राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं का परिणाम किया जारी, अनुप्रिया 99.60% लाकर किया टॉप

जयपुर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा का रिजल्ट जारी। रिजल्ट शाम 5 बजे जारी किया गया. परिणाम की घोषणा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट्स rajeduboard.rajasthan.gov.in और rajresults.nic.in पर की जाएगी। RBSE 12वीं का रिजल्ट रोल नंबर से चेक करना बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले छात्रों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा. इस वर्ष भी आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम्स का रिजल्ट एक साथ जारी किया जाएगा। इसके साथ ही वरिष्ठ उपाध्याय (Senior Upadhyay) परीक्षा का परिणाम भी घोषित होगा। रिजल्ट जारी करने के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि बोर्ड प्रशासक व संभागीय आयुक्त महेश चंद्र शर्मा रिजल्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे। इस साल कुल 8,93,616 छात्र परीक्षा के लिए पंजीकृत थे, जिनमें साइंस संकाय से 2,73,984, कॉमर्स से 28,250, आर्ट्स से 5,87,475 और वरिष्ठ उपाध्याय पाठ्यक्रम से 3,907 छात्र शामिल हैं।   परीक्षा में शामिल हुए कुल छात्र इस साल साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम को मिलाकर कुल 8,93,616 छात्रों ने राजस्थान 12वीं बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया था। इनमें से साइंस स्ट्रीम से 2,73,984 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। कॉमर्स स्ट्रीम से 28,250 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। आर्ट्स स्ट्रीम से सबसे ज़्यादा 5,87,475 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 6 मार्च से 7 अप्रैल, 2025 तक आयोजित की गई थीं। तीनों ही स्ट्रीम का रिजल्ट एक साथ जारी किया गया है।   किस स्ट्रीम में कितने फीसदी छात्र हुए पास? साइंस (विज्ञान) स्ट्रीम में पास प्रतिशत: 94.43% कॉमर्स (वाणिज्य) स्ट्रीम में पास प्रतिशत: 99.07% आर्ट्स (कला) स्ट्रीम में पास प्रतिशत: 97.70% 12वीं आर्ट्स टॉपर्स लिस्ट अनुप्रिया 99.60% प्रगति अग्रवाल 99.60% प्रियंका 99.60% उर्मिला 99.60%   recent visitors 67

नेशनल हेराल्ड केस में 2 जुलाई से रोजाना होगी सुनवाई, बुरे फंसे Sonia और Rahul

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय ने  दिल्ली की एक अदालत को बताया कि नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी तथा अन्य के खिलाफ पहली नजर में धन शोधन का ‘प्रथम मामला बनता है। ईडी ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष मामले का संज्ञान लेने के संबंध में प्रारंभिक दलीलें पेश कीं। इस बीच, न्यायाधीश ने ईडी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अपने आरोपपत्र की एक प्रति भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को उपलब्ध कराए, जिनकी निजी शिकायत के आधार पर ईडी ने वर्तमान मामला दर्ज किया था। इस मामले में बहस अभी चल रही है। हाल ही में आरोपपत्र दाखिल करने वाली ईडी ने 2021 में अपनी जांच शुरू की थी, जब एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 26 जून 2014 को स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत पर संज्ञान लिया था। नेशनल हेराल्ड धन शोधन मामले में संघीय एजेंसी का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि आरोपी तब तक "अपराध की आय का आनंद ले रहे थे" जब तक कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नवंबर 2023 में नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त नहीं कर ली। ईडी ने आगे दावा किया कि गांधी परिवार ने न केवल अपराध से प्राप्त धन को अर्जित करके धन शोधन किया, बल्कि उस पेसे को अपने पास भी रखा। ईडी ने बताया कि नेशनल हेराल्ड के संबंध में सोनिया गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और अन्य के खिलाफ प्रथम दृष्टया धन शोधन का मामला सामने आया है। इस बीच, न्यायाधीश ने संघीय एजेंसी को शिकायतकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी को एक प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया। ईडी ने 2021 में अपनी जांच शुरू करने के बाद हाल ही में अपना आरोपपत्र दाखिल किया। पिछली 3 सुनवाई में क्या-क्या हुआ…     8 मई: कोर्ट ने कहा था- आरोपी का पक्ष सुने बिना कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकते जस्टिस विशाल गोगने ने ED की दलीलें सुनने के बाद कहा कि पिछले आदेश के अनुसार सभी आरोपियों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। लेकिन उन्हें नोटिस 8 मई को ही भेजा गया, इसलिए उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकते। 21 और 22 मई को पहले उनका पक्ष सुना जाएगा।     2 मई: कोर्ट ने कहा था– सुने जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई में जान फूंकता है नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को नोटिस दिया। कोर्ट में मामले की दूसरी सुनवाई हुई थी। स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा, किसी भी स्तर पर बात सुने जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई में जान फूंकता है। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? नेशनल हेराल्ड मामले में पहली शिकायत 2012 में दर्ज की गई थी। हालांकि, ईडी ने 2014 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच शुरू की। यह तब हुआ जब एक ट्रायल कोर्ट ने 2012 में स्वामी की ओर से दायर एक निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर अनियमितताओं की आयकर जांच का संज्ञान लिया था। आरोपों के अनुसार 2010 में, नेशनल हेराल्ड प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) में 1,057 शेयरधारक थे। स्वामी की शिकायत के अनुसार, गांधी परिवार ने धोखाधड़ी, आपराधिक गबन और विश्वासघात के जरिए यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) का इस्तेमाल कर एजेएल का अधिग्रहण किया। 2008 में भारी कर्ज के बोझ तले दबी एजेएल ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन बंद कर दिया। दो साल बाद वाईआईएल बना। सोनिया और राहुल गांधी के पास इसके 38-38 फीसदी शेयर थे, जो संयुक्त रूप से 78 फीसदी था। चूंकि एजेएल पर कांग्रेस का 90.25 करोड़ रुपए बकाया था, इसलिए पार्टी ने 50 लाख रुपए में इस लोन को वाईआईएल को हस्तांतरित कर दिया। इस हस्तांतरण के साथ ही एजेएल का नियंत्रण वाईआईएल को हस्तांतरित हो गया, अब इस पर अब एजेएल का 99 प्रतिशत स्वामित्व है। ये सारे बदलाव राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) या किसी अन्य नियामक संस्था की निगरानी के बगैर किया गया। जिससे इस लेनदेन पर सवाल उठने लगे। recent visitors 62

