मध्य प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की बैठक पीसीसी में आयोजित की गई, कई नेता रहे नदारत

भोपाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व सीएम कमलनाथ पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह समेत कई दिग्गज नेता नदारद रहे। इस बैठक मेंसंगठन को मजबूत बनाने की रणनीतिक पर चर्चा की गई। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और राजनीतिक मामलों की बैठक मंगलवार को पीसीसी में आयोजित की गई। इस बैठक में  पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, डॉ. गोविंद सिंह समेत कई दिग्गज नेता नदारद रहे। इस बैठक में संगठन को मजबूत बनाने, जनसमस्याओं को प्राथमिकता देने, एवं आगामी आंदोलनों एवं अभियानों को लेकर चर्चा की गई। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूत रहे। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि संविधान पर हो रहे हमलों को रोकने और जनता को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए यह अभियान निर्णायक साबित होगा।  जीतू पटवारी ने कहा किहर कार्यकर्ता इस आंदोलन को अपनी जिम्मेदारी माने और हर गांव, हर वार्ड तक संविधान का संदेश लेकर जाए। कांग्रेस को मजबूत करने सभी को जुटना होगा  हरीश चौधरी ने कहा कि सबको साथ मिलकर कांग्रेस को मजबूत करने में जुटना चाहिए। आज कांग्रेस को अर्जुन सिंह जैसे नेताओं की जरूरत है। जिस तरह अर्जुन सिंह सबको साथ लेकर चलते थे। उस तरह हर स्तर के नेता को काम करना चाहिए। अपने जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की कोशिश सबको करना चाहिए। संविधान बचाओ अभियान पर विशेष चर्चा बैठक का प्रमुख फोकस आगामी संविधान बचाओ अभियान पर रहा। निर्णय लिया गया कि 25 से 30 अप्रैल के बीच पूरे देश में संविधान बचाव रैली आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में इस अभियान को 28 अप्रैल से ग्वालियर में एक भव्य रैली के साथ किया जाएगा। 1- जिला स्तरीय संविधान बचाओ रैलियां 3 मई से 10 मई प्रदेश के प्रत्येक जिले में समस्त DCC द्वारा PCC के समन्वय से रैलियाँ आयोजित की जाएँगी। इन रैलियों में मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियाँ – बढ़ती बेरोजगारी, महँगाई, कृषि संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदहाली आदि मुद्दों को उजागर किया जाएगा। युवाओं, किसानों, मजदूरों और दलित समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। 2- विधानसभा स्तरीय संविधान बचाओ रैलियां-11 मई से 17 मई हर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता जनजागरण करेंगे। ED, CBI, और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना, महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों पर हमलों को उजागर किया जाएगा। 3- घर-घर संपर्क अभियान-20 मई से 30 मई हर घर तक पहुंचने के लिए कार्यकर्ता द्वार-द्वार जाकर संवाद स्थापित करेंगे। विशेष रूप से महंगाई, बेरोजगारी, संविधानिक अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। अभियान साहित्य वितरित कर, सोशल मीडिया के माध्यम से भी संवाद को सशक्त किया जाएगा। recent visitors 57

मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि प्रिंस सलमान से पूछिए, क्या मदीना वक्फ की जमीन पर बना है: असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा, "जब आपका जहाज सऊदी अरब की फिजाओं में दाखिल हुआ था, तब सऊदी के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया, ये एक दोस्ताना इशारा था। लेकिन मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि जब आप सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलें, तो उनसे पूछिए क्या मदीना वक्फ की जमीन पर बना है या नहीं?" गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय सऊदी अरब की यात्रा पर हैं और जेद्दा पहुंचे हैं। ये उनकी तीसरी सऊदी यात्रा है, लेकिन पहली बार जेद्दा आए हैं। उनके स्वागत में सऊदी एयरफोर्स के एफ-15 विमान ने उनकी फ्लाइट को एयरस्पेस में एस्कॉर्ट किया। हर मुस्लिम देश में वक्फ मौजूद: ओवौसी मंगलवार को दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित 'सेव वक्फ कॉन्फ्रेंस' में ओवौसी ने हालिया संसद में बीजेपी सांसद के उस बयान का जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि कुछ मुस्लिम देशों में वक्फ की कोई व्यवस्था नहीं है। ओवैसी ने कहा कि वक्फ हर मुस्लिम देश में होता है, चाहे वो लोकतंत्र हो या सल्तनत हो। ओवैसी ने आगे कहा कि वक्फ का अस्तित्व हर मुस्लिम देश में है और भारत में भी इसे संविधान और संसद का समर्थन मिला है। उन्होंने याद दिलाया कि वक्फ एक्ट 2013 को दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पास किया था। उन्होंने यह भी कहा, "संविधान के अनुसार कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका स्वतंत्र हैं। अगर सरकार संविधान का दुरुपयोग करती है, तो न्यायपालिका ही हमारी आखिरी उम्मीद होती है।" सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या बोले ओवैसी ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ एक्ट में किए गए 40 से ज्यादा संशोधनों पर अंतरिम आदेश को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "ये कानून काले कानून जैसा है जो वक्फ की जायदाद को बचाने के लिए नहीं, बल्कि खत्म करने के लिए लाया गया है। अगर केंद्र सरकार ऐसे नियम बनाती है जो वक्फ को कमजोर करते हैं, तो ये संघीय ढांचे के भी खिलाफ होगा।" उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस कानून का विरोध जारी रखेंगे और कानूनी लडाई भी लडते रहेंगे। recent visitors 47

