व्यवस्थित और तय समय पर होगी आठवीं आर्थिक गणना, राजस्थान-जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन

जयपुर। राज्य में आठवीं आर्थिक गणना 2025-26 को व्यवस्थित एवं निर्धारित समयावधि में सम्पादित करने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। सहायक निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि जिला स्तरीय समन्वय समित के अध्यक्ष जिला कलक्टर होंगे। डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिलापरिषद, समस्त उपखण्ड अधिकारी, मुख्य आयोजना अधिकारी, एसीपी सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक व प्रारम्भिक, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, समस्त तहसीलदार, आयुक्त नगर निगम सदस्य होंगे। उन्होंने बताया कि संयुक्त निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी सदस्य सचिव होंगे। यह समिति एक अस्थाई समिति होगी जो आठवीं आर्थिक गणना की समाप्ति तक कार्यरत रहेगी। recent visitors 62

मदन राठौड़ का गहलोत पर तंज, राजस्थान-अल्पमत सरकार के सहयोगी विधायकों को खुश करने बनाए थे नए जिले

जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत अपनी अल्पमत सरकार को सहयोग करने वाले विधायकों को खुश करने के लिए आनन-फानन में नए जिलों की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं, गहलोत ने पूर्व सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में समिति तो गठित की, लेकिन नए जिलों की घोषणा के बाद स्वयं रामलुभाया ने आश्चर्य व्यक्त किया था। इसका मतलब साफ है कि गहलोत ने समिति को भी अंधेरे में रखकर विधायकों को खुश करने के लिए जिलों की रेवडियां बांटी थी ताकि उनकी अस्थिर सरकार को सहारा मिल सकें। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार ने सभी जिलों की समीक्षा करने के बाद भूपपूर्व प्रशासनिक अधिकारी ललित के पंवार की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। मंत्रीमंडल की समिति बनाई और इनकी रिपोर्ट के बाद कैबिनेट बैठक में 9 जिलें एवं 3 संभाग समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। समिति के साथ भाजपा सरकार ने राजस्थान की भौगोलिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या के आधार पर जनता की मांग को देखते हुए 41 जिले और सात संभाग रखने का फैसला किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार ने नए जिले तो घोषित कर दिए, लेकिन उन जिलों को चलाने के लिए ना तो आर्थिक प्रबंधन किया और ना ही उनके कार्यालय संसाधन आदि की व्यवस्था की। गहलोत तो 5 साल तक सरकार बचाने में जुटे रहे। सचिन पायलट के बीच शीत युद्ध जनता के सामने है। गहलोत और पायलट दोनों अपने खेमों के विधायकों को लेकर होटलों में कैम्प चलाते रहे। ऐसे में गहलोत विधायकों को संतुष्ट करने में जुटे रहे और गहलोत सरकार ने बिना गहन चिंतन किये चुनावी आचार संहिता लगने से एक दिन पूर्व अचानक नए जिलों की घोषणा कर दी। गहलोत ने ऐसे भी नए जिले बना दिए जिसकी कभी किसी ने कोई मांग तक नहीं की। क्या था अशोक गहलोत ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई थी जिसको दर्जनों जिलों के प्रतिवेदन प्राप्त हुए। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी,. जिसके आधार पर नए जिले बनाने का निर्णय किया गया। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया, परन्तु प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ था। राजस्थान से छोटा होने के बाद भी मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन से पूर्व राजस्थान में हर जिले की औसत आबाादी 35.42 लाख व क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था (हालांकि त्रिपुरा राज्य का क्षेत्रफल 10,492 वर्ग किलोमीटर, गोवा राज्य का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर, दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है) जबकि नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख व क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था। जिले की आबादी व क्षेत्र कम होने से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है एवं सुविधाओं व योजनाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो पाती है। छोटी प्रशासनिक इकाई होने पर जनता की प्रतिवेदनाओं का निस्तारण भी शीघ्रता से होता है। भाजपा सरकार द्वारा जिन जिलों को छोटा होने का तर्क देकर रद्द किया है वो भी अनुचित है। जिले का आकार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। हमारे पड़ोसी राज्यों के जिले जैसे गुजरात के डांग (2 लाख 29 हजार), पोरबंदर (5 लाख 85 हजार) एवं नर्बदा (5 लाख 91 हजार), हरियाणा के पंचकुला (5 लाख 59 हजार) एवं चरखी दादरी (लगभग 5 लाख 1 हजार), पंजाब के मलेरकोटला (लगभग 4 लाख 30 हजार), बरनाला(5 लाख 96 हजार) एवं फतेहगढ़ साहिब (6 लाख) जैसे कम आबादी वाले जिले हैं। कम आबादी वाले जिलों में सरकार की प्लानिंग की सफलता भी ज्यादा होती है। छोटे जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल रखना भी आसान होता है क्योंकि वहां पुलिस की पहुंच अधिक होती है। परिस्थितियों के आधार पर जिलों की आबादी में भी अंतर होना स्वभाविक है जैसे उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की आबादी करीब 60 लाख है जबकि चित्रकूट जिले की आबादी 10 लाख है। परन्तु सरकार के लिए प्रशासनिक दृष्टि से छोटे जिले ही बेहतर लगते हैं। सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम 3 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ मे परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है वो भी आश्चर्यजनक है क्योंकि डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है जिसे रखा गया है परन्तु सांचौर से जालोर की दूरी 135 किमी एवंअनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया। हमारी सरकार ने केवल जिलों की घोषणा ही नहीं की बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को संसाधनों के लिए बजट भी दिया। हम भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस अदूरदर्शी एवं राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लिए गए निर्णय की निंदा करते हैं। ""हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।    हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई…""     — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) December 28, 2024 recent visitors 68

