मानसून में कौन-से फल खाने चाहिए और किनसे बचना जरूरी है? जानिए हेल्दी चॉइस

मानसून में कौन-से फल खाने चाहिए और किनसे बचना जरूरी है? जानिए हेल्दी चॉइस

Which fruits should be eaten during monsoon and which ones should be avoided? Know the healthy choice Know the healthy choice मानसून का मौसम अपने साथ ताजगी और ठंडक तो लाता है, लेकिन साथ ही बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। इस दौरान हवा में नमी ज़्यादा होने के कारण डाइजेशन स्लो हो जाता है, जिससे इन्फेक्शन, पेट दर्द और सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। ऐसे में आपकी डाइट का हेल्दी और बैलेंस होना बेहद जरूरी है—खासकर फलों के चयन को लेकर। हर फल सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन मानसून में कुछ फल विशेष रूप से लाभकारी होते हैं, वहीं कुछ फल सेहत पर नकारात्मक असर भी डाल सकते हैं। आइए जानते हैं इस मौसम में कौन से फल आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाएंगे और कौन से फल से दूरी बनाना बेहतर होगा। मानसून में फल चुनने की सही रणनीति क्या होनी चाहिए?मानसून में फल का चयन करते वक्त सबसे पहले अपनी पाचन क्षमता और स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखें। इस मौसम में केला और सेब जैसे आम फलों को लेकर सबसे अधिक भ्रम रहता है। केला – फायदेमंद या नुकसानदायक?केला ऊर्जा का अच्छा स्रोत है लेकिन मानसून में यह कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी, खांसी और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।जिन्हें गैस, कब्ज या अपच की समस्या है, उन्हें इस मौसम में केले का सेवन सीमित मात्रा में और दिन में ही करना चाहिए। सेब – मानसून का भरोसेमंद साथीसेब हल्का, पचने में आसान और फाइबर युक्त फल है जो पाचन को मजबूत बनाता है।इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर शरीर को डिटॉक्स करता है और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। इसे छिलके सहित खाना और भी फायदेमंद होता है। Know the healthy choice मानसून में फायदेमंद फल (Best Fruits in Rainy Season) Read more : क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव फल खाते समय इन बातों का ध्यान रखें Know the healthy choice Conclusion : मानसून में सेहत बनाए रखने के लिए फलों का सही चुनाव बहुत जरूरी है। ताजे, हल्के और जल्दी पचने वाले फल आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं और संक्रमण से बचाते हैं। वहीं गलत फल का सेवन आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए हर फल खाने से पहले उसके गुण और आपकी बॉडी की ज़रूरतों को समझें। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 261

क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव

क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव

Can frequent fatigue and lack of appetite be a warning of fatty liver? Know how prevention is possible fatty liver symptoms prevention हमारे शरीर का एक अदृश्य योद्धा — लिवर — न केवल पाचन प्रक्रिया में सहायक होता है, बल्कि यह विषैले तत्वों को बाहर निकालने और ऊर्जा संचय करने जैसे कई आवश्यक कार्य करता है। लेकिन आज की अनियमित जीवनशैली, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक सक्रियता की कमी ने फैटी लीवर जैसी बीमारी को आम बना दिया है। NAFLD से अधिकतर वही लोग ग्रस्त होते हैं जो मोटापे, टाइप 2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, या खराब डाइट का शिकार हैं। शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज fatty liver symptoms preventionफैटी लीवर चुपचाप बढ़ने वाली बीमारी है। इसके लक्षण बहुत सामान्य हो सकते हैं, जैसे: गंभीर स्थिति में बदलने के संकेतयदि समय रहते इलाज न हो, तो फैटी लीवर धीरे-धीरे नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) का रूप ले सकता है, जिससे लिवर में सूजन और डैमेज शुरू हो जाता है। इसके संकेत हो सकते हैं: ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर आप बार-बार कमजोरी, थकान या भूख में कमी जैसा कुछ महसूस कर रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। यह फैटी लीवर की शुरुआती घंटी हो सकती है। आज का सच यही है — रोग को पहचानो, रोकथाम करो और लिवर को मजबूत बनाओ। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी हेतु है। किसी भी तरह की चिकित्सकीय सलाह के लिए अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 248

सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के

सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के

Do not ignore headache: These can be signs of a serious disease Do not ignore headache आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सिरदर्द को हम अक्सर नींद की कमी या थकान का सामान्य लक्षण मान लेते हैं। लेकिन अगर यह सिरदर्द बार-बार हो रहा है, पेनकिलर से भी ठीक नहीं हो रहा, या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं — तो यह शरीर का एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। सिरदर्द के पीछे छिपे हो सकते हैं ये बड़े कारण ब्रेन ट्यूमरअगर सिर में बार-बार एक ही स्थान पर दर्द हो रहा है और वह समय के साथ तेज़ होता जा रहा है, तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। विशेष रूप से अगर दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा है। माइग्रेनमाइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें सिरदर्द के साथ मतली, तेज़ रोशनी या आवाज़ से चिढ़, और धुंधलापन भी हो सकता है। इसका इलाज केवल दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव से भी संभव है। Read More: सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध साइनस इन्फेक्शननाक बंद होना, चेहरे में भारीपन और माथे पर दबाव के साथ दर्द — ये संकेत साइनस के हो सकते हैं। यह वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है। आंखों की समस्याअगर लंबे समय तक स्क्रीन देखने या पढ़ने के बाद सिरदर्द होता है, तो आंखों में नंबर बढ़ना, चश्मा न लगाना या थकावट इसकी वजह हो सकती है। कब सतर्क हो जाएं? Do not ignore headache क्या करें सिरदर्द होने पर? Do not ignore headache न करें इसे मामूली समझने की भूलसिरदर्द एक ऐसा शरीरिक अलार्म है जिसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। यह किसी गहरी और गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। अगली बार सिर में हल्का दर्द भी हो, तो उसे नजरअंदाज न करें — क्योंकि कभी-कभी छोटा दर्द, बड़े खतरे की घंटी हो सकता है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 177

delicious chatpati aloo katli: इस तरह बनाएं चटपटी और मसालेदार आलू की कतली, पराठों के संग लगती है खूब टेस्टी

