उज्जैन : महिला इंजीनियर को अश्लील मैसेज भेजने वाले कार्यपालन यंत्री के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली

उज्जैन उज्जैन नगर निगम की महिला सभी इंजीनियर को अश्लील मैसेज भेजने और रात में घर बुलाने के लिए दबाव बनाने वाले कार्यपालन यंत्री के खिलाफ कोतवाली थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. अभी कार्यपालन यंत्री फरार बताया जा रहा है. दरअसल, उज्जैन नगर निगम में सब इंजीनियर के पद पर पदस्थ 35 वर्षीय महिला अधिकारी ने अपने ही विभाग के कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव के खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. महिला सब इंजीनियर का आरोप है कि कार्यपालन यंत्री भार्गव ने लंबे समय से प्रताड़ित कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वे रात के समय उन्हें घर बुलाते थे. इसके अलावा फोन पर अश्लील बातें भी करते थे. महिला अधिकारी ने व्हाट्सएप चैटिंग के अलावा पीयूष भार्गव की ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर पुलिस के समक्ष पेश की थी, जिसके बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. एसपी प्रदीप कुमार शर्मा के मुताबिक आरोपी पीयूष भार्गव को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. अभी आरोपी फरार है. 'नौकरी छोड़ने का बना लिया था मन' महिला अधिकारी ने अपने शिकायत में यह भी लिखा है कि पीयूष भार्गव की वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि भार्गव दूसरी महिला अधिकारियों के साथ भी इस तरीके से बर्ताव कर सकता है. इसके बाद उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक की सलाह पर उन्होंने पुलिस में भी शिकायत की है. 7 दिनों में होगी जांच पूरी नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक ने बताया कि पीयूष भार्गव के खिलाफ उनके पास महिला अधिकारी ने शिकायत की है. महिला अधिकारी की शिकायत पर जांच कमेटी बनाई गई है जो कि सात दिनों मे अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. इसके बाद निगम की ओर से अलग से कार्रवाई की जाएगी. पहले भी हो चुका है विवाद कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव पूर्व में रिटायर हो चुका है. उसे संविदा के आधार पर रखा गया है. पूर्व में भी वे कई बार विवादों में रह चुके हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण करने वाली जांच एजेंसी भी जांच कर चुकी है. recent visitors 46

युजवेंद्र चहल और उनकी पत्नी धनश्री वर्मा को वकील ने कहा, तलाक हो गया है, शादी टूट गई

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और उनकी पत्नी धनश्री वर्मा का आज आधिकारिक रूप से तलाक हो गया है। कोर्ट में आज (20 मार्च) उनके तलाक पर अंतिम फैसला आया। दोनों मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए और उन्हें तलाक दे दिया गया। वकील ने कहा, "तलाक हो गया है, शादी टूट गई है। बता दें कि यह मामला क्रिकेट और ग्लैमर की दुनिया में काफी चर्चा में रहा है, क्योंकि दोनों की जोड़ी सोशल मीडिया पर बेहद पॉपुलर थी। लेकिन अब यह रिश्ता टूट गया है। बांद्रा फैमिली कोर्ट में धनश्री अपने चेहरे को ढककर कोर्ट पहुंचीं। दोनों ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।   युजवेंद्र चहल भी अपने वकील के साथ फैमिली कोर्ट पहुंचे, लेकिन उन्होंने मास्क और हुडी पहनकर अपने चेहरे को पूरी तरह ढक लिया, जिससे किसी को उनकी पहचान न हो। उनका कोर्ट परिसर में प्रवेश करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।   एलिमनी पर बनी सहमति बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के बीच 4.75 करोड़ रुपये के एलिमनी सेटलमेंट पर सहमति बन चुकी है। चहल ने पहले ही 2.35 करोड़ रुपये धनश्री को दे दिए हैं। युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा की शादी साल 2020 में बड़ी धूमधाम से हुई थी। हालांकि, पिछले एक साल से दोनों अलग रह रहे थे। हाल ही में धनश्री ने अपने इंस्टाग्राम से चहल के साथ तस्वीरें डिलीट कर दी थीं, लेकिन अब उन्हें दोबारा अनआर्काइव कर दिया है।   recent visitors 39

