GST में बड़ा बदलाव, कर चोरी करना पड़ेगा भारी, 1 अप्रैल से बदल रहा है नियम

नई दिल्ली भारत सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स के नियमों में काफी बदलाव किया है. इसके तहत 1 अप्रैल 2025 से इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम लागू होने जा रहा है. इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू का सही डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना है. इसकी मदद से राज्य सरकारें एक ही जगह पर दी जा रही शेयर्ड सर्विसेज पर उचित मात्रा में टैक्स वसूल करेंगी. ISD मैकेनिज्म को लागू करने के लिए 2024 के फाइनेंस एक्ट के तहत सेंट्रल जीएसटी एक्ट में संशोधन किया गया है. यह मैकेनिज्म उन व्यवसायों को सुविधा देता है जो कई राज्यों में संचालित होते हैं. इसके तहत व्यवसाय अपनी एक हेडक्वार्टर में कॉमन इनपुट सर्विस के इनवॉइस को सेंट्रलाइज कर सकते हैं. इससे उन शाखाओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट का समान वितरण संभव होता है जो शेयर्ड सर्विसेज का इस्तेमाल करती हैं. इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रॉफिट इनपुट टैक्स क्रेडिट यह वो टैक्स होता जो व्यवसाय अपनी खरीद पर चुकाते हैं. इसे आउटपुट टैक्स से घटाया जा सकता है, जिससे व्यवसाय की कुल जीएसटी देनदारी कम हो जाती है. नए नियमो के तहत ISD सिस्टम का इस्तेमाल होना अनिवार्य होगा जिससे ITC सही वितरण हो सके. नए नियम क्या है पहले बिजनेस करने वालों के पास कॉमन ITC को अपने अन्य GST रजिस्ट्रेशन में आवंटित करने के लिए दो ऑप्शन थे. इसमें दो ऑप्शन यह थे कि ISD मैकेनिज्म या क्रॉस-चार्ज मेथड, लेकिन अब 1 अप्रैल 2025 से ISD का इस्तेमाल न करने पर रेसिपिएंट लोकेशन के लिए ITC नहीं दी जाएगी. अगर ITC का गलत वितरण होता है तो टैक्स अथॉरिटी ब्याज सहित राशि वसूल करती है. इसके साथ ही अनियमित वितरण के लिए जुर्माना भी लगेगा, जो ITC की राशि या 10 हजार रुपए से भी अधिक होगा. जीएसटी सिस्टम माना जा रहा है कि यह बदलाव जीएसटी सिस्टम को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशी में एक और बड़ा कदम है. ISD सिस्टम से न केवल राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू वितरण होगा, बल्कि व्यवसायों को भी अपनी टैक्स देनदारियों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी. यह कदम टैक्स की चोरी रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए काफी अच्छी साबित होगी.   recent visitors 69

सेंट जान्स चर्च गोविंदपुरा में विशेष प्रार्थना का आयोजन 

Special prayer organized at St. John’s Church Govindpura  भोपाल (सुशील दामले)। राजधानी में 40 दिवसीय उपवास की शुरुआत हो गई है,प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए बलिदान के पवित्र दिनों का आरंभ हो चुका हैं ईसाई समाज के लोग 40 दिनों तक उपवास रखकर प्रभु यीशु की आराधना कर रहे हैं,इस दौरान जाने-अनजाने में जो भी पाप अथवा गलत कार्य किए गए हैं,और किसी के दिल को ठेस पहुंचाया है उनसे हृदय से क्षमा याचना करते हैं,अपनी क्षमता के अनुसार गरीब परिवारों की मदद करते हैं यह 40 दिन के उपवास में लोग प्रार्थना,परहेज और उपवास के रूप में मनाते हैं,वहीं गोविंदपुरा स्थित सेंट जॉन चर्च में भी प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना हो रही है इन दिनों में विशेष प्रार्थनाएं सभाएं हो रही है,जिसमें मसीह लोग उपवास रखकर प्रार्थनाएं कर रहे हैं,समाज के कल्याण के लिए और परमेश्वर के दुख भोग के रूप में स्मरण कर रहे हैं,यह प्रार्थना 5 मार्च से शुरू हुई है,लगातार चर्च में विशेष प्रार्थना की जा रही है,जिसका समापन गुड फ्राइडे को होगा recent visitors 120

