भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार,सेंसेक्स ने अचानक2400अंकों का लगाया गोता

मुंबई शेयर मार्केट (Stock Market) में बीते सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को बड़ी गिरावट आई थी और तमाम बड़ी कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए थे. अमेरिका में मंदी की आहट से US Stock Market हिला, तो इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया था. अब सप्ताह का पहला कारोबारी दिन सोमवार भी 'ब्लैक मंडे' नजर आ रहा है. जहां प्री-ओपन में सेंसेक्स और निफ्टी भरभराकर टूटे हैं, तो वहीं बाजार खुलने के साथ ही Sensex-Nifty धड़ाम हो गए. बीएसई का सेंसेक्स 80,000 के नीचे ओपन हुआ. आज खुलते ही बिखर गया सेंसेक्स सोमवार को शेयर बाजार (Share Market) ओपन होने के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद की तुलना में बुरी तरह से टूटकर 1200 अंक की गिरावट के साथ 79,700.77 पर ओपन हुआ, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी-50 ने भी 424 अंक की गिरावट के साथ कारोबार शुरू किया. इससे पहले बीते शुक्रवार को शुक्रवार को भारतीय शेयर मार्केट में सुनामी जैसा नजारा देखने को मिला था. BSE Sensex 885.60 अंक या 1.08% गिरकर 80,981.95 अंक पर बंद हुआ था. जबकि Nifty50 की बात करें तो यह 293.20 अंक टूटकर 24,717.70 लेवल पर बंद हुआ था. प्री- ओपनिंग में ही ऐसे संकेत मिलने लगे थे कि शेयर बाजार का रुख कैसा रहने वाला है. दरअसल, Pre Open में सेंसेक्स 3000 अंक से ज्यादा टूट गया था, तो वहीं निफ्टी में 700 अंक की बड़ी गिरावट देखने को मिली. बाजार खुलने के महज 10 मिनट के भीतर ही शुरुआती गिरावट और बढ़ गई, जिसके चलते Sensex 1,585.81 अंक या 1.96% की गिरावट लेकर 79,396.14 के लेवल पर आ गया, जबकि Nifty 499.40 अंक या 2.02% फिसलकर 24,218.30 के लेवल पर पहुंच गया. शुक्रवार को इतना डूबा था पैसा बीते शुक्रवार को आई गिरावट के बीच शेयर बाजार निवेशकों को 4.56 लाख करोड़ का नुकसानसेंसेक्‍स में भारी गिरावट से बीएसई का मार्केट कैप शुक्रवार को 4.56 लाख करोड़ रुपये घटकर 457.06 लाख करोड़ हो गया. ऐसे में कहा जा सकता है कि शुक्रवार को बीएसई के तहत निवेशकों का वैल्‍यूवेशन 4.56 लाख करोड़ रुपये घट गया. आखिर अमेरिका में ऐसा क्या हुआ? दरअसल, अमेरिका में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग पीएमआई डाटा में बड़ी कमी आई है, जो संकेत दे रहा है अमेरिका में मंदी आ सकती है. साथ ही बेरोजगारों की संख्‍या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी भी हुई है, जिसका असर सीधे अमेरिकी बाजार पर पड़ा है. वहीं IT सेक्‍टर में छंटनी के ऐलान से भी संकट और गहरा गया है, जिससे ग्‍लोबल आईटी सेक्‍टर भी भारी दबाव में है. ये 10 शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे शेयर बाजार में आए भूचाल के बीच BSE के 30 शेयरों में से 28 स्टॉक लाल निशान पर ओपन हुए. अगर बात करें 10 सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की, तो लार्ज कैप कंपनियों में शामिल टाटा ग्रुप की ऑटोमोबाइल कंपनी Tata Motors का शेयर 4.28%, Tata Steel Share 3.89%, Maruti Share 3.19%, Adani Port Share 3.26%, JSW Steel Share 3.21%, SBI Share 3.19%, M&M Share 3.15%, Titan 3.10%, LT Share 3% और Reliance Share 2.27% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था.  recent visitors 104

15 अगस्त से पहले 7 लाख कर्मचारी-अधिकारियों की होगी बल्ले-बल्ले

