युनूस सरकार ने भारत सरकार से अपील की, भविष्य में अवैध घुसपैठियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही डिपोर्ट किया जाए

ढाका भारत की ओर से अवैध रूप से घुसपैठ कर चुके करीब 300 बांग्लादेशी नागरिकों को सुंदरबन के रास्ते नाव में बैठाकर वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। यह कार्रवाई बीते कुछ दिनों में भारतीय खुफिया एजेंसियों के अलर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर बांग्लादेश सरकार द्वारा की गई। बांग्लादेश की युनूस  सरकार ने भारत सरकार से अपील की है कि भविष्य में अवैध घुसपैठियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही डिपोर्ट किया जाए। युनूस  सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि “कृपया डिपोर्ट करने से पहले दोनों देशों के बीच तय प्रक्रिया का पालन करें।” ढाका में गृह सलाहकार क्वेलेट्टे जुरल जहरगीर आलम चौधरी की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में यह तय हुआ कि बांग्लादेश की एजेंसियां उन नागरिकों को फिर से पहचानेंगी, जो अवैध रूप से भारत में घुस आए थे। इसके लिए 200 से ज्यादा घुसपैठियों की पहचान कर ली गई है। हरियाणा के  हिसार में मंगलवार को 39 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए हैं। ये सभी अलग-अलग गांवों और इलाकों में रह रहे थे। छानबीन के दौरान इनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिले।भारत की सीमाओं पर सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और पहचान के डर से कई बांग्लादेशी नागरिक देर रात लुंगी पहनकर नाव के जरिये बांग्लादेश में वापस लौटने लगे। सुंदरबन के रास्ते तीन दिनों में 300 से अधिक लोगों को जबरन नाव में बैठाकर वापस भेजा गया। परिवार के कुछ सदस्यों ने बताया कि उन्हें खुद पता नहीं चला कि उन्हें अचानक क्यों वापस भेजा जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि वे कई सालों से भारत में रह रहे थे। बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष और युनूस  सरकार के बीच इस डिपोर्ट को लेकर असहमति सामने आई है। सेना ने 300 लोगों के जबरन डिपोर्ट पर नाराजगी जताई है और कहा है कि इससे दोनों देशों के संबंधों में खटास आ सकती है।विपक्षी  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ( BNP)  ने आरोप लगाया कि यह सरकार का तानाशाही कदम है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने मांग की है कि भारत से आने वाले सभी डिपोर्ट को वैध प्रक्रिया से ही निपटाया जाए।   recent visitors 58

भारत-पाकिस्तान: जबरन दोनों देशों के विवाद को सुलझाने के लिए सरपंच बनने की कोशिश कर रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण सबंध के बीच भारत के द्वारा बार-बार मना करने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जबरन मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं। जबरन दोनों देशों के विवाद को सुलझाने के लिए सरपंच बनने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने सऊदी अरब में एक संबोधन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष विराम को अपनी सरकार की शांति स्थापना की उपलब्धि करार दिया है। उन्होंने यहां तक कहा कि भारत और पाकिस्तान को एक साथ डिनर पर जाना चाहिए ताकि तनाव और कम हो सके। आपको यह भी बता दें कि भारत ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान से पीओके और आतंकवाद पर ही सिर्फ बात होगी। और किसी की मध्यस्थता हमें स्वीकार नहीं। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में हुए यूएस-सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच संभावित परमाणु युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “कुछ ही दिन पहले मेरे प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक संघर्ष विराम कराने में सफलता हासिल की। हमने इसमें व्यापार को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। मैंने कहा कि दोस्तों, आओ कुछ ट्रेड करो। न्यूक्लियर मिसाइल्स का नहीं, बल्कि उन चीजों का जो तुम खूबसूरती से बनाते हो।” उन्होंने आगे कहा, “दोनों ही देशों के पास बहुत ताकतवर और समझदार नेता हैं। और यह सब रुक गया। उम्मीद है ऐसा ही बना रहेगा।” भारत की तीखी प्रतिक्रिया- तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं भारत सरकार ने ट्रंप के इन बयानों को एक बार फिर सिरे से खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम पूरी तरह से दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच आपसी बातचीत का परिणाम है। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा किया है। इससे पहले भी वे कश्मीर मुद्दे पर इसी प्रकार की पेशकश कर चुके हैं, जिसे भारत ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। अपने संबोधन में ट्रंप ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो की ओर मुड़कर कहा, “मुझे लगता है कि अब भारत-पाकिस्तान वास्तव में साथ में ठीक रह रहे हैं। शायद हम उन्हें थोड़ा और करीब ला सकें। क्यों न उन्हें साथ में डिनर पर भेजा जाए? कितना अच्छा होगा?” recent visitors 58

