मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- वर्तमान और भविष्य की तकनीक का आधार आईटी है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान और भविष्य की तकनीक का आधार आईटी है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करते हुए समय के साथ चलने के लिए आईटी सेक्टर में निवेश और गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद पहली सेक्टर आधारित कॉन्क्लेव आईटी पर केन्द्रित की जा रही है। प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में आईटी इंडस्ट्री का पर्याप्त आधार विद्यमान है। राज्य सरकार आवश्यक सहयोग और समर्थन उपलब्ध कराकर प्रदेश की आईटी इंडस्ट्री को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर तक व्यापक स्वरूप देने की इच्छुक है। इंदौर में 27 अप्रैल को होने वाली "टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव" इस दिशा में निश्चित ही परिणाममूलक रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में होने वाली आईटी कॉन्क्लेव के संबंध में विभिन्न जिलों के उद्योगपतियों से समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संवाद कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद में उद्योगपतियों ने आईटी पार्क के विस्तार की आवश्यकता बताई। साथ ही आईटी के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों ने दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा और औद्योगिक गतिविधियों में समन्वय, स्टार्ट-अप में उद्यमिता की संस्कृति को विकसित करने, प्राकृतिक गैस पर टैक्स कम करने और प्रदेश में स्टार्ट-अप कम्युनिटी के मध्य बेहतर समन्वय संबंधी चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद में वॉक-टू-वर्क सुविधा के साथ आईटी पार्क विकसित करने, प्रदेश में डिजिटल इकोनॉमी मिशन लागू करने और एआई आधारित गतिविधियों की अन्य उद्योगों में स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में कार्य करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों की पहल और नवाचार की सराहना करते हुए उन्हें गतिविधियों के विस्तार के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संवाद राज्य शासन और आईटी के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों के बीच मजबूत रिश्तों का आधार बनेगा और सबके सहयोग से मध्यप्रदेश आईटी सेक्टर में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर, ग्वालियर, भोपाल और इंदौर में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न उद्योगपतियों से संवाद किया। जबलपुर के श्री चंद्रेश वीरा प्रेम संस इंटरप्राईजेस और श्री अनुराग श्रीखंडे इंटेनिक्स प्रायवेट लिमिटेड से चर्चा की। ग्वालियर के श्री धर्मेन्द्र कुमार यादव स्मार्ट कंट्रोल इंडिया लिमिटेड, श्री अनुराग श्रीवास्तव आईआईआईटीएम, श्री राजेश खन्ना एसआरएफ लिमिटेड, श्री मुकुल चतुर्वेदी सूर्या रोशनी लिमिटेड और श्री कृष्णकांत चतुर्वेदी कोमोनिफाय वेंचर प्रायवेट लिमिटेड से चर्चा की। भोपाल के श्री मितेश लोकवानी एचएलबीएस, श्री सारंग वर्मा एपोंइटी और श्री अभिषेक गुप्ता वी विन से चर्चा की। इंदौर के श्री संजीव अग्रवाल इम्पेटस, श्री नरेंद्र सेन रेकबैंक, श्री धर्मेंद्र जैन यश टेक्नोलॉजी, सुश्री शानू मेहता एमएमसी कोन्वेर्टर और श्री आदित्य शास्त्री डेटा प्योर से चर्चा की। उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनकी कम्पनियों के कार्यों, निवेश, रोजगार की जानकारी से अवगत कराया। आईटी और संबंधित क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने के संबंध में सुझाव भी दिए। अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने 27 अप्रैल को आयोजित "टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव" के कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीसीसी, ड्रोन, एवीजीसी और सेमीकॉन नीति के संबंध में चार राउंड टेबल मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत गठित सलाहकार बोर्ड के सदस्यों से वीसी के माध्यम से चर्चा की जाएगी। मुख्य कार्यक्रम में टेक डेस्टिनेशन मध्यप्रदेश की फिल्म प्रस्तुति, विभिन्न इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में नवीन स्थापित सेन्ट्रल ऑफ एक्सीलेंस और इन्क्यूबेशन सेन्टर का उद्घाटन भी किया जाएगा। चिहिन्त इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किए जाएंगे एवं आवंटन-पत्र भी सौंपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की चार नीतियों जीसीसी नीति, ड्रोन नीति, सेमीकंडक्टर एवं एवीजीसी नीतियों की गाईड लाइंस भी जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में आईटी एवं संबंधित क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों, निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों का आयोजन भी किया जाएगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, एमडी एमपीएसईडीसी श्री आशीष वशिष्ठ, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमपीएसईडीसी श्री गुरू प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 47