क्या एक दूसरे से खेलेंगे भारत-पाकिस्तान?, आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और उसे सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी। दोनों देशों के बीच अब तनावभरी शांति है। इस तनाव का असर खेल पर भी पड़ा है। इस बीच इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) का जुलाई में सिंगापुर में वार्षिक सम्मेलन होना है। यह 17 जुलाई से 20 जुलाई तक चलेगा। इसमें आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसी अटकलें लग रही थीं कि भारत सितंबर में एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में नहीं खेलेगा जिसमें पाकिस्तान को भी हिस्सा लेना है। हालांकि, बीसीसीआई ने इन अटकलों को खारिज किया है। अगले महीने श्रीलंका में होने वाला महिला एशिया कप इस वजह से रद्द हो चुका है कि उसमें भारत हिस्सा नहीं लेगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के वार्षिक सम्मेलन के दौरान खेल की संचालन संस्था की प्रतियोगिताओं में भारत-पाक क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना है जो 17 से 20 जुलाई तक सिंगापुर में होगी। दोनों देश केवल उन्हीं प्रतियोगिताओं में ही एक-दूसरे के साथ खेलते हैं जिसमें कई टीमें खेलती हैं। लेकिन हाल में हुए सैन्य संघर्ष ने आईसीसी प्रतियोगिताओं में दोनों के बीच मुकाबले के भविष्य को लेकर अटकले लगाई जा रही हैं जिसकी शुरूआत अगले साल भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाले टी20 विश्व कप से होगी। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘यह मुद्दा वार्षिक सम्मेलन में चर्चा के लिए आना तय है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के आईसीसी नॉकआउट में नहीं खेलने की संभावना कम है, लेकिन उन्हें एक ही ग्रुप में नहीं रखना आईसीसी प्रतियोगिताओं में आम बात रही है और इसकी ही संभावना है।’   recent visitors 73

कांग्रेस के कद्दावर नेता आनंद शर्मा ने नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ, जानें क्या कहा

