एमपी गजब : BEO-Clerk together defrauded ने मिल कर शिक्षा विभाग को लगाया 5 करोड़ का चुना: शिक्षकों का वेतन रिश्तेदारों के खातों में डाला, प्राचार्यों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा

भोपाल (कमलेश)। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के कर्मचारी भ्रष्टाचार करने के लिए पत्नियों और रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका खुलासा शिक्षा विभाग की ही जांच में हुआ है। पिछले महीने रायसेन के सिलवानी बीईओ दफ्तर में 1 करोड़ के गबन के मामले में 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। BEO-Clerk together defrauded इनमें शिक्षा विभाग के कर्मचारी, प्राचार्य और रिटायर्ड प्राचार्य शामिल हैं। इनके अलावा जिन 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, वो इन कर्मचारियों की पत्नियां और रिश्तेदार हैं। ये एकलौता मामला नहीं है। 5 अन्य जिलों में भी गबन के ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जिनमें पत्नियों और रिश्तेदारों के अकाउंट में भ्रष्टाचार की करीब 5 करोड़ की रकम ट्रांसफर की गई। 10 मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में भी ये मामला उठ सकता है। आखिर किस तरह पत्नी और रिश्तेदारों के खातों से किया गया भ्रष्टाचार और इन मामलों में क्या एक्शन लिया गया, पढ़िए रिपोर्ट… अब जानिए, कैसे किया एक करोड़ का गबन रायसेन के जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक के मुताबिक, ये पूरा हेरफेर साल 2018 से 2022 के बीच किया गया। सिलवानी विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ क्लर्क चंदन अहिरवार इस गबन का मास्टरमाइंड है। चंदन के पास विकासखंड के अंतर्गत आने वाले हर स्कूल के शिक्षक की बैंक अकाउंट डिटेल होती थी। रजक बताते हैं कि 2022 तक शिक्षक और अतिथि शिक्षकों की सैलरी का भुगतान वेंडर के जरिए होता था। तब ऑफलाइन ट्रांजेक्शन भी हो जाता था। इसी का फायदा आरोपियों ने उठाया है। चंदन शिक्षक और अतिथि शिक्षकों के नाम के आगे अपने रिश्तेदार या पत्नी का बैंक अकाउंट दर्ज कर वेतन और मानदेय की राशि ट्रांसफर करता था। उसने पत्नी सुमन अहिरवार के बैंक अकाउंट में 37 लाख रुपए जमा कराए। इसी तरह इस गबन में शामिल बाकी लोगों ने भी करीब 58 लाख रुपए की रकम पत्नियों और रिश्तेदारों के अकाउंट में जमा कराई। प्राचार्यों की भी मिलीभगत, 3 रिटायर हो चुकेजिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक बताते हैं कि सरकार ने पहले स्कूल के प्राचार्यों को ही डीडीओ (आहरण एवं संवितरण) के अधिकार दिए थे। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि शिक्षकों को सैलरी के लिए संकुल कार्यालय पहुंचना पड़ता था। मगर, शिक्षा विभाग के कर्मचारी और प्राचार्यों ने मिलीभगत कर इस व्यवस्था को पलीता लगाया। रजक के मुताबिक, इस दौरान पांच स्कूलों के प्राचार्यों को डीडीओ की जिम्मेदारी दी गई थी। इनके साइन से ही रिश्तेदारों के खातों में ये राशि पहुंचाई गई। इसमें इनकी बराबर की भागीदारी है। गड़बड़ी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो इनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब जानिए, कैसे किया पूरा गबन पासवर्ड बांट दिया: नियमों के मुताबिक, डीडीओ अपना पासवर्ड किसी को साझा नहीं कर सकता। जांच में पाया गया कि डीडीओ ने अपना पासवर्ड कर्मचारियों को दे दिया। इसका इस्तेमाल कर कोषालय से पैसा निकाला गया। महीने की समीक्षा नहीं हुई: नियमानुसार हर महीने भुगतान की समीक्षा करना जरूरी है, ताकि गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके। सिलवानी बीईओ दफ्तर में ये प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इससे ये पता नहीं चला कि सही व्यक्ति के खाते में पैसा पहुंचा या नहीं। ई-भुगतान का सत्यापन नहीं: हर महीने ये जांच होना चाहिए कि जो भी ऑनलाइन भुगतान किए हैं, वो सही बैंक अकाउंट में पहुंचे या नहीं। यहां इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। असली दावेदारों का नाम गायब किया: जब किसी व्यक्ति को भुगतान किया जाता है, तो उसका नाम और बैंक खाता सरकारी डेटाबेस में दर्ज करना जरूरी होता है। जांच में पाया गया कि इस प्रक्रिया को भी नहीं अपनाया गया। बिल तैयार करने में लापरवाही: कोषालय संहिता 2020 के नियमों के अनुसार, बिल (देयक) बनाने की जिम्मेदारी क्रिएटर की होती है। उसे सॉफ्टवेयर में अपने पासवर्ड से लॉगिन कर भुगतान लेने वाले व्यक्ति का नाम, बैंक खाता नंबर दर्ज करना होता है। अप्रूवर इस बिल की जांच कर कोषालय में जमा करता है। जांच में पाया गया कि इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। स्वीकृति आदेश में अनियमितता: जब किसी भुगतान को स्वीकृत किया जाता है, तो उसके साथ स्वीकृति आदेश (Approval Order) संलग्न किया जाता है। लेकिन जांच में पाया गया कि कई मामलों में अलग-अलग भुगतान के लिए एक ही स्वीकृति आदेश का उपयोग किया गया। इसके अलावा, कई अधूरे स्वीकृति आदेश भी जारी किए गए और कुछ मामलों में आदेश अटैच ही नहीं किए गए। ऐसे पांच और मामलों की जांच की जा रही है रायसेन का ये अकेला मामला नहीं है। पिछले दो साल में गबन के ऐसे 5 और मामले हैं, जिनकी विभागीय जांच की जा रही है। इनमें भी विभागीय अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की मिलीभगत पाई गई है। छिंदवाड़ा: रिश्तेदार-पत्नी और बहन के खातों में 1 करोड़ 32 लाख ट्रांसफर छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 1.32 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा जुलाई 2024 में हुआ था। जबलपुर वित्त विभाग की टीम ने सात दिन की जांच के बाद यह फर्जीवाड़ा पकड़ा। इस मामले में पूर्व बीईओ एमआई खान और चौरई संकुल के बाबू तौसिफ खान की मिलीभगत पाई गई। आरोपियों ने कोरोना में मृत कर्मचारियों की सहायता राशि भी हड़प ली और सरकारी धन को अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया गया। वित्त विभाग की टीम को जुन्नारदेव में तकरीबन 1 करोड़ 44 लाख के घोटाले की आशंका थी। इसमें से 1 करोड़ 32 लाख की पुष्टि हो चुकी है। क्या हुआ: जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल ने बताया कि आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। सभी को निलंबित कर दिया है। उनसे राशि वसूल करने की प्रक्रिया जारी है। Read more : स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध,बच्चों को मारने पर शिक्षकों पर होगी कार्रवाई: एमपी सरकार का बड़ा फैसला  ग्वालियर: अलग-अलग खातों में 47 लाख ट्रांसफर ग्वालियर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय डबरा में 2024 में 47 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आया था। इस गड़बड़ी को भोपाल की ऑडिट टीम ने पकड़ा था। यह राशि सात अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई, जिनमें तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विकास … Read more

