जस्टिस बीआर गवई आज ली 52वें सीजेआई के रूप में शपथ, दे चुके हैं ये बड़े फैसले

नई दिल्ली जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने आज सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले ली है. वह सुप्रीम कोर्ट के 52वें सीजेआई बन गए हैं. देश के इस अहम पद पर बैठने से पहले उन्होंने अपनी मां का आशीर्वाद लिया. CJI पद की शपथ लेते ही सबसे पहले उन्होंने अपनी मां कमलताई गवई के पैर छुए. जस्टिस गवई भारत के पहले बौद्ध सीजेआई हैं. आजादी के बाद वह देश में दलित समुदाय से दूसरे सीजेआई हैं.  सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर उनका कार्यकाल छह महीने का होगा.   जस्टिस वीआर गवई के अहम फैसले जानें न्यायधीश रहते जस्टिस वीआर गवई ने कई अहम फैसले दिए, जिनकी खूब चर्चा हुई. उनके मुख्य फैसलों में बुलडोजर जस्टिस, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को बरकरार रखना, डिमोनेटाइजेशन को बरकरार रखना, अनुसूचित जाति कोटे में उप-वर्गीकरण को बरकरार रखना, शराब नीति में के कविता को जमानत देना, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी की दो बार आलोचना करना शामिल हैं. देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस गवई परंपरा के अनुसार, वर्तमान सीजेआई अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की सिफारिश करते हैं। जस्टिस गवई वरिष्ठता के क्रम में सबसे आगे थे, जिसके चलते उनके नाम की सिफारिश की गई। कानून मंत्रालय ने सीजेआई जस्टिस खन्ना से उनके उत्तराधिकारी का नाम देने की आधिकारिक अपील की थी। ऐसा रहा करियर 16 मार्च, 1985 को वकालत शुरू करने वाले न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में सेवा दी। 17 जनवरी, 2000 को उन्हें नागपुर खंडपीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया। 14 नवंबर, 2003 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 12 नवंबर, 2005 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 24 मई, 2019 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। न्यायमूर्ति गवई सर्वोच्च न्यायालय में कई ऐसी संविधान पीठों में शामिल रहे, जिनके फैसलों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा। दिसंबर 2023 में, उन्होंने पांच जजों की संविधान पीठ में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को सर्वसम्मति से बरकरार रखा। पिता रहे हैं बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। जस्टिस गवई के पिता दिवंगत आरएस गवई भी एक मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल रहे। जस्टिस गवई देश के दूसरे अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन साल 2010 में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। कई मामलों पर जस्टिस बीआर गवई ने सुनाए ऐतिहासिक फैसले राजीव गांधी हत्याकांड (2022) जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 30 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद दोषियों की रिहाई को मंजूरी दी, यह मानते हुए कि तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। वणियार आरक्षण (2022) तमिलनाडु सरकार को वणियार समुदाय को विशेष आरक्षण देने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया, क्योंकि यह अन्य पिछड़ा वर्गों के साथ भेदभावपूर्ण था। नोटबंदी (2023) जस्टिस गवई ने 2016 की नोटबंदी योजना को 4:1 बहुमत से वैध ठहराते हुए कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच परामर्श के बाद लिया गया था और यह "अनुपातिकता की कसौटी" पर खरा उतरता है। ईडी निदेशक का कार्यकाल (2023) जुलाई 2023 में जस्टिस गवई की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया और उन्हें 31 जुलाई 2023 तक पद छोड़ने का निर्देश दिया था। बुलडोजर कार्रवाई (2024) 2024 में, जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि केवल आरोपी या दोषी होने के आधार पर किसी की संपत्ति को ध्वस्त करना असंवैधानिक है। कार्रवाई बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं कर सकते, अगर होती है तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा।   