भारत ने बांग्लादेश में ₹5,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, भूटान और नेपाल के रास्ते वैकल्पिक रास्तों की तलाश

नई दिल्ली  इस समय पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) से रिश्ते कुछ सहज नहीं हैं। इसलिए भारत ने वहां चल रहे कुछ रेलवे प्रोजेक्ट (Railway Project) रोक दिए हैं। वहां हो रही राजनीतिक उथल-पुथल और वहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भारत को चिंता है। एक खबर के अनुसार, लगभग ₹5,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट का इस समय काम रुक गया है। कई प्रोजेक्ट पर काम ठप  एक रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन प्रोजेक्ट पर पहले काम चल रहा था, जिसे अब रोक दिया गया है। इसके अलावा, पांच अन्य प्रोजेक्ट के लिए सर्वे का काम भी बंद कर दिया गया है। ये रेलवे प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए बहुत जरूरी थे। इनका मकसद सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता को कम करना था। सिलिगुड़ी कॉरिडोर एक पतला सा रास्ता है जो पूर्वोत्तर भारत को बाकी भारत से जोड़ता है। कौन कौन से प्रोजेक्ट रुके जिन रेलवे प्रोजेक्ट को रोका गया है, उनमें अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक, खुलना-शाहबाजपुर रेल लाइन, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और ढाका-टोंगी-जयदेबपुर रेल एक्सटेंशन प्रोजेक्ट शामिल हैं। अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक प्रोजेक्ट पर भारत बांग्लादेश को लगभग ₹400 करोड़ की मदद दे रहा था। यह 12.24 किलोमीटर लंबा है। इसमें बांग्लादेश में 6.78 किलोमीटर और त्रिपुरा में 5.46 किलोमीटर की दोहरी रेल लाइन बननी थी। खुलना-शाहबाजपुर रेल लाइन, जो अखौरा-अगरतला प्रोजेक्ट का हिस्सा है, असम के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बनाई जा रही थी। खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन प्रोजेक्ट को रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत $388.92 मिलियन (₹3,300 करोड़) है। इसमें बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट और खुलना में मौजूदा रेल नेटवर्क के बीच लगभग 65 किलोमीटर का रेल मार्ग बनाया जाना था। काम बहुत धीरे 'बिजनेस लाइन' की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका-टोंगी-जयदेबपुर रेलवे एक्सटेंशन प्रोजेक्ट जून 2027 तक पूरा होना था। लेकिन, पिछले साल तक इसका 50% से भी कम काम हो पाया था। मतलब, काम बहुत धीरे चल रहा था। प्रोजेक्ट पर काम क्यों धीमा था, इस बारे अभी तक कुछ खास सामने नहीं आया है। भारत विकल्प देख रहा है अब भारत भूटान और नेपाल के रास्ते वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है ताकि उत्तर तथा पूर्वोत्तर भारत में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, "'₹3500 – 4000 करोड़ की कनेक्टिविटी योजना भूटान और नेपाल के माध्यम से तलाशी जा रही है, लेकिन भारतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य योजना के अनुसार चल रहा है।" इसके साथ ही, भारत उत्तर प्रदेश और बिहार में सिंगल रेल लाइनों को डबल और जहां डबल रेल लाइन है, वहां चार लाइनें बिछाने की संभावना भी तलाश रहा है। recent visitors 96

भारत के 5 बड़े फैसलों के मायने: भारत ने 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता रोका: पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द, अटारी बॉर्डर बंद