delicious chatpati aloo katli

tasty easy delicious chatpati aloo katli fry recipe lifestyle recipe : delicious chatpati aloo katli घर में कोई सब्जी ना हो या कुछ अलग सा खाने का मन हो, तो बना लें ये चटपटी मसालेदार आलू की कतली। ये झटपट बन भी जाती है और सभी को इसका स्वाद भी खूब पसंद आता है। रोज-रोज की वही दाल-सब्जियां खा कर बोर होना लाजमी है। delicious chatpati aloo katli इसलिए अक्सर घर की महिलाएं बड़ी कन्फ्यूज रहती हैं कि खाने में क्या कुछ नया बनाया आए। बच्चे खाने को देखकर अलग नाक-मुंह बनाएं रहते हैं। अब गर्मियों के मौसम में घंटों किचन में खड़े रहना तो मुमकिन है नहीं, इसलिए कुछ ऐसा ही बनाने का मन होता है जो घर में सभी खा भी लें और झटपट बन भी जाए। हमारी आज की रेसिपी आपकी इन सभी परेशानियों को दूर कर देगी। जी हां, आज हम आपके लिए लाए हैं चटपटी मसालेदार सूखी आलू कतली की रेसिपी। ये आलू की सूखी सब्जी इतनी टेस्टी बनती है कि घर में हर कोई इसे खाना पसंद करेगा। पूड़ी हों या रोटी-पराठे, ये सभी के साथ बड़ी टेस्टी लगती है। तो चलिए जानते हैं आलू कतली की मजेदार सी रेसिपी। चटपटी सूखी आलू कतली बनाने की सामग्री (delicious chatpati aloo katli) आलू की कतली बनाने के लिए आपको जिन सामग्रियों की जरूरत होगी वो हैं – सरसों का तेल (1/3 कप), जीरा, चुटकी भर हींग, 3 सूखी लाल मिर्च, आलू ( 4 से 5, लगभग 500-600 ग्राम), स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर (1 चम्मच), आधा चम्मच भुना जीरा पाउडर, एक चम्मच चाट मसाला, आधा चम्मच अमचूर पाउडर, एक प्याज, फ्रेश हरी धनिया पत्ती, हरी मिर्च। चटपटी आलू कतली बनाने की विधि (delicious chatpati aloo katli) आलू की सूखी मसालेदार कतली बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में सरसों का तेल गर्म कर लें। जैसे ही तेल हल्का गर्म हो, उसमें जीरा और चुटकी भर हींग मिलाएं। इसमें सूखी हुई लाल मिर्च के टुकड़े भी एड कर दें। अब इसमें कटे हुए आलू के टुकड़े भी मिलाएं। आपको आलू को ना ज्यादा मोटा और ना ही ज्यादा बारीक काटना है। आलू के टुकड़े गोल शेप में कटे होने चाहिए। अब आलू को अच्छी तरह तेल में फ्राई होने दें। तेज आंच पर लगभग सात से आठ मिनट के लिए आलू को फ्राई कर लें, जबतक ये गोल्डन रंग के ना हो जाएं और 70 से 80 प्रतिशत तक कुक ना हो जाएं। Read more : पहलगाम हमले पर कांग्रेस की मांग-खुफिया विफलताओं और सुरक्षा चूक की जांच की जाए जैसे ही आलू थोड़े पक जाएं, तो उनमें लाल मिर्च, नमक, भुना जीरा पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और चाट मसाला एड करें। इस दौरान गैस की फ्लेम को धीमा रखें और दो से तीन मिनट के लिए मसालों को अच्छी तरह पका लें। अब इसमें गोल-गोल कटी हुई प्याज के टुकड़े एड करें। इसके बाद सभी चीजों को अच्छी तरह पका लें। इसके लिए आप सब्जी में दो से तीन चम्मच पानी भी एड कर सकते हैं। अब इसे ढककर तबतक पकाएं, जबतक आलू अच्छी तरह गल ना जाएं। लास्ट में आप इसमें अमचूर पाउडर मिला सकती हैं। इसके बाद दो से तीन मिनट के लिए सब्जी को पकाना ना भूलें। पकने के बाद गैस बंद करें और इसमें फ्रेश हरा धनिया और बीच से कटी हुई हरी मिर्च एड करें और गरमा-गरम आलू की कतली का लुफ्त उठाएं। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 65

Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa: शरीर ही नहीं, मन की भी होनी चाहिए सफाई

Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa

Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa: Not only the body, but the mind should also be cleansed लाइफस्टाइल डेस्क: Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa उन संतों में से थे, जिनका आचरण साधारण नहीं, बल्कि अलौकिक था। उनका व्यवहार सहज, ईश्वर के प्रेम में डूबा हुआ था। वे कभी भक्तिभाव में रोने लगते, कभी अचानक आनंद से झूमने लगते थे। कई बार मां काली की मूर्ति के सम्मुख समाधि की अवस्था में पहुंच जाते थे। उनके शिष्य यह भलीभांति जानते थे कि उनके गुरु हर कार्य अपने ही अद्भुत अंदाज में करते हैं। एक ऐसा काम था, जिसे परमहंसजी अत्यंत एकाग्रता और गहराई से करते थे, वह काम था उनका लोटा मांजना यानी साफ करना। परमहंसजी के पास एक साधारण पीतल का लोटा था, जिसका उपयोग वे केवल निजी कार्यों के लिए करते थे। किंतु वह लोटा उनके लिए केवल एक बर्तन नहीं था। वे दिन में तीन से चार बार उसे रगड़-रगड़ कर चमकाते। सुबह उठते ही और रात को सोने से पहले लोटा मांजना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। वे अंगूठे से भीतर-बाहर उसे इतनी लगन से मांजते कि उसमें प्रतिबिंब साफ दिखाई देने लगे। Inspiring teachings of Ramakrishna Paramahamsa शिष्य प्रतिदिन यह दृश्य देखते और चकित होते, एक आत्मज्ञानी संत, जिनके लिए संसार का कोई आकर्षण नहीं, वह एक लोटे को इतनी लगन से क्यों साफ करते हैं? एक दिन शिष्यों ने पूछा कि – “गुरुदेव, ये लोटा तो हम भी साफ कर सकते हैं, फिर आप ही इसे इतनी तन्मयता से क्यों मांजते हैं? क्या यह कोई विशेष लोटा है?” रामकृष्ण परमहंस मुस्कराए, उनकी आंखों में करुणा और ज्ञान की चमक थी। उन्होंने कहा, “हां, ये लोटा विशेष है, क्योंकि ये मेरा मन है। मैं जब इस लोटे को मांजता हूं तो ये नहीं सोचता कि ये सिर्फ पीतल का बर्तन है। मैं इसे प्रतीक मानता हूं अपने मन का। जिस प्रकार इस पर दिन भर धूल जमती है, ठीक वैसे ही हमारे मन पर भी हर पल विचारों की गंदगी जमा होती रहती है। अगर मैं एक बार भी इसकी सफाई छोड़ दूं तो ये गंदा हो जाएगा, जैसे मन की गंदगी इंसान को भ्रमित कर देती है। लोटे को मांजते समय मैं खुद को याद दिलाता हूं कि अपने मन को भी इसी श्रद्धा, सतर्कता और नियमितता से साफ करना चाहिए, क्योंकि एक गंदा मन, हमें पाप की ओर धकेल सकता है।” Read more: हिमाचल 78वां स्थापना दिवस विशेष : CM सुक्खू पांगी में, जिलों में मंत्री फहराएंगे तिरंगा रामकृष्ण परमहंस की सीख हमें न केवल अपने शरीर और आसपास की, बल्कि अपने मन की पवित्रता की भी चिंता करनी चाहिए। जब तक मन शुद्ध नहीं होगा, तब तक कर्म और भावनाएं भी पवित्र नहीं हो सकतीं। यदि मन पर ध्यान नहीं देंगे तो मन हमें पथभ्रष्ट कर सकता है। बाहरी सफाई के साथ ही हमें मन के नकारात्मक विचारों को दूर करते रहना चाहिए, तभी जीवन में सुख-शांति आ सकती है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 89

