गुना जिले में एक सरपंच ने अपनी ग्राम पंचायत ही ठेके पर दे दी, इसके लिए 100 रुपये के स्टांप पर बाकायदा करार लिखा गया

गुना अभी तक आपने पंचायतों को निजी फर्मों को काम कराने का ठेका देते सुना होगा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना जिले में एक सरपंच ने अपनी ग्राम पंचायत ही ठेके पर दे दी। इसके लिए 100 रुपये के स्टांप पर बाकायदा करार लिखा गया। इसमें ठेका लेने वाले ने सरपंच का 20 लाख का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी ली, वहीं निर्माण कार्य की लागत का पांच प्रतिशत कमीशन सरपंच को देने की गारंटी दी। शिकायत पर जांच के बाद जिला पंचायत ने ठेका लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा दिया है। पंच और सरपंच ने मिलकर कर डाला सौदा     जनपद पंचायत गुना को शिकायत मिली थी कि करोद ग्राम पंचायत (Karod Gram Panchayat) की सरपंच ने पंचायत का संचालन ठेके पर दे दिया है। जनपद पंचायत ने जांच कराई तो सामने आया कि 28 नवंबर 2022 को सरपंच लक्ष्मी बाई ने पंच रणवीर सिंह कुशवाह के साथ एक करारनामे की नोटरी कराई है। 100 रुपये के स्टांप वाले शपथ पत्र पर इस करारनामे के अनुसार सरपंच ने पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी रणवीर सिंह कुशवाह को सौंप दिया था। गांव के किसी व्यक्ति ने अप्रैल में इसकी शिकायत जनपद पंचायत से की। जांच हुई, सरपंच के बयान हुए। जनपद पंचायत ने रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दी। नौ मई को जिला पंचायत सीईओ ने जनपद पंचायत को एफआईआर कराने के निर्देश दिए। जनपद पंचायत ने 13 मई को कैंट थाना प्रभारी को प्रकरण दर्ज करने पत्र लिखा। शुरुआती तथ्य लेने के बाद कैंट थाने में 17 मई को एफआईआर दर्ज कर ली गई। भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा में केस जनपद पंचायत गुना के समन्वयक सुनील खालको की शिकायत पर कैंट थाने में रणवीर सिंह कुशवाह के खिलाफ धारा 420, 419 और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा (8) के तहत मामला दर्ज किया गया है। – अनूप भार्गव, थाना प्रभारी कैंट recent visitors 40

इंदौर उज्जैन के सड़क मार्ग को सिक्सलेन में बदले जाने का काम शुरू, 2026 तक पूरी होगी परियोजना, नई तकनीक से हो रहा निर्माण कार्य

