राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रखना अवैध है, रद्द किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा 2023 में 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित रखने के कदम को अवैध और गलत करार दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने फैसला सुनाया कि विधानसभा द्वारा दोबारा पारित क‍िसी व‍िधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखने का अध‍िकार राज्यपाल के पास नहीं है। फैसले में कहा गया क‍ि राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रखना अवैध है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल ने सद्भावनापूर्वक कार्य नहीं किया। विधेयकों को उसी दिन राज्यपाल द्वारा स्वीकृत मान लिया गया था, जिस दिन उन्हें पुनः उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल के पास विधेयक को रोकने की कोई गुंजाइश नहीं है, साथ ही कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास कोई विवेकाधिकार नहीं है। उन्हें अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर काम करना होता है। इस वर्ष फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के शीर्ष विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी और तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि राज्यपाल ने खुद को वैध रूप से निर्वाचित राज्य सरकार के "राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी" के रूप में पेश किया है। तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद राज्यपाल ने अपने पास लंबित 12 में से 10 विधेयकों को उनकी सहमति के लिए वापस कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था, "यदि राज्यपाल को प्रथम दृष्टया लगता है कि विधेयक में कुछ खामियां हैं, तो क्या उन्हें इसे राज्य सरकार के संज्ञान में नहीं लाना चाहिए? सरकार से यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह राज्यपाल के मन में क्या है, यह जान सके? यदि राज्यपाल को व‍िधेयक में कुछ खामियां परेशान कर रही थीं, तो राज्यपाल को इसे तुरंत सरकार के संज्ञान में लाना चाहिए था और विधानसभा को विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए था।" पिछले साल नवंबर में, शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी पर सवाल उठाए थे। recent visitors 63

पीएम मोदी ने कहा- दुबई ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

नई दिल्ली दुबई के क्राउन प्रिंस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के डिप्टी पीएम और रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की। वह भारत की दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे हैं। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, "दुबई के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से मिलकर खुशी हुई। दुबई ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विशेष यात्रा हमारी गहरी दोस्ती की पुष्टि करती है और भविष्य में और भी मजबूत सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।" वहीं क्राउन प्रिंस ने एक्स पर लिखा, "आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करके खुशी हुई। हमारी बातचीत ने यूएई-भारत संबंधों की मजबूती की पुष्टि की, जो विश्वास पर आधारित है, इतिहास द्वारा आकारित है, तथा अवसरों, इनोवेशन और स्थायी समृद्धि से भरा भविष्य बनाने के साझा दृष्टिकोण से प्रेरित है।" दुबई के क्राउन प्रिंस के रूप में शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है और उनके साथ कई मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने गणमान्य अतिथि के सम्मान में दोपहर के भोज का आयोजन किया और क्राउन प्रिंस ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ भी बैठकें कीं। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्राउन प्रिंस का स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "दुबई के क्राउन प्रिंस और यूएई के डिप्टी पीएम और रक्षा मंत्री महामहिम शेख हमदान मोहम्मद का भारत की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान स्वागत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। हमारे व्यापक सहयोग और जीवंत संबंधों के लिए उनकी सकारात्मक भावनाओं की सराहना करता हूं।" दिल्ली के बाद, क्राउन प्रिंस मुंबई का दौरा करेंगे और दोनों पक्षों के प्रमुख व्यापारिक नेताओं के साथ एक व्यापार गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बातचीत से भारत-यूएई आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग मजबूत होगा। recent visitors 73

मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में केदार जाधव ने पार्टी की सदस्यता ली

