आधार और वोटर आईडी को जोड़ने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग अगले हफ्ते बैठक करेगी

नई दिल्ली  चुनाव आयोग अगले हफ्ते अहम बैठक करने वाला है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। ईसी सूत्रों ने बताया कि यह बैठक आधार को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के बारे में होगी। 2021 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, आधार को EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) जोड़ने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से आधार नंबर लेना शुरू कर दिया। हालांकि, अभी तक दोनों डेटाबेस को लिंक नहीं किया गया है। वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाने पर जोर इस कदम का मकसद वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना और उसे साफ-सुथरा बनाना था। इसके लिए आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना जरूरी नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 18 मार्च को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, विधायी विभाग के सचिव राजीव मणि और UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार से मिलेंगे। आधार को EPIC से जोड़ने की चर्चा इस बैठक में आधार को EPIC से जोड़ने पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाताओं के एक ही EPIC नंबर होने का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग ने माना है कि कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने EPIC नंबर जारी करते समय गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज का इस्तेमाल किया था। चुनाव आयोग का प्लान क्या है इलेक्शन कमीशन ने हाल ही में फैसला लिया है कि वह तीन महीने के अंदर डुप्लिकेट नंबर वाले मतदाताओं को नए EPIC नंबर जारी करेगा। आयोग ने कहा है कि डुप्लिकेट नंबर होने का मतलब फर्जी वोटर नहीं है। केवल वही लोग वोट डाल सकते हैं जो किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हैं। आधार को EPIC से जोड़ने के पीछे मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है। इससे फर्जी वोटरों की पहचान करने में मदद मिलेगी। आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे, इससे फर्जी वोटिंग रुक सकती है। एक व्यक्ति के एक से ज्यादा जगह वोट डालने की संभावना कम हो जाएगी। वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति का नाम कई बार होने की समस्या भी दूर हो सकती है। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी होगी। हालांकि, कुछ लोग इस कदम पर प्राइवेसी की चिंता भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे लोगों की निजी जानकारी लीक हो सकती है। वो निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी को वोटर आईडी से जोड़ना खतरनाक हो सकता है। यह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन भी हो सकता है। आधार-वोटर आईडी जोड़ने का फैसला अहम चुनाव ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करने का फैसला किया है। इसलिए गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और UIDAI के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। यह देखना होगा कि EC इस मुद्दे को कैसे संभालता है। आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने का फैसला काफी अहम है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकती है, लेकिन साथ ही लोगों की निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। आने वाले समय में इस पर और भी चर्चा होगी। recent visitors 59

न्यूजीलैंड में पाकिस्तान की शर्मनाक हार, सिर्फ 61 गेंदों में जीत गई कीवी टीम, कर दिया बुरा हाल

Pakistan’s shameful defeat in New Zealand, Kiwi team won in just 61 balls, left them in a bad state पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का पहला मैच क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में खेला गया. इस मैच में पाकिस्तान की टीम को एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. पाकिस्तानी खिलाड़ी हर डिपार्टमेंट में पूरी तरह फ्लॉप रहे. पाकिस्तान की टीम के लिए न्यूजीलैंड दौरे की शुरुआत काफी खराब रही. दोनों टीमों के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का पहला मैच क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में खेला गया. इस मुकाबला में पाकिस्तानी टीम का काफी बुरा हाल देखने को मिला. ना कोई बल्लेबाज बड़ा स्कोर बना सका और ना ही कोई गेंदबाज अपनी छाप छोड़ सका, जिसके चलते पाकिस्तानी टीम को एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. वहीं, न्यूजीलैंड की टीम एक धमाकेदार जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने में कामयाब रही. पाकिस्तानी टीम ने न्यूजीलैंड में टेके घुटने न्यूजीलैंड की टीम इस मुकाबले में शुरुआत से ही हावी नजर आई. सबसे पहले उसने टॉस जीता और पाकिस्तान को बल्लेबाजी का न्योता दिया. इसके बाद न्यूजीलैंड ने पहले ही ओवर से मैच में पकड़ बना ली. पाकिस्तान के दोनों ओपनर्स खाता खोलने में नाकाम रहे. इसके बाद विकेट गिरने का सिलसिल नहीं रुका, जिसके चलते पाकिस्तान की पूरी टीम 18.4 ओवर में 91 रन बनाकर ऑलआउट हो गई. जो न्यूजीलैंड में पाकिस्तान का अभी तक का सबसे छोटा स्कोर था. इस पारी में पाकिस्तान के लिए खुशदिल शाह ने सबसे ज्यादा 32 रन बनाए. वहीं, जहानदाद खान ने 17 रनों की पारी खेली. दूसरी ओर न्यूजीलैंड के लिए जैकब डफी ने सबसे ज्यादा 4 विकेट चटकाए. काइल जैमीसन ने भी उनका अच्छा साथ दिया और 4 ओवर में 8 रन देकर 3 विकेट हासिल किए. इनके अलावा ईश सोढ़ी ने 2 विकेट और जकारी फौल्केस ने 1 विकेट अपने नाम किया। सिर्फ 61 गेंदों में जीत गई कीवी टीम न्यूजीलैंड को ये मैच जीतने के लिए 92 रनों का टारगेट मिला था. कीवी बल्लेबाजों इसे हासिल करने में बिल्कुल भी समय नहीं लिया. उन्होंन सिर्फ 10.1 ओवर यानी 61 गेंदों में टारगेट चेज कर लिया. इस पारी में न्यूजीलैंड के लिए सबसे ज्यादा रन टिम सेफर्ट ने बनाए. उन्होंने 29 गेंदों पर 151.72 की स्ट्राइक रेट से 44 रन ठोके, जिसमें 7 चौके और 1 छक्का शामिल रहा. वहीं, फिन एलन 17 गेंदों पर 29 रन बनाकर नाबाद रहे. टिम रॉबिन्सन ने भी 15 गेंदों पर नाबाद 18 रनों की पारी खेली. वहीं, पाकिस्तानी टीम सिर्फ 1 विकेट ही हासिल कर सकी, ये सफलता अबरार अहमद के नाम रही recent visitors 181

