राजीव शुक्ला भगवान राम के पुत्र लव के मंदिर पहुंचे , इस कट्टर इस्लामिक देश में है मौजूद

इस्लामाबाद  बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला पाकिस्तान पहुंचे हैं। उनका यह दौरा पाकिस्तान में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान हुआ है। इस दौरान उन्होंने लाहौर में स्थित भगवान राम के पुत्र लव की समाधि पर भी पहुंचे। राजीव शुक्ला ने उनकी समाधि पर पूरा-अर्चना करते हुए तस्वीर भी पोस्ट की है। इसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश ने कसूर शहर को बसाया था, जो पाकिस्तान का एक बड़ा शहर है। राजीव शुक्ला ने क्या कहा राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, लाहौर के प्राचीन क़िले में प्रभु राम के पुत्र लव की प्राचीन समाधि है लाहौर नाम भी उन्ही के नाम से है। वहां प्रार्थना का अवसर मिला। साथ में पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी जो इस समाधि का जीर्णोद्धार करवा रहे हैं । मोहसिन ने मुख्यमंत्री रहते यह काम शुरू करवाया था।" 'कुश ने बसाया था कसूर शहर' उन्होंने आगे लिखा, "लाहौर के म्युनिसिपल रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र लव के नाम से बसाया गया था और कसूर शहर उनके दूसरे पुत्र कुश के नाम से। पाकिस्तान सरकार भी यह बात मानती है।" कौन हैं राजीव शुक्ला राजीव शुक्ला भारतीय राजनेता, पूर्व पत्रकार और इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष हैं। आईपीएल में कथित भ्रष्टाचार और स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद राजीव शुक्ला ने 1 जून 2013 को इसके अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया। 2015 में राजीव शुक्ला को फिर से सर्वसम्मति से बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। 18 दिसंबर 2020 को उन्हें निर्विरोध बीसीसीआई का उपाध्यक्ष चुना गया था। recent visitors 85

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के पात्र प्रस्तावों को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किया जाए

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के पात्र प्रस्तावों को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज श्योपुर और सिंगरौली को आगामी सत्र में प्रारम्भ करने के लिए निर्माण कार्य सहित समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों के अधोसंरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, संचालक (प्रोजेक्ट) प्रवीण सिंह अढ़ायच सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। पीएचसी एवं सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों की सुविधा के लिए आवासीय परिसर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूर्ण किये जाएँ। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पीएचसी एवं सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों की सुविधा के लिए आवासीय परिसरों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए चिकित्सकों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। इससे चिकित्सकों को बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त होगा। ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थान सशक्त होंगे, प्रदेश के हर कोने में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये यह कारगर कदम है।   recent visitors 45

राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड की बैठक उप मुख्यमंत्री शुक्ल की अध्यक्षता में संपन्न

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का महत्व केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक संकल्प भी है, जो लिंगानुपात को संतुलित करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लागू किया गया है। इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह अधिनियम उन सभी चिकित्सा प्रक्रियाओं और तकनीकों पर रोक लगाता है, जिनका दुरुपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या के लिए किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के तहत गठित राज्य सुपरवाईज़री बोर्ड की बैठक में अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम अंतर्गत अनिवार्य फॉर्म- एफ़ अपलोड की स्थिति और प्रावधान अंतर्गत की गयी कार्यवाहियों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि ऐसे क्षेत्र जहाँ लिंगानुपात विपरीत है वहाँ सघन कार्यवाही और नियमित मॉनिटरिंग की जाये। विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कानून की सफलता केवल इसके प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन, सख्त निगरानी और जनजागरूकता अभियानों पर भी आधारित है। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक अल्ट्रासाउंड सेंटर, प्रसव पूर्व निदान सुविधा और चिकित्सा संस्थान कानून के तहत निर्धारित मानकों का पालन करे। कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ लोगों को नैतिक रूप से जागरूक करना भी आवश्यक है ताकि समाज में यह संदेश स्पष्ट रूप से जाए कि हर बालिका का जीवन मूल्यवान है और उसे समान अवसर मिलना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में लिंग चयन गतिविधियों के प्रतिषेध हेतु "मुखबिर योजना" और पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम के दण्डात्मक प्रावधानों के प्रति जन-जागरूकता के निर्देश दिए। अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान की पुष्टि के लिए आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने बताया कि पूर्व बैठक में बोर्ड के निर्णय अनुसार वयोवृद्ध रेडियोलॉजिस्ट / सोनोलॉजिस्ट तथा ऐसे चिकित्सक जिनके द्वारा फिंगर प्रिंट की यूआईडीएआई से पुष्टि के अभाव में फॉर्म-एफ़ का अपलोड संभव नहीं हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक बायोमेट्रिक के तौर पर आईरिस स्कैन का विकल्प पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल पर किया गया है। पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल में ऑनलाइन प्रविष्टियों हेतु अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान पुष्टि के लिए 14 फरवरी 2025 को आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी की गई। सोनोलॉजिस्ट की संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कुल पंजीकृत संस्थाओं की संख्या 2884 है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नियमित निगरानी कर अब तक कुल 352 कार्यवाहियाँ की गईं, जिनमें पंजीयन निरस्तीकरण और निलंबन की कार्रवाइयाँ शामिल हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत 44 वैधानिक कार्यवाहियाँ की गईं हैं इनमें 5 मामलों में अपंजीकृत केंद्रों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जबकि 2 मामलों में अधिनियम अंतर्गत आवश्यक अभिलेखों (फॉर्म-एफ, एएनसी रजिस्टर, रेफरल स्लिप) का संधारण नहीं किए जाने के कारण वैधानिक कार्यवाही की गई। इसके अतिरिक्त, 2 मामलों में गर्भस्थ भ्रूण के लिंग की जानकारी से संबंधित संवाद करने के उल्लंघन पर कार्रवाई हुई, वहीं 107 मामलों में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक के माध्यम से लिंग चयन हेतु विज्ञापन देने पर कार्रवाई की गई।   recent visitors 53