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से शशि थरूर लगातार मोदी सरकार के पक्ष में बात कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी द्वारा इशारों में समझाने के बाद भी थरूर ने अपनी बात को सार्वजनिक रूप से रखना जारी रखा। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भी मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की है। शर्मा ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की पोल खोलने और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत की राय रखने के लिए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजने के फैसले को महत्वपूर्ण पहल बताया है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसे एक भटकाने वाली योजना के रूप में रेखांकित किया था। कांग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए चार नामों में से केवल आनंद शर्मा को ही केंद्र सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है। आने वाले दिनों में शर्मा अपनी टीम के साथ मिस्र, कतर और इथियोपिया की यात्रा करेंगे।  बात करते हुए शर्मा ने कहा, "हमारा क्षेत्र दशकों से सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित है। ऐसे में इसे लेकर वैश्विक जनमत को संवेदनशील बनाना महत्वपूर्ण है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई द्वारा पोषित आतंकवादी संगठनों ने भारत का बहुत खून बहाया है। हमने इस आतंकवाद की एक बड़ी कीमत चुकाई है। लेकिन इसके बाद भी हमने अपनी प्रतिक्रियाओं में संयम बरता.. आतंकवाद को लेकर बहुत कम देश ऐसे होते हैं, जो संयमित हो सकते हैं .. लेकिन भारत ने ऐसा किया। पहलगाम के बाद हमने जवाबी कार्रवाई की लेकिन यह एक मापी हुई कार्रवाई थी, जिसे हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था।" आपको बता दें शशि थरूर के बाद अब आनंद शर्मा ने भी ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की कार्रवाई पर सरकार के प्रति नरम रुख अपनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर केंद्र पर हमलावर बनी हुई है। बुधवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सर्वदलीय सांसदों को विदेश भेजने के फैसले को केंद्र सरकार द्वारा सवालों से बचने और ध्यान भटकाने का तरीका बताया। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि 1950 के बाद हर अक्टूबर-नवंबर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का दौरा करता था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में इस परंपरा को खत्म कर दिया। अब जबकि वैश्विक स्तर पर वह हताश हैं और उनकी छवि को धक्का लग चुका है तब वह दोबारा से सर्वदलीय सांसदों को विदेशों में भेजने का फैसला ले रहे हैं। recent visitors 82

कप्तान हार्दिक पांड्या ने बताया क्यों जसप्रीत बुमराह, सैंटनर का टीम में होना आसान हो जाता है उनका काम

नई दिल्ली पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने बुधवार को वानखेड़े में दिल्ली कैपिटल्स को 59 रन से शिकस्त देकर इंडियन प्रीमियर लीग के प्लेऑफ में पहुंचने वाली चौथी और आखिरी टीम बन गई। जीत के बाद एमआई के कप्तान हार्दिक पांड्या ने अपने गेंदबाजों और बल्लेबाजों की तारीफ की। मुंबई इंडियंस ने ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ रहे सूर्यकुमार यादव (नाबाद 73 रन) के अर्धशतक के बाद मिचेल सैंटनर और जसप्रीत बुमराह के तीन-तीन विकेट की बदौलत जीत दर्ज की। पांड्या से मैच के बाद जब पूछा गया कि क्या बुमराह और सैंटनर का टीम में होना ‘लग्जरी’ है तो उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल। मैं जब चाहूं उन्हें गेंदबाजी के लिए लगा सकता हूं। वे इतने नियंत्रण और ‘परफेक्शन’ से अपना काम करते हैं जिससे मेरा काम आसान हो जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने शुरू में सोचा था कि 180 रन का स्कोर अच्छा होगा। लेकिन अब लग रहा है कि 160 रन तक पहुंचना बहुत अच्छा होता। लेकिन जिस तरह से नमन धीर और सूर्यकुमार ने पारी खत्म की, खासकर नमन ने जिस तरह से मुश्किल ट्रैक पर आकर हिट किया, वह शानदार था।’ दिल्ली कैपिटल्स के कार्यवाहक कप्तान फाफ डुप्लेसी ने कहा, ‘हम मैदान में बेहतरीन थे, खिलाड़ियों ने शानदार जज्बा दिखाया। गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी के लिए यह आसान पिच नहीं थी। हमने आखिरी दो ओवरों में मैच गंवा दिया और उन्हें लगभग 50 रन दे दिए।’   recent visitors 68

लुटेरी दुल्हन ने 7 महीने में की 25 शादियां, लूटकर हुई फरार,Police ने किया पर्दाफाश

