MP में अब हिंदी और अंग्रेजी नहीं बल्कि तमिल और तेलुगू भाषाओं में भी पढ़ाई होगी: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब हिंदी और अंग्रेजी नहीं बल्कि तमिल और तेलुगू भाषाओं में भी पढ़ाई होगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राजभवन में आयोजित 'कर्मयोगी बनें' कार्यशाला में की. इस कार्यशाला में सीएम के साथ राज्यपाल मंगूभाई पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के साथ विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे. इस अवसर पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि "हमारे यहां विद्यार्थियों को केवल हिंदी ही नहीं तमिल-तेलुगू जैसी भाषा में भी पढ़ाने के लिए हम प्रेरित करेंगे. जो बच्चे इसमें जाएंगे उनको विशेष अंक देकर प्रोत्साहन देंगे. ये भाषाओं का गुलदस्ता हमारा है, हमें इस पर गर्व होना चाहिए." 'हर व्यक्ति अपने कर्मों से बंधा' सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि "भगवत गीता में कर्म, अकर्म और विकर्म को समझााने का प्रयास किया गया है. जिसने जन्म लिया है, उसे सांस लेना, सोना और खाना भी कर्म है. हर व्यक्ति अपने कर्मो से बंधा हुआ है. हम जो भी कार्य करें, उसका दोष भगवान को न दें. हमने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है. लेकिन वर्तमान में जिनको जैसी बातें करनी है, वो राजनीतिक दृष्टि से करते होंगे. हम तो राष्ट्रनीति के आधार पर सोचते हैं. हम अपने कर्मो के आधार पर जिस जगह भी पहुंचते हैं, वहां पूरी निष्ठा, उर्जा और आनंद के साथ काम करना चाहिए." हम मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण कर रहे राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश इतिहास के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां से साफ दिख रहा है कि 21वीं सदी भारत की होगी. इतिहास साक्षी है, जापान, जर्मनी, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया 4 से 5 दशक पहले ऐसे ही मोड़ पर थे. जहां से एकजुट होकर उन्होंने अपने राष्ट्र के विकास की नई इबारत लिखी. आज भारत भी उसी दौर से गुजर रहा है और हम मिलकर विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं." राज्यपाल ने कर्मयोगी की परिभाषा बताते हुए कहा कि "व्यक्तिगत लाभ, सफलता-असफलता की चिंता किए बगैर निरंतर कार्य करने वाला ही सच्चा कर्मयोगी है." recent visitors 32

प्रदेश में राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम होगा, मुख्यमंत्री यादव स्कूल चलें हम अभियान-2025 का करेंगे शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक अप्रैल मंगलवार को शासकीय नवीन उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय अरेरा कॉलोनी (ओल्ड कैंपियन) में प्रात: 9 बजे "स्कूल चलें हम" अभियान – 2025 का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम भी होगा। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के स्कूल चलें हम अभियान कार्यक्रम के डिजिटल प्लेटफार्म पर लाइव प्रसारण की व्यवस्था भी की गई है। नव प्रवेशी विद्यार्थियों का होगा स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में नव प्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न खेलों के प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षा पोर्टल 3.0 का शुभारंभ करेंगे। प्रदेश में करीब 92 हजार सरकारी स्कूल हैं। इनमें प्रायमरी, मीडिल, हाई और हायर सेकण्डरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में लगभग 85 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। एजुकेशन पोर्टल 3.0 इस वर्ष एक अप्रैल से नवीन शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। प्रवेशोत्सव कार्यक्रम-2025 के माध्यम से समस्त शासकीय-अशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश की कार्रवाही एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर "स्टूडेंड डायरेक्ट्री मैनेजमेंट सिस्टम" प्रणाली पर की जा रही है। एजुकेशन पोर्टल में स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित सभी कार्यों