मुख्यमंत्री ने की पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा योजना की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हर जीवन अमूल्य है, आपातकालीन चिकित्सकीय परिस्थितियों में व्यक्ति को उन्नत स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सुविधा प्रदेश में आरंभ की गई है। इस सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार और जिला स्तर पर बेहतर विभागीय समन्वय से क्रियान्वयन आवश्यक है। ऐसे क्षेत्रों में जहां उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां पीपीपी मोड पर चिकित्सालय बनाने के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा योजना की वृहद समीक्षा की। उन्होंने योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए गृह विभाग, स्वास्थ्य विभाग और विमानन विभाग की समन्वय पूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर अमूल्य जीवन का संरक्षण किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपातकालीन स्थितियों में जैसे सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा में, ट्रॉमा यूनिट और प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम को घटना स्थल तक एयर एम्बुलेंस द्वारा पहुंचाया जाना चाहिए। इसके साथ ही एयर एम्बुलेंस सेवा के बेहतर उपयोग के लिए सेंसिटिव क्षेत्रों में प्राथमिकता से आवश्यक लैंडिंग अधोसंरचना का विकास करने पर उन्होंने जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे क्षेत्र जहाँ सड़क दुर्घटनाएं अधिक होती हैं उन्हें चिन्हित करने और इन क्षेत्रों से ट्रॉमा सेंटर तक जल्दी पहुंचाने के लिए सुनियोजित योजना पर कार्य करने के निर्देश दिये, ताकि शीघ्रता से पीड़ित को चिकित्सकीय सेवाएं मुहैया कराई जा सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिविल सर्जन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कलेक्टर, और पुलिस प्रशासन को सतत संपर्क में रहने और आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिला स्तर पर योजना के प्रावधानों और सेवाओं के प्रति विभागीय अधिकारियों को जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बैठक में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं और आपदाओं में गोल्डन ऑवर ट्रीटमेंट अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए भारत सरकार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से आवश्यक सेवाओं के प्रावधान किए जा रहे हैं। मंत्रालय से संपर्क कर सेवाओं के बेहतर उपयोग और प्रबंधन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव गृह श्री जे. एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री संदीप यादव, आयुक्त विमानन श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अब तक 61 रोगियों को मिली पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा का लाभ बैठक में बताया गया कि अब तक 61 मरीजों को पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा का लाभ प्राप्त हुआ है। इनमें से 52 मामलों में निःशुल्क सेवा प्रदान की गई है, जबकि 9 मामलों में सशुल्क सेवा दी गई। इन 61 मामलों में, रीवा जिले से 19 रोगियों का एयर एम्बुलेंस से परिवहन किया गया, जिनमें से 17 को निःशुल्क सेवा मिली। इसके अलावा जबलपुर से 11, भोपाल से 8, छतरपुर से 6, ग्वालियर और दिल्ली से 3-3 मरीजों को एयर एम्बुलेंस सेवा प्राप्त हुई। बालाघाट, इंदौर, और पन्ना से 2-2 रोगियों को और बैतूल, कटनी, नरसिंहपुर, सतना और उज्जैन से 1-1 मरीजों को यह सेवा प्राप्त हुई। इन 61 मामलों में सबसे अधिक 14 प्रकरण हृदय रोग से संबंधित थे। इसके अतिरिक्त श्वसन रोग के 10, सड़क दुर्घटनाओं के 7, और हेड इंजरी एवं स्पाइनल इंजरी के 6 मामले रहे। इसके अलावा, लिवर रोग और अंग दान से जुड़े 3-3, किडनी रोग और बर्न के 2-2 मरीजों को एयर एम्बुलेंस सेवा से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुँचाया गया। अन्य 14 गंभीर प्रकरणों में त्वरित रेफरल की आवश्यकता थी। पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से प्रदेश में कहीं भी चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न होने पर, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक पहुंचकर, उन्नत आपातकालीन चिकित्सा सेवा द्वारा मरीजों को स्थिर कर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक एयर लिफ्ट किया जाता है। सेवा के तहत 1 हेली एम्बुलेंस और 1 फिक्स्ड विंग कन्वर्टेड फ्लाइंग एम्बुलेंस का संचालन किया जा रहा है। इसमें उच्च स्तरीय प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ की टीम हमेशा तैनात रहती है। एयर एम्बुलेंस सेवा पात्रता सड़क एवं औद्योगिक दुर्घटना अथवा प्राकृतिक आपदा में पीड़ित व्यक्तियों को राज्य में एवं बाहर शासकीय या निजी चिकित्सालय में निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदाय कर पहुँचाया जाता है। आयुष्मान कार्डधारी को राज्य में और बाहर शासकीय एवं आयुष्मान संबद्ध अस्पतालों में निःशुल्क सेवा उपलब्ध कराई जाती है। अन्य हितग्राही जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उनके लिए राज्य में शासकीय अस्पताल में निःशुल्क और राज्य के बाहर अनुबंधित दर पर सशुल्क परिवहन की व्यवस्था है।   recent visitors 53

पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी चेन्‍नई 154 रन पर सिमटी, हैदराबाद को मिला 155 रन का टारगेट

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के 43वें मुकाबले में आज दो वर्ल्‍ड कप विनर कप्‍तान आमने-सामने हैं। चेन्‍नई के एमए चिदम्बरम स्टेडियम में चेन्‍नई सुपर किंग्‍स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच टक्‍कर हों रही है। सनराइजर्स हैदराबाद के कप्‍तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया है। पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी चेन्‍नई 154 रन पर सिमट गई। दोनों ही टीमों ने मौजूदा सीजन में 8-8 मैच खेले हैं और 2-2 में जीत दर्ज की है। प्‍वाइंट्स टेबल में चेन्‍नई 10वें और हैदराबाद 9वें पायदान पर है। एक और हार चेन्‍नई और हैदराबाद की प्‍लेऑफ की उम्‍मीदों को धराशाई कर सकती है। चेन्‍नई अपने घर पर कोलकाता, दिल्‍ली और आरसीबी से हार चुकी है। ऐसे में पैट कमिंस भी चेन्‍नई को चेपॉक में धूल चटाना चाहेंगे। 54 रन पर सिमटी चेन्‍नई आखिरी ओवर में दीपक हुड्ड कैच आउट हुए। उन्‍होंने 22 रन बनाए। 6 साल बाद चेपॉक में चेन्‍नई ऑल आउट हुए। टीम ने 20 ओवर में 154 रन बनाए। ऐसे में हैदराबाद को जीत के लए 155 रन चाहिए हैं। recent visitors 47

वक्फ कानून पर नहीं लगा सकते पूरी तरह रोक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि इस कानून पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है। 1,332 पन्नों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में सरकार ने विवादास्पद कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536) से अधिक की वृद्धि हुई है। हलफनामे में कहा गया है, "मुगल काल से ठीक पहले, आजादी से पहले और आजादी के बाद के दौर में भारत में कुल 18,29,163.896 एकड़ जमीन वक्फ की थी।" इसमें निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण करने के लिए पहले के प्रावधानों के "दुरुपयोग" का दावा किया गया है। हलफनामा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव शेरशा सी शेख मोहिद्दीन द्वारा दायर किया गया था। इसमें आगे कहा गया, "कानून में यह तय स्थिति है कि संवैधानिक अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगाएंगी और मामले पर अंतिम रूप से निर्णय लेंगी। संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।'' केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि वक्फ जैसी धार्मिक व्यवस्था का प्रबंधन किया जाए और उसमें जताया गया भरोसा कायम रहे। वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा, ''जब वैधता की परिकल्पना की जाती है तो प्रतिकूल परिणामों के बारे में जाने बिना ही पूरी तरह रोक लगाना अनुचित है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वैध, विधायी शक्ति का उचित प्रयोग है। केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विधायी क्षमता और अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकता है। recent visitors 58