पाकिस्तान सरकार ने आतंकी अजहर मसूद को सहायता राशि देने का किया ऐलान, मिल सकते है 14 करोड़ रुपये

इस्लामाबाद पाकिस्तान की सरकार ने भारत के हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। उसकी इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा खूंखार आतंकी अजहर मसूद को ही मिलता दिख रहा है। अजहर मसूद के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय पर भारत ने एयर स्ट्राइक की थी। इन हवाई हमलों में जैश के मुख्यालय को जबरदस्त नुकसान पहुंचा। इसके अलावा उसके परिवार के ही 10 लोग मारे गए थे। 4 अन्य लोग उसके करीबी थे, जो मारे गए। अब इन सभी लोगों की एवज में 14 करोड़ रुपये अजहर मसूद और उसके करीबियों के परिवारों के खाते में जाएंगे। इस तरह पाकिस्तान सरकार की ओर से मदद के नाम पर जारी रकम सीधे तौर पर आतंकियों और उनके परिवारों को मदद देगी। पाकिस्तान पीएमओ की ओर से जारी प्रेस रिलीज में एक करोड़ रुपये की सहायता राशि का ऐलान हुआ था। अब मदद के नाम पर जारी इस रकम का सीधा फायदा मसूद अजहर को ही मिलेगा। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने हाफिज सईद के मुरीदके स्थित ठिकाने और फिर बहावलपुर में जैश के ठिकानों पर जोरदार हमले किए थे। लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित बहावलपुर पर भारत के इस भीषण हमले ने आतंकी आकाओं को भी हिला दिया। जैश के इस मुख्यालय को उस्मान अली परिसर के नाम से भी जाना जाता है। यहीं पर जामिया मस्जिद शुभान अल्लाह भी स्थित है, जिस पर हमले का आरोप पाकिस्तान ने भारत पर लगाया था। यह मस्जिद भी जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय वाले परिसर के भीतर ही स्थित है। मसूद अजहर की ओर से ही जारी बयान में स्वीकार किया गया था कि उसके परिवार के 10 लोग इस अटैक में मारे गए हैं। इन हमलों में उसने अपनी बड़ी बहन और बहनोई के मारे जाने की बात स्वीकारी थी। इसके अलावा एक भतीजे और उसकी पत्नी, भतीजी और 5 बच्चों के मारे जाने की बात कबूल की गई थी। यही नहीं अजहर मसूद ने इसके बाद भी पूरी कट्टरता दिखाते हुए कहा था कि इन लोगों ने शहादत दी और अल्लाह उन्हें जन्नत देगा। अब इन लोगों के मारे जाने के बाद मसूद अजहर ही उनका कानूनी वारिस है। ऐसे में पाक सरकार से मिलने वाली पूरी मदद उसके ही खाते में जा सकती है। इसके अलावा 4 अन्य करीबियों के नाम पर जारी होने वाली मदद भी उसे ही मिलने की संभावना है। recent visitors 48

भारत ने चीन के बाद अब तुर्की के प्रोपेगेंडा पर कसी नकेल, TRT वर्ल्ड का सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक

नई दिल्ली भारत ने पाकिस्तान की मदद करने वाले चीन के खिलाफ पहला बड़ा एक्शन लिया है। भारत सरकार ने प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ग्लोबल टाइम्स और शिन्हुआ न्यूज के सोशल मीडिया एकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र शिन्हुआ न्यूज को भी भारत ने ब्लॉक कर दिया है। चीन सिन्हुआ न्यूज कई सालों से भारत के खिलाफ गलत सूचना, फर्जी खबरें और दुष्प्रचार फैलाने में लगा हुआ था। ग्लोबल टाइम्स के बाद शिन्हुआ को भी ब्लॉक कर दिया गया है। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान ग्लोबल टाइम्स पूरी बेशर्मी के साथ झूठ फैलाने में लगा था और बीजिंग में भारत के राजदूत ने इसके लिए चीनी मीडिया ऑउटलेट को फटकार भी लगाई थी। ग्लोबल टाइम्स बार बार ये नैरेटिव फैलाने की कोशिश कर रहा था कि भारत बिना किसी उकसावे के पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कर रहा था। इसके अलावा वो भारत के ऑपरेशन सिंदूर को 'एकतरफा कार्रवाई' बताने की कोशिश भी कर रहा था। दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार हो रहा है जब यह कार्रवाई की गई है। इसके अलावा देखा जा रहा था कि वो जताने की कोशिश कर रहा था कि भारत एक लंबी युद्ध में नहीं ठहर सकता है और इस बात को आधार बनाकर वो निवेशकों को भड़काने की कोशिश कर रहा था। ग्लोबल टाइम्स, शिन्हुआ न्यूज के एक्स अकाउंट बैन प्रोपेगेंडा फैलाते हुए चीनी मीडिया में पुराने युद्ध के वीडियो एडिट करके लगाए जा रहे थे। ग्लोबल टाइम्स, पाकिस्तान की सेना के हवाले से तमाम फर्जी खबरें चला रहा था। वो भारतीय हथियारों को लेकर भ्रामक जानकारियां फैला रहा था। चीन में भारतीय दूतावास ने तो ग्लोबल टाइम्स को फर्जी खबरें चलाने के लिए फटकार तक लगाई थी। चीन के साथ साथ तुर्की की मीडिया में लिखा जा रहा था कि "पाकिस्तान के JF-17 थंडर की हाइपरसोनिक मिसाइलों ने आदमपुर में भारत के S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया है। एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कीमत करीब 1.5 बिलियन डॉलर है।" भारतीय सेना ने जब इन दावों का खंडन कर दिया, फिर भी खबरों को अपडेट नहीं किया गया। इन देशों की मीडिया में भारतीय सेना के बयान नहीं दिखाए जा रहे थे। जाहिर तौर पर चीनी मीडिया में ऐसा इसलिए दिखाया जा रहा था क्योंकि जेएफ-17 चीनी फाइटर जेट है और सरकारी चीनी मीडिया में इस तरह के निराधार दावों से सीधे तौर पर सरकारी चीनी एयरोस्पेस कंपनियों को फायदा होता है। इन रिपोर्टों के बाद, J-17 और J-10C लड़ाकू विमानों के निर्माता एविक चेंगदू एयरक्राफ्ट कंपनी लिमिटेड के शेयरों में शेन्ज़ेन ट्रेडिंग में दो सत्रों में 36 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा तुर्की की मीडिया में भारत को मुस्लिम विरोधी देश दिखाने की कोशिश की गई। डिजिटल तरह से मुस्लिम ब्रदरहुड को बढ़ावा दिया गया। कई संकेतों में चीनी मीडिया ने एक्सपर्ट्स के हवाले से भारत के नागरिकों को डराने की नीयत से 'टू फ्रंट वॉर' का नैरेटिव फैलाने की कोशिश की। भारतीय फाइटर जेट को गिराए जाने के फर्जी वीडियो चीन-समर्थित अकाउंट्स से फैलाए गए। लिहाजा भारत ने सख्त एक्शन लेते हुए चीन के दोनो भोंपू के मुंह को बंद कर दिया है। TRT वर्ल्ड का सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक भारत सरकार ने आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तुर्की के सरकारी टीवी चैनल टीआरटी वर्ल्ड के सोशल मीडिया हैंडल को भारत में ब्लॉक कर दिया। यह कार्रवाई भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए की गई है। आज ही दिन में भारत ने चीन के सरकारी प्रोपेगेंडा अखबार ग्लोबल टाइम्स के सोशल मीडिया हैंडल को भी ब्लॉक कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, टीआरटी वर्ल्ड और ग्लोबल टाइम्स पर भारत के खिलाफ भ्रामक और भड़काऊ सामग्री फैलाने का आरोप है। पाकिस्तान समर्थक इन देशों के न्यूज पोर्टल अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए भारत के ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी फर्जी खबरें फैलाते पाए गए। भारत सरकार का कड़ा रुख भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को 8,000 से अधिक खातों को ब्लॉक करने का आदेश दिया, जिनमें अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों और प्रमुख यूजर्स के खाते शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये खाते राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली गलत सूचनाएं फैला रहे थे। टीआरटी वर्ल्ड और ग्लोबल टाइम्स के खाते इस कार्रवाई का हिस्सा हैं। पाकिस्तान समर्थक प्रचार का आरोप ग्लोबल टाइम्स और कुछ अन्य अकाउंट्स पर पाकिस्तान समर्थक प्रचार को बढ़ावा देने का आरोप है। हाल के दिनों में, भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ा है। तुर्की का टीआरटी वर्ल्ड खुद को वैश्विक समाचार और तुर्की के दृष्टिकोण को पेश करने का दावा करता है। उस पर भी भारत विरोधी कवरेज का आरोप लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत द्वारा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और विदेशी प्रचार को रोकने की दिशा में उठाया गया है। पाकिस्तान का हिमायती है तुर्की ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया, जिससे भारत और तुर्की के बीच तनाव बढ़ गया है। ऑपरेशन सिंदूर 7-8 मई 2025 की रात को शुरू हुआ। यह पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के शिविर शामिल थे। भारत ने इस कार्रवाई को गैर-उत्तेजक और आतंकवाद के खिलाफ एक जिम्मेदार कदम बताया। हालांकि, तुर्की ने इस ऑपरेशन की निंदा करते हुए पाकिस्तान का समर्थन किया। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने 7 मई को एक बयान जारी कर ऑपरेशन सिंदूर को "उकसाने वाला कदम" करार दिया और कहा कि इससे पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ गया है। तुर्की ने भारत और पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन साथ ही पाकिस्तान की मांग का समर्थन करते हुए पहलगाम हमले की जांच की वकालत की। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज … Read more