भोपाल मध्य प्रदेश के करीब 7 लाख अधिकारी और कर्मचारियों को मध्य प्रदेश सरकार खुशखबरी देने जा रही है। उनकी लंबे समय से महंगाई राहत भत्ते की मांग अब जल्द पूरी होते दिख रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 अगस्त को कर्मचारियों को महंगाई राहत दिए जाने का आदेश जारी कर सकते हैं। वहीं, सरकार ने कर्मचारियों के लिए एरियर का रास्ता भी साफ कर दिया है। ऑनलाइन कर सकेंगे आवेदन 2023 के महंगाई राहत भत्ते में बढ़ोत्तरी के एरियर की राशि भी यह कर्मचारी निकाल पाएंगे। इसके लिए प्रदेश के कर्मचारी अधिकारी अब ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। कोषालय द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इन कर्मचारियों को जुलाई और अगस्त माह के एरियर की राशि एक साथ मिल जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार ने एरियर की राशि तीन किश्तों जुलाई, अगस्त और सितंबर 2024 माह में दिए जाने का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि रक्षाबंधन के पहले एक साथ चार माह की ऐरियर की राशि कर्मचारियों के खाते में पहुंच सकती है। गौरतलब है कि हर माह 2-2 माह की ऐरियर की राशि कर्मचारियों की दी जाना प्रस्तावित है। लंबे समय से हो रही थी मांग मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार 15 अगस्त के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस संबंध में ऐलान कर सकते हैं। इसके बाद कर्मचारी, अधिकारियों का महंगाई भत्ता 46 प्रतिशत से बढ़कर 50 फीसदी हो जाएगा। इसके लिए बजट में इसको लेकर पहले ही प्रावधान किया जा चुका है। प्रदेश के कर्मचारी संगठन महंगाई राहत में बढ़ोत्तरी को लेकर लंबे समय से मांग कर रहे हैं। पिछले तीन सालों से इसके लिए भी आंदोलन, प्रदर्शन कर रहे हैं। गौरतलब है कि केन्द्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता सरकार पहले ही बढ़ा चुकी है, लेकिन प्रदेश के कर्मचारी इस मामले में 6 माह पीछे हो गए हैं। वर्तमान समय में केन्द्रीय कर्मचारियों को 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसे मार्च 2024 में बढ़ाया गया था। वहीं लोकसभा चुनाव के पहले राज्य सरकार ने यह भत्ता 42 से बढ़ाकर 46 प्रतिशत कर दिया था। इसकी गणना जनवरी और जुलाई से होती है। केंद्रीय कर्मचारियों को जनवरी में और जुलाई में डीए की गणना की जाती है। लेकिन मध्य प्रदेश के कर्मचारी अभी तक इस बात का इंतजार कर रहे थे, अब संभावना है कि 15 अगस्त को उनकी मांग पूरी हो सकती है। recent visitors 84

वन विभाग उस ट्रेन को ‘जब्त’ करने वाली है, जिसकी टक्कर से रेलवे ट्रैक पर तीन बाघ शावकों की मौत हुई थी

भोपाल मध्य प्रदेश वन विभाग उस ट्रेन को 'जब्त' करने पर विचार कर रहा है, जिसकी टक्कर से मिडघाट-बुधनी रेलवे ट्रैक पर तीन बाघ शावकों की मौत हुई थी। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरने वाली इस ट्रेन की चपेट में 3 बाघ शावक आए थे, जिनमें से एक की मौके पर मौत हुई और बचे 2 शावक रेस्क्यू के लगभग 15 दिन बाद दम तोड़ गए थे। उच्च अधिकारियों पर दबाव सूत्रों के अनुसार, 'टाइगर स्टेट' एमपी में वन अधिकारी निर्णायक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों पर दबाव डाल रहे हैं। इसके लिए असम सरकार के फैसले का उदाहरण लिया जा रहा है, जिसने एक रेलवे इंजन को 'जब्त' कर लिया था, जिससे अक्टूबर 2020 में एक हाथी और उसके बच्चे की मौत हो गई थी। त्रासदी से सबक तीन शावकों की मौत ने मप्र के वन अधिकारियों को सदमे में डाल दिया है। उनका मानना है कि यह त्रासदी पूरी तरह से टाली जा सकती थी। तीनों शावक 14 जुलाई की रात को ट्रेन की चपेट में आ गए थे। एक की मौके पर मौत हो गई, जबकि उसके दो भाई-बहन एक पखवाड़े तक तड़पते रहे और फिर उनकी भी मौत हो गई। वन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि 'हमें उस ट्रेन के इंजन को जब्त कर लेना चाहिए जिसने इन शावकों को तब टक्कर मारी जब वे अपनी मां के पीछे चल रहे थे। यह एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। अगर असम वन विभाग एक जंगली हाथी और बछड़े की मौत के लिए इंजन 