139 उत्कृष्ट विद्यालयों का संचालन

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग शासकीय स्कूलों में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर की गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के जिला मुख्यालय एवं विकासखंड पर उत्कृष्ट विद्यालयों का संचालन कर रहा है। वर्तमान में 43 जिला मुख्यालयों पर और 96 विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिला स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालयों में लगभग 49 हजार 500 और विकासखंड स्तरीय विद्यालयों में 66 हजार 250 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यह योजना प्रदेश में वर्ष 2017-18 में शुरू की गई थी। प्रदेश में 41 जिला उत्कृष्ट विद्यालयों में 100 सीटर बालक और 100 सीटर बालिका छात्रावास भी स्वीकृत किये गये हैं। वर्तमान में इन छात्रावासों में लगभग 5 हजार 800 विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना से विद्यार्थियों की शिक्षा के स्तर में काफी अच्छे परिणाम सामने आये हैं।   recent visitors 64

रायपुर : मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल : प्रदेश में गर्मी और लू को देखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित

रायपुर : मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल : प्रदेश में गर्मी और लू को देखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित 25 अप्रैल से 15 जून तक स्कूल रहेंगे बंद रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्कूली बच्चों के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए राज्य के सभी कलेक्टरों से कहा है कि राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए राज्य के सभी स्कूलों में 25 अप्रैल से 15 जून तक अवकाश रखा जाए। सभी स्कूलों में इस निर्देश का कड़ाई से पालन किया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने ग्रीष्मकालीन अवकाश की तिथि घोषित कर दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि गर्मी को देखते हुए स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त एवं गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों में 25 अप्रैल से 15 जून 2025 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा की गई है। गौरतलब है कि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा 1 मई से 15 जून तक घोषित की गई थी, गर्मी की तीव्रता को देखते हुए अब इसे संशोधित कर दिया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए है और यह शिक्षकों पर लागू नहीं होगा, शिक्षकों की ड्यूटी यथावत जारी रहेगी।   recent visitors 52

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लगेंगी मस्ती की पाठशाला, मोहन सरकार का आनंद प्लान

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अब सरकारी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला लगाने जा रही है. दरसअल, सरकारी स्कूल की पढ़ाई बेहतर बनाने के साथ सराकार बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी के तहत मोहन सरकार शासकीय स्कूलों के लिए आनंद योजना लेकर आ रही है. इसके तहत अब स्कलों में कोर्स की पढ़ाई के साथ बच्चों को जीवन जीने की कला और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. सरकारी स्कूलों में लगेगा आनंद पीरियड इसके लिए सरकारी स्कूलों में अलग से आनंद का एक पीरियड लगाया जाएगा, जिसमें हायर सेकंडरी के बच्चों को जीवन जीने और तनाव मुक्त रहने की कला सिखाई जाएगी. दरअसल, स्कूली बच्चों में स्ट्रेस और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने आनंद विभाग के साथ अनुबंध किया है. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी आनंद क्लास की शुरुआत इसमें आनंद विभाग शिक्षकों को पहले ट्रेनिंग देगा, फिर वही शिक्षक बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे. ऐसे में इसे मस्ती की पाठशाला भी कहा जा रहा है, जो बच्चों के लिए काफी फायदेमंद भी होगी. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी शुरुआत बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले भी सीएम राइज और मॉडल स्कूलों में मस्ती की पाठशाला का प्रयोग कर चुका है. इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अन्य सरकारी स्कूलों में भी मस्ती की पाठशाला लगाने का फैसला लिया गया है. हालांकि, पहले चरण में 2 हजार स्कूलों में मस्ती की पाठशाला की शुरुआत होगी. इसके बाद प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के हायर सेकंडरी के बच्चों के लिए आनंद क्लास लगाई जाएगी. इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेजों में भी आनंद पीरियड सरकार की मंशा है कि जिस तरह सरकारी स्कूलों में आनंद की कक्षाएं शुरु की जा रही है. इसी तरह प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल, एनटीटीटीआर और अन्य कालेजों में भी स्ट्रेस मैनेजमेंट और आर्ट आफ लिविंग की शिक्षा दी जाए. इसके लिए राज्य आनंद संस्थान ने पूरी तैयारी कर ली है. इधर सरकारी स्कूलों में बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए 4 हजार सरकारी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा. बता दें कि अभी 24 से 29 मार्च तक सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए वर्चुअल क्लासेस भी लगाई गई थी, जिसमें 3500 से 4 हजार बच्चों ने भाग लिया था. पहली बार हायर सेकंडरी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य ने बताया, '' पहली बार सरकारी स्कूलों में आनंद की क्लास लगाई जाएगी. नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को स्कूली शिक्षा देने के साथ उनको मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना भी अनिवार्य है. इसी के तहत स्कूलों में आर्ट ऑफ लिविंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके साथ ही शिक्षकों को भी 6 दिनों का प्रशिक्षण आनंद संस्थान द्वारा किया जाएगा.''   recent visitors 45