प्रधानमंत्री मोदी 7 मार्च को सूरत के लिंबायत इलाके के नीलगिरी ग्राउंड में एक भव्य जनसभा को संबोधित करेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर गुजरात दौरे पर जा रहे हैं। वे 7 और 8 मार्च को राज्य के सूरत और नवसारी जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान वे सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात करेंगे और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 7 मार्च को सूरत के लिंबायत इलाके के नीलगिरी ग्राउंड में एक भव्य जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे सरकारी योजनाओं के तहत वृद्ध लाभार्थियों को विशेष किट वितरित करेंगे। इसके बाद वे सूरत के सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन, 8 मार्च को पीएम मोदी नवसारी जाएंगे, जहां वे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस मौके पर वे महिलाओं के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का शुभारंभ कर सकते हैं। नवसारी में भी वे एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसके बाद वे दिल्ली के लिए रवाना होंगे। गौरतलब है कि इससे पहले, 1 मार्च को पीएम मोदी तीन दिवसीय निजी दौरे पर गुजरात पहुंचे थे, जहां उन्होंने सौराष्ट्र के विभिन्न जिलों का दौरा किया था। उन्होंने जामनगर, गिर और जूनागढ़ में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया और सोमनाथ मंदिर के दर्शन भी किए थे।   recent visitors 56

