Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa: शरीर ही नहीं, मन की भी होनी चाहिए सफाई

Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa

Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa: Not only the body, but the mind should also be cleansed लाइफस्टाइल डेस्क: Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa उन संतों में से थे, जिनका आचरण साधारण नहीं, बल्कि अलौकिक था। उनका व्यवहार सहज, ईश्वर के प्रेम में डूबा हुआ था। वे कभी भक्तिभाव में रोने लगते, कभी अचानक आनंद से झूमने लगते थे। कई बार मां काली की मूर्ति के सम्मुख समाधि की अवस्था में पहुंच जाते थे। उनके शिष्य यह भलीभांति जानते थे कि उनके गुरु हर कार्य अपने ही अद्भुत अंदाज में करते हैं। एक ऐसा काम था, जिसे परमहंसजी अत्यंत एकाग्रता और गहराई से करते थे, वह काम था उनका लोटा मांजना यानी साफ करना। परमहंसजी के पास एक साधारण पीतल का लोटा था, जिसका उपयोग वे केवल निजी कार्यों के लिए करते थे। किंतु वह लोटा उनके लिए केवल एक बर्तन नहीं था। वे दिन में तीन से चार बार उसे रगड़-रगड़ कर चमकाते। सुबह उठते ही और रात को सोने से पहले लोटा मांजना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। वे अंगूठे से भीतर-बाहर उसे इतनी लगन से मांजते कि उसमें प्रतिबिंब साफ दिखाई देने लगे। Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa शिष्य प्रतिदिन यह दृश्य देखते और चकित होते, एक आत्मज्ञानी संत, जिनके लिए संसार का कोई आकर्षण नहीं, वह एक लोटे को इतनी लगन से क्यों साफ करते हैं? एक दिन शिष्यों ने पूछा कि – “गुरुदेव, ये लोटा तो हम भी साफ कर सकते हैं, फिर आप ही इसे इतनी तन्मयता से क्यों मांजते हैं? क्या यह कोई विशेष लोटा है?” रामकृष्ण परमहंस मुस्कराए, उनकी आंखों में करुणा और ज्ञान की चमक थी। उन्होंने कहा, “हां, ये लोटा विशेष है, क्योंकि ये मेरा मन है। मैं जब इस लोटे को मांजता हूं तो ये नहीं सोचता कि ये सिर्फ पीतल का बर्तन है। मैं इसे प्रतीक मानता हूं अपने मन का। जिस प्रकार इस पर दिन भर धूल जमती है, ठीक वैसे ही हमारे मन पर भी हर पल विचारों की गंदगी जमा होती रहती है। अगर मैं एक बार भी इसकी सफाई छोड़ दूं तो ये गंदा हो जाएगा, जैसे मन की गंदगी इंसान को भ्रमित कर देती है। लोटे को मांजते समय मैं खुद को याद दिलाता हूं कि अपने मन को भी इसी श्रद्धा, सतर्कता और नियमितता से साफ करना चाहिए, क्योंकि एक गंदा मन, हमें पाप की ओर धकेल सकता है।” Read more: हिमाचल 78वां स्थापना दिवस विशेष : CM सुक्खू पांगी में, जिलों में मंत्री फहराएंगे तिरंगा रामकृष्ण परमहंस की सीख हमें न केवल अपने शरीर और आसपास की, बल्कि अपने मन की पवित्रता की भी चिंता करनी चाहिए। जब तक मन शुद्ध नहीं होगा, तब तक कर्म और भावनाएं भी पवित्र नहीं हो सकतीं। यदि मन पर ध्यान नहीं देंगे तो मन हमें पथभ्रष्ट कर सकता है। बाहरी सफाई के साथ ही हमें मन के नकारात्मक विचारों को दूर करते रहना चाहिए, तभी जीवन में सुख-शांति आ सकती है। recent visitors 110

