बेंगलुरु एयरपोर्ट पर आंखों से ब्लाइंड, दुबई से 4 किलो सोना टपाया, किया गिरफ्तार

बेंगलुरु बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक दृष्टिहीन व्यक्ति को 3.4 करोड़ रुपये मूल्य का सोना तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया है। कस्टम अधिकारियों ने जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उसे 4 मार्च को पकड़ा गया था। आपको बता दें कि यह गिरफ्तारी कर्नाटक की अभिनेत्री रान्या राव की गिरफ्तारी के एक दिन बाद हुई है। राव से 12.56 करोड़ रुपये मूल्य का 14.2 किलोग्राम सोना बरामद किया गया था। कस्टम अधिकारियों ने बताया कि विशिष्ट सूचना के आधार पर बेंगलुरु एयर कस्टम अधिकारियों ने इस दृष्टिहीन यात्री को दुबई से आने पर रोका। उन्होंने कहा, "जांच के दौरान उसके शर्ट के नीचे छिपाकर रखा गया 3,995.22 ग्राम सोना पकड़ा गया। भारतीय बाजार में इसकी कीमत 3,44,38,796 रुपये है। उसके खिलाफ तस्करी का मामला दर्ज किया गया।" आपको बता दें कि इससे पहले सैंडलवुड अभिनेत्री रान्या राव को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (KIA) पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की टीम ने सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया। रान्या दुबई से बेंगलुरु पहुंची थीं और उनके पास 14 किलोग्राम सोने की छड़ें मिलीं जो एक बेल्ट में छुपाई गई थीं। ये बेल्ट उनके शरीर से बंधी थी। इसके अलावा, उनके पास 800 ग्राम के सोने के आभूषण भी मिले। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच अधिकारियों को संदेह है कि वह बेंगलुरु हवाईअड्डे के जरिए सक्रिय रूप से संचालित एक सोने की तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं। बार-बार विदेश यात्रा रान्या की बार-बार की गई अंतरराष्ट्रीय यात्राओं ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इस साल की शुरुआत से उन्होंने 10 से अधिक बार विदेश यात्राएं की थीं। एक अधिकारी ने बताया, "DRI को संदेह हुआ जब उन्होंने देखा कि रान्या लगातार छोटे-छोटे अंतराल में गल्फ देशों की यात्राएं कर रही हैं। इसी कारण उन्हें ट्रैक किया जाने लगा। जब वह सोमवार को दुबई से एमिरेट्स की उड़ान से बेंगलुरु पहुंचीं, तो DRI टीम ने उन्हें रोकने की योजना बनाई।" जांच में पाया गया कि पिछले 15 दिनों में वह चार बार इसी तरह से यात्रा कर चुकी थीं और हर बार एक जैसी वेशभूषा में थीं, जिसमें उनकी बेल्ट छिपी रहती थी। recent visitors 63

कॉलेज की तीसरी मंजिल से कूद गया बीएससी का छात्र, की आत्महत्या, इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुसाइड नोट लिखा

इंदौर वैष्णव इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट कॉलेज में बीएससी के छात्र मयूर राजपूत ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके पूर्व मयूर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुसाइड नोट लिखा है। उसने लिखा कि वह अच्छा इंसान नहीं बन पाया, न अच्छा बेटा बन सका। द्वारकापुरी पुलिस ने मर्ग कायम किया है। एसीपी शिवेंदु जोशी के मुताबिक घटना गुमाश्ता नगर की है। प्रजापत नगर निवासी 21 वर्षीय मयूर राजपूत ने आत्महत्या की है। दोपहर करीब तीन बजे मयूर कालेज की तीसरी मंजिल से कूद गया। छात्रों ने शव देखकर कालेज प्रबंधन और पुलिस को खबर की। घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। जिसमें मयूर कॉलेज की तीसरी मंजिल पर खड़ा है और वहां से कूदते हुए दिख रहा है। इस दौरान वहां मौजूद उसका दोस्त बचाने भी दौड़ा। दोनों के बीच चंद सेकंड का फासला होने के बाद भी मयूर कूद गया। इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुसाइड नोट एसीपी के मुताबिक मयूर ने आत्महत्या के पूर्व इंस्टाग्राम पर सुसाइड नोट के रूप में स्टोरी लिखी है। उसने लिखा कि मैं न अच्छा बेटा बन सका, न अच्छा इंसान बन सका। इसलिए मैं यह कदम उठा रहा हूं। टीआई राहुल राजपूत के मुताबिक शनिवार को कॉलेज में कार्यक्रम भी चल रहा था। कॉलेज प्रबंधन घटना से हैरान मयूर कार्यक्रम में शामिल भी हुआ था। इसके बाद इमारत पर चढ़ा और कूद गया। पुलिस ने साथी छात्रों से भी बात की है। उन्होंने आत्महत्या के कारणों के बारे में पता होने से इन्कार किया है। कॉलेज प्रबंधन और स्वजन भी घटना से हैरान हैं। युवक ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं इसलिए ऐसा कर रहा हूं कि मेरे जैसा इंसान किसी को नहीं चाहिए। अब लगता है कि मेरे जैसा इंसान किसी का नहीं हो सकता। recent visitors 56

