दमोह में निजी चिकित्सक ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में उप मुख्यमंत्री शुक्ल दे रहे जागरूकता संदेश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल कहा है कि टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। नि:क्षय शिविर अभियान सामुदायिक भागीदारी से अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और समाजसेवकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और हर टीबी मरीज तक जरूरी सहायता पहुंचाने में सहयोग करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आस-पास के टीबी मरीजों की पहचान करने और उन्हें समय पर इलाज दिलाने में सहयोग करें। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार या वजन घटने जैसी शिकायत हो, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, इसके लिए समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है। सभी के समेकित प्रयास से टीबी मुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य हम शीघ्र प्राप्त करेंगे। उन्होंने अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों, संस्थाओं, नि:क्षय मित्रों की सराहना की है। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी (क्षय रोग) को समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इस अभियान में समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए, एनजीओ, समाजसेवी संगठनों, और आम जनता से सक्रिय सहयोग की अपील की जा रही है। 100 दिवसीय नि:क्षय शिविर अभियान में प्रदेश के 23 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, रोग की पहचान, रोकथाम और उपचार को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान में टीबी की घटनाओं में 80% कमी लाने, मृत्यु दर में 90% गिरावट और मरीजों के चिकित्सा व्यय को शून्य करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये नि:क्षय मित्रों, स्वयं सेवकों और सामाजिक संगठनों को शामिल कर सघन प्रयास किये जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के खिलाफ जागरूकता को जनआंदोलन का रूप देने के लिए विभिन्न रचनात्मक पहलें की हैं। सिवनी जिले में ‘न्यू पहल’ फाउंडेशन ने 400 मस्जिदों में उर्दू भाषा में जागरूकता सामग्री प्रदाय की है, जिससे समुदाय के हर वर्ग तक टीबी की जानकारी पहुंचे। मंदसौर में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर कमलेश भाटी ने एक शादी समारोह में टीबी जागरूकता का संदेश देकर समाज के बीच जागरूकता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी तरह, जबलपुर रेलवे स्टेशन पर लाखों यात्रियों को टीबी की जानकारी देने के लिए पोस्टर और फ्लेक्स लगाए गए हैं। विशेष शिविर लगाकर की जा रही हैं जाँच दमोह जिले में निजी चिकित्सकों ने अपने मरीजों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में टीबी जागरूकता के संदेश देने की पहल की है। सीधी जिले में स्थानीय "बघेली" भाषा में दीवार लेखन के माध्यम से सैकड़ों प्रेरक नारों को लिखा गया है, जो समुदाय के लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में मदद कर रहे हैं। दतिया में आईसीएमआर टीम ने जेल के कैदियों की हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक से स्क्रीनिंग की, जबकि मंडला जिले के कार्य स्थलों पर शिविर लगाकर 417 मजदूरों की जांच की गई। नीमच जिले में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने टीबी मरीजों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराकर उनके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की कोशिश की है।   recent visitors 51

