बिजली विभाग के कर्मचारी12 बाइक, 2 कूलर और TV उठा ले गए, बकायादारों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

उज्जैन  उज्जैन जिले के ग्रामीण इलाकों में बिजली बिल बकायादारों के खिलाफ बिजली कंपनी लगातार कार्रवाई कर रही है. जिले के 240 गांवों में 1500 से ज्यादा उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली कंपनी की टीमों ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. कार्रवाई के तहत अब तक सैकड़ों बाइक, फ्रिज और टीवी जब्त किए जा चुके हैं. यही नहीं बकायादारों के घरों के सामने से कार व ट्रैक्टर तक बिजली कंपनी की टीमें खींचकर ले जा रही हैं. इससे ग्रामीणों में रोष है. उज्जैन जिले में बिजली कंपनी का 9 करोड़ बकाया बिजली कंपनी के मुताबिक जिले में करीब 9 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है. बकायादारों को पहले नोटिस दिए गए. इसके बाद कुर्की वारंट जारी किए गए. इसके बाद भी बकाया नहीं भरने पर बिजली कंपनी की टीमें गांव-गांव जाकर कार्रवाई कर रही हैं. घरों से वाहन, कम्प्रेशर और घरेलू सामान जब्त किया जा रहा है. बिजली कंपनी का कहना है कि बकायादार इन सामान को वापस ले सकते हैं, बशर्ते उन्हें बकाया भरना पड़ेगा. बकाया नहीं भरने पर इन सामान को नीलाम किया जाएगा. नोटिस के बाद भी नहीं भरे बिल इसलिए जब्ती बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री अमरेश सेठ ने बताया "बकायादारों को कई बार नोटिस भेजे गए. बावजूद इसके बिल नहीं चुकाने पर हमें यह कार्रवाई करनी पड़ रही है. आगे भी ऐसे ही अभियान चलाए जाएंगे. कार्रवाई के दौरान कई उपभोक्ताओं ने मौके पर ही आंशिक राशि जमा कर दी. उदाहरण के तौर पर, सिंगावदा निवासी रतन थावर ने 26,825 रुपए में से 12,000 रुपए तुरंत जमा किए. वहीं अंबोदिया निवासी प्रेम भंवरलाल ने कम्प्रेशर जब्त होने के बाद 15,000 रुपए जमा कर दिए." अभी तक 300 बाइक जब्त की बिजली कंपनी के अनुसार अभी तक 300 से ज्यादा मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं. कई जगहों से टीवी और फ्रिज भी कब्जे में लिए गए हैं. बड़ोदिया काजी में विक्रमसिंह से बाइक जब्त होने के बाद उसने मौके पर 40,000 रुपये जमा कर दिए. वहीं. ग्रामीण आत्माराम का कहना है "पहले सरकार द्वारा छूट और किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब ऐसी राहत नहीं दी जा रही है, जिससे बिलों का बोझ बढ़ता जा रहा है." recent visitors 39

दिल्ली सरकार ने यमुना की सफाई के लिए की प्लानिंग, यमुना में ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने और पानी में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे

