‘एक देश, एक चुनाव’ बिल मौजूदा संसद सत्र में ही ला सकती है मोदी सरकार

नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार मौजूदा संसद सत्र में ही ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल पेश कर सकती है। सरकारी सूत्रों के हवाले से यह कहा गया है कि सरकार शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पेश करने की तैयारी में है। बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट ने पहले ही एक देश, एक चुनाव पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दे रखी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बिल पर आम सहमति बनाना चाहती है और विस्तृत चर्चा के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजना चाहती है। सरकार से जुड़े सूत्र कह रहे हैं कि सरकार चाहती है कि रामनाथ कोविंद की अगुवाई वाली एक्सपर्ट कमेटी की 18,636 पन्नों की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हो। खबर है कि सरकार ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, किरण रिजिजू और अर्जुनराम मेघवाल को विपक्षी नेताओं के साथ बैठकें कर आम राय बनाने को कहा गया है। सूत्रों ने बताया कि जेपीसी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से इस बिल पर विस्तार से चर्चा करेगी और इस प्रक्रिया में अन्य हितधारकों से भी बातचीत करेगी। सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया में देशभर के बुद्धिजीवियों के साथ-साथ सभी राज्य विधानसभाओं के अध्यक्षों को भी बुलाया जा सकता है। इसके अलावा आम लोगों की राय भी ली जा सकती है क्योंकि आम सहमति के बिना मौजूदा चुनावी व्यवस्था को बदलना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जानकार बताते हैं कि "एक राष्ट्र एक चुनाव" योजना को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने के लिए कम से कम छह विधेयक लाने होंगे और इसके लिए सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल, एनडीए के पास संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत ही है। ऐसे में संसद के किसी भी सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना सरकार के लिए एक कठिन काम हो सकता है। राज्यसभा की 245 सीटों में से एनडीए के पास 112 और विपक्षी दलों के पास 85 सीटें हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को कम से कम 164 वोटों की जरूरत है। recent visitors 88

मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी

भोपाल केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। केंद्र ने 'प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान' (पीएम-जनमन) के तहत इन परिवारों को सौगात दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने  ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हवाले से कहा- नरेन्द्र मोदी सरकार का ध्यान समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचने पर है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन योजना के तहत लक्ष्य (4.9 लाख घर) मार्च 2026 तक हासिल किया जाना है। केंद्र ने पीएम-जनमन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश राज्‍य में 297.18 कि.मी लंबाई की 76 सड़कों की स्‍वीकृति भी प्रदान की है। इन 76 सड़कों की अनुमानित लागत 275.07 करोड़ रुपये है, जिसमें से केंद्रीय अंश 163.39 करोड़ रुपये एवं राज्य अंश 111.68 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2023 में पीएम-जनमन पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य कमजोर जनजातीय परिवारों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है, जिसमें सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण के साथ-साथ बेहतर सड़क, दूरसंचार संपर्क और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना शामिल है। recent visitors 70

मल्लिकर्जुन खड़गे की मोदी सरकार पर तीखी टिप्पणी: ओबीसी आरक्षण और जातिगत जनगणना का दोगला रुख

Mallikarjun Kharge’s sharp comment on Modi government: Double stance on OBC reservation and caste census नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खड़गे ने कहा कि मोदी जी चुनावी लाभ के लिए खुद को बार-बार ओबीसी बताने का दावा करते हैं, लेकिन यह कभी नहीं बताते कि वे जातिगत जनगणना से पिछड़ी जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को क्यों छुपाए रखना चाहते हैं।खड़गे ने इस संदर्भ में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया और कहा, “जब मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं, तो बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए यात्रा निकाली थी। अब मोदी जी ओबीसी वोट हासिल करने के लिए ओबीसी होने का दावा करते हैं, लेकिन जब बात उनके वास्तविक कामकाजी रुख की आती है, तो वे पिछड़ों के हक में कभी खड़े नहीं हुए।” राहुल गांधी के हालिया बयान का हवाला देते हुए खड़गे ने कहा कि हाल ही में धनबाद में राहुल गांधी ने यह खुलासा किया था कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग से है, 15 प्रतिशत दलित हैं, और 8 प्रतिशत आदिवासी वर्ग के लोग हैं। इन वर्गों की बेहतर सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा तरीका जातिगत जनगणना है।खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के खिलाफ है, और यह बात झारखंड की गठबंधन सरकार द्वारा किए गए एक बड़े कदम से स्पष्ट होती है। झारखंड विधानसभा ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे गवर्नर से रोकवा दिया। “यह दोहरा चरित्र दर्शाता है कि मोदी जी अपने घोषणापत्र में OBC आरक्षण बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन जब असल में इसे लागू करने का समय आता है, तो वे उसे रोकने में किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्या इस तरह के दावे पर आप लोग विश्वास करेंगे?” खड़गे ने सवाल उठाया। खड़गे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार का यह दोगला रुख ही उनकी असल नीयत को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर गंभीर सोच-विचार करें और सही पक्ष का समर्थन करें। recent visitors 122

बांग्लादेश में मुसलमानों के हमलों से जान-माल की रक्षा के लिए हिंदू भारत आना चाहते हैं, एडीजी को नवगठित समिति का अध्यक्ष बनाया

नई दिल्ली  बांग्लादेश में अराजकता की स्थिति से पड़ोसी देश होने के नाते भारत को भारी चिंता है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की घटनाएं रुह कंपा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश के हालात पर नजर रखने के लिए एक समिति का गठन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि बीएसएफ के ईस्टर्न कमांड के एडीजी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। शाह ने लिखा, 'मोदी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए समिति गठित की। सरकारी समिति भारतीय नागरिकों, हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश में अधिकारियों के संपर्क में रहेगी। भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की निगरानी के लिए सरकारी समिति का नेतृत्व बीएसएफ की पूर्वी कमान के एडीजी करेंगे।' बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद स्थितियां काफी गंभीर हो गई हैं। कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ अल्पसंख्यक हिंदुओं के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के हमले में कई निर्षोद हिंदू मारे जा चुके हैं। जान बचाने के लिए भारी संख्या में हिंदू भारत में शरण लेने को सीमा पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश होने के नाते भारत के लिए बड़ा सरदर्द पैदा हो गया है। भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे तो कैसे? दूसरी तरफ सीमा पर पहुंच रहे हिंदुओं और घुसपैठ करना चाह रहे कट्टरपंथी मुसलमानों के बीच फर्क करे तो कैसे? recent visitors 84