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश परफॉर्मर स्टेट है। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से हम प्रदेश को स्वास्थ्य मानकों में शीर्ष पर लाने में सफल होंगे। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे प्रदेश के हेल्थ पैरामीटर्स को शीर्ष स्तर पर ले जाने के लिए सतत प्रयास करें। सरकार स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को बेहतरीन इकोसिस्टम और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल में मीडिया समूह द्वारा आयोजित "मेडिकल एक्सीलेंस अवार्ड-2025" कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने चिकित्सा सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉक्टरों, चिकित्सा शिक्षकों और चिकित्सकीय संस्थान संचालकों को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है और जल्द ही हम वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास का मुख्य लक्ष्य स्वास्थ्य और शिक्षा की उत्कृष्ट व सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें लगातार कार्य कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत चक्र मिला है, वहीं प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जा रही है जिससे पर्याप्त चिकित्सकीय मैन पावर उपलब्ध हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अच्छे कार्य करने वालों को सम्मानित करने से न केवल उनका हौसला बढ़ता है, बल्कि समाज में अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने चिकित्सा सेवा क्षेत्र मानवता की सेवा का सबसे बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि डॉक्टरों से इलाज में संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहज व्यवहार और आत्मीयता से किया गया इलाज मरीजों को आत्मविश्वास देता है और उपचार को प्रभावी बनाता है।   recent visitors 62

चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने पुनरीक्षित वेतनमान तथा एनपीए गणना प्रावधानों के लिये उप मुख्यमंत्री शुक्ल का व्यक्त किया आभार

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने और स्वास्थ्य मानकों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए कृत-संकल्पित है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश ने ऊर्जा, स्वच्छता, कृषि और सिंचाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि चिकित्सा शिक्षकों एवं चिकित्सकों के समर्पित प्रयासों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी यह लक्ष्य हम अवश्य प्राप्त करेंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने भेंट कर आभार व्यक्त किया। चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनकी सुविधाओं एवं हितों की रक्षा हेतु आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा कार्मिकों की सेवा संबंधी विषयों और अन्य समस्याओं के समाधान के लिये उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति नियमित रूप से बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण और चिकित्सकीय कार्मिकों के हित संरक्षण से संबंधित विषयों पर चर्चा करेगी और आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करेगी, जिन पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने चिकित्सकीय स्टॉफ को करें प्रेरित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा कुशल चिकित्सकीय मैन पॉवर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सभी चिकित्सा कार्मिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा प्रदाय के लिए प्रेरित करें। चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा महाविद्यालयों एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शासकीय एवं स्वशासी चिकित्सा शिक्षकों और दंत चिकित्सकों को पुनरीक्षित वेतनमान (सातवें वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान करने तथा एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस) की गणना सातवें वेतनमान के अनुरूप करने के आदेश के लिए उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आभार जताया। इस अवसर पर चिकित्सा महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. गजेंद्र नाथ कौशल, डॉ. रितेश तंवर, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेश कुमार खाचरिया, डॉ. शमिख रज़ा, डॉ. आदित्य सक्सेना, डॉ. राहुल रोकड़ें, डॉ. नीरज खरे, डॉ. राजेश टिक्कस, डॉ. अनुराधा चौधरी, डॉ. पुनीत कुमार आचार्य, डॉ. जी. पी. भनारिया, डॉ. विवेक चौकसे सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।   recent visitors 32

