बारातियों की स्वागत की तैयारी चल रही थी, इस बीच वधू की तबीयत बिगड़ी, दवा खाने के कुछ ही देर वधू की मौत

कन्नौज यूपी के कन्नौज से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां शनिवार देर शाम एक युवती की शादी थी। बारातियों की स्वागत की तैयारी चल रही थी। इस बीच वधू की तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में परिजन उसे गांव के ही छोलाछाप डॉक्टर के यहां ले गए। दवा खाने के कुछ ही देर वधू की मौत हो गई। इससे शादी के घर पर मातम पसर गया। परिजनों नें चीख पुकार मच गई। परिजनों ने डॉक्टर पर गलत दवा देने का आरोप लगाया है। ये घटना गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के किसवापुर गांव का है। यहां के रहने वाले महेश बाथम की बेटी रिंकी की शादी उमर्दा के सुखी गांव के नरेश के बेटे राहुल से तय हुई थी। शनिवार को राहुल बारात लेकर किसवापुर पहुंचने ही वाले थे। इससे पहले रिंकी की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे जसोदा के डॉक्टर के यहां लेकर पहुंचे जहां डॉक्टर ने उसका इलाज करना शुरू किया। कुछ देर चले इलाज के दौरान रिंकी की मौत हो गई। मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने डॉक्टर पर गलत इलाज का आरोप लगाया है। परिजनों की माने तो डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगा दिया जिससे रिंकी की मौत हो गई। रिंकी के घर बारात के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। उधर, बारात कुछ ही देर में पहुंचने वाली थी। घर पर रिश्तेदारों और परिवार के साथ ही गांव के लोगों की भीड़ जमा थी। इसी बीच अचानक रिंकी की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। शादी की खुशियां मातम में बदल गई। जिस घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे। वहां करुण क्रंदन और चीख पुकार मच गई । वहीं, ये मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। recent visitors 40

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ ही विजय शाह का राजनीतिक भविष्य तय होगा कि वह मंत्री रहेंगे या नहीं

भोपाल मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित टिप्पणी के मामले में भाजपा संगठन कोई जल्दबाजी करने की जगह फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। पार्टी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ ही विजय शाह का राजनीतिक भविष्य तय होगा कि वह मंत्री रहेंगे या नहीं। दरअसल, भाजपा भी कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है। उल्लेखनीय है कि भाजपा, विजय शाह को उनके बयान को लेकर नसीहत दे चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पूरे मामले में प्रदेश संगठन से रिपोर्ट मांगी थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद शाह चुपचाप हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नहीं जा रहे हैं। मामले में कांग्रेस हमलावर हो गई है। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती चली जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से अधिवक्ता जया ठाकुर ने कैविएट दायर कर बिना उनका पक्ष सुने निर्णय नहीं देने का अनुरोध किया है। बता दें कि मंत्री विजय शाह के विरुद्ध हाई कोर्ट के आदेश पर जिन धाराओं में प्रकरण दर्ज हुआ है, उनमें उम्रकैद तक का प्रविधान है। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री शाह की ओर से हाई कोर्ट के आदेश पर दर्ज एफआइआर रद करने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई को सुनवाई नहीं करते हुए सोमवार को यह मामला सुने जाने की व्यवस्था दी थी।   सुप्रीम कोर्ट में अर्जी फाइल की वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के अभाव में सुनवाई टल गई थी। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम, जबलपुर के सचिव अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता व अध्यक्ष ओपी यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जी फाइल कर दी गई है। दोनों की ओर से पहले पक्ष सुने जाने पर बल दिया गया है। इसके साथ ही इस बात पर बल दिया गया है कि इतने गंभीर प्रकरण में मंत्री शाह को सुप्रीम कोर्ट किसी तरह की राहत प्रदान न करे। अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता व ओपी यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विवेक कृष्ण तन्खा, केटीएस तुलसी व इंदिरा साहनी के साथ समीर सोढ़ी, वरुण तन्खा, इंद्रदेव मंत्री विजय शाह की विशेष अनुमति याचिका का सोमवार को विरोध करेंगे। recent visitors 32

भोपाल के एक होटल में उपभोक्ता से पानी की बोतल पर एक रुपये जीएसटी वसूला गया, जिस पर उपभोक्ता ने जताया विरोध