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

why were homes plastered with cow dung in earlier times pehle ke samay me gobar se kyon leepa jata tha plastered with cow dung आज भी जब हम गांव जाते हैं तो सुबह की पहली किरण के साथ जो सोंधी खुशबू उठती थी, वह सिर्फ मिट्टी की नहीं, गोबर से लिपे आंगनों की होती थी। यह परंपरा असल में सनातन धर्म की उन गहराइयों से जुड़ी है जहां हर वस्तु का एक दिव्य और व्यावहारिक अर्थ छुपा होता है। गोबर से घर लीपने से वह शुद्ध और ठंडा बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पहले के समय में घर को गोबर से क्यों लीपा जाता है। क्या ये सिर्फ एक चली आ रही कोई परंपरा थी, या इसके पीछे कुछ कारण भी थे? आइए जानते हैं। क्यों गोबर से लीपा जाता था घर? सनातन परंपरा में गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले जब घर के आंगन को गोबर से लिपा जाता है, तो वह सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि भूमि को ऊर्जा देने की एक क्रिया होती है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए कहते हैं, “गोमय वसते लक्ष्मी”। इसका अर्थ यही है कि जहां गोबर है, वहां समृद्धि, सकारात्मकता और पवित्रता खुद आ जाती है। plastered with cow dung Read more: इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका? पंचगव्य बनाने में भी आता है काम गोबर केवल धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि यह पंचगव्य का भी एक आवश्यक हिस्सा है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी आदि शामिल है। इन पांच तत्वों का मिश्रण न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि यह आयुर्वेद में एक औषधीय तत्व के रूप में भी प्रयोग होता है। कुछ पुराणों में यह साफ बताया गया है कि पंचगव्य का सेवन पापों को हरने वाला और रोगों को मिटाने वाला होता है। plastered with cow dung शुभ कार्य के दौरान गोबर का किया जाता है इस्तेमाल धार्मिक ग्रंथों में गोबर का जो स्थान है, इसे किसी भी प्रकार से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है। अथर्ववेद से लेकर गरुड़ पुराण और मनुस्मृति तक में गोबर और गाय से जुड़े पदार्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसलिए जब भी घर में कई त्यौहार मनाया जाता है या फिर कोई शुभ कार्य, जैसे कि हवन या पूजा किया जाता है तो पूरे घर को गोबर से लीपा जाता है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि हो। घर में मक्खियों, मच्छरों को भी दूर भगाता है गोबर बता दें कि गोबर कीट-पतंगों से रक्षा करने में काफी असरदार साबित होता है। गोबर से घर में मक्खियां, मच्छर, और कीट दूर रहते हैं। यही कारण है कि गांवों में गोबर से लिपे घरों में रोगों का प्रकोप कम देखा गया है। इसके अलावा, यह पूरी तरह जैविक है, पर्यावरण के अनुकूल है, और धरती को हानि नहीं पहुंचाता। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए “माइ सीक्रेट न्यूज़” उत्तरदायी नहीं है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 102

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

injection tablet or liquid what is the fastest way to get medication into the body Way to Get Medication into the Body : किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से उन्हे दवाएं देते हैं. डॉक्टर अपने मरीजों को दवाएं कई रूपों में देते हैं, जिसमें टैबलेट, कैप्सूल, लिक्विड सिरप, इंजेक्शन या फिर इन्हेलर जैसे अन्य विकल्प होते हैं. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इनमें से किस तरह की दवाएं सबसे अधिक असरदार होती हैं? तो आपको बता दें कि इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की समस्या हुई है और आपकी स्थिति कितनी गंभीर है. आइए जानते हैं इस बारे में- medication into the body टैबलेट और कैप्सूल टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है. इन्हें लेना आसान होता है, ये लंबे समय तक स्टोर की जा सकती हैं और कम खर्चीली भी होती हैं. हालांकि, इन्हें पचने और खून में घुलने में समय लगता है, इसलिए ये उन बीमारियों में दी जाती हैं जिनमें तुरंत असर की जरूरत नहीं होती, जैसे – सामान्य बुखार, दर्द, एलर्जी, ब्लड प्रेशर इत्यादि स्थितियों में टैबलेट और कैप्सूल जैसी दवाएं दी जाती हैं. medication into the body Read more: एमपी में जल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, नल जल योजना पूरी तरह फेल लिक्विड जिन मरीजों के निगलने की क्षमता कम होती है, जैसे- छोटे बच्चे या बुजुर्ग, उन्हें दवाएं लिक्विड दी जाती हैं. लिक्विड में मिलने वाली दवाएं जल्दी अवशोषित होती हैं और स्वाद के अनुसार बनाई जाती हैं. पर इनकी मात्रा का सही निर्धारण जरूरी होता है. इंजेक्शन किसी भी मरीज को इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब दवा को शरीर में तुरंत पहुंचाना होता है. इंजेक्शन सबसे सबसे प्रभावी तरीका होता है. ये सीधे खून में (IV), मांसपेशी (IM) या स्किन के नीचे (SC) दिए जाते हैं. इंजेक्शन गंभीर संक्रमण, एलर्जी रिएक्शन या सर्जरी के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, गंभीर संक्रमण, डायबिटीज (इंसुलिन) जैसी स्थितियों में दिया जाता है. सबसे सही तरीका कौन सा है? दवाएं देने का कोई सही तरीका नहीं होता है. यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी की गंभीरता क्या है? दवा कितनी जल्दी असर दिखानी चाहिए? मरीज की उम्र और शारीरिक स्थिति क्या है? हर दवा देने का तरीका अपनी जगह सही होता है. डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं. खुद से दवाओं का रूप या तरीका बदलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है. Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 106