को शामिल किया गया है। विभाग से संबंधित जानकारी पोर्टल के माध्यम से सुलभ तरीके से प्राप्त की जा सकेगी। समस्त जिलों में भी होगा प्रवेशोत्सव कार्यक्रम प्रदेश में जिले के प्रभारी मंत्री जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में एक अप्रैल को शामिल होंगे। यह कार्यक्रम चयनित शाला में होगा। कार्यक्रम में सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधि शामिल होंगे। उपस्थित छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें वितरित की जायेंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है कि नये शैक्षणिक-सत्र की शुरूआत में विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तकें मिल जायें। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी और मैदानी अमले को विभाग द्वारा निर्देश जारी कर दिये गये हैं। ग्राम और बसाहट के शाला से बाहर रहे चिन्हित बच्चों का शाला में नामांकन कराया जायेगा। बच्चों के अभिभावकों का शाला स्तर पर स्वागत किया जायेगा। कक्षा-1 से 8 तक सभी शालाओं में एक अप्रैल को बालसभा का आयोजन किया जायेगा। इस दिन शालाओं में विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गयी है। संभाग स्तर के 8 डिपो के माध्यम से किताबों की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षण सत्र शुरू होते ही अप्रैल माह में निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हो जायें। कक्षा एक से कक्षा 12 के विद्यार्थियों के लिये करीब 5 करोड़ 60 लाख पुस्तकें, एक करोड़ 2 लाख फाउंडेशनल लिटरेसी एण्ड न्यूमरेसी (एफएलएन) अभ्यास पुस्तिकाएं और करीब 26 लाख ब्रिज कोर्स की पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। भविष्य से भेंट कार्यक्रम स्कूल चलें हम अभियान के दूसरे दिन दो अप्रैल को शालाओं में “भविष्य से भेंट’’ कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध, प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तियों को प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों से भेंट के लिये आमंत्रित किया जायेगा। इसी दिन स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धियाँ हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी को विशेष रूप से आमंत्रित किया जायेगा। आमंत्रित अतिथि उपस्थित बच्चों को पढ़ाई के महत्व और प्रेरणादायी कहानियाँ सुनायेंगे। इस दौरान सामाजिक संस्था एवं आमंत्रित व्यक्ति स्वैच्छा से विद्यार्थियों को शाला उपयोगी वस्तुएँ भेंट कर सकेंगे। जिला कलेक्टर को जिले के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को किसी एक शाला में जाकर एक कालखण्ड में बच्चों के साथ संवाद करने के लिये संवाद करने के भी निर्देश दिये गये हैं। सांस्कृतिक एवं खेल-कूद गतिविधियाँ "स्कूल चलें हम अभियान" के अंतर्गत 3 अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ सांस्कृतिक एवं खेल-कूद की गतिविधियाँ आयोजित की जायेंगी। इसका उद्देश्य पालकों का विद्यालय से जुड़ाव करना है। इसी दिन शाला में उपस्थित पालकों को शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा राज्य सरकार की स्कूल शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। पिछले शैक्षणिक-सत्र में जिन विद्यार्थियों की 85 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति रही है, उनके पालकों को सभा में सम्मानित किया जायेगा। हार के आगे जीत "स्कूल चलें हम अभियान" के अंतर्गत 4 अप्रैल को ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो किन्हीं वजहों से कक्षोन्नति प्राप्त करने में असफल हो गये हैं। पालकों को इन बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिये समझाइश दी जायेगी। उन्हें बताया जायेगा कि असफल होने के बाद भी लगातार प्रयास से अच्छा भविष्य तैयार किया जा सकता है। इसी दिन शाला प्रबंधन और विकास समिति की बैठक भी होगी। बैठक में नये शैक्षणिक सत्र में ऐसे बच्चों पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी, जिनका शालाओं में नामांकन नहीं हो पाया है। समिति के सदस्य अपने विद्यालयों में शत-प्रतिशत बच्चों के नामांकन की कोशिश करेंगे और वार्षिक कार्य-योजना बनाकर उसके क्रियान्वयन पर चर्चा करेंगे।   recent visitors 36

