अदाणी के बाद अब कौन, किस पर गिरने वाली है बिजली? हिंडनबर्ग का दावा- भारत को लेकर जल्द बड़ा खुलासा करेंगे

नई दिल्ली हिंडनबर्ग रिसर्च याद है? अमेरिका की इस शॉर्ट सेलिंग कंपनी ने पिछले साल गौतम अडानी पर ऐसा बम फोड़ा था कि अडानी ग्रुप आज तक उससे उबर नहीं पाया है। हिंडनबर्ग रिसर्च भारत में एक और बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। कंपनी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में जल्दी ही कुछ बड़ा होने वाला है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने पिछले साल 24 जनवरी को अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज की शेयर बिक्री से ठीक पहले एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें अडानी ग्रुप पर शेयरों की कीमत में हेरफेर समेत कई तरह के आरोप लगाए गए थे। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों का खंडन किया था लेकिन इस रिपोर्ट के कारण ग्रुप के मार्केट कैप में $150 अरब तक गिर गया था। इससे गौतम अडानी की नेटवर्थ में भी भारी गिरावट आई थी और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में काफी नीचे खिसक गए थे। हालांकि हाल के महीनों में अडानी ग्रुप के शेयरों ने काफी हद तक अपने नुकसान की भरपाई कर ली है। Hindenburg Research ने अब तक कई कंपनियों में घालमेल का पर्दाफाश करने का दावा किया है। इस कंपनी की स्थापना 2017 में नाथन एंडरसन ने की थी। दरअसल यह एक फोरेंसिक फाइनेंशियल रिसर्च फर्म है जो इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव्स को एनालाइज करती है। इस कंपनी का नाम छह मई, 1937 में हुए हाई प्रोफाइल हिंडनबर्ग एयरशिप हादसे के नाम पर रखा गया है। यह दुर्घटना अमेरिका में न्यू जर्सी के मैनचेस्टर टाउनशिप में हुई थी। हिंडनबर्ग रिसर्च किसी भी कंपनी में हो रही गड़बड़ी का पता लगाती है और फिर उसके बारे में रिपोर्ट पब्लिश करती है। कंपनी का दावा है कि उसकी नजर मैन-मेड डिजास्टर्स पर रहती है। इनमें अकाउंटिंग में गड़बड़ी, मिसमैनेजमेंट और छिपाकर किए गए लेनदेन शामिल हैं। कंपनी फिर प्रॉफिट कमाने के लिए टारगेट कंपनी के खिलाफ बेट लगाती है। कई कंपनियों का भंडाफोड़ एंडरसन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टीकट से इंटरनेशनल बिजनस में डिग्री लेने के बाद एक डेटा कंपनी FactSet Research Systems Inc में काम किया। वहां उनका काम इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों से जुड़ा हुआ था। साल 2020 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'मुझे महसूस हुआ कि कामचलाऊ एनालिसिस हो रहा है।' एंडरसन इजरायल में एंबुलेंस ड्राइवर का काम भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि उन्हें भारी दबाव में काम करने में मजा आता है। वह हैरी मार्कपोलोस को अपना रोल मॉडल मानते हैं। मार्कपोलोस एक एनालिस्ट हैं जिन्होंने बर्नी मेडॉफ की फ्रॉड स्कीम का पर्दाफाश किया था। हिंडनबर्ग का दावा है कि 2017 से अब तक कम से कम 36 कंपनियों में गड़बड़ी का भंडाफोड़ कर चुकी है। अडानी पर बेट से कितने कमाए हिंडनबर्ग रिसर्च का कहना है कि अडानी सिक्योरिटीज की शॉर्टिंग से उसे अपने क्लाइंट के जरिए 4.1 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू मिला। लेकिन यह रकम रिसर्च में लगी उसकी राशि के बराबर भी नहीं है। कंपनी ने कहा कि हमने इनवेस्टर रिलेशनशिप के जरिए अडानी शॉर्ट्स से 4.1 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू अर्जित किया साथ ही कंपनी ने अडानी के अमेरिकी बांड को शॉर्ट करके भी 31,000 डॉलर कमाए। कंपनी का कहना है कि यह बहुत छोटी पोजीशन थी। लीगल और रिसर्च खर्चों को छोड़कर हम अडानी शॉर्ट पर भी ब्रेक-ईवन से आगे निकल सकते हैं। हिंडनबर्ग ने इस मामले में कोटक बैंक को भी लपेटा था। उसने कहा था कि बैंक ने एक विदेश फंड स्ट्रक्चर बनाया जिसे उसके इनवेस्टर पार्टनर ने अडानी ग्रुप के खिलाफ बेट के लिए इस्तेमाल किया। सेबी ने हिंडनबर्ग को जारी किया था नोटिस इस साल जून में हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक बार फिर चर्चा में आया था, जब उसने खुलासा किया कि पूंजी बाजार नियामक सेबी ने उनके खिलाफ भारतीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक नोटिस जारी किया था. यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि हिंडनबर्ग रिसर्च ने पहली बार अपनी रिपोर्ट में कोटक बैंक की स्पष्ट रूप से पहचान की. नतीजतन, इस खुलासे के कारण कोटक बैंक के शेयर मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट आई, जो शुरुआती कारोबारी सत्र में जून के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. हिंडेनबर्ग ने कहा कि भारतीय बाजार नियामक की ओर से 27 जून, 2024 को जारी किया गया नोटिस 'बकवास' है. इसे एक पूर्व-निर्धारित उद्देश्य को पूरा करने के लिए तैयार किया गया था. उसने कहा कि भारत में सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को उजागर करने वालों को चुप कराने और डराने का प्रयास है. सेबी के नोटिस में हुआ था बड़ा खुलासा सेबी के नोटिस में खुलासा हुआ कि किंगडन कैपिटल ने कोटक महिंद्रा इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (केएमआईएल) में महत्वपूर्ण निवेश किया है. यह पता चला कि किंगडन कैपिटल ने हाल ही में आई एक रिपोर्ट से बाजार में आई अस्थिरता का फायदा उठाया. फर्म ने रिपोर्ट सामने आने से पहले अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) में शॉर्ट पोजीशन स्थापित करने के लिए $43 मिलियन आवंटित करके एक रणनीतिक कदम उठाया. इसके बाद, किंगडन कैपिटल ने इन पोजीशन को सफलतापूर्वक बंद कर दिया, जिससे $22.25 मिलियन का लाभ हुआ.   recent visitors 83