लाइफस्टाइल- गर्मियों में फायदेमंद गन्ने का जूस: लू से बचाए, शरीर को रखे हाइड्रेटेड, डाइटीशियन से जानें किन्हें नहीं पीना चाहिए

Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial

Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial in summers: Protects from heat wave, keeps the body hydrated, know from dietician who should not drink it हेल्थ डेस्क: Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial आपने गर्मी के मौसम में अपने आसपास गन्ने का जूस बिकते जरूर देखा होगा। तेज धूप और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोग इसे खूब पीते हैं। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह शरीर को हाइड्रेट के साथ-साथ एनर्जेटिक भी रखता है। इसके अलावा गन्ने का रस पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, इम्यूनिटी बूस्ट करने और स्किन को हेल्दी बनाए रखने में भी मददगार है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फार्माकोग्नॉसी जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने के जूस के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में पीलिया व यूरिन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए गन्ने का जूस पीने की सलाह दी जाती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स का खजाना होता है। Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial गन्ना अनुसंधान केंद्र की एक स्टडी के मुताबिक, इसके जूस में हाई पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो पावरफुल फाइटोन्यूट्रिएंट्स हैं। गन्ने के जूस में बैड कोलेस्ट्रॉल से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही ये मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है। इसलिए, आज जरूरत की खबर में गन्ने का जूस पीने के फायदों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- गन्ने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने में 70-75% पानी, 13-15% सुक्रोज (नेचुरल शुगर) और 10-15% फाइबर होता है। हालांकि गन्ने का जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है। नीचे दिए ग्राफिक में 250ml जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू जानिए- सवाल– गन्ने का जूस सेहत के लिए किस तरह से फायदेमंद है? जवाब- गन्ने के जूस में मौजूद विटामिन C और फ्लेवोनोइड्स व फेनोलिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ये एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में पानी होता है। गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर, फाइबर और इनवर्टेज जैसे एंजाइम होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गन्ना सुक्रोज और ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट का एक नेचुरल सोर्स है, जो इंस्टेंट एनर्जी देता है। गन्ने के डाइयूरेटिक गुण यूरिन के जरिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार हैं। गन्ने में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। इसमें मौजूद कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। Lifestyle: Sugarcane juice is beneficial इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। ये उम्र बढ़ने के संकेतों जैसे झुर्रियां, महीन रेखाएं और स्किन के दाग-धब्बे को कम करते हैं। वहीं पॉलीफेनोल और पोटेशियम जैसे कंपाउंड कार्डियो प्रोटेक्टिव होते हैं। गन्ने के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आर्टरीज की सूजन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। इसका जूस शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट को भी बैलेंस करता है। इस तरह ये हमें गर्मी में हीट स्ट्रोक के खतरे से बचाता है। नीचे दिए ग्राफिक से गन्ने का जूस पीने के कुछ फायदे समझिए- सवाल- गन्ना या गन्ने का जूस क्या ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि चाहे गन्ने की बाइट चबाएं या उसका जूस पिएं दोनों ही फायदेमंद है। हालांकि गन्ने में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इसलिए जूस पीने से ज्यादा इसे चबाना बेहतर है। सवाल- क्या गन्ने में बर्फ डालकर पीना सेहत के लिए अच्छा है? जवाब- बर्फ डालने से गन्ने का रस ठंडा हो जाता है, जिससे गर्मी में ताजगी मिलती है। ठंडा गन्ने का जूस पीने से गर्मी से तुरंत राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को इससे सर्दी-जुकाम, खांसी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बहुत ज्यादा बर्फ वाला गन्ने का रस पीने से बचना चाहिए। सवाल- गन्ने का जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- गन्ने का जूस निकालने के तुरंत बाद पीना सबसे अच्छा होता है। बासी गन्ने के जूस में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। गन्ने का जूस हमेशा किसी साफ और स्वच्छ दुकान से ही पिएं। जिस मशीन से जूस निकाला जा रहा है, वह साफ-सुथरी होनी चाहिए। गन्ने का जूस पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर से पहले का होता है। खाली पेट गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी हो सकती है। गन्ने के जूस में थोड़ा सा काला नमक और नींबू का जूस और पुदीना मिलाकर पीने से इसका स्वाद और न्यूट्रिशन दोनों बढ़ जाता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस किडनी स्टोन में फायदेमंद है? जवाब- गन्ने का जूस किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें ऑक्सालेट कम होता है। जो शरीर में पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है। इसके डाइयूरेटिक गुण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और नए स्टोन्स के प्रोडक्शन को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। Read more: उज्जैन में जल्द लॉन्च होगा विक्रमादित्य वैदिक एप; ज्योतिष संबंधी जानकारी भी मिलेगी, मोबाइल से जान सकेंगे शादी समेत अन्य शुभ मुहूर्त इसके अलावा गन्ने के जूस में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई अन्य ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। गन्ने का रस शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे किडनी में पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग गन्ने का जूस पी सकते हैं? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटिक लोगों को इसे पीने से बचना चाहिए। सवाल- एक दिन में कितना गन्ने का जूस पीना सुरक्षित है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में एक गिलास गन्ने का जूस पी सकता है। इससे ज्यादा पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट भी हैं? जवाब- गन्ने का जूस पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है। हालांकि इसके अधिक सेवन से … Read more