विकास कार्यों से क्षेत्र में बदलाव और जनता का बढ़ा विश्वास, राजस्थान-मुख्यमंत्री ने जोधपुर एवं उदयपुर के विधायकों के साथ की बैठक

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन से सर्वांगीण विकास करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने के लिए आधारभूत विकास के साथ ही प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य समाज के अन्तिम व्यक्ति को राहत पहुंचाते हुए उत्थान और कल्याण सुनिश्चित करना है। शर्मा रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर जोधपुर एवं उदयपुर संभाग के विधायकों के साथ बजट वर्ष 2024-25 में की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। इसके लिए जिला प्रशासन के साथ निरन्तर बैठक कर विकास कार्यों की प्रगति का फीडबैक भी लेवें। उन्होंने कहा कि इन घोषणाओं को धरातल पर उतारना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने जोधपुर एवं उदयपुर संभाग के विधायकों से बजट घोषणाओं केे विकास कार्यों की वित्तीय स्वीकृति, जमीन आवंटन और प्रगतिरत कार्यों के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विधायकों से कहा कि आमजन के कल्याण एवं क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप जनहित के विकास कार्यों की सूची बनाकर भेजें ताकि इन्हें आगामी बजट में शामिल किया जा सके। मुख्यमंत्री सद्भावना केन्द्रों का करें प्रभावी संचालन— मुख्यमंत्री ने विधायकगणों को मुख्यमंत्री सद्भावना केन्द्रों के संचालन, अटल ज्ञान केन्द्रों की स्थापना और खेलो इंडिया अभियान की तैयारी के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देंश दिए। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार के कार्यों, योजनाओं, नीतियों व उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए। श्री शर्मा ने कहा कि विधायकों के कार्यों से ही क्षेत्र में बदलाव आता है और जनता का विश्वास कायम होता है। उन्होंने विधायकों के सुझावों का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत निर्माण कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। निवेश प्रस्तावों के उठाएं आवश्यक कदम— श्री शर्मा ने विधायकों से कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के तहत हुए एमओयू को अपने क्षेत्र में धरातल पर उतारने के लिए जिला कलक्टर के साथ निरन्तर बैठक करें। साथ ही, प्रत्येक जिले में पंच गौरव कार्यक्रम के तहत एक जिला-एक उपज, एक जिला-एक प्रजाति, एक जिला-एक उत्पाद, एक जिला-एक पर्यटन स्थल और एक जिला-एक खेल की नियमित मॉनिटरिंग कर इन्हें बढ़ावा देवें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जारी 10 नवीन नीतियों का भी प्रचार-प्रसार किया जाए। लखपति दीदी योजना के तहत लाभार्थियों से संवाद स्थापित कर निरन्तर कार्यक्रम की समीक्षा करें। इस अवसर पर जोधपुर व उदयपुर संभाग से आने वाले मंत्रिगण एवं विधायकगण उपस्थित रहे। recent visitors 137

‘रसायन रहित बागवानी ही कारगर, प्राकृतिक उद्यानिकी को बढ़ाएं: राज्यपाल’, राजस्थान-अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ की संगोष्ठी

जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कृषि उद्यानिकी के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को देश में रसायन रहित कृषि के लिए वातावरण निर्माण किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से रोग बढ़ रहे, धरती की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। उन्होंने उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती के लिए कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पानी बचाकर उसके निर्माण के लिए भी देशभर में कार्य करने का आह्वान किया।राज्यपाल श्री बागडे रविवार को अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ द्वारा "उद्यानिकी फसलों के संरक्षण"  विषयक आयोजित 16 वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कम पानी से होने वाली फसलों, फल, फसलों को प्राकृतिक प्रकोप से बचाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जाने पर भी जोर दिया।  उन्होंने सभी कृषि विश्वविद्यालयों में  सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भी आवश्यक रूप से कार्य करने की आवश्यकता जताई।राज्यपाल ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन द्वारा 2008 में प्रस्तुत कृषि सुधारों की बनी समिति के सुझावों पर चर्चा करते हुए कहा कि लाभकारी कृषि के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कृषि उद्यानिकी के प्राचीन ज्ञान के आलोक में कृषि की नवीन तकनीक से खेती को लाभकारी किए जाने पर जोर दिया। श्री बागडे ने कहा कि हमारे यहां धीरे धीरे जंगल कम होता जा रहा है। पहले अनाज जब नहीं होता था और खेती की पैदावार नहीं थी तब उद्यानिकी फसलों पर ही मनुष्य निर्भर था। पर धीरे धीरे इस दिशा में ध्यान नहीं देने के कारण जंगलों में बहुत सी उद्यानिकी फसलें लोप हो गई। उन्होंने स्थान विशेष की जलवायु के अनुरूप उद्यानिकी फसलों के अधिकाधिक उत्पादन के लिए कार्य किए जाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने आरंभ में विश्वविद्यालय के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी फॉर टिश्यू कल्चर का शिलान्यास किया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत गेहूं और अन्य नवीन कृषि उत्पाद प्रौद्योगिकी का भी शुभारंभ किया।  वहीं उन्होंने माइक्रोस्कोप से फसलों में सूक्ष्म कीट परीक्षण भी किया और विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का लोकार्पण किया। आरंभ में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने संरक्षित खेती के साथ राष्ट्रीय सिंपोजियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर पद्मश्री डा. बी. एस. ढिल्लो, अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और बागवानी विश्वविद्यालय,  उत्तराखंड के  कुलपति प्रो. परविंदर कौशल, अखिल भारतीय कृषि विश्वविद्यालय कुलपति संघ के कार्यकारी सचिव प्रो. दिनेश कुमार ने भी विचार रखे। सभी का आभार डा. एन. के. गुप्ता ने जताया। recent visitors 94

‘प्रदेश का सर्वांगीण विकास राज्य सरकार का एकमात्र ध्येय’, राजस्थान-मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ली कोटा संभाग के विधायकों की बैठक

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश का सर्वांगीण विकास और प्रदेशवासियों का कल्याण ही राज्य सरकार का एकमात्र ध्येय है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस ध्येय की पूर्ति में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के विधायक की अहम भूमिका है इसलिए एक जनप्रतिनिधि के रूप में विधायकों को समर्पण भाव के साथ जनहित के कार्यों के लिए तत्पर रहना चाहिए। शर्मा शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर कोटा संभाग के विधायकों के साथ पिछले बजट की घोषणाओं के क्रियान्वयन और आगामी बजट की तैयारियों से संबंधित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक विधायक को उसके विधानसभा क्षेत्र की जनता बहुत आकांक्षाओं और उम्मीदों के साथ चुनकर भेजती है, ऐसे में जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह जनता के भरोसे पर खरा उतरे। मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रत्येक विधायक से उनके विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बजट घोषणाओं के कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले बजट में राज्य के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को ढेरों सौगातें दी हैं और यह आवश्यक है कि आगामी बजट से पूर्व पिछले बजट में की गई घोषणाओं का धरातल पर उतरना सुनिश्चित हो। श्री शर्मा ने कहा कि विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते हुए बजट घोषणाओं से जुड़े कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विधायकों के साथ समन्वय बनाकर आधारभूत विकास के कार्यों में वित्तीय स्वीकृति से लेकर जमीन आवंटन, डीपीआर तैयार होने और निर्माण कार्य प्रारंभ होने तक प्रत्येक चरण पर समयबद्ध रूप से कार्यों की क्रियान्विति सुनिश्चित करे। आगामी बजट के लिए जनहित से जुड़े कार्यों की सूची बनाकर भेजें मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने दूरगामी सोच के साथ पिछला बजट प्रस्तुत किया था, जिसकी हर तरफ सराहना हुई। उन्होंने कहा कि आगामी बजट को भी राज्य की जनता के लिए सार्थक और समावेशी बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जनहित से जुड़े कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर सूची बनाकर भेजें, ताकि उन कार्यों को आगामी बजट में शामिल किया जा सके। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर, ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री हीरालाल नागर, विधायक श्री प्रताप सिंह सिंघवी, श्री संदीप शर्मा, श्री कालूराम, श्री कंवरलाल, श्री राधेश्याम बैरवा, श्री ललित मीणा, श्रीमती कल्पना देवी, श्री गोविंद प्रसाद, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) श्री शिखर अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे। recent visitors 66

