अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है, टूरिज्म इंडस्ट्री चौंकाने वाला दावा

गोवा सोचिए, आप किसी वीकेंड पर रिलैक्स करने का प्लान बना रहे है और आपके सामने दो ऑप्शन हैं – गोवा या दुबई। अब ज़रा चौंकने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि दुबई की ट्रिप अब गोवा से सस्ती पड़ रही है! यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया का कहना है कि भारत में ट्रैवल अब इतना महंगा हो गया है कि लोग विदेश घूमने को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। क्या भारत अपने ही टूरिज्म बूम को खत्म कर रहा है? आइए जानते हैं कि रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट्स के महंगे टैरिफ तक, कैसे भारत का ट्रैवल सेक्टर आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।   एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया ने एक अहम सवाल उठाया है – "क्या भारत अपने ही पर्यटन उद्योग को महंगा बनाकर खुद को बाहर कर रहा है?" उनका कहना है कि अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है। जो कभी एक आम आदमी के लिए किफायती यात्रा विकल्प (affordable travel options) था, वह अब सिर्फ उन लोगों के लिए रह गया है जो ऊंची कीमत चुकाने को तैयार हैं। लेकिन इसकी वजह सिर्फ ₹400 वाली एयरपोर्ट चाय या महंगे होटल किराए नहीं हैं।   रियल एस्टेट की मार से महंगा हुआ टूरिज्म सुतारिया के अनुसार, बढ़ती रियल एस्टेट कीमतें भारत के पर्यटन सेक्टर को प्रभावित कर रही हैं। पिछले एक दशक में संपत्ति की कीमतें आसमान छू गई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट्स को अपना निवेश निकालने के लिए दरें बढ़ानी पड़ रही हैं। सुतारिया ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी दिए हैं जैसे कि: – पर्यटन केंद्रों में प्रॉपर्टी की कीमतें गैर-पर्यटक इलाकों से 150% ज्यादा हो गई हैं। -अयोध्या में जमीन के दाम कुछ ही सालों में 10 गुना बढ़ चुके हैं। – बेंगलुरु और हैदराबाद में 2019 से अब तक 90% वृद्धि हुई है। -भारत का रियल एस्टेट मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, सुतारिया इसे सिर्फ संकट नहीं मानते, बल्कि स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए नए अवसर भी देखते हैं। उनका मानना है कि सस्ते ठहरने के विकल्प, ऑफबीट डेस्टिनेशन और बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएं इस स्थिति को बदल सकती हैं। उन्होंने आखिर में एक सवाल करते हुए लिखा- "क्या यह बदलाव भारतीय पर्यटन को बेहतर बनाएगा या इसे और महंगा कर देगा?"   recent visitors 47

अपने विभागों से संबंधित विकास कार्यों के लिए 100 दिनों की योजना बनाई: मंत्री प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली दिल्ली के पीडब्ल्यूडी और जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधायकों के साथ बैठक कर अपने विभागों से संबंधित विकास कार्यों के लिए 100 दिनों की योजना बनाई। दिल्ली की नई भाजपा सरकार के एजेंडे में सड़कों और नालों की मरम्मत, सीवर की सफाई और जल निकासी प्रबंधन, बाढ़ और जलभराव की समस्या, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई और लंबित विकास परियोजनाओं में तेजी लाना शामिल है। वर्मा ने कहा, “सालों से दिल्ली में कोई काम नहीं हुआ क्योंकि कोई इरादा नहीं था। स्थिति अब इतनी खराब हो गई है कि हमें लोगों को राहत देने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। सड़कों की मरम्मत, सीवरों की सफाई और नालियों को साफ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हमारी प्राथमिकता विकास है और अगले 100 दिनों में दिल्ली के लोगों को बदलाव दिखेगा। हम अधिक से अधिक इलाकों की समस्याओं को दूर करने का हर संभव प्रयास करेंगे। भाजपा सरकार सिर्फ वादे नहीं करती, हम लोगों की सेवा के लिए काम करते हैं।” दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में शकूर बस्ती, त्रिलोकपुरी, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, मुंडका, नांगलोई जाट, मोती नगर, मादीपुर (पश्चिम क्षेत्र), मंगलापुरी और किराड़ी के विधायक शामिल हुए। बैठक में पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी मौजूद थे। प्रवेश वर्मा ने एचटी को बताया कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए विधायकों और संबंधित अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठक करने का फैसला लिया गया है। वर्मा ने कहा कि अब हर विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को सीधे अधिकारियों के सामने रख रहा है और संबंधित विभागों को समाधान के लिए तत्काल निर्देश दिए जा रहे हैं। भाजपा सरकार दिल्लीवासियों को राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करेगी। इस पहल का असर अगले 100 दिनों में जमीनी स्तर पर दिखाई देगा। recent visitors 55