उज्जैन स्टेट हाइवे नंबर-59, उज्जैन-इंदौर फोरलेन सड़क परियोजना का काम तेजी से हो रहा है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी), चार महीने में 14 प्रतिशत काम ठेकेदार से करवा चुका है। फिलहाल, वर्षाकाल प्रारंभ (15 जून) होने से पहले शिप्रा नदी पर त्रिवेणी क्षेत्र में पुल बनाने को फाउंडेशन कार्य पूर्ण करना करना चुनौती बना हुआ है। अफसरों का कहना है पुल निर्माण स्थल पर महीनेभर शिप्रा का आंचल सूखा रहता है तो काम में कोई परेशानी नहीं आएगी। समाधान स्वरूप जल संसाधन विभाग को महीनेभर शिप्रा में पानी का बहाव रोकने के लिए पत्र लिखा है। मालूम हो कि 46.475 किलोमीटर लंबे उज्जैन-इंदौर फोरलेन सड़क मार्ग को मध्य प्रदेश की सरकार सिक्सलेन सड़क में परिवर्तित करवा रही है। परियोजना 1692 करोड़ रुपये की है। इसे शुरू करने को भूमि पूजन 19 सितंबर 2024 को उज्जैन आई राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने किया था। तब कहा गया था कि सिविल कार्य 623 करोड़ रुपये से होगा। 29 गांवों से होकर गुजरेगी सड़क सिक्स लेन सड़क 15 साल के आपरेशन-मैंटनेंस के साथ उज्जैन में स्थित हरिफाटक पुल से इंदौर में स्थित अरविंदो अस्पताल के सामने तक बनाई जाएगी। निर्माण हाईब्रिड वार्षिकी पद्धति से पेव्ड शोल्डर के साथ होगा। सड़क, 29 गांवों से होकर गुजरेगी, जिनमें 20 गांव इंदौर जिले और 9 गांव उज्जैन जिले के हैं। सिविल कार्य की कमान एमपीआइडीसी ने उदयपुर की रवि इन्फ्राबिल्ड कंपनी को सौंपी है। 8 किमी का डामरीकरण कर दिया गया है सर्वे और ड्राइंग-डिजाइन उपरांत धरातल पर निर्माण 15 जनवरी 2025 को शुरू हो पाया था। बीते चार महीनों में कई हिस्सों में मार्ग चौड़ा करने को खोदाई करने, मुरम बिछाने के साथ डामरीकरण का काम होता दिख रहा है। कहा गया है कि अब तक 14 प्रतिशत काम हो चुका है। 46.475 किलोमीटर सड़क में से 8 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण कर दिया गया है। पूरे मार्ग में 8 किलोमीटर का हिस्सा सीमेंट-कांक्रीट का बनेगा। 11 किलोमीटर लंबा विभिन्न आवासीय क्षेत्र में सर्विस रोड भी सीमेंट-कांक्रीट का बनेगा। निनोरा टोलनाका क्षेत्र के सीमेंट-कांक्रीट की सड़क बना दी गई है। वर्षाकाल में भी निर्माण कार्य जारी रहेगा, बंद नहीं होगा। निर्माण कार्य को गति देने के लिए नवीन तकनीक आधारित जर्मन मेड एफडीआर और मशीन विद मल्टीप्लेक्स मशीन का उपयोग पहली बार किया जा रहा है। दिसंबर- 2026 तक पूरी करना है परियोजना सिक्सलेन परियोजना, दिसंबर 2026 तक पूरी कराने का अनुबंध हुआ है। योजना अनुसार मुख्य सड़क डामर की और आबादी क्षेत्र में एप्रोच रोड सीमेंट-कांक्रीट की बनाई जाएगी। मार्ग में 8 फ्लायर ओवर और 70 कलवर्ट बाक्स बनाए जाएंगे। त्रिवेणी घाट के समीप शिप्रा नदी पर नया पुल भी बनाया जाएगा। पहले चरण में दोनों शहर की तरफ 14-14 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। प्रत्येक रोड का हिस्सा 12.50-12.50 मीटर चौड़ा होगा। इस तरह मार्ग कुल 25 मीटर चौड़ा होगा। अभी फोरलेन सड़क पर साढ़े आठ मीटर की दो चौड़ी सड़कें हैं। यानी मार्ग कुल 17 मीटर चौड़ा है। इस प्रोजेक्ट से सरकार को 112 करोड़ रुपये की सूखी बचत हुई है। वो इसलिए क्योंकि रवि इन्फ्राबिल्ड ने एसओआर से 15 प्रतिशत कम रेट पर काम करने का अनुबंध किया है। recent visitors 38

प्रदेश में सरकारी कॉलेजों में शोध केन्द्र बनाए जायेंगे, कॉलेज के प्राध्यापक निदेशक होंगे

भोपाल कॉलेजों में बदले पढ़ाई के पैटर्न में शोध पर फोकस किया गया है। सभी सकारी कॉलेजों में शोध केन्द्र बनाए जाने हैं। कॉलेज के प्राध्यापक निदेशक होंगे। चयन की जिमेदारी संबंधित विश्वविद्यालय की होगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी कर दिए हैं।  शोध निदेशक की पात्रता रखने वाले प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापकों से कहा कि वे आवेदन करें। प्रयास यही है कि विद्यार्थियों को ऑनर्स विद रिसर्च की सुविधा उनके कॉलेज या फिर समीप के कॉलेज में मिल सके। नई शिक्षा नीति के तहत शोध पर अधिक फोकस किया गया है। कॉलेजों में शोध केन्द्र की स्थापना इसी कड़ी का हिस्सा है। आनॅर्स विथ रिचर्स की सुविधा स्नातक चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों को चतुर्थ वर्ष ऑनर्स या आनॅर्स विथ रिचर्स की सुविधा मिले। विभाग ने निर्देश में कहा कि जिन प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों ने पीएचडी उपाधि प्राप्त की है और शिक्षण कार्य करते हुए पांच वर्ष हो चुके हैं तो वे भी शोध निदेशक के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। जो प्राध्यापक या सहायक प्राध्यापक शोध निदेशक की पात्रता रखते हैं और वे पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं उनके बारे में जानकारी भेजें। ढर्रा सुधारने की कवायद सरकार का फोकस सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई का ढर्रा सुधारने को लेकर है। इसी कड़ी में प्राध्यापकों को कॉलेजों में ही रुकने के लिए अवधि तय कर दी है। यानी उन्हें तय अवधि तक कॉलेजों में रुकना ही होगा। इसी से उनका वेतन निर्धारण होगा। recent visitors 42