घनी टाइगर आबादी वाला देश का टाइगर रिजर्व बना रणथंभौर रचा इतिहास

सवाई माधोपुर राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व, जो विश्व पटल पर अपनी बाघों की अठखेलियों के लिए प्रसिद्ध है ने एक और कीर्तिमान रच दिया है। यह देश का सबसे घनी टाइगर आबादी वाला टाइगर रिजर्व बन गया है। यहां कुल 66 बाघ, बाघिन और शावक हैं, जिनमें 23 बाघ, 25 बाघिन और 18 शावक शामिल हैं। खास बात यह है कि रणथंभौर में टाइगर शावकों की संख्या कुल आबादी का लगभग 27.27% है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व 1334 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें केवल 940 वर्ग किलोमीटर में ही बाघ विचरण करते हैं। इस सीमित क्षेत्र में बाघों की इतनी अधिक संख्या ने इसे देश का सबसे घनी टाइगर आबादी वाला टाइगर रिजर्व बना दिया है। एक बाघ के हिस्से में औसतन 14.25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आता है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व को दो डिवीजन में विभाजित किया गया है। पहला डिवीजन 940 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें 600 वर्ग किलोमीटर को कोर एरिया और शेष को बफर एरिया कहा जाता है। इसके अलावा 128 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र पालीघाट चंबल घड़ियाल सेंचुरी का हिस्सा है। आमतौर पर एक टाइगर अपनी टेरेटरी पेड़ों पर स्प्रे (पेशाब) और पंजों के निशान बनाकर निर्धारित करता है। रणथंभौर में एक विशेष स्थिति यह है कि यहां बाघ एक-दूसरे की टेरेटरी को ओवरलैप कर रहे हैं, जिससे बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट की घटनाएं भी होती हैं। कई बार ऐसे संघर्षों में बाघों की मौत भी हो चुकी है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व प्रथम के डीएफओ रामानंद भाकर ने बताया कि वन विभाग रणथंभौर के क्वालंजी वन क्षेत्र को टाइगर हैबिटाट के रूप में विकसित कर रहा है। इसके अतिरिक्त रणथंभौर से रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य, बूंदी तक एक टाइगर कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है। इस पहल से बाघों को पर्याप्त पर्यावास मिलेगा और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही कैलादेवी अभयारण्य को भी विकसित किया जा रहा है। जब ये इलाके विकसित होंगे तो रणथंभौर के बाघों को पर्याप्त जगह मिल सकेगी। recent visitors 62

मध्यप्रदेश के कूनो में चीतों को बसाने में विन्सेंट अब नहीं रहे, रियाद के अपार्टमेंट में मिला शव