Meaning of India’s 5 big decisions: India stopped the 65 year old Indus Water Treaty नई दिल्ली । पहलगाम हमले के दूसरे दिन भारत ने इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार माना है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने 5 बड़े फैसले लिए हैं। इसमें 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि को रोका गया है। अटारी चेक पोस्ट बंद कर दिया गया है। वीजा बंद कर दिया गया और उच्चायुक्तों को हटा दिया है। जानिए, सरकार के इन फैसलों का पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा… 1. सिंधु जल संधि समझौता स्थगित होने से पाकिस्तान में जल संकट छाएगा, आर्थिक स्थिति बिगड़ेगी सिंधु जल संधि: 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच 6 नदियों का पानी बांटने को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसे सिंधु जल संधि कहते हैं। समझौते के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का इस्तेमाल करने की परमिशन दी गई। समझौते का मकसद: सिंधु जल समझौते का मकसद था कि दोनों देशों में जल को लेकर कोई संघर्ष न हो और खेती करने में बाधा न आए। हालांकि भारत ने हमेशा इस संधि का सम्मान किया, जबकि पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। भारत के पाकिस्तान से तीन युद्ध हो चुके हैं, लेकिन भारत ने कभी भी पानी नहीं रोका था, लेकिन पाकिस्तान हर बार भारत में आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार होता है। पाकिस्तान में अब पानी का संकट होगा: पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी पर निर्भर है। अब भारत की तरफ से इन नदियों का पानी रोक देने से पाकिस्तान में जल संकट गहराएगा। वहां की आर्थिक स्थिति बिगड़ेगी। इसके अलावा पाकिस्तान कई डैम और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से बिजली बनाता है। पानी की कमी से बिजली उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जिससे आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा। 2. अटारी चेक पोस्ट बंद होने से पाकिस्तानियों की आवाजाही नहीं हो सकेगी अटारी चेक पोस्ट के बंद होने से पाकिस्तान के लोगों की आवाजाही तो बंद होगी ही, साथ ही छोटे सामानों को भारत निर्यात नहीं करेगा। इससे वहां के छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होगा। भारत आए पाकिस्तानी नागरिकों को इस रास्ते से लौटने के लिए 1 मई तक का वक्त दिया गया है। इसके बाद वह इस रास्ते से नहीं लौट पाएंगे। साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद से ही पाकिस्तान से द्विपक्षीय व्यापार बंद है। किसी तीसरे देश के माध्यम से भारत-पाकिस्तान के बीच आयात-निर्यात होता है। हालांकि दोनों देशों के बीच छोटे-मोटे सामानों का लेन देन होता है। जैसे- सेंधा नमक, चमड़े का सामान, मुल्तानी मिट्टी, तांबे का सामान, मिनरल मिल्स, ऊन और चूना हैं। 3. वीजा सर्विस के साथ आतंकियों के आने का रास्ता भी बंद भारत ने पाकिस्तानियों के वीजा पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, SAARC वीजा छूट योजना से भी पाकिस्तान के लोग भारत नहीं आ पाएंगे। फैसले का मकसद: पाकिस्तान के कई लोगों की रिश्तेदारी भारत में है। ऐसे में कई बार पाकिस्तानी लोग रिश्तेदार बनकर भारत आते हैं। इनके अलावा धार्मिक यात्राओं का बहाना करके भारत आते हैं और आतंकी हमलों को अंजाम देते हैं। ऐसे में वीजा सर्विस बंद होने से आतंकियों के भारत आने का रास्ता भी बंद हो जाएगा। 4. हाई कमीशन से डिफेंस एडवाइजर्स हटाए भारत ने नई दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन में तैनात पाकिस्तानी मिलिट्री, नेवी और एयर एडवाइजर्स को अवांछित व्यक्ति घोषित किया है। उनके पास भारत छोड़ने के लिए एक हफ्ते का समय है। 1 मई 2025 तक पाकिस्तान के हाई कमीशन में तैनात कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 की जाएगी। भारत ने आजादी के बाद से अब तक दिल्ली में पाकिस्तान के दूतावास को कभी भी बंद नहीं किया है। 5. अपने डिफेंस एडवाइजर्स भी वापस बुलाए पाकिस्तान के डिफेंस एडवाइजर्स हटाने के साथ ही भारत भी अपने मिलिट्री, नेवी और एयर एडवाइजर्स को इस्लामाबाद स्थित इंडियन हाई कमीशन से वापस बुलाएगा। संबंधित हाई कमीशन में ये पद निरस्त माने जाएंगे। दोनों उच्चायोगों से सर्विस एडवाइजर्स के 5 सपोर्ट स्टाफ को भी वापस बुलाया जाएगा। इन दोनों फैसलों का असर सैन्य-डिप्लोमैटिक संवाद ठप: भारत में पाकिस्तानी रक्षा सलाहकारों की वापसी से दोनों देशों के बीच सैन्य-स्तर की बातचीत और संपर्क पूरी तरह बंद हो जाएंगे। हाई कमीशन का प्रभाव कम होगा: स्टाफ की संख्या घटकर 55 से 30 हो जाने से पाकिस्तानी उच्चायोग की कार्यक्षमता और भारत में उसकी कूटनीतिक मौजूदगी सीमित हो जाएगी। recent visitors 124

