दिल्ली के Dayalpur में देर रात गिरी चार मंजिला इमारत, 4 लोगों की मौत

दिल्ली उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया. रात करीब 3 बजे यहां के शक्ति विहार इलाके में स्थि​त एक चार मंजिला इमारत भराभरा कर गिर गई. बता दें कि यह इलाका मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इमारत के गिरने से करीब दो दर्जन लोग मलबे में दब गए. एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा के मुताबिक इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो गई है. मृतकों की पहचान चांदनी, दानिश, रेशमा और नावेद के रूप में हुई है. फिलहाल 18 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है जिनमें से 14 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अभी भी कुछ लोग मलबे में दबे हो सकते हैं. एनडीआरएफ, डॉग स्क्वाड, दिल्ली पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं. स्थानीय लोग रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद कर रहे हैं. एक चश्मदीद ने बताया कि इमारत पुरानी या जर्जर हालत में नहीं थी बल्कि अच्छी कंडीशन में थी लेकिन यह प्लॉट 'L' शेप में था जो संभवत: बिल्डिंग के गिरने की एक वजह हो सकता है. दिल्ली फायर सर्विस के एक कर्मी ने बताया कि हमें रात करीब 2:50 बजे एक मकान के ढहने की सूचना मिली. हम मौके पर पहुंचे तो पाया कि पूरी इमारत ढह गई है और लोग मलबे में फंसे हुए हैं. एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस लोगों को बचाने के लिए काम कर रही है.   recent visitors 45

राज्य के दो जिले मोहला-मानपुर-चौकी और सक्ति को मिला बेस्ट परफॉर्मिंग जिला अवार्ड

रायपुर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना  के शानदार प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की 12वीं राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ को देश के बड़े राज्यों की श्रेणी में आज सेकंड बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राज्य के मोहला – मानपुर- चौकी और सक्ति को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बेस्ट परफॉर्मिंग जिला चुना गया है।यह दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन 18-19 अप्रैल 2025 को  तिरुवनंतपुरम (केरल) में आयोजित हो रहा है।  भारत सरकार के कैबिनेट सचिव कृषि के करकमलों यह सम्मान आज छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से  संयुक्त संचालक बी.के. मिश्रा एवं उपसंचालक उद्यानिकी नीरज शाह ने प्राप्त किया।इसके साथ ही मोहला-मानपुर-चौकी जिले की कलेक्टर  श्रीमती तूलिका प्रजापति एवं सक्ति जिले के कलेक्टर टोपनो ने  बेस्ट परफॉर्मिंग डिस्ट्रिक्ट का अवार्ड प्राप्त किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा  है कि यह सम्मान राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों, कृषि मंत्री राम विचार नेताम के मार्गदर्शन और कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के किसानों के कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग की टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी और किसानों को समय पर लाभ पहुंचाने हेतु जारी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। recent visitors 29