ऐसे फल और सब्जियां जो खुद बताते हैं कि मैं किस चीज के लिए फायदेमंद हूं…

Fruits and vegetables that tell me what they are good for… हमारी प्रकृति हमें वो सब कुछ देती है जिसकी हमारे शरीर को जरूरत होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ फल और सब्जियां अपने आकार और बनावट से यह संकेत देती हैं कि वे हमारे शरीर के किस अंग के लिए फायदेमंद हो सकती हैं? प्रकृति ने हमें जो भी दिया है, वह किसी न किसी रूप में हमारे शरीर के लिए लाभकारी है। जरूरत है तो बस इसे सही तरीके से समझने और अपने आहार में शामिल करने की! Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 114

Baby Bottle Feeding Risks: छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध Baby Bottle Feeding Risks वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Read More: 1 फरवरी से शुरु हो रही ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’, जानें आवेदन की आखिरी तारीख, गाइडलाइन जारी Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. [/more] Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 225

Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों का मजा दोगुना करें हरे मटर के तीखे कबाब के साथ, जानें इसे बनाने की पूरी रेसिपी

Hare Matar Kabab Recipe: सर्दी में कुछ खास और सेहतमंद खाने की तलाश में हैं तो हरे मटर के तीखे कबाब आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं। यह कबाब स्वाद में तो लाजवाब होते ही हैं, साथ ही आपकी सेहत का भी ध्यान रखते हैं। तो इस सर्दी आप भी स्वादिष्ट और पौष्टिक कबाबों को घर पर बनाकर स्वाद का आनंद ले सकते हैं। Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों की ठंडी हवाएं दस्तक देने के साथ ही गरमागरम और मसालेदार खाने की चाहत बढ़ा देता है। ऐसे में हरे मटर के तीखे कबाब (Hare Matar Kabab Recipe) न केवल आपके स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। अगर आप इस सर्दी कुछ अलग और मजेदार ट्राई करना चाहते हैं, तो ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। हरे मटर के कबाब न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद होते हैं। आइए जानते हैं इन कबाबों के कुछ प्रमुख लाभ Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 342

सेहत के लिए खतरा! क्या पैकेट बंद खाना वाकई सेहतमंद है? नई रिसर्च ने उठाए सवाल

भारत में लोगों के खाने-पीने का तरीका बदल रहा है और यह बदलाव सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. ICMR ने बताया कि देश में 56.4% बीमारियां खराब खानपान की वजह से हो रही हैं. भारतीयों की पसंद और नापसंद बदल रही है, खासकर तब जब बात खाने की होती है. पहले के समय में लोग ज्यादातर कच्ची सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाते थे, लेकिन आजकल पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड का चलन बढ़ गया है.कुछ डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने मिलकर भारत में बिकने वाले पैकेट बंद फूड की जांच की है. यह जानने के लिए कि ये फूड सेहत के लिए कितने अच्छे या बुरे हैं. उन्होंने यह भी देखा कि पैकेट पर जो कुछ लिखा है, वह सही है या नहीं. यह रिसर्च Plos One नाम की एक मशहूर मैगजीन में छपी है. इस रिसर्च को करने वालों में ये लोग शामिल थे: चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डॉक्टर, भारत के मेडिकल रिसर्च काउंसिल के विशेषज्ञ और इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर. पैकेट बंद फूड के लेबल पर लिखी पोषण जानकारी हमें उस फूड में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बताती है. यह जानकारी ग्राहकों के लिए बहुत जरूरी होती है क्योंकि इससे वे यह तय कर सकते हैं कि वह फूड उनकी सेहत के लिए कितना अच्छा या बुरा है.इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने भारतीय बाजार में उपलब्ध 432 पैकेट बंद फूड के लेबल की जांच की. इनमें इडली मिक्स, ब्रेकफास्ट सीरियल, दलिया मिक्स, बेवरेज मिक्स और फूले हुए स्नैक्स जैसे पैकेज्ड फूड शामिल थे.रिसर्च में पाया गया कि 80% पैकेट बंद फूड में लेबल पर लिखी जानकारी सही थी. यानी जो पोषक तत्व लेबल पर लिखे थे, वे प्रोडक्ट में मौजूद थे. ज्यादातर पैकेज्ड फूड में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. दरअसल, हमारे शरीर को एनर्जी के लिए कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है, लेकिन अगर हम जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो यह हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारी हो सकती है. फूले हुए स्नैक्स में वसा की मात्रा ज्यादा मिली. वसा भी एनर्जी देता है, लेकिन ज्यादा वसा से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. जब हम खाना खाते हैं तो वह ग्लूकोज में बदल जाता है. यह ग्लूकोज हमारे खून में मिल जाता है. इंसुलिन ग्लूकोज को हमारे शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए किया जाता है.ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से हमारे अग्न्याशय को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है. अगर यह ज्यादा समय तक चलता रहे, तो अग्न्याशय कमजोर हो सकता है और टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है. पैकेट बंद फूड की जांच करने के लिए विशेषज्ञों ने एक खास तरीका अपनाया. उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के हिसाब से पैकेज के आगे और पीछे लिखी पोषण जानकारी की जांच की. इस अध्ययन में सिर्फ प्रोटीन, फाइबर, वसा, चीनी और कोलेस्ट्रॉल से जुड़े पोषण संबंधी दावों का मूल्यांकन किया गया. विशेषज्ञों ने पैकेट बंद फूड में मौजूद प्रोटीन, फाइबर, वसा, चीनी और कोलेस्ट्रॉल की जांच की. फिर उन्होंने एक खास सिस्टम का इस्तेमाल करके यह तय किया कि कौन सा फूड सेहतमंद है और कौन सा नहीं. यह जानकारी लोगों को सेहतमंद पसंद चुनने में मदद कर सकती है. ज्यादातर पैकेट बंद फूड में 70% से ज्यादा एनर्जी कार्बोहाइड्रेट से मिल रही थी. सिर्फ फूले हुए स्नैक्स ही ऐसे थे जिनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम थी. फूले हुए स्नैक्स में 47% से ज्यादा एनर्जी वसा से मिल रही थी. ज्यादा वसा से भी सेहत को नुकसान हो सकता है. सभी पैकेज्ड फूड में प्रोटीन की मात्रा 15% से कम थी. प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी होता है, इसलिए इसकी कमी सेहत के लिए अच्छी नहीं है.यह अध्ययन दिखाता है कि ज्यादातर पैकेट बंद फूड में कार्बोहाइड्रेट, वसा और चीनी की मात्रा ज्यादा होती है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए हमें पैकेट बंद फूड का सेवन सीमित करना चाहिए. ताजा और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के मुताबिक, पैकेट बंद फूड के लेबल पर एनर्जी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, चीनी और कुल वसा की मात्रा ‘प्रति 100 ग्राम’ या ‘100 मिलीलीटर’ या ‘प्रति सर्विंग’ के हिसाब से लिखी होनी चाहिए. लेकिन अध्ययन में पाया गया कि ज्यादातर पैकेट बंद फूड में यह जानकारी पूरी तरह से नहीं दी गई थी. सिर्फ कुछ ब्रेकफास्ट सीरियल और कुछ पेय पदार्थों में ही प्रति सर्विंग जानकारी दी गई थी.कुछ प्रोडक्ट ने यह दावा किया कि उनमें साबुत अनाज हैं लेकिन इंग्रेडिएंट्स लिस्ट में साबुत अनाज का जिक्र नहीं था. यह ग्राहकों को गुमराह करने वाला है. अध्ययन में यह बात कही गई है कि एक स्पष्ट लेबलिंग सिस्टम होना चाहिए ताकि ग्राहक आसानी से सेहतमंद प्रोडक्ट का चयन कर सकें. 2022-23 के घरेलू खर्च सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय अब पैकेट बंद फ़ूड, पेय पदार्थों और रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि घर पर बने खाने पर खर्च कम हो रहा है. यह बदलाव शहरों और गांवों दोनों जगह देखा जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि खानपान में यह बदलाव देश में मोटापा, डायबिटीज, हार्टअटैक जैसे बढ़ते बोझ का एक बड़ा कारण है. इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में भी यह बात कही गई है कि भारत में 56.4% बीमारियां खराब खानपान की वजह से हो रही हैं. भारत में पैकेट बंद फूड का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है. 2023 में ये बाजार करीब 76.28 बिलियन डॉलर का था और 2030 तक इसके 116 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब है कि अगले कुछ सालों में पैकेज्ड फूड की खरीद-बिक्री में काफी बढ़ोतरी होगी. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक देश है. पैकेज्ड फूड के बाजार में तेजी से बढ़ोतरी होने से भारत के पास दुनिया में पहले नंबर पर आने का मौका है.ब्लूवेव कंस्लटिंग की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत में कुल 52.05 मिलियन टन पैकेज्ड फूड का उत्पादन हुआ था और 2030 तक इसके 69 मिलियन टन तक पहुंचने … Read 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क्या बोतल बंद पानी सेफ? वैज्ञानिकों की यह रिसर्च उड़ा देगी आपकी नींद