शिप्रा एक्सप्रेस के एसी कोच में महिला के साथ अटेंडर ने की बदसलूकी, यात्रियों ने अटेंडर को पकड़कर जमकर पीटा

उज्जैन शिप्रा एक्सप्रेस से पति व बच्ची के साथ एक महिला धनबाद से उज्जैन की यात्रा कर रही थी। थर्ड एसी कोच के अटेंडर ने महिला के साथ छेड़छाड़ की। महिला ने विरोध किया तो उसने मारपीट की। महिला के शोर मचाने पर यात्रियों ने अटेंडर को पकड़कर जमकर पीटा। उज्जैन स्टेशन पर आरोपित को जीआरपी को सौंपा गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच के लिए मामला पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय नगर, रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश को सौंपा है। पुलिस ने बताया कि रांची निवासी महिला अपने पति व बच्ची के साथ शिप्रा एक्सप्रेस में धनबाद से उज्जैन की यात्रा कर रही थी। महिला व उसके पति के पास कंफर्म टिकट नहीं था। इस कारण वह टाॅयलेट के पास बैठकर यात्रा करने लगे। ट्रेन में कोच अटेंडर सादिक पठान निवासी बेरसिया भोपाल ने महिला व उसके पति को टीटीई से बात कर सीट दिलाने का झांसा दिया था। सीट नहीं मिलने पर सादिक ने महिला व उसके पति को अटेंडर सीट दे दी थी।    महिला का पति ऊपरी सीट पर सो गया था। वहीं महिला नीचे की सीट पर बच्ची के साथ सो रही थी। उसी दौरान सादिक ने महिला से अश्लील हरकत की। विरोध करने पर उसके साथ अभद्रता करने लगा। उस दौरान ट्रेन पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय नगर रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश के पास थी। जहां से करीब 17 घंटे बाद ट्रेन उज्जैन पहुंची। यहां महिला के उज्जैन निवासी परिचित हिंदूवादी संगठन के लोगों के साथ स्टेशन पहुंच गए थे। सुरक्षा के लिए नीलगंगा पुलिस भी जीआरपी थाने पहुंची थी।   recent visitors 51

वैकल्पिक पशु चिकित्सा से कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती

भोपाल पशुओं की वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होटल पलाश रेसीडेंसी में 11 एवं 12 मार्च को पूर्वाह्न 10 बजे से होगा। प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग एवं मध्य प्रदेश राज्य पशु चिकित्सा परिषद के समन्वय से आयोजित इस कार्यशाला में दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के विषय विशेषज्ञ अभय महाजन, प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव, अध्यक्ष, वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया उमेश चंद्र शर्मा शामिल होंगे। कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रदेश के पशु चिकित्सकों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसमें लगभग 110 प्रतिभागी सम्मिलित हो रहे हैं। कार्यशाला में वैकल्पिक पद्धति से पशुओं की चिकित्सा किए जाने संबंधी एक पॉलिसी बनाने का भी कार्य किया जाना है। इससे शासन द्वारा वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति को पशुओं की चिकित्सा के लिए प्रदेश में लागू किया जा सके । देश में आदिकाल से पारंपरिक एवं वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जाता था। इसे पुनः पशुओं की चिकित्सा में बढ़ावा देने एवं जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह कार्य शाला आयोजित की जा रही है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण मनुष्यों एवं पशुओं में जीवाणु रोधी दवाइयाँ के प्रति प्रतिरोधकता का बढ़ना महामारी का रूप ले रहा है, जो एक भयानक वैश्विक खतरा बनता जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति से एवं एंटीबायोटिक के दुरुपयोग से इसका दुष्प्रभाव मनुष्य एवं पशुओं में देखा जा रहा है। इसके कारण एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस की वैश्विक समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे निपटने के लिये अल्टरनेट वेटरनरी प्रैक्टिस जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, पारंपरिक चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा इत्यादि का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है, जिससे कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती है।   recent visitors 68

