जीएसटी में बड़ा बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा यह नया नियम, क्या बदलावों से व्यापारियों पर असर पड़ेगा?

नई दिल्ली भारत में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के तहत, इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (ISD) सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इस नए सिस्टम के माध्यम से, राज्य सरकारें एक ही स्थान पर दी जा रही शेयर्ड सर्विसेज पर उचित टैक्स वसूल करने में सक्षम होंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू का सही तरीके से वितरण सुनिश्चित करना है। ISD मैकेनिज्म के तहत, यदि एक बिजनेस कई राज्यों में ऑपरेट करता है, तो उसे अपने कॉमन इनपुट सर्विसेज के इनवॉइस को एक स्थान पर केंद्रीकृत करने की अनुमति मिलती है। इन सर्विसेज में घरेलू या इम्पोर्टेड सर्विसेज शामिल हो सकती हैं। यह मैकेनिज्म व्यापारियों को यह सुविधा देता है कि वे अपनी शाखाओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को सही तरीके से वितरित कर सकें। इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या होता है? इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वह टैक्स है जो एक रजिस्टर्ड बिजनेस या इंडिविजुअल किसी वस्तु या सेवा की खरीद पर चुकता करता है। इसे उस समय आउटपुट टैक्स के भुगतान के दौरान घटाया जा सकता है। सरल शब्दों में, ITC एक व्यापार के लिए भुगतान किए गए जीएसटी टैक्स का लाभ है, जिसे वह अपने द्वारा बेची गई वस्तुओं या सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स से घटा सकता है। पुरानी व्यवस्था और ISD के लाभ इससे पहले, व्यवसायों को अपने अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशंस के बीच ITC का वितरण करने के लिए ISD या क्रॉस-चार्जिंग मेथड का इस्तेमाल करने का विकल्प था। अब, ISD मैकेनिज्म को लागू करने से, विभिन्न शाखाओं के लिए ITC का वितरण और भी आसान हो जाएगा। अगर किसी व्यापार ने ISD मैकेनिज्म का उपयोग नहीं किया, तो वह अपनी शाखाओं के लिए ITC प्राप्त नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, अगर ITC का गलत वितरण होता है, तो टैक्स अथॉरिटीज उस राज्य से ब्याज सहित राशि वसूल सकती हैं। गलत डिस्ट्रीब्यूशन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो 10,000 रुपये या गलत डिस्ट्रीब्यूटेड ITC के मूल्य के बराबर हो सकता है, जो भी अधिक हो। क्या होगा अगर नियमों का पालन न किया गया? ISD मैकेनिज्म के तहत किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर, टैक्स अथॉरिटीज उस राज्य से ब्याज के साथ राशि वसूलने का अधिकार रखती हैं। साथ ही, यदि कोई व्यवसाय ITC के वितरण में गलतियां करता है, तो उसे जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। यह जुर्माना 10,000 रुपये या गलत वितरण किए गए ITC के मूल्य का होगा, जो भी ज्यादा हो। क्या बदलावों से व्यापारियों पर असर पड़ेगा? इस बदलाव का व्यापारियों पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें अपने बिजनेस संचालन में इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम को सही तरीके से लागू करना होगा। अगर वे इसमें कोई लापरवाही करते हैं, तो उन्हें टैक्स या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए व्यापारियों को 1 अप्रैल 2025 से पहले इस नए नियम को समझना और अपनी प्रणाली में लागू करना जरूरी है। recent visitors 44

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को मोहन सरकार की तरफ से एक बाद एक बड़ी खुशखबरी मिल रही