शिवसेना द्वारा आतंकवाद का पुतला दहन किया

Shivsena burnt the effigy of terrorism भोपाल ,ब्यूरो रिपोर्ट । देश एवं प्रदेश भर में पहलगाम जम्मू कश्मीर में हुए,आतंकवादी हमले का विरोध हो रहा हैं,वहीं राजधानी स्थित प्रभात पेट्रोल पंप पर शिवसेना UBT के द्वारा पहलगाम जम्मू कश्मीर में हुए,आतंकवादी हमले मे मारे गए, 27 पर्यटकों और 17 हमले में घायल हुए नागरिकों के विरोध में पाकिस्तान और आतंकवाद का पुतला दहन किया गया,वही शिवसेना जिला अध्यक्ष कुलदीप तिवारी ने बताया कि,जो पर्यटक जम्मू के पहलगाम में शहीद हुए हैं,उनको श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही हैं,बड़े ही दुख की घड़ी है,उससे यही प्रतीत हो रहा कि,पाकिस्तान चाहता है कि,धार्मिक आधार पर भारत मे ग्रह युद्ध हो शिवसेना प्रधानमंत्री से मांग करती हैं की,घायलों के उपचार की लिए स्पेशल ब्यवस्था की जाए,साथ ही मृतक के परिजनों को मुआबजा और सेना में नौकरी दी जाए,एवं पाकिस्तान का अंतराष्ट्रीय पटल पर विरोध किया जाना चाहिए, साथ ही आयात निर्यात पाकिस्तान के साथ बंद कर देना चाहिए,हमारी मांग हैं कि, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्यवाही की जाए recent visitors 84

पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला, भारत के साथ दृढता के साथ खड़े हैं कई मुस्लिम मुल्क, अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों की गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला है। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली है। अमेरिका, रूस और चीन समेत दुनियाभर के देशों ने इस कायराना हमले की निंदा की है। अरब जगत ने भी कश्मीर में आतंकी हमले की निंदा की है और कहा है कि वह भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। कुवैत के क्राउन प्रिंस सबा खालिद अल-हमद अल-सबाह ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को "पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले में हुई दुखद मौत पर" संवेदना व्यक्त की। बयान में कहा गया कि क्राउन प्रिंस ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कुवैत के अलावा सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने भी पहलगाम हमले पर एक बयान जारी किया है और कहा है कि वह दुख की घड़ी में भारत के साथ खड़ा है। सऊदी अरब भी भारत के साथ सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, "हम हिंसा, उग्रवाद और नागरिकों को निशाना बनाने के सभी कायराना हरकतों को अस्वीकार करते हैं और भारत के साथ दृढता के साथ खड़े हैं। सऊदी अरब पीड़ित परिवारों और भारत सरकार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करता है।" बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब यात्रा में भारत और सऊदी पक्षों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि आतंकवाद को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि यह मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।" बयान में कहा गया, "वे इस बात पर भी सहमत हुए कि किसी भी कारण से किसी भी आतंकवादी कृत्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद को किसी विशेष जाति, धर्म या संस्कृति से जोड़ने के किसी भी प्रयास को भी अस्वीकार कर दिया।" संयुक्त अरब अमीरात ने भी की कड़ी निंदा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्रालय ने भी मंगलवार को एक बयान में हमले की "कड़ी निंदा" की। वहां के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यूएई इन आपराधिक कृत्यों की कड़ी निंदा करता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन में सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने के उद्देश्य से हिंसा और आतंकवाद के सभी रूपों को स्थायी रूप से अस्वीकार करता है।" यूएई ने भारत सरकार और लोगों तथा इस जघन्य हमले के पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की और सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान दूसरी तरफ, पाकिस्तान अलग सुर अलाप रहा है। पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के करीबी और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि इस हमले से पाकिस्तान का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, "यह सब उनके ही घर में ही शुरू हुआ है। भारत के खिलाफ कथित राज्यों में क्रांति चल रही है। एक या दो नहीं, बल्कि दर्जनों चल रहे हैं। नगालैंड से कश्मीर, छत्तीसगढ़ में, मणिपुर में ऐसा हो रहा है। इन सभी स्थानों पर भारत सरकार के खिलाफ क्रांति हो रही है।" इससे पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने कुछ दिन पहले कश्मीर को पाकिस्तान की ‘गले की नस’ बताया था, जिस पर नयी दिल्ली की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी। जनरल मुनीर ने 15 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले प्रवासी पाकिस्तानी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है, यह हमारी गले की नस थी, यह हमारी गले की नस रहेगी और हम इसे नहीं भूलेंगे। हम अपने कश्मीरी भाइयों को उनके वीरतापूर्ण संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे।’’ अब सहमा पाकिस्तान इस हमले के बाद देश में जहां भारी गुस्सा और रोष है, वहीं केंद्र सरकार आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। आज शाम प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार आतंकियों के खात्मे के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकती है। इससे पाकिस्तान सहमा हुआ है। उसने सीमा पर अपनी वायुसेना को अलर्ट कर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने CCS की मीटिंग से पहले सेना के तीनों प्रमुखों के साथ करीब ढाई घंटे की बैठक की है। recent visitors 65

जन-सामान्य को जल के महत्व की दी जा रही है जानकारी, जागरूकता के साथ जल संरचनाओं की हो रही है सफाई

भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में जन-भागीदारी के साथ आम नागरिकों को जल के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। इसी के साथ जल संरचनाओं की सफाई कार्य में अधिक से अधिक जन-भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नन्हेश्वर धाम कुंड के आसपास साफ-सफाई खरगौन जिले में मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में विकासखंड भगवानपुरा के ग्राम नन्हेश्वर धाम में बने कुंड की गाद निकालने के लिये स्वच्छता अभियान चलाया गया है। जन-अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री विजय शर्मा ने बताया कि 30 जून तक चलने वाले अभियान में कुंड की गाद निकाल कर जल स्रोत की सफाई की जा रही है। सभी को जल को सहेजने की शपथ भी दिलाई गई। गोमुख से नदी का साफ-स्वच्छ निर्मल जल बहे यह सन्देश ग्रामीणों को दिया गया। जल स्त्रोतों के आसपास हैंडपम्प पर पानी के सॉफ्ट गड्डे भी बनाये जा रहे है। अभियान को इस तरह से नियोजित किया जा रहा है, कि इसमें अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जा सके। जल गंगा संवर्धन अभियान में संगोष्ठी श्योपुर जिले में कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। ग्राम पंचायत अगरा में जल गंगा संवर्धन पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जलाशयों की साफ-सफाई एवं गहरीकरण की चर्चा की गई। साथ ही जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। श्योपुर जिले में तालाबों, बावड़ियों और नहरों की साफ-सफाई को प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। अभियान में महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। जल स्त्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन कार्य रायसेन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल स्त्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य तेजी से किये जा रहे हैं। अभियान में जन-सामान्य को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर जल संरचनाओं के संरक्षण किये जाने की शपथ भी दिलाई जा रही है। बाड़ी जनपद के ग्रामों में स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा जल स्त्रोतों के आसपास साफ-सफाई की गई और ग्रामीणों को जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया गया। जिले के विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षकों द्वारा जल संरक्षण व जल संचयन हेतु शपथ दिलायी गई। शालाओं में “जल शपथ“ का आयोजन किया गया। नूरगंज विद्यालय में “जल ही जीवन है“ और “जल संरक्षण“ विषय पर स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा चित्र बनाकर नागरिकों को जल संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया गया। रिठौरा तालाब की सफाई का कार्य मुरैना जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में नदी-नालों की साफ-सफाई कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्राम पंचायत रिठौरा में बाबा वाला तालाब की साफ-सफाई का कार्य किया गया। यह कार्य जल संसाधन विभाग ने जन-भागीदारी से किया। विश्व पृथ्वी दिवस पर तालाब गहरीकरण से दिया जल संरक्षण का संदेश रतलाम जिले में जल गंगा सवर्धन अभियान में विश्व पृथ्वी दिवस पर जावरा में श्रीमती सरोज वेलफेयर सोसायटी ने ग्राम तालाब गहरीकरण का कार्य किया। जल गंगा संवर्धन अभियान में सरपंच श्रीमती तेजूबाई पटेल ने कहा कि जल ही जीवन है, हमें इसे बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। अभियान में ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान करते हुए तालाब गहरीकरण किया। अभियान में जन-सामान्य को जल चौपाल लगाकर पानी के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभ्रियान में किये जा रहे हैं विभिन्न कार्य उज्जैन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इसी कड़ी में उज्जैन तहसील की ग्राम पंचायत मंगरोला में हैंडपंप और कुंए के जल के पुनर्भरण के लिये समीप गड्डे का निर्माण किया गया। इसी प्रकार महिदपुर तहसील के ग्राम सरवनखेड़ा में स्थित आंगनवाडी भवन पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया गया। ग्राम पंचायत बरूखेड़ी में भी हैंडपंप के समीप सोक-पिट का निर्माण करवाया गया। खेत तालाब बना आय का जरिया नरसिंहपुर जिले के कई ऐसे किसान हैं, जो राज्य शासन की खेत-तालाब योजना का लाभ लेकर अपने खेत में तालाब बना रहे हैं और अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) से ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का जीवन बदल रहा है, जो जरूरत के समय रोजगार मिलने के साथ ही आजीविका के साधनों को भी मजबूत कर रहा है। ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में रोजगार के वैकल्पिक साधन भी निर्मित हो रहे हैं। जिले में किसानों को तालाबों के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के संरक्षण के बारे में शपथ दिलायी जा रही है। recent visitors 52

भारत ने अफगानिस्तान को 4.8 टन टीके भेजे, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मदद के लिए भारत का आभार व्यक्त किया

काबुल भारत ने अफगानिस्तान को 4.8 टन टीके दान किए। इन टीकों में रेबीज, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और इन्फ्लूएंजा से लड़ने के लिए टीके शामिल हैं। अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को, इस मदद के लिए भारत का आभार व्यक्त किया। मंत्रालय के बयान में कहा गया, "अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय को रेबीज, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और इन्फ्लूएंजा से निपटने में मदद करने के लिए भारत से टीकों की एक महत्वपूर्ण खेप मिली है।" इसमें कहा गया, "सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के नेतृत्व ने उदार समर्थन के लिए भारत को धन्यवाद दिया और इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे देश भर में हजारों लोगों की जान बच सकती है।" मंत्रालय ने आगे कहा कि टीकों के दान से अफगानिस्तान को मदद मिलेगी, जहां लंबे समय से अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के कारण जरूरी मेडिकल सप्लाई तक पहुंच सीमित बनी हुई है। जनवरी में, दुबई में विदेश सचिव विक्रम मिस्री की अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्तकी के साथ बैठक हुई थी। इस दौरान भारत ने इस्लामी राष्ट्र को मानवीय सहायता जारी रखने का वचन दिया, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में भौतिक सहायता और शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए सहायता शामिल थी। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, विदेश सचिव ने अफगान लोगों के साथ भारत की ऐतिहासिक मित्रता और दोनों देशों के बीच मजबूत लोगों के बीच संपर्क को रेखांकित किया। उन्होंने अफगान लोगों की विकास संबंधी जरूरतों को तत्काल पूरा करने के लिए भारत की तत्परता से अवगत कराया। अफगान मंत्री ने बैठक के दौरान अफगानिस्तान के लोगों के साथ संपर्क बनाए रखने और उन्हें समर्थन प्रदान करने के लिए भारतीय नेतृत्व की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। इस वर्ष की शुरुआत में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "विकास गतिविधियों की मौजूदा जरुरत को देखते हुए, यह फैसला लिया गया कि भारत चल रहे मानवीय सहायता कार्यक्रम के अलावा, निकट भविष्य में विकास परियोजनाओं में शामिल होने पर विचार करेगा।" विदेश मंत्रालय के अनुसार, जनवरी तक भारत ने अफगान लोगों की जरूरतों को तेजी से पूरा करते हुए पिछले कुछ वर्षों में 50,000 मीट्रिक टन गेहूं, 300 टन दवाइयां, 27 टन भूकंप राहत सहायता, 40,000 लीटर कीटनाशक, 100 मिलियन पोलियो खुराक, 1.5 मिलियन कोविड वैक्सीन खुराक, नशा मुक्ति कार्यक्रम के लिए 11,000 यूनिट स्वच्छता किट, 500 यूनिट सर्दियों के कपड़े और 1.2 टन स्टेशनरी किट सहित कई खेपें भेजी हैं। recent visitors 47