आश्रिता शेट्टी से अलग हो रहे मनीष पांडे, अब टूट रहा रिश्ता? सोशल मीडिया से हटाई फोटो

मुंबई ग्लैमर और क्रिकेट का कनेक्शन पुराना रहा है. शर्मिला टैगोर और नवाब मंसूर अली खान पटौदी की शादी के बाद से कई सारे क्रिकेटर्स और एक्टर्स ने शादी की. कइयों का रिश्ता चला लेकिन कइयों का नहीं भी चला. पिछले कुछ सालों में तो ग्लैमर और क्रिकेट जगत में कई रिश्ते बने. लेकिन ये रिश्ते लंबे वक्त तक नहीं टिक सके. मौजूदा समय में भी देखें तो युजवेंद्र चहल और धनश्री के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और उनके अलग होने की भी फोटोज आ रही हैं. वहीं इसी बीच क्रिकेटर मनीष पांडे और एक्ट्रेस अश्रिता शेट्टी के रिलेशन में भी मनमुटाव की खबरें आई हैं. दरअसल एक्ट्रेस अश्रिता शेट्टी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से हसबेंड मनीष तिवारी के साथ की फोटोज डिलीट कर दी है. वहीं ऐसा ही मनीष के साथ भी देखने को मिल रहा है. दोनों के अकाउंट में एक-दूसरे के साथ की कोई भी फोटो नहीं है. साथ ही रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों ने एक दूसरे को अनफॉलो भी कर दिया है. ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या ग्लैमर और क्रिकेट की दुनिया में एक और तलाक होने जा रहा है. साथ ही रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों को एक साथ पिछले कुछ समय में ज्यादा देखा भी नहीं गया है. हालांकि अभी दोनों की ओर से इसपर किसी भी तरह का ऑफिशियल रिएक्शन नहीं आया है.  रिपोर्ट में बताया गया है. मनीष पांडे और उनकी पत्नी अश्रिता के बीच रिश्ते बिगड़ चुके हैं. दोनों ने धूम धाम से शादी की थी लेकिन अब वो एक दूसरे से अलग होने का मन बना रहे हैं. मनीष एक बेहतरीन भारतीय क्रिकेटर रहे हैं और इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स के अवावा कई फ्रेंचाइजी टीम के लिए खेल चुके हैं. मनीष ने 2018 में एशिया कप भी खेला था. अब खबर है कि मनीष और अश्रिता सोशल इवेंट में एक साथ नजर नहीं आ रहे. उन्होंने सार्वजनिक रूप से दिखना बंद कर दिया है. पहले खबरें आई थीं कि दोनों ने एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार मनीष अब किसी को भी फॉलो नहीं कर रहे हैं. मनीष पांडे की पत्नी अश्रिता शेट्टी कौन हैं? अश्रिता पेशे से एक अभिनेत्री हैं. उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल को देखने पर पता चलता है कि वह ‘माउंटेन डोपामाइन’ ले रही हैं. उन्हें बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाते देखा गया है. अश्रिता अकेले छुट्टियां मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं और उदास कैप्शन लिख रही हैं. खबर है कि मनीष और अश्रिता ने अपनी शादी की तस्वीरें भी हटा दी हैं; हालांकि, दोनों ने तलाक की खबरों की पुष्टि या खंडन नहीं किया है. मनीष ने पिछले लगभग 40 हफ्तों से अपने इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट नहीं किया है. अश्रिता ने ज्यादातर तमिल फिल्मों में काम किया है और उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 218K फॉलोअर्स हैं. दूसरी ओर, मनीष ने पिछले कुछ सालों से क्रिकेट नहीं खेला है. भारत के लिए उन्होंने 29 वनडे और 39 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. खबर है कि मनीष से शादी के बाद अश्रिता ने फिल्मों को अलविदा कह दिया था. इस जोड़ी ने 2 दिसंबर 2019 को शादी की थी. उन्होंने शादी से पहले कुछ समय तक डेट किया था. हालांकि, अश्रिता और मनीष ने सोशल मीडिया पर अपने प्यार का इजहार नहीं किया था.   recent visitors 45