भोपाल में 8 हजार पेड़ बचाने की मुहिम तेज, 18 मई को अयोध्या बायपास पर जुटेंगे लोग चिपको आंदोलन

भोपाल राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास को लेकर 20 साल पहले तय एक नियम ने आज यहां 8000 पेड़ों के काटने की स्थिति बनाई है। बढ़ती आबादी और ट्रैफिक का अनुमान लगाते हुए 1995 में इस रोड की चौड़ाई 66 मीटर तय कर दी थी। आबादी के साथ रोड बनी और अनुमतियां भी यहां 66 मीटर की जगह छोड़कर दी गई, जिससे ग्रीनरी विकसित हुई। अब मास्टर प्लान में तय चौड़ाई को ही आधार बनाकर चौड़ीकरण तय किया और यहां पेड़ों की कटाई प्रस्तावित की गई। रविवार शाम पांच बजे करेंगे चिपको आंदोलन पेड़ों को बचाने पर्यावरण प्रेमी चिपको आंदोलन(Chipko movement) करेंगे। 18 मई शाम पांच बजे पर्यावरण प्रेमियों को बायपास पर एकत्रित होने का आह्वान किया गया है। पेड़ों को बचाने रक्षासूत्र बांधे जाएंगे। प्रशासन को इस आंदोलन की सूचना दी है। इस पर प्रशासन यहां उचित इंतजाम भी कर रहा है। प्रदर्शन को लेकर रणनीति भी बनाई जा रही है। बैठकों का दौर भी चल रहा है। पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने बताया कि पिछले दिनों शिवाजी नगर में बैठक हुई थी। इसमें निर्णय लिया गया कि 18 मई की शाम को अयोध्या बायपास पर आंदोलन किया जाएगा, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल होंगे। विकास जरूरी है, पर हरियाली के नाम पर ऐसा नहीं होने देंगे। एनएचएआई को प्रोजेक्ट में बदलाव करना चाहिए। ताकि, प्रोजेक्ट भी पूरा हो और पेड़ भी न काटे जा सके। इसलिए 10 लेन बनाया जा रहा अयोध्या बायपास बता दें कि इस रोड पर 3 ब्लैक स्पॉट हैं, जहां साल भर में 30-35 लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए सड़क को सर्विस लेन मिलाकर 10 लेन किया जा रहा है। विरोध की आशंका को देखते हुए एनएचएआई ने हाईकोर्ट और एनजीटी में कैविएट दायर की है। ताकि न्यायालय कोई भी स्टे देने से पहले एनएचएआई का पक्ष सुना जाए। हाउसिंग बोर्ड ने विकसित की कॉलोनियां मास्टर प्लान में आवासीय सह व्यावसायिक गतिविधि के लिए तय इस क्षेत्र को अयोध्या नगर के तौर पर हाउसिंग बोर्ड ने इसे विकसित किया। बोर्ड के विकास से निजी डेवलपर भी सक्रिय हुए और आवासीय व व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन गया। आनंद नगर व अयोध्या बायपास के नाम से ये रोड पहचाने जाने लगी। अब 8000 पेड़ कटाई से ये फिर चर्चा में है। पेड़ों को बांध चुके रक्षासूत्र इससे पहले रविवार की शाम को भी लोगों ने प्रदर्शन किया था। बड़ी संख्या में लोगों रत्नागिरी तिराहे पर पहुंचकर पेड़ों को रक्षासूत्र बांधे थे। साथ ही उन्हें बचाने का संकल्प लिया था। आयोजन की अगुआई श्रमिक नेता दीपक गुप्ता ने की। उन्होंने कहा- यह सिर्फ पेड़ों की लड़ाई नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। हम इन पेड़ों को कटने नहीं देंगे। गुप्ता ने खुद पेड़ों को रक्षासूत्र बांधते हुए आंदोलन की शुरुआत की। recent visitors 34