सभी ग्राम पंचायत और निकायों में होगा उपहार कार्यक्रम, मुख्यमंत्री आज लाड़ली बहनों के खाते में करेंगे राशि अंतरित

भोपाल प्रदेश की लाड़ली बहनें रक्षाबंधन के पहले दोगुनी खुशियाँ मनाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे। साथ ही रक्षाबंधन के उपहार स्वरूप लाभार्थी महिलाओं के खातों में 250 रूपये की उपहार (नेग) राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्योपुर जिले के विजयपुर और टीकमगढ़ में 10 अगस्त को आयोजित रक्षाबंधन पूर्व लाड़ली बहना हितग्राहियों के लिए आभार सह उपहार कार्यक्रम में यह राशि अंतरित करेंगे। साथ ही लाभार्थी महिलाओं को आभार-पत्र और उपहार देगें और राखी बंधवाएगें। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत 10 अगस्त को प्रदेश की सभी 23 हजार 11 ग्राम पंचायतों एवं 416 नगरीय निकायों (नगर निमग, नगर पालिका एवं नगर पंचायत) में भी वृहृद स्तर पर आभार सह उपहार कार्यक्रम होंगे। राज्य सरकार के मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में होने वाले आभार सह-उपहार कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में होने वाले कार्यक्रम की थीम "रक्षाबंधन और सावन उत्सव" पर केन्द्रित है। इसके अतिरिक्त "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान में पौध-रोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होगें। इसमें सहभागियों को शासकीय हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी भी साझा करेंगे।   recent visitors 96

