सेंट जान्स चर्च में संध्या कालीन प्रार्थना का आयोजन

Evening prayer held at St John’s Church भोपाल (सुशील दामले) ! राजधानी में 40 दिवसीय उपवास की शुरुआत हो गई है,प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए बलिदान के पवित्र दिनों का आरंभ हो गए हैं,ईसाई समाज के लोग 40 दिनों तक उपवास रखकर प्रभु यीशु की आराधना करते हैं,इस दौरान जाने-अनजाने में जो भी पाप अथवा गलत कार्य किए गए हैं और किसी के दिल को ठेस पहुंचाया है,उनसे हृदय से क्षमा याचना करते हैं,अपनी क्षमता के अनुसार गरीब परिवारों की मदद करते हैं,यह 40 दिन के उपवास में लोग प्रार्थना,परहेज और उपवास के रूप में मनाते हैं,वहीं गोविंदपुरा स्थित सेंट जॉन चर्च में भी प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना हो रही है,फॉदर अनिल मार्टिन ने हमें बताया कि,प्रभु यीशु के बलिदान के गीत गाने के साथ ही प्रार्थना की जा रही हैं,प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान को पवित्र दिनों के रूप में याद किया जाता हैं,ये विशेष दिनों को दुख भोग के दिन होते हैं इन दिनों में विशेष रूप से क्षेत्र अनुसार मसीही परिवार प्रतिदिन संध्या कालीन प्रार्थना करते हैं,और साथ ही सेवा के कार्य करते हैं,जैसे वृद्ध आश्रम,अनाथ आश्रम सहित ऐसे लोग जो मोहताज एवं विकलांग हैं,ऐसे लोगों की सेवा करते हैं,वहीं 20अप्रैल को इस पवित्र महा का समापन होगा,तत्पश्चात ईस्टर के रूप में ये पर्व मनाया जाएगा recent visitors 96

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को मजबूत करने का संकल्प: नए प्रदेशाध्यक्ष का बड़ा बयान