21 मार्च को एक होंगे दो हाॅकी ओलंपियन: हिसार की उदिता के होंगे जालंधर के हॉकी खिलाड़ी मनदीप सिंह

जालंधर पंजाब और हरियाणा के 2 हॉकी ओलिंपियन खिलाड़ी 21 मार्च को शादी करेंगे। दोनों जालंधर के मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में शादी के बंधन में बंधेंगे। शादी का कार्ड भी सामने आया है। इसमें दोनों के नाम के आगे ओलिंपियन लिखा हुआ है। दोनों के परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त हैं और इस खास दिन को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। शादी के भव्य आयोजन के लिए परिवार गेस्ट लिस्ट तैयार कर रहे हैं। कार्यक्रम में खेल और राजनीति से जुड़ी कई हस्तियां शामिल हो सकती हैं। माना जा रहा है कि इस शादी में टीम इंडिया शामिल होगी। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मनदीप सिंह जालंधर के रहने वाले हैं। वह भारतीय पुरुष हॉकी टीम में स्ट्राइकर हैं। उन्हें टीम की गोल मशीन भी कहा जाता है। वहीं उदिता कौर हरियाणा के हिसार की रहने वाली हैं। वह भारतीय महिला हॉकी टीम में डिफेंडर हैं। उदिता महिला हॉकी इंडिया लीग में सबसे महंगी खिलाड़ी रह चुकी हैं। भारतीय हॉकी टीम के स्टार स्ट्राइकर मंदीप सिंह: गोल मशीन की कहानी सुरजीत हॉकी अकादमी से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर पंजाब के जालंधर जिले के मिट्ठापुर निवासी मंदीप सिंह का जन्म 25 जनवरी 1995 को हुआ। मंदीप सिंह ने अपने हॉकी करियर की शुरुआत जालंधर की सुरजीत हॉकी अकादमी से की। यहां उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारा और जल्द ही भारतीय हॉकी टीम में जगह बना ली। वे अपनी आक्रामक शैली और गोल करने की शानदार क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं। भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन मंदीप सिंह अब तक दो हॉकी विश्व कप 2014 और 2018 खेल चुके है। 2018 एशियाई खेल, 2018 राष्ट्रमंडल खेल, 2013 एशिया कप, 2014 और 2017 हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल, 2013 और 2017 हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल, और 2016 व 2018 चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। भारत के लिए कई अहम गोल किए भारतीय पुरुष हॉकी टीम के स्टार स्ट्राइकर मंदीप सिंह को उनकी तेज रफ्तार, शानदार ड्रिब्लिंग और गोल स्कोरिंग क्षमता के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में भारत के लिए गोल कर टीम को जीत दिलाई है। संघर्ष और मेहनत से मिली सफलता साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले मंदीप ने अपनी मेहनत और लगन से हॉकी में ऊंचा मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है और आने वाले टूर्नामेंट्स में भारतीय टीम को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। डीएसपी हैं मनदीप सिंह, सीएम भगवंत मान ने दी थी नियुक्ति मनदीप सिंह न सिर्फ हॉकी के मैदान में बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्हें पंजाब पुलिस में डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने की थी। भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार डिफेंडर उदिता कौर: संघर्ष से सफलता तक का सफर हैंडबॉल से शुरुआत, हॉकी को बनाया जीवन का गोल हरियाणा के हिसार जिले के नंगल गांव से ताल्लुक रखने वाली उदिता का जन्म 14 जनवरी 1998 को हुआ था। उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत हैंडबॉल से की थी। बाद में उन्होंने हॉकी को अपनाया और इस खेल में खुद को साबित किया। कई उतार-चढ़ाव के बावजूद, उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया और मेहनत जारी रखी। अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका उदिता का सितारा 2017 में सीनियर टीम में डेब्यू करने के बाद, उदिता ने कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में भारतीय टीम के लिए दमदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 2018 एशियाई खेलों में रजत पदक, 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक, और 2023 एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। टोक्यो ओलिंपिक में निभाई अहम भूमिका 2021 में हुए टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के चौथे स्थान तक पहुंचने में उदिता की अहम भूमिका रही। उनके शानदार डिफेंस और मैदान पर उनकी उपस्थिति ने टीम को मजबूती दी। महिला हॉकी इंडिया लीग में बनी सबसे महंगी खिलाड़ी 2024 में आयोजित महिला हॉकी इंडिया लीग की नीलामी में उदिता ने इतिहास रच दिया। वह इस नीलामी में सबसे अधिक बोली हासिल करने वाली खिलाड़ी बनीं, जिससे उनके शानदार खेल और लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। खेल जगत से बधाइयों की बरसात जैसे ही शादी की खबर सामने आई, खेल जगत में बधाइयों की बौछार शुरू हो गई। साथी खिलाड़ी, कोच, और फैंस इस गोल्डन कपल को शादी की शुभकामनाएं दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस जोड़ी को "हॉकी का परफेक्ट मैच" बता रहे हैं। अब सबकी निगाहें 21 मार्च पर टिकी हैं, जब यह स्टार कपल नए सफर की शुरुआत करेगा। recent visitors 44