ओबीसी महासभा जिला कार्यकारिणी भोपाल के द्वारा कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा

OBC Mahasabha District Executive Bhopal submitted a memorandum to the Chief Minister through the Collector भोपाल (सुशील दामले) ! राजधानी स्थित कलेक्टर कार्यालय में ओबीसी महासभा के कार्यकर्ताओं ने,प्रदर्शन कर कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदय,एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा वही ओबीसी महासभा के अध्यक्ष ने हमें बताया कि,मध्यप्रदेश मैं तत्काल 27% आरक्षण लागू किया जाए,13% होल्ड हटाकर अबिलंब पिछड़ा वर्ग के चयनित विद्यार्थियों को जॉइनिंग दी जाए,देश मैं जाति जनगणना सरकार करवाये,तथा जनगणना उपरांत देश के अंदर संख्या के अनुपात मैं हिस्सेदारी दी जाये प्राइवेट सेक्टर मैं आरक्षण लागू किया जाये,किसानों कि फसलों के दाम बढ़ाये जाएं, जब किसानों कि फसलें खेत में रहती,तब फसलों के दाम ज्यादा होते हैं,जैसे ही किसानों की फसल घर आती हैं,लगभग 25% दाम कम कर दिए जाते हैं,और कर्ज मैं दबे हुए किसानों को मजबूरी में अपनी फसल कम रेट में बेचनी पड़ती हैं,और ऐसी अनेकों मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा recent visitors 109

होली के बाद UP पुलिस में हुए तबादले, 32 IPS और 17 DSP को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर आईपीएस अफसरों के तबादलों का बड़ा कदम उठाया है। इस बार कुल 32 आईपीएस अफसरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया गया है। इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। महत्वपूर्ण तैनाती: – डॉ. प्रीतिंदर सिंह को डीआईजी पीएसी मध्य जोन बनाया गया है, वे पहले डीजीपी मुख्यालय से अटैच थे। – आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। – अपर्णा कुमार को डीआईजी मानवाधिकार लखनऊ में तैनात किया गया है। – अशोक कुमार को एसपी क्षेत्रीय अभिसूचना गोरखपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – एलवी एंटोनी देव कुमार को एडीजी रूल्स एंड मैनुअल लखनऊ का कार्यभार सौंपा गया है। – अतुल शर्मा को डीआईजी पीएसी कानपुर अनुभाग सौंपा गया है। – शैलेंद्र कुमार राय को एसपी लोक शिकायत डीजीपी मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है। – देवेंद्र कुमार को अपर पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – आयुष श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर बनाया गया है। – इसके अलावा आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। अन्य महत्वपूर्ण तैनाती: – बजरंगबली को सेनानायक 37वीं वाहिनी पीएसी कानपुर, – कमलेश बहादुर को सेनानायक 25वीं वाहिनी पीएसी रायबरेली, – लाल भरत कुमार पाल को सेनानायक 49वीं वाहिनी पीएसी नोएडा, – दिनेश यादव को सेनानायक 41वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद, – अजय प्रताप को सेनानायक 48वीं वाहिनी PAC सोनभद्र, – अनिल कुमार यादव को डीसीपी वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, – रोहित मिश्रा को एसपी डीजीपी मुख्यालय लखनऊ PAC बाराबंकी, – नेपाल सिंह को सेनानायक 39वीं वाहिनी PAC मिर्जापुर, -शिवराम यादव को एसपी पीटीएस मेरठ, – दीपेंद्र नाथ चौधरी को डीसीपी कानपुर पुलिस कमिश्नरेट बनाया गया है। प्रमोशन के बाद DIG बने 12 अफसरों को मिली तैनाती: प्रमोशन के बाद 12 आईपीएस अफसरों को डीआईजी की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से कुछ प्रमुख तैनाती इस प्रकार हैं: – हेमंत कुटियाल को डीआईजी एसएसएफ लखनऊ, – स्वप्निल ममगाई को डीआईजी पीएसी मेरठ – शालिनी को डीआईजी पीएसी मुरादाबाद, – अरुण कुमार श्रीवास्तव को डीआईजी पीएसी अयोध्या अनुभाग, – डी प्रदीप कुमार को पुलिस महानिरीक्षक/अतिरिक्त सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड लखनऊ, – कमला प्रसाद यादव को डीआईजी एंटी करप्शन लखनऊ, – सूर्यकांत त्रिपाठी को डीआईजी फायर सर्विस मुख्यालय लखनऊ, – विकास कुमार वैद्य को डीआईजी स्थापना डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – तेज़ स्वरूप सिंह को डीआईजी कार्मिक डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – सुनीता सिंह को डीआईजी पीएसी मुख्यालय लखनऊ, – राजेश कुमार सक्सेना को डीआईजी पीटीएस सुल्तानपुर, – हृदयेश कुमार को डीआईजी ईओडब्ल्यू मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है।   recent visitors 59