कुछ साल में हुए रिसर्च में पाया गया कि औसतन एक लीटर पानी की बोतल में 240,000 प्लास्टिक कण पाए जाते हैं.यह एक बहुत ही चिंताजनक आंकड़ा है, क्योंकि नल के पानी के एक लीटर में औसतन 5.5 प्लास्टिक कण होते हैं. नैनोप्लास्टिक के कारण कैंसर, जन्म दोष और प्रजनन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. नैनोप्लास्टिक अपने छोटे आकार के कारण खतरनाक होते हैं – जिससे वे सीधे रक्त कोशिकाओं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं. बोतलों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक में आमतौर पर थैलेट्स होते हैं, जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, थैलेट्स ‘विकासात्मक, प्रजनन, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा और अन्य समस्याओं से जुड़े हैं’. पॉलियामाइड नामक एक प्रकार का नायलॉन पानी की बोतलों में पाया जाने वाला एक और प्लास्टिक कण था. हाल ही में हुए एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक लीटर के पानी की बोतल में लगभग 2, 40,000 प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं. नॉर्मल एक लीटर के पानी की बोतल में पानी पी रहे हैं तो हो सकता है आप प्लास्टिक के टुकड़े पी रहे होंगे. हो सकता है आप प्लास्टिक के कण भी पी रहे होंगे. हमारी खराब लाइफस्टाइल के कारण अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल करते हैं. घर हो या ऑफिस प्लास्टिक बंद बोतल में पानी पीना हम खूब पसंद करते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो संभल जाएं क्योंकि आपके शरीर में धीमा जहर पहुंच रहा है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की संस्थान ने एक स्टडी में डराने वाला खुलासा किया है. जिसमें बताया गया है कि एक लीटर बोतलबंद पानी में करीब 2.40 लाख प्लास्टिक के महीन टुकड़े मौजूद होते हैं.जिसकी वजह से सेहत को गंभीर और जानलेवा खतरे (Bottled Water Harmful Effects) हो सकते हैं.प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक प्लास्टिक के बोतल में पानी पीने के कारण कई गंभीर जानलेवा बीमारी हो सकती है. हाल ही में कुछ रिसर्च के मुताबिक बोतल में मौजूद बोतल बंद पानी में 100,000 से ज्यादा नैनोप्लास्टिक मिले हैं. यह इतने छोटे कण होते हैं कि ब्लड सर्कुलेशन तक को खराब कर सकते हैं. यह दिमाग और सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं. डायबिटीज और दिल की बीमारी हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, पॉली कार्बोनेट की बोतलों के पानी में बिस्फेनॉल ए केमिकल होता है, जो जब शरीर में जाता है तो दिल की बीमारियों और डायबिटीज का खतरा कई गुना तक बढ़ा सकता है. कैंसर का खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ता है. इससे ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर का जोखिम बढ़ता है. प्लास्टिक बर्तन में रखी गर्म चीजों को खाने से बचना चाहिए. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 221

क्या वेजिटेबल जूस में मिला सकते हैं फ्रूट्स, क्या यह सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक?