EPFO ने दी खुशखबरी- पीएफ से पैसा निकालना हुआ आसान, 3 दिन में खाते में आ जाएंगे 1 लाख रुपये

नई दिल्ली ईपीएफओ ने हाल ही में कई नियमों में बदलाव किए हैं, ताकि सब्सक्राइबर्स को किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। संगठन ने चिकित्सा, शिक्षा, विवाह और कंस्ट्रक्शन के एडवांस क्लेम के लिए ऑटो-मोड सेटलमेंट की सुविधा शुरू की है। इसका फायदा 6 करोड़ से अधिक कर्मचारी उठा सकते हैं। ईपीएफ क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया हुई तेज यह सुविधा कर्मचारियों को आपातकाल में आर्थिक मदद पहुंचाती है। पहले ईपीएफओ की इस सुविधा को क्लेम करने के लिए 15 से 20 दिन का वक्त लगता था, लेकिन अब ये काम तीन से चार दिन के अंदर हो जाता है। ऑटोमेटेड सिस्टम से क्लेम प्रोसेस काफी आसानी हो गई है। इमरजेंसी में फंड के क्लेम सेटलमेंट के लिए ऑटो मोड की शुरुआत 2020 में हुई थी, लेकिन तब बीमारी के लिए पैसा निकाल सकते थे। अब एजुकेशन, शादी और खरीदने के लिए भी पीएफ से पैसा निकाल सकते हैं। एडवांस लिमिट 50 हजार से बढ़कर एक लाख रुपये ईपीएफ खाते से एडवांस में एक लाख रुपये तक निकासी कर सकते हैं। पहले यह लिमिट पचास हजार रुपये थी। ऑटो सेटलमेंट मोड के जरिए एडवांस फंड निकालने का काम कर सकते हैं। तीन दिन के अंदर पैसा खाते में जमा हो जाता है। इसके लिए केवीईसी, क्लेम रिक्वेस्ट और बैंक खाते की जानकारी देनी पड़ती है। पीएफ खाते से पैसा निकालने की प्रक्रिया स्टेप 1- यूएएन और पासवर्ड का उपयोग करके ईपीएफओ पोर्टल पर लॉगइन करें। स्टेप 2- ऑनलाइन सर्विसेज में क्लेम सेक्शन पर जाना होगा। बैंक खाते वेरीफाई कर ऑनलाइन क्लेम पर क्लिक करें। स्टेप 3- नया पेज खुलेगा। उसमें पीएफ एडवांस फॉर्म 31 का चयन करना होगा। फिर पीएफ खाते को सिलेक्ट करना है। स्टेप 4- अब फंड निकालने की वजह, कितना पैसा चाहिए और एड्रेस की जानकारी भरनी होगी। इसके बाद पासबुक की कॉपी स्कैन कर अपलोड करनी होगी। स्टेप 5- इसके बाद आपको आधार से वेरिफाई करना होगा। क्लेम प्रोसेस पूरी होने के बाद ऑनलाइन स्टेटस चेक कर सकते हैं। recent visitors 142