उप मुख्यमंत्री से वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के हर व्यक्ति को समय पर, सुलभ और उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा मैनपावर की कमी एक प्रमुख चुनौती है, जिसे प्रभावी रणनीतियों से दूर किया जाना जरूरी है। इसके लिए मेडिकल के साथ नॉन-मेडिकल हस्तक्षेपों पर भी काम करना होगा। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रदेश में सभी स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो ताकि स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदेश के हर क्षेत्र और हर वर्ग तक पहुँच सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से आज मंत्रालय भोपाल में वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न विषयों और अंतःक्षेपों पर विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को मजबूत बनाने के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट्स के रूप में विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में वृद्धि के साथ मैनपॉवर व्यवस्था के लिये व्यापक भर्तियाँ की जा रही है। इन प्रयासों के सदुपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और स्वास्थ्य मानकों में सुधार शासन का लक्ष्य है। तात्कालिक और दीर्घकालिक लाभ के लिये दें सुझाव उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों में सुधार लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन मानकों में सुधार के लिए ऐसी रणनीतियां बनाई जानी चाहिए जो शॉर्ट टर्म में त्वरित प्रभाव दें साथ ही दीर्घकालिक समाधान भी प्रदान करें। उन्होंने वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि मंडल से प्रदेश की वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों का सटीक आकलन कर ऐसे सुझाव देने के लिये कहा जिनसे तात्कालिक और दीर्घकालिक लाभ चरणबद्ध रूप से प्राप्त हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वर्ल्ड बैंक का यह अध्ययन प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को समझने और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा। बैठक में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति, स्वास्थ्य सूचकांकों का अध्ययन, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के विस्तार और बीमारियों के भौगोलिक वितरण के विश्लेषण पर गहन मंथन हुआ। उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड बैंक प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र का अध्ययन कर मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए सुझाव प्रस्तुत करेगा ताकि हर नागरिक को यूनिवर्सल और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें। "गेटिंग हेल्थ रिफॉर्म राइट" फ्रेमवर्क के तहत वर्ल्ड बैंक मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुधार के लिए अध्ययन कर देगा सुझाव वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि अमित नागराज ने बताया कि "गेटिंग हेल्थ रिफॉर्म राइट" फ्रेमवर्क के तहत वर्ल्ड बैंक मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुधार के लिए एक समग्र और साक्ष्य-आधारित अध्ययन करेगा। यह अध्ययन प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की मौजूदा चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण करेगा और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम सुझाएगा। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य तंत्र को अधिक प्रभावी, सशक्त और समान बनाने के साथ-साथ प्रदेश के नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। वर्ल्ड बैंक प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए अपने कार्यों और सफल योजनाओं के आधार पर मध्यप्रदेश के लिए उपयुक्त और व्यावहारिक सिफारिशें देंगे। यह अध्ययन जनवरी 2025 से शुरू होगा और मार्च 2025 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट और कार्यान्वयन रोडमैप प्रस्तुत करेगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, ऐग्पा के एडिशनल सीईओ लोकेश शर्मा, वर्ल्ड बैंक की हेल्थ स्पेशलिस्ट सुजिज्ञासा शर्मा, क्रिस एंडरसन और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 30

उप मुख्यमंत्री से एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार का प्राथमिक लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उन्नत और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मैनपावर प्रबंधन, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था और संकेंद्रित प्रयासों के जरिये स्वास्थ्य मानकों में सुधार पर लगातार काम कर रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से मंत्रालय भोपाल में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और सर्वसुलभ बनाने के लिए निजी निवेश और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर गहन चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रदेश में निजी निवेश के विभिन्न मॉडलों पर विचार किया जा रहा है। शासन का उद्देश्य है कि चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता बढ़ाई जाए, अधोसंरचना को आधुनिक तकनीकी के साथ उन्नत किया जाए और उन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय सेवाएँ प्रदान की जाएँ जहाँ अभी इनकी कमी है। इसके लिए निजी निवेश के माध्यम से गैप फिलिंग का प्रयास किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एडीबी प्रतिनिधियों से ऐसे संभावित क्षेत्रों की पहचान और उनके समाधान के लिए प्रभावी सुझाव प्रस्तुत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार लाने के लिए एडीबी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने विभिन्न देशों और राज्यों में उनके अनुभव साझा किए और बताया कि उन्होंने अन्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुधार के लिए किस प्रकार के संयुक्त प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी इस प्रयास के लिए जल्द ही विस्तृत सुझाव प्रस्तुत करेंगे । प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, ऐग्पा के एडिशनल सीईओ लोकेश शर्मा, एडीबी के धवल झंब सहित अन्य प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 30

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा सामंजस्य और आपसी सहयोग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना संभव