कोर्ट ने कहा कि वेश्या के साथ पकड़ा जाना देह व्यापार और मानव तस्करी की श्रेणी में नहीं आता

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई कार्यवाही को रद्द कर दिया। कार्यवाही रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि वेश्या के साथ रंगरलियां मनाना मानव तस्करी और देह व्यापार नहीं है। गाजियाबाद के रहने वाले विपुल कोहली की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कार्यवाही रद्द कर दी। मामला दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर जिले के सेक्टर-49 थाना क्षेत्र का है। गाजियाबाद जिले में एलोरा थाई स्पा सेंटर में पुलिस ने 20 मई 2024 को छापेमारी की गई थी। इस दौरान पुलिस ने याचिकाकर्ता को महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। पुलिस ने याचिकाकर्ता के खिलाफ मानव तस्करी और देह व्यापार का मुकदमा दर्ज किया था। एसीजेएम कोर्ट की ओर से मामले का संज्ञान लेते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ समन जारी किया गया था। जिसके खिलाफ याची ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में अपनी दलील रखी। वकील ने कोर्ट को बताया कि याची न तो स्पा सेंटर का मालिक है और न ही महिलाओं को देह व्यापार में ढकेलने का आरोपी है। याची ग्राहक है। उसने ली गई सेवाओं के बदले भुगतान किया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। recent visitors 68

मध्य प्रदेश में कर्मचारी को मनपसंद स्थानों पर मिलेगा ट्रांसफर ! जल्द तबादले से बैन खुल जाएंगे

भोपाल  एमपी में पुरानी तबादला नीति पर सामान्य प्रशासन विभाग ने नए सिरे से काम शुरू कर दिया है। सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल के अंत तक या उसके पहले बैन खुल जाएंगे। जिसके बाद कर्मचारी मनपसंद स्थानों पर तबादला की अर्जी लगा सकेंगे, उस पर सुनवाई होगी और तबादले किए जाएंगे।  कर्मचारी वर्ग 2 वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहा है, बीते साल चुनाव के चलते उक्त नीति अटकी थी। जबकि वर्ष 2023 में भी ज्यादातर कर्मचारी चुनाव की आपाधापी में तबादला अर्जी नहीं दे सके थे। जल्द ही उन्हें लाभ मिलेगा। नीति लगभग तैयार सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों के मुताबिक तबादला नीति लगभग तैयार है, जिसमें कुछ बदलाव प्रस्तावित हैं, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएम डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की मौजूदगी में एक बैठक होनी है। इसके बाद नीति कैबिनेट बैठक में जाएगी। बता दें, जनवरी में सरकार ने उच्च प्राथमिकता वाले तबादलों के रास्ते खोले थे। recent visitors 61

अजय माकन ने गृह मंत्रालय पर चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंदर आती है