 भोपाल दुनिया के प्रसिद्ध चीता विशेषज्ञ और 'द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव' (TMI) के संस्थापक विन्सेंट वैन डेर मेरवे का शव सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एक अपार्टमेंट में मिला है. उनके निधन की खबर से दुनियाभर के वन्यजीव संरक्षणवादियों में शोक की लहर दौड़ गई है. विन्सेंट वैन डेर मेरवे मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के निवासी थे और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ एशिया में चीता संरक्षण एवं पुनर्वास के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते थे. उनकी संस्था 'द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव' इन दिनों सऊदी अरब सरकार के साथ मिलकर वहां चीतों को बसाने की योजना पर काम कर रही थी. इसी सिलसिले में वह रियाद गए थे, जहां उनका शव बरामद हुआ. PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े थे विन्सेंट विन्सेंट वैन डेर मेरवे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' से भी गहरे तौर पर जुड़े थे. इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को फिर से बसाने का प्रयास किया जा रहा है. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में उनकी भूमिका बेहद अहम थी. वह उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में से एक थे, जिन्होंने इस परियोजना को दिशा-निर्देश प्रदान किए. यह परियोजना भारतीय घास के मैदानों में अफ्रीकी चीतों को बसाने की एक अनूठी पहल है. चुनौतियों के बावजूद, विन्सेंट ने इस प्रोजेक्ट में अपनी आस्था जताई थी और इसके शुरुआती चरणों की सफलता में उनका बड़ा योगदान रहा. चीता संरक्षण में वैश्विक योगदान विन्सेंट ने अफ्रीका और एशिया में चीतों के पुनर्वास से जुड़े कई परियोजनाओं में सक्रिय रूप से काम किया था. उनकी विशेषज्ञता और समर्पण ने चीता संरक्षण के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी. उनके असामयिक निधन से न केवल 'प्रोजेक्ट चीता', बल्कि वैश्विक संरक्षण समुदाय को भी गहरा आघात पहुंचा है. कैसे हुआ निधन? विन्सेंट वैन डेर मेरवे की संस्था TMI चीतों की आबादी को बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए काम करती है। उनकी संस्था 'द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव' इन दिनों सऊदी अरब सरकार के साथ मिलकर चीतों को बसाने की योजना पर काम कर रही थी। इसी सिलसिले में विन्सेंट रियाद गए थे। रियाद में उनके अपार्टमेंट बिल्डिंग के हॉलवे में विन्सेंट का शव मिला। CCTV फुटेज से पता चला कि मेरवे अचानक गिरे और सिर पर चोट लग गई। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी जान चली गई। कौन थे विन्सेंट वैन डेर मेरवे? विन्सेंट का जन्म 1983 में साउथ अफ्रीका में हुआ था। वन्यजीवों के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें संरक्षण जीव विज्ञान में एक शानदार करियर की ओर अग्रसर किया। 'द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव' (TMI) के संस्थापक थे।  चीतों की आबादी को बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए कई प्रयास किए। विन्सेंट ने चीतों को विभिन्न अभ्यारण्यों में सफलतापूर्वक फिर से बसाया।   217 चीतों के साथ हुई थी शुरुआत विन्सेंट के 'चीता मेटापॉपुलेशन प्रोजेक्ट' की शुरुआत साउथ अफ्रीका के 41 वन्यजीव अभ्यारण्यों में 217 चीतों के साथ हुई थी। आज यह प्रोजेक्ट साउथ अफ्रीका, मलावी, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक और भारत में 75 अभ्यारण्यों में 537 चीतों तक फैल चुका है। एमपी में चीते बसाने में अहम भूमिका भारत में पीएम नरेंद्र मोदी के 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता के पीछे विन्सेंट की अहम भूमिका रही। नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' से विन्सेंट गहरे तौर पर जुड़े थे। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को फिर से बसाया। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में उनकी भूमिका बेहद अहम थी। recent visitors 41

कोस्मो आनंदा टाउनशिप में सनसनीखेज हत्याकांड, अपहरण किये बच्चे का शव टाउनशिप में ढाई फीट गहरे गड्ढे में मिला