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कच्ची सब्जियों का जूस पीना पसंद करते हैं. फिटनेस फ्रिक वाले लोग हरी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा अपनी डाइट में शामिल करते हैं. ऐसे डाइट लेने वाले समर्थकों का दावा है कि कच्ची सब्ज़ियों में कई जरूरी विटामिन और खनिज होते हैं जो खाना पकाने के दौरान खत्म हो जाते हैं और ये इम्युनिटी को बढ़ाने और बीमारियों को रोकने के लिए बहुत बढ़िया हैं. यह बात सही हो सकती है लेकिन किसी भी चीज़ को हद से ज्यादा खाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सर्दियां आ रही हैं और यह वह मौसम है जब हरी पत्तेदार सब्जियां काफी ज्यादा मार्केट में होती हैं और लोग हर संभव दिलचस्प तरीके से उन्हें अपने आहार में शामिल करके उनका अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करते हैं. कुछ लोग इस मौसम में कच्ची सब्जियों का जूस पीना भी पसंद करते हैं. लेकिन क्या ये सभी वाकई सेहतमंद और सुरक्षित हैं? आपको हरी सब्जियां किस तरह खानी चाहिए – उन्हें पकाकर या कच्चे रूप में खाकर. आयुर्वेद और आंत स्वास्थ्य कोच डॉ. डिंपल जांगडा ने अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा है कि अधिक मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट में कुछ संक्रमण या अपच का खतरा हो सकता है. पके हुए भोजन की तुलना में कच्चे खाद्य पदार्थों को पचाना शरीर के लिए अधिक कठिन होता है, क्योंकि पके हुए भोजन पहले से ही गर्मी, मसालों और पकाने की विधि से टूट जाते हैं. वे अवशोषण के लिए अधिक जैविक रूप से उपलब्ध होते हैं और पाचन अग्नि पर तनाव को कम करते हैं. कुछ कच्चे खाद्य पदार्थों में एंटी-पोषक तत्व भी होते हैं जो वास्तव में खाद्य पदार्थों के पोषण अवशोषण को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देते हैं.हल्का खाना पकाने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप मतली, थकान, चक्कर आना, पेट फूलना, दस्त या आईबीएस जैसे लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो आपका शरीर आपसे बात कर रहा है. आयुर्वेद बड़ी मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों या ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह नहीं देता है, क्योंकि वे परजीवियों का घर होते हैं, जिन्हें केवल धोने से नष्ट नहीं किया जा सकता है. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 249

सिर पर जमी डैंड्रफ की परत को एक हफ्ते में साफ कर देंगे ये नुस्खे

एक हफ्ते में डैंड्रफ पूरी तरह से हटाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन आप इसे काफी हद तक कम करने के लिए कुछ प्रभावी उपाय अपना सकते हैं। भोपाल ! डैंड्रफ एक ऐसी समस्या है, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से बहुत से लोग तो काले रंग के कपड़े पहनना तक बंद कर देते हैं, क्योंकि रूसी उन कपड़ों पर झड़कर लोगों को शर्मिंदा करती है। खासतौर पर अब जब सर्दी का मौसम शुरू हो गया है तो हर दूसरा व्यक्ति इस परेशानी से जूझ रहा है। वैसे तो डैंड्रफ हटाने के लिए कई तरह के हेयर केयर ट्रीटमेंट आते हैं, लेकिन ये जेब पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इसी के चलते आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से एक हफ्ते में सिर पर जमी डैंड्रफ की परत कम हो जाएगी। अगर आपके सिर पर रूसी काफी ज्यादा है तब एक हफ्ते में इसका कम होना मुश्किल है, लेकिन हां आपको इसका अच्छा असर ही देखने को मिलेगा। यदि आपको नींबू सूट करता है तो आप 2-3 चम्मच नारियल तेल में आधा नींबू का रस मिलाएं। इसे अपनी स्कैल्प पर लगाएं और हल्के हाथों से मालिश करें। 30 मिनट बाद हल्के शैंपू से बाल धो लें। नींबू का रस फंगस को खत्म करने में मदद करता है और नारियल तेल स्कैल्प को मॉइश्चराइज करता है। टी ट्री ऑयल को कभी भी सीधा बालों में न लगाएं। इस्तेमाल के लिए इसकी 2-3 बूंदें टी ट्री ऑयल शैम्पू में मिलाकर बाल धोएं। टी ट्री ऑयल में एंटी-फंगल गुण होते हैं जो डैंड्रफ को तेजी से कम करते हैं। विनेगर यानी कि सिरके के इस्तेमाल से भी आप सिर पर जमी रूसी को कम कर सकते हैं। इसके लिए बराबर मात्रा में पानी और एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं। इस मिश्रण को स्कैल्प पर स्प्रे करें और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर अपने बालों को धो लें। मेथी के पेस्ट और दही दोनों में ही ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो सिर को साफ करते हैं और सिर पर जमी रूसी की परत को हटाने का काम करते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए 2 चम्मच मेथी के दानों को रातभर भिगोकर पीस लें। इसमें 2 चम्मच दही मिलाएं और स्कैल्प पर लगाएं। इससे भी रूसी की परत हटने लगेगी। यदि आपके घर में एलोवेरा का पौधा लगा है तो उससे बेहतर कोई विकल्प कुछ हो ही नहीं सकता। सिर से रूसी हटाने के लिए ताजा एलोवेरा जेल स्कैल्प पर लगाएं। 30 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। डिसक्लेमर : इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। ” माइ सीक्रेट न्यूज़ ” इस लेख में दी गई जानकारी को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। त्वचा संबंधी किसी भी तरह की अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 183

