उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया

उज्जैन उज्जैन  कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया। सभी 13 अखाड़ों की पेशवाई के रूटों का निरीक्षण कर कलेक्टर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर सिंह ने सभी मार्गों की गूगल मैप पर मार्किंग के निर्देश दिए। साथ ही मार्गों से अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के निर्देश भी दिए। कलेक्टर सिंह ने नीलगंगा तालाब के सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाओं की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। पेशवाई मार्गों के निरीक्षण के दौरान अग्नि अखाड़े की पेशवाई का मार्ग लाल बाबा के मंदिर से, निरंजनी अखाड़े की पेशवाई का मार्ग राजे धर्मशाला से, जूना अखाड़ा, नया उदासीन, आनंद, आवाहन, अटल, निर्वाणी अखाड़ों का पेशवाई मार्ग नीलगंगा से, उदासीन अखाड़े का मार्ग अलखधाम आश्रम से और निर्मल अखाड़े का मार्ग गुरुद्वारा फ्रीगंज से निर्धारित किया गया है। निरीक्षण के दौरान खाक चौक से अंकपात मार्ग होते हुए निकास चौराहा, इंदौर गेट से कंठाल मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा आदि पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया गया। कलेक्टर सिंह ने श्री महाकाल महालोक में श्री महाकाल अन्न क्षेत्र के प्रथम तल पर संचालित प्रसादी क्षेत्र का भ्रमण कर निरीक्षण किया एवं वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने प्रवचन हॉल, रोपवे के निर्माणाधीन कार्यों का भी निरीक्षण किया। इसके पश्चात, कलेक्टर सिंह ने रुद्रसागर सेतु एवं महाराजवाड़ा हेरिटेज होटल के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर इसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, कार्य की गुणवत्ता व मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। recent visitors 29

साल के नए दिन को खास बनाने के लिए बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया

उज्जैन  नए साल के पहले दिन उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्मारती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। देश भर से भक्त आये थे। सभी ने नए साल 2025 की शुभकामनाएं मांगीं और महाकालेश्वर से आशीर्वाद लिया। साल के नए दिन को खास बनाने के लिए बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया, जिसे देखकर लोग देखते ही रह गए। महाआरती भी हुई। मान्यता है कि भस्मारती देखने से व्यक्ति विशेष हो जाता है। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में नए साल का अनोखा जश्न मना। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आये। सुबह तीन बजे से ही भक्त महाकाल की भक्ति में लीन हो गए। नए साल की पहली सुबह बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बाबा को नहलाया गया। चंदन का लेप लगाया गया। सुगंधित द्रव्य चढ़ाए गए। भांग से श्रृंगार किया गया। पंडितों ने मंत्रोच्चार किए। बाबा को श्वेत वस्त्र पहनाए गए। फिर भस्म रमाई गई। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। देखने लायक होता है विशेष श्रृंगार भस्मारती में शामिल होने वाले भक्तों में खासा उत्साह दिखा। किसी ने परिवार की सुख-शांति की कामना की। किसी ने देश की अमन-चैन और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। यह मान्यता है कि बाबा महाकाल की भस्मारती के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति धन्य हो जाता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। नए साल पर बाबा का विशेष श्रृंगार देखने लायक था। इस श्रृंगार में बाबा और भी दिव्य लग रहे थे। भक्तों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया। भक्तों की संख्या नियंत्रण के लिए खास व्यवस्था मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। पुलिस बल तैनात था। स्वयंसेवक भी मदद कर रहे थे। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और पानी की व्यवस्था भी की गई थी। सब कुछ सुचारू रूप से चला। इस तरह उज्जैन में नए साल की शुरुआत बाबा महाकाल के आशीर्वाद से हुई। हजारों भक्तों ने भस्मारती का लाभ उठाया और नए साल के लिए शुभकामनाएं प्राप्त कीं। यह वाकई एक अविस्मरणीय अनुभव था। भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और भक्ति साफ दिख रही थी। सभी ने नए साल की शुरुआत एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ की। शिव को समर्पित विशेष अनुष्ठान है भस्मआरती भस्मारती, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह शिव जी को समर्पित है। यह प्रातः काल सूर्योदय से पहले की जाती है। इसमें जली हुई लकड़ी की राख का उपयोग किया जाता है। इस राख को भस्म कहा जाता है। मान्यता है कि भस्म सभी पापों को नष्ट कर देती है। और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में हुई भस्मारती का विशेष महत्व है। यहाँ देश-विदेश से लोग भस्मारती के दर्शन करने आते हैं। recent visitors 77