Resolution to strengthen the Gondwana Ganatantra Party: Big statement by the new state president भोपाल (सुशील दामले)! गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरुमाल दादा तुलेश्वर सिंह मरकाम ने मुझे प्रदेशाध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा हैं। मैं पार्टी का एक साधारण सा कार्यकर्ता हूं, पेनवासी दादा हीरा सिंह मरकाम के महान आंदोलन का समर्पित सिपाही हूं। जो जिम्मेदारी मुझे दी गई हैं वो आप सब के आशीर्वाद और सहयोग से पूरा करने में अपना सब कुछ समर्पित कर दूंगा। किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता ही उसकी असल पूंजी हैं, मैं नेता नहीं पार्टी एक सिपाही हूं और मैं पार्टी को सामूहिक नेतृत्व देने का वादा करता हूं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की रीति, नीति,विचार और सिद्धातों को आप सब के साथ मिलकर और अधिक मजबूत करने का भरकस प्रयास करूंगा। मध्यप्रदेश में रहने वाले आदिवासी समाज के साथ ही साथ इस अंचल में रहने वाले सभी वर्गों के लोगों को सरकार की उपेक्षाओं, भ्रष्टाचार और शोषण से निजाद दिलाने के लिए हम सब एक मंच पर मिलकर संघर्ष करेंगे और आदिवासी अंचल के विकास के लिए कार्य करेंगे। समाज को मजबूती से संगठित किया जाएगा आदिवासी समाज को जागरूक और एकजुट करने की दिशा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का प्रदेश संगठन पूरी ताकत से काम करेगा। जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। प्रदेश में दिखावे के तौर पर लागू पेसा एक्ट को पूरी तरह से लागू करने की मांग की जाएगी। मैं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मुखिया के तौर पर पार्टी और आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य करूंगा। आदिवासी समाज को जागरूक और एकजुट करने की दिशा में प्रदेश संगठन पूरी ताकत से काम करेगा। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। आदिवासी क्षेत्रों में उपलब्ध खनिजों पर आदिवासियों को हक दिलाने। वनोपज पर आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित किए जाने हेतु प्रयास करेंगे। वर्तमान समय में प्रदेश में आदिवासी समाज की जनसंख्या कुल आबादी का 25 प्रतिशत है। विधानसभा में आदिवासी जनप्रतिनिधियों के लिए 25% स्थान आरक्षित कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के 25% आदिवासियों के बिना कोई सरकार नहीं बना सकता प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है। मध्यप्रदेश में आदिवासी मतदाता 21% से अधिक है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पिछले 35 वर्षों से आदिवासी समाज के बीच संघर्ष कर रही है, किंतु पार्टी को राजनीतिक सफलता नहीं मिल पाई, वर्तमान में प्रदेश में एक भी विधायक नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश में मात्र 15% दलित मतदाता है जिनकी एकता के कारण बसपा तीन बार सरकार बनाने में सफल रही। बसपा के उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की एकजुटता के कारण आज राष्ट्रीय दल की श्रेणी में है। वही छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति की अच्छी खासी आबादी होने के बाद भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को विशेष सफलता नहीं मिल पाई है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस आदिवासी मतदाताओं को भ्रमित करने में सफल हो जाती है। आदिवासी क्षेत्रों की आरक्षित सीटों पर राष्ट्रीय पार्टियों से जितने वाले हमारे समाज के नेता समाज की बात कभी नहीं उठाते वे अपनी पार्टी लाइन पर काम करते है। यदि कारण है कि प्रदेश में आदिवासी समाज की कोई आवाज उठाने वाला नहीं है, कोई सुनने वाला नहीं है। प्रदेश में आदिवासियों का शोषण और उत्पीड़न चरम पर है। नौकरियों की ठेका प्रथा और पलायन आदिवासियों के खिलाफ साजिश है आदिवासी समाज दिनों दिन पिछड़ता जा रहा है। सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जन जाति वर्ग के आरक्षण का लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि अधिकांश नौकरियों ठेके और आउटसोर्सिंग के हवाले कर दी गई है। जिसका सबसे अधिक खमियाजा आदिवासी समाज के युवाओं को उठाना पड़ रहा है। आजादी के 75 साल बाद आदिवासी अंचल में लोगों अच्छे रोजगार के अवसर तो छोड़िए मजदूरी तक नहीं मिल पा रही है। मध्यप्रदेश के मजदूर अन्य प्रदेशों में जाकर मजदूरी कर रहे है। प्रदेश की सरकार मजदूरों का पलायन रोकने का प्रयास नहीं कर रही है। प्रदेश में मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर रोजगार गारंटी योजना में हमारे श्रमिकों के नाम पर करोड़ो रूपये का भ्रष्टाचार हो रहा है। इतने बड़े स्तर पर गांव गांव में भ्रष्टाचार व्याप्त है जिसके बाद भी जिला और प्रदेश प्रशासन दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं कर रहा है। ये सरकारें नहीं चाहती कि आदिवासी मजदूर आर्थिक रूप से मजबूत हो इसलिए इन्हें गांवों में मजदूरी देने का प्रयास बंद कर दिया है, गांव और छोटे परिवारों के काबिल नौकरियों ठेके पर दे दी जिससे आदिवासी समाज को आरक्षण का लाभ न मिल पाए। दूसरे प्रदेशों में मजदूरों के पलायन के पीछे इनकी सोच है आदिवासी समाज को कमजोर करना, बड़ी संख्या में इनके प्रदेश से बाहर रहने से आदिवासियों का संख्या बल कम होता है। खनिजों की लूट मची है मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में ही सबसे अधिक खनिज भंडार है, पर इससे किसी भी तरह का लाभ आदिवासी समाज की नहीं मिलता। इसका लाभ बड़े उद्योगपति और बाहरी व्यापारियों द्वारा उठाया जाता है। इन क्षेत्रों में रहने वाले जनजाति लोगों को इन खनिज भंडारों से कोई लाभ नहीं मिलता दूसरी और इन क्षेत्रों से आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ रहा रहा। आदिवासियों का न तो उचित ढंग से पुनर्वास हो रहा है और न ही उन्हें उचित मुआवजा मिलता है और न ही रोजगार दिया जा रहा है। इन खनिज भंडारों से होने वाली अरबों खरबों की आय से उद्योगपति, नेता और सरकार अपनी जेबें भर रही है अधिकारी जमकर भ्रष्टाचार कर रहे है। खनिजों से होने वाली आय से पूरे प्रदेश में विकास कार्य करवाए जाते है और सबसे कम राशि आदिवासी क्षेत्रों पर खर्च किया जाता है जिसके कारण ये क्षेत्र आज भी पिछड़े है।आदिवासी अंचल से खनिजों से होने वाली आय का उपयोग आदिवासीओ के विकास और हित में नहीं किया जा रहा है जो आदिवासियों के साथ खुला अन्याय है। आदिवासी अंचल में रेत खदानों पर बाहरी माफियाओं का कब्जा करवा दिया गया है गरीब, आदिवासी, किसान खुद की रेत … Read more

भोपाल में पराली जलाने पर रोक लगी, आदेश का उल्लंघन करने पर दर्ज होगी FIR, लगेगा जुर्माना

