परिजनों ने कहा- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉक्टर के शरीर में बड़ी मात्रा में वीर्य पाया गया, गैंगरेप की आशंका

कोलकाता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर के साथ रेप नहीं बल्कि गैंगरेप होने की भी आशंका है। 31 वर्षीय मृतका के परिजनों ने उच्च न्यायालय में यह बात कही। परिजनों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉक्टर के शरीर में बड़ी मात्रा में वीर्य पाया गया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि उसके साथ गैंगरेप किया गया और दरिंदगी करने वालों में कई लोग शामिल थे। उन्होंने अपनी अर्जी में कहा कि उनकी बेटी को गला दबाकर मारने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा साफ सबूत मिले हैं कि उसका यौन उत्पीड़न भी हुआ था। अर्जी में परिजनों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जो बता रही है, उससे तो चिंता और बढ़ गई है। उनकी बेटी के शरीर में जख्मों के निशान हैं। इससे पता चलता है कि वह बेहद क्रूर और हिंसक हमले का शिकार हुई थी। पीड़िता के सिर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। दोनों कानों पर चोट है। इससे पता चलता है कि उसने बहुत संघर्ष किया था। उसके ओठों पर चोट है। इससे ऐसा अनुमान लगता है कि उसे चुप करने की कोशिश की गई होगी। यह हमला कितना क्रूर था, इससे ऐसे भी समझ सकते हैं कि डॉक्टर की गर्दन पर भी चोट और काटे जाने के निशान हैं। इस मामले को हाई कोर्ट ने सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया है। इससे पहले पुलिस ने इस केस में आरोपी संजय रॉय को अरेस्ट कर लिया है। वह एक वॉलंटियर के तौर पर जुड़ा था और अकसर अस्पताल जाया करता था। पैरेंट्स ने हाई कोर्ट में कहा कि अब तक इस मामले में किसी अन्य अपराधी को पकड़ने की कोशिश नहीं हुई है। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप हुआ था और फिर मर्डर कर दिया गया। ऐसा अपराध कोई एक व्यक्ति तो नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक कॉलेज के प्रिंसिपल और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिन्होंने लापरवाही की थी। ममता के अल्टिमेटम का भी इंतजार नहीं, सीबीआई को मिला केस बता दें कि सीएम ममता बनर्जी ने इस मामले की जांच के लिए पुलिस को रविवार तक का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि पुलिस रविवार तक मामले का पूरा खुलासा नहीं कर सकी तो फिर केस सीबीआई को टांसफर कर दिया जाएगा। वहीं मंगलवार को केस की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पहले ही मामला सीबीआई को दे दिया। बेंच ने कहा कि इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती और देरी हुई तो फिर सबूत मिटाए भी जा सकते हैं। इसके अलावा बेंच ने प्रिंसिपल के इस्तीफे के बाद उसे दूसरे अस्पताल भेजे जाने पर ऐतराज जताया था और उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने को कहा था। recent visitors 92

BCCI सेटलमेंट पर NCLAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से Byju’s को झटका