अब 87 स्कूलों का भविष्य कलेक्टर के हाथ में, डीपीसी स्तर पर स्कूलों की मान्यता को रद्द

भोपाल आवश्यक दस्तावेजों की कमी, भवन, मैदान का अभाव, शिक्षकों की कमी और योग्यता की कमी, छात्रों की जानकारी ऑनलाइन अपडेट नहीं, फायर सेफ्टी जैसे मान्यता के मुख्य मापदंड पर जिले के कई निजी स्कूल खरे नहीं उतरे हैं। इसके चलते बीआरसी के बाद डीपीसी स्तर पर भी 87 स्कूलों की मान्यता को रद्द कर दिया गया है। अब ये स्कूल कलेक्टर को मान्यता के लिए आवेदन देंगे। 671 स्कूलों का आया था आवेदन धार जिले में 671 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन दिए थे जिसका बीआरसी ने 31 मार्च तक निरीक्षण किया था। जिन स्कूलों में कमियां मिली थी उनकी मान्यता रद्द करने को लेकर बीआरसी ने अनुशंसा की थी। इसके बाद डीपीसी स्तर पर मान्यता के मापदंडों को परखा गया, लेकिन उसमें स्कूलों में कमियां मिली। जिस पर डीपीसी स्तर पर भी स्कूलों की मान्यता रद्द हो गई है। आधार सेंटरों की कमी के चलते भी प्रगति नहीं जिले में एक क्लिक पर विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से 12 अंकों का अपार आइडी (Apaar ID) बनाया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी होगी, लेकिन अपार में आधार अपडेशन को लेकर दिक्कतें आ रही है। कई बच्चों के आधार अपडेट नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उनकी अपार आइडी नहीं बन रही हैं, क्योंकि शहर में सेंटरों में आधार सेंटरों की संख्या भी कम हैं। विभाग भी उदासीनता बरत रहा है, इससे लक्ष्य पूर्ति नहीं हो पा रही है। टाइम लाइन बेअसर कई बार टाइम लाइन दी गई, लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पहले दिसंबर 2025 तक सभी के अपार आइडी बनाए जाने थे, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ तो 31 मार्च की टाइम लाइन तय की गई। अब अप्रैल तक कार्य पूरा करने की प्लानिंग की गई है। हालांकि अब कम प्रगति को देखकर शिक्षक भी मदद कर आधार अपडेट आइडी में बनाने में मार्गदर्शन करेंगे। जिले में अब तक सिर्फ प्रतिशत विद्यार्थियों की ही आइडी बनी है। जिले में 3 लाख 27 हजार 421 आइडी बनना है, लेकिन अब तक 2 लाख 6 हजार 734 बनाई जा सकी है। आइडी बनाने का कार्य स्कूलों को दिया गया है, जो यू डाइस प्लस पोर्टल के जरिए बनाई जा रही है। हालांकि दो दिन से तकनीकी दिक्कतों से चलते पोर्टल में खुल नहीं रहा हैं। मुख्य रूप से ये दिक्कतें…     स्कूल और आधार में दर्ज नार्मो में अंतर आ रहा है     स्कूल में दर्ज जन्म तारीख और आधार में लिखी जन्म तिथि में अंतर     कई स्टूडेंट के आधार अपडेट नहीं हैं     शहर में आधार अपडेट करवाने के लिए सेंटरों की कमी इसलिए आ रही दिक्कतें अपार आइडी यू-डाइस प्लस पोर्टल के डाटा के आधार पर बन रहा है। पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी के डालने के बाद आईडी बनता है, लेकिन पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी में अड़चन आने से आइडी जनरेट नहीं हो रही है, जैसे स्टूडेंट का नाम, माता-पिता का नाम, सरनेम में बिंदी का अंतर आ रहा है, या फिर स्पेलिंग आधार और पोर्टल के डाटा में अलग अलग है। ऐसी स्थिति में अपार आइडी जनरेट नहीं होगी। ऐसी समस्याओं की वजह से अब तक 2 हजार आइडी रिजेक्ट हो चुकी है। हालांकि लोग आधार अपडेट करवाना चाहते हैं, लेकिन आधार सेंटरों पर वेटिंग चल रही है। ऐसे होती है स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया स्कूल द्वारा आवेदन पोर्टल पर लॉक करने के बाद जिले के बीआरसी स्कूलों का निरीक्षण कर मान्यता के मापदंडों को परखते हैं। स्कूलों की कमियां और मापदंडों को पूरा कर रिपोर्ट तैयार डीपीसी स्तर पर भेज देते हैं। डीपीसी स्तर पर वैरिफिकेशन कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। जिसमें कमियां मिलने पर मान्यता रद्द कर दी जाती है, जबकि मापदंड पूरा करने वाले स्कूलों को मान्यता मिल जाती है। मान्यता रद्द वाले स्कूलों के पास कलेक्टर के पास अपील करने की अंतिम अवसर होता है। आवेदनों में यह कमियां आई सामने     स्कूल भवन के कागजात अधूरे     अलग-अलग शौचालय नहीं होना     पीने के पानी की सुविधा का अभाव     प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना     आरटीई एक्ट के नियमों का पालन नहीं करना ये है मान्यता के मुख्य मापदंड     रजिस्टर्ड किरायानामा     प्राथमिक शाला के लिए 7 कक्षाएं और 7 शिक्षक अनिवार्य     खेल सामग्री और खेल मैदान होना चाहिए,     न्यूनतम 2400 से 4 हजार स्क्वेयर फीट साइज का खेल मैदान हो     छात्रों की संख्या पर खेल मैदान का साइज निर्धारित हो     सुरक्षा के लिहाज से स्कूल में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।     बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हो।     लाइब्रेरी की सुविधा होना चाहिए। recent visitors 45