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को सबसे सुंदर राजधानी का ताज मिला है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां की हवा खराब होने लगी है। एक कारण यह भी है कि रवि की फसल कटते ही भोपाल की हवा और ज्यादा जहरीली हो जाती है। इस संकट को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है। भोपाल जिले में अगले 3 महीने तक पराली जलाने पर रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने इससे संबंधी एक पत्र बुधवार को जारी कर दिया है। भोपाल जिला प्रशासन द्वारा जारी किये गए पत्र में लिखा है कि खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जन संपत्ति एवं प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जन्तु नष्ट हो जाते हैं। जिससे नुकसान होता है। इससे खेत की मिट्टी की उर्वरक शक्ति खत्म होती जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं खेत में पड़ा कचरा, भूसा, डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। इन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है। पराली जलाने के हानिकारक प्रभाव आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों को सलाह दी है कि जिले में कई किसान रोटावेटर एवं अन्य साधनों से डंठल खेत से हटा रहे हैं। यह सुविधा जिले में उपलब्ध हो गई है। नरवाई जलाने पर एफआईआर अगर किसी व्यक्ति ने इस आदेश का उल्लंघन किया तो उसके विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 5 मई 2025 तक लागू रहेगा। भोपाल अपर कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देशित किया है कि अगर कहीं पराली जलाने की घटना हो तो उस पर कार्रवाई की जाए। एक्शन मोड में कलेक्टर करीब तीन महीने पहले भी कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद पराली जलाने पर रोक लगाई थी, जो अब तक पूरे जिले में लागू है। इसके बाद अब फिर से रोक लगा दी गई है। भोपाल जिले की सीमा में बड़ी मात्रा में खेती की जाती है। यहां पर गेहूं अधिक मात्रा में बोई जाती है। इस कारण इसके बचे हुए अवशेष यानि पराली को जलाया जाता है, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। वहीं, कई बार खेतों की आग रहवासी इलाकों में भी पहुंच चुकी है। जिससे आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती है। recent visitors 33

ग्वालियर किला अब निजी हाथों में, इंडिगो एयरलाइंस से 5 साल का करार

Gwalior Fort is now in private hands, 5 year agreement with Indigo Airlines Gwalior Fort: नरेंद्र कुइया. लियर के किले को अब निजी हाथों में देने की तैयारी है। इसके लिए भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ एमओयू किया है। इसमें आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। अभी 5 साल के करार में किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण होगा। बाद में पांच साल और बढ़ेगा। इसकी फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी, एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। इनके संरक्षण का कार्य भी वे ही करते हैं। ग्वालियर दुर्ग पर एमओयू (MOU) के बाद की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मप्र टूरिज्म(MP Tourism), इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) और एकेसीएसएफ की 100 लोगों की टीम 7 मार्च को शाम 4 बजे किले पर पहुंचेगी। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के वि₹म महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। एमओयू में ऐसे तथ्य● ग्वालियर किला कंजर्वेशन और इल्यूमिनेशन परियोजना बहुआयामी प्रयास।● पर्यटकों के लिए सुविधाजनक पहुंच मार्ग, सुविधाओं का विस्तार।● मौजूदा स्थानों का उपयोग कर कैफे व प्रदर्शनी स्थलों का विकास। तब विरोध पर रुका था होटल निर्माणग्वालियर किले पर बनी भीमसिंह राणा की छत्री पर शासन ने 2022-23 में होटल की योजना बनाई थी। जाट समाज के विरोध के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। श्योपुर का किला, बलदेवगढ़ का किला, दतिया का राजगढ़ पैलेस राज्य पुरातत्व विभाग से असंरक्षित कर पर्यटन निगम को दिए थे। 50 लाख रुपए मासिक आयग्वालियर किले पर 50 लाख रु. मासिक आय ग्वालियर दुर्ग पर बने केंद्र-राज्य पुरातत्व विभाग के स्मारकों को देखने विदेशों से सैलानी आते हैं। मासिक आय 50 लाख तक है। विशेष दिनों में यह बढ़ जाती है। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के विक्रम महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैंनिजी कंपनियों को पुरातत्व संरक्षित स्मारकों की जानकारी नहीं होती। वे धरोहरों का संरक्षण कार्य कैसे कर सकती हैं। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैं। ये सब मिलीभगत से होते हैं। recent visitors 265

जो आदमी दो-दो बार फेल हुआ, मैंने सोचा था कि ऐसा आदमी प्रधानमंत्री कैसे बन सकता :मणिशंकर अय्यर