प्रधानमंत्री मोदी 31 मई को भोपाल में आयोजित होने वाले महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम एवं महिला सम्मेलन में भाग लेंगे

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्यप्रदेश दौरे की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 मई को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा, सुरक्षा, यातायात, जनसंपर्क एवं अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध, समुचित और प्रभावी रूप से पूरी की जाएं ताकि कार्यक्रम निर्विघ्न और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को भोपाल में आयोजित होने वाले महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम एवं महिला सम्मेलन में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। देवी अहिल्याबाई होलकर का योगदान न केवल मालवा क्षेत्र बल्कि पूरे भारत में धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र में अद्वितीय रहा है। उनकी स्मृति में यह आयोजन महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश की धरती पर पधार रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जाए। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, परिवहन और अन्य सुविधाओं की प्रभावी योजना तैयार करने के लिए विभागीय समन्वय को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   recent visitors 37

श्रावण मास में रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में भक्तों को सम्राट अशोक सेतु के रास्ते मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा। मंदिर प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे दर्शन प्लान में इस विषय पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है। महाकाल मंदिर के रूद्रसागर पर उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा 200 मीटर लंबा व 9 मीटर चौड़ा अत्याधुनिक पुल का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पुल का उद्घाटन कर इसे सम्राट अशोक सेतु नाम दिया है। हालांकि वर्तमान दर्शन व्यवस्था पूर्व निर्धारित मार्गों से सुचारू रूप से संचालित होने के कारण फिलहाल इस पुल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। श्रावण मास में भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। चलित भस्म आरती व्यवस्था श्रावण मास में चलित भस्म आरती व्यवस्था में सम्राट अशोक सेतु मुख्य भूमिका निभा सकता है। क्योंकि श्रावण मास में सामान्य दिनों में रात 3 बजे तथा प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, पश्चात भस्म आरती होगी। रात्रि के समय श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते इस पुल से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। यह रास्ता वर्तमान मार्ग से करीब डेढ़ किलो मीटर छोटा भी है। इससे होकर दर्शनार्थी शीघ्र मंदिर में दर्शन कर बाहर निकल सकते हैं। अभी इस मार्ग से मिल रहा मंदिर में प्रवेश वर्तमान में सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक के नंदी द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु महालोक में भ्रमण करते हुए श्री मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर से टनल के रास्ते मंदिर परिसर में होते हुए गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं। साढ़े 22 करोड़ की लागत से बना नया पुल सम्राट अशोक सेतु के निर्माण पर स्मार्ट सिटी कंपनी ने करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पुल का मध्य भाग काफी चौड़ा है। यहां खड़े होकर श्रद्धालु रूद्रसागर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। पुल पर आकर्षक लाइट लगाई गई है। रात्रि के समय इस पुल से गुजरना एक अलग ही आनंददायक अनुभव रहेगा। डायवर्ट रूट के रूप में होगा उपयोग     सम्राट अशोक सेतु महाकाल मंदिर में प्रवेश का नया मार्ग है। यह वर्तमान मार्ग से छोटा रास्ता है, भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायर्वट में इसका उपयोग होगा। श्रावण के दर्शन प्लान में इस पर विचार चल रहा है। – एसएन सोनी, उप प्रशासक महाकाल मंदिर   recent visitors 49

हर मोहल्ले में विकास समिति बनाई जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की जरूरतों को चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करेगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार अब शहरी विकास को जनभागीदारी के माध्यम से गति देने की तैयारी कर रही है। 'जलगंगा अभियान' की तर्ज पर नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय संस्थाओं को एकजुट कर स्वच्छता, पर्यावरण, पौधरोपण और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का विस्तार नहीं, बल्कि लोगों में विकास कार्यों के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है। जनशक्ति से जीवित हुए जलस्रोत भिंड जिले के लहरौली गांव में काली पोखर का पुनर्जीवन एक मिसाल बन चुका है, जिसे ग्रामीणों और पोरवाल परिवार के सहयोग से जलगंगा अभियान के अंतर्गत फिर से पीने योग्य बनाया गया। इसी तरह इंदौर नगर निगम ने नागरिक सहभागिता से 411 कुओं, बावड़ियों और 15 तालाबों का पुनरुद्धार किया है। अब सरकार इसी मॉडल को शहरी क्षेत्रों में लागू करने की योजना बना रही है। विकास कार्यों में साझा निवेश सरकार की योजना के अनुसार, विकास कार्यों में न सिर्फ स्थानीय लोग श्रमदान करेंगे, बल्कि आर्थिक सहयोग भी करेंगे। यह त्रिस्तरीय सहभागिता सांसद, विधायक और पार्षद निधि से भी समर्थित होगी। साथ ही स्थानीय कारोबारी और औद्योगिक इकाइयों को भी इस मुहिम में जोड़ा जाएगा। मोहल्ला समितियों को मिलेगा अधिकार हर मोहल्ले में विकास समिति बनाई जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की जरूरतों को चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करेगी। यह प्रस्ताव इंजीनियरों और पार्षदों की मदद से निगम अथवा जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया से विकास की योजना अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनेगी।   विकास निधियों की राशि सांसद निधि: 5 करोड़ रुपये विधायक निधि: 3.25 करोड़ रुपये महापौर निधि: 5 करोड़ रुपये नगर निगम अध्यक्ष निधि: 2 करोड़ रुपये पार्षद निधि: 25 लाख रुपये   recent visitors 30