मुंबई भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्‍य केदार जाधव ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। केदार जाधव को पार्टी का पटका पहनाकर भाजपा में शामिल कराया गया। इस अवसर पर चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "केदार जाधव ने आज भारतीय जनता पार्टी जॉइन की है। उनका भारतीय खेल जगत में एक महत्वपूर्ण प्रभाव है और हम भाजपा परिवार में उनका स्वागत करते हैं।" केदार जाधव का जन्म 26 मार्च 1985 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। दाएं हाथ के बल्लेबाज और ऑफ-स्पिन गेंदबाज के रूप में उन्होंने हरफनमौला खिलाड़ी की भूमिका निभाई। जाधव ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत महाराष्ट्र के लिए घरेलू क्रिकेट से की और धीरे-धीरे अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। उनका वनडे डेब्यू 16 नवंबर 2014 को श्रीलंका के खिलाफ हुआ, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में पदार्पण 17 जुलाई 2015 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हुआ। जाधव ने 73 वनडे मैचों में 1389 रन बनाए, जिसमें दो शतक और छह अर्धशतक शामिल हैं, साथ ही 27 विकेट भी लिए। उनकी औसत 42.09 रही, जो उनकी निरंतरता को दर्शाती है। टी-20 में उन्होंने 9 मैच खेले और 122 रन बनाए। आईपीएल में जाधव ने चेन्नई सुपर किंग्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, सनराइजर्स हैदराबाद जैसी टीमों के लिए खेलते हुए 93 मैचों में 1196 रन बनाए। उनकी अनोखी गेंदबाजी शैली और मध्यक्रम में फिनिशर की भूमिका ने उन्हें खास पहचान दी। खासतौर पर 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ पुणे वनडे में 120 रनों की शानदार पारी और गेंदबाजी में योगदान उनकी यादगार पारियों में से एक है। हालांकि, चोट और फॉर्म में उतार-चढ़ाव के कारण 2020 के बाद वह भारतीय टीम से बाहर हो गए। 3 जून 2024 को 39 साल की उम्र में जाधव ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया। निजी जीवन में, उन्होंने 2011 में स्नेहल से शादी की और उनकी एक बेटी है। recent visitors 64

हज और उमराह मंत्रालय ने कहा- 29 अप्रैल विदेशी उमराह तीर्थयात्रियों के लिए मुल्क से विदा लेने का अंतिम दिन होगा

रियाद अभी हाल ही में सऊदी अरब ने भारत और पाकिस्तान समेत 14 देशों पर अस्थायी तौर पर वीजा बैन लगा दिया था ताकि उमराह करने वालों और हज तीर्थयात्रा करने वालों की अवैध भीड़ मक्का या देशभर में जमा नहीं हो। अब सऊदी अरब के हज और उमराह मंत्रालय ने घोषणा की है कि जिन लोगों को उमराह के लिए वीजा मिल चुका है, वे उमराह पूरी कर 29 अप्रैल तक अपने-अपने देश वापस चले जाएं। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि 29 अप्रैल विदेशी उमराह तीर्थयात्रियों के लिए मुल्क से विदा लेने का अंतिम दिन होगा। मीडिया रिपोर्ट में आधिकारिक बयान के हवाले से कहा गया है कि मंत्रालय ने कहा, "इस वर्ष उमराह करने वालों के लिए सऊदी अरब में प्रवेश के लिए 13 अप्रैल आखिरी दिन निर्धारित किया गया है, जबकि 29 अप्रैल को तीर्थयात्रा की मियाद खत्म हो जाएगी। इस समय सीमा के बाद सऊदी अरब में रहने वाले तीर्थयात्रियों को देश के वीजा और तीर्थयात्रा नियमों का उल्लंघन करने वाला माना जाएगा।" उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना मंत्रालय ने अपने बयान में जोर देकर कहा है कि अनुमत तिथियों के बाद यानी 29 अप्रैल के बाद अधिक समय तक सऊदी अरब में रुकना कानूनी उल्लंघन माना जाएगा और दोषी पाए जाने वाले विदेशियों पर सख्त दंड लागू किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, कंपनियों और उमराह सेवा प्रदाताओं पर 100,000 सऊदी रियाल यानी 22.94 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हज यात्रा से पहले की तैयारी सऊदी अरब ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब वह वार्षिक हज यात्रा को आरामदायक बनाने की तैयारियों में जुटा है। सऊदी अरब का मकसद अवैध तीर्थयात्रियों को मक्का जाने से रोकना है। पिछले साल भारी भीड़ के कारण मक्का में भगदड़ मच गई थी, जिसमें 1200 लोगों की जान चली गई थी। इससे सऊदी अरब की प्रतिष्ठा दुनियाभर में धुमिल हुई थी। इसी को मद्देनजर रखते हुए सऊदी अरब ताबड़तोड़ फैसले ले रहा है। 18000 विदेशी गिरफ्तार एक दिन पहले ही सऊदी अरब ने करीब 18,407 ऐसे विदेशियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जो अवैध तरीके से वहां रह रहे थे। यानी वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी वहां रह रहे थे। इन लोगों पर प्रवासन, श्रम और सीमा सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। इन लोगों को 15 साल की जेल की सजा हो सकती है या करीब 2.30 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है या दोनों हो सकता है। कब से शुरू हो रही हज यात्रा सऊदी अधिकारियों ने सभी सर्विस प्रोवाइडर और हज यात्रा आयोजित कराने वाले संस्थानों को विदेशी तीर्थयात्रियों के प्रस्थान समयसीमा और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करने का निर्देश दिया है। बयान में कहा गया है कि अधिक समय तक रुकने वाले तीर्थयात्रियों की रिपोर्ट न करने पर इन संस्थानों पर भी अधिकतम दंड लगाया जाएगा। इस तरह के सारे कदम 4 जून से शुरू हो रहे हज यात्रा से ठीक पहले उठाए गए हैं। recent visitors 51