नई दिल्ली आर्थिक संकट से जूझ रही एडुटेक कंपनी बायजू को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के साथ बायजू के 158.9 करोड़ रुपये के बकाया के सेटलमेंट को मंजूरी देने वाले दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी है। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ नेे बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को रद्द करने के राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) के आदेश पर भी रोक लगाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने NCLAT के फैसले के खिलाफ अमेरिकी लेंडर ग्लास ट्रस्ट कंपनी की याचिका पर बायजू को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने BCCI को समझौते के तहत बायजू से मिले 158.9 करोड़ रुपये अलग खाते में रखने का निर्देश दिया है। NCLAT ने गत दो अगस्त को बीसीसीआई के साथ बायजू के 158.9 करोड़ रुपये के बकाया समझौते को मंजूरी दे दी थी। प्राधिकरण ने बायजू के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को भी रद्द कर दिया था, जिससे कंपनी पर बायजू रवींद्रन का नियंत्रण एक बार फिर स्थापित होने की संभावना बढ़ गई थी। कैविएट है दायर हाल ही में बायजू रवींद्रन ने दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण ‘एनसीएलएटी’ द्वारा पारित आदेश के विरोध में ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर किया है। यह कैविएट तीन अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया गया। इसमें अनुरोध किया गया है कि अमेरिकी ऋणदाताओं द्वारा दायर याचिका पर न्यायालय द्वारा कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। ‘कैविएट’ आवेदन किसी वादी द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए दायर किया जाता है कि उसका पक्ष सुने बिना उसके विरुद्ध कोई आदेश पारित न किया जाए। अमेरिकी अदालत ने दिया था ये फैसला इससे पहले बायजू ने बताया था कि एक अमेरिकी अदालत ने बीसीसीआई के साथ उसके समझौते पर अस्थायी रोक लगाने के जीएलएएस ट्रस्ट कंपनी के आवेदन को खारिज कर दिया है। जीएलएएस ने एनसीएलएटी के समक्ष बीसीसीआई के साथ समझौते का भी विरोध किया था और आरोप लगाया था कि रिजू रवींद्रन ने जो राशि दी है, वह ‘राउंड-ट्रिपिंग’ का मामला है। recent visitors 76

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा- सेना कुर्स्क में आगे बढ़ रही है, भीषण हमलों से किस दुविधा में फंसे पुतिन