'जब्त' कर सकता है, तो हम अपने बाघ शावकों के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते?' ट्रेन की पहचान और जिम्मेदारी वन अधिकारी ट्रेन की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। एक अन्य आईएफएस अधिकारी ने कहा 'पटरियां जंगल से होकर गुजरती हैं और यह हमेशा वन भूमि रहेगी। शमन उपाय करना और तीसरी लाइन के लिए पर्यावरण मंजूरी के दौरान दी गई शर्तों का अनुपालन करना रेलवे की जिम्मेदारी है।' पिछले हादसे सीहोर और रायसेन जिलों में बरखेड़ा और बुधनी के बीच 20 किलोमीटर लंबे इस रेलवे खंड पर ट्रेनों की चपेट में आने से इन तीन शावकों सहित आठ बाघों की मौत हो गई है। 2015 के बाद से ट्रेन दुर्घटनाओं में 14 तेंदुए और एक भालू भी मारे गए हैं। एमपी के वनवासियों का कहना है कि तीन शावकों की मौत एक महत्वपूर्ण बिंदु है। वे असम सरकार की कार्रवाई का हवाला देते हैं, जहां उसका वन विभाग गुवाहाटी में बामुनिमैदान रेलवे यार्ड में गया और 27 सितंबर, 2020 को एक हाथी और उसके बच्चे को कुचलने और एक किलोमीटर तक घसीटे जाने के बाद दर्ज किए गए मामले के खिलाफ लोकोमोटिव को 'जब्त' कर लिया। उस घटना में रेलवे ने पायलट और सह-पायलट को निलंबित कर दिया था। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई एक डिप्टी रेंजर ने कहा, 'हाथियों की तरह, बाघ भी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची -1 जानवर हैं। हमारे अधिकारी और फील्ड कर्मचारी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना खून बहाते हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज हम बाघों में नंबर 1 हैं। बाघों की हत्या के लिए कार्रवाई नहीं करने से वनवासियों का मनोबल गिरेगा।' उन्होंने कहा, ट्रेन पायलट अक्सर इस पैच के माध्यम से 20 किमी प्रति घंटे की गति सीमा को पार कर जाते हैं, उन्होंने कहा: 'बाकी बाघों को बचाने के लिए ओवर स्पीडिंग की जांच की जानी चाहिए।' समिति का गठन वन अधिकारियों ने बाघ गलियारों में गति पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे को लिखा था लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने लोको पायलटों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि 'उन्हें मामला दर्ज करना चाहिए और शावकों की मौत की जांच करनी चाहिए। मुझे नहीं पता कि वन विभाग इस पर धीमी गति से क्यों चल रहा है।' वन विभाग ने पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर यह जांच करने का आग्रह किया है कि बरखेड़ा और बुधनी के बीच तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए लगाई गई शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं। दुबे कहते हैं, 'उन्हें डीआरएम को एक नोटिस भेजना चाहिए और उस भयानक रात से गुजरने वाली ट्रेनों का विवरण मांगना चाहिए।' वन विभाग ने अनुपालन की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया है। सूत्रों ने कहा कि इसमें रेलवे अधिकारियों को भी शामिल किया जाना है, लेकिन रेलवे ने अभी तक पैनल के लिए कोई नाम नहीं दिया है। वन अधिकारी क्षेत्र के दौरे की तारीख तय करने के लिए रेलवे प्रतिनिधि का इंतजार कर रहे हैं। recent visitors 118

गुरुग्राम में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं और मौत 6 छह बजे से सुबह 6 बजे के बीच