नई दिल्ली राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर शुक्रवार को चर्चा की जा रही है। इस दौरान कांग्रेस सांसद अजय माकन ने कहा कि पूरे देश में दिल्ली में महिलाओं, बच्चों और वृद्धों के साथ सबसे अधिक आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। इसके अलावा उन्होंने पंजाब का जिक्र करते हुए बताया कि वहां ड्रग्स और विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके तार सीमा पार से जुड़े हैं। अजय माकन ने गृह मंत्रालय के कार्यकाल पर चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंदर आती है। पूरे देश में प्रत्येक एक लाख पर 66 महिलाओं के खिलाफ अपराध होते हैं, लेकिन दिल्ली के अंदर प्रत्येक लाख महिलाओं में 144 महिलाओं के खिलाफ अपराध होते हैं। पूरे देश में सबसे अधिक महिलाओं के प्रति अपराध दिल्ली में होते हैं। ऐसे ही पूरे हिंदुस्तान में प्रत्येक 1 लाख बच्चों पर 36 बच्चों के साथ अपराध होते हैं। दिल्ली में प्रति लाख में 134 बच्चों के साथ अपराध होते हैं। इसी तरह वृद्धों के खिलाफ होने वाले अपराधों में भी दिल्ली पूरे देश में नंबर वन है। उन्होंने कहा कि पहले ड्रग्स और नारकोटिक्स आते हैं, फिर गैंगवार और टेररिज्म आता है। केरल और पंजाब के अंदर नशे के मामले बहुत अधिक हो गए हैं। पाकिस्तान से पंजाब में ड्रोन के जरिए ड्रग्स के पैकेट आ रहे हैं। पंजाब के पुलिस स्टेशनों में ग्रेनेड से हमले हो रहे हैं। वर्ष 2022 से लेकर अब तक 15 प्रमुख घटनाएं हुई हैं, जिनमें आरपीजी रॉकेट ग्रेनेड जैसे हथियारों का भी इस्तेमाल हुआ है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स जैसे समूहों से जुड़े लोग हत्या में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में विदेशी ग्रेनेड समेत विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है। जिन विदेशी ग्रेनेड का इस्तेमाल संसद और मुंबई हमले में हुआ था, वैसे ही ग्रेनेड का इस्तेमाल पंजाब में हो रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि एक गहरी साजिश है। यह साजिश सीमा पार से हो रही है। यदि यह सब सीमा पार से हो रहा है तो इसे रोकने का काम बीएसएफ का है, गृह मंत्रालय का है। मुंबई में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के करीब 31,000 मामले लंबित हैं, कोलकाता में 15,000, बेंगलुरु में 18,000, हैदराबाद में 10,000 और दिल्ली में 77,000 मामले अदालतों में लंबित हैं। माकन के मुताबिक 2016 तक दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ होने वाले 29,000 मामले अदालतों में लंबित थे। लेकिन, अब यह बढ़कर 77,000 हो गए हैं। बच्चों के साथ होने वाले अपराधों को देखें तो मुंबई में 10,000 मामले अदालतों में लंबित हैं, बेंगलुरु में 3,000, हैदराबाद में 1,600, कोलकाता में 3,000 और दिल्ली में 19,000 ऐसे मामले अदालतों में लंबित हैं। इन लंबित मामलों के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दिनों सरकारी रिकॉर्ड में आंदोलन को अपराध की श्रेणी में रखा जा रहा है। आंदोलन करने वाले हमारे किसान क्या अपराधियों की श्रेणी में रखे जाएंगे? विरोध-प्रदर्शन करने का लोकतंत्र के अंदर जो अधिकार दिया गया था, एक तरह से उसे समाप्त कर दिया गया है। हमारे देश की युवा आबादी नशे का शिकार हो रही है। वर्ष 2010 और 2014 के बीच में ड्रग्स की घटनाएं 33,000 थी। 2022 की एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि यह घटनाएं बढ़कर 1 लाख 15 हो गई हैं। केवल 10 वर्षों के अंदर नशे (ड्रग्स) की घटनाओं में 247 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जहां पूरे देश में ड्रग्स के मामले 247 परसेंट बढ़े हैं, वहीं दिल्ली के अंदर ड्रग्स की घटनाएं 546 प्रतिशत बढ़ी हैं। सिंथेटिक ड्रग्स का नशा बहुत ही खतरनाक है, जिसकी आदत लगने के बाद इसका छूटना बेहद मुश्किल हो जाता है। recent visitors 69

सीएम रेखा गुप्ता ने दिए निर्देश-सांसदों-विधायकों के कॉल और मैसेज का तुरंत जवाब दें अधिकारी