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सामंजस्य और आपसी सहयोग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना संभव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अपोलो सेज हॉस्पिटल परिसर में "ओरल कैंसर डिटेक्शन और डेंटल ट्रीटमेंट वैन" सेवा का शुभारंभ किया। यह मोबाइल वैन अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस है, जो मुंह के कैंसर की शीघ्र पहचान और संपूर्ण दंत चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है। इस पहल को डेनेशिया ग्रुप और रोटरी क्लब के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, यह वैन विशेष रूप से उन नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित है जो आर्थिक अथवा भौगोलिक कारणों से चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इस वैन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और भोपाल के आस-पास के जिलों कर कैंसर एवं दंत रोगों की पहचान और उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने डेनेशिया ग्रुप और रोटरी क्लब के सहयोग की सराहना करते हुए इसे मानवता की सेवा का अनुकरणीय उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन में सामूहिक प्रयासों का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि इस वैन के संचालन से न केवल ओरल कैंसर की शीघ्र पहचान और उपचार होगा, बल्कि दंत चिकित्सा सेवाओं से भी हजारों नागरिक लाभान्वित होंगे। यह पहल समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह वैन लोगों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अपोलो सेज हॉस्पिटल की सुविधाओं का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि वैन में उन्नत तकनीक से लैस ओरल कैंसर डिटेक्शन सिस्टम है, जो कुछ ही मिनटों में कैंसर की पहचान कर सकता है। इसके अतिरिक्त, वैन में एक आधुनिक डेंटल चेयर और अन्य चिकित्सा उपकरण हैं, जो जटिल से जटिल दंत समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। वैन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बिजली न होने की स्थिति में भी पेट्रोल जनरेटर की सहायता से निर्बाध रूप से कार्य करती है। यह वैन न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि प्रदेश के हर कोने तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। सेज ग्रुप के चेयरमैन संजीव अग्रवाल, डेनेशिया ग्रुप के चेयरमैन पी के त्रिपाठी सहित रोटरी क्लब के प्रतिनिधि, चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।   recent visitors 33

नि-क्षय शिविर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्चुअली करेंगे अभियान का शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक "100 दिवसीय निक्षय शिविर" आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके। शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में "नि-क्षय सप्ताह" के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।   recent visitors 56

प्रक्रिया में तेजी लाने और पारदर्शिता के लिये टेक्नोलॉजी का करें प्रयोग: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल मध्यप्रदेश फार्मेसी, पैरामेडिकल और नर्सिंग काउंसिल की हुई समीक्षा मान्यता और परीक्षाओं के संचालन की कार्यवाही शीघ्रता से पूर्ण करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल प्रक्रिया में तेजी लाने और पारदर्शिता के लिये टेक्नोलॉजी का करें प्रयोग: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश फार्मेसी, पैरामेडिकल और नर्सिंग काउंसिल की समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण, परिषदों की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शिता और गति के साथ पूरी हों, जिससे छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिये टेक्नोलॉजी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए पारदर्शिता, गति और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में परिषदों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सुटेबल कॉलेजों में भर्ती प्रक्रिया के लिए 15 दिसंबर तक पूर्ण करें कार्रवाई नर्सिंग काउंसिल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 468 आवेदक संस्थानों में से 202 मापदण्डों अनुसार सुटेबल हैं जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 97 संस्थान डेफिशिएंट हैं। मानकों की कमी के कारण प्रक्रिया लंबित है। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लंबित संस्थानों की समीक्षा शीघ्र पूरी की जाए। मापदंडों अनुसार सुटेबल पाए गये कॉलेज में नर्सिंग छात्रों की भर्ती प्रक्रिया के  लिए आवश्यक कार्रवाई 15 दिसंबर तक पूर्ण करें। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अस्पतालों में बेड आवंटन और मान्यता प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के लिए अधिकारियों को तैयार रहने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में नर्सिंग कोर्स के विद्यार्थियों की परीक्षाओं के संचालन कैलेंडर की वृहद् समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के प्रति संवेदनशील है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश से छूट मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देशानुसार नर्सिंग के विभिन्न कोर्स के छात्रों की परीक्षाओं के संचालन का कैलेंडर तैयार किया गया है और परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। इससे नर्सिंग के विभिन्न कोर्सेज के 90 हज़ार विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। नर्सिंग के विभिन्न कोर्सेज के 47 हज़ार से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षाएँ हो चुकी हैं आयोजित उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल द्वारा विभिन्न नर्सिंग पाठ्यक्रमों की लंबित परीक्षाएँ आयोजित की गयी हैं। जिनमें 47 हज़ार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि शेष लंबित परीक्षाओं को शीघ्र आयोजित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे, ताकि छात्रों का शैक्षणिक कैलेंडर बाधित न हो। मई 2024 में बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (शैक्षणिक सत्र 2020-21) की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 15,787 छात्र सम्मिलित हुए। इसी अवधि में पी.बी.बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2020-21 सत्र) की परीक्षा भी आयोजित की गई थी, जिसमें 4,601 छात्र परीक्षा में सम्मिलित हुए। इसके अतिरिक्त, एम.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2020-21 सत्र) की परीक्षा में 1,612 छात्रों ने भाग लिया। इसी तरह बी.एससी. नर्सिंग तृतीय वर्ष (2019-20 सत्र) की परीक्षा भी मई 2024 में संपन्न हुई, जिसमें 8,793 छात्रों ने परीक्षा दी। सितंबर 2024 में बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2021-22 सत्र) की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 13,106 छात्रों ने भाग लिया। इसी सत्र की पी.बी.बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष की परीक्षा में 2,980 छात्र शामिल हुए। एम.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2021-22 सत्र) की परीक्षा भी सितंबर 2024 में आयोजित की गई, जिसमें 1,066 छात्रों ने परीक्षा दी। सत्यापन प्रक्रिया के समयबद्ध निराकरण में शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही करें सुनिश्चित फार्मेसी काउंसिल की समीक्षा में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 327 संस्थान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) से मान्यता प्राप्त हैं। प्रतिवर्ष लगभग 25,000 फार्मासिस्ट (डिप्लोमा और डिग्री) का पंजीकरण किया जाता है। काउंसिल के कार्यों में नए पंजीकरण, पंजीकरण का नवीनीकरण, डुप्लीकेट पंजीकरण जारी करना, अन्य राज्यों में कार्य के लिए एनओसी जारी करना और फार्मासिस्ट डेटा प्रबंधन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लंबित पंजीकरणों की स्थिति की समीक्षा की और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली को सशक्त बनाने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सत्यापन कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और व्यक्तिगत हस्तक्षेप को कम करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाए। साथ ही सत्यापन प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण हो इसके लिए शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये। पैरामेडिकल काउंसिल की समीक्षा में परीक्षा परिणाम और मान्यता संबंधित प्रक्रियाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी प्रकार की देरी छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, इसलिए इन प्रक्रियाओं को शीघ्र और प्रभावी रूप से पूरा किया जाए।   recent visitors 58