पहलगाम आतंकी हमला: ताशकंद समझौता रद्द कर अपनी ही कब्र खोदेगा पाक, क्या है हाजी पीर दर्रा

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से रिश्ते तल्ख हो गए हैं। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त ऐक्शन लेते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है और बॉर्डर सील करने समेत कई अन्य कदम उठाए हैं। इससे पड़ोसी देश बौखला उठा है। पाकिस्तान ने शिमला समझौता निलंबित करने का फैसला किया है और ताशकंद समझौते को भी रद्द करने की सोच रहा है। ताशकंद समझौता 10 जनवरी, 1966 को उज्बेकिस्तान में हुआ था। 1965 की जंग के बाद सोवियत संघ की मौजूदगी में यह समझौता हुआ था, जिसमें भारत की तरफ से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान की तरफ से तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। इसी समझौते के तहत भारत ने हाजी पीर दर्रा पर से अपना कब्जा हटा लिया था और 5 अगस्त 1965 से पहले की यथास्थिति बहाल करने पर तैयार हो गया था। इसे 60 साल पहले भारत की एक बड़ी चूक कहा जाता है। अब जब फिर से पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान की नकेल कसना चाह रहा है तो हाजी पीर दर्रा की बात अनायास सामने आ जा रही है क्योंकि यह वही दर्रा है, जहां से पाकिस्तान भारत में अपनी आतंकियों की सप्लाई करता है। अगर 60 साल पहले भारत ने वह चूक नहीं की होती, तो आज कश्मीर में पाकिस्तान आतंक न फैला रहा होता। क्या है हाजी पीर दर्रा? हाजी पीर दर्रा हिमालय पर्वतमाला की पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है। यह जम्मू-कश्मीर स्थित पूंछ को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट से जोड़ता है। 2,637 मीटर यानी 8,652 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित यह रणनीतिक दर्रा न केवल पूरे पाक अधिकृत कश्मीर घाटी पर नजर रखता है बल्कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ का मुख्य मार्ग भी यही है। अगर भारत ने 60 साल पहले इस दर्रे को पाकिस्तान को नहीं सौंपा होता तो पाक आतंकियों की कश्मीर में सप्लाई रोक सकता था और इस्लामाबाद की नकेल भी कस सकता था। इसके अलावा इस दर्रे पर भारत का कब्जा होने से पूंछ और उरी के बीच की दूरी भी 282 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 56 किलोमीटर रह जाती। देश का बंटवारा होने से पहले जम्मू घाटी और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इसी दर्रे से होकर गुजरती थी लेकिन 1948 में पाकिस्तान द्वारा PoK और हाजी पीर दर्रे पर कब्जा कर लेने के बाद से यह रास्ता अनुपयोगी हो गया है। पूरी रात बारिश के बीच की थी चढ़ाई 1965 के भारत-पाक जंग में भारतीय सेना ने हाजी पीर दर्रे के पास स्थित तीन ऊंची पहाड़ियों पूर्व में बेदोरी (3760 मीटर), पश्चिम में सांक (2895 मीटर) और दक्षिण-पश्चिम में लेडवाली गली (3140 मीटर) पर कब्जा कर लिया था, जो इस दर्रे से मात्र 10 से 14 किसोमीटर की दूरी पर था। 27 अगस्त 1965 को मेजर रणजीत सिंह दयाल ने पूरी रात बारिश होने के बावजूद भारी बाधाओं को पार करते हुए तीव्र पहाड़ी पर चढ़ाई की थी और 28 अगस्त, 1965 को इस रणनीतिक दर्रे पर कब्जा कर लिया था। 29 अगस्त को पाकिस्तानी सेना ने फिर से इसे अपने कब्जे में करने की कोशिश की लेकिन भारतीय जवानों ने पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया था। 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग लौटाना पड़ेगा हालांकि, जब 10 जनवरी 1966 को ताशकंद में भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ तो भारत ने हाजी पीर दर्के पर से अपना कब्जा छोड़ दिया और समझौते के मुताबिक 5 अगस्त, 1965 की यथास्थिति पर लौट गया। इस तरह एक बार फिर इस रणनीतिक दर्रे पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया। भारत ने उस जंग में पाकिस्तान के 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग पर भी कब्जा कर लिया था। इसके तहत सियालकोट, लाहौर और कश्मीर घाटी के उपजाऊ क्षेत्र और हाजी पीर दर्रा शामिल था लेकिन सब कुछ लौटाना पड़ गया। अगर पाकिस्तान ने ताशकंद समझौता तोड़ा तो एक बार फिर इस पर भारत का कब्जा हो जाएगा। recent visitors 58