प्रदेश की सभी शालाओं में 22 अप्रैल को दिन पृथ्वी दिवस का आयोजन किया जायेगा

भोपाल प्रदेश की सभी शालाओं में 22 अप्रैल 2025 मंगलवार के दिन पृथ्वी दिवस का आयोजन किया जायेगा। इस आयोजन के संचालन के लिए संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह ने समस्त जिला कलेक्टर्स को पत्र लिखकर निर्देश जारी किये हैं। विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘’इको क्लब फॉर मिशन लाइफ’’ कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां की जा रही हैं। पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए विद्यालयों में इको क्लब का गठन भी किया गया है। प्रदेश में विद्यालयों में गठित इको क्लब से "फ्लोरा (वनस्पति) के लिए क्यूआर कोड" नामक एक शैक्षिक पहल की शुरूआत की गई है। इसका प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल का विकास करना, क्यूआर कोड निर्माण और डिजिटल जानकारी प्रदान करना है। पृथ्वी दिवस के आयोजन में विद्यालय द्वारा ‘’इको क्लब फॉर मिशन लाईफ’’ पोर्टल पर पंजीयन किया जायेगा। विद्यालय के इको क्लब प्रभारी द्वारा विद्यार्थियो के समूह बनाएँ जाकर स्कूल परिसर एवं आस-पास के बाग बगीचों इत्यादि में उपलब्ध पेड़-पौधों का सर्वेक्षण कर सूची तैयार की जायेगी। विद्या‍र्थी सूची अनुसार पेड़-पौधों से संबंधित जानकारी एकत्रित कर डिजिटल डेटाबेस भी तैयार करेंगे। इसके आधार पर प्रत्येक पेड़-पौधों के लिए स्थिर (स्टेटिक) क्यूआर कोड बनायेंगे। क्यूआर कोड वाले लेबल को विद्यार्थियों द्वारा संबंधित पेंड़ पौधों के समक्ष प्रदर्शित किया जायेगा, जिससे अन्य विद्यार्थी एवं जन सामान्य भी उस पेड़ पौधे से संबंधित जानकारी सहजता से प्राप्ते कर सकेंगे। क्यू्आर कोड में उस पेड़ पौधे से संबंधित जानकारी यथा पेड़ (फ्लोरा) का नाम एवं स्थानीय नाम, पेड़ का वैज्ञानिक नाम, पेड़ का प्रकार, फलदार / औषधि / सजावट / अन्य, वनस्पति के बारे में जानकारी जैसे पोषण मूल्य, लाभ, उपयोग आदि भी उपलब्ध होगी।   recent visitors 20

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रसाद योजना से संवरेगी माँ पीताम्बरा की नगरी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माँ पीताम्बरा की नगरी को प्रदेश का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बनने के लिये सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। केंद्र सरकार की “प्रसाद योजना” (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Augmentation Drive) के अंतर्गत मंदिर परिसर और उससे जुड़े क्षेत्र के विकास के लिए 44.24 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना से धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण होगा। "प्रसाद योजना” का उद्देश्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बनाना है। धार्मिक विरासत को मिलेगा आधुनिक स्वरूप प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्‍ला ने बताया कि पीतांबरा पीठ में पर्यटन सेवाओं के विस्तार से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। सुविधाएं बढ़ने से यह विकास तीर्थयात्रियों को आसानी होगी। “प्रसाद योजना” के तहत पीताम्बरा पीठ, दतिया में होने वाले प्रमुख विकास कार्य ब्रीदिंग स्पेसेज (खुले स्थान) हाइवे से मंदिर की ओर लगभग 2 कि.