नववर्ष में सिर्फ 45 मिनट में होंगे बाबा महाकाल के दर्शन, प्रशासन ने की पूरी तैयारी

उज्जैन  नया साल आने में अब कुछ ही समय बचा है। ज्यादातर लोग नए साल की शुरुआत उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दर्शन से करते हैं। ऐसे में 31 दिसंबर और 01 जनवरी को बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 31 दिसंबर और एक जनवरी के दिन मंदिर समिति इस बार विशेष तैयारी कर रही है। भक्तों को आसानी से दर्शन कराने के लिए कई व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं, प्रशासन का दावा है कि सुगम दर्शन व्यवस्था से भक्त करीब 45 मिनट में भगवान के दर्शन कर सकेंगे। भक्तों को कर्कराज पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए महाकाल लोक से मंदिर में प्रवेश मिलेगा। 31 और एक को शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था बंद रहेगी। कार्तिक मंडपम में सामान्य श्रद्धालुओं को बड़ी संख्या में प्रवेश कराकर दर्शन करवाए जाएंगे। इन दोनों दिन भस्मार्ती में श्रद्धालुओं की संख्या को आधा कर दिया जाएगा। कहां होगी वाहन पार्क करने की व्यवस्था?     हरिफाटक ब्रीज के नीचे तथा हाटबाजार परिसर     कर्कराज, कलोता व भील समाज धर्मशाला परिसर     कार्तिक मेला ग्राउंड तथा माधव सेवा न्यास परिसर यहां से मिलेगा भक्तों को मंदिर में प्रवेश सामान्य दर्शनार्थी: चारधाम मंदिर के सामने से दर्शन की कतार में लगने के बाद शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर, महाकाल टनल-1 से गणेश मंडप में पहुंचेंगे तथा भगवान महाकाल के दर्शन करेंगे। वीआईपी: प्रोटोकाल के तहत आने वाले वीआईपी दर्शनार्थी हरिफाटक ओवर ब्रीज से होकर बेगमबाग के रास्ते नीलकंठ द्वार से मंदिर में प्रवेश करेंगे। यहां वीआइपी पार्किंग की व्यवस्था भी रहेगी। वृद्ध, दिव्यांग: नए साल पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले वृद्ध व दिव्यांग दर्शनार्थियों का प्रवेश मंदिर कार्यालय के सामने अवंतिका से होगा। यहीं व्हील चेयर की सुविधा उपलब्ध रहेगी। दर्शन के बाद भक्त इस रास्ते से जाएंगे बाहर भगवान महाकाल के दर्शन उपरांत भक्त गेट नंबर 10 अथवा निर्माल्य द्वार से मंदिर के बाहर आएंगे। इसके बाद निर्धारित मार्ग से बड़ा गणेश मंदिर के सामने से होते हुए हरसिद्धि चौराहा से पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे। भक्तों के लिए फ्री रहेंगी ये सुविधाएं जूता स्टैंड: भील समाज की धर्मशाला, चारधाम मंदिर के सामने, अवंतिका द्वार के समीप निशुल्क जूता स्टैंड की सुविधा उपलब्ध रहेगी। भोजन प्रसादी: श्री महाकाल महालोक के सामने मंदिर समिति के अन्नक्षेत्र में भक्तों को निशुल्क भोजन प्रसादी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। पेयजल: करीब ढाई किलो मीटर लंबे मार्ग पर कई स्थानों पर पेयजल के इंतजाम रहेंगे। यहां से प्रसाद खरीद सकेंगे भक्त मंदिर समिति द्वारा चारधाम मंदिर के समीप और पार्किंग में लड्डू प्रसाद काउंटर स्थापित किए जाएंगे। भक्त यहां से लड्डू प्रसाद खरीद सकेंगे। डायवर्सन और पार्किंग व्यवस्था चार पहिया वाहन पार्किंग 1. इंदौर/देवास/मक्सी मार्ग सेः वाहन कर्कराज, भील समाज पार्किंग। वैकल्पिक मन्नत गार्डन, इम्पीरियल होटल के पीछे। 2. बड़नगर/नागदा मार्ग सेः मोहनपुरा ब्रिज से कार्तिक मेला मैदान। 3. आगर मार्ग से मकोडिया आम से कार्तिक मेला मैदान वैकल्पिकः कृषि उपार्जन मैदान। दो पहिया वाहन पार्किंग 1. इंदौर/देवास/मक्सी मार्ग से नरसिंह घाट पार्किंग। 2. बड़नगर /आगर/नागदा मार्ग से हरसिद्धी पाल पार्किंग। वैकल्पिक शंकराचार्य चौराहा गुरुद्वारा पार्किंग। भारी वाहन डायवर्सन 1. इंदौर से नागदा /आगर/मक्सी मार्ग, तपोभूमि-देवास बायपास। 2. मक्सी से इंदौर मार्ग, नरवर बायपास। 3. बड़नगर/नागदा/आगर मार्ग, मोहनपुरा ब्रिज से देवास रोड। वाहन प्रतिबंधित मार्ग (31 दिसंबर शाम 4 बजे से) 1. हरिफाटक टी से महाकाल घाटी चौराहा। 2. जंतर-मंतर से चारधाम पार्किंग। 3. शंकराचार्य चौराहा से नरसिंहघाट। पार्किंग से निकास मार्ग 1. कर्कराज/नरसिंहघाट पार्किंग, भूखी माता मार्ग। 2. इंटरपिटिशन पार्किंग, जयसिंहपुरा से लालपुल। 3. हरिफाटक पार्किंग, वाकणकर ब्रिज। रिजर्व पार्किग इंजीनियरिंग कॉलेज और प्रशांति चौराहा। नोटः नगर निगम द्वारा चारधाम टर्निंग तक बस सेवा उपलब्ध। recent visitors 130