नई दिल्ली  दिल्ली में यमुना की सफाई को लेकर बीते दो दशकों में कई प्लानिंग हुईं। यमुना पर इस दौरान काफी खर्च भी किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। दिल्ली की यमुना अब भी नाले के समान ही नजर आ रही है। अब एक बार फिर नई दिल्ली सरकार ने यमुना को लेकर लोगों में आशा जगाई है। यमुना को साफ करने के इसी प्लान पर  पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से बात की। इस दौरान उनसे कई सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। 1. यमुना को साफ करने में कितना समय लग जाएगा? यह अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन मैं यह विश्वास जरूर दिला सकता हूं कि अगले दो से तीन साल में यमुना में फर्क को महसूस किया जा सकेगा। दिल्ली में यमुना नजर आने लगेगी और लोग इसके किनारों पर आकर नदी से जुड़ेंगे। इसके लिए हमने पहले दिन से कोशिश शुरू कर दी है। यमुना पर कई तरह के काम किए जा रहे हैं। 2. अगले तीन साल में यह फर्क लाने के लिए किन स्तरों पर काम किया जा रहा है? सबसे पहले तो हम यह कोशिश कर रहे हैं कि यमुना में एक बूंद पानी भी अनट्रीटेड न जाए। इसके लिए दिल्ली जल बोर्ड के माध्यम से STP पर काम शुरू हो गया है। दूसरा यमुना अभी दिल्ली में मरी हुई है। यमुना में ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम है। इसलिए पानी में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने की योजनाएं बन रही हैं। तीसरा यमुना में किसी भी इंडस्ट्री का वेस्ट न जाए इसके लिए भी काम शुरू हो रहा है। तीन सालों में 95 प्रतिशत सीवरेज समस्या को हम खत्म कर देंगे। 3. क्या आप मानते हैं प्रदूषण सिर्फ दिल्ली नहीं, हरियाणा से भी यमुना में घुल रहा है? हरियाणा से जब यमुना दिल्ली में आती है तो इसके पानी में ऑक्सीजन होता है। लेकिन दिल्ली में आने के बाद ऑक्सीजन खत्म हो जाता है। इसका मतलब यही है कि दिल्ली यमुना को अधिक प्रदूषित कर रही है। हरियाणा से भी यमुना में थोड़ा बहुत प्रदूषण आ रहा है। वह काम कर रहे हैं। हरियाणा का रोल यमुना को साफ करने में कम है। यमुना से आने वाला 90 प्रतिशत पानी लगभग साफ है। दिल्ली में आने से पहले हरियाणा में करीब आधा किलोमीटर के हिस्से में कुछ फैक्ट्रियां हैं जिससे सीमित मात्रा में प्रदूषण यमुना में आ रहा है। हरियाणा CM ने इसे रोकने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। 4. यमुना में आरती शुरू हो गई है। धार्मिक टूरिज्म की भी तैयारी है? नदियां दूसरे शहरों में आकर्षण का केंद्र हैं। हम दिल्ली में भी यमुना को उसी रूप में लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए यमुना को साफ करना हमारी प्राथमिकता है। रिवर फ्रंट का काम तेजी से चल रहा है। यह पूरा काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। यमुना के किनारे विकसित हुए पार्क से लोग यमुना से जुड़ रहे हैं। अगले दो से तीन सालों में यह फर्क राजधानी का हर व्यक्ति महसूस करेगा। 5. टूरिज्म बढ़ाने के लिए नदी में बहाव जरूरी है। अभी यमुना अधिकांश महीनों में सूखी रहती है? हम यूपी सरकार के साथ पानी बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। योजना के तहत यूपी सरकार हमें कच्चा पानी देगी और दिल्ली ट्रीटेड पानी यूपी को देगी। इससे यमुना में पानी का स्तर बढ़ेगा। उसे तेजी से फॉलोअप किया जा रहा है। उस कच्चे पानी को लेकर कैसे आना है इस पर काम हो रहा है। DJB के साथ इस पर मीटिंग हुई है। 6. यमुना के पानी में ऑक्सीजन का स्तर किस तरह बढ़ाया जाएगा? बीते दस सालों में यमुना में दिल्ली में सीवर काफी मात्रा में डाला गया है। यह सीवर नदी की निचली सतह में जमा हो चुका है। इस गाद को निकालने का काम किया जा रहा है। जैसे ही गाद निकलेगा पानी का बहाव बढ़ेगा। इसये पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता जाएगा। 7. 22 नालों को ट्रैप किया जाना है। अभी तक कितने को पूरी तरह ट्रैप कर पाए हैं? बड़ी संख्या में नाले ट्रैप कर लिए गए हैं। अगले सात से आठ महीने में सभी नालों को ट्रैप कर लिया जाएगा। हमारी चिंता STP को अपग्रेड करना और ठीक करना है ताकि यमुना में एक बूंद दूषित पानी न जाए। 8. एक्सपर्ट कहते आए हैं कि यमुना के एक्शन प्लान में उनसे सलाह नहीं ली जाती? यह NBT का अच्छा सुझाव है। कहीं से भी अच्छे सुझाव आएं, उसे शामिल किया जाना चाहिए। हम ऐसा जरूर करेंगे। सभी कंसलटेंट, सबजेक्ट एक्सपर्ट, रिवर एक्टिविस्ट आदि से हम सलाह लेंगे और यमुना को सबके सहयोग से साफ करेंगे। हमारा मकसद यमुना की सफाई है। 9. कई जगह पर यमुना में लोग कूड़ा डालते दिख रहे हैं। इसे रोकने के लिए क्या जुर्माना बढ़ाया जाएगा? जुर्माना बढ़ाने की बात तो नहीं है। लेकिन NBT ने यह अच्छा सुझाव दिया है। अब फोर्स भी बढ़ा रहे हैं ताकि यमुना के प्रमुख पॉइंट पर चौकसी बढ़ा सकें। जरूरत के हिसाब से यह फोर्स ड्रेन या यमुना में तैनात रहेगी ताकि कचरा यमुना में न जाए। एक बटालियन लेने की हम कोशिश कर रहे हैं। 10. यमुना की सहायक नदी साहिबी को रिवाइव करने का प्लान था? इसके लिए क्या कर रहे हैं? साहिबी नदी को रिवाइव करने का काम दिल्ली सरकार कर रही है। वह काम पहले भी LG वी के सक्सेना की निगरानी से शुरू हुआ था। इसका उस समय काफी असर दिखने लगा था। यमुना और नजफगढ़ ड्रेन में ऑक्सीजन बढ़ने लगा था। लेकिन पिछली सरकार ने कोर्ट में केस डाला और यह काम रुक गया। इन मामलों से जुड़े मुकदमों को वापस लिया जा रहा है। साथ ही विभिन्न डिपार्टमेंट के साथ इसे लेकर उनकी मीटिंग हो चुकी है।     recent visitors 50