सफल क्लेविकल फ्रैक्चर सर्जरी सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के बढ़ते स्तर को दर्शाती है

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रतलाम मेडिकल कॉलेज द्वारा जागरूक क्लेविकल फ्रैक्चर सर्जरी का सफलतापूर्वक संपादन प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सर्जरी न केवल सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के बढ़ते स्तर को दर्शाती है, बल्कि यह साबित करती है कि हमारे डॉक्टर्स और चिकित्सा कर्मियों की विशेषज्ञता किसी से कम नहीं है। उन्होंने इस उपलब्धि के चिकित्सकीय टीम को बधाई दी है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में चिकित्सा अधोसंरचना के सतत विकास और उत्कृष्ट एवं अत्याधुनिक सेवाओं के प्रदाय का कार्य सतत् चल रहा है। उल्लेखनीय है कि डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम में पहली बार मेडिकल कॉलेज की ऑर्थोपेडिक और इंटरवेंशनल पेन फिजिशियन टीम ने जागरूक क्लेविकल फ्रैक्चर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सर्जरी विशेष है, क्योंकि मरीज सर्जरी के दौरान पूरी तरह जागरूक था और लगातार सर्जन और पेन फिजिशियन के साथ संवाद करता रहा। इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम में ऑर्थोपेडिक्स विभाग से डॉ. योगेश तिलकर (एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. उत्सव शर्मा (असिस्टेंट प्रोफेसर) शामिल थे। एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और पेन मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शैलेंद्र डावर के मार्गदर्शन में सर्जरी पूरी की गई। सर्जरी के दौरान इंटरस्केलिन ब्लॉक और सुपरफिशियल सर्वाइकल प्लेक्सस ब्लॉक का उपयोग किया गया, जिसे अल्ट्रासाउंड मशीन की सहायता से सटीकता के साथ लागू किया गया। डीन प्रो. डॉ. अनीता मूथा ने बताया कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम जल्द ही एडवांस पेन क्लीनिक की शुरुआत करेगा। इसमें क्रॉनिक कैंसर पेन, स्पॉन्डिलोसिस पेन, लो बैक पेन, फ्रोजन शोल्डर पेन, एल्बो और नी पेन, और हिप जॉइंट पेन जैसी जटिल समस्याओं का इलाज किया जाएगा।   recent visitors 76