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

why were homes plastered with cow dung in earlier times pehle ke samay me gobar se kyon leepa jata tha plastered with cow dung आज भी जब हम गांव जाते हैं तो सुबह की पहली किरण के साथ जो सोंधी खुशबू उठती थी, वह सिर्फ मिट्टी की नहीं, गोबर से लिपे आंगनों की होती थी। यह परंपरा असल में सनातन धर्म की उन गहराइयों से जुड़ी है जहां हर वस्तु का एक दिव्य और व्यावहारिक अर्थ छुपा होता है। गोबर से घर लीपने से वह शुद्ध और ठंडा बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पहले के समय में घर को गोबर से क्यों लीपा जाता है। क्या ये सिर्फ एक चली आ रही कोई परंपरा थी, या इसके पीछे कुछ कारण भी थे? आइए जानते हैं। क्यों गोबर से लीपा जाता था घर? सनातन परंपरा में गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले जब घर के आंगन को गोबर से लिपा जाता है, तो वह सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि भूमि को ऊर्जा देने की एक क्रिया होती है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए कहते हैं, “गोमय वसते लक्ष्मी”। इसका अर्थ यही है कि जहां गोबर है, वहां समृद्धि, सकारात्मकता और पवित्रता खुद आ जाती है। plastered with cow dung Read more: इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका? पंचगव्य बनाने में भी आता है काम गोबर केवल धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि यह पंचगव्य का भी एक आवश्यक हिस्सा है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी आदि शामिल है। इन पांच तत्वों का मिश्रण न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि यह आयुर्वेद में एक औषधीय तत्व के रूप में भी प्रयोग होता है। कुछ पुराणों में यह साफ बताया गया है कि पंचगव्य का सेवन पापों को हरने वाला और रोगों को मिटाने वाला होता है। plastered with cow dung शुभ कार्य के दौरान गोबर का किया जाता है इस्तेमाल धार्मिक ग्रंथों में गोबर का जो स्थान है, इसे किसी भी प्रकार से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है। अथर्ववेद से लेकर गरुड़ पुराण और मनुस्मृति तक में गोबर और गाय से जुड़े पदार्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसलिए जब भी घर में कई त्यौहार मनाया जाता है या फिर कोई शुभ कार्य, जैसे कि हवन या पूजा किया जाता है तो पूरे घर को गोबर से लीपा जाता है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि हो। घर में मक्खियों, मच्छरों को भी दूर भगाता है गोबर बता दें कि गोबर कीट-पतंगों से रक्षा करने में काफी असरदार साबित होता है। गोबर से घर में मक्खियां, मच्छर, और कीट दूर रहते हैं। यही कारण है कि गांवों में गोबर से लिपे घरों में रोगों का प्रकोप कम देखा गया है। इसके अलावा, यह पूरी तरह जैविक है, पर्यावरण के अनुकूल है, और धरती को हानि नहीं पहुंचाता। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए “माइ सीक्रेट न्यूज़” उत्तरदायी नहीं है। recent visitors 122

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

injection tablet or liquid what is the fastest way to get medication into the body Way to Get Medication into the Body : किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से उन्हे दवाएं देते हैं. डॉक्टर अपने मरीजों को दवाएं कई रूपों में देते हैं, जिसमें टैबलेट, कैप्सूल, लिक्विड सिरप, इंजेक्शन या फिर इन्हेलर जैसे अन्य विकल्प होते हैं. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इनमें से किस तरह की दवाएं सबसे अधिक असरदार होती हैं? तो आपको बता दें कि इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की समस्या हुई है और आपकी स्थिति कितनी गंभीर है. आइए जानते हैं इस बारे में- medication into the body टैबलेट और कैप्सूल टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है. इन्हें लेना आसान होता है, ये लंबे समय तक स्टोर की जा सकती हैं और कम खर्चीली भी होती हैं. हालांकि, इन्हें पचने और खून में घुलने में समय लगता है, इसलिए ये उन बीमारियों में दी जाती हैं जिनमें तुरंत असर की जरूरत नहीं होती, जैसे – सामान्य बुखार, दर्द, एलर्जी, ब्लड प्रेशर इत्यादि स्थितियों में टैबलेट और कैप्सूल जैसी दवाएं दी जाती हैं. medication into the body Read more: एमपी में जल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, नल जल योजना पूरी तरह फेल लिक्विड जिन मरीजों के निगलने की क्षमता कम होती है, जैसे- छोटे बच्चे या बुजुर्ग, उन्हें दवाएं लिक्विड दी जाती हैं. लिक्विड में मिलने वाली दवाएं जल्दी अवशोषित होती हैं और स्वाद के अनुसार बनाई जाती हैं. पर इनकी मात्रा का सही निर्धारण जरूरी होता है. इंजेक्शन किसी भी मरीज को इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब दवा को शरीर में तुरंत पहुंचाना होता है. इंजेक्शन सबसे सबसे प्रभावी तरीका होता है. ये सीधे खून में (IV), मांसपेशी (IM) या स्किन के नीचे (SC) दिए जाते हैं. इंजेक्शन गंभीर संक्रमण, एलर्जी रिएक्शन या सर्जरी के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, गंभीर संक्रमण, डायबिटीज (इंसुलिन) जैसी स्थितियों में दिया जाता है. सबसे सही तरीका कौन सा है? दवाएं देने का कोई सही तरीका नहीं होता है. यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी की गंभीरता क्या है? दवा कितनी जल्दी असर दिखानी चाहिए? मरीज की उम्र और शारीरिक स्थिति क्या है? हर दवा देने का तरीका अपनी जगह सही होता है. डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं. खुद से दवाओं का रूप या तरीका बदलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है. recent visitors 127