वेतन वृद्धि, मातृत्व और पितृत्व अवकाश, सेवा सुरक्षा के प्रावधान नवीन नीति में शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की नवीन संविदा कर्मचारी नीति-2025 का निर्धारण संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए किया गया है। नवीन नीति से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्थायित्व आएगा और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। इस नीति का लाभ 32 हज़ार संविदा कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से मिलेगा और उनके परिवारों सहित लगभग 1.5 लाख लोग इससे लाभान्वित होंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने में सहायक होगा। उन्होंने समस्त संविदा कर्मचारियों से अपील की है कि सभी समर्पित भाव से सेवा करें, जिससे प्रदेश के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें। एनएचएम की नवीन नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। अब कर्मचारियों को हर वर्ष अनुबंध के नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध वार्षिक सेवा आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली लागू की गई है। कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण के लिए एक अपीलीय अनुक्रम स्थापित किया गया है। संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का अधिकार केवल मिशन संचालक एनएचएम के पास होगा और यह केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा। नवीन नीति में वेतन वृद्धि को भी एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाया गया है। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर नियमित वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को नियुक्ति के समय प्रसव के छह सप्ताह बाद (सातवें सप्ताह से) कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे वे मातृत्व के शुरुआती दिनों में समुचित देखभाल प्राप्त कर सकेंगी। इसी तरह, मातृत्व अवकाश और पितृत्व अवकाश के प्रावधान भी संविदा कर्मचारियों के लिए लागू किए गए हैं। आकस्मिक परिस्थितियों में सहायता के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया के प्रावधान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारु व्यवस्था के लिए संविदा कर्मचारियों को अंतर-जिला स्थानांतरण की सुविधा प्रदान की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति को जिले में स्थानांतरण का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्पष्ट शिकायत निवारण अनुक्रम निर्धारित किया गया है। आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को सहायता प्रदान करने के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया सहायता राशि के प्रावधान किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार विशेष अवकाश की सुविधा भी संविदा कर्मचारियों को प्रदान की जाएगी। नवीन नीति में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ जांच चल रही हो, तो उसे 50% वेतन प्रदान किया जाएगा। स्थानांतरण प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। साथ ही, वेतन असमानता की समस्या को दूर करते हुए सभी संविदा कर्मचारियों के लिए वेतन समानता सुनिश्चित की गई है।   recent visitors 42

20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक अभियान का अवश्य लें लाभ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जन-प्रतिनिधियों, समाज सेवियों और आमजन से सहभागिता की अपील की : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की हो रही है निःशुल्क जांच भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक ‘निरोगी काया अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इस महाभियान के तहत प्रदेश में 12 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों, जन आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की मधुमेह (डायबिटीज), रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और फैटी लिवर जैसी प्रमुख असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की निःशुल्क जांच की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आमजनों, जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास के नागरिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित करें, अभियान की मॉनिटरिंग करें और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचाने में सहायता करें। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने नजदीकी जन आरोग्य मंदिर, संजीवनी क्लिनिक या स्वास्थ्य केंद्र पर पहुँचकर अपनी निःशुल्क जांच अवश्य करवाएँ। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएँ रविवार को छोड़कर सप्ताह में 6 दिन उपलब्ध हैं। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध है कि अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएँ और गंभीर बीमारियों से बचाव करें। समय पर जांच से रोगों के जटिल होने से पूर्व ही सहजता से होता है पूर्ण उपचार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को असंक्रामक बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के प्रति जागरूक करना है। अक्सर यह देखा गया है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी बीमारियाँ आरंभिक अवस्था में लक्षणहीन होती हैं, जिससे लोग इन्हें पहचान नहीं पाते और समय पर इलाज नहीं हो पाता। यह समस्या खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में जब बीमारी बढ़ जाती है, तो मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य जांच और उपचार सेवाएँ पहुंचें। अब तक 8 लाख नागरिकों की हो चुकी है निःशुल्क जांच उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निरोगी काया अभियान के तहत अब तक 6 लाख लोगों की मधुमेह और रक्तचाप की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि 2 लाख लोगों की फैटी लिवर की जांच हो चुकी है। यह आँकड़े इस अभियान की सफलता को दर्शाते हैं और इस बात को प्रमाणित करते हैं कि नागरिकों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।   recent visitors 61