मैच के दौरान विराट कोहली को स्पेशल ट्रिब्यूट देंगे फैंस, चिन्नास्वामी स्टेडियम में दिखेगा सबसे अलग नजारा

मुंबई भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के बाद आईपीएल 2025 कुछ दिनों में फिर से शुरू होने जा रहा है। 17 मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु वर्सेस कोलकाता नाइट राइडर्स मैच खेला जाएगा। दोनों टीमें बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में टकराएंगी। आरसीबी बनाम केकेआर मैच को लेकर स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के फैंस ने एक तगड़ा प्लान बनाया है। फैंस चिन्नास्वामी में आरसीबी की जर्सी नहीं पहनेंगे। फैंस ने सफेद जर्सी पहनने का फैसला किया है, जिसका मकसद कोहली को स्पेशल ट्रिब्यूट देना है। कोहली ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा है और फैंस अपने पसंदीदा क्रिकेटर के लिए कुछ यादगार करने की कोशिश में जुटे हैं। फैंस ने इस संबंध में कैंपेन शुरू किया है, जिसकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही। कैंपेन में आरसीबी और कोहली के सभी फैंस से मैच के दौरान स्टेडियम में आरसीबी की लाल और काली जर्सी के बजाय सफेद जर्सी पहनने की अपील की गई है। इसका उद्देश्य विराट के प्रति सम्मान जताना है, जिन्होंने 12 मई को खेल के सबसे लंबे प्रारूप से संन्यास ले लिया। वायरल पोस्ट में कहा गया, ''क्या आप इस बात को फैलाने में मदद कर सकते हैं कि अगले आरसीबी मैच में फैंस टेस्ट की सफेद जर्सी पहनकर स्टेडियम आएं? विराट कोहली को ट्रिब्यूट देने के लिए ऐसा करें। कोहली ने हममें से बहुत से लोगों को टेस्ट क्रिकेट से प्यार करवाया है। मैं भले ही उन्हें सफेद जर्सी में खेलते हुए कभी नहीं देख पाऊंगा लेकिन मैं बस यह बताना चाहता हूं कि उनके पसंदीदा फॉर्मेट में उन्हें कितना प्यार किया जाता था।'' पोस्ट में आगे कहा गया, ''यह दमदार जेस्चर साबित करेगा कि उनकी विरासत आंकड़ों से कहीं आगे है। यह फैंस के दिलों में बसती है। प्लीज इसके बारे में सोचें और इसे हकीकत बनाने में हमारी मदद करें। यह हममें से बहुतों के लिए बहुत मायने रखेगा। मैंने एक टेम्प्लेट भी बनाया है। मुझे यह भी लगता है कि हम चिन्नास्वामी के बाहर जर्सी देने के लिए फंड जुटा सकते हैं। यह हमारा सबसे अच्छा मौका है। भले ही जर्सी न हो, लेकिन सादे सफेद टी-शर्ट से काम चल सकता है।" सोशल मीडिया पर भले ही मुहिम चलाई जा रही हो लेकिन ऐसा होगा या नहीं, ये देखने वाली बात होगी। 36 वर्षीय कोहली ने 2011 में टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होंने भारत के लिए 123 टेस्ट मैच खेल, जिसमें 46.85 की औसत से 9230 रन बनाए। उन्होंने इस दौरान 30 शतक जमाए। कोहली ने इंस्टाग्राम पर संन्यास की घोषणा करते हुए लिखा, ''जब मैं खेल के इस प्रारूप से दूर जा रहा हूं तो यह आसान नहीं है। लेकिन यह सही लगता है। मैंने इसे अपना सबकुछ दिया है और इसने मुझे उम्मीदों से कहीं अधिक दिया है।'' उन्होंने कहा, ''मैं खेल के लिए, मैदान पर खेलने वाले लोगों के लिए और हर उस व्यक्ति के लिए आभार लेकर जा रहा हूं जिसने मुझे इस दौरान खेलते हुए देखा।'' recent visitors 42