ये 5 संकेत हो सकते हैं गंभीर बीमारी का कारण, जानें इसका इलाज

Skin Disease: सोरायसिस इम्यून सिस्टम खराब होने की वजह से होती है, जो स्किन सेल्स को प्रभावित करता है। इसके कारण त्वचा लाल हो जाती है और अक्सर खुजली, दर्द और सूजन रहती है। सोरायसिस के कई कारण हो सकते हैं। दुनिया भर में लगभग 105 मिलियन लोग सोरायसिस से पीड़ित हैं, जो एक पुरानी ऑटोइम्यून त्वचा की समस्या है। एक्सपर्ट कहते हैं कि सोरायसिस के पीछे का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन नेटिक फैक्टर्स, एनवायर्नमेंटल ट्रिगर्स और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी इसका मुख्य कारण हो सकते हैं। इसके इलाज के लिए सिस्टमिक ट्रीटमेंट , फोटोथेरपी, टोपिकल ट्रीटमेंट और कॉर्टिकोस्टेरॉइड उपलब्ध हैं। आइए जानते हैं कि इसके और क्या-क्या इलाज हो सकते हैं? सोरायसिस के लक्षण सोरायसिस का इलाजरेगेन रेटिवे मेडिसिन- रेगेन रेटिवे मेडिसिन सोरायसिस मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें स्टेम सेल उपचार, प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा (पीआरपी) थेरेपी और ऊतक इंजीनियरिंग जैसे इलाज शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शरीर को नेचुरली हेल्दी रखना होता है। रेगेन रेटिवे मेडिसिन सोरायसिस के मूल कारण को संबोधित करने की संभावना प्रदान करती है। स्टेम सेल्स- स्टेम सेल सोरायसिस के इलाज में सबसे अच्छा इलाज माना जाता है। वे दागदार या डैमेज स्किन को हेल्दी बनाता हैं। साथ ही सोरायसिस से प्रभावित वाली त्वचा कोशिकाओं के तेजी से होने वाले बदलाव को धीमा करने के लिए इम्युन को बढ़ावा देता है। पीआरपी थेरेपी- पीआरपी थेरेपी भी सोरायसिस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। ये स्किन से निकालना औक प्लेटलेट्स को कम करने में मदद करता है। ये थेरेपी घाव भरने में तेजी लाती है और सोरायसिस प्रभावित हिस्सों को अधिक प्रभावी ढंग से ठीक करके इसकी की गंभीरता को कम करती है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 159

बाजार में बिक रहा मिलावटी गुड़: असली और नक़ली गुड़ की पहचान करें चुटकियों में 

Adulterated jaggery is being sold in the market: Identify real and fake jaggery in a jiffy बीते दिनों राजस्थान के अजमेर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक बाड़ेनुमा चारदीवारी में दबिश दी। वहां मिलावटी गुड़ बनाने की फैक्ट्री चल रही थी। टीम को मौके से 9000 किलो गुड़ और गुड़ में मिलाए जाने वाले पदार्थ सेफोलाइट की एक-एक किलो की 30 थैलियां मिलीं। इसके अलावा सड़े-गले गुड़ से भरे पीपे भी मिले, जो बदबू मार रहे थे। हेल्थ ड्रिंक। सर्दियों के मौसम में गुड़ की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में मिलावटखोर मिलावटी गुड़ बेचकर अधिक कमाई करना चाहते हैं। मिलावटी गुड़ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए गुड़ खरीदने से पहले असली और नकली की पहचान करना बहुत जरूरी है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि असली और नकली गुड़ की पहचान कैसे करें। साथ ही जानेंगे कि- नकली गुड़ में किस तरह की मिलावट हो सकती है?   नकली गुड़ खाने से क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं? एक्सपर्ट: चतुर्भुज मीणा, स्टेट फूड एनालिस्ट, झारखंड डॉ. अमृता मिश्रा, न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटेटिक्स (नई दिल्ली) सवाल- मिलावटखोर मुनाफा कमाने के लिए गुड़ में किस तरह की चीजों की मिलावट करते हैं? जवाब- आमतौर पर मिलावटखोर नकली गुड़ में कैल्शियम कार्बोनेट और सोडियम बाइकार्बोनेट जैसी चीजें मिलाते हैं। कैल्शियम कार्बोनेट से गुड़ का वजन बढ़ाया जाता है, जबकि सोडियम बाइकार्बोनेट मिलाने से गुड़ के रंग में निखार आता है। इसके अलावा गुड़ में शक्कर (चीनी) और सेफोलाइट नामक केमिकल की मिलावट की जाती है। सेफोलाइट से गुड़ की शेल्फ लाइफ बढ़ती है और उसे लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है। इस तरह के केमिकल्स से बना गुड़ खाने से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। सवाल- मिलावटी गुड़ हमारे शरीर के लिए कितना नुकसानदायक है? जवाब- गुड़ टेस्टी होने के साथ-साथ शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह विटामिन C, आयरन, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अच्छा सोर्स है। इससे शरीर में इम्यूनिटी बूस्ट होती है। शरीर सर्दी-खांसी, फ्लू और दूसरी बीमारियों से बचा रहता है। हालांकि यह सभी फायदे तभी हैं, जब गुड़ पूरी तरह शुद्ध हो। उसमें किसी तरह के केमिकल की मिलावट न की गई हो। मिलावटी गुड़ फायदे की बजाय शरीर को गंभीर बीमारियां दे सकता है। सवाल- असली गुड़ को बनाने का पूरा प्रोसेस क्या है? जवाब- गुड़ को गन्ने से बनाया जाता है। आइए, इन पॉइंट्स की मदद से जानते हैं कि गन्ने की कटाई से लेकर गुड़ बनाने तक का पूरा प्रोसेस क्या है। सबसे पहले गन्ने की कटाई करके उसे अच्छे से धोया जाता है।  इसके बाद गुड़ फैक्ट्री में लगे कोल्हू में डालकर गन्ने का रस निकाला जाता है।   इस रस को साफ और फिल्टर किया जाता है। वेस्ट मटेरियल फेंक दिया जाता है।   अगले प्रोसेस में गन्ने के रस को एक बड़े बर्तन में गर्म किया जाता है। रस को उबालने के लिए आग की आंच को धीमा रखा जाता है   रस को गर्म करने के बाद इसमें घनत्व (Density) बढ़ाने के लिए मिट्टी के बर्तन में रखा जाता है। इससे गुड़ का रंग बदल जाता है।   इसके बाद गुड़ को ठंडा करने के लिए एक बड़े बर्तन में रखा जाता है।   ठंडा होने पर गुड़ जम जाता है। इसके बाद उसे अलग-अलग सांचे में डालकर आकार दिया जाता है और बाजार में बेचा जाता है। सवाल- असली और नकली गुड़ की पहचान कैसे कर सकते हैं? जवाब- गुड़ ऐसा सुपरफूड है, जो कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। लेकिन बाजार में बिकने वाला गुड़ मिलावटी भी हो सकता है, जो आपकी सेहत को बिगाड़ सकता है। इसलिए गुड़ खाने से पहले इसकी पहचान करना जरूरी है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 262