पहलगाम आतंकी हमले के बाद टूरिस्ट के लौटने में बढ़ोतरी हुई, 6 घंटे में 3337 तो सिर्फ फ्लाइट से लौटे

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बड़े आतंकी हमले टूरिस्ट का लौटना शुरू हो गया है। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर हवाई अड्‌डे से एक दिन पहले 10 हजार लोगों ने आवाजाही की थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद टूरिस्ट के लौटने में बढ़ोतरी हुई है। नागर विमान मंत्री राममोहन नायडू के अनुसार सिर्फ छह घंटे में 3,337 यात्री श्रीनगर हवाई अड्‌डे से अपने गंतव्यों को रवाना हुए हैं। पहलगाम आतंकी हमले में कुल 28 टूरिस्ट की मौत हुई है। इसमें सर्वाधिक पांच लोग महराष्ट्र के हैं। दूरिस्ट के जम्मू-कश्मीर से लौटने पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है। घाटी से मेहमानों को जाता देखना दुखद है। पर्यटकों को इस तरह वापस जाते देख मेरा दिल टूट रहा लेकिन हम यह भी अच्छी तरह समझते हैं कि लोग क्यों जाना चाहते हैं। हम डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था करने के लिए काम कर रहे हैं। टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका पहलगाम आतंकी हमले के बाद होटल इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के नासिर शाह ने बताया कि मंगलवार रात से ही टूरिस्ट होटलों की एडवांस बुकिंग कैंसल करा रहे हैं। होटलों और टूर ऑपरेटरों के पास कैंसल कराने वाले फोन कॉल का तांता लगा है। उन्होंने कहा कि समर सीजन में ऐसे हालात को काफी नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि गुलमर्ग के खैबर में एक रात का किराया 70,000 रुपये और श्रीनगर की फाइव स्टार प्रॉपर्टी में वन नाइट स्टे की कीमत 30,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच है। कैंसल होने से होटल संचालकों का सीधा नुकसान हो रहा है। टूरिस्टों के अचानक लौटने से भी होटल इंडस्ट्री की टेंशन बढ़ गई है। लगातार रद्द हो रही हैं बुकिंग श्रीनगर के एक ट्रैवल ऑपरेटर ऐजाज अली ने कहा कि हम जानते हैं कि कश्मीर में पर्यटक सुरक्षित हैं, लेकिन यहां ऐसी घटना होने के बाद, उनसे यहीं रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। लगातार बुकिंग रद्द की जा रही है, करीब 80 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगले एक महीने तक के पैकेज रद्द किये जा रहे हैं। अली ने कहा कि बरसों की मेहनत पर पानी फिर गया। पर्यटकों को कश्मीर फिर से लाने के लिए बहुत कुछ करना होगा। recent visitors 41