सरकार के इस कदम से प्रदेश के 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने 25 हजार रुपए से कम वार्षिक फीस वाले निजी स्कूलों को बड़ी राहत दी है। अब इन स्कूलों को फीस संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से लगभग 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन निजी विद्यालयों की किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपए या उससे कम है, उन्हें विभाग के पोर्टल पर फीस संबंधी जानकारी अपलोड करना अनिवार्य नहीं होगा। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 16,000 स्कूलों को राहत मिलेगी।राज्य में कुल 34,652 निजी स्कूल हैं, जिनमें से लगभग 18,000 स्कूलों की वार्षिक फीस 25 हजार रुपए से अधिक है। इन विद्यालयों को अब 15 मई तक पोर्टल पर कक्षा और संवर्गवार फीस संरचना की जानकारी अपलोड करनी होगी। शुरुआत में यह अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाया गया है। यह नियम मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम-2020 के तहत लागू किया गया है, जो 31 जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ है। 10% तक फीस बढ़ाने की छूट, लेकिन शर्तों के साथ शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी विद्यालय सालाना 10% तक फीस वृद्धि बिना अनुमति कर सकता है। लेकिन इससे अधिक फीस वृद्धि के लिए संबंधित जिला समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन फीस संबंधी मामलों की निगरानी और शिकायतों के निवारण के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी विद्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार ही फीस निर्धारित करें और किसी भी प्रकार की मनमानी न हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।   recent visitors 40

भोपाल में घटना के 6 महीने बाद स्कूल पर एक्शन, मान्यता रद्द, 324 स्टूडेंट्स अन्य स्कूलों में ले सकेंगे प्रवेश

भोपाल भोपाल के रेडक्लिफ स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था. अब इस मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने स्कूल की मान्यता सत्र 2025-26 से रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इस फैसले के बाद स्कूल में पढ़ने वाले छात्र अब स्वयं के खर्चे पर शासकीय या किसी अन्य निजी स्कूल में दाखिला ले सकेंगे. यह कार्रवाई उस जघन्य घटना के बाद हुई है, जिसमें 19 सितंबर 2024 को स्कूल के आईटी टीचर ने साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था. आदेश में कहा गया है कि स्कूल सत्र 2025-26 से शाला का संचालन नहीं कर सकेगा। ऐसे में यहां पहले से पढ़ने वाले बच्चे सरकारी या अन्य प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकते हैं। आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों को अन्य सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जा सकेगा, जबकि अन्य छात्र-छात्राएं स्वयं के व्यय पर दूसरे स्कूल में प्रवेश ले सकते हैं। स्कूल की मान्यता सत्र 2025-26 से रद्द घटना के सामने आते ही पूरे शहर में गुस्से का माहौल बन गया था. हिंदू संगठनों ने इस घटना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल परिसर में तोड़फोड़ भी की थी. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की और स्कूल की लापरवाही को लेकर यह सख्त फैसला लिया गया. स्कूल में तीन साल की मासूम से हुआ था रेप कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह जरूरी कदम है. अभिभावकों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने बच्चों के लिए वैकल्पिक स्कूल का चयन कर लें ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. 324 बच्चों का भविष्य दूसरे स्कूलों में संवरेगा बता दें कि इस स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। पिछले साल सितंबर में स्कूल के टीचर ने ही 3 साल की बच्ची से रेप किया था। इस मामले में हंगामे के बाद स्कूल को सील कर दिया गया था। 6 सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर सिंह ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था कि स्कूल का संचालन डीईओ करें। जांच के लिए दो टीमें बनाई गई थीं। पहली जांच रिपोर्ट में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। वहीं, दूसरी 7 सदस्यीय कमेटी ने स्कूल के संचालन को लेकर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को दी थी। इसके बाद भोपाल में पहली बार किसी प्राइवेट स्कूल की कमान सरकारी हाथ में ली गई थी। संकुल प्राचार्य को संचालन की व्यवस्था सौंपी गई थी। इसके बाद स्कूल खोल दिया गया था, लेकिन अब संचालन नहीं होगा। स्कूल को कक्षा पहली से 8वीं की मान्यता नहीं दी गई है। 79 बच्चों का दाखिला आरटीई से स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 79 ऐसे हैं, जिनका आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के जरिए एडमिशन हुआ है। बीच सत्र में स्कूल बंद होने से सभी बच्चों को परेशानी हो सकती थी। उनका एक साल बिगड़ जाता। दूसरी ओर, जब बच्ची के साथ गलत हरकत हुई, तब स्कूल खुले पांच महीने हो चुके थे। यानी, आधा शिक्षा सत्र। ऐसे में बच्चों का कहीं एडमिशन भी नहीं हो सकता था। प्रशासन यदि स्कूल को बंद रखता तो बच्चों का एक साल खराब हो जाता। इसलिए स्कूल का संचालन सरकार ने खुद ही किया। recent visitors 38