सांसद बर्क ने भड़काऊ बयान दिया था, इस मामले में थाने बुलाकर तीन घंटे से ज्यादा समय तक एसआईटी ने दागे दर्जनों सवाल

संभल संभल हिंसा में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क से मंगलवार को एसआईटी ने थाने बुलाकर तीन घंटे तकत पूछताछ की। इस दौरान उनसे दर्जनों सवाल दागे गए। नवंबर में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की जान चली गई थी। पुलिस ने सांसद जियार्रहमान बर्क के खिलाफ भी इसी मामले में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने आरोप था कि बर्क ने भड़काऊ बयान दिया था। हालांकि हिंसा वाले दिन बर्क शहर में नहीं थे। पिछलो दिनों बर्क के घर पूछताछ के लिए पुलिस टीम पहुंची थी। सांसद के मौजूद नहीं होने पर नोटिस घर पर मौजूद लोगों को रिसीव कराई थी। नोटिस के बाद ही मंगलवार सुबह 11 बजे सांसद बर्क नखासा कोतवाली पहुंचे। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुलेमान खान भी मौजूद रहे। दिल्ली से मंगलवार सुबह संभल पहुंचे सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नखासा कोतवाली पहुंचने से पहले अपने आवास पर पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, लेकिन मैं देश का जिम्मेदार नागरिक और जन प्रतिनिधि हूं। कानून का सम्मान करता हूं और जांच में पूरा सहयोग करूंगा। वह 11 बजे नखासा कोतवाली पहुंचे। थाने के बाहर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी से यह साफ झलका कि सांसद को स्थानीय बार और कानूनी बिरादरी का भी समर्थन है। संभल हिंसा में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क से मंगलवार को एसआईटी ने थाने बुलाकर तीन घंटे तकत पूछताछ की। इस दौरान उनसे दर्जनों सवाल दागे गए। नवंबर में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की जान चली गई थी। पुलिस ने सांसद जियार्रहमान बर्क के खिलाफ भी इसी मामले में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने आरोप था कि बर्क ने भड़काऊ बयान दिया था। हालांकि हिंसा वाले दिन बर्क शहर में नहीं थे। पिछलो दिनों बर्क के घर पूछताछ के लिए पुलिस टीम पहुंची थी। सांसद के मौजूद नहीं होने पर नोटिस घर पर मौजूद लोगों को रिसीव कराई थी। नोटिस के बाद ही मंगलवार सुबह 11 बजे सांसद बर्क नखासा कोतवाली पहुंचे। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुलेमान खान भी मौजूद रहे। दिल्ली से मंगलवार सुबह संभल पहुंचे सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नखासा कोतवाली पहुंचने से पहले अपने आवास पर पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, लेकिन मैं देश का जिम्मेदार नागरिक और जन प्रतिनिधि हूं। कानून का सम्मान करता हूं और जांच में पूरा सहयोग करूंगा। वह 11 बजे नखासा कोतवाली पहुंचे। थाने के बाहर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी से यह साफ झलका कि सांसद को स्थानीय बार और कानूनी बिरादरी का भी समर्थन है।|#+| थाने के अंदर बर्क से तीन घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ चली। करीब ढाई बजे थाने से बाहर आए बर्क ने कहा कि जांच अभी जारी है। मुझसे जो सवाल पूछे गए, सभी का जवाब दिया है। हालांकि उन्होंने सवालों के बारे में बताने से इनकार कर दिया। इतना कहा कि जांच की प्रक्रिया चल रही है हम पूरा सहयोग कर रहे हैं। बर्क से ठीक पहले जामा मस्जिद के सदर जफर अली से पूछताछ हुई थी और उन्हें गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने भी बर्क को लेकर कुछ आरोप लगाए हैं। उन आरोपों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है, ताकि निष्पक्ष व पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके। recent visitors 65