एक वर्ष में स्टार्ट-अप में 30 और महिला स्टार्ट-अप में 34 प्रतिशत की वृद्धि – नई स्टार्टअप नीति हुई लागू

भोपाल मध्यप्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप सेंटर ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। स्टार्ट-अप्स की संख्या, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों में वृद्धि और राज्य में नवाचार को प्रोत्साहन देने वाली विभिन्न पहलों के चलते पिछला वर्ष अत्यंत सफल रहा है। स्टार्ट-अप्स में हुआ इज़ाफ़ा पिछले एक वर्ष में राज्य में मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स की संख्या 4012 से बढ़कर 5230 हो गई, जिसमें 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। महिलाओं द्वारा संचालित स्टार्ट-अप्स में 34 फीसदी की वृद्धि हुई है। इनकी संख्या 1864 से बढ़कर 2490 तक पहुँच गई हैं। इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि महिला उद्यमिता को विशेष बल दिया जा रहा है। आज प्रदेश में स्टार्ट-अप्स की संख्या 5300 से अधिक हो चुकी है। निवेश को मिली नई दिशा गत एक वर्ष में राज्य सरकार ने स्टार्ट-अप्स के लिए फंडिंग सुनिश्चित करने हेतु SEBI-अनुमोदित वैकल्पिक निवेश निधियों (AIFs) से साझेदारी की। 5 AIFs का चयन हुआ, जिनमें से 3 Silver Needle, Equanimity Ventures और Unicorn India Ventures Fund ने कुल ₹10.90 करोड़ का निवेश किया। सरकार ने ₹3.03 करोड़ का अंशदान किया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुआ नीति का शुभारंभ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई "मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं क्रियान्वयन योजना 2025" का शुभारंभ किया गया। इस दौरान 2500 से अधिक स्टार्ट-अप्स ने भाग लिया और “फ्यूचर फ्रंटियर्स: स्टार्ट-अप पिचिंग सेशन” में 20 स्टार्ट-अप्स को निवेशकों के समक्ष पिच करने का मौका मिला, जिसमें से 19 को निवेशकों द्वारा रुचि पत्र प्राप्त हुए। महिलाओं और कृषि स्टार्ट-अप्स को मिला मंच महिला उद्यमियों को योजनाओं से जोड़ने के लिये 13 अगस्त 2024 को “प्रदेश महिला उद्यमी सम्मेलन” का हुआ। जिसमें 40 से अधिक महिला स्टार्ट-अप्स ने भाग लिया। कृषि क्षेत्र के लिए GAP फंड के माध्यम से फंडिंग की सुविधा दी गई और कृषि आधारित स्टार्ट-अप्स को विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी का अवसर मिला। राज्यभर में हुआ स्टार्ट-अप जागरूकता का प्रसार मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप सेंटर ने पूरे वर्ष में 50 से अधिक कार्यक्रमों में भाग लिया तथा आयोजन किया, जिनमें 20 से अधिक शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक संगठनों, सरकारी विभागों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों तक की सहभागिता शामिल रही। साथ ही, प्रदेश में आयोजित रीजनल इंडस्ट्रीज़ कोंक्लेव तथा RAMP योजना जैसी पहलों के माध्यम से स्टार्ट-अप्स को जागरूक किया गया। नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने हेतु आयोजित “स्टार्ट-अप क्लीनिक”, “स्टार्ट-अप मार्गदर्शन सत्र” और “इनक्यूबेटर आउटरीच वर्कशॉप” जैसे आयोजनों से प्रदेश में स्टार्ट-अप संस्कृति को मजबूत आधार मिला है। मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप सेंटर ने राज्य में नवाचार और उद्यमिता का वातावरण तैयार किया है साथ ही निवेश, जागरूकता और सहभागिता के नए आयाम भी स्थापित किए हैं।   recent visitors 32