मी. के मार्ग पर पैदल आने वाले दर्शनार्थियों एवं वरिष्‍ठ जनों को ताजी हवा, खुला वातावरण और आराम प्रदान करने के लिए विशेष रूप से खुले स्थानों का विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों में हरियाली, बेंच, पेड़-पौधे और विश्राम करने के लिए स्थान होंगे। इससे पर्यटकों को ताजगी का अनुभव होगा। सार्वजनिक सुविधाएं शहर के नागरिकों और पर्यटकों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को उन्नत किया जाएगा। इससे शहर अधिक सुविधाजनक और सुगम बनेगा।         इंटरप्रिटेशन सेंटर मंदिर प्रबंधन ने उत्तर गेट के समीप इसके लिये लगभग 1000 वर्ग मी० की भूमि उपलब्‍ध कराई है, उत्तर गेट भविष्‍य का मुख्‍य द्वार होगा। उत्तर द्वार से मंदिरों में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक इंटरप्रिटेशन सेंटर (व्याख्या केंद्र) बनाया जाएगा, जहां मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी जाएगी। प्रथम तल पर मंदिर ट्रस्‍ट का कार्यालय एवं भीड़ नियंत्रण कक्ष भी होगा।         रोटरी डिजाइन ग्‍वालियर एवं झॉसी से आने वाले वाहनों/यात्रियों हेतु यातायात प्रबंधन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए बम-बम भोले एवं हनुमान चौक पर रोटरी की डिज़ाइन की जायेगी। यह न केवल ट्रैफिक नियंत्रण में मदद करेगा बल्कि सौंदर्यीकरण में भी योगदान देगा।         मल्टी-लेवल कार पार्किंग बढ़ती यातायात समस्या को ध्यान में रखते हुए, मंदिर के समीप बहु-स्तरीय कार पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इससे वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग की समस्या कम होगी और सड़कें अधिक व्यवस्थित रहेंगी। पार्किंग के भूतल पर दुकानों की व्‍यवस्‍था होगी। इससे दुकान व्‍यवस्थित हो सकेगी एवं श्रृद्धालुओं के लिये भी सुविधाजनक होगी। भविष्‍य में मल्‍टीलेवल पार्किंग को सीधे मंदिर पाथ-वे से जोड़ा जावेगा।         फुटपाथ विकास पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुगमता को सुनिश्चित करने के लिए फुटपाथों का पुनर्विकास किया जाएगा। इसमें समतल और मजबूत फुटपाथ, प्रकाश व्यवस्था, छाया के लिये शेड, पौध-रोपण और बैठने की सुविधाएं जोड़ी जाएंगी ताकि लोग आराम से चल सकें।         स्मार्ट डिस्प्ले और संकेतक शहर में प्रमुख स्थानों, पर्यटन स्थलों, मंदिरों और सार्वजनिक सुविधाओं के बारे में जानकारी देने के लिए स्मार्ट डिस्प्ले और संकेतक लगाए जाएंगे। डिजिटल और इंटरैएक्टिव बोर्ड की मदद से यात्री और नागरिक आसानी से दिशाओं, सूचनाओं और आवश्यक सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आधुनिकता के साथ आस्था का संगम इन सभी कार्यों का लक्ष्य दतिया स्थित मां पीताम्बरा पीठ को एक ऐसा धार्मिक गंतव्य बनाना है, जहाँ आस्था और आधुनिकता का समन्वय हो। इससे न केवल तीर्थयात्रियों को एक बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि दतिया को सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन की दृष्टि से भी नई ऊंचाइयाँ मिलेंगी। पहले भी मिल चुकी है सफलता मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थलों को भी इस योजना के अंतर्गत क्रमशः 44.81 करोड़ और 50 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हो चुकी है। ओंकारेश्वर में विकास कार्य पूर्ण हो गये है। अमरकंटक में विकास कार्य अप्रैल 2025 तक पूरे हो जायेंगे।   recent visitors 31