ग्वालियर  ग्वायिलर के सिरोल स्थित कोस्मो आनंदा टाउनशिप से मंगलवार दोपहर जिस चार वर्षीय बालक का अपहरण हुआ था। 33 घंटे बाद उसकी लाश टाउनशिप के ही पिछले हिस्से में ढाई फीट गहरे गड्ढे में मिली।हत्या करने वाली 12 वर्षीय बालिका है, जो उसे अपने साथ बेर तोड़ने के बहाने ले गई थी। बालिका ने मंगलवार दोपहर में ही करीब एक बजे मासूम का पहले गला दबाया फिर मुंह के बल उसे गड्ढे में गिराया। इसके बाद भारी पत्थर पटक दिया। लाश को छिपाने के लिए ऊपर से और पत्थर पटक दिए। हत्या का कारण साफ नहीं हत्या क्यों की, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने कहा कि उसे उन बच्चों को देखकर गुस्सा आता है, जो उसकी बात नहीं मानते। पुलिस बाल अपचारी बालिका की काउंसलिंग भी कराएगी, जिससे हत्या की असल वजह सामने आ सके। बच्चे की लाश मिलने पर परिवार आक्रोशित हुआ यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने बालिका को हिरासत में लिया है। बालिका के माता-पिता से भी पूछताछ चल रही है। बच्चे की लाश मिलने के बाद परिवार आक्रोशित हो गया। इसके चलते चार थानों की फोर्स कास्मो आनंदा टाउनशिप में लगाई गई। एसएसपी धर्मवीर सिंह, एएसपी कृष्ण लालचंदानी, डीएसपी हिना खान सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। मासूम बच्चे के पिता पत्नी व चार बच्चों के साथ दो माह पहले ही ग्वालियर आए थे। सिरोल क्षेत्र में फूटी बैरक में रहते थे। कास्मो आनंदा टाउनशिप में नगरीय प्रशासन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर सविता प्रधान के भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां रामकुमार और पत्नी काम करते हैं। मंगलवार को काम करने आए और बेटे को भी साथ ले आए थे। लौटकर आए तो बेटा गायब मिला बेटा यहां दूसरे मजदूरों के बच्चों के साथ खेल रहा था। जब वह लौटकर आए तो बेटा गायब मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई थी। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि हत्या 12 वर्षीय बालिका ने की है। बालिका ने यह कुबूल कर लिया है। हत्या क्यों की, इसे लेकर पड़ताल जारी है। 30 घंटे में 10 बार बालिका ने उलझाया, हमउम्र बालिका ने खोला राज तो मिला सुराग आरोपित बालिका से सबसे पहले पूछताछ मंगलवार दोपहर तीन बजे हुई, जब पुलिस को पता लगा कि वह बेर तोड़ने के लिए बच्चे को साथ ले गई थी। उस समय उसने कहा- वह बेर तोड़ने के बाद बच्चे को छोड़ गई थी। दोबारा पूछताछ हुई तो कहा- कुत्ते पीछे पड़ गए थे, कुत्तों ने उसे काट लिया होगा। यहां से उस पर संदेह हुआ। फिर उसने बेर तोड़ने जाने के रास्ते बदल-बदलकर बताए। पुलिस को पता लगा कि उस समय यहां तीन बच्चे और खेल रहे थे। इन्हीं में से हमउम्र किशोरी को आरोपित बालिका के सामने बैठाकर खाना खिलाया फिर बात की तो लौटने के रास्ते के बारे में सवाल किया। इस पर आरोपित बालिका ने दूसरा रास्ता बताया, दूसरी किशोरी ने हकीकत बताई और इसी बात पर अड़ गई। तब आरोपित बालिका से बात की गई, तो वह टूट गई और खुद ही लाश के पास लेकर पहुंच गई। recent visitors 46

छात्राओं के यौन शोषण मामले में गिरफ्तार हुआ प्रोफेसर रजनीश कुमर, पूछताछ में कई सच्‍चाइयों का खुलासा

