जबलपुर हाईकोर्ट की चिंता: POCSO की 14 हजार से अधिक अपीलें लंबित, कम उम्र के आरोपियों की बढ़ती संख्या पर हैरानी

Jabalpur High Court’s concern: Over 14,000 POCSO appeals pending; surprise expressed over the rising number of underage accused. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। हाईकोर्ट की तीनों पीठ में पॉक्सो एक्ट के तहत साढ़े 14 हजार से अधिक अपील लंबित होने पर चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे तथा जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने चिंता जाहिर की है। युगलपीठ ने पॉक्सो कानून के प्रावधानों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार डीई को निगरानी का दायित्व सौंपा है। गौरतलब है कि अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में बढ़ोतरी हो रही है। एक्ट के तहत केंद्र व राज्य सरकार को एक्ट के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करना है, जिससे किशोर और नवयुवकों तक एक्ट के संबंध में जानकारी पहुंच सके। इसके अलावा हाईकोर्ट संज्ञान याचिका के रूप में भी मामले की सुनवाई कर रहा था। इसके अलावा एक अन्य याचिका भी दायर की गई थी।विज्ञापन पॉक्सो और किशोर न्याय कानून को लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के संबंध में विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लगभग 52 हजार लोग शामिल हुए, जबकि विभिन्न जिला स्तरीय कार्यक्रमों में 2,73,701 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें पुलिसकर्मी, स्कूली विद्यार्थी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जिला बाल संरक्षण इकाई के स्वयंसेवक और ग्राम एवं ब्लॉक स्तर के प्रतिभागी शामिल थे। गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एक संगठन द्वारा छह जिलों में बाल अधिकार अभियान के माध्यम से लगभग 4.50 लाख लोगों को जागरूक किया गया है। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट की तीनों पीठों के समक्ष पॉक्सो एक्ट की 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में पीड़ित की उम्र 16 से 18 वर्ष और आरोपी की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। कई आरोपी कम उम्र के हैं और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध के आरोप में जेल में हैं। प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी पॉक्सो मामलों में वृद्धि का प्रमुख कारण कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूकता की कमी है। कई मामलों में आरोपी और पीड़ित दोनों इस बात से अनजान होते हैं कि दोस्ती या प्रेम संबंध के कारण घर से चले जाने जैसी परिस्थितियां भी पॉक्सो कानून के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में पॉक्सो अधिनियम की धारा 43 का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों का दायित्व है कि कानून के प्रावधानों का टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से नियमित रूप से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। जागरूकता के लिए किए गए उपायों के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। लंबित आपराधिक मामलों और अपीलों का शीघ्र निपटारा तभी प्रभावी ढंग से हो सकेगा, जब नए मामलों की संख्या को कानून के प्रभावी उपायों के जरिए नियंत्रित किया जा सके। याचिका पर सुनवाई की जाएगी युगलपीठ ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार डीई को पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की प्रगति तथा अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी का दायित्व सौंपा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कमेटी पॉक्सो मामलों की प्रगति की निगरानी करेगी और मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी। कमेटी को मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का अधिकार भी होगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दो याचिकाओं का निराकरण करते हुए सिर्फ संज्ञान याचिका पर सुनवाई की जाएगी। युगलपीठ ने अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को न्यायालय मित्र नियुक्त किया है। recent visitors 23

पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर! नालों के दूषित पानी से उगाई जा रही सब्जियां खतरनाक, हाईकोर्ट सख्त

After water, now vegetables are poisoned! Vegetables grown using contaminated drain water are dangerous, the High Court has taken a tough stand. जबलपुर। पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर घुलने का खतरा सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जबलपुर के नालों का पानी अत्यधिक सीवेज से दूषित है और इसी पानी से उगाई जा रही सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को दिए सख्त निर्देश मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है। नालों के पानी में तय मानकों से ज्यादा गंदगी प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला, उदरना नाला सहित कई नालों के पानी की जांच की गई। जांच में— की मात्रा निर्धारित मानक से कहीं अधिक पाई गई। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह पानी अनुपचारित सीवेज है, जो पीने, नहाने या खेती के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त है। छात्र के पत्र से जनहित याचिका तक यह मामला तब उजागर हुआ जब एक विधि छात्र ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बताया कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में नालों के दूषित पानी से सब्जियों की खेती की जा रही है। इसे गंभीर जनहित का मुद्दा मानते हुए हाईकोर्ट ने पत्र को जनहित याचिका (PIL) में तब्दील कर दिया। 174 एमएलडी गंदा पानी नालों में बह रहा रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर में रोजाना करीब 174 मेगा लीटर प्रतिदिन (MLD) वेस्ट वॉटर नालों में छोड़ा जा रहा है। नगर निगम के पास मौजूद 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ 58 एमएलडी पानी का ही उपचार कर पा रहे हैं, जबकि कुल क्षमता 154.38 एमएलडी है। करोड़ों की योजनाएं, फिर भी समस्या जस की तस सीवेज ट्रीटमेंट के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हाल ही में अमृत 2.0 सीवर योजना के तहत जबलपुर नगर निगम को 1202.38 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिली है, इसके बावजूद नालों का गंदा पानी खेती में इस्तेमाल हो रहा है। स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने चेतावनी दी है कि ऐसे पानी से उगाई गई सब्जियों के सेवन से संक्रमण, पेट की गंभीर बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला बड़े जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकता है। recent visitors 66