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर विवादित बयान देकर अपनी ही पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया है। इस बार उनका बयान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर है। उनके इस बयान वाले वीडियो को भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो में अय्यर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ऐसे आदमी को कैसे देश का प्रधानमंत्री बना दिया गया, जो दो बार फेल हो चुका था। वीडियो पर भाजपा हमलावर, कांग्रेस का बचाव अमित मालवीय ने इस वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, "राजीव गांधी अकादमिक रूप से कमजोर थे। वह कैम्ब्रिज में फेल हुए, जहां पास होना आसान माना जाता है। इसके बाद उन्होंने इम्पीरियल कॉलेज लंदन में प्रवेश लिया लेकिन वहां भी फेल हो गए। ऐसे में सवाल उठता है कि इस अकादमिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री कैसे बना दिया गया?" दो बार फेल होने वाले को क्यों प्रधानमंत्री बनाया? राजीव गांधी फेल होने के बाद वो इंपीरियल कॉलेज लंदन गए और हैरान करने वाली बात ये है कि वो वहां पर भी दोबारा फेल हो गए. इसके बाद मणिशंकर अय्यर ने कहा कि मैंने सोचा कि जो शख्स दो बार फेल हो गया, ऐसे व्यक्ति को क्या देश का प्रधानमंत्री बनाया गया है. मणिशंकर के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के दूसरे नेता उन्हें भाजपा का स्लीपर सेल बता रहे हैं. मणिशंकर के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस का घेराव करने का एक नया टॉपिक मिल गया है. अमित मालवीय ने कहा पर्दा हटाओ भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर मणिशंकर अय्यर की बातचीत की एक क्लिप शेयर की है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एकेडमिक रिकॉर्ड में फेल होने वाला कोई शख्स देश का प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है? इस विषय पर पर्दा हटाया जाना चाहिए. अय्यर ने क्या कहा वीडियो में मणिशंकर अय्यर कहते हैं, “जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो लोगों ने सोचा, मैंने भी सोचा कि वह एक एयरलाइन पायलट थे, जो दो बार फेल हो चुके थे। मैं उनके साथ कैम्ब्रिज में पढ़ता था… वह वहां भी फेल हो गए, जहां पास होना आसान माना जाता है। फिर उन्होंने इम्पीरियल कॉलेज लंदन में प्रवेश लिया, लेकिन वहां भी फेल हो गए। तो मुझे आश्चर्य हुआ कि ऐसा व्यक्ति प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है?” कांग्रेस का बचाव मणिशंकर अय्यर के इस बयान पर कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे निराधार और अप्रासंगिक बताया। कांग्रेस नेता अजय सिंह यादव ने कहा, "मणिशंकर अय्यर की पार्टी में कोई प्रासंगिकता नहीं है। वह कोई महत्वपूर्ण पद नहीं रखते, इसलिए उनके बयान को अधिक तवज्जो देने की जरूरत नहीं है।" वहीं, कांग्रेस सांसद तारीक अनवर ने अय्यर के बयान को खारिज करते हुए कहा, “असफल होना कोई बड़ी बात नहीं है, दुनिया में कई प्रतिभाशाली लोग पढ़ाई में फेल होते हैं। लेकिन राजीव गांधी राजनीति में कभी असफल नहीं हुए। जब उन्हें प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई, तो उन्होंने सिर्फ पांच साल में वह उपलब्धियां हासिल कीं, जो बहुत कम प्रधानमंत्री कर सके हैं।” राजीव गांधी की विरासत कांग्रेस राजीव गांधी को 'सूचना क्रांति के जनक' के रूप में प्रचारित करती रही है। उनके कार्यकाल में आईटी और टेलीकॉम सेक्टर में बड़े बदलाव हुए थे। ऐसे में मणिशंकर अय्यर के इस बयान से कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में आना पड़ा है। यह पहली बार नहीं है जब अय्यर के बयान से कांग्रेस को असहज होना पड़ा है। इससे पहले भी उनके विवादित बयानों को लेकर पार्टी को सफाई देनी पड़ी है। recent visitors 80

और अक्षर पटेल को फायदा ICC Rankings में वरुण चक्रवर्ती ने लगाई 143 स्थानों की छलांग, वनडे रैंकिंग में विराट कोहली और अक्षर पटेल को भी मिला लाभ