भविष्य के लिए जल को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है: मंत्री सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ईंटखेड़ी में बाणगंगा नदी के विसर्जन घाट पर सफाई, सौंदर्यीकरण एवं जल संरक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बलिदान स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके त्याग और बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में विधायक श्री विष्णु खत्री,जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मोहन सिंह जाट, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमोद राजपूत,सरपंच श्री हरि सिंह सैनी, श्री तीरथ सिंह मीणा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी एवं अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जल संरक्षण के संकल्प को पूरा करने के लिए अभियान में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में 13 मिनट तक जल गंगा संवर्धन और संरक्षण की आवश्यकता बताई थी। भविष्य के लिए जल को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है। मंत्री श्री सिलावट ने जन-आंदोलन के साथ इस कार्य को करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि गांव, जिले, राज्य और देश में श्रमदान को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। बैरसिया विधानसभा में 70 अमृत सरोवर हैं, जिनका संवर्धन करना है। उन्होंने 'एक पेड़ मां के नाम' लगाने का भी आग्रह किया। श्री सिलावट ने 30 मार्च से 30 जून तक चलने वाले जल गंगा संवर्धन अभियान में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने सभी वर्गों से जल संरक्षण कार्यों में सहभागिता करने को कहा। उन्होंने ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों पर जल स्रोतों के संरक्षण के लिए श्रमदान का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि धरातल पर काम की प्रगति दिखनी चाहिए और काम में कोताही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल स्रोतों में अतिक्रमण को पूरी तरह से हटाने के भी निर्देश दिये। recent visitors 38

मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की धरती पर जन्में चीतों की शिफ्टिंग पर व्यक्त की प्रसन्नता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदसौर स्थित गांधीसागर अभयारण्य में मध्यप्रदेश की धरती पर जन्में चीतों की शिफ्टिंग को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह अभयारण्य प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मध्यप्रदेश में चीतों के आवास एवं विचरण के लिए सर्वाधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। कूनो नेशनल पार्क से राज्य में दूसरे स्थान पर चीतों को ले जाकर पुनर्वास करना वन्य-प्राणी संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े गए चीते पावक और प्रभाष को यहाँ की आबो-हवा और नया परिवेश पसंद आया है और दोनों आनंद के साथ जंगल में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को वन्य जीवों के संरक्षण में अग्रणी बनाने के लिए विशेष ईको सिस्टम विकसित करने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश बाघों की संख्या में शीर्ष पर है और इसे टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है। इसी के साथ राज्य में लेपर्ड (तेंदुए) भी सर्वाधिक हैं। राज्य सरकार सभी विलुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में चीतों के पुनर्वास को एशिया महाद्वीप की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से वन्य-प्राणियों के संरक्षण में साझेदार बनने के साथ 'जियो और जीने दो' की भावना से कार्य करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत 20 अप्रैल 2025 को मध्यप्रदेश में कूनो नेशनल पार्क में जन्में दो चीते पावक और प्रभास को उनके नए घर गांधीसागर अभयारण्य में मुक्त विचरण के लिए छोड़ा है। मई महीने में मध्यप्रदेश को बोत्सवाना से चार चीते मिल सकते हैं।   recent visitors 43