26 ट्रेनें अप्रैल और मई में रहेंगी कैंसल, तीसरी लाइन के इंटरलाकिंग कार्य के चलते ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा

भोपाल उत्तर पूर्व रेलवे के गोरखपुर मंडल के अंतर्गत तीसरी लाइन के इंटरलाकिंग कार्य के चलते ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। इस कारण भोपाल मंडल से गुजरने वाली 26 ट्रेनों को अलग-अलग तिथियों में निरस्त किया है। रेलवे प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार ये ट्रेनें 17 अप्रैल से 7 मई तक अलग-अलग दिनों में निरस्त रहेंगी। प्रभावित ट्रेनों में पुणे, कोचुवेली, सिकंदराबाद, यशवंतपुर, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओखा, पनवेल, बांद्रा टर्मिनस तथा लोकमान्य तिलक टर्मिनस जैसे गंतव्यों से चलने वाली प्रमुख लंबी दूरी की ट्रेनें शामिल हैं।   ये ट्रेनें रहेंगी कैंसल पुणे-गोरखपुर तीन मई, गोरखपुर-कोचुवेली 27 अप्रैल, 1, 2, 4 मई, कोचुवेली-गोरखपुर 30 अप्रैल, 4, 6, 7 मई, गोरखपुर-सिकंदराबाद 30 अप्रैल। सिकंदराबाद-गोरखपुर एक मई। गोरखपुर-यशवंतपुर 26 अप्रैल। सिकंदराबाद-गोरखपुर 28 अप्रैल। गोरखपुर-एलटीटी 22 एवं 29 अप्रैल। एलटीटी-गोरखपुर 23, 30 अप्रैल। एलटीटी-गोरखपुर 27 अप्रैल से तीन मई। गोरखपुर-एलटीटी 27 अप्रैल से तीन मई। गोरखपुर-यशवंतपुर 22 व 29 अप्रैल। यशवंतपुर-गोरखपुर 24 अप्रैल व एक मई। गोरखपुर-पुणे 24 अप्रैल व एक मई। पुणे-गोरखपुर 26 अप्रैल व तीन मई। गोरखपुर-ओखा 24 अप्रैल व एक मई। ओखा-गोरखपुर 27 अप्रैल व चार मई तक निरस्त रहेगी। इधर… मौसम साफ, फिर भी देरी से चल रहीं ट्रेनें भोपाल में गुरुवार को रेलवे यात्री मौसम साफ होने के बावजूद परेशान हुए। कई प्रमुख ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक की देरी से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचीं। वहीं, कुछ ट्रेनों की लेटलतीफी तो 3 से 6 घंटे तक दर्ज की गई, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। स्टेशन पर यात्रियों की खासी भीड़ देखने को मिली, लेकिन जानकारी के अभाव और ट्रेनों के अनिश्चित आगमन समय ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया। यात्रियों ने शिकायत की कि प्लेटफार्म पर ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के संबंध में समय पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की जा रही थी, जिससे उन्हें घंटों तक दुविधा में रहना पड़ा।   ट्रेनें देरी से पहुंची भोपाल     12138 पंजाब मेल : एक घंटा     12406 गोंडवाना : 24 मिनट     11058 अमृतसर : डेढ़ घंटा     12920 मालवा : 2 घंटे 06 मिनट     12156 भोपाल एक्स : आधा घंटा     12722 दक्षिण एक्स: 28 मिनट     18237 छत्तीसगढ़ : 28 मिनट     12853 अमरकंटक : 30 मिनट     22537 कुशीनगर : 35 मिनट यात्री भी हो रहे परेशान भोपाल स्टेशन पर ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान यात्री जब वेटिंग एरिया में बैठे तो वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। प्लेटफार्म एक पर बने छह नंबर वेटिंग एरिया में वाशरूम की हालत खस्ता है। वाशरूम में पानी की व्यवस्था नहीं है। recent visitors 30

पीथमपुर के भस्मक संयंत्र परिसर में रखे 307 टन कचरे को नष्ट करने का अंतिम चरण दो सप्ताह बाद शुरू होगा

