इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए दिल्ली से आई टीम ने आमद दी, क्या आठवीं बार रहेगा ताज बरकरार ?

इंदौर स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम ने सर्वेक्षण की शुरुआत खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है।  टीम खजराना क्षेत्र की बस्तियों में भी पहुंची और सफाई व्यवस्था को देखा। इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए दिल्ली से आई टीम ने आमद दे दी है। नगर निगम भी स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है। सवाल यह उठता है कि क्या आठवीं बार भी इंदौर के सिर पर स्वच्छता का ताज बरकरार रहेगा या कोई दूसरा शहर इसे पहनेगा। शुक्रवार से शहर में सर्वेक्षण शुरू होगा। नगर निगम मेयर और अफसरों को दावा है कि इस बार भी रैंकिंग में पहले पायदान पर इंदौर नंबर वन रहेगा। बीते दो-तीन वर्षों में जो शहर हमसे कमतर रहे है, वे भी इस बार पहले स्थान पर आने के लिए खूब मेहनत कर रहे है। शहरवासी मानते है कि पहले की तुलना में इंदौर में सफाई थोड़ी कमजोर हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर के चार हजार से ज्यादा शहरों में शुरू हो चुका है। सर्वे की तैयारी इंदौर नगर निगम ने चार माह पहले से की थी, लेकिन सर्वे देरी से होने के कारण बार-बार वाॅल पेटिंग, बेकलेन सफाई करना पड़ी। इस बार इंदौर को प्रिमियर लीग में रखा है। इस लीग में सूरत और नवी मुंबई से इंदौर को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछली बार सूरत ने इंदौर के साथ पहला पुरस्कार संयुक्त रुप से साझा किया था। इस बार मुकाबला और कड़ा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम सुबह खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है, हालांकि इंदौर का स्वच्छता सर्वेक्षण विधिवत रुप से शुक्रवार से शुरू होगा। टीम बस्ती व काॅलोनियों में जाकर सफाई व्यवस्था का आंकलन करेगी। इस बार सर्वे में यह होंगे सफाई के मापदंड – ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन व्यवस्थित करना और उसके फिर से उपयोग का तरीका -कचरा कैसे अलग-अलग किया जा रहा है और उसका संग्रहण कैसे होता है। -शहर की जल निकासी व्यवस्था कैसी है। जल के पुन: उपयोग के लिए शहर क्या कर रहे है। – शहरवासी सफाई से कितने संतुष्ठ है। उनका फीडबैक भी सर्वे में शामिल रहेगा। -सफाईकर्मियों के लिए नगरीय निकाय क्या सुरक्षा उपाय अपनाते है और उनके लिए क्या सुविधाएं है।   recent visitors 51

विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गत्ते रखे हुए थे, लगी आग, समय रहते आग पर पाया काबू