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को मोहन सरकार की तरफ से एक बाद एक बड़ी खुशखबरी मिल रही हैं, हाल ही में सरकार ने 7वें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ते देने का ऐलान बजट में किया था, जो 1 अप्रैल से लागू होने वाला है, जबकि अब सरकार ने प्रमोशन का रास्ता भी साफ कर दिया है. मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को 9 साल बाद फिर से पदोन्नति मिलेगी, क्योंकि सीएम मोहन यादव ने 9 साल से पदोन्नति व्यवस्था पर लगी रोक को फिर से बहाल करने का फैसला कर दिया है, जिससे प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर देखी जा रही है. मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन दरअसल, मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ रिटायर कर्मचारियों को राज्य पुनर्गठन की धारा-49 से मुक्त करने का ऐलान कर दिया है. सीएम मोहन के इस ऐलान से प्रदेश के सरकारी कर्मचारी खुश नजर आ रहे हैं. क्योंकि पिछले 9 साल से प्रमोशन की राह देख रहे कर्मचारियों का इंतजार अब खत्म हो जाएगा. जिसके लिए मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने सीएम मोहन यादव का धन्यवाद भी जताया है. सीएम मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल में न्यू मार्केट में सरकरी कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासों का शिलान्यास किया था, इस दौरान उन्होंने यह घोषणा की है. जिसमें सरकारी कर्मचारियों के मंडलों के प्रमुख भी थे. यह इलाका भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में आता है, जहां राजधानी के सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी रहते हैं, ऐसे में कर्मचारी संगठन लंबे समय से पदोन्नति व्यवस्था पर लगी रोक को हटाने की मांग भी कर रहे थे, जिसे सीएम मोहन यादव ने पूरा कर दिया है. 7वें वेतनमान के हिसाब से मिलेगा भत्ता बता दें कि इससे पहले बजट में भी मोहन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान किया था, अब 1 अप्रैल से राज्य के सभी कर्मचारियों को 7वें वेतनमान के हिसाब से ही महंगाई भत्ते दिए जाएंगे. अब तक पुरानी पद्धति चल रही थी, लेकिन 7वें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ते मिलने से सरकारी कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा. जबकि अब प्रमोशन का रास्ता भी साफ हो गया है.  recent visitors 45

UFBU ने 24-25 मार्च को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान, चार दिन तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी

मुंबई अगर आप अगले हफ्ते बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे देशभर में सार्वजनिक और निजी दोनों बैंकों की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। हड़ताल का आह्वान भारतीय बैंकों के संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ बातचीत असफल होने के बाद किया गया। किन बैंकों पर पड़ेगा असर? हालांकि SBI, PNB, BoB, ICICI और HDFC बैंक ने हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हड़ताल का असर सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) पर पड़ सकता है। इससे ग्राहकों को चार दिन तक बैंकिंग सेवाओं में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। क्या है UFBU और कौन से बैंक यूनियन इसमें शामिल हैं? यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स (UFBU) एक संगठन है जिसमें 9 प्रमुख बैंक यूनियन्स शामिल हैं। यह 8 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें शामिल प्रमुख यूनियन्स हैं- ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA)। बैंक यूनियनों की मांगें क्या हैं? बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगें सरकार और IBA के सामने रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:     बैंकों में सभी पदों पर पर्याप्त भर्ती की जाए, ताकि शाखाओं में स्टाफ की कमी न हो और ग्राहक सेवा बेहतर हो सके।     बैंकों में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     सभी बैंकों के लिए पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए, जैसे कि RBI, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों में लागू है।     परफॉर्मेंस रिव्यू और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लिया जाए, जिससे नौकरी की सुरक्षा बनी रहे और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्वायत्तता कमजोर न हो।     बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्राहकों द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार से बचा जा सके। मैनपावर घटने से बैंकिंग सेवाएं हो रहीं प्रभावित बैंक कर्मी संगठनों ने कहा कि पिछले 11 साल में देश के सार्वजनिक बैंकों में एक लाख 39 हजार 811 कर्मी घट गए हैं। ये पद्द रिक्त हैं। सरकारी बैंकों में ग्राहकों की सेवा के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। बैंक शाखाओं में कर्मियों की बड़ी कमी के कारण संतोषजनक सेवाएं नहीं मिलने से अनियंत्रित लोगों कर्मियों पर हमला कर देते हैं। इस लिए बैंकों में पर्याप्त संख्या में कर्मियों की नियुक्ति की जाए और कर्मियों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाय, ताकि ग्राहकों को संतोषजनक सेवाएं प्रदान की जा सकें और कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार कम किया जा सके। बैंककर्मियों की मांग     सभी संवर्गों में पर्याप्त भर्ती, अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने     बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन काम का नियम लागू करने     परफॉर्मेंस रिव्यू और पीएलआई संबंधित सरकारी निर्देश वापस हो     अनियंत्रित जनता के हमले से बचाने के लिए बैंक कर्मियों की सुरक्षा     सरकारी बैंकों में कामगार, अधिकारी और निदेशकों के रिक्त पदों की नियुक्ति     सरकारी कर्मियों के तर्ज पर 25 लाख रुपए की सीमा बढ़ाने के लिए ग्रेच्युटी अधिनियम में संशोधन     सरकारी बैंकों में खाली पदों को जल्द भरा जाए।     ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन कर इसकी अधिकतम सीमा ₹25 लाख की जाए, जैसा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू है।     बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी नौकरियों की आउटसोर्सिंग को बंद किया जाए।     बैंकिंग सेक्टर में किसी भी प्रकार की अनुचित श्रम नीतियों पर रोक लगाई जाए। चार दिन तक बैंक सेवाएं रहेंगी प्रभावित 22 मार्च को महीना का चौथा शनिवार है, जो सभी सरकारी और निजी बैंकों के लिए अवकाश होता है। 23 मार्च को रविवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी रहेगी। 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि बैंकिंग सेवाएं लगातार चार दिन तक प्रभावित रहेंगी। किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के उपाध्यक्ष पंकज कपूर ने ANI को बताया कि हड़ताल के कारण चेक क्लीयरेंस, नकद लेन-देन, ऋण सेवाएं और धन प्रेषण जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि, ATM, UPI और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन बड़ी राशि के ट्रांजेक्शन और चेक क्लीयरेंस में देरी हो सकती है।   recent visitors 59

जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं के हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता : मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि एक महिला द्वारा अकेले में पोर्न देखना और हस्तमैथुन करना उसके पति के प्रति क्रूरता नहीं हो सकती है। फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति आर पूर्णिमा की खंडपीठ ने बुधवार को कहा, "जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं द्वारा हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता है। पुरुष हस्तमैथुन करने के तुरंत बाद संभोग में शामिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं होगा। यह भी सिद्ध नहीं किया गया है कि अगर पत्नी को हस्तमैथुन की आदत है तो पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे।" इस मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा, "अगर शादी के बाद कोई महिला विवाहेतर संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार बन सकता है। लेकिन आत्म-सुख में लिप्त होना विवाह विच्छेद का कारण नहीं बन सकता है। किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि यह पति पर क्रूरता है। केवल निजी तौर पर पोर्न देखने में प्रतिवादी (पत्नी) का कृत्य अपीलकर्ता (पति) के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता है। यह देखने वाले पति या पत्नी के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।'' कोर्ट ने आगे कहा, ''अगर कोई पोर्न देखने वाला दूसरे पति या पत्नी को अपने साथ शामिल होने के लिए मजबूर करता है तो यह निश्चित रूप से क्रूरता माना जाएगा। अगर यह दिखाया जाता है कि इस लत के कारण किसी के वैवाहिक दायित्वों के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो यह कार्रवाई योग्य आधार प्रदान कर सकता है।" आपको बता दें कि अदालत करूर जिला के फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाले व्यक्ति (अपीलकर्ता) द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने तलाक की मांग करने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। दोनों की शादी जुलाई 2018 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक मंदिर में हुई थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी और इस विवाह से कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। वे दिसंबर 2020 में अलग हो गए। पत्नी ने जहां वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन दायर किया, वहीं पुरुष ने तलाक मांगा। फरवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने पुरुष की याचिका खारिज कर दी। आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने 2024 में वर्तमान अपील को प्राथमिकता दी थी। पत्नी के खिलाफ क्या-क्या लगाए आरोप पति के मुताबिक, वह एक खर्चीली है। पोर्न देखने की आदी है। अक्सर हस्तमैथुन करती है। घर के काम करने से इनकार करती है। अपने ससुराल वालों के साथ बुरा व्यवहार करती है। फोन पर लंबे समय तक बात करती है। पत्नी ने हालांकि सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अगर वे सच होते तो वे करीब दो साल से एक साथ नहीं रह रहे होते। जजों ने माना कि पति क्रूरता से संबंधित अन्य आरोपों को साबित करने में सक्षम नहीं है। पत्नी द्वारा उठाया गया दूसरा आधार यह है कि उसकी पत्नी यौन रोग से पीड़ित है। हालांकि उसने कहा था कि वह शारीरिक रूप से पीड़ित है। recent visitors 41

34 शराब दुकानों पर नहीं मिला खरीदार, फरवरी से चल रही है नीलामी प्रक्रिया, छठी बार बदली नीलामी की रणनीति

