरिया ने बताया कि एक पायलट पूरी तरह ठीक है। दूसरे को सिर में चोट लगी है। उसे निजी अस्पताल में शिफ्ट किया है। सिर में टांके भी लगाए जा सकते हैं।   recent visitors 103

बांग्लादेश में सेना के काफिले पर नाराज भीड़ ने किया हमला, 15 घायल

ढाका सरकार, आवाम, अधिकारी, जज और अब सेना. बांग्लादेश में कोई भी सुरक्षित नहीं है. कई दिनों से जारी हिंसा अब बेकाबू हो गई है. इसी बीच सेना के जवानों पर भी हमले की खबर है. सेना की गाड़ी पर ये हमला गोपालगंज इलाके में हुआ. ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में सेना के जवानों, पत्रकारों और स्थानीय लोगों सहित 15 लोग घायल हो गए हैं. घायलों में दो को गोली लगी है. यह घटना शनिवार शाम करीब 4 बजे तब हुई जब अवामी लीग के हजारों कार्यकर्ता शेख हसीना की वापसी की मांग करते हुए सड़क पर थे. जवानों ने प्रदर्शन से रोका तो कर दिया हमला रिपोर्ट के अनुसार, हजारों की संख्या में अवामी लीग के नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की देश में वापसी की मांग कर रहे थे. उन्होंने ढाका-खुलना राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया था. इसी बीच सेना की गाड़ी वहां पहुंची और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सड़क को खोलने और प्रदर्शन को खत्म करने की अपील की. लेकिन भीड़ ने उन पर ईंटें फेंकना शुरू कर दिया. बाद में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सेना के जवानों ने लाठियां भांजी. इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने सेना के वाहन में तोड़फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया.गोपालगंज कैंप के लेफ्टिनेंट कर्नल मकसुदुर रहमान ने घटना की पुष्टि की और कहा कि करीब 3,000 से 4,000 लोगों ने इकट्ठा होकर सड़क जाम कर दी है. हमले में सेना के कई जवान घायल हुए हैं.गोपीनाथपुर संघ के पूर्व अध्यक्ष लच्छू शरीफ ने कहा कि सेना के सदस्यों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गोलीबारी की. एक बच्चे सहित दो लोगों को गोली मार दी गई. घटना में किसी की मौत नहीं हुई. भारत-बांग्लादेश सीमा पर अलर्ट पड़ोसी देश बांग्लादेश में अशांति के मद्देनजर असम पुलिस भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट पर है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से राज्य में प्रवेश न कर सके. पुलिस महानिदेशक जी.पी. सिंह ने कहा कि केंद्र ने निर्देश जारी किया है कि किसी भी व्यक्ति को बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. हिंदुओं पर हो रहे हमले बांग्लादेश में हिंदुओं को भी निशाना बनाया जा रहा है. कई मंदिरों को आग लगा दी गई है. इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने शनिवार को हिंसा प्रभावित अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की निंदा की. उन्होंने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को जघन्य बताया और सभी युवाओं से हिंदू, ईसाई, बौद्ध परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया. बांग्लादेश के दो हिंदू संगठनों- बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद और बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद के अनुसार, 5 अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को 53 जिलों में हमलों की कम-से-कम 205 घटनाओं का सामना करना पड़ा.   recent visitors 116

म्यांमार से भाग रहे रोहिंग्याओं पर ड्रोन हमला, 200 से अधिक लोगों की मौत

बैंकॉकः म्यांमार से एक बार फिर रोहिंग्याओं को लेकर एक दर्दनाक खबर सामने आई है. देश छोड़कर बांग्लादेश भाग रहे रोहिंग्याओं पर ड्रोन के जरिए हमला किया गया है. इसमें 200 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है. इसमें महिलाएं, बच्चे और पूरा-पूरा परिवार शामिल है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चश्मदीदों ने बताया कि लोग अपनों की तलाश के लिए लाशों के ढेर को उलटते-पलटते दिखे. गवाहों, कार्यकर्ताओं और एक राजनयिक ने सोमवार को हुए इस ड्रोन हमले का जिक्र करते हुए बताया कि ये लोग हमला पड़ोसी देश बांग्लादेश से लगते बॉर्डर पर हुआ. अधिकारियों ने इसे रखाइन प्रांत में हुआ सबसे खतरनाक हमला करार देते हुए बताया कि इसमें एक गर्भवती महिला और उसकी 2 साल की बेटी की भी मौत हो गई. इस हमले के लिए मिलिशिया और म्यांमार की सेना ने एक-दूसरे पर आरोप लगाया. आरोप है कि ये हमला तब हुआ जब बांग्लादेश की सीमा पर लोग उस पार जाने का इंतजार कर रहे थे. कीचड़ में सने दिख रहे हैं शव रिपोर्ट के अनुसार,सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में कीचड़ भरी जमीन पर शवों के ढेर बिखरे हुए दिख रहे हैं और उनके आसपास पड़े हुए उनके सूटकेस और बैकपैक दिखाई दे रहे हैं. जीवित बचे तीन लोगों ने कहा कि 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि एक अन्य शख्स ने कहा कि 70 से अधिक लोगों की मौत हुई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला म्यांमार के तटीय शहर माउंगडॉ के ठीक बाहर हुआ. एक गवाह, 35 वर्षीय मोहम्मद इलियास ने कहा कि उनकी गर्भवती पत्नी और 2 वर्षीय बेटी हमले में घायल हो गईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई. इलियास ने बताया कि जब ड्रोन ने भीड़ पर हमला करना शुरू किया तो वह उनके साथ समुद्र तट पर खड़ा था. कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम दरअसल, रोहिंग्या मुसलमान और म्यांमार के बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय के बीच विवाद 1948 में म्यांमार के आजाद होने के बाद से ही चला आ रहा है. बताया जाता है कि रखाइन राज्य में जिसे अराकान के नाम से भी जाता है, 16वीं शताब्दी से ही मुसलमान रहते हैं. ये वो दौर था जब म्यांमार में ब्रिटिश शासन था. 1826 में जब पहला एंग्लो-बर्मा युद्ध खत्म हुआ तो उसके बाद अराकान पर ब्रिटिश राज कायम हो गया. इस दौरान ब्रिटिश शासकों ने बांग्लादेश से मजदूरों को अराकान लाना शुरू किया. इस तरह म्यांमार के राखिन में पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से आने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई.बांग्लादेश से जाकर रखाइन में बसे ये वही लोग थे जिन्हें आज रोहिंग्या मुसलमानों के तौर पर जाना जाता है. रोहिंग्या की संख्या बढ़ती देख म्यांमार के जनरल ने विन की सरकार ने 1982 में बर्मा का राष्ट्रीय कानून लागू कर दिया. इस कानून के तहत रोहंग्या मुसलमानों की नागरिकता खत्म कर दी गई. तब से ये रोहिंग्या मुस्लिम कई देशों में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं.   recent visitors 91