भोपाल मध्य प्रदेश राजधानी भोपाल के एक होटल में उपभोक्ता से पानी की बोतल पर एक रुपये जीएसटी वसूला गया। जिस पर उपभोक्ता ने विरोध भी जताया, लेकिन होटल संचालक नहीं माने। इससे परेशान होकर ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया। आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य प्रतिभा पांडेय ने निर्णय सुनाया कि एमआरपी में जीएसटी शामिल होता है, ऐसे में अलग से जीएसटी वसूलना गलत है। मामले में आयोग ने निर्णय सुनाया कि होटल प्रबंधन दो महीने के अंदर वसूली गई जीएसटी की राशि एक रुपये ग्राहक को वापस करे। दोस्त के साथ गए थे होटल साथ ही आठ हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में देना होगा। दरअसल, राजधानी के ऐश्वर्य निगम मिसरोद रोड स्थित मोती महल डीलक्स होटल में अपने दोस्त के साथ खाना खाने गए थे, जहां खाने का बिल 796 रुपये दिया गया। इसमें पानी की एक बॉटल 29 रुपये की दी गई, जबकि बॉटल पर एमआरपी 20 रुपये छपी थी। इसके साथ ही होटल प्रबंधन ने पानी की बॉटल पर एक रुपये की जीएसटी भी वसूली। होटल प्रबंधन के तर्क को किया खारिज उपभोक्ता ने शिकायत की थी कि जब पानी की बॉटल बाजार भाव से अधिक दाम पर होटल प्रबंधन से की तो विवाद बढ़ गया। होटल प्रबंधन ने तर्क रखा कि उपभोक्ता को जो मेन्यू कार्ड दिया गया था, उसमें कीमत और जीएसटी दोनों का जिक्र था। साथ ही होटल में बैठने, एयर कंडीशनर और म्यूजिक समेत अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। ऐसे में पानी पर जीएसटी लगाना कानूनी अधिकार है, हालांकि आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। recent visitors 25

मुरैना में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर दो पक्षों में फायरिंग, गोली लगने से एक की मौत

मुरैना मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के तोर गांव में सरकारी जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच दो दिन से फायरिंग होने की घटना सामने आई है। फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई। निरार थाना पुलिस के पास पहली बार दोनों पक्षों के बीच हुई फायरिंग की शिकायत पहुंची थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। शुक्रवार-शनिवार की रात एक पक्ष ने जमीन पर बनी झोंपड़ी में आग लगाई और फिर ताबड़तोड़ फायर किए। मामला थाने तक आया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद रात में दोनों पक्ष फिर आमने-सामने आ गए। गोली लगने से जिसकी मौत हुई है वह देवगढ़ क्षेत्र का रहने वाला है और तोर गांव में अपने रिश्तेदार के घर आया था। इस खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है। हम अपने सभी पाठकों को पल-पल की खबरों से अपडेट करते हैं। हम लेटेस्ट और ब्रेकिंग न्यूज को तुरंत ही आप तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रारंभिक रूप से प्राप्त जानकारी के माध्यम से हम इस समाचार को निरंतर अपडेट कर रहे हैं। ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए नईदुनिया के साथ। recent visitors 38

कर्नल सोफिया पर विवादित टिप्पणी के मामले में अशोका यूनवर्सिटी के प्रोफेसर गिरफ्तार

नई दिल्ली कर्नल सोफिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में अशोका यूनवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्य कर रहे अली खान महमूदाबाद ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद महिला अधिकारियों को प्रेस ब्रीफिंग के लिए भेजने को दिखावा और ढोंग बताया था। इसके बाद हरियाणा राज्य के महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजकर तलब किया था। कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को आगे करने को लेकर महमूदाबाद ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट की थीं। माना जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर का संबंध महिलाओं से है क्योंकि पहलगाम में आतंकियों ने उन लोगों की भी हत्या कर दी जिनकी हाल ही में शादी हुई थी। कई नवविवाहित महिलाओं की मांग उड़ गई। इसीलिए भारतीय सेना की आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में जानकारी देने के लिए महिला अधिकारियों को आगे किया गया। वहीं अली खान महमूदाबाद महिला अधिकारियों को आगे करने के फैसले को ही गलत बताने लगे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सरकार ऐसा करके केवल दिखावा और ढोंग कर रही है। सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी पोस्ट पर आपत्ति जताई। पहलगाम हमले के बाद जब एक शख्स के 'अल्लाहू अकबर' चिल्लाने और गोलियां चलने को लेकर गिरफ्तारी हुई थी तब भी उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्ति जाहिर की थी। उनका कहना था कि अगर किसी के इस तरह अल्लाहू अकबर चिल्लाने से कुछ साबित करने की कोशिश हो रही है तो आप कश्मीर को समझ ही नहीं पाए हैं। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर उन्होंने काफी बहस भी की। कौन हैं अली खान महमूदाबाद अली खान महमूदाबाद अशोका यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक होने के साथ ही राजनीतिक टिप्पणीकार और स्तंभकार हैं। उन्होंने कैंब्रिज से पीएचडी की है। वह राजनीति शास्त्र और इतिहास से डिग्री हासि कर चुके हैं। इसके अलावा दमिश्क यूनिवर्सिटी से उन्होंने अरबी भाषा की पढ़ाई की है। वह सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहते हैं। फेसबुक पर की गई टिप्पणी को लेकर वह मुसीबत में घिरे हैं। recent visitors 47

आज भारत न केवल एक जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र बनकर उभरा है, बल्कि सैन्य शक्ति, से दुनिया को अपना लोहा भी मनवाया