मंत्रि-परिषद से अनुमोदन उपरांत अमल में लाया जायेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के ग्रामीण, शहरी और इंटरसिटी परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ की जाएगी। योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। सबके साथ विस्तृत विचार-विमर्श, सुझाव एवं सहमति के बाद शीघ्र ही इस योजना प्रस्ताव को अनुमोदन के लिये मंत्रि-परिषद की बैठक में लाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में नवीन परिवहन सेवा (मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा) के संबंध में प्रारंभिक चर्चा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में परिवहन सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर प्रदेश के सभी जनजातीय क्षेत्रों में सुगम यात्री परिवहन के लिए सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। समत्व में हुई बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं प्रशासन संजय कुमार शुक्ल, सचिव परिवहन मनीष सिंह, सचिव मुख्यमंत्री सिबी चक्रवर्ती एवं संचालक जनसम्पर्क अंशुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की यात्री परिवहन संबंधी भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इस नवीन योजना के सभी पक्षों पर गहनता से अध्ययन करें, जिससे यात्रियों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके। सचिव परिवहन मनीष सिंह ने नवीन परिवहन सेवा योजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई परिवहन योजना में प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्यस्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी। प्रदेश के सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठित भी की जायेंगी। यह सभी बॉडीज यात्री परिवहन को बेहतर बनाने, यात्री किराया तय करने, रूट चार्ट तैयार करने में समन्वय और यात्रियों को योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए अनुश्रवण एवं मार्गदर्शन करेगी। बताया गया कि सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों की आय अर्जन के स्रोत निर्माण के लिए भी इस योजना में विशेष इंतजाम किए जाएंगे। नवीन योजना में सरकार अनुबंधित बसों को प्राथमिकता से परमिट देगी। इन बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का ही होगा। नवीन योजना में यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए ऐप और कंपनी की मॉनिटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी होगा नवीन परिवहन सेवा के संचालन के लिए प्रदेश के सात बड़े संभागों में यात्री बसों की आवश्यकता और जरूरी संख्या के लिए सर्वे कराये जा रहे हैं। सर्वे के परिणाम जल्द ही प्राप्त हो जायेंगे। सर्वे के फीडबैक के आधार पर सरकार इस योजना के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेगी। बताया गया की नवीन परिवहन योजना का सबसे अधिक लाभ यात्रियों को होगा। बस ऑपरेटर्स को भी बेहतर माहौल और उन्हें कन्टीन्यू बिजनेस देने का प्रावधान भी इस नवीन परिवहन सेवा योजना में की गई है, जिससे आपरेटर्स की बस सेवाएं बाधित न हो और यात्रियों को भी कोई परेशानी न हो।   recent visitors 42

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी गणगौर पर्व की बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अखंड सौभाग्य, सुख, समृद्धि के पावन पर्व गणगौर की सभी को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर अपने संदेश में बाबा महादेव एवं मां पार्वती से प्रार्थना की है कि गणगौर सबके जीवन में संपन्नता, शुभत्व और मंगल की उत्तरोत्तर वृद्धि लेकर आए। उन्होंने गणगौर पर कामना की है कि माता-बहनों और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।   recent visitors 35

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य की पुण्य-भूमि पर एक और नया अध्याय लिखा गया