BJP ने बताया मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला- बंगाल में OBC आरक्षण पर बवाल, SC पहुंची ममता सरकार

कोलकाता पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग नए सिरे से जातिगत पिछड़ेपन की समीक्षा कर रहा है और यह प्रक्रिया तीन महीने में पूरी हो जाएगी। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार की दलील सुनते हुए मामले को जुलाई तक के लिए टाल दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई तीन महीने बाद की जाए, जिसके बाद पीठ ने उनकी बात मान ली। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से ममता सरकार की इस पहल को मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया है। हाई कोर्ट ने रद्द की थी कई जातियों की ओबीसी सूची यह मामला उस समय गरमाया जब 22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2010 से अब तक कई जातियों को दी गई ओबीसी आरक्षण की सूची को अवैध करार दे दिया। कोर्ट ने पाया कि इन जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का आधार केवल धर्म था, जो संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 77 मुस्लिम जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करना पूरे मुस्लिम समाज का अपमान है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जिन लोगों को पहले ही आरक्षण का लाभ मिल चुका है या जो सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, उनकी नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बीजेपी ने लगाया 'मुस्लिम तुष्टिकरण' का आरोप वहीं पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा सियासी तूल पकड़ चुका है। बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार एक जातिगत सर्वे करा रही है, जिसका मकसद मुस्लिम ओबीसी को फायदा पहुंचाना और हिंदू ओबीसी को पीछे करना है। बीते दिनों बीजेपी महासचिव जगन्नाथ चटर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "टीएमसी सरकार का यह सर्वे केवल राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए है। वे मुस्लिम समुदाय की आर्थिक जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं ताकि सरकारी लाभ उन्हीं को दिया जा सके, जबकि हिंदू ओबीसी को इससे बाहर रखा जा रहा है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस सर्वे के सवालों को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे समुदायों के बीच फूट डाली जा सके। चटर्जी के मुताबिक, "सवालों में यह पूछा गया है कि उनके इलाकों में पानी की सुविधा कैसी है और क्या वे अपने पड़ोसियों के साथ खाना साझा करते हैं। यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जा सके।" नई जातियों से जुड़ी ठोस जानकारी दीजिए: सुप्रीम कोर्ट वहीं सुप्रीम कोर्ट पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार से यह मांग कर चुका है कि वह ओबीसी सूची में शामिल नई जातियों की सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़ी ठोस जानकारी पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन जातियों को ओबीसी में शामिल करने से पहले किसी तरह की कानूनी सलाह ली गई थी या नहीं। अब जब राज्य सरकार ने तीन महीने में पूरी समीक्षा करने की बात कही है, तो जुलाई में सुप्रीम कोर्ट इस पर अंतिम फैसला ले सकता है। इस बीच, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं। recent visitors 47

पीएम मोदी पिछले जन्म में महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज थे, लोकसभा में छिड़ा विवाद: भाजपा सांसद