महाकाल मंदिर में बड़ा एक्शन, प्रशासक बने एडीएम अनुकूल जैन, गणेश धाकड़ को हटाने का बाद दी जिम्मेदारी

उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने पुष्टि की है कि महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश धाकड़ को उनके पद से हटा दिया गया है. हालांकि, उनके स्थान पर नया प्रशासक कौन होगा, इस पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है. वही महाकालेश्वर मंदिर की आय से हेरफेर के मामले में आरोपी बनाए गए दो कर्मचारियों को कोर्ट ने जेल भेज दिया है और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. 2 बार मंदिर समिति के प्रशासक रहे हैं धाकड़ महाकाल मंदिर का अगला समिति प्रशासक कौन होगा इसे लेकर संशय है. ये फैसला भोपाल से लिया जाएगा या स्थानीय स्तर पर, इसे लेकर भी चर्चा जारी है। इस पर कलेक्टर नीरज सिंह का कहना है कि जल्द ही मामले में स्पष्टता आएगी. गौरतलब है कि गणेश धाकड़ को 14 अगस्त 2024 को महाकाल मंदिर समिति का प्रशासक नियुक्त किया गया था. यह उनका दूसरा कार्यकाल था। इससे पहले वे 2021 से 2022 तक करीब एक वर्ष तक इसी पद पर रह चुके थे. धाकड़ ने कहा, मुझे कोई जानकारी नहीं वहीं महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक पद से हटाए जाने के सवाल पर गणेश धाकड़ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें अब तक स्थानांतरण से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. वहीं इस घटनाक्रम को लेकर मंदिर से जुड़े अधिकारी और स्थानीय लोगों में चर्चा का बाजार गर्म है. पूर्व मे भी मिला था प्रभार बताया जाता है कि एडीएम अनुकूल जैन एडीएम का पद संभालने के साथ ही जिला प्रोटोकॉल की व्यवस्थाओं के संबंध में महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े रहते हैं। पूर्व में भी 13 अगस्त को उन्हें एक दिन के लिए महाकालेश्वर मंदिर का प्रशासक बनाया गया था, जिसके बाद गणेश धाकड़ को मंदिर का प्रशासक बना दिया गया था।   अवैध वसूली करने वाले रिमांड पर महाकालेश्वर मंदिर में अवैध वसूली करने वाले राजकुमार, अभिषेक भार्गव, रितेश शर्मा, राजेंद्र सिसोदिया को पुलिस ने एक दिन के रिमांड पर लिया है. महाकाल थाना पुलिस के मुताबिक अभी तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दो लोग निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी है. recent visitors 50