हिंदू बेटी ने बलूचिस्तान में रचा इतिहास, कौन हैं 25 साल की कशिश.. जो बनीं असिस्टेंट कमिश्नर

बलूचिस्तान महज 25 साल की उम्र में कशिश चौधरी ने इतिहास रच दिया है। पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखने वाली वह बलूचिस्तान प्रांत की पहली महिला बनी हैं, जिन्हें असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त किया गया है। नियुक्ति के बाद पाक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि महिलाओं और अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण की दिशा में काम करेंगी। बलूचिस्तान के चगाई जिले के नोशकी शहर की रहने वाली कशिश ने बलूचिस्तान पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) की परीक्षा पास कर यह उपलब्धि हासिल की है। यह न सिर्फ उनके व्यक्तिगत जीवन में मील का पत्थर है, बल्कि पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है। कड़ी मेहनत और अनुशासन से सफलता कशिश ने पाक चैनल समा टीवी से बात करते हुए बताया कि उन्होंने लगातार तीन साल तक हर दिन कम से कम आठ घंटे पढ़ाई की। उन्होंने कहा, “अनुशासन, मेहनत और समाज के लिए कुछ करने की चाहत ने मुझे इस सफर में प्रेरित किया।” उनके पिता गिर्धारीलाल पेशे से व्यापारी हैं। उन्होंने अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, “मेरी बेटी ने जो हासिल किया है, वह उसकी मेहनत और लगन का परिणाम है। यह मेरे लिए गर्व की बात है।” बताया- क्या होंगी प्राथमिकताएं कशिश चौधरी और उनके पिता ने क्वेटा में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती से मुलाकात की। कशिश ने मुख्यमंत्री से कहा कि वह महिलाओं और अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण के साथ-साथ प्रांत के समग्र विकास के लिए काम करेंगी। मुख्यमंत्री बुगती ने कहा, “यह देश और बलूचिस्तान के लिए गर्व की बात है कि हमारे अल्पसंख्यक समुदाय की बेटियां इतनी मेहनत कर अहम पदों तक पहुंच रही हैं। कशिश हमारे लिए गर्व का प्रतीक हैं।” और भी महिलाएं दिखा रहीं दम पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की महिलाएं धीरे-धीरे पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। इससे पहले 2022 में मनीषा रोपेटा कराची की पहली हिंदू महिला एसपी बनीं थीं। वहीं, पुष्पा कुमारी कोहली कराची में सब-इंस्पेक्टर हैं। सुमन पवन बोधनानी 2019 में सिंध के शहादादकोट में सिविल जज बनी थीं। recent visitors 63