राजनांदगांव की खेल प्रतिभाओं को मिला डॉ. रमन सिंह का तोहफा, केंद्र से मिली 6 करोड़ 36 लाख का 4-लेन सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की स्वीकृति

राजनांदगांव छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. रमन सिंह के सतत प्रयासों से केंद्र सरकार ने राजनांदगांव में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। राजनांदगांव की खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने ‘खेलो इंडिया योजना’ के अंतर्गत राजनांदगांव में 4-लेन 800 मीटर के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना के लिए लगभग 6 करोड़ 36 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह स्वीकृति भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के खेल विभाग द्वारा जारी की गई है, जिसे डॉ. रमन सिंह के आग्रह पर माननीय केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडविया ने स्वीकृत किया है, पूर्व में विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने पत्र लिखकर और व्यक्तिगत मुलाकात में केंद्रीय खेल मंत्री से इस विषय पर आग्रह किया था। यह सिंथेटिक ट्रैक न केवल जिले के युवाओं को आधुनिक खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराएगा बल्कि ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए उन्हें सशक्त बनाएगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा, "यह एथलेटिक ट्रैक राजनांदगांव के युवाओं के सपनों को पंख देने वाला कदम है। मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडविया का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने हमारी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए यह स्वीकृति प्रदान की। recent visitors 38

कूनो नेशनल पार्क में चीतों को पानी पिलाने वाले कर्मचारी को वापस मिली नौकरी, फूल-माला और मिठाई से हुआ स्वागत

श्योपुर कूनो नेशनल पार्क में चीतों को पानी पिलाने वाले ड्राइवर सत्यनारायण गुर्जर को फिर से काम पर रख लिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें हटा दिया गया था। वीडियो में वह चीतों के नजदीक जाकर पानी पिला रहे थे। सोशल मीडिया पर लोगों और गुर्जर समाज ने उनका समर्थन किया। इसके बाद पार्क प्रबंधन ने उन्हें वापस बुला लिया। समाज ने फूल और मिठाई से उनका सम्मान भी किया। वायरल वीडियो की विभागीय जांच अभी जारी है। नौकरी से निकालने के बाद वापस रखा कूनो नेशनल पार्क में चीता ज्वाला और उसके बच्चों को पानी पिलाने के बाद सत्यनारायण गुर्जर चर्चा में आए थे। वन विभाग से जुड़ी एक निजी गाड़ी के ड्राइवर सत्यनारायण गुर्जर को वीडियो वायरल होने के बाद हटा दिया गया था लेकिन अब उन्हें वापस रख लिया गया है। तीन दिन बाद सत्यनारायण अपने समाज के सम्मान समारोह में पहुंचे। वीडियो पर क्या बोले सत्यनारायण सत्यनारायण ने वीडियो की सच्चाई बताते हुए कहा, 'जब से कूनो में चीते आए हैं, मैं उनसे जुड़ा हुआ हूं। मेरी निजी गाड़ी ट्रैकिंग टीम के लिए किराए पर ली गई थी। उस दिन चीते प्यासे थे, तो मैंने उन्हें पानी पिला दिया। वीडियो वायरल होने के बाद मुझे हटा दिया गया, लेकिन एक दिन पहले पार्क प्रबंधन ने मुझे वापस बुला लिया। अब कोई शिकवा नहीं है।' वीडियो वायरल होने से मचा था हड़कंप पिछले शनिवार को एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक युवक जंगल में चीता ज्वाला और उसके बच्चों को पानी पिला रहा था। इससे वन विभाग में हड़कंप मच गया था। जांच में पता चला कि यह युवक सत्यनारायण गुर्जर है। वह चीता ट्रैकिंग टीम की अनुबंधित निजी गाड़ी का ड्राइवर है। पार्क प्रबंधन ने इसे नियमों का उल्लंघन माना और उसे तुरंत हटा दिया। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स और गुर्जर समाज ने सत्यनारायण का समर्थन किया। मामला बढ़ने पर प्रबंधन ने उन्हें वापस काम पर रख लिया। फूल माला पहनाकर किया स्वागत मंगलवार को सत्यनारायण श्योपुर के ढेंगदा गांव में गुर्जर समाज के भगवान देव नारायण मंदिर पहुंचे। वहां समाज के लोगों ने उन्हें फूल माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। सत्यनारायण ने कहा, 'मेरे परिवार की कई पीढ़ियां जंगल में रहती आई हैं। मुझे जानवरों से लगाव है। उस दिन ट्रैकिंग टीम के साथ था, तो सुबह चीते प्यासे दिखे। मैंने उन्हें पानी पिला दिया। किसी ने वीडियो बना लिया, जो वायरल हो गया। डीएफओ के निर्देश पर मुझे हटा दिया गया था, लेकिन अब वापस बुलाया गया है। मैं प्रशासन का आभारी हूं।' श्योपुर गुर्जर समाज के अध्यक्ष देवी शंकर गुर्जर ने कहा, 'सत्यनारायण ने प्यासे चीतों को पानी पिलाकर गौरवपूर्ण कार्य किया। इसलिए हमने उनका सम्मान किया।' recent visitors 37