अन्य फैसले     मोदी सरनेम केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत दी थी। उन्हें इस केस में दो साल की सजा के बाद लोकसभा से अयोग्य करार दिया गया था।     सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ को जमानत दी।     दिल्ली शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जमानत दी।     दिल्ली शराब घोटाले में बीआरएस नेता के कविता को भी जमानत दी। 1985 में की वकालत की शुरुआत नए CJI गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था. उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की. शुरुआती सालों में उन्होंने बार. राजा एस. भोसले (पूर्व महाधिवक्ता एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) के साथ 1987 तक कार्य किया. इसके बाद 1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की. जस्टिस गवई ने 1990 के बाद मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेचं में प्रैक्टिस की, जिसमें संवैधानिक और प्रशासनिक कानून विशेष क्षेत्र रहे. वह नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील रहे. इसके अलावा, उन्होंने सीकोम, डीसीवीएल जैसी विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं और निगमों, विदर्भ क्षेत्र की कई नगर परिषदों के लिए नियमित रूप से पैरवी की.   recent visitors 35

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हॉस्पिटल में पेट स्कैन मशीन का शुभारंभ करने के साथ हॉस्पिटल का अवलोकन भी किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनिर्मित अपोलो हॉस्पिटल का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैंसर यूनिट और पेट स्कैन मशीन का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हॉस्पिटल में पेट स्कैन मशीन का शुभारंभ करने के साथ हॉस्पिटल का अवलोकन भी किया जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अपोलो हॉस्पिटल, जबलपुर सहित मध्य भारत के लिए स्वास्थ्य जगत के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने संस्कारधानी को मिली अपोलो हॉस्पिटल की श्रृंखला की सौगात को संपूर्ण महाकौशल के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जबलपुर पाटन बायपास स्थित नवनिर्मित अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल के कैंसर यूनिट के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हॉस्पिटल में पेट स्कैन मशीन का शुभारंभ करने के साथ हॉस्पिटल का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल के प्रबंधक बड़ेरिया परिवार की प्रशंसा की। उन्होंने ने कहा कि कोरोना काल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके द्वारा दी गई सेवाएं अविस्मरणीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस हॉस्पिटल में स्थापित राधाकृष्ण जी की प्रतिमा की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, सांसद श्री आशीष दुबे, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक पनागर श्री सुशील तिवारी इंदु, जबलपुर केंट के विधायक श्री अशोक रोहाणी, जबलपुर उत्तर के विधायक डॉ. अभिलाष पांडे, विधायक सिहोरा श्री संतोष वरकड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोटिया, भाजपा के नगर अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, भाजपा के ग्रामीण अध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल, पूर्व महापौर श्री प्रभात साहू, पूर्व विधायक श्री नीलेश अवस्थी, डॉ. जितेंद्र जामदार, कलेक्टर दीपक सक्सेना, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, निगमायुक्त श्रीमती प्रीति यादव, अस्पताल प्रबंधन के सौरभ बड़ेरिया, डॉ. राजीव बड़ेरिया, शोभित बड़ेरिया एवं डॉ. सुनील मिश्रा सहित अस्स्पताल के चिकित्सक, स्टॉफ व आमजन उपस्थित रहे।   recent visitors 28

जल्द मध्‍य प्रदेश में विधायकों को दिया जा सकता है एक और कर्मचारी