भाजपा केरल में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व वाम दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती, प्रवेश से सियासत बदली

 तिरुवनन्तपुरम केरल विधानसभा चुनाव में अभी एक वर्ष बाकी है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट की अगुवाई वाले एलडीएफ ने चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। दोनों गठबंधन जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने के साथ चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहना रहे हैं। इनके बीच मतदाताओं में पैठ बना रही भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व वाम दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती है। केरल में पिछले दस वर्षों से वाम दल सत्ता में है। हालांकि वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। यह कहना मुश्किल है कि लोकसभा का असर विधानसभा में दिखाई देगा। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद वर्ष 2021 विधानसभा चुनाव में एलडीएफ ने सरकार बनाई थी। नायर और मछुआरा समुदायों पर भाजपा की नजर चुनावी रणनीतिकार मानते हैं कि पहले मतदाताओं के सामने यूडीएफ और एलडीएफ दो ही विकल्प थे। अब आहिस्ता-आहिस्ता दोनों गठबंधनों के वोट बैंक में सेंध लगाते हुए भाजपा अपनी जगह बना रही है। नायर और मछुआरा समुदायों पर भाजपा की नजर है। दोनों समुदाय अमूमन चुनाव में एलडीएफ का समर्थन करते रहे हैं। भाजपा के प्रवेश से सियासत बदली केरल में राजनीति दो ध्रुवीय रही है, लेकिन भाजपा के प्रवेश के बाद सियासत बदल गई है। अगर भाजपा सभी सीट पर चुनाव लड़ती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। भाजपा अपने प्रदर्शन से बिगाड़ सकती है चुनावी गणित प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव में अभी अपना प्रदर्शन बरकरार रखती है तो यह यूडीएफ और एलडीएफ दोनों का गणित बिगाड़ सकती है। क्योंकि, भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा में एनडीए को 19 फीसदी वोट मिले। जबकि 2021 विधानसभा में यह 12 प्रतिशत था। हिंदू मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल रही भाजपा कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं कि एलडीएफ सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी है। पर क्या यूडीएफ मतदाताओं की इस नाराजगी को अपने पक्ष में बदल पाएगी। वहीं, एलडीएफ के लिए भी अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है। इसकी बड़ी वजह लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट से भाजपा की जीत है। भाजपा ने केरल में सिर्फ त्रिशूर सीट से जीत दर्ज नहीं की है, करीब एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिले हैं। भाजपा के इस प्रदर्शन से साफ है कि वह हिंदू मतदाताओं को भरोसा जीतने में सफल रही है। वहीं, ईसाई मतदाताओं के लिए भी भारतीय जनता पार्टी अब दूर नहीं है। recent visitors 83

बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित होंगे

उज्जैन  उज्जैन से बदनावर की दूरी 65 किमी. की है। गुजरात के श्रद्धालु महाकाल दर्शन करने के लिए बदनावर होकर ही गुजरते हैं। हाल ही में बदनावर बागेश्वर धाम से उज्जैन के इंदौर बायपास तक फोरलेन बनकर तैयार हो चुका है तथा आवागमन भी शुरू हो गया है। यह रोड भी वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ(Simhastha 2028) के मद्देजनर ही बनाया गया है। इस समय आम जनता का झुकाव इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने बदनावर में 3 जगह चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) बनाने का निर्णय लिया है, इनमें मुख्य बस स्टैंड, गणेश वडली बस स्टैंड व नागेश्वर महादेव धाम है। यह सभी स्टेशन सिहंस्थ के चलते स्थापित किए जा रहे हैं। कलेक्टर प्रियांक मिश्र ने बदनावर के साथ पीथमपुर, मनावर, सरदारपुर और कुक्षी में भी स्थानीय निकाय को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों पर बस स्टैंड और डिपो के लिए भूमि चिन्हित की जाएगी। मंगलवार को स्थान के निरीक्षण के लिए एसडीएम वसीम अहमद भट्ट, तहसीलदार सुरेश नागर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शेखर यादव, सीएमओ लालसिंह राठौर आदि उपस्थित थे। गुजरात के अधिकांश वाहन बायपास से गुजरने लगे बदनावर-उज्जैन फोरलेन बनने के बाद गुजरात से आने वाले ज्यादातर वाहन अब बायपास से होकर गुजरने लगे हैं। जिन तीन जगह को सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे है, उनमें से बागेश्वर धाम का चार्जिंग स्टेशन गुजरात जाने वाले वाहनों के लिए उपयोग में आएगा। शेष दोनों चार्जिंग स्टेशन अन्य वाहनों के लिए उपयोगी रहेंगे। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि शासन को उज्जैन से बदनावर 70 किमी लंबे फोरलेन के आसपास चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) स्थापित करना चाहिए, ताकि सिंहस्थ के दौरान चार्जिंग स्टेशन पर वाहनों की लंबी कतार न लगे। recent visitors 56

उज्जैन :रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते हुए नृसिंहघाट तक के मार्ग को 24 मीटर चौड़ा किया जा रहा, जिसके टेंडर हो चुके

उज्जैन नगर निगम ने रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते नृसिंहघाट तिराहे तक के मार्ग चौड़ीकरण के चलते मंगलवार को प्रभावित होने वाले मकानों पर लाल निशान लगाए। मार्ग के करीब 171 मकानों को चिह्नित किया है। तीन चौराहे पर मौजूद 20 मकानों पर बाद में निशान लगाए जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 के तहत निगम शहर के 6 मार्गों का चौड़ीकरण कर रहा है। इसी क्रम में रविशंकर नगर से जयसिंहपुरा होते हुए नृसिंहघाट तक के मार्ग को 24 मीटर (80 फीट) चौड़ा किया जा रहा है, जिसके टेंडर हो चुके हैं। महापौर के सामने जताया लोगों ने विरोध वार्ड भ्रमण के दौरान महापौर मुकेश टटवाल के सामने रविशंकर नगर के रहवासियों ने विरोध जताया। उनका कहना है कि 24 मीटर रोड़ चौड़ा होने से मकान का बड़ा हिस्सा टूट जाएगा। निगम 18 मीटर के मान से चौड़ीकरण करें। हालांकि रहवासियों को बताया गया कि मास्टर प्लान के मुताबिक ही मार्ग चौड़ा किया जा रहा है। तीन साल पूर्व स्मार्ट सिटी के माध्यम से मार्ग चौड़ा किए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। 171 मकानों पर लगाए लाल निशान निगम ने चौड़ीकरण में प्रभावित होने वाले 171 मकानों पर लाल निशान लगाए। वहीं हरिफाटक ब्रिज, महाकाल लोक और जयसिंहपुरा चौराहे पर बने 20 मकानों को फिलहाल छोड़ दिया गया। यहां चौराहे विकास के चलते भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। मकानों पर लगे लाल निशान के तहत कई मकान 25 फीट तक चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। जोन 2 के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने गाड़ी अड्डे चौराहे से लेकर शीतला माता मंदिर तक शेष मकान एवं दुकानों पर लाल निशान लगाए। recent visitors 64

आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध तेज, कांग्रेस ने की पदयात्रा शुरू