26/11 हमले के आरोपी आतंकी तहव्वुर राणा अमेरिका से प्रत्यर्पित, विशेष विमान से लाया जा रहा भारत

मुंबई  26/11 मुंबई आतंकी हमले (Mumbai Terror Attack) का मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana), जो इस समय अमेरिका (United States Of America) की जेल में बंद है, भारत लाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारत सरकार काफी समय से तहव्वुर के प्रत्यर्पण (Tahawwur Rana Extradition) की कोशिश कर रही थी और कुछ समय पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of US) ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) के अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी साफ कर दिया था कि तहव्वुर को जल्द से जल्द भारत के हवाले कर दिया जाएगा। तहव्वुर ने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए अलग-अलग मौकों पर याचिका भी लगाई, पर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। कुछ दिन पहले ही तहव्वुर की आखिरी याचिका भी खारिज कर दी गई। अब उसके भारत प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू हो गई है। आज लाया जाएगा भारत तहव्वुर को आज ही भारत लाया जाएगा। भारतीय एजेंसियों की टीम उसे भारत लाने के लिए अमेरिका पहुंच चुकी है और बचा हुआ पेपरवर्क पूरा किया जा रहा है। तहव्वुर कल सुबह, यानी कि गुरुवार को भारत पहुंच सकता है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) पूरी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। तिहाड़ जेल में रखने की संभावना! तहव्वुर के भारत प्रत्यर्पण से पहले ही दिल्ली में तिहाड़ जेल और मुंबई की आर्थर रोड जेल में गतिविधियाँ बढ़ गई हैं और स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि मुंबई आतंकी हमले के आरोपी को इन दोनों में से एक जेल में NIA की निगरानी में बेहद सुरक्षित सेल में रखा जा सकता है। मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर की थी अहम भूमिका मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर ने अहम भूमिका निभाई थी। इस आतंकी हमले में 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 166 नागरिक और 9 आतंकी थे। इतना ही नहीं, 300 से ज़्यादा लोग इस आतंकी हमले में घायल भी हो गए थे। लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया था और आतंकी संगठन के 10 आतंकियों ने इस हमले को अंजाम दिया था। 10 में से सिर्फ एक आतंकी अजमल कसाब ही इस हमले में ज़िंदा बच गया था और बाकी सभी मारे गए थे। कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी। recent visitors 50

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति शीघ्र होगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति शीघ्र होगी। इस बारे में राज्य शासन द्वारा शीघ्र ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के लगभग 4 लाख अधिकारी-कर्मचारी इस निर्णय से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपने सेवा काल में कई वर्ष से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अनेक अधिकारी-कर्मचारी सेवा निवृत भी हो गए। गत 8 वर्ष से पदोन्नति की रुकावट चली आ रही थी, जो अब समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से संबंध में मुख्यमंत्री स्तर से 12 से अधिक बैठकों में विचार-विमर्श किया गया। मंत्रीगण से भी चर्चा की गई और पदोन्नति का रास्ता राज्य शासन द्वारा तलाशा गया है। राज्य शासन ने अनुभव किया की पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शीघ्र ही मंत्रि-परिषद की बैठक में इस संबंध में निर्णय होगा। सुखद समाचार सभी अधिकारी-कर्मचारियों को शीघ्र प्राप्त होगा। मध्यप्रदेश शासन द्वारा अधिकारी- कर्मचारियों के हित में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समस्त शासकीय सेवकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। recent visitors 25

दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में हीट वेव से हाल बेहाल, राजस्थान में अगले दो दिनों तक हीट वेव का अलर्ट

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी (Heat Wave) का प्रकोप देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों में लगातार तापमान में बढ़त देखने को मिल रही है। कुछ शहरों में तो पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कई राज्यों में हीट वेव (Heat Wave) को लेकर चेतावनी जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा अपडेट में बताया कि अगले दो दिनों तक दिल्ली, पश्चिमी राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात के कुछ हिस्सों में हीट वेव का प्रकोप रहेगा। पिछले 24 घंटे के मौसम का हाल भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा दिए गए ताजा अपडेट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में लू की स्थिति रही। वहीं, राजधानी दिल्ली में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। दिल्ली में सोमवार को इस मौसम की पहली लू चली। मौसम विभाग ने बताया कि गत 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश, पंजाब के कुछ स्थानों पर भीषण गर्मी की स्थिति रही। हरियाणा-चंडीगढ़ और पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात क्षेत्र के कुछ स्थानों पर भीषण गर्मी की स्थिति रही। वहीं, त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर आंधी तूफान देखने को मिला। अगले 24 घंटे के मौसम का पूर्वानुमान मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान में बताया गया कि 09 अप्रैल को पश्चिमी राजस्थान के कई स्थानों पर लू चलने की संभावना है, इसको देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार को राजस्थान का बाड़मेर सबसे गर्म रहा। जहां पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा बुधवार को सौराष्ट्र और कच्छ, पूर्वी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा चंडीगढ़ और दिल्ली के कुछ स्थानों पर लू चलने की संभावना है। वहीं, 08 से 10 अप्रैल के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर गर्म रात की स्थिति की संभावना है। इसके साथ राजस्थान, मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र और 08 अप्रैल को पंजाब, हरियाणा चंडीगढ़ और दिल्ली में भी भीषण गर्मी का सितम देखने मिल सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले 2 दिनों तक तापमान में कमी होनी की कोई संभावना नहीं है। इन राज्यों में बारिश की संभावना जहां एक ओर उत्तर भारत में गर्मी का सितम देखने मिल रहा है। वहीं, दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिल रही है। इस बीच मौसम विभाग ने बताया कि 08 और 09 अप्रैल को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, केरल और माहे, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तेलंगाना, कर्नाटक में गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके अलावा 08-12 अप्रैल के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 09 अप्रैल को बिहार के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि हो सकती है। 09 और 10 अप्रैल को असम और मेघालय में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। इसलिए पड़ रही इतनी गर्मी मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अप्रैल में ही इस साल इतनी अधिक गर्मी पड़ने की वजह जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग का असर तो है ही, पश्चिमी विक्षोभों का अभाव भी है। मार्च में 90 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज हुई तो अप्रैल में अभी तक एक बूंद भी नहीं बरसी है। इस पर भी हवा की दिशा अब दक्षिणी पूर्वी हो गई है। राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवा और ज्यादा गर्मी बढ़ा रही है। तब बनती है लू वाली स्थिति:-मौसम विभाग के मुताबिक जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर और सामान्य से साढ़े चार से साढ़े छह डिग्री सेल्सियस ऊपर रहता है तो ऐसी स्थिति को लू की स्थिति मानी जाती है। recent visitors 44

RBI का बड़ा एलान, सभी बैंकों को अब पेंशन भुगतान में किसी भी देरी के लिए 8% प्रति वर्ष का ब्याज देना अनिवार्य