इंदौर इंदौर शहर की 34 शराब दुकानें आबकारी विभाग के लिए गंभीर समस्या बन गई हैं। पांच बार नीलामी प्रक्रिया आयोजित करने के बावजूद 302 करोड़ रुपये मूल्य की इन दुकानों को खरीदने के लिए कोई भी व्यापारी आगे नहीं आया है। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने अब छठी बार इन दुकानों की नीलामी करने का निर्णय लिया है। इस बार विभाग ने दुकानों को 13 की बजाय 18 समूहों में विभाजित कर दिया है, जिससे व्यापारियों को अधिक विकल्प मिल सके। इसके अलावा, नीलामी में कम कीमत पर बोली लगाने का विकल्प भी जोड़ा गया है, ताकि व्यापारियों को आकर्षित किया जा सके। फरवरी से चल रही है नीलामी प्रक्रिया हर वित्तीय वर्ष की तरह इस बार भी 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक के लिए शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया फरवरी में शुरू की गई थी। नई शराब नीति के अनुसार, दुकानों की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, जिससे कई व्यापारियों ने रुचि नहीं दिखाई। शुरुआती प्रक्रिया में 173 दुकानों में से 64 दुकानों को दोबारा संचालित करने के लिए मौजूदा व्यापारियों ने आवेदन नहीं किया। इस पर आबकारी विभाग ने लॉटरी के माध्यम से इन दुकानों की नीलामी करने की कोशिश की, लेकिन इनमें से भी 34 दुकानें नहीं बिक सकीं। इसके बाद विभाग ने मार्च में चार बार नीलामी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन एक भी व्यापारी ने भाग नहीं लिया। विज्ञापन छठी बार बदली नीलामी की रणनीति लगातार असफल नीलामी के बाद आबकारी विभाग ने छठी बार नई प्रक्रिया की घोषणा की है। इस बार 34 दुकानों को छोटे समूहों में बांटते हुए 18 समूहों में विभाजित किया गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बदलाव के बाद व्यापारी अधिक रुचि दिखा सकते हैं। नीलामी प्रक्रिया 22 मार्च तक जारी रहेगी, और उसी दिन आए हुए आवेदनों को खोलते हुए दुकानों की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। बोली लगाने पर मिल सकती है छूट आबकारी विभाग ने दुकानों को 18 समूहों में बांटने के साथ ही उनकी कीमतों में कमी करने का भी निर्णय लिया है। पहली बार विभाग ने तय कीमत से 5 प्रतिशत कम पर भी बोली लगाने की अनुमति दी है। यदि कोई व्यापारी कम राशि की बोली लगाता है, तो इसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद दुकान को कम कीमत पर भी नीलाम किया जा सकेगा। इस नए फैसले से उम्मीद की जा रही है कि व्यापारी अधिक रुचि दिखाएंगे और विभाग की समस्या का समाधान हो सकेगा। recent visitors 65

इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए दिल्ली से आई टीम ने आमद दी, क्या आठवीं बार रहेगा ताज बरकरार ?