425 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद, कीमत 27 लाख रुपये आंकी गई, दो तस्करों को गिरफ्तार

बलिया  यूपी-बिहार को जोड़ने वाले जयप्रभा सेतु के पुलिस पिकेट के पास पुलिस और सर्विलांस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 425 पेटी (3672 लीटर) अंग्रेजी शराब बरामद की। इस शराब की कीमत लगभग 27 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान जयप्रकाशनगर (भवन टोला) निवासी अमरजीत सिंह और गड़वार थाना क्षेत्र के सिंहाचवर निवासी मंजीत वर्मा के रूप में हुई है। प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने जयप्रभा सेतु के पास घेराबंदी की और पिकअप वाहन में लदी शराब के साथ दोनों तस्करों को धर दबोचा। सूचना मिली थी कि ये तस्कर भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब को बिहार ले जा रहे थे। कार्रवाई में बैरिया चौकी इंचार्ज सुशील कुमार यादव, एसआई अजय कुमार, सर्विलांस प्रभारी विश्वनाथ यादव, एसओजी के दिलीप पाठक और उनके सहयोगी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ बैरिया थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। इनके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं। प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि यह जांच की जा रही है कि तस्करी में और कौन-कौन शामिल है और यह शराब किस दुकान से लाई गई थी। इस कार्रवाई से क्षेत्र में शराब तस्करी पर नकेल कसने की कोशिश तेज हो गई है। recent visitors 57