भगोरिया पर्व का अंचल में उल्लास,मादलों की थाप पर झूमे आदिवासी, गुलाल से सराबोर हुआ माहौल

आलीराजपुर/झाबुआ आदिवासी अंचल में प्रमुख सांस्कृतिक पर्व भगोरियों मेलों की शुरुआत शुक्रवार से हो गई। अब 13 मार्च तक अंचल सांस्कृतिक उत्सव के उल्लास में डूबा रहेगा। पहले दिन झाबुआ-आलीराजपुर जिले के वालपुर, कट्ठीवाड़ा, उदयगढ़, बड़ी, भगोर, बेकल्दा, मांडली व कालीदेवी में मेले लगे। हजारों की संख्या में लोग इनमें मांदल की थाप और बांसुरी की धुन पर पारंपरिक नृत्य करते हुए निकले। युवतियां भी पारंपरिक गेर भगोरिया का सबसे बड़ा आकर्षण रही। बड़ी संख्या में बाहर से भी लोग भगोरिया उत्सव में शामिल होने के लिए आए। शनिवार को झाबुआ-आलीराजपुर जिले में नानपुर, उमराली, राणापुर, मेघनगर, बामनिया, झकनावदा व बलेड़ी में भगोरिया मेला लगेगा। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा में भी मेलों की धूम रहेगी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पूर्व शुरू हुए मेलों में आधुनिकता भी दिखी। भगोरिया को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। वरिष्ठ लेखक आरएस त्रिवेदी ने बताया कि भगोर नामक गांव माताजी के श्राप से उजड़ गया था जो बाद में वापस बसा। इस खुशी में वहां वार्षिक मेला आयोजित किया गया। बाद में इस तरह के मेले अन्य कस्बों में भी लगने लगे, चूंकि यह परंपरा भगोर की तर्ज पर शुरू हुई थी, इसलिए इसका नाम भगोरिया पड़ गया। एक अन्य प्रथा के अनुसार होली के सात दिन पहले आने वाले हाट प्राचीनकाल में गुलालिया हाट कहे जाते थे। भगोरिया हाट कहने लगे गुलालिया हाट ही बाद में भगोरिया हाट कहे जाने लगे। सभी ग्रामीण हाट बाजार स्थल पर ही एकत्रित हो जाते। गुलाल उड़ती और उल्लास भरा वातावरण छा जाता। रियासत काल में राजा व जागीरदार भी इसमें शामिल होते थे। वे होली की गोट यानी पुरस्कार स्वरूप कुछ नगदी व वस्तु अपनी प्रजा के बीच बांटते थे। अब यह भूमिका जन प्रतिनिधियों के हिस्से में आ गई है। भगोरिया हाटों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पुलिस का कहना है कि भगोरिया हाटों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। भगोरिया में हथियारों के प्रदर्शन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश अथवा ऑडियो-वीडियो वायरल करने पर भी सख्त कार्रवाई होगी। भगोरिया उत्सव में निकलती है गेर बता दें कि आदिवासी अंचल में होली से एक सप्ताह पूर्व से नगर, कस्बे व ग्राम में हाट बाजार के दिन भगोरिया हाट की परंपरा रही है। यह लोक पर्व देश-विदेश में मशहूर है। भगोरिया हाट में आदिवासी समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं तथा ढोल-मांदल की थाप व बांसुरी की तान के साथ नृत्य करते हुए गेर निकाली जाती है। यह गेर भगोरिया का सबसे बड़ा आकर्षण है। इसमें आदिवासी समाज की पुरातन पारंपरिक संस्कृति के रंग बिखरते हैं। यही कारण है कि देश के साथ ही विदेश से भी लोग भगोरिया उत्सव देखने के लिए आते हैं। कब-कहां पर भगोरिया हाट     07 मार्च– वालपुर, कट्ठीवाड़ा, उदयगढ़, भगोर, बेकल्दा, मांडली व कालीदेवी।     08 मार्च- नानपुर, उमराली, राणापुर, मेघनगर, बामनिया, झकनावदा व बलेड़ी।     09 मार्च– छकतला, कुलवट, सोरवा, आमखुट, झाबुआ, झिरण, ढोल्यावाड़, रायपुरिया, काकनवानी व कनवाड़ा।     