भोपाल  लुटेरी दुल्हन अनुराधा पासवान अभी सवाई मधोपुर पुलिस की कस्टडी में है। वहां के विष्णु शर्मा से शादी के बाद अनुराधा पासवान भाग गई थी। इसके बाद पुलिस ने भोपाल से उसे गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद अनुराधा के बारे में कई राज खुले हैं। वह पहले से शादीशुदा थी। साथ ही उसके दो बच्चे भी हैं। पति से तलाक नहीं हुआ है। पति और बच्चों को छोड़कर वह भोपाल में रह रही थी। भोपाल में ही रहने के दौरान वह शादी कराने वाले गिरोह का हिस्सा बनी है। गिरोह के लोगों को जरिए ही अनुराधा लोगों से शादी के नाम पर ठगी करने लगी। सात महीने में 25 शादियां पुलिस ने उन 25 पीड़ित लोगों की पहचान कर ली है, जिनसे अनुराधा पासवान ने इन सात महीनों में शादी की थी। आशंका है कि पीड़ितों की संख्या बढ़ भी सकती है। यह गिरोह मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय है। अनुराधा के फोन में पुलिस को मैसेज मिले हैं कि वह एजेंट पर दबाव बनाती थी कि जल्दी से शादी कराओ, नहीं तो मैं दूसरी देख रही हूं। भोपाल में कुछ दिन एग डोनर का काम करते हुए गोलू नाम के युवक के संपर्क में लुटेरी दुल्हन आई। गोलू उस गिरोह का सदस्य था, जो फर्जी शादी कराता था। लुटेरी दुल्हन अनुराधा पासवान को हर शादी के एवज में 50 हजार दिये जाते थे। गिरोह के सदस्यों ने अनुराधा पासवान को निर्देश दिए थे कि, शादी के 7 दिनों में घर से फरार होना है। इकरारनामे के जरिए शादी कराई जाती थी। अनुराधा पासवान को अनाथ बताया जाता था। लोकल एजेंट के जरिए पूरा जाल बिछाया जाता था। गिरोह में गोलू, मजबूत सिंह यादव, रोशनी, रघुवीर और सुनीता का नाम सामने आए हैं। ठग दूल्हे के परिवार से 2 से 5 लाख रुपए लेते थे। इसके अलावा सात दिनों के भीतर जितना कीमती सामान दूल्हा के घर से बटोरा जा सकता, अनुराधा बटोरकर फरार हो जाती। फिलहाल, पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। 7 से 15 दिन का होता था टारगेट अनुराधा पासवान एक शादी के बाद ससुराल में 7 से 15 दिन तक रहती थी। इस दौरान वह पत्नी और बहू होने का पूरा धर्म निभाती थी। सवाई माधोपुर में विष्णु शर्मा के घर पर वह 12 दिनों तक रही थी। इसके बाद भाग गई थी। अनुराधा जब ससुराल से भागती थी तो वहां से कीमती सामान और जूलरी लेकर भागती थी। इसके बाद वह दूसरे शिकार की तलाश पर निकल जाती थी। एक शादी पर मिलते थे 50000 रुपए फर्जी शादी कराने वाले लोगों का पूरा गैंग है। उनके निशाने पर ऐसे लोग होते थे, जिनकी शादी नहीं हो रही होती है। लोकल एजेंट के जरिए ये लोग उन्हें फंसाते थे। इसके बाद पीड़ितों से शादी के बदले में दो से तीन लाख रुपए लेते थे। इसमें से 50000 रुपए पर शादी अनुराधा को मिलते थे। रुपए मिलने की वजह से अनुराधा को फर्जी शादी का चस्का लग गया था। अनाथ है यह.. वहीं, शादी से पहले एजेंट दूल्हा पक्ष के साथ इकरारनामा कराते थे कि दुल्हन अनाथ है। इसका पूरा ख्याल रखना है। अनुराधा ने बचपन से गरीबी देखी है। इसे माता-पिता का प्यार नहीं मिला है। इससे अच्छे से रखोगे तो यह लोगों का ख्याल रखेगी। भोपाल में भी कर ली थी शादी सवाई माधोपुर से भागकर अनुराधा पासवान ने भोपाल में भी शादी कर ली थी। पुलिस जब इसे गिरफ्तार करने पहुंची तो वह ससुराल में थी। राजस्थान पुलिस की टीम जब ससुरालवालों की इसकी हकीकत बताई तो लोग सन्न रह गए। वहीं, उनलोगों ने कहा था कि शादी के लिए दो लाख रुपए दिए हैं। आपलोग इसे ले जाने से पहले दो लाख रुपए दीजिए। पति से नहीं हुआ था तलाक अनुराधा पासवान मूल रूप से यूपी के महाराजगंज की रहने वाली है। वहां उसने विशाल नाम के युवक से शादी की थी। विशाल से अनुराधा के दो बच्चे भी हैं। एक बेटा और बेटी है। सभी को छोड़कर वह भोपाल में रहने लगी थी। पहले पति से उसका कानूनी रूप से तलाक भी नहीं हुआ है और अनुराधा ने 25 शादियां कर ली है। अनुराधा की तरह अन्य महिलाएं भी वहीं, गैंग में अनुराधा की तरह अन्य महिलाएं भी हैं, जो फर्जी शादी करने का काम करती थी। गिरफ्तार एजेंट के पास से 15-20 महिलाओं की तस्वीर मिले हैं। पुलिस उन सभी की जांच कर रही है। साथ ही गिरोह के अन्य लोगों की तलाश कर रही है। recent visitors 59