सम्राट विक्रमादित्य की पुण्य-भूमि पर लिखा गया एक और नया अध्याय : राज्यपाल पटेल सम्राट विक्रमादित्य द हैरिटेज करेगा इतिहास जीवंत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य की पुण्य-भूमि पर एक और नया अध्याय लिखा गया उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य द हैरिटेज का हुआ लोकार्पण उज्जैन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य की पुण्य-भूमि पर एक और नया अध्याय लिखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंदीय विधि और न्याय एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को उज्जैन में विक्रमादित्य द हैरिटेज का लोकार्पण किया। राज्यपाल पटेल ने सम्राट विक्रमादित्य द हैरिटेज के शुभारंभ एवं विक्रम संवत 2080 की शुरूआत पर शुभकामना देते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की पुण्य-भूमि पर नया अध्याय लिखा गया है। जहां महाकाल स्वयं विराजते है, जहां कालिदास की अमर रचना जन्मी है और जहां विक्रमादित्य ने न्याय की सम्पूर्ण आधार-शिला रखी है। इस पुण्य-भूमि पर ‘सम्राट विक्रमादित्य द हैरिटेज’ का शुभारंभ कर आज एक और इतिहास रचा गया है। उन्होंने कहा कि महाराजवाड़ा के इस प्राचीन भवन को केवल पुनजीवित करना एवं निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक विरासत को संवारने का संकल्प है। यह हेरिटेज आधुनिकता और परंपरा का अद्वितीय संगम है। यहां पर्यटकों के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं मिलेगी। एक–एक कक्ष को आकर्षकनाम भी दिया गया है। उज्जैन का यह हैरिटेज पर्यटन के साथ भगवान महाकाल के भक्तों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा। पर्यटकों के लिए यहां आयुर्वेदिक पंचकर्म जैसी अनेक सुविधाओं की भी व्यवस्थाए की गई है। उन्होनें हैरिटेज के निर्माण पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश विरासत से विकास की ओर अगसर है। आज से नये युग का प्रादुर्भाव हो रहा है। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का काल रामराज्य की तरह रहा है। उन्होनें कहा कि सनातन संस्कृति से श्रेष्ठ परमंपराओं को पुन: जीवित किया जाना चाहिए। आज उज्जैन का गौरव दिवस है, हमें अतीत से वर्तमान तक व्यवस्थाओं पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1235 में इलतुत्मिश ने उज्जैन नगर सहित उत्तर भारत के राज्यों को भी तहस-नहस किया था। उज्जैन में शिवाजी महाराज एवं महाराज सिंधिया के काल में अनेक इमारतों का निर्माण हुआ है। उज्जैन में प्राचीन गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाई देती है। ऐतिहासिक इमारतें, जिनका पहले शासकीय कार्यालयों के तौर पर उपयोग होता रहा, उन्हें विरासत के रूप मे संजोने का काम किया जा रहा है। आज ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल’ का निर्माण महाराजवाड़ा के पुराने भवन का जीर्णोद्धार कर किया गया है। यहां पूर्व में विद्यालय संचालित होता था। इसके निर्माण से इतिहास जीवंत हो रहा है, यहां आने वाले पर्यटकों को आनंद महसूस होगा। पर्यटकों के लिए हैरिटेज होटल में एआई का इस्तेमाल कर अच्छी व्यवस्थाएं की गई हैं। महाकाल प्रांगण में बने इस हैरिटेज होटल से श्रद्धालुओं को सुविधा जनक तरीके से महाकाल के दर्शन भी होंगे। केन्द्रीय राज्यमंत्री मेघवाल ने कहा कि राजस्थान के बीकानेर जिले के भीकमपुर में भी एक बड़ा महल है। यह भी विक्रमादित्य कालीन प्रतीत होता है, यह शोध का विषय है। उन्होंने कहा कि वे न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की नगरी में सीखने के लिए आए हैं। विक्रमादित्य हैरिटेज होटल का लोकार्पण राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय राज्य मंत्री मेघवाल ने सम्राट विक्रमादित्य हैरिटेज होटल का लोकार्पण, परंपरागत पूजा-अर्चना के साथ फीता खोल कर किया। सभी अतिथियों ने हेरिटेज के विभिन्न कक्षों का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इन्दरसिंह परमार, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, शिवप्रकाश, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव, प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ल सहित गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।   recent visitors 27