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को अधिकारियों को सांसदों और विधायकों के कॉल या मैसेज का तुरंत जवाब देने का निर्देश दिया है। साथ ही ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता द्वारा इस संबंध में मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र के बाद यह कदम उठाया गया है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव धर्मेंद्र को लिखे पत्र में कहा था कि उन्हें बताया गया है कि कुछ अधिकारी विधायकों के पत्रों, फोन कॉल और मैसेज का जवाब नहीं देते हैं। दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी एक परिपत्र में कहा गया है कि मुख्य सचिव ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने विधायकों और सांसदों के साथ व्यवहार करते समय पालन किए जाने वाले प्रोटोकॉल के संबंध में व्यापक निर्देश जारी किए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (जीएडी) नवीन कुमार चौधरी द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि निर्देशों का अक्षरशः सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि ऐसा कोई मौका नहीं होना चाहिए कि विधायकों या सांसदों को ऐसी शिकायतें करने के लिए बाध्य होना पड़े। इन निर्देशों का पालन नहीं करने पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारी के मूल्यांकन में यह एक महत्वपूर्ण इनपुट होगा। परिपत्र में प्रशासन, सांसदों और विधायकों के आधिकारिक व्यवहार के बारे में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी साझा की गई है, जिसे जीएडी ने 2020 में तैयार किया था। इसमें कहा गया है कि सांसद या विधायक से प्राप्त संचार पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए। एसओपी में कहा गया है कि सांसद या विधायक द्वारा मांगी गई सूचना प्रदान की जानी चाहिए, जब तक कि वह ऐसी प्रकृति की न हो कि उसे देने से इनकार किया जा सके।इसके अलावा इसमें कहा गया है कि सांसद या विधायक से प्राप्त प्रत्येक संचार की 15 दिनों के भीतर पावती दी जानी चाहिए। उसके बाद अगले 15 दिनों के भीतर उत्तर दिया जाना चाहिए। recent visitors 81

कोर्ट से कई शर्तों पर अब्बास अंसारी को जमानत मिली, ढाई साल बाद जेल से बाहर, ईद से पहले परिवार में छाईं खुशियां

लखनऊ मुख्तार अंसारी का विधायक बेटा अब्बास अंसारी ढाई साल से भी अधिक समय तक जेल में रहने के बाद शुक्रवार को बाहर आ गया। अब्बास को सात मार्च को सुप्रीम कोर्ट से कई शर्तों पर अब्बास अंसारी को जमानत मिली थी। करीब 15 दिनों बाद कोर्ट का परवाना कासगंज जेल पहुंचा और अब्बास को रिहाई मिल सकी है। मुख्तार अंसारी के परिवार के लिए ईद से पहले यह बड़ी खुशी है। रमजान के महीने में जुमे के दिन अब्बास के बाहर आने को भी उसके समर्थक खुदा की मेहरबानी मान रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास में रहने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कहा है कि उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र मऊ का दौरा करने से पहले प्राधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही अदालत की बिना अनुमति के उत्तर प्रदेश नहीं छोड़ सकेंगे। अदालतों में पेश होने से एक दिन पहले पुलिस अधिकारियों को जानकारी भी देंगे। अब्बास अंसारी को पिछले विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही 4 नवंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था। उनके ऊपर सबसे बड़ा मामला हेट स्पीच का था। इसके बाद 6 सितंबर 2024 को उनके ऊपर गैंगस्टर लग गया था। अब्बास पहले चित्रकूट जेल में थे। यहां पत्नी निकहत के साथ अवैध रूप से मुलाकात करते पकड़े जाने पर कासगंज जेल भेजा गया था। निकहत को भी गिरफ्तार कर चित्रकूट जेल में रखा गया था। निकहत को भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया था। अब्बास ने 2022 का विधानसभा चुनाव ओपी राजभर की पार्टी सुभासपा के चुनाव चिह्न पर जीता था। तब सुभासपा और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। सपा का साथ छोड़कर भाजपा से गठबंधन करने पर जब सवाल उठे तो ओपी राजभर ने अब्बास को सपा का भेजा हुआ प्रत्याशी बताया था। अब अब्बास के बाहर आने से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह सुभासपा की बैठकों जाते हैं या उससे दूरी बनाकर रहते हैं। विधानसभा में भी उनकी सीट पर नजर रहेगी। recent visitors 59