भिंड का मृत्यु सर्टिफिकेट जारी करने वाले तहसीलदार मोहन लाल शर्मा को हटाया, लोक सेवा केंद्र भी आया कटघरे में

 भिंड मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक तहसीलदार को लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिया गया, क्योंकि तहसीलदार कार्यालय की ओर से जारी किए गए मृत्यु प्रमाण-पत्रों के सभी कॉलम में 'भिंड' लिखा पाया गया.यह कार्रवाई तब की गई, जब सोशल मीडिया पर एक ऐसे प्रमाण-पत्र को पोस्ट किया गया, जिसमें आवेदक और मृतक के नाम व मृत्यु के स्थान के कॉलम में 'भिंड' लिखा हुआ था. यह पोस्ट 'भिंड का मृत्यु प्रमाण-पत्र' के रूप में ट्रेंड करने लगा.भिंड के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट एल के पांडे ने पुष्टि की कि तहसीलदार मोहन लाल शर्मा को लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिया गया है.भिंड के चतुर्वेदी नगर कॉलोनी निवासी गोविंद ने लोक सेवा केंद्र में अपने पिता रामहेत के मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया था. यह प्रमाण पत्र 5 मई को तहसीलदार कार्यालय की ओर से जारी किया गया था.मामले से परिचित लोगों ने बताया कि प्रमाण पत्र के सभी कॉलम में 'भिंड' लिखा हुआ था. जब इस संबंध में तहसीलदार से संपर्क किया गया तो उन्होंने इसे 'टाइपिंग की गलती' बताया और लोक सेवा केंद्र को दोषी ठहराया. नाम, पता और स्थान सभी जगह लिख दिया भिंड दरअसल, ये पूरा मामला शहर के चतुर्वेदी नगर का है. यहां रहने वाले गोविंद के पिता रामहेत का निधन वर्ष 2018 में हो गया था. अप्रैल 2025 में जब उनके परिवार को डेथ सर्टिफिकेट की आवश्यकता पड़ी, तो उन्होंने आवेदन किया. 5 मई 2025 को जब भिंड तहसीलदार कार्यालय से प्रमाण पत्र जारी हुआ, तो इसे देखकर आवेदक के साथ ही बाकी के दूसरे लोग चौंक गए, क्योंकि उस प्रमाण पत्र में मृतक का नाम “भिंड”, पता “भिंड” और स्थान “भिंड” दर्ज था. सोशल मीडिया पर लोग ले रहे हैं चुटकी अब यह गजब सर्टिफिकेट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो चुका है. लोग कह रहे हैं कि लगता है इस बार पूरा जिला ही चल बसा! जब तहसीलदार मोहन लाल शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने इसे “टाइपिंग मिस्टेक” करार दिया और दोष लोकसेवा केंद्र के सिर मढ़ दिया. लोकसेवा प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई तहसीलदार ने इस मामले में लोकसेवा प्रबंधन को दोषी मानते हुए केंद्र के संचालक को नोटिस जारी कर दिया है और 25 हजार रुपये की पेनल्टी का शोकॉज नोटिस भी थमा दिया है. उनका दावा है कि आगे से इस तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए सख्ती बरती जा रही है. नोटिस जारी करने से पहले तहसीलदार साहब यह भूल गए की मृत्यु प्रमाण-पत्र पर खुद के भी डिजिटल सिग्नेचर है. कठघरे में तहसीलदार सवाल यह है कि सिग्नेचर करने से पहले तहसीलदार साहब ने क्यों नहीं देखा. लापरवाही तो उनकी भी बनती है. हालांकि, अपर कलेक्टर एलके पांडेय ने तहसीलदार माखनलाल शर्मा की गलती मानते हुए तहसीलदार को तहसील कार्यालय से हटाकर भू-अभिलेख में अटैच कर दिया है. अब सवाल ये है कि जब एक जिले का नाम मृत्यु प्रमाण पत्र में मृतक के रूप में आ सकता है, तो आम आदमी अपने कागज़ात की शुद्धता की उम्मीद आखिर कैसे करे? जबकि, सरकारी दस्तावेजों में ज़रा सी चूक भी आमजन के लिए भारी परेशानी का सबब हो सकती है. ऐसे में उम्मीद है कि इस वायरल मौत से व्यवस्था कुछ सबक लेगी!     recent visitors 48