पाकिस्तान के ‘आसिम मुनीर’ का बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है: अनिल गौर

पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के सुरक्षा से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, इस कायराना हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ तो है ही। मुनीर के बयान को गंभीरता से लेना चाहिए था- अनिल गौर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल 'आसिम मुनीर' का वह बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है। क्या हमने उस बयान को हल्के में लिया है। ऐसे कई सवाल उठना लाजिमी है। जनरल मुनीर ने 144 घंटे पहले इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन 2025 में कहा था, 'कश्मीर पर हमारा (पाकिस्तानी सेना) और सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हम इसे नहीं भूलेंगे। हम भारत के कब्जे के खिलाफ संघर्ष करने वाले अपने कश्मीरी भाइयों को नहीं छोड़ेंगे। बतौर सुरक्षा विशेष गौर, यह सामान्य बयान नहीं था। इसकी गंभीरता को समझना चाहिए था। जम्मू कश्मीर में बढ़ानी चाहिए थी सुरक्षा- अनिल गौर कैप्टन (रिटायर्ड) अनिल गौर ने कहा, मुनीर के बयान के बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए थी। हालांकि खुफिया एजेंसियों ने अपने स्तर पर कुछ न कुछ किया ही होगा। पाकिस्तानी सेना के चीफ मुनीर ने जो कुछ कहा था, उसका असर पहलगाम के आतंकी हमले के तौर पर दिख रहा है। मुनीर ने बयान से स्पष्ट था कि कश्मीर में हमारे बंदे हैं। पहलगाम में आतंकियों ने टारगेट भी हिंदुओं को किया है। गोली मारने से पहले लोगों का धर्म पूछा गया था। अनिल गौर बताते हैं, जम्मू और कश्मीर में पर्यटन के लिए आने वाले अधिकांश लोगों में तो हिंदू ही होते हैं। आतंकी संगठन चाहते हैं जम्मू-कश्मीर में न आएं पर्यटक यह हमला, कुछ अन्य बातों की तरफ भी इशारा करता है। जैसे आतंकियों को अब पहले के मुकाबले लोकल सपोर्ट नहीं मिल पा रही है। दूसरा, आतंकियों की नई भर्ती अब तकरीबन बंद हो चुकी है। उन्हें अब लोकल सपोर्ट भी नहीं मिल रही है। वे पहाड़ों पर छिपे हैं। इस हमले का मकसद वहां आने वाले हिंदुओं में दहशत फैलाना है। आतंकी संगठन चाहते हैं कि जम्मू और कश्मीर में पर्यटक न आएं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो बिजनेस प्रभावित होगा। जब बिजनेस प्रभावित होगा तो सरकार की विकास नीति भी पटरी से उतर सकती है। आतंकी यह संदेश भी देना चाह है कि उन्हें लोकल सपोर्ट नहीं मिलेगी तो ऐसे हमले आगे भी देखने को मिल सकते हैं। recent visitors 39