10 मार्च– आलीराजपुर, आजादनगर, पेटलावद, रंभापुर, मोहनकोट, कुंदनपुर, रजला, बड़ा गुड़ा व मेड़वा।     11 मार्च– बखतगढ़, आंबुआ, अंधारवाड़, पिटोल, खरडू, थांदला, तारखेड़ी व बरवेट।     12 मार्च– बरझर, खट्टाली, चांदपुर, बोरी, उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोड़ायता, कल्याणपुरा, मदरानी व ढेकल।     13 मार्च– फुलमाल, सोंडवा, जोबट, पारा, हरिनगर, सारंगी, समोई व चौनपुरा। आदिवासी समाज के लिए खास है भगोरिया पर्व, लड़के-लड़कियां चुनते हैं मनपसंद हमसफर आदिवासी संस्कृति का पर्व भगोरिया की शुरुआत होने जा रही है. सात दिनों तक चलने वाला यह पर्व मुख्य रुप से आदिवासी क्षेत्र धार, झाबुआ, खरगोन, अलीराजपुर, करड़ावद जैसे क्षेत्र में विशेष रूप से मनाया जाता है. जिन अंचलों में आदिवासी समाज बड़ी संख्या में रह रहे हैं, वहां पर यह विशेष रुप से पूरे धूम धाम से मनाया जाता है. इसी कड़ी में राजधानी भोपाल से सटे सीहोर जिले के कई गांवों में भगोरिया पर्व की धूम देखने को मिल रही है. सीहोर जिले के बिलकिसगंज, लाडकुई, ब्रिजिशनगर, सिद्दीकगंज, कोलारडेम क्षेत्र में हाट के दिन भगोरिया पर्व आयोजित होगा.  प्रदेश भर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आज 18 मार्च से भगोरिया लोकपर्व की शुरुआत होगी. 24 मार्च को होली दहन के साथ पर्व का समापन होगा. क्यों पड़ा भगोरिया नाम? भगोरिया महोत्सव आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. भगोरिया में आदिवासी समुदाय की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. ऐसी मान्यता है कि भगोरिया की शुरुआत राजा भोज के समय से हुई थी. उस समय दो भील राजाओं कासूमार और बालून ने अपनी राजधानी भगोर में मेले का आयोजन करना शुरू किया. धीरे-धीरे आसपास के भील राजाओं ने भी इन्हीं का अनुसरण करना शुरू किया, जिससे हाट और मेले को भगोरिया कहने का चलन बन गया. सभी को रहता है बेसब्री से इंतजार भगोरिया हाट में जाने के लिए बड़े, बूढ़े, बच्चे, युवा, युवतियां, महिलाएं हर कोई लालायित रहता है. एक महीने पहले से ही आदिवासी समाज भगोरिया पर्व की तैयारियों में जुट जाता है. आदिवासी युवतियां नए पारम्परिक परिधान पहनकर इस मेले में आती हैं. श्रृंगार करती हैं, तो युवा भी सजधज कर बंसी की धुन छेड़ने लगते हैं. आदिवासी जन ढोल मांदल कसने लग जाते हैं. चारों तरफ उत्साह और उमंग का वातावरण रहता है. खेतों में गेहूं और चने की फसल के साथ वातावरण में टेसू, महुआ, ताड़ी की मादकता अपना रस घोलती है. तैयार किया जात विशेष ढोल हाट में जगह-जगह भगोरिया नृत्य में ढोल की थाप, बांसुरी, घुंघरुओं की ध्वनियां सुनाई देती हैं, यह दृश्य बहुत ही मनमोहक होता है. इस पर्व के लिए बड़ा ढोल (मांदल) विशेष रूप से तैयार किया जाता है, जिसमें एक तरफ आटा लगाया जाता है. ढोल वजन में काफी भारी और बड़ा होता है. पर्व में ऐसे तय होते हैं रिश्ते भगोरिया मेले में युवक युवतियां एक ही रंग के वेश-भूषा में नजर आते हैं. इस दौरान कई युवक युवतियों का रिश्ता भी तय हो जाता है. भगोरिया में आने वाले युवक-युवतियां अपने लिए जीवन साथी की तलाश भी करते हैं. इनमें आपसी रजामंदी जाहिर करने का तरीका भी बेहद निराला होता है. सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है. अगर लड़की पान खा लेती है, तो रिश्ता हां समझा जाता है. इसके बाद … Read more