कांग्रेस में कन्हैया के एक्टिव होने से क्या लालू-तेजस्वी नाराज!: क्योंकि राहुल गांधी ने टाली बिहार की रिव्यू मीटिंग, क्या अकेले लड़ेगी कांग्रेस

Are Lalu-Tejaswi angry with Kanhaiya becoming active in Congress?: Because Rahul Gandhi postponed the review meeting of Bihar, will Congress fight alone? पटना। कांग्रेस को हराने की ताकत किसी भी विपक्षी दल में नहीं है, लेकिन अगर कांग्रेस नेता खुद अंदरूनी कलह में उलझे रहे तो, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ तारीख- 1 मार्च 2025 ‘कांग्रेस इस बार जनता की A टीम बनकर चुनाव लड़ना चाहती है, किसी की B टीम नहीं। हमारा मकसद मजबूती से चुनाव लड़ना है और पार्टी को मजबूत करना है।’ कांग्रेस के बिहार प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु के इस दो बयान ने पटना से दिल्ली तक हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी के भरोसेमंद अल्लावरु पार्टी में लालू के भरोसेमंद प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह की छुट्‌टी कर सकते हैं। उनकी जगह किसी दलित नेता को प्रदेश की कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि, अभी गहन मंथन जारी है। खास बात है कि बिहार की कमान संभालने के बाद अभी तक अल्लावरु ने न ही लालू के दरबार में हाजिरी लगाई है और न ही गठबंधन दल के नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। इस बीच अब उन्होंने अपना तुरुप का इक्का चल दिया है। लालू और तेजस्वी विरोध के कारण अपने फायरब्रांड नेता कन्हैया कुमार को बिहार से दूर रख रही कांग्रेस 6 साल बाद उनकी वापसी करा रही है। 16 मार्च यानी आज से कन्हैया ‘पलायन रोको नौकरी दो’ यात्रा निकालकर बिहार की सियासत में अपना पांव जमाएंगे। प्रभारी के इस बयान और पार्टी की गतिविधि से बिहार की राजनीतिक फिजा में 4 सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस की राजनीति पर नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल बताते हैं, ‘राहुल गांधी बिहार में अपना बार्गेन पावर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मूव से कांग्रेस बिहार में अपन खोया हुआ वोट बैंक हासिल करना चाहती है। कन्हैया किसी के पॉकेट में रहने वाले नेता नहीं है। अल्लावरू राहुल गांधी के भरोसेमंद हैं। बिहार में एक तबका ऐसा है, जो ना लालू के साथ जाना चाहता और ना NDA के साथ। उन लोगों को ये मैसेज देना है कि अब कांग्रेस अपनी खुद की राजनीति करेगी, किसी के इशारे पर नहीं करेगी।’ रावल बताते हैं, ‘यादव और मुस्लिम पहले से ही RJD के साथ इंटैक्ट हैं। ऐसे में राहुल गांधी राज्य के लगभग 20 फीसदी दलित वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने की मुहिम में जुटे हैं। यही कारण है कि वे लगातार संविधान और दलितों के मुद्दों पर बात कर रहे हैं। फॉरवर्ड हमेशा से कांग्रेस का वोटर रहा है, जो पिछले एक दशक में लगातार छिटका है। अब राहुल गांधी की कोशिश एक बार फिर से अपने खोए जनाधार को वापस हासिल करने की है।’ क्या कांग्रेस बिहार में RJD से अपना गठबंधन तोड़ सकती है? बिहार में लगातार एक के बाद एक जिस तरीके से कांग्रेस फैसले ले रही है, इसका असर गठबंधन पर भी पड़ सकता है। लालू कभी भी कन्हैया को बिहार की सियासत में देखना पसंद नहीं करते हैं। कन्हैया हो या पप्पू यादव, लालू हमेशा इन्हें तेजस्वी के लिए चुनौती मानते हैं। अब कांग्रेस दोनों को बिहार में एक्टिव कर रही है। इस सवाल पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट राशिद किदवई बताते हैं, ’राहुल गांधी को ये इनपुट मिल रही है कि ऐसे राज्य जहां कांग्रेस कमजोर है या गठबंधन में है, वहां का नेतृत्व बड़े घटक दल से प्रभावित होता है। वे उनके इशारे पर काम करते हैं। राहुल गांधी इस प्रथा को बदलना चाहते हैं। लेकिन अब वे इसमें देर कर चुके हैं। अगले 6 महीने में चुनाव है। इसे कम से कम डेढ़-दो साल पहले शुरू करना चाहिए था। चुनाव के समय घटक दल पर दबाव डालने की रणनीति नुकसानदेह और घातक होती है।’ जबकि, सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल बताते हैं, ’कांग्रेस बिहार में लालू के साथ मिलकर ही विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। कन्हैया को आगे कर वो अपना बार्गेन पावर बढ़ा रही है। आखिर में कांग्रेस तेजस्वी की नाराजगी झेल नहीं पाएगी। बिहार जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस RJD जैसे अपने पुराने सहयोगियों को नाराज करने की गलती नहीं करेगी।’ क्या 2025 के बहाने अभी से 2029 की तैयारी में कांग्रेस जुट गई है? महाराष्ट्र और दिल्ली में हार के बाद कांग्रेस ने अचानक अपनी नीतियों में बदलाव किया है। पहले तो दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ी। यहां पार्टी हारी, लेकिन वोट शेयर बढ़ा। इसके बाद राहुल गांधी ने गुजरात जाकर कहा कि कांग्रेस के भीतर कई नेता बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। ऐसे में अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस अभी से ही 2029 की तैयारी में जुट गई है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट राशिद किदवई बताते हैं, ’कांग्रेस फिलहाल सत्ता में आने और विधानसभा में सीटें जीतने के बजाय अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी को लग रहा है कि यहां विधानसभा की सीटें जीतने के बजाय पार्टी को मजबूत करना और लालू की पॉकेट की पार्टी की छवि से बाहर आना ज्यादा जरूरी है। राशिद किदवई आगे बताते हैं, ‘अभी तक ये मैसेज गया है कि कांग्रेस के सारे बड़े नेता बिहार में RJD की जेब में है। कांग्रेस के उम्मीदवार और सीटें भी अघोषित रूप से लालू तय कर रहे थे। अब राहुल गांधी को ये समझाया गया है कि हमें सीटों से ज्यादा अपनी पार्टी को खड़ा करना है। ताकि लोकसभा में इसका फायदा मिल सके। राहुल को ये समझाया गया है कि विधानसभा में कितनी सीटें जीतते हैं इसका कांग्रेस पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका सीधा असर तेजस्वी यादव पर पड़ेगा।’ चुनाव से 6 महीने पहले आक्रामक हुई कांग्रेस के एक्शन का क्या असर होगा? गठबंधन में पड़ सकती है दरार, तेजस्वी नाराज राहुल गांधी की नई नीतियों का सीधा असर बिहार में गठबंधन पर पड़ सकता है। पिछले लगभग 25-30 सालों से कांग्रेस यहां लालू के कंधे पर ही राजनीति कर रही है। गठबंधन में वही होते आया है जो लालू चाहते हैं। कांग्रेस के बिहार में एक्टिव होने के बाद तेजस्वी यादव ने कांग्रेस नेतृत्व से अपनी नाराजगी जाहिर की है। सूत्रों की मानें तो उनकी सोनिया गांधी और राहुल … Read more