नई दिल्ली संसद में चल रहे बजट सत्र के दौरान ओडिशा के बारगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद प्रदीप पुरोहित ने पीएम मोदी को लेकर एक विवादित दावा किया। सोमवार को अपने संबोधन के दौरान प्रदीप पुरोहित ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिछले जन्म में मराठा साम्राज्य के संस्थापक और महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज थे। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया, जहां इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान और उनकी विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है। आखिर क्या बोल गए भाजपा सांसद? प्रदीप पुरोहित ने अपने भाषण में एक संत से मुलाकात का जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें बताया कि नरेंद्र मोदी का पूर्व जन्म छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा, "मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वहां एक गंधमर्दन पहाड़ी क्षेत्र है। एक गिरिजा बाबा संत वहां रहते हैं। एक दिन बातचीत चल रही थी तो उन्होंने हमें बताया कि देश के आज जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं वे अपने पूर्व जन्म में महाराज छत्रपति शिवाजी थे। इसलिए आज वे भारत को दुनिया में सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की भावना से काम कर रहे हैं।" पुरोहित ने इसे एक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन उनके इस दावे ने तुरंत विवाद को जन्म दे दिया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया, खासकर एक्स प्लेटफॉर्म पर, लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई यूजर्स ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करार दिया। विपक्षी दलों ने इस बयान को हाथोंहाथ लिया और बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का राजनीतिकरण करने का प्रयास बताया। मुंबई की कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने वीडियो शेयर करते हुए मराठी में लिखा, "अखंड भारत के आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज का बार-बार अपमान करने तथा महाराष्ट्र और दुनिया भर के शिव प्रेमियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए भाजपा नेतृत्व द्वारा एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। इन लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की मानद टोपी नरेंद्र मोदी के सिर पर रखकर शिवाजी महाराज का घोर अपमान किया है। और अब इस भाजपा सांसद का यह घिनौना बयान सुनिए… हम शिवाजी का बार-बार अपमान करने के लिए भाजपा की सार्वजनिक रूप से निंदा करते हैं। भाजपा शिव-द्रोही है। हम शिवाजी का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेंद्र मोदी को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और इस सांसद को निलंबित करना चाहिए।" शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "भाजपा के इन बेशर्म चाटुकारों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी की छत्रपति शिवाजी महाराज से तुलना बिल्कुल अस्वीकार्य है।" ऐतिहासिक संदर्भ और विवाद छत्रपति शिवाजी महाराज 17वीं सदी के मराठा शासक थे, जिन्होंने मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ स्वराज की स्थापना की थी। उनकी वीरता, रणनीति और प्रशासनिक कुशलता उन्हें भारतीय इतिहास में एक महान नायक बनाती है, खासकर महाराष्ट्र में, जहां वे एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीक हैं। ऐसे में, उनके नाम को किसी भी समकालीन नेता से जोड़ना स्वाभाविक रूप से संवेदनशील और विवादास्पद हो जाता है। वैसे अब तक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। recent visitors 52

CM देवेंद्र फडणवीस- छावा मूवी के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हिंसा के बीच बॉलीवुड फिल्म 'छावा' का जिक्र किया है। उन्होंने दावा किया है कि इस फिल्म के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया है। सोमवार को भी औरंगजेब के मकबरे के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बाद अफवाह के चलते हिंसा भड़क गई थी। उन्होंने कहा, 'छावा मूवी ने औरंगजेब के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़का दिया है। सभी को महाराष्ट्र को शांत रखने की जरूरत है।' साथ ही उन्होंने नागपुर की हिंसा को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि नागपुर हिंसा के दौरान भीड़ ने कुछ चुनिंदा घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया; यह एक साजिश प्रतीत होती है। हिंसा में कई घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था। सीएम फडणवीस ने सदन में कहा, 'नागपुर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया। अफ़वाह फैलाई गई कि धार्मिक सामग्री वाली चीज़ें जला दी गईं….यह एक सुनियोजित हमला लगता है। किसी को भी कानून- व्यवस्था अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।' उन्होंने साफ किया है, 'पुलिस पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, सख्त कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने जानकारी दी है कि हिंसा में 3 डीसीपी समेत 33 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं, 5 आम नागरिक घायल हुए हैं और उनमें से एक ICU में है। नागपुर में हिंसा पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे मध्य नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान धर्मग्रंथ जलाया गया है। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया जिससे छह आम नागरिक और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। क्या हुई कार्रवाई नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और हिंसा के दौरान 34 पुलिसकर्मी तथा पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। मंत्री ने कहा कि हिंसा के दौरान 45 वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई और उन्होंने सभी समुदायों के सदस्यों से शहर में शांति बनाए रखने तथा किसी भी असामाजिक तत्व का समर्थन नहीं करने की अपील की। एकनाथ शिंदे क्या बोले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि जो लोग अब भी औरंगजेब की प्रशंसा कर रहे हैं, वे ‘‘देशद्रोही’’ हैं। उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह ने राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की थी और लोगों पर अनेक अत्याचार किए थे। शिंदे ने कहा कि दूसरी ओर, मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज एक ‘‘दैवीय शक्ति’’ थे, जो वीरता, बलिदान और हिंदुत्व की भावना के लिए डटे रहे। recent visitors 37