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव और केन्‍द्रीय राज्य मंत्री मेघवाल ने वीर भारत संग्रहालय का भूमि‍-पूजन किया

उज्‍जैन मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्‍य आतिथ्‍य में कोठी महल पर युगयुगीन भारत के कालजयी महानायकों की तेजस्विता की महागाथा का वर्णन करने वाले "वीर भारत संग्रहालय" का भूमि पूजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अर्जुनराम मेघवाल भी कार्यक्रम में सम्‍मिलित हुए। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि उज्‍जैन का इतिहास अत्‍यंत प्राचीन है। हर कल्‍प में उज्‍जयिनी का अपना इतिहास रहा है। प्राचीन भारत के वीर महापुरूषों की गौरव गाथा की जानकारी इस संग्रहालय में प्रदान की जाएगी। संग्रहालय का निर्माण भव्‍य स्‍तर पर किया जाएगा। प्राचीन काल की सभी प्रमुख घटनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। संग्रहालय का निर्माण लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से किया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त आवश्‍यकता पडने पर और धन राशि भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत पर गर्व करने का एक और अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी ओर से संग्रहालय के निर्माण हेतु शुभकामनाँ दी।    कार्यक्रम में बतौर विशिष्‍ट अतिथि सांसद उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र अनिल फिरोजिया, सांसद राज्यसभा बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक उज्जैन-उत्तर अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल,  महापौर  नगर पालिक निगम मुकेश टटवाल  निगम अध्यक्ष नगर पालिक निगम श्रीमती कलावती यादव और संस्‍कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्‍ला‍शामिल हुए। कार्यक्रम में सर्वप्रथम पंडित चंदन व्‍यास एवं उनके दल के द्वारा स्‍वस्ति वाचन किया गया। वीर भारत न्‍यास के न्‍यासी सचिव श्रीराम तिवारी के द्वारा पुष्‍प गुच्‍छ भेंट कर अतिथितियों का स्‍वागत किया गया। श्रीराम तिवारी ने स्‍वागत वक्‍तव्‍य देते हुए कहा कि भारतवर्ष के गौरवशाली और पराक्रमी अतीत से परिचय तथा प्रेरणा हमारे समय की अपरिहार्य आवश्यकता है। यह एक राष्ट्रव्यापी, महत्वाकांक्षी स्वप्न है, जिसे चरितार्थ करने के लिए वीर भारत संग्रहालय में भारत की तेजस्विता और पराक्रम के विभिन्न आयामों को व्यापक रूप से प्रस्तुत किये जाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार संकल्पित है। तेजस्विता और शौर्य हमारे जीवन, परंपरा, चित्त-वृत्ति, चिंतन-प्रकृति, दर्शन, जीवन मूल्य, आस्था और विश्वासों का स्वर है। हमारा प्रयास है कि वीर भारत संग्रहालय में राष्ट्र की सभी मंगलकारी दृष्टियों का प्रतिबिंबन हो। भारत वर्ष का प्रागैतिहास-पुरापाषाण काल, पूर्व वैदिक, वैदिक/उपनिषद, सरस्वती सिंधु घाटी सभ्यता, उत्तर वैदिक, श्रीराम के पूर्वज, श्रीकृष्ण के पूर्वज, रामायण काल, महाभारत काल, प्राचीन भारत की जनजातियों, महाजनपद काल, गौतम बुद्ध, महावीर, आदि शंकराचार्य, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट विक्रमादित्य काल, सातवाहन, गुप्त साम्राज्य, चोल, पल्लव, भोजदेव, मध्ययुग, भक्ति काल, भारत के शूरवीर, पराधीनता के विरूद्ध सिंहनाद करते हुए भारत की सुदीर्घ परंपरा में तेजस्वी नायकों, चिंतकों, दार्शनिकों, मंत्रद्रष्टा, ऋषियों, संतों, मनीषियों, कवियों, लेखकों, कलाकारों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों के अनुपम योगदान को रेखांकित किया जायेगा। उल्‍लेखनीय है कि वीरभारत संग्रहालय युगयुगीन भारत के महानायकों की महागाथा का अनूठा केंद्र बनने जा रहा है। प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है कि यह उज्जैन में स्थापित होने जा रहा है। सनातन परंपरा से ही, सृष्टि के आरंभ से ही बाबा महाकाल और उनकी प्रिय उज्जयिनी विराजित है। भारत वर्ष प्रागैतिहासिक-पुरापुरापाषाण काल से ही मानव सभ्यता और संस्कृति के