यूक्रेन पिछले करीब ढाई साल से चल रहे यूक्रेन-रूस जंग में पहली बार यूक्रेन का पलड़ा भारी दिख रहा है। यूक्रेनी सेना पूर्वी सीमा से सटे रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ती जा रही है। यूक्रेन की सेना के कमांडर ओलेक्सांद्र सिरस्की ने कहा है कि उनके सैनिकों ने अब तक कुर्स्क क्षेत्र में 74 बस्तियों पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा पिछले 24 घंटे में और 40 वर्ग किलोमीटर (15 वर्ग मील) क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। यूक्रेन इससे पहले रूस के 1000 KM क्षेत्र पर कब्जा का दावा कर चुका है। अब यूक्रेन ने रूसी क्षेत्र में अपनी घुसपैठ को आगे बढ़ाने के लिए रूस के दक्षिणी क्षेत्रों पर रात भर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया है। इस बीच, रूस ने बुधवार सुबह बताया कि उसने रात भर में 117 यूक्रेनी ड्रोन और कई मिसाइलों को नष्ट कर दिया है, जिनमें से ज़्यादातर कुर्स्क, वोरोनिश, बेलगोरोड और निज़नी नोवगोरोड क्षेत्रों में आ रहे थे। बता दें कि 6 अगस्त को स्थानीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे, 1,000 से अधिक यूक्रेनी सैनिकों ने रूस की सीमा पार कर कुर्स्क क्षेत्र में आक्रमण शुरू कर दिया था और कई गांवों पर कब्जा कर लिया था। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी कहा कि उनकी सेना कुर्स्क में आगे बढ़ रही है और उन्होंने अपने सैन्य जनरलों को ऑपरेशन में अगले महत्वपूर्ण टारगेट हासिल करने का आदेश दिया है। कीव दावा कर रहा है कि रूस के कम से कम 1,000 वर्ग किलोमीटर (386 वर्ग मील) भूखंड पर उसका नियंत्रण है। उधर, मॉस्को इसका खंडन कर रहा है और जोर देकर कह रहा है कि यूक्रेनी कब्जे में वास्तविक क्षेत्र इसका लगभग आधा है। पुतिन की दुविधा क्या? हालांकि, यह भी साफ है कि कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के सैन्य प्रभुत्व ने जहां करीब 200,000 लोगों को सीमावर्ती क्षेत्रों से भागने को मजबूर कर दिया है, वहीं रूस के लिए खतरे का नया अलार्म भी बजा दिया है। बेलगोरोड क्षेत्र के गवर्नर ने बुधवार को यूक्रेन द्वारा लगातार बमबारी को दोषी ठहराते हुए आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी। उधर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारी दुविधा में फंस गए हैं। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह पहले अपने क्षेत्र की रक्षा करें या यूक्रेन में आगे हमला करें। बड़ी बात यह भी है कि रूस ने हाल के महीनों में कुर्स्क क्षेत्र से ही विमान रोधी मिसाइल, तोप, मोर्टार, ड्रोन, 255 ग्लाइड बम और 100 से अधिक मिसाइलों से दो हजार से अधिक हमले यूक्रेन पर किए हैं। अगर पुतिन कुर्स्क क्षेत्र की रक्षा करने का फैसला लेते हैं तो इसके लिए उन्हें बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती करनी होगी और इस काम के लिए यूक्रेन में तैनात सैनिकों को वापस बुलाना होगा। इससे यूक्रेन में उनकी रणनीतिक बढ़त खत्म हो जाएगी। अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो यूक्रेन रणनीतिक रूप से कुर्स्क में और आगे बढ़ सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की इसी रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच अमेरिका के विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने साफ किया है कि अमेरिका कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के सैन्य अभियान के किसी भी पहलू में शामिल नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध की याद क्यों? अल जजीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ जानकारों का मानना ​​है कि रूस पर यूक्रेन का हमला द्वितीय विश्व युद्ध की याद दिला रहा है क्योंकि तब से अब तक किसी भी विदेशी सेना ने रूस पर इतना बड़ा हमला नहीं किया था। जानकारों के मुताबिक, यूक्रेन का हमला इस युद्ध की दिशा और दशा के बदल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी मंगलवार को कहा कि यूक्रेन ने व्लादिमीर पुतिन के लिए बड़ी दुविधा पैदा कर दी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा कि यूक्रेन ने बड़े पैमाने पर उकसावे की कार्रवाई की है और नागरिक ठिकानों पर अंधाधुंध गोलीबारी की है। वहीं, कुर्स्क क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर एलेक्सी स्मिरनोव ने सोमवार को कहा कि हमले में 12 नागरिक मारे गए हैं और 121 अन्य घायल हुए हैं, जिनमें 10 बच्चे भी शामिल हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है कि कुर्स्क पर यूक्रेन का हमला यूक्रेन से सैनिकों को वापस बुलाने के लिए मजबूर करने के लिए किया गया है। बता दें कि फरवरी तक यूक्रेन-रूस जंग में सैकड़ों बच्चों समेत 10,000 से अधिक यूक्रेनी नागरिक मारे गए हैं। रूसी हमले में स्कूल, अस्पताल और अन्य प्रमुख बुनियादी ढांचे भी नष्ट हो गए हैं। recent visitors 98

योगीराज को 12वीं AKKA वर्ल्ड कन्नड़ कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए अमेरिका जाना था, वीजा देने से किया इनकार