कलेक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दर्शन व्यवस्था का मुआयना कर आवश्यक निर्देश दिए

उज्जैन वर्ष 2024 की समाप्ति एवं अंग्रेजी नववर्ष 2025 के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण उन्हें दर्शन की सुव्यवस्थित व्यवस्था कर सुगमतापूर्वक दर्शन कराने के लिए तैयारियां की जा रही है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शुक्रवार 27 दिसंबर को प्रात: प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का मुआयना कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिए कि शीघ्रता से बेरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सर्वप्रथम कर्कराज पार्किंग स्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए कि पार्किंग स्थल पर समतलीकरण, साफ-सफाई, चलित शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके बाद कलोता समाज एवं भील समाज की धर्मशाला पर पार्किंग व्यवस्था का अवलोकन किया। उक्त स्थलों पर भी सुव्यवस्थित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले के साथ कर्कराज पार्किंग स्थल से पैदल मार्ग का मुआयना करते हुए गंगा गार्डन से गोंड बस्ती, चारधाम पार्किंग, शक्तिपथ, महाकाल महालोक, मानसरोवर होते हुए भगवान महाकाल मंदिर की रैलिंग तक की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने दर्शनार्थियों की सुलभ दर्शन व्यवस्था के दौरान दर्शनार्थियों के लिए जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। शक्तिपथ के साईड रोड़ तरफ कहीं कहीं अतिक्रमण है उसे हटाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। शक्तिपथ की साफ-सफाई, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने महाकाल मंदिर के निर्गम की ओर बने नवीन शौचालय को प्रारंभ कराए जाए और आस-पास की गंदगी को साफ कराने के निर्देश दिए। तत्पश्चात कलेक्टर ने पैदल चलकर हरसिद्धी होते हुए रामघाट की व्यवस्था का मुआयना किया और संबंधित अधिकारियों को बेरिकेडिंग और महिलाओं के लिए स्नान करने के बाद कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अलावा जिला पंचायत सीईओ श्रीमती जयति सिंह, एडीएम अनुकूल जैन, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, एसडीएम एलएन गर्ग, स्मार्ट सीईओ संदीप शिवा, विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी, सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल, मंदिर समिति सदस्य राजेन्द्र शर्मा तथा संबंधित विभाग के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।     recent visitors 78

महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में हुई कम

उज्जैन उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर के विस्तार का कार्य तेजी से जारी है। यह परिसर पहले 25 हजार वर्गफीट में फैला हुआ था, लेकिन अब इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर 78 हजार वर्गफीट कर दिया गया है। महाकाल महालोक के निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों पर बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च की जा रही है। पहले चरण में 351.55 करोड़ रुपए, लोकार्पण से पहले के कार्यों पर 44.32 करोड़ रुपए, और दूसरे चरण में 755.82 करोड़ रुपए का खर्च किया गया है। इस तरह कुल 1 हजार151 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार कम श्रद्धालु बाबा के दरबार में आए। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी     महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में 2024 के आखिरी पांच महीनों (अगस्त से दिसंबर) में कुछ कम हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से 31 दिसंबर 2023 तक मंदिर में 3 करोड़ 91 लाख 94 हजार 796 श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं, 2024 में 1 अगस्त से 22 दिसंबर तक यह संख्या घटकर 3 करोड़ 09 लाख 49 हजार 193 पर आ गई।       हालांकि, मंदिर प्रशासन का कहना है कि दिसंबर के आखिरी 9 दिनों में करीब 25 लाख श्रद्धालु आने की संभावना है। मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए नवीनतम तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उनके दर्शन का अनुभव बेहतर हो।   2023 में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक क्यों रही?     अधिकमास का प्रभाव: वर्ष 2023 में श्रावण माह में अधिकमास होने के कारण सावन 59 दिनों का था। इस दौरान 10 शाही सवारियां निकाली गईं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई।       महालोक का आकर्षण: महाकाल महालोक के पहले चरण का कार्य पूरा होने के बाद श्रद्धालु न केवल ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आए, बल्कि महालोक के भव्य नजारों का आनंद लेने भी पहुंचे।       भस्म आरती में बदलाव: भस्म आरती को ऑनलाइन, ऑफलाइन और चलित स्वरूप में संचालित किया गया, जिससे ज्यादा श्रद्धालु आकर्षित हुए। इस व्यवस्था को पहले केवल 2016 के सिंहस्थ मेले में लागू किया गया था।   2024 में आधुनिक तकनीकों का उपयोग श्रद्धालुओं के अनुभव को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 2024 में आरएफआईडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) बैंड का उपयोग शुरू किया गया। यह व्यवस्था भस्म आरती में प्रवेश के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और बिना अनुमति वाले लोगों को परिसर में आने से रोकती है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि अब केवल उन्हीं भक्तों को प्रवेश मिल रहा है, जिन्होंने पहले से अनुमति प्राप्त की है।   भविष्य की योजनाएं और प्रशासन की तैयारी मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रहा है। दर्शन के दौरान भीड़ प्रबंधन से लेकर हाई-टेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, महालोक के दूसरे चरण का कार्य भी प्राथमिकता पर है। recent visitors 139