 गुरुग्राम दिल्ली से सटे एनसीआर के शहर गुरुग्राम में हर साल एक हजार सड़क हादसों में 400 से ज्यादा लोगों की जान जा रही है। गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस और राहगीरी फाउंडेशन ने मिलकर साल 2023 में हुई सड़क दुर्घटनाओं और मौत के कारण को जानने के लिए सर्वे किया। इसमें कई चौकानें वाले तथ्य सामने आए। साल 2023 की क्रैश रिपोर्ट के अनुसार जिले में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं और मौत 6 छह बजे से सुबह 6 बजे के बीच हो रही है। दुर्घटनाएं और हादसों को कम करने के लिए यह सर्वे किया गया था। ऐसे में आने वाले एक साल में मिलकर 20 फीसदी तक सड़क दुर्घटना और मौत को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। क्रैश रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में 1190 सड़क दुर्घटनाओं में 439 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा 1020 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इन दुर्घटनाओं में 62 फीसदी मौतें शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच में हुई थी। 58 फीसदी दुर्घटनाएं भी रात के समय में हुई थीं। विशेषज्ञों की मानें तो रात के चलने के लिए गुरुग्राम की सड़कें सुरक्षित नहीं हैं। गुरुग्राम में 20 घंटे में एक युवक की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो जाती है। ट्रैफिक पुलिस के द्वारा तैयार किए गए आंकड़े में इसका खुलासा हुआ है। कई सड़कों पर तकनीकी खामियां : सड़क सुरक्षा एक्सपर्ट नवदीप सिंह ने बताया कि रात में चलने के लिए शहर की सड़कें सुरक्षित नहीं है। इन सड़कों पर रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के साथ-साथ खराब रोड इंजीनियरिंग, पर्याप्त साइनेज बोर्ड और रिफ्लेक्टर नहीं होना भी एक बड़ा कारण है। इसके अलावा दिल्ली-जयपुर हाईवे, कुंडली-मानेसर-पलवल सहित शहर की अंदरुनी सड़कों पर अवैध वाहनों की पार्किंग भी एक हादसों का बड़ा कारण माना गया है। इसके अलावा वाहन चालक रात में शॉर्ट-कट के चक्कर में गलत दिशा में वाहन चलाने से वह अपने साथ-साथ दूसरे की जान भी जोखिम में डालते है। पुलिस का जागरुकता अभियान भी बेअसर हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग परहोते हैं अधिक हादसे क्रैश रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में सड़कों के जाल का कुल 2.1 प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग का पड़ता है, लेकिन चिंता की बात है कि सिर्फ 2.1 प्रतिशत हिस्से में 45 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं और मौत होती है। जबकि 55 फीसदी मौतें और दुर्घटनाए शहर की अंदरुनी सड़कों में होती हैं। ऐसे में रात में राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं के कई कारण हैं। इनमें सही से रिफ्लेक्टर नहीं होना, तेज रफ्तार, पर्याप्त रोशनी और अवैध पार्किंग के साथ-साथ खराब रोड इंजीनियरिंग एक बड़ा कारण है। इन पांच सड़कों पर रात में आवागमन खतरे भरा साल 2023 की क्रैश रिपोर्ट के सर्वे में सामने आया कि सप्ताह में सबसे ज्यादा हादसे बुधवार के दिन होते है। इसके अलावा रात में शहर की पांच सड़कें सबसे ज्यादा असुरक्षित होती है। जिनमें सबसे ज्यादा हादसे होने का डर रहता है। इनमें दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे पर बने एसपीआर क्लोवरलीफ, घाटा गांव चौक, गोल्फ कोर्स रोड, एमजी रोड और फर्रुखनगर है। इन सड़कों पर रात में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं और मौतें रात के समय में होती है। चालान भी काटे जा रहे ट्रैफिक पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले दो हजार वाहन चालकों के चालान काटे जाते हैं। एक हजार चालान ट्रैफिक पुलिस के जोनल ऑफिसर काटते हैं, जबकि एक हजार से ज्यादा चालान रोजाना सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से काटे जाते है। राहगीरी फाउंडेशन की सारिका पांडा भट्ट ने कहा, ''हादसे और मौत के कारणों को जानने के लिए सर्वे कर क्रैश रिपोर्ट 2023 तैयार की गई है। उस रिपोर्ट के आधार पर ग्राफ को कम करने के लिए कमियों को ठीक किया जाएगा, ताकि सुबह घर से निकले लोग रात को घर जरूर परिवार के पास पहुंचे और होने वाले सड़क हादसों की संख्या में कमी भी आ सके।'' डीसीपी ट्रैफिक वीरेंद्र विज, ''शहर की सड़कों पर रात में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही है, इसमें कई लोग जान गंवा रहे हैं। हादसे कम करने के लिए सभी विभागों के साथ मिलकर जल्द एक एक्शन प्लॉन तैयार किया जाएगा। इस पर सभी मिलकर काम करेंगे। इस साल में 20 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं और हादसों को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।''   recent visitors 166