नई दिल्ली अयोध्या के राम मंदिर के लिए रामलला की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया है। इसके लिए अमेरिका ने कोई ठोस वजह भी नहीं बताई है। योगीराज को 12वीं AKKA वर्ल्ड कन्नड़ कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए अमेरिका जाना था। यह कॉन्फ्रेंस 30 अगस्त से एक सितंबर के बीच वर्जीनिया के रिचमंड कन्वेंशन सेंटर में होनी थी। अरुण योगीराज के परिवार ने वीजा नहीं दिए जाने को लेकर निराशा जताई है। पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि अरुण की पत्नी विजेता पहले भी अमेरिका जा चुकी हैं और ऐसे में अरुण को वीजा देने से इनकार करना काफी अप्रत्याशित है। मूर्तिकार अरुण ने अमेरिका के लिए सभी तैयारियां भी पूरी कर ली थीं। अरुण योगीराज ने भी अमेरिका द्वारा वीजा देने से इनकार किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मुझे कोई वजह नहीं मालूम, लेकिन हमने वीजा संबंधित सभी डॉक्युमेंट्स को जमा कर दिया था। बता दें कि AKKA वर्ल्ड कन्नड़ कॉन्फ्रेंस को सालभर में दो बार आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अमेरिका समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले समुदाय के सदस्यों को एक जगह लाना है। राम मंदिर के लिए बनाई थी रामलला की मूर्ति इस साल की शुरुआत में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस मंदिर में भगवान रामलला की मूर्ति स्थापित की गई है। इसे अरुण योगीराज ने बनाया है। यूं तो अरुण योगीराज की कई पीढ़ियां मूर्तियां बनाने का काम करती रही हैं, लेकिन रामलला की मूर्ति बनाकर अरुण देश-दुनिया में काफी लोकप्रिय हो गए। रामलला की मूर्ति के बारे में अरुण ने कहा था कि जब मूर्ति बनाई गई थी, तब वह अलग दिखती थी, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान ने अलग रूप ले लिया। मैं खुद भगवान की उस मूर्ति को नहीं पहचान सका, जिसे मैंने ही सात महीने तक बनाया। गर्भगृह में जाते ही मूर्ति बदल गई। यह ईश्वरीय चमत्कार है या कुछ और। मूर्ति बनाने के लिए ट्रस्ट ने बताई थीं चार चीजें अरुण योगीराज को जब रामलला की मूर्ति बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी, तब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों ने चार चीजें बताई थीं, जोकि रामलला की मूर्ति को बनाए जाने के बारे में थीं। ट्रस्ट ने कहा था कि इसमें मुस्कुराता हुआ चेहरा, पांच साल के बच्चे जैसा स्वरूप, युवराज जैसा चेहरा और दिव्य दृष्टि शामिल होनी चाहिए। इसी सलाह पर चलते हुए अरुण योगीराज ने सात महीने में काफी मेहनत से रामलला की मूर्ति तैयार की थी। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को की गई थी। पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ समेत तमाम लोग मंदिर में मौजूद थे। इसके अलावा, देश-दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लाइव देखा था। recent visitors 159

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए बधाई दी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को बधाई दी है। उन्होंने कोलार रोड पर तिरंगा यात्रा में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में हमारे पुलिसकर्मियों को अभी तक इतने पदक नहीं मिले थे, जितने इस वर्ष मिले हैं। इस बात की प्रसन्नता है कि हमारे सभी विभाग अपनी कार्य दक्षता और दायित्व के साथ कर रहे हैं। वीरता, शौर्य और बहादुरी के लिए इतने पदक मिलना पुलिस और सरकार के लिए भी गर्व की बात है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2024 की पूर्व संध्या पर हुई पदकों की घोषणा में मध्यप्रदेश के पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक और सराहनीय सेवा पदक तथा वीरता पदक प्रदान करने की घोषणा की गई है। पदकों का वितरण अगले साल स्वतंत्रता दिवस समारोह अर्थात 15 अगस्त 2025 को किया जाएगा।   recent visitors 82

उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राज्यपाल से मिल कर सिकल सेल एनीमिया के नियंत्रण के प्रयासों और प्रगति से अवगत कराया