भोपाल मध्य प्रदेश के सभी विधायकों को अभी विधायी और क्षेत्र की जनता से जुड़े कामकाज के लिए एक सरकारी कर्मचारी दिया जाता है। इनके बीमार होने या अन्य कारण से अवकाश पर चले जाने के कारण कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने विधायकों को एक-एक कर्मचारी और दिए जाने की सरकार से अनुशंसा की है। सामान्य प्रशासन विभाग समिति यह प्रस्ताव विचार करने के लिए उच्च स्तर पर भेजेगा। विधायकों को विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्न या अन्य सूचनाओं समय पर विधानसभा सचिवालय भेजनी होती है।       पूरी व्यवस्था ऑनलाइन हो चुकी है। इसी तरह, स्वेच्छानुदान और निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि से जुड़े कामों को लेकर पत्राचार करना होता है।     चूंकि, विधायक क्षेत्र के दौरे पर रहते हैं, इसलिए इस कार्य के लिए उन्हें सहायक की आवश्यकता होती है।     इसे देखते हुए सरकार ने जिला स्तर पर एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी विधायकों को देने की व्यवस्था बनाई है।     1995 में इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने परिपत्र भी जारी किया।     विधायकों ने सदस्य सुविधा समिति के समक्ष यह मांग रखी कि वर्तमान संदर्भ में काम बढ़ गया है।     केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाएं हैं, जिन्हें लेकर पत्राचार करने होते हैं।     विधायक कई समितियों के सदस्य भी होते हैं। ऐसे में एक कर्मचारी अपर्याप्त है।     वह कार्यालयीन समय के बाद चला जाता है या अवकाश पर होता है तो काम प्रभावित हो जाता है।     इसे देखते हुए एक कर्मचारी और दिया जाना चाहिए।     समिति ने मांग को व्यावहारिक मानते हुए सरकार से अनुशंसा की है कि विधायकों को एक-एक कर्मचारी और दिया जाए।     सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के साथ ही समिति की बैठक में इस पर चर्चा भी हो चुकी है।     नीतिगत मामला होने के कारण यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री तक जाएगा और अंतिम निर्णय होगा।   recent visitors 26

इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 14 मई को बेंगलुरु में इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में निवेशकों से होंगे रूबरू  इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश रोड शो में बीईएमएल के साथ औद्योगिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार इन्वेस्ट इन एमपी सत्र में प्रमुख उद्योग समूह होंगे शामिल भोपाल मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 मई को बेंगलुरु में सीइन्वेस्ट इन एमपीसी सत्र में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीईएमएल (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) परिसर का भ्रमण करेंगे, साथ ही 2100वें मेट्रो कोच के लोकार्पण समारोह में सम्मिलित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज़ इन मध्यप्रदेश’ विषय पर आयोजित इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं और नीतिगत प्रतिबद्धताओं को देश के अग्रणी निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। बीईएमएल परिसर में रहेगा कार्यक्रमों का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु पहुंचने के बाद बीईएमएल परिसर जाएंगे, जहां उनका स्वागत बीईएमएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और बोर्ड के सदस्यों द्वारा किया जाएगा। बीईएमएल शॉप विज़िट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेट्रो कोच लोकार्पण और टेस्ट राइड में सम्मिलित होंगे। इसके उपरांत वे इंटीग्रेटेड डिज़ाइन सेंटर का भ्रमण करेंगे और बीईएमएल के भोपाल संयंत्र पर प्रस्तुति देखेंगे। बीईएमएल द्वारा मध्यप्रदेश में स्थापित की जा रही इकाई के लिए ज़मीन आवंटन पत्र सौंपे जाने की औपचारिकता भी इस अवसर पर होगी। बेंगलुरु में ‘इन्वेस्ट इन एमपी’ सत्र में होगा राज्य की औद्योगिक ताकत का प्रदर्शन 'द लीला पैलेस' में आयोजित इन्टरैक्टिव सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योग समूहों, निवेशकों और टेक्नोलॉजी कंपनियों से संवाद करेंगे। इस सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, अधोसंरचना और क्षेत्रवार निवेश अवसरों पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग श्री संजय दुबे तथा प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला शामिल मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर निवेशकों जानकारी देंगे । निवेशकों के साथ होंगे वन-टू-वन मीटिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों के माध्यम से सीधे संवाद करेंगे। इन संवादों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, ऑटोमोबाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी सेक्टर के प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। मध्यप्रदेश बन रहा है ‘मेक इन इंडिया’ का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार एक मजबूत औद्योगिक आधार तैयार कर रहा है। देश के बड़े औद्योगिक समूहों के साथ संवाद की यह श्रृंखला राज्य को निवेश के नए क्षितिज की ओर ले जा रही है, जहां नीति, संसाधन और नेतृत्व तीनों ही स्तर पर उद्योगों को सुरक्षित और गतिशील मंच प्राप्त हो रहा है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जो मेट्रो रेल कोच, रक्षा उपकरण, खनन एवं निर्माण मशीनरी के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बेंगलुरु स्थित इसका विनिर्माण परिसर आधुनिक इंजीनियरिंग और स्वदेशी तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है, और यह आत्मनिर्भर भारत के विजन में महत्त्वपूर्ण भागीदार है।   recent visitors 25

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए

 उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने उज्जैन को एक बार बड़ी सौगात दी है। उन्होंने दो एलिवेटेड कॉरिडोर(Elevated Corridors) बनाने की सैद्धांतिक सहमति दी है। यह कॉरिडोर मकोड़िया आम चौराहे से चामुंडा चौराहे, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज और निकास चौराहे से दौलतगंज होते हुए इंदौरगेट बनेंगे। सिंहस्थ में यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों के बीच समानांतर फोरलेन योजना बनाने को कहा। मेडिसिटी निर्माण को देख शहर को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में प्लानिंग कर विकास कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने के निर्देश सीएम ने  सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर समीक्षा की। अधिकारियों से कहा कि सभी कार्य समय सीमा में गुणवत्ता और मापदंड के अनुसार हों। एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करे। उन्होंने सिंहस्थ निर्माण कार्यों में शहर के आसपास सड़कों का जाल बिछाकर यातायात सुगम करने और संपूर्ण मेला क्षेत्र की कनेक्टिविटी 4 और 6 लेन करने की जानकारी दी। सीएम ने कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीक से करने को कहा। सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालु आने का अनुमान सीएम बोले- हमने अधिकारियों को ये भी कहा कि इसके ऊपर पिलर और जोड़ दें, ताकि भविष्य में मेट्रो निकल सके। सिंहस्थ में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती रहने वाली है। इसके लिए उज्जैन की चारों दिशाओं के मार्गों का विस्तार हो रहा है। आंतरिक मार्ग भी चौड़े हो रहे हैं। एलिवेटेड ब्रिज बनाकर भी भीड़ प्रबंधन की प्लानिंग की गई है। नागपुर में ऐसे एलिवेटेड ब्रिज हैं, जिनमें नीचे ट्रक-बस गुजरते हैं और ऊपर मेट्रो ट्रेन चलती है। लोनिवि की सेतु शाखा सर्वे कर सौपेंगी रिपोर्ट सीएम द्वारा एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी के बाद अब लोनिवि की सेतु शाखा का अमला जल्द ही शहर के कुछ मार्ग पर इनके निर्माण की संभावनाओं को तलाशेगा। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य रूप से बुधवारिया से इंदौर गेट तक और मकोड़ियाआम नाका-इंदिरा नगर से रेलवे स्टेशन-हरिफाटक तक एलिवेटेड ब्रिज के लिए सर्वे किया जाएगा। इधर इसके अलावा इन ब्रिज से नीलगंगा-पेशवाई स्थल, मंछामन गणेश मंदिर क्षेत्र को भी जोड़ने के लिए सर्वे होगा। इसके बाद ही फाइनल हो पाएगा कि वास्तव में किस मार्ग पर ये एलिवेटेड ब्रिज बनेंगे, क्योंकि समय सीमा की भी चुनौती रहने वाली है। कलेक्टर ने यह भी बताया कि हवाई पट्टी का भी विस्तार किया जाना है। इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी सर्वे कर चुकी है। बुधवारिया से इंदौर गेट तक के मार्ग