Thursday, July 9, 2026 11:33 am

पंचायत में हैंडपंप घोटाला: पानी संकट पर भ्रष्टाचार सरपंच के ससुर द्वारा 20 हजार की वसूली

पंचायत में हैंडपंप घोटाला: पानी संकट पर भ्रष्टाचार सरपंच के ससुर द्वारा 20 हजार की वसूली

Panchayat hand pump scam: Sarpanch’s father-in-law extorts Rs 20,000 for corruption amid water crisis Money Extortion Viral video: मुरैना जिले के जनपद पोरसा की कौंधरखुर्द पंचायत में ग्रामीणों ने महिला सरपंच सोनम बाल्मीकि के ससुर रामपाल वाल्मीकि पर हैंडपंप खनन कराने के नाम पर 20-20 हजार रुपए वसूलने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों द्वारा महिला सरपंच के ससुर का रुपए गिनते हुए का वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाला है। इसके बारे में पूछने पर महिला सरपंच के ससुर ने पहले तो कहा कि यह रुपए मैने किसी दूसरे मद के लिए वसूले हैं। बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह हैंडपंप खनन के लिए सिक्योरिटी मनी थी, ताकि उसका सामान चोरी न हो जाए। जबकि हैंडपंप खनन के लिए सिक्योरिटी मनी जैसा कोई प्रावधान ही नहीं होता। (MP News) ससुर देखते है महिला सरपंच का पूरा कामजानकारी के अनुसार कौंधरखुर्द पंचायत में रहने वाले ग्रामीण कन्हैया माहौर के घर पानी की किल्लत थी। इस पर कन्हैया माहौर लंबे समय से कौंधरखुर्द की सरपंच सोनम वाल्मीकि के ससुर रामपाल वाल्मीकि से कई बार हैंडपंप लगाने के लिए गुहार लगाई। चूंकि महिला सरपंच का पूरा काम उनके ससुर ही देखते हैं, इस पर उन्होंने कन्हैया से कहा कि 20 हजार रुपए खर्च होंगे, तब हैंडपंप लग सकेगा। ग्रामीण ने कर्ज लेकर रुपए दिए, हैंडपंप आज तक नहीं लगाग्रामीणों ने कर्ज लेकर 20 हजार का चंदा एकत्रित किया और यह रुपए सरपंच रामपाल वाल्मीकि को दिए। लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी सरपंच के ससुर हैंडपंप का खनन नहीं करवा सके। दूसरे काम के लिए थे पैसे- सरपंच ससुरमैने कन्हैया से पैसे किसी दूसरे मद में लिए थे, पहले दिए फिर वापस लिए। यह पैसा हैंडपंप का सिक्योरिटी अमाउंट था ताकि समान चोरी न हो। रामपाल वाल्मीकि, महिला सरपंच का ससुर कलेक्टर ने दिए कार्रवाई करने के निर्देशसरकारी हैंडपंप के बदले सिक्योरिटी या अमानत राशि लेने का कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित सरपंच के विरुद्ध धारा 40 की कार्रवाई तत्काल संस्थित की जाएगी। अवैध वसूली के लिए सरपंच के ससुर पर भी सुसंगत धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।- लोकेश कुमार जांगिड़, कलेक्टर मुरैना वायरल वीडियो में यह बातचीत रिकॉर्ड recent visitors 68