पहलगाम आतंकी हमले में 26 टूरिस्ट की मौत, नाम पूछकर मारी गोली, NIA करेगी जांच

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले 26 टूरिस्ट की मौत हुई है। मृतकों में सभी पुरुष हैं। आतंकियों के हमले का निशाना बने पर्यटकों में दो विदेशी नागरिक हैं। बड़े आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निर्देश मिलने के बाद गृह मंत्री नई दिल्ली से पहलगाम के लिए रवाना हुए हैं। आतंकी हमले में काफी टूरिस्ट घायल हुए हैं हालांकि अभी तक दो टूरिस्ट की मौत की पुष्टि हुई है। नई दिल्ली में हाईलेवल बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर में भी उच्चस्तरीय बैठक कर सकते हैं। पीएम मोदी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया है। किसी को नहीं छोड़ेंगे: शाह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं। इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई करेंगे। अमित शाह ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को घटना के बारे में जानकारी दी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी एजेंसियों के साथ तत्काल सुरक्षा समीक्षा बैठक करने के लिए जल्द ही श्रीनगर के लिए रवाना होऊँगा।   बैसरन वैली में हुआ आतंकी हमला पहलगाम यह आतंकी हमला मशहूर बेताब वैली से 10 किमी दूर स्थित बैसरन वैली में उस वक्त हुआ जब टूरिस्ट का एक ग्रुप घास पर घुड़सवारी का आनंद ले रहा है। आतंकी हमले के बाद सामने आए वीडियो में इस बात की पुष्टि हुई है कि हथियारबंद हमलावरों ने नाम पूछकर गोली मारी। हमले के बाद सामने आए वीडियो में आतंकवादियों की क्रूरता बयां हुई है। महिला ने वीडियो में बताया है कि महिला ने बताया कि आतंकियों ने नाम पूछा और गोली मार दी। इसी वीडियो में एक और महिला महिला बुरी तरह रो रही हैं और ये कह रही हैं कि भगवान के लिए मेरे पति को बचा लो। वीडियो में एक शख्स कहता है कि आप टेंशन मत लो, आप यहां पर रहो। ठीक है ठीक है हम बचा देंगे। मैं आ रहा हूं।   कुछ साल पहले बना था टूरिस्ट प्वाइंट पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर के समर्थित टीआरएफ  संगठन ने ली है। यह संगठन लश्कर ए तैयबा का हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसा ही संगठन है। जम्मू कश्मीर इसके सबूत मिले हैं कि इस आतंकी संगठन के पीछे लश्कर ए तैयबा ही है। आतंकियों ने दूसरे राज्यों के जिन टूरिस्ट पर हमला किया वह बैसरन घाटी का टूरिस्ट प्वाइंट चार-पांच साल पहले ही बना था। घाटी में माहौल बदलने के बाद बड़ी संख्या में टूरिस्ट इस प्वाइंट पर पहुंच रहे थे। पहलगाम के इस आतंकी हमले में सामने आया है कि कुछ आतंकी पुलिस की वर्दी में थे। इसलिए वे पर्यटकों के पास तक आसानी से पहुंच गए। पहलगाम हमले की चौतरफा निंदा पहलगाम के बैसरन टूरिस्ट प्वाइंट पर पर्यटकों के हमले को लेकर जहां केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है ताे वहीं दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी चीफ से बात की है। जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने इस कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया है। घायलों को एयरलिफ्ट किए जाने की संभावना पर भी विचार हो रहा है। recent visitors 40

भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा, इसके खतरनाक परिणाम होंगे, लोग बेरोजगार हो सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे आविष्कार से तमाम सुविधाएं मिल रही हैं तो रोजगार से जुड़ी चिंताएं भी लोगों को सता रही हैं। इस चिंता में अब सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हो गया है। अदालत ने मंगलवार को एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा। इसके खतरनाक परिणाम होंगे और बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हो सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसमें मांग की गई थी कि सरकार को इलेक्ट्रिकल वीकल्स की खरीद और उनके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीति बनाने को को कहा जाए। इसी दौरान अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण ड्राइवरों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। अदालत ने कहा, 'हमारी चिंता यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इन ड्राइवरों का रोजगार नहीं जाना चाहिए। भारत में ड्राइवर की नौकरी भी रोजगार का एक बड़ा माध्यम है।' मजाकिया अंदाज में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एआई से तो वकीलों को भी टक्कर मिल रही है। ऐसे टूल आ गए हैं, जिनसे आप कोई भी कानूनी राय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बढ़ती हुई तकनीक है। कुछ महीनों में ही कोई एक अच्छा मॉड्यूल आ जाता है। फिलहाल हम देख रहे हैं कि AI आधारित एडवोकेट टूल हैं। अमेरिका में तो इनका खूब इस्तेमाल हो रहा है। हमें भी वकीलों को लेकर चिंता होती है। बता दें कि भारत में भी बड़े-बड़े उद्योगपति इसे लेकर चिंता जताते रहे हैं। कॉन्टेंट राइटिंग, कंसल्टेंसी समेत कई ऐसे बिजनेस हैं, जिन पर AI के चलते विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इलेक्ट्रिक कारों की खरीद की नीति को लेकर दायर पीआईएल के लिए प्रशांत भूषण पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिकल वीकल्स को तेजी से बढ़ावा देना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 तो भारत के ही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी मांग है कि सरकार खुद ऐसी नीति लागू करे। उन्होंने कहा कि सरकार यदि आगे नहीं बढ़ेगी तो फिर दूसरे विभाग कैसे आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को बेसिक इन्फ्रा मुहैया कराना चाहिए। प्रशांत भूषण ने कहा कि 400 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक वीकल्स की चार्जिंग सेंटर मिलते हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हमें कुछ समय दिया जाए। फिर हम बताएंगे कि आखिर सरकार की इसे लेकर क्या नीति है। अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है। recent visitors 45

कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा, सुप्रीम कोर्ट भड़का

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के जरिए मांगी गई राहत को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने मंगलवार को वकील पर याचिकाकर्ता के रूप में याचिका दायर करने के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगा दया और कहा कि उसने कोर्ट का माहौल खराब किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वकील संदीप टोडी को चार सप्ताह का समय दिया है। इस समयसीमा के भीतर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के खातों में राशि जमा करने को कहा है। साथ ही, यह पता लगाने के लिए 6 सप्ताह बाद याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया कि क्या पैसा जमा किया गया था। जस्टिस नाथ ने कहा, ‘आपने इस अदालत का माहौल खराब कर दिया है। कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा।’ संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारात्मक तरीकों के अधिकार की गारंटी देता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। पीठ ने कहा, ‘अगर हम याचिका को साधारण तरीके से वापस लेने की अनुमति देते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा।’ याचिका में क्या रखी गई थी मांग पीठ ने वकील पर जुर्माना लगाते हुए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी। वकील की याचिका में पारिवारिक विवाद में एक व्यक्ति को दी गई राहत पर रोक लगाने की मांग की गई थी। बीते 25 मार्च को दायर याचिका में कुटुंब न्यायालय, मुंबई के 25 सितंबर 2019 के आदेश को चुनौती दी गई। इसके मद्देनजर वर्तमान प्रतिवादी संख्या 4 (नेहा टोडी जिन्हें नेहा सीताराम अग्रवाल के नाम से भी जाना जाता है) के पक्ष में दी गई सभी राहतों पर एकपक्षीय रोक लगाने का आदेश देने की मांग रखी गई। याचिका में केंद्र, मुंबई की एक कुटुंब अदालत और बंबई उच्च न्यायालय को प्रतिवादी बनाया गया है। recent visitors 48

गर्मी से बच्चों को मिली राहत, 15 जून तक अवकाश घोषित, सरकार ने घोषित की ग्रीष्मकालीन छुट्टी

रायपुर प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों में ग्रीष्कालीन अवकाश की छुट्टी देने का फैसला लिया है। अब 25 अप्रैल 2025 से 15 जून 2025 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। पहले ये ग्रीष्मकालीन अवकाश एक मई से घोषित किया जाता रहा है। गर्मी के कारण छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने पांच दिन पहले ही छुट्टी घोषित करने का आदेश जारी किया है। राज्य सरकार का ये निर्णय प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों के लिए लागू होगा। हालांकि ये अवकाश केवल बच्चों के लिए है। शिक्षकों को अभी भी स्कूल में उपस्थिति देनी होगी। बतादें कि रायपुर में अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। गर्म हवा के थपेड़ों से हर कोई बेहाल है। इस निर्णय से प्रदेश के 60 लाख बच्चों ने राहत की सांस ली है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि एकल पाली वाले स्कूल सुबह सात से 11 बजे तक संचालित हो रहे हैं, लेकिन दो पालियों वाले स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई सुबह सात से 11 बजे तक और हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी की कक्षाएं 11 बजे से दोपहर दो बजे तक चल रही थीं। इससे लगभग एक हजार स्कूलों के करीब पांच लाख छात्रों को लू के बीच स्कूल जाना पड़ रहा था। नईदुनिया की चेतावनी और जनहित में की गई रिपोर्टिंग का असर साफ नजर आया। जब सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए राहत भरा निर्णय लिया। अब छात्र न केवल गर्मी से बच सकेंगे, बल्कि इस अवकाश के दौरान घर पर रहकर अपने मनपसंद रचनात्मक कार्यों में भी समय बिता सकेंगे। मुख्यमंत्री ने बच्चों को किया सतर्क,कहा- आनंद से मनाएं छुट्टी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसलिए सभी शासकीय एवं गैर शासकीय स्कूलों में 25 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। सभी बच्चों से आग्रह है कि वे तेज धूप से बचें, खूब पानी पिएं, घर पर रहें और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लें और छुट्टियों का आनंद लें बच्चे।” बता दें कि छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गर्मी की छुट्टियों की मांग की थी। संगठन ने कहा था कि बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है और ऐसे मौसम में स्कूल संचालन खतरनाक साबित हो सकता है।   recent visitors 42