प्रशिक्षण से अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मिलेगा मदद

रायपुर राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ द्वारा नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यशाला का  सफलतापूर्वक समापन हुआ। अटल नगर, नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के सभाकक्ष में 20 और 21 मार्च को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को सुदृढ़ करना, नीति-निर्माण को डेटा आधारित बनाना और योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना था। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिकारियों के लिए मूल्यांकन, क्यों, कब और कैसे विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में राज्य शासन के अधिकारियों को मानिटरिंग और इवैल्यूएशन के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी गयी। योजनाओं की प्रगति प्रभाविता को ट्रैक करने और परिणामों का विश्लेषण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। मूल्यांकन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, योजनाओं के प्रभाव को मापने के लिए लॉजिकल फ्रेमवर्क और थ्योरी ऑफ चेंज का उपयोग, डेटा संग्रह की पद्धतियां, प्रभावी नीति निर्माण के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यशाला में मूल्यांकन में आने वाली चुनौतियां और समाधान पर भी विस्तृत व्याख्यान दिया गया। कार्यशाला में प्रोग्राम/स्कीम इवैल्यूएशन के महत्व, उसके विभिन्न प्रकार, तरीकों, रूपरेखा (फ्रेमवर्क) और गुणवत्ता आश्वासन (क्वालिटी एश्योरेंस) पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रभावी मूल्यांकन से न केवल योजनाओं की सफलता और विफलता का विश्लेषण किया जा सकता हैए बल्कि सुधार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान डेटा संग्रह, विश्लेषण तकनीक, निगरानी एवं मूल्यांकन के सर्वाेत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को प्रभाव मूल्यांकन, प्रक्रियात्मक मूल्यांकन और परिणाम मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया गया। राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम ने बताया कि आयोग मूल्यांकन हेतु संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उपाय अपना रहा है। आने वाले समय में नीति निर्माण को डेटा संचालित और प्रभावी बनाने इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए पारदर्शी और सटीक मूल्यांकन आवश्यक है। यह प्रशिक्षण अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगा। कार्यशाला के समापन अवसर पर राज्य नीति आयोग की सदस्य सचिव डॉ. नीतू गोरडिया ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और डी.एम.ई.ओ. टीम को धन्यवाद देते हुए कहा, कि भविष्य में राज्य नीति आयोग और डी.एम.ई.ओ. इस तरह की और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, ताकि छत्तीसगढ़ में डेटा-संचालित शासन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। कार्यशाला में डी.एम.ई.ओ., नीति आयोग, भारत सरकार के निदेशक अबिनाश दास व उनकी एक्सपर्ट टीम द्वारा आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, डाटा गर्वनेंस क्वालिटी इंडेक्स एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क तथा मॉनिटरिंग व इवैल्यूएशन के बारे में प्रस्तुतीकरण व परिचर्चा की गई। उक्त कार्यशाला में सुशासन एवं अभिसरण विभाग, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, खाद्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, योजना विभाग सहित अन्य विभागों के राज्य एवं जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण शामिल हुये। recent visitors 37

विश्व जलदिवस पर ‘ग्लेशियर संरक्षण‘ थीम पर एक सेमिनार का आयोजन आज

जबलपुर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स लोकल सेंटर साउथ सिविल लाइन्स जबलपुर के तत्वावधान में आज शाम 06 बजे से विश्व जलदिवस पर ‘‘ग्लेशियर संरक्षण‘‘ थीम पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है। आयोजन समिति के अध्यक्ष इंजी. सुरेन्द्र सिंह पवार ने बताया कि इस सेमिनार में जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. राजीव चांडक मुख्य अतिथि रहेंगे, जबकि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जबलपुर के सीनियर जियोलॉजिस्ट श्री ए.एस. खान मुख्य वक्ता के रूप में अपना व्याख्यान देंगे। लोकल सेंटर के चेयरमेन श्री संजय कुमार मेहता, संयोजक डॉ. संजय के वर्मा, मानसेवी सचिव डॉ. राजीव जैन, आयोजक सचिव श्री राजेश ठाकुर एवं सहसंयोजक श्री मनीष वाजपेई ने इस महत्वपूर्ण सेमिनार में इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों एवं अन्य से उपस्थिति की अपील की है। recent visitors 62