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक हालिया निर्देश में रिटायर केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों को पेंशन बांटने के लिए जिम्मेदार सभी बैंकों को अब पेंशन भुगतान में किसी भी देरी के लिए 8% प्रति वर्ष का ब्याज देना अनिवार्य है। RBI के मास्टर सर्कुलर में बढ़ोतरी इस आवश्यकता का उद्देश्य पेंशनभोगियों को उनके बकाया के देर से भुगतान के लिए क्षतिपूर्ति करना है। सर्कुलर के अनुसार, 'पेंशन भुगतान करने वाले बैंकों को पेंशन/बकाया राशि जमा करने में देरी के लिए पेंशनभोगी को भुगतान की नियत तिथि के बाद 8 प्रतिशत प्रति साल की निश्चित ब्याज दर पर मुआवजा देना चाहिए।' क्या है डिटेल? निर्देश में आगे स्पष्ट किया गया है कि यह मुआवजा पेंशनभोगियों से किसी भी दावे की आवश्यकता के बिना ऑटोमेटिक रूप से प्रदान किया जाएगा। तय पेमेंट डेट के बाद होने वाली किसी भी देरी के लिए मुआवजा 8% प्रति साल की निश्चित ब्याज दर पर प्रदान किया जाना चाहिए। ब्याज उसी दिन पेंशनभोगी के खाते में जमा किया जाएगा जिस दिन बैंक संशोधित पेंशन या पेंशन बकाया राशि संसाधित करेगा, जो 1 अक्टूबर, 2008 से सभी लेट भुगतानों पर लागू होगा। क्या है सर्कुलर में? सर्कुलर में बैंकों द्वारा पेंशन डिस्बर्समेंट के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि संबंधित पेंशन भुगतान अधिकारियों से पेंशन आदेशों की कॉपीज तुरंत प्राप्त करके देरी से बचा जा सके। बैंकों को आरबीआई से निर्देशों की वेट किए बिना पेंशन भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया गया है, इस प्रकार यह सुनिश्चित किया जाता है कि पेंशनभोगियों को अगले महीने के भुगतान चक्र में उनका लाभ मिले। इसके अलावा, RBI ने बैंकों से बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने का आग्रह किया है, खासकर बुजुर्ग पेंशनभोगियों को, ताकि सहज बातचीत की सुविधा मिल सके। सर्कुलर में कहा गया है, "पेंशन डिस्ट्रिब्यूट करने वाले सभी एजेंसी बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे पेंशनभोगियों, खासकर उन पेंशनभोगियों को जो वृद्ध हैं, विचारशील और सहानुभूतिपूर्ण ग्राहक सेवा प्रदान करें।" इस कदम से पेंशनभोगियों को प्रदान की जाने वाली बेहतर सर्विस मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके लिए बैंकिंग अनुभव कम बोझिल हो जाएगा।   recent visitors 50

राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रखना अवैध है, रद्द किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा 2023 में 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित रखने के कदम को अवैध और गलत करार दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने फैसला सुनाया कि विधानसभा द्वारा दोबारा पारित क‍िसी व‍िधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखने का अध‍िकार राज्यपाल के पास नहीं है। फैसले में कहा गया क‍ि राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रखना अवैध है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल ने सद्भावनापूर्वक कार्य नहीं किया। विधेयकों को उसी दिन राज्यपाल द्वारा स्वीकृत मान लिया गया था, जिस दिन उन्हें पुनः उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल के पास विधेयक को रोकने की कोई गुंजाइश नहीं है, साथ ही कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास कोई विवेकाधिकार नहीं है। उन्हें अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर काम करना होता है। इस वर्ष फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के शीर्ष विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी और तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि राज्यपाल ने खुद को वैध रूप से निर्वाचित राज्य सरकार के "राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी" के रूप में पेश किया है। तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद राज्यपाल ने अपने पास लंबित 12 में से 10 विधेयकों को उनकी सहमति के लिए वापस कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था, "यदि राज्यपाल को प्रथम दृष्टया लगता है कि विधेयक में कुछ खामियां हैं, तो क्या उन्हें इसे राज्य सरकार के संज्ञान में नहीं लाना चाहिए? सरकार से यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह राज्यपाल के मन में क्या है, यह जान सके? यदि राज्यपाल को व‍िधेयक में कुछ खामियां परेशान कर रही थीं, तो राज्यपाल को इसे तुरंत सरकार के संज्ञान में लाना चाहिए था और विधानसभा को विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए था।" पिछले साल नवंबर में, शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी पर सवाल उठाए थे। recent visitors 55