को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की टीम ने सर्वे कर लिया था। इसमें बड़ी संख्या में मार्ग के दोनों तरफ के व्यापारी प्रभावित हो रहे थे। चूंकि, अब इस मार्ग के ऊपर एलिवेटेड ब्रिज की मंजूरी सीएम ने दे दी है तो चौड़ीकरण नहीं होगा। कोई टूट-फूट नहीं होगी। बोले कि जब हमारे प्रधानमंत्री एक भी सैनिक को पार कराए बगैर रावलपिंडी में अटैक कर सकते हैं तो हमने भी सोचा कि निकास चौराहा (बुधवारिया) से इंदौर गेट तक बगैर किसी मकान को हाथ लगाए ऊपर रोड-ब्रिज बना दिए जाएं, ताकि नीचे कारोबार होता रहे और ऊपर से बस-ट्रक गुजरते रहे। इससे अच्छा क्या प्लान हो सकता हैं। ये हमारे शहर का सर्वाधिक व्यस्ततम मार्ग भी है। नीचे महाकाल की सवारी, जलसे-जुलूस निकलेंगे और ऊपर से वाहन गुजरते रहेंगे। तैयारी के निर्देश     सभी मुख्य देवस्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाएं।     न्यायिक संस्था शुरू की जाएगी। कार्ययोजना पाइपलाइन में रखें।     इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी की कार्ययोजना में उज्जैन में विकास कार्य का ब्लूप्रिंट तैयार करें। recent visitors 37

सरकार ने ग्रीन सिटी पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया, जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में दो वर्ष के अंदर 10 शहरों को ग्रीन सिटी(Green Cities) के तौर पर विकसित करने की कोशिश है। इसके लिए मुख्यत: हेरिटेज टाउन, पर्यटन स्थल और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के नगरों को चुना जाएगा। इन नगरों में 75% नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट सांची और खजुराहो में शुरू कर दिया है। जल्द ही अन्य नगरों में भी काम शुरू हो जाएगा। ग्रीन सिटी के तौर पर विकास के लिए नगरों के चयन की प्रक्रिया जारी है। इसमें महेश्वर, चंदेरी, मांडू, ओरछा, अमरकंटक, भीमबेटका, ओंकारेश्वर, चित्रकूट जैसे नगरों के चयन पर विचार चल रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 की गाइडलाइन में इस संबंध में प्रावधान किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के एसीएस मनु श्रीवास्तव के अनुसार चयनित नगरों में सालभर घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ता जितनी बिजली का उपयोग करते हैं उसका 75त्न हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से सप्लाई करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। धार्मिक, सांस्कृतिक महत्त्व के भवनों में शत प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग होगा। 6 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ता आरई पर होंगे शिफ्ट अधिकारियों के अनुसार ग्रीन सिटीज में 6 किलोवाट से अधिक लोड के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को नवीकरणीय ऊर्जा पर शिफ्ट किया जाएगा। उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति के तहत सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के लिए १००त्न नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग अनिवार्य होगा। स्कूल, राशन दुकान, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र आदि में जहां सुबह 6 से रात 8 बजे तक काम होता है, वहां भी नवीकरणीय ऊर्जा की सप्लाई होगी। इस तरह बदलेंगे ग्रीन सिटी में     इन नगरों में अलग ग्रीन सबस्टेशन बनाए जाएंगे।     हॉकर्स और वेंडर्स भी सोलर लैंटर्न का उपयोग करेंगे, इसके लिए सहायता भी मिलेगी।     सभी स्ट्रीट लाइट्स सोलर से संचालित होंगी। इन्हें ग्रीन स्ट्रीट्समें बदला जाएगा।     रहवासी समितियां और बहुमंजिला भवनों में कॉमन एरिया में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।     6 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी छत पर उपयोग किए जा रहे लोड के 50 फीसदी क्षमता का सोलर रूफ टॉप लगानाअनिवार्य होगा।     ग्रीन सिटीज में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दिया जाएगा। चार्जिंग स्टेशनों को भी 50 फीसदी बिजली नवकरणीय स्रोतों से लेना होगी।     ग्रीन सिटीज में कम्युनिटी बेस्ड रीन्यूवेबल फार्मिंग को बढ़ावा देकर वहां आरई पावर प्लांट लगाया जाएगा। इसे पॉलिसी के तहतइंसेंटिव और सब्सिडी मिलेगी।     इसी प्रकार कम्युनिटी बेस्ड बायोगैस प्लांट भी विकसितकिए जाएंगे। इसे भी सरकारइंसेंटिव देगी। recent visitors 29