आज 10 अगस्त को HDFC Bank की 2.30 से 5.30 बजे तक होगी डाउन यूपीआई सर्विस

नई दिल्ली  देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। बैंक की यूपीआई सर्विस शनिवार यानी 10 अगस्त को कुछ घंटे के लिए उपलब्ध नहीं रहेगी। बैंक का कहना है कि जरूरी सिस्टम मेंटनेंस की वजह से उसकी यूपीआई सर्विस 10 अगस्त को बंद रहेगी। बैंक ने अपने ग्राहकों को ईमेल के जरिए इसके बारे में जानकारी दी है। बैंक का कहना है कि 10 अगस्त को तड़के 2.30 बजे से सुबह 5.30 बजे यानी तीन घंटे के लिए बंद रहेगी। यह सर्विस बैंक की मोबाइल बैंकिंग ऐप, जीपे, पेटीएम, वॉट्सऐप पे और दूसरे ऐप पर उपलब्ध नहीं रहेगी। बैंक का कहना है यूपीआई डाउनटाइम से उसे अपनी सर्विसेज की एफिशियंसी में सुधार में मदद मिलेगी। बैंक का कहना है कि 10 अगस्त को तीन घंटे के लिए उसके करेंट और सेविंग्स अकाउंट होल्डर्स के लिए फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन सर्विसेज उपलब्ध नहीं होंगी। इस दौरान कस्टमर एचडीएफसी बैंक ऐप और बैंक अकाउंट्स से जुड़े जीपे, वॉट्सऐप पे, पेटीएम, श्रीराम फाइनेंस और मोबिक्विक पर फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन नहीं होगी। बैंक में पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन की लिमिट एक लाख रुपये है। यूपीआई में ग्राहक एक यूनीक आईडी के जरिए पैसे भेज सकते हैं। बैंक का शेयर इस बीच एचडीएफसी बैंक के शेयरों में इस साल 2.24 फीसदी गिरावट आई है जबकि इस दौरान बीएसई सेंसेक्स में 10.26 फीसदी तेजी आई है। बैंक ने हाल में जून तिमाही का रिजल्ट जारी किया था जो बाजार की उम्मीदों के मुताबिक रहा। MOFSL ने बैंक के शेयर को 'Buy' रेटिंग देते हुए इसका टारगेट प्राइस 1,950 रुपये रखा है जबकि Nuvama ने इसका टारगेट प्राइस 1,850 रुपये रखा है। बीएसई पर बैंक का शेयर दोपहर बाद 2.20 बजे 0.84% की तेजी के साथ 1655.90 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। recent visitors 102

मुख्यमंत्री आज लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे

CM डॉ. यादव विजयपुर से लाड़ली बहनों के खाते में करेंगे राशि अंतरित मुख्यमंत्री सावन माह में बहनों के खाते में डालेंगे 1250 और रक्षाबंधन नेग के 250 रूपये मुख्यमंत्री आज लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र के कार्यक्रमों में होंगे शामिल सभी ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों में होगा आभार सह-उपहार कार्यक्रम भोपाल प्रदेश की लाड़ली बहनें रक्षाबंधन के पहले दोगुनी खुशियाँ मनाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 अगस्त को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे। साथ ही रक्षाबंधन के उपहार स्वरूप लाभार्थी महिलाओं के खातों में 250 रूपये की उपहार (नेग) राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्योपुर जिले के विजयपुर और टीकमगढ़ में 10 अगस्त को आयोजित रक्षाबंधन पूर्व लाड़ली बहना हितग्राहियों के लिए आभार सह उपहार कार्यक्रम में यह राशि अंतरित करेंगे। साथ ही लाभार्थी महिलाओं को आभार-पत्र और उपहार देगें और राखी बंधवाएगें। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत 10 अगस्त को प्रदेश की सभी 23 हजार 11 ग्राम पंचायतों एवं 416 नगरीय निकायों (नगर निमग, नगर पालिका एवं नगर पंचायत) में भी वृहृद स्तर पर आभार सह उपहार कार्यक्रम होंगे। राज्य सरकार के मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में होने वाले आभार सह-उपहार कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में होने वाले कार्यक्रम की थीम "रक्षाबंधन और सावन उत्सव" पर केन्द्रित है। इसके अतिरिक्त "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान में पौध-रोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होगें। इसमें सहभागियों को शासकीय हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी भी साझा करेंगे।   recent visitors 82