पाकिस्तान के ‘आसिम मुनीर’ का बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है: अनिल गौर

पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के सुरक्षा से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, इस कायराना हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ तो है ही। मुनीर के बयान को गंभीरता से लेना चाहिए था- अनिल गौर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल 'आसिम मुनीर' का वह बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है। क्या हमने उस बयान को हल्के में लिया है। ऐसे कई सवाल उठना लाजिमी है। जनरल मुनीर ने 144 घंटे पहले इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन 2025 में कहा था, 'कश्मीर पर हमारा (पाकिस्तानी सेना) और सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हम इसे नहीं भूलेंगे। हम भारत के कब्जे के खिलाफ संघर्ष करने वाले अपने कश्मीरी भाइयों को नहीं छोड़ेंगे। बतौर सुरक्षा विशेष गौर, यह सामान्य बयान नहीं था। इसकी गंभीरता को समझना चाहिए था। जम्मू कश्मीर में बढ़ानी चाहिए थी सुरक्षा- अनिल गौर कैप्टन (रिटायर्ड) अनिल गौर ने कहा, मुनीर के बयान के बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए थी। हालांकि खुफिया एजेंसियों ने अपने स्तर पर कुछ न कुछ किया ही होगा। पाकिस्तानी सेना के चीफ मुनीर ने जो कुछ कहा था, उसका असर पहलगाम के आतंकी हमले के तौर पर दिख रहा है। मुनीर ने बयान से स्पष्ट था कि कश्मीर में हमारे बंदे हैं। पहलगाम में आतंकियों ने टारगेट भी हिंदुओं को किया है। गोली मारने से पहले लोगों का धर्म पूछा गया था। अनिल गौर बताते हैं, जम्मू और कश्मीर में पर्यटन के लिए आने वाले अधिकांश लोगों में तो हिंदू ही होते हैं। आतंकी संगठन चाहते हैं जम्मू-कश्मीर में न आएं पर्यटक यह हमला, कुछ अन्य बातों की तरफ भी इशारा करता है। जैसे आतंकियों को अब पहले के मुकाबले लोकल सपोर्ट नहीं मिल पा रही है। दूसरा, आतंकियों की नई भर्ती अब तकरीबन बंद हो चुकी है। उन्हें अब लोकल सपोर्ट भी नहीं मिल रही है। वे पहाड़ों पर छिपे हैं। इस हमले का मकसद वहां आने वाले हिंदुओं में दहशत फैलाना है। आतंकी संगठन चाहते हैं कि जम्मू और कश्मीर में पर्यटक न आएं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो बिजनेस प्रभावित होगा। जब बिजनेस प्रभावित होगा तो सरकार की विकास नीति भी पटरी से उतर सकती है। आतंकी यह संदेश भी देना चाह है कि उन्हें लोकल सपोर्ट नहीं मिलेगी तो ऐसे हमले आगे भी देखने को मिल सकते हैं। recent visitors 31