एमपी में मृतक खा गए करोड़ों का गेहूं-चावल, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

 गुना मध्यप्रदेश के गुना शहर के वार्ड आठ में रहने वाली कला बाई, लक्ष्मण सिंह अब इस संसार में नहीं हैं। इसी तरह बमोरी के प्रेमा, प्रताप, और मारकीमहू की पिंकी भी दुनिया छोड़कर जा चुक है। लेकिन इन लोगों के नाम से आज भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना(Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana) का राशन जारी होता रहा। जिले में ऐसे कई मामले हैं जहां इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जिले में 4989 मृतकों के नाम राशन जारी होने की जानकारी सामने आई है। इससे महीने करीब 8.43 लाख रुपए चपत सरकार को लग रही है। यह स्थिति पिछले तीन से चार साल से चल रही है। लेकिन कभी विभाग की नजर में यह नहीं आया। केंद्र सरकार ने स्मार्ट पीडीएस सिस्टम लागू कराने के लिए जैसे ही उपभोक्ताओं की ईकेवायसी कराई तो पूरी गड़बड़ी सामने आ गई। इसके बाद अब ऐसे लोगों के नाम उड़ाए जा रहे हैं, जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके परिवार के सदस्य इनके नाम से राशन ले रहे थे। इस तरह एक साल में एक करोड़ से अधिक की चपत शासन को लग रही थी। अगर पिछले पांच साल की स्थिति देखे तो तीन से चार करोड़ रुपए का नुकसान सरकार को उठाना पड़ा है। इस तरह पकड़ी गई पूरी गड़बड़ी दरअसल केंद्र सरकार ने पीडीएस सिस्टम को ऑनलाइन करने को लेकर स्मार्ट राशन व्यवस्था लागू की है। इसके तहत जिले के प्रत्येक वह व्यक्ति जिसके नाम से राशन जारी होता है, उसकी बायोमैट्रिक ईकेवायसी होनी है। यह प्रक्रिया जिले में पिछले दो साल से चल रही है। इस दौरान जिला आपूर्ति विभाग का अमला, पंचायत के कर्मचारी और मैदानी अमला जांच कर रहा है। परिवार के यहां पहुंचकर जब सभी सदस्यों की जानकारी ली जाती है तो पता चलता है कि कई लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन किसी ने भी पात्रता पर्ची से नाम नहीं कटवाया है। इस वजह से राशन जारी होता रहा। हालांकि जिले में दिवंगत 4989 लोगों के नाम से राशन जारी होता रहा। यह स्थिति लंबे समय से चल रही है। मृतकों की संख्या हर साल बढ़ती गई, लेकिन पात्रता पर्ची से नहीं घटी। इसलिए इन सभी के नाम अब उड़ा दिए गए हैं। शहर से लेकर गांव तक फैला है जंजाल शहर के वार्ड क्रमांक आठ में कला बाई, लक्ष्मण की डेढ़ साल पहले ही मौत हो चुकी है। लेकिन इनके नाम से राशन जारी हो रहा था। इसी तरह मारकीमहू बाली बाई, पिंकी का भी निधन हो चुका है, लेकिन परिवार के लोग राशन ले रहे थे। वहीं बमोरी के डोगरी में प्रेमा, करोला में प्रताप के नाम से भी राशन जारी होता रहा, जबकि इनका निधन काफी समय पहले हो चुका है। फर्जीवाड़े का पूरा गणित गरीब कल्याण योजना के तहत जिले भर में 2 लाख 17 हजार परिवारों को मुत अनाज दिया जाता है। इन परिवारों में सदस्य संया 9 लाख 50 हजार है। इस तरह प्रत्येक सदस्य के नाम पर दो किलो गेहूं और तीन किलो चावल दिए जाते हैं। वहीं एक रुपए किलो नमक दिया जाता है। शासन द्वारा प्रत्येक सदस्य को 30 रुपए किलो कीमत का गेहूं और 40 रुपए किलो कीमत का चावल मुत दिया जाता है। इस तरह एक सदस्य पर प्रतिमाह 170 रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन जिले में 4989 सदस्यों जो मृत हो चुके हैं, उनके नाम पर भी राशन जारी हुआ। इस तरह इन मृत सदस्यों के राशन पर शासन ने हर माह 8.43 लाख रुपए खर्च किए। अगर साल का आंकड़ा देखें तो यह एक करोड़ से अधिक पर पहुंच जाता है। इस तरह यह गड़बड़ी पिछले तीन से चार साल से चल रही है। केंद्र सरकार का स्मार्ट पीडीएस सिस्टम लागू होने वाला है, इस दौरान हर परिवार के सदस्यों की ईकेवायसी कराई जा रही है। इसी दौरान पता चला है कि दिवंगत लोगों के नाम से भी परिवार के लोगों ने राशन ले लिया है। अब इनके नाम काटे जा रहे हैं। वहीं लोगों से अपील की गई है कि वह अपनी पात्रता पर्ची को दुरुस्त कराएं।- अवधेश पांडे, जिला आपूर्ति अधिकारी recent visitors 28