भोपाल राजधानी भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर गुरुवार दोपहर बाद करीब पौने चार बजे आग लग गई। आग दूसरी मंजिल पर उस स्थान पर लगी, जहां भवन का रिनोवेशन किया जा रहा था। गनमीत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और बड़ी हानि होने से बच गई। यह पहली बार नहीं है, जब प्रदेश स्तरीय कार्यालय में आग लगी है। इसके पहले विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन में आग की लपटें उठती रही हैं। जानकारी के अनुसार, विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गत्ते रखे हुए थे। उसी गत्तों से आग का धुआं उठना शुरू हुआ। सूचना के बाद मौके पर चार दमकलों को भेजा गया, जिससे आग समय पर काबू में आ गई। हादसा घुमक्कड़ विभाग के विकास आयुक्त कार्यालय में हुआ है। इसी मंजिल पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का विकास आयुक्त कार्यालय भी है, जहां कुछ वर्षों पहले देर रात भीषण आग लगी थी। वह आग इतनी भीषण थी कि सुबह तक बुझ नहीं सकी थी। कुछ साल पहले इसी इमारत की पांचवीं मंजिल में बीज एवं फार्म विकास कार्यालय में आग लग गई थी। इस आगजनी में अमानक बीज से जांच और विभाग के कर्मचारियों की विभागीय जांच संबंधी फाइलें जलकर खाक हो गई थीं। सहायक पुलिस आयुक्त सुरक्षा अविनाश शर्मा ने बताया कि आग लगने से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। जांच कर पता लगाया जा रहा है कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज तो नहीं जले हैं। सतपुड़ा भवन में जून 2023 में लगी थी भीषण आग मध्यप्रदेश के दूसरे सबसे बड़े प्रदेश स्तरीय कार्यालय सतपुड़ा भवन के पश्चिमी ब्लॉक में 12 जून 2023 को दोपहर में भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भीषण भी कि चौथी मंजिल से छठवीं मंजिल तक पहुंच गई थी और तीनों मंजिल पर स्थित संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग का अधिकांश रिकॉर्ड जलकर खाक हो गया था। आग से इमारत इतनी कमजोर हो गई, उसकी मरम्मत का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। इस बीच सतपुड़ा भवन को ही तोड़कर नया कार्यालय बनाए जाने पर भी प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। बड़ी मशक्कत से 20 घंटे बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका था।   मंत्रालय की पुरानी इमारत में भी लगी भीषण आग मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ भवन (मंत्रालय) की पुरानी इमारत के पांचवीं मंजिल पर 9 मार्च 2024 को भीषण आग लग गई थी। आग लगने से मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन आने वाले सीएम स्वेच्छानुदान, आर्थिक सहायता सहित पांचवीं और छठवीं मंजिल में रखा महत्वपूर्ण दस्तावेज और कबाड़ जलकर खाक हो गया था। recent visitors 60

राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई टली, कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 3 अप्रैल नियत की

नई दिल्ली कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में गुरुवार को सुल्तानपुर की एमपीएमएलए विशेष कोर्ट में सुनवाई टल गई। दीवानी न्यायालय में होली मिलन कार्यक्रम के आयोजन के कारण अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे जिसके चलते सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 3 अप्रैल 2025 नियत की है। इस दिन राहुल गांधी के अधिवक्ता अगले गवाह से जिरह करेंगे। यह मामला भारतीय जनता पार्टी नेता विजय मिश्रा द्वारा 2018 में दायर किया गया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने कर्नाटक चुनाव के दौरान अभद्र टिप्पणी की थी, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुईं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद राहुल गांधी ने फरवरी 2024 में कोर्ट में सरेंडर किया था और उन्हें जमानत मिल गई थी। 26 जुलाई 2024 को राहुल ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था।   इसके बाद कोर्ट ने परिवादी को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। हालांकि, अधिवक्ताओं की हड़ताल और अन्य कारणों से कई बार सुनवाई टल चुकी है। 11 फरवरी को राहुल के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने परिवादी से जिरह की थी और अब अगले गवाह से जिरह के लिए 3 अप्रैल की तारीख तय की गई है। कोर्ट की कार्यवाही व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही है और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जा रहा है फिलहाल, यह मामला सुचारु रूप से चल रहा है, और अगली सुनवाई में आगे की प्रगति की उम्मीद है।   recent visitors 133