मध्य प्रदेश के लाखों श्रमिकों के महंगाई भत्ते की नई दरें 1 अक्टूबर 2024 से लागू की गई

भोपाल मध्य प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए खुशखबरी है। राज्य की मोहन यादव सरकार ने वेतन के साथ दिए जाने वाले परिवर्तनशील महंगाई भत्ते में वृद्धि की है।नई दरें 1 अक्टूबर 2024 से लागू की गई है, ऐसे में एरियर का भी भुगतान होगा।इस संबंध में श्रम विभाग ने आदेश जारी कर दिए है। यह वृद्धि जनवरी से जून 2024 के औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हुई 2 पाइंट की वृद्धि के आधार पर की गई है। इससे पहले श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि की गई थी, जिसका लाभ 1 मार्च 2025 से मिलेगा। बता दे कि हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। इसके बाद ही श्रम विभाग ने न्यूनतम वेतन वृद्धि के बाद अब महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया है। जानें किसे कितनी मिलेगी राशि?     श्रम विभाग के आदेश के तहत, 1 अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2025 तक इन श्रमिकों को 2225+50=2275 रुपए प्रति माह महंगाई भत्ता दिया जाएगा। यानी प्रतिदिन उन्हें 87 रुपए 50 पैसे डीए मिलेगा।     इसमें अकुशल कर्मचारियों को 9575 रुपए मानदेय और 2275 रुपए महंगाई भत्ता मिलेगा।     अर्द्धकुशल श्रमिकों को मानदेय 10571 रुपए, कुशल श्रमिकों को 12294 रुपए और उच्च कुशल श्रमिकों को 13919 रुपए और महंगाई भत्ता सभी को 2275 रुपए ही मिलेगा। दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का न्यूनतम वेतन बढ़ा     दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों एवं श्रमिकों के लिए भी खुशखबरी है। श्रम आयुक्त इंदौर ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए 1 अप्रैल से 30 दिसंबर 2024 तक के लिए न्यूनतम वेतन भुगतान के आदेश जारी कर दिए।     इससे प्रदेश के 10 लाख दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों एवं श्रमिक लाभान्वित होंगे। इस फैसले से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के वेतन में अप्रैल 2024 से प्रतिमाह 2225 रुपये की वृद्धि होगी।     इसके तहत अकुशल मासिक वेतन 11800, अर्ध कुशल श्रमिक को 12796, कुशल श्रमिक को 14519, उच्च कुशल को 16144 मासिक वेतन प्राप्त होगा।     माह के चार रविवार के अवकाश का अतिरिक्त वेतन प्राप्त होगा।दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और श्रमिकों के वेतन में एक अक्टूबर 2024 से 2275 रुपये प्रतिमाह या 87.50 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि के आदेश जारी किए recent visitors 91

आज 9 मार्च इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, होगा जबरदस्त धन लाभ, जानिए अपना आज का राशिफल

मेष राशि- आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे। आत्मसंयत रहें। बेकार के क्रोध व वाद-विवाद से बचें। नौकरी में कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। वृषभ राशि- मन अशांत हो सकता है। धैर्यशीलता में कमी रहेगी। संयत रहें। नौकरी में अफसरों से सद्भाव बनाकर रखें। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। आय मे वृद्धि होगी। मिथुन राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। पर नौकरी में तरक्की के मौके मिल सकते हैं। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान बढ़ेगा। कर्क राशि- वाणी में सौम्यता रहेगी। माता-पिता से कारोबार के लिए धन की प्राप्ति हो सकती है। कारोबार के लिए यात्रा से लाभ के अवसर मिलेंगे। परिश्रम अधिक रहेगा। सिंह राशि- मन प्रसन्न रहेगा। संयत रहें। क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक व बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आय के साधन बढ़ेंगे। कन्या राशि- मन प्रसन्न रहेगा। पर, धैर्यशीलता बनाए रखें। बातचीत में संतुलित रहें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव की संभावना बन रही है। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। तुला राशि- मन परेशान हो सकता है। आत्मसंयत रहें। क्रोध से बचें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान भी रखें। वृश्चिक राशि- आत्मसंयत रहें। बेकार के क्रोध से बचें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। परिवार का साथ मिलेगा। रुके धन की प्राप्ति हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। धनु राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मसंयत रहें। अपनी भावनओं को वश में रखें। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा। आय में वृद्धि होगी। मकर राशि- मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। नौकरी में बदलाव के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में बदलाव भी हो सकता है। आय बढ़ेगी। कुंभ राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। तरक्की के मौके मिलेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। मीन राशि- आशा-निराशा के मनोभाव हो सकते हैं। परिवार का साथ मिलेगा। सेहत के प्रति सचेत रहें। नौकरी में तरक्की के साथ विदेश जा सकते हैं। सम्मान की प्राप्ति होगी। recent visitors 101