नए साल पर महाकाल भस्म आरती की ऑनलाइन बंद, बदली दर्शन व्यवस्था

उज्जैन बाबा महाकाल के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। 2024 के आखिरी और नए साल 2025 के शुरुआती दिनों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर समिति ने बड़ा फैसला लिया है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन को सुगम बनाने के लिए समिति ने नई व्यवस्था लागू की है। समिति अध्यक्ष व कलेक्टर नीरजकुमार सिंह ने निर्धारित किया है कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को ऑनलाइन-ऑफलाइन भस्मआरती बुकिंग बंद रहेगी। दोनों दिन चलित भस्मआरती का विकल्प रखा है। सुबह 4.15 बजे से श्रद्धालु कार्तिकेय मंडपम् से आरती का लाभ ले सकेंगे। 45 मिनट में दर्शन होने का दावा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति का दावा है कि नई व्यवस्था के मुताबिक, 40 से 45 मिनट में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने महाशिवरात्रि पर आए दर्शनार्थियों को देखते हुए दिसंबर के आखिरी दिनों और नए साल के पहले सप्ताह में 10 से 15 लाख दर्शनार्थी आने की उम्मीद जताई है। कालभैरव मंदिर में प्रवेश बंद इधर उज्जैन के श्री कालभैरव मंदिर में 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक गर्भगृह में प्रवेश पूर्ण रूप से बंद रहेगा। मंदिरों में ड्यूटीरत कर्मियों को बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार करने की सीख दी गई है। कलेक्टर ने 29 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिफ्टवार ड्यूटी लगाई जाने के निर्देश दिए हैं। कहां से होगी एंट्री, कैसे आएंगे बाहर सामान्य दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु चारधाम मंदिर पार्किंग से प्रवेश करेंगे। यहां से संग्रहालय के पास नंदी द्वार भवन, फेसेलिटी सेंटर 1 टनल, शक्ति पथ, त्रिवेणी, श्री महाकाल, मानसरोवर, नवीन टनल 1, और गणेश मंडपम् होते हुए श्री महाकालेश्वर के दर्शन करेंगे। दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर के पास हरसिद्धि मंदिर तिराहे पहुंचेंगे और अंत में चारधाम मंदिर पर वापस आकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगे। जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़े यदि दर्शनार्थियों की संख्या अधिक हो जाती है, तो फेसेलिटी सेंटर 1 से मंदिर परिसर के निर्गम रैंप, गणेश मंडपम् और नवीन टनल के दोनों ओर से दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। भीड़ और अधिक होने पर श्रद्धालुओं को सीधे फेसेलिटी सेंटर 1 से कार्तिकेय मंडपम् में प्रवेश दिलाया जाएगा। दर्शन के बाद द्वार नंबर 10 या निर्माल्य द्वार से बाहर निकलने की व्यवस्था रहेगी। वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्था विशेष श्रेणी के दर्शनार्थी नीलकंठ द्वार से प्रवेश करेंगे। यहां से त्रिनेत्र (महाकाल लोक कंट्रोल रूम के सामने) होते हुए शंख द्वार, कोटितीर्थ कुंड और सभा मंडपम् के जरिए मंदिर में प्रवेश किया जाएगा। दर्शन के बाद, सभा मंडपम् से कोटितीर्थ कुंड, शंख द्वार, त्रिनेत्र और नीलकंठ द्वार के माध्यम से बाहर जाने का मार्ग तय होगा। recent visitors 135