इंदौर धार जिले के पीथमपुर में विगत दिनों ट्रायल रन के तहत यूनियन कार्बाइड  के 30 टन कचरे को जलाकर नष्ट किया जा चुका है। अब पीथमपुर के भस्मक संयंत्र परिसर में रखे 307 टन कचरे को नष्ट करने का अंतिम चरण दो सप्ताह बाद शुरू होगा। यह संभावना जताई जा रही है कि 1 मई से संयंत्र में 270 किलो प्रति घंटे की दर से यूका के कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस संबंध में 21 अप्रैल को भोपाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भस्मक संयंत्र संचालित करने वाली कंपनी एनर्जी एनवायरो के प्रतिनिधियों की बैठक भी होने वाली है।   72 दिन में नष्ट करना है पूरा कचरा हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, 72 दिन में इस पूरे कचरे को नष्ट करने का कार्य पूर्ण किया जाएगा। गौरतलब है कि पीथमपुर के भस्मक संयंत्र में 28 फरवरी से 9 मार्च के बीच 30 टन यूका के कचरे को ट्रायल रन के तहत नष्ट किया जा चुका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एनर्जी इन्वयारों कंपनी को 307 टन यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने से पूर्व अपने प्लांट में आटोमेशन सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत यूका के कचरे को तौलकर निर्धारित मात्रा में भस्मक में डालने की प्रक्रिया ऑटोमेटिक वजन मापी यंत्र लगाने के लिए कहा गया है। पिछले ट्रायल रन में कचरे को मैन्युअली तौलकर कर्मचारी भस्मक संयंत्र में डाल रहे थे। वही भस्मक संयंत्र में ऑटोमेटिक मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि अभी भस्मक संयंत्र की चिमनी पर ही ऑटोमेटिक मॉनिटरिंग सेंसर के माध्यम से निगरानी की गई थी। इसके माध्यम से कचरा जलने के बाद उत्सर्जित होने वाली गैसों की मात्रा का पता चलता था। 900 टन निकलेगी राख, लैंडफिल के लिए अनुमति लेने का प्रयास अभी 30 टन कचरा नष्ट करने के बाद 75 टन राख निकली है। 307 टन यूका का कचरा जलाने के बाद करीब 900 टन राख निकलेगी। ऐसे में इस राख को लैंडफिल में सुरक्षित तरीके से दबाया जाएगा। वर्तमान में भस्मक संयंत्र का संचालन करने वाली कंपनी के पास पांच लैंडफील साइट है। यूका के कचरे के जलाने के बाद बची राख को जमीन में दबाने के लिए अलग से लैंडफिल तैयार किया जाना है। ऐसे में कंपनी इस संबंध के नया लैंडफिल तैयार करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेने का प्रयास कर रही है। अनुमति मिलने के बाद लैंडफिल तैयार करने के लिए खुदाई की जाएगी। तब तक एनर्जी इनवायरो कंपनी अपने परिसर में ही शेड में यूका कचरा जलाने के बाद बची हुई राख को रखेगी। recent visitors 28

स्कूल शिक्षा विभाग ने लोकेशन आधारित उपस्थिति की तैयारी की शुरू, अब टीचर्स की अटेंडेंस चेहरा दिखाकर लगेगी

भोपाल अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज होगी। यह एप शिक्षकों की लोकेशन दर्ज करेगा साथ ही आनलाइन चेहरा दिखाई देने पर ही उपस्थिति लगेगी। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलेंगे तो जुलाई से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाएगी। प्रदेश के 99,145 स्कूलों में से केवल 8,051 स्कूलों में ही शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप से दर्ज की जा रही है यानी 91,094 स्कूलों में इसका उपयोग ही नहीं हो रहा है। जबकि यह व्यवस्था अनिवार्य की गई थी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े होते रहते हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी इस बात को कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में कुछ जिलों में शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं। उनके स्थान पर दूसरे लोग पढ़ाने जाते हैं। वहीं कुछ शिक्षक स्कूलों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते हैं। तीन बार व्यवस्था बनाई गई लेकिन फेल हो गई। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2017, वर्ष 2020 और वर्ष 2022 में प्रयास किया। ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप के जरिए शुरू की गई थी। लेकिन शिक्षकों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया।    कभी स्मार्ट फोन न होने तो कभी नेटवर्क न मिलने का बहाना बनाया गया। ऑनलाइन उपस्थिति से कन्नी काटी जाती रही। कई कारणों से यह प्रक्रिया ठीक से लागू नहीं हो पाई।   नए एप में गड़बड़ियों को किया गया दूर एम शिक्षा मित्र एप से उपस्थिति लगानी अनिवार्य की गई थी लेकिन इसके माध्यम से नेटवर्क मिलने पर ही उपस्थिति लगती थी। इसमें लोकेशन व चेहरा पहचान कर उपस्थिति लगाने का विकल्प नहीं होने से बहुत गड़बड़ियां होती थीं। सार्थक एप में इन्हें दूर कर लिया गया है। अवकाश के लिए भी कर सकेंगे आवेदन सार्थक एप की नई व्यवस्था में कर्मचारी व शिक्षक छुट्टी के लिए भी आवेदन कर सकेंगे और शासन से किसी भी प्रकार का कार्यालयीन पत्राचार इस एप से हो जाएगा। दरअसल, सार्थक एप मध्य प्रदेश सरकार के पोर्टल से जुड़ा नवीनतम मोबाइल एप्लीकेशन है।   recent visitors 34