दुबई पाकिस्तान की मेजबानी में खेली जा रही आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 अब फाइनल दौर में पहुंच गई है. रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने अजेय रहकर ICC चैम्प‍ियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में एंट्री कर ली है. इसी बीच इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने बुधवार (5 मार्च) को खिलाड़ियों की ताजा रैंकिंग जारी की है. इसमें भारतीय टीम के स्टार लेग स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने धमाल मचा दिया है. उन्होंने चैम्पियंस ट्रॉफी में धांसू प्रदर्शन किया, जिसके बदौलत उन्हें बम्पर फायदा हुआ. गेंदबाजों की रैंकिंग में वरुण ने 143 पायदान की छलांग लगाई और टॉप-100 में एंट्री कर ली. वरुण अब 97वें नंबर पर पहुंच गए हैं. वरुण चक्रवर्ती ने चैम्पियस ट्रॉफी 2025 में अब तक 2 मैच खेले, जिसमें 7 विकेट लिए हैं. इन 7 विकेटों में से 5 विकेट एक ही मैच में लिए हैं. उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में यह 5 विकेट लिए थे. जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में 2 विकेट हासिल किए थे. शतक के बदौलत कोहली को भी फायदा दूसरी ओर बल्लेबाजी रैंकिंग में शुभमन गिल टॉप पर काबिज हैं. जबकि विराट कोहली को 1 पायदान का फायदा हुआ है और वो चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं. इसके अलावा कप्तान रोहित शर्मा को 2 पायदान का नुकसान हुआ है. वो पांचवें नंबर पर खिसक गए हैं. विराट कोहली इस समय चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 के टॉप स्कोरर में तीसरे नंबर पर हैं. उन्होंने 4 मैचों में 72.33 के दमदार औसत से 217 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 100 रनों की शतकीय पारी भी खेली थी. अक्षर ने लगाई 17 पायदान की छलांग टूर्नामेंट में कप्तान रोहित शर्मा की फॉर्म अच्छी नहीं रही है. उन्होंने अब तक 4 मैच खेले, जिसमें 26 के बेहद खराब औसत से 104 रन बनाए. उनका बेस्ट स्कोर 41 रन रहा है. इसका उन्हें नुकसान हुआ है. टॉप-10 बल्लेबाजी रैंकिंग में गिल, कोहली औऱ रोहित के अलावा श्रेयस अय्यर भी शामिल हैं. वो एक पायदान चढ़कर 8वें नंबर पर आ गए हैं. ऑलराउंडर्स की लिस्ट में अक्षर को भी बम्पर फायदा हुआ है. उन्होंने 17 पायदान की छलांग लगाई है. स्पिन ऑलराउंडर अक्षर पटेल अब 13वें नंबर पर पहुंच गए हैं. टॉप-10 ऑलराउंडर्स की लिस्ट में रवींद्र जडेजा अकेले भारतीय हैं, जो 9वें नंबर पर काबिज हैं.   recent visitors 74

शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और मामला उजागर, टीचर ने छात्रा से मांगे 50 हजार रुपये

Ratlam: Another case of corruption exposed in the education department, teacher demanded 50 thousand rupees from a student रतलाम! मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के आलोट क्षेत्र में स्थित न्यू आर्यवीर सीनियर सेकंडरी स्कूल के एक शिक्षक प्रदीप सिंह को 12वीं कक्षा की एक छात्रा से 50 हजार रुपये मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी टीचर को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 6 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। प्रैक्टिकल का रिजल्ट बिगाड़ने की धमकी आरोप के अनुसार, शिक्षक प्रदीप सिंह ने छात्रा को धमकाया कि अगर उसने पैसे नहीं दिए, तो उसका प्रैक्टिकल परीक्षा का रिजल्ट खराब कर दिया जाएगा और उसका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इतना ही नहीं, आरोपी शिक्षक ने कथित रूप से छात्रा को उसके माता-पिता की जान से मारने की धमकी भी दी। छात्रा के परिजनों की शिकायत पर कार्रवाई पीड़िता की शिकायत के बाद परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, एक मार्च को छात्रा स्कूल की एक्सट्रा क्लास में गई थी, जहां टीचर प्रदीप सिंह ने उसे अलग बुलाकर पैसे लाने के लिए धमकाया। जब छात्रा ने घर आकर अपने माता-पिता से 50 हजार रुपये मांगे, तो उन्होंने कारण पूछा, जिस पर छात्रा ने पूरा मामला उजागर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पुलिस जांच में जुटी शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में आरोपी पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की हरकतों में शामिल रहा है। शिक्षा विभाग पर उठे सवाल इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिक्षक, जो बच्चों को सही दिशा देने के लिए जिम्मेदार होता है, अगर इस तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चिंता का विषय बन जाता है। इस मामले के उजागर होने के बाद अभिभावकों में भी भय और आक्रोश है। पुलिस जल्द ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी और आरोपी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। recent visitors 123