विकास की कर्मभूमि रहा है। वीर भारत संग्रहालय में चाहे वैदिक काल हो, उपनिषद काल हो, रामायण महाभारत काल हो, हमारे ऋषि वैज्ञानिक हों, हमारे राष्ट्र के महानायक हों या फिर वे राजा महाराजा रहे हों, वैज्ञानिक रहे हों, साहित्यकार, इतिहासकार, खगोलविद हों, योद्धा हों, संन्यासी हों, उद्यमी रहे हो, ऐसे सभी प्रेरक चरित्रों को यादगार बनाने की कोशिश की जायेगी जिन्होंने भारत को तेजस्वी भारत बनाने का काम किया हो। मैंने निर्देश दिए हैं कि इस संग्रहालय जो दुनिया में अपनी तरह का सबसे अकेला होगा, इसे समय सीमा में पूरा किया जाए, सिंहस्थ के पहले पूरा किया जाये।  भारत वर्ष में विक्रमादित्य युग परिवर्तन और नवजागरण की एक महत्वपूर्ण धुरी रहे हैं, और उनके द्वारा प्रवर्तित विक्रम सम्वत् हमारी एक अत्यंत मूल्यवान धरोहर है। कार्यक्रम में वीर भारत संग्रहालय की रुप रेखा पर आधारित फिल्‍म का प्रदर्शन भी हुआ। अतिथीयों द्वारा इस दौरान कोठीमहल का अवलोकन भी किया गया।   recent visitors 32

मध्यप्रदेश में पहली बार 1000 ड्रोन के माध्यम से आकर्षक ड्रोन-शो की प्रस्तुति दी गई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विक्रमोत्सव-2025 विक्रमोत्सव का आयोजन एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को करता है स्थापित: राज्यपाल पटेल उज्जैन में विक्रमादित्य के नाम से स्थापित हो न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश-राजस्थान में टूरिस्ट सर्किट बनाने की आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. मेघवाल राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री डॉ. मेघवाल ने विक्रमोत्सव में प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया मध्यप्रदेश में पहली बार 1000 ड्रोन के माध्यम से आकर्षक ड्रोन-शो की प्रस्तुति दी गई प्रसिद्ध गायिका सुश्रेया घोषाल ने दी में मनमोहक प्रस्तुति सिंहस्थ-गान हुआ लांच उज्जैन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् 2082 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ अवसर पर उज्जैन में विक्रमोत्सव के प्रसंग में आयोजित कार्यक्रमों में प्रदेशवासियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभार ज्ञापित करता हूँ। जिन्होंने दुनिया की पहली वैदिक घड़ी और भगवान महाकाल के अद्भुत महालोक की सौगतों से महाराजा विक्रमादित्य की उज्जयिनी के गौरव और वैभव की पुनर्स्थापना की है। विक्रमोत्सव का आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं के प्रकटीकरण के लिए हमारी गौरवशाली विरासत और वर्तमान के विकास का उत्सव है। यह दिन हमारे लिए एक नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे पूर्वजों के योगदान को याद करने का अवसर है। राज्यपाल पटेल रविवार को उज्जैन में विक्रमोत्सव अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री डॉ. अर्जुनराम मेघवाल भी मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि नववर्ष का यह पर्व विविध स्वरूपों में मनाया जाने वाला 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की संकल्पना को स्थापित करता है। इसे कहीं 'गुड़ी पड़वा' तो कहीं 'चैती चांद', कहीं 'युगादि' तो कहीं 'उगादि' और कहीं 'नवरोज अगदु' के अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। इसी के साथ नौ दिन आरोग्य, साधना और कायाकल्प के नवरात्र का भी आरंभ होता है। राज्यपाल ने कहा कि विक्रम सम्वत् वर्ष का प्रवर्तन भारतीय सम्राट विक्रमादित्य के द्वारा विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर, उनके राज्यभिषेक के दिन से होता है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि नव सम्वत्सर की तिथि सृष्टि निर्माण की तिथि है, जिसका निर्धारण संपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ हुआ है। वास्तव मे भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन ऋतु परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को सक्षम बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भारतीय नववर्ष प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन और निर्माण की प्रेरणा देता है, जिसमें सृष्टि, संस्कृति और समाज का संगम है। ऋतुकाल संधि के इन दिनों में नवचेतना, नवजागृति का संदेश है। इसे मनाने की परंपरा व्यक्ति, परिवार और समाज, तीनों के स्वस्थ जीवन और समृद्धि को ध्यान में रखकर शुरू की गई। यह हम सब प्रदेशवासियों के लिये गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय नववर्ष विक्रम सम्वत् उज्जयिनी से शुरू हुआ है। सम्राट विक्रमादित्य का सारी दुनिया में न्यायप्रियता, ज्ञानशीलता, धैर्य, पराक्रम, पुरुषार्थ, और वीरता जैसी विशेषताओं के लिए स्मरण किया जाता है।  