Waqf Amendment Bill को लेकर JPC का गठन, ओवैसी समेत इन 31 सांसदों को जगह

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम बिल 2024 के लिए आज जेपीसी के सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कुल 31 सदस्यों के नाम का ऐलान किया।  लोकसभा में बहस के बाद बिल को जेपीसी को भेजने का फैसला किया गया था। लोकसभा के 21 सदस्यों के अलावा राज्यसभा के भी 10 सदस्यों के नाम जेपीसी में शामिल किए गए हैं। सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को विधेयक पेश किया। विपक्षी दलों ने संक्षिप्त चर्चा के दौरान विधेयक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने वक्फ कानून में प्रस्तावित बदलावों को 'असंवैधानिक', 'अल्पसंख्यक विरोधी' और 'विभाजनकारी' बताया। विधेयक का उद्देश्य 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करना है। इसमें वक्फ संस्थानों के प्रशासन और संपत्तियों की देखभाल के नियमों में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव किया गया है। आइए जानते हैं कि अभी वक्फ कानून में क्या है? विधेयक में क्या संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं और ये परिवर्तन महत्वपूर्ण क्यों हैं? वक्फ प्रॉपर्टी क्या होती है? वक्फ मुसलमानों द्वारा धार्मिक, धर्मार्थ या निजी उद्देश्यों के लिए दी गई व्यक्तिगत संपत्ति होती है। संपत्ति के लाभार्थी भिन्न हो सकते हैं, लेकिन संपत्ति का स्वामित्व अल्लाह के पास माना जाता है। वक्फ एक डीड या डॉक्युमेंट के जरिए या मौखिक रूप से बनाया जा सकता है। साथ ही, किसी संपत्ति को तब भी वक्फ माना जा सकता है यदि इसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। एक बार जब किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाता है तो उसका स्वरूप हमेशा के लिए बदल जाता है और उसे उलटा नहीं जा सकता है। मतलब अगर कोई संपत्ति वक्फ घोषित हो गई तो वह हमेशा के लिए वक्फ ही रहेगी, वह किसी भी सूरत में अपने पुराने मालिक के पास नहीं जा सकती। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन कैसे होता है? भारत में वक्फ संपत्तियों को वक्फ अधिनियम, 1995 से मैनेज किया जाता है। हालांकि, भारत में 1913 से वक्फ के शासन के लिए एक कानूनी व्यवस्था रही है, जब मुस्लिम वक्फ मान्यकरण अधिनियम लागू हुआ था। इसके बाद मुस्लिम वक्फ अधिनियम, 1923 आया। स्वतंत्रता के बाद केंद्रीय वक्फ अधिनियम, 1954 पारित किया गया था, जिसे अंततः वक्फ अधिनियम, 1995 से बदल दिया गया था। वक्फ एक्ट, 1995 में आखिरी संशोधन 2013 में हुआ था। तब वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण के लिए दो साल तक की कारावास की सजा का प्रावधान किया गया था। साथ ही, वक्फ संपत्ति की बिक्री, उपहार, विनिमय, बंधक या हस्तांतरण को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। वक्फ कानून एक सर्वेक्षण आयुक्त की नियुक्ति का प्रावधान करता है जो स्थानीय जांच करके, गवाहों को बुलाकर और सार्वजनिक दस्तावेजों की मांग करके सभी वक्फ संपत्तियों की सूची तैयार करता है। मुतवल्ली और ट्रिब्यूनल को समझें वक्फ संपत्ति के प्रबंधन के लिए कानून में मुतवल्ली की व्यवस्था है। मुतवल्ली एक पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन उसी तरह से किया जाता है जैसे भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के तहत न्यासों के अधीन संपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है। वक्फ एक्ट में कहा गया है कि वक्फ संपत्तियों से संबंधित किसी भी विवाद का फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल करेगा। ट्रिब्यूनल का गठन राज्य सरकार करती है। इसमें तीन सदस्य होते हैं- एक अध्यक्ष जो जिला, सत्र या सिविल न्यायाधीश, प्रथम श्रेणी से कम रैंक का राज्य न्यायिक अधिकारी नहीं होता है; दूसरा राज्य सिविल सेवा का एक अधिकारी; और तीसरा शरीयत का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति। कानून में राज्यों में वक्फ बोर्ड, वक्फ परिषद, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओज) के गठन और नियुक्ति के प्रावधान भी हैं। वक्फ बोर्ड में शामिल सीईओ और सांसद मुस्लिम समुदाय से होने चाहिए। वक्फ बोर्ड की शक्तियां वक्फ बोर्ड राज्य सरकार के अधीन एक निकाय है, जो पूरे राज्य में वक्फ संपत्तियों के संरक्षक के रूप में काम करता है। अधिकांश राज्यों में शिया और सुन्नी समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। देश की लगभग सभी प्रमुख मस्जिदें वक्फ संपत्तियां हैं और राज्य के वक्फ बोर्ड के अधीन हैं। वक्फ बोर्ड का नेतृत्व अध्यक्ष करता है और इसमें राज्य सरकार मुस्लिम विधायकों और सांसदों, राज्य बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्यों, इस्लामी धर्मशास्त्र के मान्यता प्राप्त विद्वानों और 1 लाख रुपये या उससे अधिक की वार्षिक आय वाले वक्फ के मुतवल्ली में से एक या दो को नामित करती है। वक्फ बोर्ड को कानून के तहत संपत्ति का प्रशासन करने और वक्फ की खोई हुई संपत्तियों की वसूली के उपाय करने और बिक्री, उपहार, बंधक, विनिमय या पट्टे के माध्यम से वक्फ की किसी भी अचल संपत्ति के हस्तांतरण को मंजूरी देने की शक्तियां प्राप्त हैं। हालांकि, मंजूरी तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि वक्फ बोर्ड के कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसे लेन-देन के पक्ष में मतदान न करें। वक्फ कानून में क्या-क्या बदलने का प्रस्ताव, लिस्ट देख लीजिए विधेयक में वक्फ कानून के मौजूदा ढांचे को काफी हद तक बदलने के प्रस्ताव किए गए हैं। प्रस्तावित संशोधन में वक्फ को नियंत्रित करने की शक्ति को बोर्ड और ट्रिब्यूनल से हटाकर राज्य सरकारों को देने की बात कही गई है। अभी वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल में बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय के सदस्य होते हैं। विधेयक में वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलने का भी प्रस्ताव है। नया नाम एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 करने का प्रस्ताव है। विधेयक के जरिए वक्फ एक्ट में मुख्य रूप से तीन बदलावों के प्रस्ताव किए गए हैं… ➤ पहला, विधेयक की धारा 3ए में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति तब तक कोई संपत्ति को वक्फ को दान नहीं कर सकता जब तक कि वह संपत्ति का वैध मालिक न हो और ऐसी संपत्ति को हस्तांतरित या समर्पित करने के लिए न सक्षम हो। इस प्रावधान से वैसी संपत्तियों पर वक्फ पर कब्जे रुकेंगे जो किसी के नाम से दर्ज नहीं हैं। ➤ दूसरा, विधेयक की धारा 3सी(1) में कहा गया है कि 'इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले या बाद में वक्फ संपत्ति के रूप में पहचानी … Read more