लाइफस्टाइल- गर्मियों में फायदेमंद गन्ने का जूस: लू से बचाए, शरीर को रखे हाइड्रेटेड, डाइटीशियन से जानें किन्हें नहीं पीना चाहिए

Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial

Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial in summers: Protects from heat wave, keeps the body hydrated, know from dietician who should not drink it हेल्थ डेस्क: Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial आपने गर्मी के मौसम में अपने आसपास गन्ने का जूस बिकते जरूर देखा होगा। तेज धूप और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोग इसे खूब पीते हैं। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह शरीर को हाइड्रेट के साथ-साथ एनर्जेटिक भी रखता है। इसके अलावा गन्ने का रस पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, इम्यूनिटी बूस्ट करने और स्किन को हेल्दी बनाए रखने में भी मददगार है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फार्माकोग्नॉसी जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने के जूस के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में पीलिया व यूरिन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए गन्ने का जूस पीने की सलाह दी जाती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स का खजाना होता है। Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial गन्ना अनुसंधान केंद्र की एक स्टडी के मुताबिक, इसके जूस में हाई पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो पावरफुल फाइटोन्यूट्रिएंट्स हैं। गन्ने के जूस में बैड कोलेस्ट्रॉल से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही ये मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है। इसलिए, आज जरूरत की खबर में गन्ने का जूस पीने के फायदों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- गन्ने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने में 70-75% पानी, 13-15% सुक्रोज (नेचुरल शुगर) और 10-15% फाइबर होता है। हालांकि गन्ने का जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है। नीचे दिए ग्राफिक में 250ml जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू जानिए- सवाल– गन्ने का जूस सेहत के लिए किस तरह से फायदेमंद है? जवाब- गन्ने के जूस में मौजूद विटामिन C और फ्लेवोनोइड्स व फेनोलिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ये एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में पानी होता है। गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर, फाइबर और इनवर्टेज जैसे एंजाइम होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गन्ना सुक्रोज और ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट का एक नेचुरल सोर्स है, जो इंस्टेंट एनर्जी देता है। गन्ने के डाइयूरेटिक गुण यूरिन के जरिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार हैं। गन्ने में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। इसमें मौजूद कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। ये उम्र बढ़ने के संकेतों जैसे झुर्रियां, महीन रेखाएं और स्किन के दाग-धब्बे को कम करते हैं। वहीं पॉलीफेनोल और पोटेशियम जैसे कंपाउंड कार्डियो प्रोटेक्टिव होते हैं। गन्ने के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आर्टरीज की सूजन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। इसका जूस शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट को भी बैलेंस करता है। इस तरह ये हमें गर्मी में हीट स्ट्रोक के खतरे से बचाता है। नीचे दिए ग्राफिक से गन्ने का जूस पीने के कुछ फायदे समझिए- सवाल- गन्ना या गन्ने का जूस क्या ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि चाहे गन्ने की बाइट चबाएं या उसका जूस पिएं दोनों ही फायदेमंद है। हालांकि गन्ने में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इसलिए जूस पीने से ज्यादा इसे चबाना बेहतर है। सवाल- क्या गन्ने में बर्फ डालकर पीना सेहत के लिए अच्छा है? जवाब- बर्फ डालने से गन्ने का रस ठंडा हो जाता है, जिससे गर्मी में ताजगी मिलती है। ठंडा गन्ने का जूस पीने से गर्मी से तुरंत राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को इससे सर्दी-जुकाम, खांसी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बहुत ज्यादा बर्फ वाला गन्ने का रस पीने से बचना चाहिए। सवाल- गन्ने का जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- गन्ने का जूस निकालने के तुरंत बाद पीना सबसे अच्छा होता है। बासी गन्ने के जूस में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। गन्ने का जूस हमेशा किसी साफ और स्वच्छ दुकान से ही पिएं। जिस मशीन से जूस निकाला जा रहा है, वह साफ-सुथरी होनी चाहिए। गन्ने का जूस पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर से पहले का होता है। खाली पेट गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी हो सकती है। गन्ने के जूस में थोड़ा सा काला नमक और नींबू का जूस और पुदीना मिलाकर पीने से इसका स्वाद और न्यूट्रिशन दोनों बढ़ जाता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस किडनी स्टोन में फायदेमंद है? जवाब- गन्ने का जूस किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें ऑक्सालेट कम होता है। जो शरीर में पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है। इसके डाइयूरेटिक गुण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और नए स्टोन्स के प्रोडक्शन को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। Read more: उज्जैन में जल्द लॉन्च होगा विक्रमादित्य वैदिक एप; ज्योतिष संबंधी जानकारी भी मिलेगी, मोबाइल से जान सकेंगे शादी समेत अन्य शुभ मुहूर्त इसके अलावा गन्ने के जूस में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई अन्य ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। गन्ने का रस शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे किडनी में पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग गन्ने का जूस पी सकते हैं? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटिक लोगों को इसे पीने से बचना चाहिए। सवाल- एक दिन में कितना गन्ने का जूस पीना सुरक्षित है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में एक गिलास गन्ने का जूस पी सकता है। इससे ज्यादा पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट भी हैं? जवाब- गन्ने का जूस पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है। हालांकि इसके अधिक सेवन से … Read more