राज्यपाल ने उत्सव में विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों के साथ सम्राट विक्रमादित्य के समूचे व्यक्तित्व, कृतित्व और विशेषताओं को परिचित कराने के राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई और मंगलकामनाएं दी। उज्जैन में  न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था सम्राट विक्रमादित्य के नाम से प्रारंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन नगरी सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल की नगरी है। उज्जयिनी वह नगरी है जिसमें योगीराज श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की तो अनेक राजा महाराजाओं ने अपने न्याय प्रिय शासन से दुनिया को न्याय की ओर मोड़ा। आज का दृश्य देख कर लग रहा है मानो आज सम्राट विक्रमादित्य स्वयं इस नगरी में पधारे हैं। हम सबके लिए यह सौभाग्य की बात है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में श्रीमहाकाल महालोक का निर्माण हुआ और भगवान महाकालेश्वर की नगरी का वैभव और बड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनका शासन काल रामराज्य की याद दिलाता है। हमारी सरकार भी निरंतर जनता की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। विक्रमादित्य ने अपने पुरुषार्थ से अपनी प्रजा का ध्यान रखा और सदैव प्रजा की रक्षा की। उन्होंने जनता का कर्ज माफ किया। उन्होंने विक्रम संवत का प्रवर्तन करते हुए सनातन परंपरा की पुनर्स्थापना की। सम्राट विक्रमादित्य की न्याय परंपरा का लोहा आज भी माना जाता है। उनकी न्याय प्रियता हजारों साल से जानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. मेघवाल से अनुरोध किया कि भविष्य में उज्जैन में  न्याय से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था सम्राट विक्रमादित्य के नाम से प्रारंभ की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव संवत्सर पर सभी लोगों के जीवन में खुशहाली की कामना की और सभी को अपनी ओर से नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी निरंतर विकास के कार्य सरकार द्वारा किए जाएंगे और इस प्रकार के आयोजन हर्षोल्लास के साथ आयोजित किए जाएंगे। उज्जैन में राजा महाराजा काल के जैसी होटल 'सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज' होटल का लोकार्पण भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यपाल पटेल की उपस्थिति में विक्रमोत्सव के कार्यक्रम से प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों  में प्रभारी मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय कार्यक्रम से जल गंगा संवर्धन अभियान आज से शुरू हो गया है। उज्जैन में 100 से अधिक कुआं, बावड़ी, तालाबों और अन्य जल स्त्रोतों में स्वच्छता, जीर्णोद्धार और नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आज हम सब क्षिप्रा नदी के पावन तट पर विक्रमोत्सव मना रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से सबका अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य के शासन का प्रभाव अफगानिस्तान तक था। वे राजस्थान के बीकानेर से आते हैं। उन्होंने राज्यपाल पटेल के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान और एमपी के द्वारा भविष्य में टूरिस्ट सर्किट बनाए जाने के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। इस टूरिस्ट सर्किट से राजा भर्तहरि और सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल से … Read more