प्रदर्शनकारी शिक्षकों से बोलीं ममता बनर्जी, शिक्षकों से स्कूलों में लौटने का आग्रह किया, वेतन की व्यवस्था हम करेंगे

कोलकाता पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती विवाद बढ़ता ही जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब 26 हजार शिक्षक और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द हो गई है। इसके बाद शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जीन ने शिक्षकों से स्कूलों में लौटने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके वेतन की भी व्यवस्था करेगी। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अपनी नौकरी गंवा चुके हजारों शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। साल्ट लेक में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) मुख्यालय के बाहर मंगलवार को उनका प्रदर्शन जारी है। ममता बनर्जी ने कहा, “आपको इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि कौन दागी है और कौन नहीं। आपको केवल इस बात की चिंता करने की जरूरत है कि क्या आपके पास नौकरी है या नहीं और क्या आपको समय पर वेतन मिल रहा है या नहीं। दागी और बेदाग शिक्षकों की पहचान करने वाली सूची सरकार और अदालतों के पास है।’ बनर्जी ने मिदनापुर में एक प्रशासनिक कार्यक्रम में कहा, ‘हम आश्वासन देते हैं कि आपकी नौकरी अभी सुरक्षित है और आपको आपका वेतन मिलेगा। कृपया अपने स्कूलों में वापस जाएं और कक्षाएं फिर से शुरू करें। मैंने कल रात से कई बार इस बारे में बात की है। हम आपके साथ हैं।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकरी गंवाने वाले ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों के लिए एक पुनर्विचार याचिका भी उच्चतम न्यायालय में दायर की जाएगी और “तब तक हम पर अपना विश्वास बनाए रखें”। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह मई के पहले सप्ताह में मुर्शिदाबाद के अशांत क्षेत्रों का दौरा करेंगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक तरफ शिक्षकों का प्रदर्शन चल रहा है तो दूसरी तरफ मुर्शिदाबाद के दंगों को लेकर भी विपक्षी ममता सरकार को घेर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी ही कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रही है। वक्फ कानून को लेकर प्रदर्शन के बाद मुर्शिदाबाद में हुए दंगों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी। recent visitors 30

भारत की विकास क्षमता को विश्व बैंक और आईएमएफ संस्थाओं ने स्वीकार किया: मंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत की विकास क्षमता को विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सीतारमण ने कहा, "जब हम कहते हैं कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और जब आईएमएफ या विश्व बैंक यह मानते हैं कि भारत अपनी विकास क्षमता के कारण नकारात्मक या लगभग सकारात्मक क्षेत्र में चल रहे विश्व व्यापार को आगे बढ़ाने का इंजन बन सकता है तो वे भारत में मौजूद क्षमता को पहचान रहे हैं।" वित्त मंत्री सीतारमण इस समय अमेरिका और पेरू की यात्रा पर हैं जहां वे प्रमुख फंड प्रबंधन फर्मों और आईटी फर्मों के सीईओ के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें करेंगी। उन्होंने आगे कहा, "इस क्षमता के साथ आगे बढ़ने से, हम वैश्विक स्तर पर विभिन्न अनिश्चितताओं के कारण देखी जा रही गिरावट को सुधार सकेंगे। इन अनिश्चितताओं में कम वृद्धि, कम व्यापार और कुछ स्थानों पर उच्च मुद्रास्फीति शामिल है।" सीतारमण ने वैश्विक व्यापार के मौजूदा परिदृश्य पर भी बात की और टैरिफ युद्ध के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र या "विकसित भारत" में बदलने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी का यह दृष्टिकोण चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है: महिलाएं, वंचित, युवा और किसान। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का ध्यान 'उभरते क्षेत्रों' पर है, जो हमारी क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं, और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) जैसे क्षेत्रों पर भी है, जहां भारत वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। 22-25 अप्रैल तक अमेरिका के वाशिंगटन में अपनी यात्रा के दौरान, सीतारमण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वसंत बैठकों, दूसरी जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठक, विकास समिति पूर्ण बैठक, आईएमएफसी पूर्ण बैठक और वैश्विक संप्रभु ऋण गोलमेज (जीएसडीआर) बैठक में भाग लेंगी।   recent visitors 41