ऐसे फल और सब्जियां जो खुद बताते हैं कि मैं किस चीज के लिए फायदेमंद हूं…

Fruits and vegetables that tell me what they are good for… हमारी प्रकृति हमें वो सब कुछ देती है जिसकी हमारे शरीर को जरूरत होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ फल और सब्जियां अपने आकार और बनावट से यह संकेत देती हैं कि वे हमारे शरीर के किस अंग के लिए फायदेमंद हो सकती हैं? प्रकृति ने हमें जो भी दिया है, वह किसी न किसी रूप में हमारे शरीर के लिए लाभकारी है। जरूरत है तो बस इसे सही तरीके से समझने और अपने आहार में शामिल करने की! recent visitors 137

Baby Bottle Feeding Risks: छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध Baby Bottle Feeding Risks वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Read More: 1 फरवरी से शुरु हो रही ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’, जानें आवेदन की आखिरी तारीख, गाइडलाइन जारी Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. [/more] recent visitors 247

Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों का मजा दोगुना करें हरे मटर के तीखे कबाब के साथ, जानें इसे बनाने की पूरी रेसिपी

Hare Matar Kabab Recipe: सर्दी में कुछ खास और सेहतमंद खाने की तलाश में हैं तो हरे मटर के तीखे कबाब आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं। यह कबाब स्वाद में तो लाजवाब होते ही हैं, साथ ही आपकी सेहत का भी ध्यान रखते हैं। तो इस सर्दी आप भी स्वादिष्ट और पौष्टिक कबाबों को घर पर बनाकर स्वाद का आनंद ले सकते हैं। Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों की ठंडी हवाएं दस्तक देने के साथ ही गरमागरम और मसालेदार खाने की चाहत बढ़ा देता है। ऐसे में हरे मटर के तीखे कबाब (Hare Matar Kabab Recipe) न केवल आपके स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। अगर आप इस सर्दी कुछ अलग और मजेदार ट्राई करना चाहते हैं, तो ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। हरे मटर के कबाब न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद होते हैं। आइए जानते हैं इन कबाबों के कुछ प्रमुख लाभ recent visitors 358