एमपी गज़ब : महिला नायब तहसीलदार ने गार्ड को थप्पड़, डंडे से पीटा

एमपी गज़ब : महिला नायब तहसीलदार ने गार्ड को थप्पड़, डंडे से पीटा

Naib Tehsildar Jyoti Lakshakar: मध्यप्रदेश के मुरैना में पदस्थ महिला नायब तहसीलदार ज्योति लाक्षाकार पर एक बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है जो बिल्डिंग में लगे सीसीटीवी का है और उसमें नायब तहसीलदार ज्योति लाक्षाकार गार्ड के साथ मारपीट करती नजर आ रही हैं। पीड़ित सुरक्षा गार्ड ने नायब तहसीलदार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन मामला प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा होने के कारण पुलिस कह रही है कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। पहले मारे थप्पड़ फिर डंडे से पीटाघटना हाईवे स्थित आशीर्वाद मल्टी की है, जहां नायब तहसीलदार ज्योति लाक्षाकार का निवास है। इसी बिल्डिंग में 50 साल के मोहरमन शर्मा सिक्योरिटी गार्ड हैं। बुधवार शाम को ज्योति लाक्षाकार ने गार्ड के साथ मारपीट की। जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है उसमें पहले वह गार्ड को थप्पड़ मारती और फिर डंडे से पीटती दिख रही हैं। मारपीट में गार्ड को चोटें भी आई हैं। जिस वक्त मारपीट की जा रही थी, वहां नायब तहसीलदार ज्योति लाक्षाकार व गार्ड के अलावा और भी लोग खड़े वीडियो में नजर आ रहे हैं। गार्ड ने बताई आपबीतीपीड़ित गार्ड मोहरमन शर्मा ने अपने आवेदन में लिखा कि ज्योति मैडम ने ड्राइवर के जरिए उसे बुलवाया और जब वह पहुंचा तो पूछा कि “तू मेरे ड्राइवर से क्या बोल रहा था।” जिस पर मैंने जवाब देते हुए कहा कि “मैंने कहा था कि मैडम आज तुम्हारी गाड़ी में नहीं गईं, किसी अन्य की गाड़ी में गई हैं।” यह बात सुनते ही वह नाराज़ हो गईं और मुझे गालियाँ देते हुए पीटना शुरू कर दिया। पीड़ित गार्ड का यह भी कहना है कि अगर उससे कोई गलती हुई थी तो मैडम सजा देतीं, लेकिन मैंने कोई गलती नहीं की, फिर भी मैडम ने मुझे सबके सामने गालियाँ दीं और पीटा। पीड़ित का यह भी कहना है कि अब उसकी सुनवाई भी नहीं हो रही है। recent visitors 75

अटल प्रगति पथ फिर अधर में: नाम बदला, सर्वे बदला, लेकिन काम अब भी ठप

अटल प्रगति पथ फिर अधर में: नाम बदला, सर्वे बदला, लेकिन काम अब भी ठप

Atal Pragati Path once again in limbo: Name changed, survey changed, but work still stalled मुरैना। Atal Pragati Path once चंबल अंचल के मुरैना, भिंड और श्योपुर जिलों को उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जोड़ने वाला अटल प्रगति पथ (पूर्व में चंबल एक्सप्रेस-वे) अब तक सरकारी असमंजस में उलझा हुआ है। 2018 से लेकर 2025 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना का न तो कोई ठोस स्वरूप तय हो पाया है और न ही निर्माण का काम धरातल पर उतरा है। अब तक इस परियोजना का पाँच बार नाम और तीन बार अलाइनमेंट बदला जा चुका है। सर्वे भी बदला, समाधान नहीं मिला Atal Pragati Path onceमार्च 2023 तक तीसरे चरण का भूमि अधिग्रहण सर्वे लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन किसानों के विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौखिक रूप से सर्वे रद्द करने के निर्देश दे दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक उस सर्वे को लिखित रूप से रद्द नहीं किया गया, जिससे कई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं। नया सर्वे भी अधर मेंचौथे सर्वे के आदेश 2022 के अंत में दिए गए थे, लेकिन वह कभी शुरू ही नहीं हो पाया। 03 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले बजट में इस परियोजना की नए सिरे से घोषणा की थी और इसे 299 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित किया गया। जबकि पूर्व प्रस्तावित लंबाई 404 किलोमीटर थी। किसानों की ज़मीन अधर में Atal Pragati Path onceमार्च 2023 के रिकार्ड के अनुसार, 214 गांवों के 26448 किसानों की लगभग 1965 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट के लिए चिह्नित की गई थी। लेकिन सर्वे के निरस्त होने और लिखित आदेश न आने के चलते किसान न तो ज़मीन का नामांतरण करा पा रहे हैं और न ही बिक्री-रजिस्ट्री हो पा रही है। घड़ियाल सेंक्चुरी बनी बड़ी बाधाएक्सप्रेस-वे का पहला अलाइनमेंट चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी से होकर गुजरता था, जिस कारण वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति जताई। दूसरा और तीसरा अलाइनमेंट भी बीहड़ों और निजी खेतों से होकर गुजरता था, जिसे लेकर भारी विरोध हुआ। चौथा सर्वे अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। प्रशासन ने दी स्थिति स्पष्टता“मार्च 2023 में शासन से निर्देश मिलने के बाद से कोई नई दिशा नहीं आई है। परियोजना की स्थिति पूर्ववत है। जैसे ही आदेश मिलेगा, आगे की कार्रवाई की जाएगी।”— सीबी प्रसाद, अपर कलेक्टर, मुरैना Atal Pragati Path once , जिसे कभी चंबल एक्सप्रेस-वे के नाम से शुरू किया गया था, अब तक सिर्फ कागजों और घोषणाओं का प्रोजेक्ट बनकर रह गया है। ज़मीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंज़ूरी और प्रशासनिक अस्पष्टता इसकी सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। यदि मोहन सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती, तो यह प्रोजेक्ट भी एक अधूरी योजना बनकर इतिहास में दर्ज हो जाएगा। recent visitors 140