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरू इन्वेस्ट मीट में उद्योगपतियों को खनिज क्षेत्र में निवेश के लिये करेंगे प्रोत्साहित

मध्यप्रदेश : देश की समृद्ध खनिज संपदा और औद्योगिक विकास का प्रतीक मध्य प्रदेश को मिल चुका है मिनरल ऑप्शन के लिए पहला पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरू इन्वेस्ट मीट में उद्योगपतियों को खनिज क्षेत्र में निवेश के लिये करेंगे प्रोत्साहित यहां हैं निवेश और व्यवसाय की भरपूर संभावनाएं भोपाल मध्यप्रदेश भारत के खनन और खनिज क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता को लगातार साबित कर रहा है, जिससे उल्लेखनीय उपलब्धियाँ और भविष्य की संभावनाएँ सामने आ रही हैं, जो महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को प्रोत्साहित करेंगी। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दो दिवसीय प्रवास पर बेंगलुरू जाने वाले है। जहाँ वे 8 अगस्त को इंटरेक्टिव सेशन में प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा पर उद्योगपतियों का ध्यान आकर्षित कर निवेश के लिये प्रोत्साहित करेंगे। गौर तलब है कि मिनरल ऑप्शन के लिये मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार भी मिल चुका है। मध्यप्रदेश में जल्दी ही एल्युमिनियम, लेटराइट, बॉक्साइट, मेटल, डायमंड, गोल्ड, लाइमस्टोन मैंगनीज के 33 ब्लॉक की नीलामी होने जा रही है। इसी प्रकार 17 कोल ब्लॉक के ऑक्शन भी प्रक्रिया में है। प्रमुख खनिजों के 20 ब्लॉक ऑक्शन की प्रक्रिया में है। इनमें मैंगनीज, डायमंड बॉक्साइट, लेटराइट, गोल्ड, बेस मेटल और लाइमस्टोन हैं। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में खनिज संपदा में निवेश की बहुत ज्यादा संभावना बनी हैं। पिछले साल एक साथ 51 ब्लॉक का आक्शन हुआ था, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। मध्यप्रदेश में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज संसाधनों में कोयला, लाइमस्टोन, डायमंड और पायरोफ्लाइट है। मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। यहां सिंगरौली, सीधी, छिंदवाड़ा, बैतूल, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और नरसिंहपुर भरपूर कोयला भंडार है। कोयले का उपयोग थर्मल पावर प्लांट्स और कोल गैसीफिकेशन प्लांट्स में होता है। इनसे संबंधित उद्योगों के लिए निवेश की भरपूर संभावनाएं हैं। इसी प्रकार चूना पत्थर का भी प्रदेश में भरपूर भंडार है। यहां रीवा, सतना, सीधी, मैहर, दमोह, कटनी पन्ना, धार और नीमच में भरपूर भंडार है। देश के कुल लाइमस्टोन भंडार का 9% मध्यप्रदेश में है। इस दृष्टि से सीमेंट उद्योग के लिए मध्यप्रदेश एक आदर्श निवेश स्थान है। यहां जो लॉजिस्टिक क्षेत्र में सुधार हुआ है इस दृष्टि से भी मध्यप्रदेश से देश के सभी राज्यों का संपर्क बेहतर हो गया है। देश में उपलब्ध डायमंड भंडार का 90% मध्यप्रदेश में पाया जाता है। यह अकेले पन्ना और छतरपुर में है। इस दृष्टि से यहां डायमंड बिजनेस पार्क और और कंपोजिट लाइसेंस के लिए 5 ब्लॉक की पहचान की गई है। मध्यप्रदेश पायरोफ्लाइट के उत्पादन में भी अग्रणी राज्य है। यहां देश के उत्पादन का 41% उत्पादन हो रहा है। देश में सर्वाधिक भंडार 14 मिलियन टन मध्यप्रदेश में है, जो छतरपुर, शिवपुरी और टीकमगढ़ में है। इसके भंडारण को देखते हुए देश में सेरेमिक, पॉटरी, पोर्सलिन और टाइल्स उद्योगों के लिए सबसे लाभकारी निवेश स्थान है।  