पाकिस्तानी संसद ने भारत के खिलाफ सर्वसम्मति से घातक हमले को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया

इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आने से पड़ोसी देश तिलमिला गया है। संसद में पाकिस्तान भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहा है। शुक्रवार को पाकिस्तानी संसद ने भारत के खिलाफ सर्वसम्मति से घातक हमले को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। उसने कहा कि पाकिस्तान अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पहलगाम हमले में आतंकियों ने 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा है। पाकिस्तानी डिप्टी पीएम इशाक डार ने संसद में प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान जल आतंकवाद या सैन्य उकसावे सहित किसी भी आक्रमण के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। प्रस्ताव के अनुसार, संसद ने इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों की हत्या पाकिस्तान के अपनाए गए मूल्यों के विपरीत है। कहा गया, ''यह प्रस्ताव जम्मू और कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले से पाकिस्तान को जोड़ने के सभी तुच्छ और निराधार प्रयासों को भी खारिज करता है।'' प्रस्ताव में पाकिस्तान ने भारत पर उसे बदनाम करने का आरोप लगाया। संसद ने कहा, ''पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए भारत सरकार द्वारा सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण अभियान की निंदा की जाती है, जो संकीर्ण राजनीतिक लक्ष्य के लिए आतंकवाद के मुद्दे का शोषण करने के परिचित पैटर्न पर चल रहा है।'' साथ ही, पाकिस्तान ने भारत की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के फैसले की भी निंदा की और फिर से दोहराया कि यह साफ तरीके से युद्ध की कार्रवाई के बराबर है। नई दिल्ली ने हमले के बाद बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। भारत ने कार्रवाई करते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, पाक से लगने वाली अटारी बॉर्डर को भी बंद कर दिया और राजनयिक संबंधों को भी कम कर दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी अहम बैठक की और भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस को बंद करने समेत कई फैसले लिए। recent visitors 47

सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का लिया फैसला

नई दिल्ली चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच आईपीएल 2025 का 43वां मुकाबला शुक्रवार को एम चिदंबरम स्टेडियम में खेला जा रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है।चेन्नई ने दो बदलाव किए हैं। रचिन और शंकर को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जबकि ब्रेविस और हुड्डा को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली है। चेन्नई ने किए दो बदलाव सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने इंडियन प्रीमियर लीग में शुक्रवार को चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। सुपरकिंग्स ने दो बदलाव करते हुए रचिन रविंद्र और विजय शंकर की जगह डेवाल्ड ब्रेविस और दीपक हुड्डा को एकादश में शामिल किया है। सनराइजर्स हैदराबाद प्लेइंग इलेवन सनराइजर्स हैदराबाद (प्लेइंग इलेवन): अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, नितीश कुमार रेड्डी, हेनरिक क्लासेन (विकेटकीपर), अनिकेत वर्मा, कामिंडु मेंडिस, पैट कमिंस (कप्तान), हर्षल पटेल, जयदेव उनादकट, जीशान अंसारी, मोहम्मद शमी चेन्नई सुपर किंग्स प्लेइंग इलेवन चेन्नई सुपर किंग्स (प्लेइंग इलेवन): शेख रशीद, आयुष म्हात्रे, सैम करन, रवींद्र जड़ेजा, देवाल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे, एमएस धोनी (विकेटकीपर/कप्तान), दीपक हुडा, नूर अहमद, खलील अहमद, मथीशा पथिराना सनराइजर्स हैदराबाद ने जीता टॉस सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। recent visitors 60