‘सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेंगे’, राजस्थान-नेता प्रतिपक्ष जूली ने नौ जिले खत्म करने पर सरकार को घेरा

अलवर। राजस्थान सरकार ने शनिवार को 9 नए जिलों को समाप्त कर दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोला। जूली ने कहा कि इसी वर्ष अगस्त में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में 5 नए छोटे जिलों की घोषणा की थी। जबकि, राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, वहां भाजपा की सरकार ने 9 जिलों को समाप्त कर दिया। यह फैसला निंदनीय और जनविरोधी है। कांग्रेस पार्टी इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है और आने वाले दिनों में सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेगी। समिति की रिपोर्ट पर बनाए गए थे जिले टीकाराम जूली ने बताया कि जिलों के गठन का आधार कोई राजनीतिक नहीं, बल्कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को बनाई गई समिति की रिपोर्ट थी। इस समिति को दर्जनों जिलों से प्रतिवेदन प्राप्त हुए थे। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर नए जिलों के गठन का निर्णय किया गया। राजस्थान में नए जिलों की आवश्यकता जूली ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि राजस्थान में नए जिलों की आवश्यकता नहीं है। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया, लेकिन प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ। राजस्थान से छोटा होने के बावजूद मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन के बाद राजस्थान में प्रत्येक जिले की औसत आबादी 15.35 लाख और क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था। इसके विपरीत, जिलों के गठन से पहले औसत आबादी 35.42 लाख और क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था। छोटी प्रशासनिक इकाइयों से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है और सुविधाओं एवं योजनाओं की डिलीवरी प्रभावी रूप से सुनिश्चित की जा सकती है। भाजपा का निर्णय गलत नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार द्वारा जिलों को छोटा होने का तर्क देकर समाप्त करने को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में कई ऐसे जिले हैं जिनकी आबादी राजस्थान के प्रस्तावित जिलों से भी कम है। जैसे, गुजरात के डांग जिले की आबादी मात्र 2.25 लाख है, जबकि हरियाणा के पंचकुला और पंजाब के मलेरकोटला की आबादी भी 5-6 लाख के आसपास है। जूली ने भाजपा के 2007 के प्रतापगढ़ जिले के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बावजूद भी वहां केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। यह तर्क कि एक जिले में तीन से अधिक विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए, पूरी तरह से निराधार है। दूरी का तर्क भी विरोधाभासी नेता प्रतिपक्ष ने जिलों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस अधिकारी ललित के पंवार लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में इस निर्णय में राजनीतिक दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा दी गई दूरी का तर्क भी विरोधाभासी है। डीग, जो भरतपुर से केवल 38 किलोमीटर दूर है, उसे जिला बनाए रखा है, लेकिन सांचौर, जो जालोर से 135 किलोमीटर दूर है, और अनूपगढ़, जो गंगानगर से 125 किलोमीटर दूर है, उन्हें समाप्त कर दिया गया। निर्माण के लिए बजट भी दिया था जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने न केवल नए जिलों की घोषणा की थी, बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति की थी और नए कार्यालयों के निर्माण के लिए बजट भी दिया था। भाजपा सरकार के इस अदूरदर्शी फैसले से जनता में आक्रोश और निराशा का माहौल है। जनता से अपील की है कि वह भाजपा सरकार की गलत नीतियों का जवाब वोट के माध्यम से दे। recent visitors 174

‘संविधान हमारे लिए गाइडिंग लाइट’, राजस्थान-मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सुनी प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’

जयपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 117वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सीएमआर पर मंत्रिपरिषद के सदस्य, सांसद एवं विधायकगण के साथ प्रधानमंत्री के सम्बोधन को सुना। मोदी ने कहा कि 2025 में 26 जनवरी को संविधान लागू होने के 75 साल पूरे हो रहे हैं। ये हमारे लिए गर्व की बात हैं। संविधान हमारे लिए गाइडिंग लाइट है, हमारा मार्गदर्शक है। संविधान की वजह से ही आज मैं आपसे बात कर पा रहा हूं। उन्होंने कहा कि इस साल 26 नवंबर को संविधान दिवस से एक साल तक चलने वाली कई एक्टीविटिज शुरू हुई हैं। देश के नागरिकों को संविधान की विरासत से जोड़ने के लिए constitution75.com नाम से एक खास वेबसाइट भी बनाई गई है। इसमें आप संविधान की प्रस्तावना पढ़कर अपना वीडियो अपलोड  कर सकते हैं। हर क्षेत्र, हर वर्ग का हो रहा विकास – मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा— मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ में उद्बोधन सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणादायी होते हैं। उनको सुनकर नवीन ऊर्जा का संचार होता है। देश निरन्तर उपलब्धियां हासिल कर रहा है, उसको जानकर हमें गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के पथ पर तेजी से अग्रसर है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, वाणिज्य, रक्षा, तकनीक एवं सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति अर्जित की है। श्री शर्मा ने कहा कि श्री मोदी के विजन से विकास का इंजन दोगुनी रफ्तार से दौड़ रहा है, जिससे युवा, महिला, किसान एवं गरीब का उत्थान एवं कल्याण सुनिश्चित हो रहा है। अनेकता में एकता का संदेश देता है महाकुंभ- प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी की 13 तारीख से प्रयागराज में महाकुंभ शुरू होने जा रहा है। महाकुंभ की विशेषता केवल इसकी विशालता में ही नहीं है बल्कि इसकी विविधता में भी है। इस आयोजन में करोड़ों लोग एक साथ एकत्रित होते हैं। लाखों संत, सैकड़ों संप्रदाय, अनेकों अखाड़े, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनता है। कहीं कोई भेदभाव नहीं दिखता है, कोई बड़ा और छोटा नहीं होता है। अनेकता में एकता का ऐसा दृश्य विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने आमजन से आग्रह किया कि जब वे कुंभ में शामिल हों, तो एकता के इस संकल्प को अपने साथ लेकर वापस आयें। श्री मोदी ने बताया कि इस बार प्रयागराज में देश और दुनिया के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे। मलेरिया, कैंसर के विरूद्ध लड़ाई में भारत की बड़ी उपलब्धियां- श्री मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की दो उपलब्धियां आज विश्व का ध्यान आकर्षित कर रही है। पहली उपलब्धि है मलेरिया से लड़ाई में। उन्होंने कहा कि 4 हजार से अधिक वर्षों तक मानवता के लिए मलेरिया बहुत बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रहा है। देशवासियों ने इस चुनौती का दृढ़ता से सामना किया है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत मंे 2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों में 80 प्रतिशत की कमी आई है। यह सफलता जन-जन की भागीदारी से प्राप्त हो सकी है। उन्होंने कहा कि हमारी दृढ़शक्ति का दूसरा उदाहरण कैंसर के विरूद्ध लड़ाई है। जनजागृति एवं आयुष्मान भारत योजना से कैंसर के विरूद्ध लड़ाई में अपेक्षित सफलता मिली है। आयुष्मान भारत योजना ने पैसे की परेशानी को काफी हद तक कम किया है और लगभग 90 प्रतिशत मरीज समय पर कैंसर का इलाज शुरू करवा पा रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि कैंसर के मुकाबले के लिए एक ही मंत्र है-अवेयरनेस, एक्शन और एश्योरेंस। छोटी शुरूआत से ही बड़े परिवर्तन संभव- प्रधानमंत्री ने उड़ीसा के कालाहाड़ी का जिक्र करते हुए यहां के किसानों द्वारा स्थापित किए गए एफपीओ (किसान उत्पाद संघ) की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कम पानी और कम संसाधन होने के बावजूद यहां गोलाकुण्डा ब्लॉक में दस किसान एफपीओ की स्थापना कर ‘सब्जी क्रांति’ लाए। आज इससे 200 किसान जुड़े हुए हैं, जिसमें से 45 महिलाएं हैं। इसका टर्नओवर डेढ़ करोड़ से ज्यादा हो गया है। उन्होंने एफपीओ को प्रोत्साहन देने का आग्रह करते हुए कहा कि छोटी शुरूआत से ही बड़े परिवर्तन संभव है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की सांस्कृतिक विरासत, फिल्म एवं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की क्षमता, फिल्मी जगत की कई हस्तियों के योगदान और बस्तर ओलम्पिक पर भी विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। recent visitors 102