पहलगाम आतंकी हमले में 26 टूरिस्ट की मौत, नाम पूछकर मारी गोली, NIA करेगी जांच

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले 26 टूरिस्ट की मौत हुई है। मृतकों में सभी पुरुष हैं। आतंकियों के हमले का निशाना बने पर्यटकों में दो विदेशी नागरिक हैं। बड़े आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निर्देश मिलने के बाद गृह मंत्री नई दिल्ली से पहलगाम के लिए रवाना हुए हैं। आतंकी हमले में काफी टूरिस्ट घायल हुए हैं हालांकि अभी तक दो टूरिस्ट की मौत की पुष्टि हुई है। नई दिल्ली में हाईलेवल बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर में भी उच्चस्तरीय बैठक कर सकते हैं। पीएम मोदी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया है। किसी को नहीं छोड़ेंगे: शाह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं। इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई करेंगे। अमित शाह ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को घटना के बारे में जानकारी दी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी एजेंसियों के साथ तत्काल सुरक्षा समीक्षा बैठक करने के लिए जल्द ही श्रीनगर के लिए रवाना होऊँगा।   बैसरन वैली में हुआ आतंकी हमला पहलगाम यह आतंकी हमला मशहूर बेताब वैली से 10 किमी दूर स्थित बैसरन वैली में उस वक्त हुआ जब टूरिस्ट का एक ग्रुप घास पर घुड़सवारी का आनंद ले रहा है। आतंकी हमले के बाद सामने आए वीडियो में इस बात की पुष्टि हुई है कि हथियारबंद हमलावरों ने नाम पूछकर गोली मारी। हमले के बाद सामने आए वीडियो में आतंकवादियों की क्रूरता बयां हुई है। महिला ने वीडियो में बताया है कि महिला ने बताया कि आतंकियों ने नाम पूछा और गोली मार दी। इसी वीडियो में एक और महिला महिला बुरी तरह रो रही हैं और ये कह रही हैं कि भगवान के लिए मेरे पति को बचा लो। वीडियो में एक शख्स कहता है कि आप टेंशन मत लो, आप यहां पर रहो। ठीक है ठीक है हम बचा देंगे। मैं आ रहा हूं।   कुछ साल पहले बना था टूरिस्ट प्वाइंट पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर के समर्थित टीआरएफ  संगठन ने ली है। यह संगठन लश्कर ए तैयबा का हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसा ही संगठन है। जम्मू कश्मीर इसके सबूत मिले हैं कि इस आतंकी संगठन के पीछे लश्कर ए तैयबा ही है। आतंकियों ने दूसरे राज्यों के जिन टूरिस्ट पर हमला किया वह बैसरन घाटी का टूरिस्ट प्वाइंट चार-पांच साल पहले ही बना था। घाटी में माहौल बदलने के बाद बड़ी संख्या में टूरिस्ट इस प्वाइंट पर पहुंच रहे थे। पहलगाम के इस आतंकी हमले में सामने आया है कि कुछ आतंकी पुलिस की वर्दी में थे। इसलिए वे पर्यटकों के पास तक आसानी से पहुंच गए। पहलगाम हमले की चौतरफा निंदा पहलगाम के बैसरन टूरिस्ट प्वाइंट पर पर्यटकों के हमले को लेकर जहां केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है ताे वहीं दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी चीफ से बात की है। जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने इस कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया है। घायलों को एयरलिफ्ट किए जाने की संभावना पर भी विचार हो रहा है। recent visitors 31

भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा, इसके खतरनाक परिणाम होंगे, लोग बेरोजगार हो सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे आविष्कार से तमाम सुविधाएं मिल रही हैं तो रोजगार से जुड़ी चिंताएं भी लोगों को सता रही हैं। इस चिंता में अब सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हो गया है। अदालत ने मंगलवार को एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा। इसके खतरनाक परिणाम होंगे और बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हो सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसमें मांग की गई थी कि सरकार को इलेक्ट्रिकल वीकल्स की खरीद और उनके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीति बनाने को को कहा जाए। इसी दौरान अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण ड्राइवरों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। अदालत ने कहा, 'हमारी चिंता यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इन ड्राइवरों का रोजगार नहीं जाना चाहिए। भारत में ड्राइवर की नौकरी भी रोजगार का एक बड़ा माध्यम है।' मजाकिया अंदाज में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एआई से तो वकीलों को भी टक्कर मिल रही है। ऐसे टूल आ गए हैं, जिनसे आप कोई भी कानूनी राय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बढ़ती हुई तकनीक है। कुछ महीनों में ही कोई एक अच्छा मॉड्यूल आ जाता है। फिलहाल हम देख रहे हैं कि AI आधारित एडवोकेट टूल हैं। अमेरिका में तो इनका खूब इस्तेमाल हो रहा है। हमें भी वकीलों को लेकर चिंता होती है। बता दें कि भारत में भी बड़े-बड़े उद्योगपति इसे लेकर चिंता जताते रहे हैं। कॉन्टेंट राइटिंग, कंसल्टेंसी समेत कई ऐसे बिजनेस हैं, जिन पर AI के चलते विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इलेक्ट्रिक कारों की खरीद की नीति को लेकर दायर पीआईएल के लिए प्रशांत भूषण पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिकल वीकल्स को तेजी से बढ़ावा देना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 तो भारत के ही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी मांग है कि सरकार खुद ऐसी नीति लागू करे। उन्होंने कहा कि सरकार यदि आगे नहीं बढ़ेगी तो फिर दूसरे विभाग कैसे आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को बेसिक इन्फ्रा मुहैया कराना चाहिए। प्रशांत भूषण ने कहा कि 400 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक वीकल्स की चार्जिंग सेंटर मिलते हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हमें कुछ समय दिया जाए। फिर हम बताएंगे कि आखिर सरकार की इसे लेकर क्या नीति है। अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है। recent visitors 34