समृद्ध खनिज संपदा पूरा मध्यप्रदेश खनिज संपदा से भरा पड़ा है। ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन और क्वार्ट्ज और फ्लैगस्टोन पाया जाता है। झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फास्फेट डोलोमाइट, लाइमस्टोन, मैंगनीज और ग्रेफाइट मिलता है। नीमच में लाइमस्टोन, बैतूल में कोल, ग्रेफाइट ग्रेनाइट, लेड और जिंक मिलता है। छिंदवाड़ा में कोल, मैंगनीज और डोलोमाइट मिलता है बालाघाट में कॉपर, मैंगनीज, डोलोमाइट, लाइमस्टोन, बॉक्साइट, मंडला और डिंडोरी में डायमंड, डोलोमाइट और बॉक्साइट, सिंगरौली में कोल, गोल्ड, आयरन और शहडोल, अनूपपुर, उमरिया में कोल, कॉल बेड मीथेन, बॉक्साइट, सागर, छतरपुर और पन्ना में डायमंड, रॉक फॉस्फेट डायस्पोर, आयरन और ग्रेनाइट मिलता है। जबलपुर में डोलोमाइट, आयरन अयस्क, लाइमस्टोन, मैंगनीज, गोल्ड और मार्बल मिलता है। देश में कोयल का उत्पादन 3 लाख 61 हजार 411 मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश में 30 हजार 916 मेट्रिक टन कोल्ड रिजर्व है, जो देश का 8 प्रतिशत है। इसीप्रकार चूना पत्थर देश में 19028.5 मैट्रिक टन है और मध्यप्रदेश में 1692 मिट्रिक टन है, जो देश का 9% है। लौह अयस्क देश में 6209 और मध्यप्रदेश में 54.1 मीट्रिक टन है, जो देश का एक प्रतिशत है। इसी प्रकार तांबा देश में 163.9 मैट्रिक टन है। मध्यप्रदेश में 120.4 मीट्रिक टन है, जो देश का 73 प्रतिशत है। इसी प्रकार मैंगनीज अयस्क 75.0 मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश में 19.6 मिट्रिक टन है, जो देश का 26% है। बॉक्साइट 640.5 मीट्रिक टन है और मध्यप्रदेश में 18.6 मीट्रिक टन है, जो देश का तीन प्रतिशत है। रॉक फॉस्फेट देश में 30.9 मैट्रिक टन रिजर्व है और मध्यप्रदेश में 9.0 मीट्रिक टन है, जो 29% है। राष्ट्रीय रैंकिंग में भी आगे राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश तांबा, मैग्नीज और हीरा उत्पादन में पहले स्थान पर है। इसी तरह रॉक फास्फेट में दूसरे, चूना पत्थर में तीसरे और कोयला उत्पादन में चौथे स्थान पर है।   recent visitors 87

देश में होने वाले हर 10 में से 1 अंग प्रत्यारोपण विदेशी लोगों का होता- रिपोर्ट

नई दिल्ली भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराने वालों को लेकर नई जानकारी सामने आई है। सरकारी डेटा के अनुसार, देश में होने वाले लगभग हर 10 में से 1 अंग प्रत्यारोपण विदेशी लोगों का होता है। नैशनल ऑर्गेन एंड टिश्यू ट्रांस्पालांट ऑर्गेनाइजेशन ने बताया कि साल 2023 में भारत में कुल 18,378 ट्रांस्प्लांट हुए थे। इनमें से 42 लोगों को एक से ज्यादा अंग मिले। यानी कुल मिलाकर 18,336 लोगों ने अंग लिए। इनमें से 1,851 लोग (यानी लगभग 10%) विदेशी थे। विदेशी लोगों के अंग प्रत्यारोपण दिल्ली (1,445), राजस्थान (116), पश्चिम बंगाल (88), उत्तर प्रदेश (76), तेलंगाना (61), महाराष्ट्र (35), कर्नाटक (15), गुजरात (11), तमिलनाडु (3) और मणिपुर (1) में किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे ज्यादातर मरीज पड़ोसी देशों से आते हैं जहां अंग प्रत्यारोपण की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं या अभी शुरूआती दौर में हैं, जैसे बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार। भारत में अंग प्रत्यारोपण कराने वाले ज़्यादातर विदेशी पड़ोसी देशों से आते हैं, लेकिन कुछ विकसित देशों जैसे अमेरिका और ब्रिटेन से भी आते हैं। ये लोग जीवित व्यक्ति से अंग लेना पसंद करते हैं क्योंकि भारत में इस प्रक्रिया की कीमत उनके देशों के मुकाबले दसवें हिस्से से भी कम होती है। लीवर ट्रांस्प्लांट सर्जन और मैक्स सेंटर फॉर लीवर एंड बिलियरी साइंसेज के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष गुप्ता ने बताया कि उनके सेंटर में करीब 30 प्रतिशत मरीज विदेशी होते हैं। समझिए पूरी प्रक्रिया अंग प्रत्यारोपण में किसी जीवित या मृत व्यक्ति (दानदाता) से अंग निकालकर उसे जरूरतमंद मरीज (ग्राही) में लगाया जाता है। जो व्यक्ति अंग देता है उसे दानदाता कहते हैं और जो व्यक्ति अंग लेता है उसे ग्राही कहते हैं। एक जीवित व्यक्ति अपनी एक किडनी (क्योंकि एक किडनी शरीर के कामकाज के लिए काफी होती है), पैंक्रियास का एक हिस्सा (क्योंकि आधा पैंक्रियास पैंक्रियास के कामकाज के लिए पर्याप्त होता है) और लीवर का एक हिस्सा (क्योंकि दान किए गए कुछ हिस्से कुछ समय बाद फिर से बन जाते हैं) दान कर सकता है। दूसरी तरफ, एक मृत या ब्रेन डेड व्यक्ति कई अंग और टिश्यू दान कर सकता है, जैसे दिल, फेफड़े, लीवर, किडनी, आंतें और कॉर्निया। मरने के बाद अंग दान मुश्किल अंगदान के क्षेत्र में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन मोहन फाउंडेशन की पल्लवी कुमार ने कहा कि भारत में मरने के बाद अंग दान दुर्लभ है और ऐसे दाताओं से निकाले गए अंग प्राप्त करने के लिए भारतीयों को वरीयता दी जाती है। उन्होंने कहा कि विदेशियों से जुड़े अधिकांश प्रत्यारोपण जीवित दाता प्रत्यारोपण हैं। NOTTO डेटा भी इसी रुझान को दर्शाता है। इसमें दिखाया गया है कि भारत में 2023 में हुए 1,851 विदेशी प्रत्यारोपणों में से केवल नौ में ही मृतक दाता से अंगदान शामिल था। विदेशियों के लिए भी हैं सख्त नियम विदेशियों के लिए जीवित दाता से अंग प्रत्यारोपण कराने के सख्त नियम हैं। प्रत्यारोपण की इजाजत देने से पहले कई स्तरों पर जांच की जाती है कि डोनर मरीज का खून का रिश्तेदार है या नहीं। यह बात लीवर प्रत्यारोपण सर्जन और मेदांता-द मेडिसिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर ट्रांसप्लांटेशन एंड रीजेनरेटिव मेडिसिन के चेयरमैन डॉक्टर एएस सोइन ने बताई। हाल ही में विदेशी नागरिकों के साथ अंग प्रत्यारोपण में व्यावसायिक लेन-देन की खबरें आई थीं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे सभी अंग प्राप्तकर्ताओं की एक राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) आईडी बनाएं, चाहे वह जीवित दाता से हो या मृतक दाता से अंग प्रत्यारोपण हो।   recent visitors 92

प्रेगनेंसी में सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स सेहत को पहुंचा सकते हैं भारी नुकसान, जानें कारण

प्रेग्नेंसी का समय हर महिला के लिए खास होता है। इस समय महिला को हेल्दी डाइट लेनी चाहिए जिससे उसकी हेल्थ और बच्चे की हेल्थ अच्छी रहे। प्रेगनेंसी में महिलाओं को काफी हॉर्मोनल बदलाव होते रहते हैं, जिसका असर महिला के खाने-पीने की आदत और मूड पर भी पड़ता है। महिला को प्रेगनेंसी के समय कई बार तीखा, मीठा खाने या आइस्क्रीम, चॉकलेट, सोडा जैसी चीजें खाने-पीने का करता है। सोडा शरीर के लिए काफी नुकसानदायक होता है। प्रेगनेंट महिला जब कुछ भी खाती है, तो इसका असर शिशु पर भी पड़ता है। सोडा पीने से शिशु की सेहत को भी नुकसान पहुंचता है। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी में सोडा पीने के नुकसान के बारे में। एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि प्रेग्नेंसी के दौरान जो महिलाएं शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करती हैं उनके होने वाले बच्चों में कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं. peer-reviewed journal Nutrients  में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक मात्रा में शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करती हैं उन महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों पर इसका काफी बुरा असर देखने को मिलता है. यह सर्वे अप्रैल और जून 2022 और 2023 में किया गया. इस सर्वे में 4 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया. सर्वे के दौरान इन सभी गर्भवती महिलाओं को फ्रूट जूस, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसे फ्रिजी ड्रिंक्स, सोडा, जूस और दूध वाली ड्रिंक्स दी गई.  