मार्च के शेष 10 दिन बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे

इन्दौर मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मार्च के राजस्व संग्रहण महा अभियान एवं उपभोक्ता सुविधा के मद्देनजर इंदौर, उज्जैन, रतलाम जिले सहित मालवा निमाड़ के सभी 434 जोन, वितरण केंद्र के तहत बिजली बिल भुगतान केंद्रों को अगले दस दिनों 22 से 31 मार्च तक प्रतिदिन खुले रखने का निर्णय लिया हैं। भुगतान केंद्र शनिवार, रविवार को अवकाश के दिन के साथ ही गुड़ी पड़वा 30 मार्च, ईद उल फितर 31 मार्च के अवकाश के दिन भी खुल रहेंगे। बिजली उपभोक्ता बकाया देयकों का इन केंद्रों पर कार्यालय अवधि में भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा कैशलेस तरीके से देयकों का घर बैठे पेटीएम, फोन पे, गुगल पे, अमेजान इत्यादि माध्यमों, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड से भुगतान किया जा सकता हैं। कैशलेस बिजली बिल भुगतान पर प्रत्येक बिल पर निर्धारित छूट प्रदान की जाती हैं, यह कैशलेस छूट अगले बिल में स्पष्ट उल्लेखित होती हैं। recent visitors 37

आज से शुरू होगा सात दिवसीय विशाल पुस्तक मेला, मिलेगी अतिरिक्त छूट

ग्वालियर स्कूली बच्चों को उचित दाम पर किताबें, ड्रेस व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मेला परिसर स्थित दस्तकारी हाट बाजार (शिल्प बाजार) में आज दोपहर 2 बजे सात दिवसीय पुस्तक मेला (बुक फेयर) शुरू होगा। जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित हो रहे इस पुस्तक मेले का औपचारिक शुभारंभ इस दिन सायंकाल 5.30 बजे विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह एवं सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह सहित अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधिगणों की मौजूदगी में होगा। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने अभिभावकों व स्कूली विद्यार्थियों से पुस्तक मेले का लाभ उठाने की अपील की है। पुस्तक विक्रेताओं (ग्वालियर डिवीजन चिल्ड्रन बुक सेलर एसोसिएशन) ने पुस्तक मेले से किताबें, ड्रेस व स्टेशनरी खरीदने पर सभी तरह के डिस्काउंट (छूट) के अलावा अतिरिक्त छूट देने का निर्णय लिया है। व्यापारियों ने जिला प्रशासन द्वारा पुस्तक मेला लगाने के निर्णय का स्वागत किया है। साथ ही कहा है कि पुस्तक मेले से विद्यार्थियों व अभिभावकों को सभी तरह के डिस्काउंट के अलावा पुस्तकों की खरीदी पर 5 प्रतिशत, स्टेशनी पर 10 प्रतिशत तथा यूनीफॉर्म व अन्य सामग्री की खरीदी पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जायेगी। शिल्प बाजार परिसर में 22 मार्च से 29 मार्च तक आयोजित होने जा रहे इस पुस्तक मेले में ग्वालियर जिले में संचालित सभी प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकों के सेट, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म सस्ती दर पर खरीदी जा सकेंगीं। मेले में पुस्तकों व स्टेशनी इत्यादि की 81 दुकानें लगेंगीं। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने लिया मेले की तैयारियों का जायजा कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने शुक्रवार को शिल्प बाजार पहुँचकर पुस्तक मेले की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही इससे पहले अधिकारियों की बैठक लेकर पुस्तक मेले के सुव्यवस्थित आयोजन के लिये आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले में पेयजल, शौचालय व प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पुख्ता व्यवस्था की जाए। साथ ही पेड फूड स्टॉल भी लगाए जाएं। उन्होंने पुस्तक मेला परिसर में अग्नि सुरक्षा व विद्युत सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने पर भी विशेष जोर दिया। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने यह भी निर्देश दिए कि पुस्तक मेला परिसर में साफ-सफाई के विशेष इंतजाम किए जाएं। जगह-जगह डस्टबिन रखें, जिससे मेले में कचरा न फैले। उन्होंने पुस्तक मेला परिसर की सुबह-शाम नियमित सफाई करने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने सड़क आवागमन व्यवस्थित रखने और बच्चों के सुरक्षित आवागमन का ध्यान रखने पर विशेष बल दिया।  इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक कुमार, अपर कलेक्टर श्री कुमार सत्यम व श्री टी एन सिंह तथा अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। recent visitors 35