भावी पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए सहकारिता की गतिविधियां संचालित की जाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में सहकारिता की पहुंच बढ़ाने और सतत विकास में सहकारिता के योगदान के लिए ग्राम और वार्ड स्तर पर गतिविधियों का संचालन किया जाए। सहकारी सोसायटियों के सुदृढ़ीकरण के लिए नवाचार और सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देते हुए सहकारिता के सेट-अप में कार्पोरेट संस्कृति को विकसित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "ज्ञान पर ध्यान" के मंत्र को साकार करने और विकसित भारत के लिए भावी पीढ़ी की सहकारिता का आधार तैयार करने के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय शीर्ष समिति की मंत्रालय में हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से छूटे किसानों को चिन्हित कर उन्हें सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राजस्व, किसान कल्याण तथा एवं विकास, पशुपालन एवं डेयरी और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग समन्वित रूप से गतिविधियां संचालित करें। पैक्स के सशक्तिकरण और उन्हें अधिक समर्थ और सक्षम बनाने के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय से कार्य किया जाए। शासकीय योजनाओं के कन्वर्जेंस में पैक्स के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारत सरकार की पहल पर वर्ष-2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है। "सहकारिताएं एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती हैं" इसकी थीम है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सहकारी मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। साथ ही यह वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को लागू करने के प्रयासों में सहकारिता के योगदान पर भी प्रकाश डालती है।   recent visitors 45

यूएस में एक नया बिल पेश किया गया है जिसमें छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ऑप्शन को खत्म करने का प्रस्ताव

वाशिंगटन अमेरिका से ऐसी खबर सामने आई है जिसने करीब 3 लाख भारतीय छात्रों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल, यूएस में एक नया बिल पेश किया गया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) ऑप्शन को खत्म करने का प्रस्ताव है। यह सुविधा वर्तमान में STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) के छात्रों को मिलती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में 3 साल तक रहकर काम कर सकते हैं। अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो छात्रों को पढ़ाई खत्म करने के तुरंत बाद देश छोड़ना होगा, जब तक कि वे H-1B वीजा हासिल नहीं कर लेते। यह फैसला ऐसे समय लिया जा रहा है जब ट्रंप सरकार की टैरिफ नीतियों के चलते कई देशों को तगड़ा झटका लगा है। इंडियन स्टूडेंट्स अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सबसे बड़ी आबादी का हिस्सा हैं। ओपन डोर्स रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में यूएस में 11 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से 3.31 लाख भारतीय थे। ये छात्र मुख्य रूप से STEM कोर्सेस में पढ़ाई करते हैं और OPT के जरिए प्रोफेशनल अनुभव हासिल करते हैं। इससे H-1B वीजा पाने के लिए उनकी दावेदारी मजबूत हो जाती है। अब नए बदलाव से उनके करियर प्लान पर गहरा असर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों का हिस्सा है। उन्होंने चुनाव अभियान में मास डिपोर्टेशन और वीजा नियमों को कड़ा करने का वादा किया था। अमेरिका के बाद क्या होगा छात्रों का विकल्प नए प्रस्ताव से न केवल भारतीय छात्रों, बल्कि अन्य देशों के छात्रों पर भी असर पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि इससे कई छात्र अब कनाडा और यूरोप जैसे वैकल्पिक देशों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां 2025-26 के लिए भारतीय आवेदनों में 20% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस खबर से छात्रों में घबराहट फैल गई है। कई छात्र अब जल्दी से H-1B वीजा के लिए आवेदन करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसकी लॉटरी प्रक्रिया और सीमित कोटा इसे मुश्किल बनाते हैं। अगर OPT खत्म होता है, तो भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई और करियर का सपना अधूरा रह सकता है। यह स्थिति भारत-अमेरिका के शैक्षिक और आर्थिक रिश्तों पर भी सवाल उठाती है। recent visitors 55