इस सर्वे के अंत में यह देखा गया कि जिन महिलाओं ने अधिक मात्रा में शुगरी ड्रिंक्स का सेवन किया उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की समस्या से जूझना पड़ा. प्रेग्नेंसी में होने वाली डायबिटीज की समस्या को जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है. जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर बच्चे का वजन सामान्य से ज्यादा हो सकता है जिस कारण डिलीवरी के दौरान कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड सकता है. इसके अलावा जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर बच्चे का समय से पहले जन्म और पीलिया की दिक्कत भी हो सकती है. सर्वे के दौरान जिन महिलाओं ने हफ्ते में 3 बार शुगरी ड्रिंक्स का सेवन किया उनमें जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा 38 फीसदी ज्यादा पाया गया. साथ ही इन महिलाओं में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का खतरा भी 64 फीसदी ज्यादा पाया गया.  सर्वे में यह भी पाया गया कि प्रेग्नेंसी के दौरान शुगरी ड्रिंक्स का सेवन ज्यादा करने से भ्रूण को खून की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती जिस कारण उसकी ग्रोथ पर इसका काफी बुरा असर पड़ता है. साथ ही,  इसकी वजह से प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है. हफ्ते में चार बार इन शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करने से मैक्रोसोमिया का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, एक ऐसी स्थिति जिसमें नवजात शिशु औसत से बहुत बड़ा होता है. इस सर्वे के अंत में रिसर्चर्स ने कहा कि प्रेग्नेंसी में बहुत अधिक मात्रा में शुगरी ड्रिंक्स का सेवन करने से जेस्टेशनल डायबिटीज और जेस्टेशनल हाइपरटेंशन की समस्या का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. साथ ही इससे मैक्रोसोमिया की समस्या का भी सामना करना पड़ता है.   रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि महिलाएं अपने खानपान का खास ख्याल रखें और हेल्दी चीजों का ज्यादा से ज्यादा मात्रा में सेवन करें. प्रेगनेंसी में सोडा पीने के नुकसान कैफीन सोडा में कैफीन की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक होती है। सोडा पीने से अनिद्रा की समस्या के साथ ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। कैफीन का सीधा असर शिशु की सेहत पर भी पड़ता है। ज्यादा कैफीन के सेवन से बच्चे को पैदा होते समय सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। सोडा पीने से महिला के शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। वहीं इसके वजह से महिला को पेट खराब भी हो सकता है। चीनी की ज्यादा मात्रा सोडा में चीनी की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है, जो महिला और शिशु दोनों के लिए सही नहीं होती। प्रेगनेंसी में ज्यादा चीनी की मात्रा लेने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है और मिस्कैरिज की संभावना भी बढ़ती है। प्रेगनेंसी में चीनी ज्यादा खाने से शिशु में जन्म के समय भी कई समस्याएं हो सकती हैं। आर्टिफिशियल कलर सोडा को कलर देने के लिए इसमें आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है। इस आर्टीफिशयल कलर में मीठा होने के साथ फॉस्फोरिक एसिड होता है, जो प्रेगनेंसी के समय लेने से महिला की हड्डियों को कमजोर बना सकता है। नियमित सोडा पीने से शरीर में कैल्शियम प्रभावित होता है, जो बच्चे की हड्डियों को भी कमजोर करता हैं। recent visitors 160