नई दिल्ली 51 साल पहले आज ही के दिन भारत ने 'स्माइलिंग बुद्धा' मिशन को अंजाम दिया था और दुनिया को अपनी ताकत का परिचय दिया। 18 मई 1974 में पोखरण-I के उस धमाके ने न सिर्फ भारत को दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बनाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि विज्ञान और सुरक्षा के मामले में भारत किसी से पीछे नहीं रहने वाला। आज भारत न केवल एक जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र बनकर उभरा है, बल्कि उसने सैन्य शक्ति, तकनीकी कौशल और रणनीतिक दूरदर्शिता से दुनिया को अपना लोहा भी मनवाया है। ‘स्माइलिंग बुद्धा’ पोखरण परीक्षण के लिए एक कोड नेम था। यह मिशन भारत के इतिहास का वह मोड़ था जब देश ने दुनिया को दिखा दिया कि हम न केवल सभ्यता और शांति के प्रतीक हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य और तकनीकी ताकत भी रखते हैं। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के बाद भारत छठा ऐसा देश बना जिसके पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता थी। प्रतिबंधों के बावजूद परमाणु शक्ति के विकास की दास्तान पोखरण-1 के बाद भारत पर अमेरिका समेत कई देशों ने प्रतिबंध लगाए, लेकिन DRDO, BARC और ISRO जैसे संस्थानों ने मिलकर देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया। 11 और 13 मई 1998 को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पांच और परमाणु परीक्षण किए, जिनके साथ भारत ने खुद को एक "परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र" घोषित कर दिया। इसके साथ ही भारत ने दो प्रमुख सिद्धांत अपनाए। पहला- भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। दूसरा- भारत केवल न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय शक्ति रखेगा। अब कहां खड़ा है भारत? स्वीडिश संस्थान SIPRI के अनुसार भारत के पास 2024 तक लगभग 160–170 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इतना ही नहीं भारत अब थल, जल और नभ – तीनों माध्यमों से परमाणु हमले करने की पूर्ण क्षमता रखता है। थल में अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5 तक लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। जल में INS Arihant जैसी परमाणु-सक्षम सबमरीन और नभ में Mirage-2000 और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमान हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भारत की परमाणु नीति अब भी ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसके पुनर्मूल्यांकन की आवाजें उठी हैं। भारत की रणनीतिक ताकत ने उसे चीन और पाकिस्तान के विरुद्ध संतुलन देने वाली शक्ति बना दिया है। 51 वर्षों के पांच निर्णायक मोड़ 1974 में पोखरण-1 ने भारत की परमाणु शक्ति में पहली एंट्री दी। 1998 में पोखरण-2 टेस्टिंग से आधिकारिक रूप से परमाणु राष्ट्र की मान्यता मिली। 2003 में न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन की नीति तय की गई। 2016 में परमाणु-सक्षम सबमरीन INS Arihant भारतीय सेना में शामिल हुआ। 2020 के बाद MIRV टेक्नोलॉजी और अग्नि-5 जैसी अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक सेना के बेड़े में शामिल हुए। recent visitors 52

ऑपरेशन सिंदूर का नया वीडियो जारी, सेना का जवाब देते हुए बताया सबक ऐसा सिखाया गया है जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने जिस तरह से पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया, उससे पाकिस्तान के भी हौसले पस्त हो गए। वहीं जब पाकिस्तान ने बौखलाकर भारत पर हमला शुरू किया तो भारतीय सेना ने ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया कि वह सीजफायर के लिए मिन्नतें करता नजर आया। भारतीय सेना ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर का एक और वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में सेना का जवाब आतंकियों को चुनौती देते हुए कहता है कि सबक ऐसा सिखाया गया है जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड के इस वीडियो में कहा गया, यह बदले की भावना नहीं न्याय था। सबक ऐसा सिखाएंगे कि इनकी पीढ़ियां याद रखेंगी। रात के करीब 9 बजे दुश्मन ने जिस पोस्ट से हमला किया सेना ने उसे मिट्टी में मिला दिया। सिंदूर पाकिस्तान के लिए वह सबक था जो उसने दशकों से नहीं सीखा। वीडियो में देखा जा सकता है कि सेना कैसे आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स और पाकिस्तानी सेना की पोस्ट को तबाह कर रही है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक, दोनों तरह से भारत की सोच बदल दी है और पूरी दुनिया इसकी गवाह है। जम्मू कश्मीर के उधमपुर से लोकसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री सिंह ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि जल्दबाजी में की गई थी, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पाकिस्तान को खुश करना चाहते थे। कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने विजय के. सजावल द्वारा लिखी पुस्तक "कश्मीर क्रॉनिकल्स" का यहां कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में विमोचन करने के बाद कहा कि यह संधि दोनों देशों के लिए न्याय करने में असफल रही।उन्होंने कहा कि 2019 के पुलवामा हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के पश्चात, भारत ने अपनी रक्षा रणनीतियों में बदलाव की शुरुआत की थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलों को परिस्थितियों के अनुसार तथा पेशेवर ज्ञान एवं विवेक के आधार पर कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता दी थी। उन्होंने कहा कि यह 2014 से पहले की प्रथा के बिल्कुल विपरीत है, जब सेनाओं को केवल सीमित स्वतंत्रता थी और बड़े हमले के लिए उन्हें नयी दिल्ली से राजनीतिक मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। मंत्री ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर, अब तक की प्रचलित पद्धति में बदलाव का परिणाम है। recent visitors 43