हाथरस यूपी के हाथरस के बागला कॉलेज में पिछले 20 साल से छात्राओं का यौन शोषण करने का आरोपी प्रोफेसर रजनीश कुमार गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रोफेसर के पास से पुलिस ने मोबाइल और लैपटॉप भी बरामद किया है। उससे पूछताछ में छात्राओं के यौन शोषण से जुड़ी कई सच्‍चाइयों का खुलासा होने की संभावना है। प्रोफेसर के घिनौने कृत्‍यों का खुलासा तब हुआ था जब छात्राओं के अश्‍लील हरकत करने के उसके कई वीडियो लीक हो गए। इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से हाथरस में हड़कंप मचा हुआ है। छात्र और अभिभावक गुस्‍से में हैं। वे सब लगातार प्रदर्शन कर प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। प्रोफेसर की तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी थीं। डीएम ने भी इस मामले में चार सदस्‍यीय जांच कमेटी बनाई है जो कॉलेज और अन्‍य स्‍थानों पर लोगों से पूछताछ कर अपनी जांच-पड़ताल में जुटी है। यौन शोषण मामले में गिरफ्तार किया गया प्रोफेसर रजनीश कुमर पीसी बागला कॉलेज में भूगोल विभाग का अध्‍यक्ष रहा है। उसके पास चीफ प्रॉक्‍टर का भी चार्ज था। प्रोफेसर के खिलाफ छात्राओं ने उत्‍तर प्रदेश राज्‍य महिला आयोग, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों को कई गुमनाम चिट्ठ‍ियां भेजकर शिकायत की थी। उन्‍होंने प्रोफेसर रजनीश कुमार की आपत्तिजनक स्थिति में कुछ तस्‍वीरें भी भेजी थीं। आरोप है कि प्रोफेसर रजनीश कुमार परीक्षा में अच्‍छे नंबर दिलवाने और सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर छात्राओं का यौन शोषण करता था। वह छात्राओं को अपने जाल में फंसाकर उनके साथ अश्‍लील हरकतें करता था और इस दौरान खुद ही वीडियो भी रिकॉर्ड करता था। इन्‍हीं में से 59 वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया में लीक हो गए थे। 13 मार्च को मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। इस बीच प्रोफेसर को कॉलेज प्रबंधन ने सस्पेंड भी कर दिया था। प्रोफेसर की जांच के लिए हाथरस के डीएम ने चार सदस्‍यीय कमेटी गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। इस कमेटी ने कल कॉलेज में जाकर कई लोगों से पूछताछ की थी। यूपी से राजस्‍थान तक हो रही थी प्रोफेसर की तलाश यूपी पुलिस की कई टीमें प्रो. रजनीश कुमार की तलाश में जुटी थीं। यूपी से लेकर राजस्‍थान तक उसकी तलाश की जा रही थी। प्रोफेसर का मोबाइल लगातार बंद था लेकिन पुलिस उसकी निगरानी में जुटी थी। पुलिस की टीमें मथुरा में उसके गांव समेत संभावित ठिकानों पर भेजी गईं थीं। लेकिन वह वहां नहीं मिला था। पुलिस की लगातार कोशिशों के परिणामस्‍वरूप गुरुवार की सुबह प्रो. रजनीश कुमार को पकड़ने में पुलिस को कामयाबी मिली। recent visitors 35

जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के भारतीय छात्र की गिरफ्तारी, हमास से संबंध रखने का लगाया गया है आरोप

वॉशिंगटन  अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र को गिरफ्तार किया गया है। बदर सूरी नाम के इस छात्र पर DHS (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी) ने आरोप लगाया है कि उसका फिलिस्तीनी गुट हमास से संबंध हैं। उस पर सोशल मीडिया पर हमास का प्रचार और यहूदी विरोधी बातें फैलाने का भी इल्जाम है। अमेरिका गाजा को नियंत्रित करने वाले हमास को आतंकी गुट मानता है। बदर के वकील ने  बताया कि ट्रंप प्रशासन उसे अमेरिकी विदेश नीति के लिए खतरा बताकर भारत डिपोर्ट करने की योजना बना रहा है। फिलहाल उसका केस लुइसियाना के अलेक्जेंड्रिया की इमिग्रेशन कोर्ट में है। वाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने बताया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि सूरी के काम उसके निर्वासन के लिए काफी हैं। बयान में कहा गया है कि सूरी एक छात्र वीजा पर अमेरिका में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसने एक अमेरिकी लड़की से शादी की हुई है। बदर को सोमवार रात वर्जीनिया के रॉसलिन में उसके घर के बाहर से पुलिस ने गिरफ्तार किया। फिलहाल कोर्ट में है केस बदर सूरी वॉशिंगटन डीसी के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस में अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में फेलो हैं। DHS ने फॉक्स न्यूज को बताया कि सूरी पर हमास से संबंध रखने का आरोप है। हालांकि DHS ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है। इस पर सूरी के वकील ने भी सवाल किए हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की भारतीय पीएचडी छात्रा रंजनी श्रीनिवासन को भी हाल ही में अमेरिका छोड़ना पड़ा है। उन्होंने भी फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया था। इसके चलते उनका वीजा 5 मार्च को रद्द कर दिया गया था। उन पर भी आतंकवाद का समर्थन करने और हमास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इससे रंजनी श्रीनिवासन को सेल्फ डिपोर्टेशन के लिए मजबूर होना पड़ा। ट्रंप प्रशासन ने चला रखा है अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने फिलहाल कोलंबिया यूनिवर्सिटी को मिलने वाली करीब 400 मिलियन डॉलर की सरकारी मदद रोकी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अगर कोई छात्र हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे अमेरिका में रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। इस पर ट्रंप प्रशासन सख्त दिख रहा है। recent visitors 27