शिवराज सिंह के बेटों के रिसेप्शन, शामिल होंगे राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु और पीएम नरेंद्र मोदी

भोपाल एमपी के पूर्व सीएम, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) इन दिनों एक बार फिर अपने दोनों बेटों कार्तिकेय सिंह और कुणाल सिंह के रिसेप्शन (Reception) की तैयारियां कर रहे हैं। चौंकिए मत, क्योंकि बेटों पर फिदा शिवराज सिंह ने अपने बेटों के लिए एक दो नहीं बल्कि, कई रिसेप्शन पार्टी रखी हैं। इस बार तीसरी बार रिसेप्शन का आयोजन किया जा रहा है, फर्क केवल ये कि इस बार दोनों बेटों का अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ रिसेप्शन होने जा रहा है।  बता दें कि पहले शिवराज ने अपने छोटे बेटे कुणाल सिंह (Kunal Singh Chouhan)की शादी की रस्में भोपाल के होटल ताज में निभाईं। फिर भोपाल के ही नीलबड़ इलाके के वाना ग्रीन होटल में शादी का रिसेप्शन आयोजित किया गया। जिसमें देश-प्रदेश की तमाम शख्सियतें, राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं। इसके बाद बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह (Kartikey Singh Chouhan) का विवाह जोधपुर में संपन्न हुआ, जिनके रिसेप्शन का आयोजन राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में ही किया गया। इस समारोह में VVIP समेत 10 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। 18 को होगा सम्मिलित रिसेप्शन शिवराज सिंह चौहान के दोनों बेटों कार्तिकेय और कुणाल का अब एक सम्मिलित रिसेप्शन आयोजित किया जा रहा है। इस रिसेप्शन में सबसे खास मेहमान होंगे राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु और पीएम नरेंद्र मोदी। 18 मार्च को आयोजित होने जा रहे इस रिसेप्शन में भी कई वर और वधु पक्ष के साथ ही कई VVIP को आमंत्रण दिया गया है। recent visitors 50

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 19 मार्च को मोहन सरकार दूसरी बार 6 हजार करोड़ का कर्ज लेने जा रही

भोपाल एमपी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान रंगपंचमी यानी 19 मार्च को मोहन सरकार दूसरी बार 6 हजार करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज 7 साल, 21 साल और 24 साल के लिए दो-दो हजार करोड़ रुपए की तीन अलग-अलग किस्तों में लिया जाएगा। मार्च में सरकार द्वारा 15 दिन के अंतराल में लिया जाने वाला यह तीसरा कर्ज होगा। इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में एक और कर्ज लिया जा सकता है। तीसरे कर्ज के पहले विधानसभा में डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा कह चुके हैं कि यह कर्ज नहीं निवेश है। रंगपंचमी तक अकेले मार्च में ही 16 हजार करोड़ रुपए का कर्ज सरकार ले चुकी होगी। कर्ज की इस राशि का भुगतान 19 मार्च 2032, 19 मार्च 2046 और 19 मार्च 2049 तक किया जाएगा। मार्च में दो बार पहले भी कर्ज ले चुकी सरकार इससे पहले 4 मार्च को सरकार ने 6 हजार करोड़ रुपए के तीन कर्ज दो-दो हजार करोड़ की तीन किस्तों पर लिए थे। इसके बाद 12 मार्च को फिर 4 हजार करोड़ रुपए के दो कर्ज दो-दो हजार करोड़ की रकम के रूप में लिए गए। अब 19 मार्च को तीसरा कर्ज उठाने की तैयारी है। इस तरह रंगपंचमी को लिए जाने वाले कर्ज समेत 15 दिन में सरकार ने तीन बार में 16 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने का फैसला किया है। अब तक 3.75 लाख करोड़ का कर्ज मध्यप्रदेश की जनता पर 31 मार्च 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में 3 लाख 75 हजार 578 करोड़ रुपए का कर्ज है। एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक बीजेपी सरकार ने एक साल में 44 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया था। इसके पहले 31 मार्च 2023 को सरकार पर कर्ज की राशि 3 लाख 31 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा थी। recent visitors 39