छत्तीसगढ़ में आत्मानंद स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का मौका, आवेदन शुरू

रायपुर स्वामी आत्मानंद इंग्लिश और हिंदी मीडियम स्कूलों में एडमिशन की तैयारी एक बार फिर शुरू हो गई है। नया सेशन 2025-26 शुरू होने वाला है और इसी को लेकर 10 अप्रैल यानि आज से आवेदन भरने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। राज्य सरकार की इस योजना के तहत चलने वाले स्कूलों में हर साल हजारों पेरेंट्स अपने बच्चों का एडमिशन कराने की कोशिश करते हैं। इस बार भी मुकाबला तगड़ा होने वाला है। लोक शिक्षण संचालनालय की तरफ से ऑफिशियल शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। फॉर्म 10 अप्रैल से लेकर 5 मई तक भरे जाएंगे। अगर किसी स्कूल में सीटों से ज्यादा फॉर्म आएंगे, तो मई के दूसरे हफ्ते में लॉटरी होगी और फिर एडमिशन दिया जाएगा। इस बार कितने स्कूलों में एडमिशन होगा? इस बार कुल 751 स्कूलों में एडमिशन होगा इनमें से 403 इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं 348 हिंदी मीडियम स्कूल हैं दोनों ही तरह के स्कूलों के लिए आवेदन भरने की सुविधा है इंग्लिश और हिंदी मीडियम – क्या फर्क है? इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पहली क्लास में करीब 40-50 सीटें होती हैं इसके अलावा जिन क्लासेस में सीट खाली होंगी, उनके लिए भी एडमिशन लिया जाएगा हिंदी मीडियम स्कूलों में बैठक क्षमता के हिसाब से एडमिशन होते हैं, वहां सीटें फिक्स नहीं होतीं एडमिशन शेड्यूल इस तरह रहेगा प्रोसेस   फॉर्म भरना शुरू 10 अप्रैल आखिरी तारीख 5 मई लॉटरी (जहां जरूरत हो) 6 से 10 मई एडमिशन की प्रक्रिया 11 से 15 मई पहली क्लास में एडमिशन के लिए उम्र कितनी होनी चाहिए? बच्चे की उम्र 5.5 से 6.5 साल के बीच होनी चाहिए उम्र का आधार 31 मई 2025 होगा इससे कम या ज्यादा उम्र होने पर फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट पिछली क्लास की मार्कशीट (अगर ऊपर की क्लास के लिए फॉर्म भर रहे हो) बच्चे और पैरेंट्स का आधार कार्ड निवास प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र (अगर रिजर्व कैटेगरी में हो) 2 पासपोर्ट साइज फोटो BPL कार्ड (अगर लागू हो) कक्षा 6वीं और 9वीं में कैसे होगा एडमिशन? इन क्लासेस में एडमिशन का फैसला जिले की एडमिन कमेटी लेती है कलेक्टर की अध्यक्षता में यह तय होता है कि कितनी सीटों पर एडमिशन दिया जाए फॉर्म कैसे भर सकते हैं? ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ऑप्शन हैं लेकिन रायपुर जिले के लिए सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म मान्य होंगे बाकी जिलों में स्कूल से फॉर्म ले सकते हैं या DEO ऑफिस से जानकारी मिल सकती है अगर सीट से ज्यादा फॉर्म आ गए तो? उस स्कूल में लॉटरी सिस्टम लागू होगा यह लॉटरी पब्लिक के सामने या वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जाएगी रिजल्ट स्कूल में और वेबसाइट पर लगाया जाएगा   recent visitors 50