इंदौर स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम ने सर्वेक्षण की शुरुआत खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है।  टीम खजराना क्षेत्र की बस्तियों में भी पहुंची और सफाई व्यवस्था को देखा। इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए दिल्ली से आई टीम ने आमद दे दी है। नगर निगम भी स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है। सवाल यह उठता है कि क्या आठवीं बार भी इंदौर के सिर पर स्वच्छता का ताज बरकरार रहेगा या कोई दूसरा शहर इसे पहनेगा। शुक्रवार से शहर में सर्वेक्षण शुरू होगा। नगर निगम मेयर और अफसरों को दावा है कि इस बार भी रैंकिंग में पहले पायदान पर इंदौर नंबर वन रहेगा। बीते दो-तीन वर्षों में जो शहर हमसे कमतर रहे है, वे भी इस बार पहले स्थान पर आने के लिए खूब मेहनत कर रहे है। शहरवासी मानते है कि पहले की तुलना में इंदौर में सफाई थोड़ी कमजोर हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर के चार हजार से ज्यादा शहरों में शुरू हो चुका है। सर्वे की तैयारी इंदौर नगर निगम ने चार माह पहले से की थी, लेकिन सर्वे देरी से होने के कारण बार-बार वाॅल पेटिंग, बेकलेन सफाई करना पड़ी। इस बार इंदौर को प्रिमियर लीग में रखा है। इस लीग में सूरत और नवी मुंबई से इंदौर को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछली बार सूरत ने इंदौर के साथ पहला पुरस्कार संयुक्त रुप से साझा किया था। इस बार मुकाबला और कड़ा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम सुबह खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है, हालांकि इंदौर का स्वच्छता सर्वेक्षण विधिवत रुप से शुक्रवार से शुरू होगा। टीम बस्ती व काॅलोनियों में जाकर सफाई व्यवस्था का आंकलन करेगी। इस बार सर्वे में यह होंगे सफाई के मापदंड – ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन व्यवस्थित करना और उसके फिर से उपयोग का तरीका -कचरा कैसे अलग-अलग किया जा रहा है और उसका संग्रहण कैसे होता है। -शहर की जल निकासी व्यवस्था कैसी है। जल के पुन: उपयोग के लिए शहर क्या कर रहे है। – शहरवासी सफाई से कितने संतुष्ठ है। उनका फीडबैक भी सर्वे में शामिल रहेगा। -सफाईकर्मियों के लिए नगरीय निकाय क्या सुरक्षा उपाय अपनाते है और उनके लिए क्या सुविधाएं है।   recent visitors 51

विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गत्ते रखे हुए थे, लगी आग, समय रहते आग पर पाया काबू

भोपाल राजधानी भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर गुरुवार दोपहर बाद करीब पौने चार बजे आग लग गई। आग दूसरी मंजिल पर उस स्थान पर लगी, जहां भवन का रिनोवेशन किया जा रहा था। गनमीत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और बड़ी हानि होने से बच गई। यह पहली बार नहीं है, जब प्रदेश स्तरीय कार्यालय में आग लगी है। इसके पहले विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन में आग की लपटें उठती रही हैं। जानकारी के अनुसार, विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गत्ते रखे हुए थे। उसी गत्तों से आग का धुआं उठना शुरू हुआ। सूचना के बाद मौके पर चार दमकलों को भेजा गया, जिससे आग समय पर काबू में आ गई। हादसा घुमक्कड़ विभाग के विकास आयुक्त कार्यालय में हुआ है। इसी मंजिल पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का विकास आयुक्त कार्यालय भी है, जहां कुछ वर्षों पहले देर रात भीषण आग लगी थी। वह आग इतनी भीषण थी कि सुबह तक बुझ नहीं सकी थी। कुछ साल पहले इसी इमारत की पांचवीं मंजिल में बीज एवं फार्म विकास कार्यालय में आग लग गई थी। इस आगजनी में अमानक बीज से जांच और विभाग के कर्मचारियों की विभागीय जांच संबंधी फाइलें जलकर खाक हो गई थीं। सहायक पुलिस आयुक्त सुरक्षा अविनाश शर्मा ने बताया कि आग लगने से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। जांच कर पता लगाया जा रहा है कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज तो नहीं जले हैं। सतपुड़ा भवन में जून 2023 में लगी थी भीषण आग मध्यप्रदेश के दूसरे सबसे बड़े प्रदेश स्तरीय कार्यालय सतपुड़ा भवन के पश्चिमी ब्लॉक में 12 जून 2023 को दोपहर में भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भीषण भी कि चौथी मंजिल से छठवीं मंजिल तक पहुंच गई थी और तीनों मंजिल पर स्थित संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग का अधिकांश रिकॉर्ड जलकर खाक हो गया था। आग से इमारत इतनी कमजोर हो गई, उसकी मरम्मत का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। इस बीच सतपुड़ा भवन को ही तोड़कर नया कार्यालय बनाए जाने पर भी प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। बड़ी मशक्कत से 20 घंटे बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका था।   मंत्रालय की पुरानी इमारत में भी लगी भीषण आग मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ भवन (मंत्रालय) की पुरानी इमारत के पांचवीं मंजिल पर 9 मार्च 2024 को भीषण आग लग गई थी। आग लगने से मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन आने वाले सीएम स्वेच्छानुदान, आर्थिक सहायता सहित पांचवीं और छठवीं मंजिल में रखा महत्वपूर्ण दस्तावेज और कबाड़ जलकर खाक हो गया था। recent visitors 60