31 मार्च तक एक लाख युवाओं को बिना गारंटी मिलेगा 5 लाख का लोन: सीएम योगी

गोंडा 31 मार्च तक एक लाख युवाओं को बिना गारंटी के पांच लाख रुपये का ऋण का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। प्रत्येक जनपद में 25 से 27 मार्च तक मेला लगाकर ऋण वितरित किए जाएंगे। ये आश्वासन गुरुवार को स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय गोंडा में आयोजित ऋण व टूलकिट वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत तीन लाख से अधिक युवाओं ने आवेदन किए हैं। 30 हजार से अधिक युवाओं के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। 17 हजार से अधिक युवाओं को ऋण मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष एक लाख युवाओं को ऋण दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की ताकत, वहां के युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा से मापा जा सकता है। जहां युवा ऊर्जा के लिए अवसर होंगे, वहां कोई ताकत बाल बांका नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानवता के समागम को प्रयागराज में पूरी दुनिया ने देखा है। आस्था के सम्मान समृद्धि का साधन बना। महाकुंभ के आयोजन ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की आधारशिला को आगे बढ़ाया है। उप्र में होली का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन महाकुंभ पर सवाल उठाने वाले (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) अपने राज्य में हिंसा को नहीं रोक सके। यूपी में आज पांच कारीडोर हैं। होली से ठीक पहले सरकार ने पुलिस भर्ती परीक्षा के तहत 60244 युवाओं को नौकर दी है, इनमें 12 हजार बेटियां शामिल हैं। 2017 के पहले पुलिस में सिर्फ दस हजार बेटियों को नौकरी मिली थी। 1.56 लाख की पुलिस भर्ती में भी उप्र सरकार ने 25 हजार बेटियों को नौकरी दी थी। हमने तय किया है प्रत्येक भर्ती में 20 प्रतिशत नौकरी बेटियों को देंगे। उप्र की डबल इंजन सरकार 7.50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है। युवाओं को स्वरोजगार से जोडने के लिए ओडीओपी, विश्वकर्मा श्रम् सम्मान व मुख्यमंत्र युवा उद्यमी विकास अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडा व बहराइच में बाईपास निर्माण की स्वीकृति दे दी गई है। रोजगार के लिए ठोकरें खाने वाला युवा उद्यमी बनेगी। युवा अपने उद्यम से उप्र को दे की नंबर वन अर्थव्यवस्था बना सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोन दिलाने के लिए पैसा मांगने वालों की शिकायत करें। जांच कराकर ऐसी कार्रवाई करेंगे कि नजीर बन जाएगी। मुख्यमंत्री ने देवीपाटन मंडल के 1423 युवाओं को 55.39 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया। ओडीओपी के तहत 200 शिल्पकारों को टूलकिट वितरित किया। मुख्यमंत्री ने जिला पंचायत सभागार में विकास कार्यक्रम, कानून व्यवस्था व राजस्व वाद निस्तारण की समीक्षा की। recent visitors 50

उज्जैन में जीआई टैग के लिए प्रेजेंटेशन बैठक हुई, बुरहानुपर के केले में मिनरल्‍स का भंडार, बताईं खूबियां

बुरहानपुर करीब दो साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद गुरुवार को उज्जैन में जीआई टैग के लिए प्रेजेंटेशन बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश के सोलह से ज्यादा जिलों के अधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन दस जिलों के अधिकारी ही शामिल हुए। साथ ही केंद्र सरकार की टीम और जीआई टैग मप्र के डायरेक्टर लक्ष्मीकांत दीक्षित मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल बुरहानपुर जिले के विज्ञानी और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने केले की विशेषता बताई। इसके साथ ही देवास जिले से पहुंचे अधिकारियों ने वहां के खुरचन (मलाई से बना मिष्ठान) और गुलाब जामुन की विशेषता बताई। इसके अलावा जीआई टैग के लिए नरसिंहपुर के बैगन व इमली और इंदौर के आलू को भी शामिल किया गया है। सभी जिलों के अधिकारियों ने अपने उत्पादों की विशेषता, गुणवत्ता और उनमें मौजूद तत्वों के संबंध में जानकारी दी। केंद्र से आई टीम प्रेजेंटेशन के दौरान सामने आए तथ्य व जानकारी लेकर दिल्ली रवाना हो गई है। इस बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। वहां मीडिया का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस प्रेजेंटेशन का परिणाम आ सकता है। यदि बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिला तो इसके एक्सपोर्ट में कई गुना की वृद्धि संभव है। वर्ष 1960 से शुरू केले का उत्पादन जिले में केेले का उत्पादन वर्ष 1960 से शुरू हुआ था। पहली बार जलगांव से बैलगाड़ी में टिश्यू कल्चर लाकर पांच एकड़ खेत में फसल लगाई गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य किसानों ने फसल लगाना शुरू किया। इससे पहले तक जिले में मोसम्बी और संतरे की खेती की जाती थी। यह जिला चारों ओर से पहाड़ों से घिरा है। केला उत्पादन के लिए जलवायु पूरी तरह उपयुक्त है। छब्बीस हजार हेक्टेयर में होता है केला जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर में केले का उत्पादन होता है। इस काम में 16 हजार से ज्यादा किसान सक्रिय हैं। चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रजेंटेशन तैयार किया था। इनमें जिले में केले का इतिहास, मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु और पोषक तत्व शामिल थे। केले को जीआई टैग प्रदान करने के लिए वर्ष 2023 में आवेदन किया गया था। अब जाकर जीआई टैगिंग के लिए बैठक बुलाई गई। उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर का केला स्वाद और गुणवत्ता में हमेशा से बेहतर रहा है। यही वजह है कि इसकी मांग देश के कई राज्यों के साथ खाड़ी देशों तक है।   recent visitors 60

सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है

नई दिल्ली क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट जगत में कोई भी पहचान देने की जरूरत नहीं है। उनके योगदान को शब्दों में व्यक्त करना बेहद मुश्किल है। हालांकि, क्रिकेट की दुनिया से रिटायरमेंट लेने के बाद भी उनका संबंध खेल से बना हुआ है। क्या आप जानते हैं कि बीसीसीआई (BCCI) सचिन तेंदुलकर को हर महीने कितनी पेंशन देती है? अगर नहीं, तो इस लेख में हम आपको यही जानकारी देंगे, साथ ही यह भी बताएंगे कि अन्य क्रिकेटरों को क्या पेंशन मिलती है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2004 में एक पेंशन योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य रिटायर होने के बाद क्रिकेटरों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत पेंशन राशि खिलाड़ी के टेस्ट मैचों की संख्या पर आधारित थी। यानी, जितने ज्यादा टेस्ट मैच खेले होंगे, उतनी अधिक पेंशन मिलती है। यह योजना क्रिकेटरों की लंबी सेवा और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए बनाई गई थी। सचिन तेंदुलकर को कितनी पेंशन मिलती है? सचिन तेंदुलकर के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है। यह पेंशन उनकी लंबी क्रिकेट यात्रा और योगदान के आधार पर तय की गई है। बीसीसीआई का यह कदम सचिन जैसे महान खिलाड़ी के सम्मान के रूप में देखा जाता है। अन्य क्रिकेटर्स को क्या मिलती है पेंशन? सचिन तेंदुलकर के अलावा बीसीसीआई कई अन्य महान क्रिकेटरों को भी पेंशन देती है। उदाहरण के तौर पर: युवराज सिंह को हर महीने 60,000 रुपये की पेंशन मिलती है। विनोद कांबली को 6,30,000 रुपये की सालाना पेंशन मिलती है। यह पेंशन क्रिकेटरों को उनके योगदान के आधार पर दी जाती है, और यह उन खिलाड़ियों के लिए एक तरह का सम्मान और उनके क्रिकेट करियर के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है। recent visitors 54

भोपाल के जयप्रकाश चिकित्सालय में वेतन घोटाला: ठेकेदार और सुपरवाइजर की मिलीभगत से कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन

Salary scam in Bhopal’s Jaiprakash Hospital: Employees are not getting salary due to collusion between contractor and supervisor भोपाल (ब्यूरो रिपोर्ट)। जयप्रकाश चिकित्सालय में कर्मचारियों की वेतन में हो रही कालाबाजारी,ठेकेदार एवं सुपरवाइजर की मिली भगत से कर्मचारियों का दो महीने से वेतन नहीं मिल रहा जब कर्मचारियों की मांगों को लेकर,समाज सेविका मृणालिनी सेंगर जयप्रकाश चिकित्सालय पहुंची,और ठेकेदार से सवाल जवाब किया तो,सुपरवाइजर शिव प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि,सरकार हमें पैसे नहीं दे रही तो,हम कहां से पैसे दें,वहीं आपको बता दें कि,लगभग इस अस्पताल के अंदर 200 कर्मचारी हैं जिनकी दो से तीन माह तक की सैलरी नहीं मिली है,वही इस अस्पताल में विधवा महिला कर्मचारी है, जिसकी 7 माह से वेतन ही नहीं मिला,जिसकी शिकायत उन्होंने कई जगह की है, लेकिन इसके बावजूद भी समस्या का निराकरण नहीं हो सका,सिविल सर्जन राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि,मैं इस मामले में कुछ नहीं कह सकता,जबकि पूरा आरोप उन पर ही लग रहा है एक कर्मचारी ने सीएम हेल्प लाइन में शिकायत की,तो उस पर दबाव बनाकर शिकायत को वापस करवा दी गई recent visitors 91