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल से उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राजभवन में सौजन्य भेंट कर सिकल सेल एनीमिया के नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों और प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने हीमोग्लोबिनोपैथी मिशन अन्तर्गत किए जा रहे कार्यों, सिकल सेल रोगियों एवं वल्नरेबल क्षेत्र के नागरिकों के बचाव एवं उपचार के प्रयासों और संचालित जागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी। उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र का हर नागरिक सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम के लिए सावधानियों को समझे और आत्मसात करे, इसके लिए जागरूकता और आउटकम की मॉनिटरिंग के प्रयास किए जा रहे हैं, इन प्रयासों से सिकल सेल एनीमिया को जड़ से समाप्त किया जायेगा। उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 33 ज़िलों में सिकल सेल मरीज़ों की स्क्रीनिंग का कार्य किया जा रहा है। अब तक 59 लाख से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें एक लाख 34 हज़ार नागरिक सिकल सेल वाहक और 20 हज़ार 526 सिकल सेल एनीमिया के मरीज़ पाये गये हैं। 32 लाख 37 हज़ार 842 व्यक्तियों को सिकल सेल कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। मरीजों के उपचार एवं प्रबंधन के लिए चिन्हांकित जिलों में 6 से 10 बिस्तरीय एकीकृत उपचार केंद्र स्थापित कर उपचार के साथ हाइड्रॉक्सी-यूरिया, फोलिक एसिड दवाइयों का वितरण किया जा रहा है। एकीकृत उपचार केन्द्रों में रिप्लेसमेंट फ्री एवं सुरक्षित रक्त की निःशुल्क सुविधा है। वर्ष 2024-25 में सिकल सेल मरीजों को लगभग 9 लाख 22 हज़ार 500 हाइडॉक्सी-यूरिया का वितरण एवं 3 हज़ार 37 यूनिट निःशुल्क रक्ताधान किया गया है।   recent visitors 120

नर्स ने डिलीवरी के लिए 15 हजार रुपये की वसूली की गई, कलेक्टर ने किया निलंबित

शाजापुर  जिला अस्पताल में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर लक्ष्मी पंवार को निलंबित कर दिया गया है। लक्ष्मी पर ऑपरेशन से डिलीवरी के नाम पर 15000 रुपये की अवैध वसूली किए जाने का आरोप है। रुपए लेनदेन में सहयोग करने वाली आशा कार्यकर्ता को भी चेतावनी दी गई है। मामले की शिकायत पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ये बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर ने की कार्रवाई सीएमएचओ डॉक्टर अजय साल्विया ने मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी दी। अजय ने बताया कि मामले में कलेक्टर ऋजु बाफना ने जिला अस्पताल शाजापुर में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर लक्ष्मी पंवार को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधी में नर्सिंग ऑफिसर लक्ष्मी पंवार का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालापीपल रहेगा। आशा कार्यकर्ता को चेतावनी गर्भवती महिला ममता बाई की डिलीवरी के लिए रुपए लेनदेन में सहयोग करने वाली आशा कार्यकर्ता सीताबाई को सीएमएचओ डॉ. अजय साल्विया द्वारा चेतावनी पत्र दिया गया है। इसी मामले की जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने शाजापुर बस स्टैंड स्थित हरिओम मेडिकल पर भी जांच की थी। डिप्टी कलेक्टर के नेतृत्व में की गई जांच शिकायत पर कार्रवाई के लिये डिप्टी कलेक्टर राजकुमार हलधर के नेतृत्व में जांच की गई। जांच में सामने आया कि ग्राम मूलीखेड़ा निवासी गोविन्द की पत्नी ममता बाई की डिलेवरी के लिये 15 हजार रुपये का लेन देन हुआ है। जांच में सामने आया कि मेडिकल स्टोर में बने कक्षा में क्लीनिक संचालित किया जाता है। इसी मेडिकल पर नर्स लक्ष्मी पंवार बैठकर गर्भवती महिलाओं को परामर्श देती थी। जिसके चलते मेडिकल भी सील किया गया था। मामले में नर्स लक्ष्मी पंवार से भी स्पष्टीकरण लिया गया, किंतु यह संतोषजनक नहीं होने पर नर्स पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। सात हजार नकद और आठ हजार ऑनलाइन लिये मामले में शिकायतकर्ता भेरूलाल व उनके बेटे गोविंद (प्रसूता के पति) ने बताया कि लेनदेन की राशि में से सात हजार रुपये आशा कार्यकर्ता सीताबाई को नगद व आठ हजार रुपये आनलाइन भुगतान किए गए थे। ऑनलाइन किया गया भुगतान मामले की कार्रवाई में बड़ा सबूत रहा। इसके अलावा शिकायतकर्ता और आशा कार्यकर्ता द्वारा दिए गए बयान भी महत्वपूर्ण रहे। recent visitors 85