बांग्लादेश में मुसलमानों के हमलों से जान-माल की रक्षा के लिए हिंदू भारत आना चाहते हैं, एडीजी को नवगठित समिति का अध्यक्ष बनाया

नई दिल्ली  बांग्लादेश में अराजकता की स्थिति से पड़ोसी देश होने के नाते भारत को भारी चिंता है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की घटनाएं रुह कंपा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश के हालात पर नजर रखने के लिए एक समिति का गठन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि बीएसएफ के ईस्टर्न कमांड के एडीजी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। शाह ने लिखा, 'मोदी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए समिति गठित की। सरकारी समिति भारतीय नागरिकों, हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश में अधिकारियों के संपर्क में रहेगी। भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की निगरानी के लिए सरकारी समिति का नेतृत्व बीएसएफ की पूर्वी कमान के एडीजी करेंगे।' बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद स्थितियां काफी गंभीर हो गई हैं। कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ अल्पसंख्यक हिंदुओं के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के हमले में कई निर्षोद हिंदू मारे जा चुके हैं। जान बचाने के लिए भारी संख्या में हिंदू भारत में शरण लेने को सीमा पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश होने के नाते भारत के लिए बड़ा सरदर्द पैदा हो गया है। भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे तो कैसे? दूसरी तरफ सीमा पर पहुंच रहे हिंदुओं और घुसपैठ करना चाह रहे कट्टरपंथी मुसलमानों के बीच फर्क करे तो कैसे? recent visitors 85