इंदौर आउटर रिंग रोड के लिए किए जा रहे सर्वे का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने इसे रुकवा दिया था। अब कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रभावित गांवों के किसानों तक पहुंचने के लिए पदयात्रा निकालने की योजना बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद इस यात्रा का नेतृत्व करेंगे और आठ दिनों तक इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में पदयात्रा करेंगे।   सर्वे को लेकर क्यों हुआ विरोध?   जब आउटर रिंग रोड का सर्वे किया जा रहा था, तब प्रभावित गांवों के किसानों ने इसका जबरदस्त विरोध किया। भारतीय किसान संघ ने किसानों के साथ मिलकर नेशनल हाईवे के अधिकारियों को किसी भी गांव में सर्वे करने से रोक दिया। यहां तक कि प्रशासन को कलेक्टर कार्यालय पर हुए धरने के बाद यह आश्वासन देना पड़ा कि जब तक मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हो जाती, तब तक सर्वे नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद सर्वे कार्य पूरी तरह रोक दिया गया। अब कांग्रेस इस मुद्दे पर सक्रिय हो गई है और किसानों के बीच जाकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है।  आउटर रिंग रोड और पूर्वी रिंग रोड के प्रभावित गांव   आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत धार जिले के पांच गांव, देपालपुर तहसील के 16 गांव और सांवेर तहसील के 18 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से देपालपुर तहसील का 35 किलोमीटर और सांवेर तहसील का 37 किलोमीटर का हिस्सा इस परियोजना में शामिल है। जीतू पटवारी इन सभी गांवों में पदयात्रा करेंगे। इसके अलावा, पूर्वी रिंग रोड भी इस पदयात्रा का हिस्सा होगी। यह रोड पीर कराड़िया गांव से शुरू होकर नेटरेक्स तक फैली हुई है। इस क्षेत्र में चार केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर सेंटर से 200 बीघा जमीन अधिग्रहित की जानी है। बेटमा खुर्द को भी एक केंद्र बनाया गया है। इस पूरे क्षेत्र की कुल लंबाई 77 किलोमीटर है, जिसे चार दिन में कवर किया जाएगा।   कैसा रहेगा पदयात्रा का कार्यक्रम? पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है।   – हर दिन सुबह नाश्ते के बाद पदयात्रा शुरू होगी।   – दिन में किसी गांव में रुककर भोजन किया जाएगा।   – शाम को जिस स्थान पर यात्रा रुकेगी, वहां पर सभा का आयोजन होगा।   – इस दौरान कांग्रेस के नेता किसानों से मिलकर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएंगे।   – जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव के अनुसार, यह यात्रा 10 मार्च तक तय की गई है और होली के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।   किसानों को 15 गुना कम मुआवजा देने का आरोप कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक कीमत से 15 गुना कम मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता सदाशिव यादव का कहना है कि जिस गांव में सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 10 लाख रुपए प्रति एकड़ है, वहां की वास्तविक कीमत 1.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है। इसके बावजूद सरकार केवल दोगुना मुआवजा देने की योजना बना रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए।   किसानों को पक्ष में लेने का प्रयास कांग्रेस इस पदयात्रा के जरिए किसानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार पर दबाव बनाकर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग करेगी।   समय बताएगा पदयात्रा का कितना असर होगा आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पहले भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध करके सर्वे रुकवा दिया, और अब कांग्रेस ने पदयात्रा निकालकर इस मुद्दे को और गरमा दिया है। जीतू पटवारी की यह यात्रा किसानों को जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए की जा रही है। अब देखना होगा कि इस पदयात्रा का कितना असर पड़ता है और क्या किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिल पाता है या नहीं। recent visitors 75

उमरिया में पंजीयन विभाग ने बनाया रिकॉर्ड, कोल ब्लॉक के एक ही दस्तावेज में मिला 17 करोड़ 53 लाख का राजस्व

उमरिया  जिले में एक जमीन की रजिस्ट्री से 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व मिला है। यह रजिस्ट्री मध्य प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ी रजिस्ट्रियों में से एक हो सकती है। यह रकम उमरिया जिले के सालाना राजस्व लक्ष्य, जो कि 21 करोड़ रुपए है, का एक बड़ा हिस्सा है। यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया और शहडोल जिलों के पांच गांवों की लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन 30 साल की लीज पर दी गई है। एमपी का छोटा सा जिला है उमरिया उमरिया, जो कि एक छोटा सा जिला है। इस जिला ने एक ही रजिस्ट्री से राजस्व संग्रह में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में तो करोड़ों की रजिस्ट्रियां आम हैं। लेकिन उमरिया जैसे छोटे जिले के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। जहां जिले का सालाना लक्ष्य ही 21 करोड़ है, वहां एक ही दिन में 17 करोड़ 53 लाख की रजिस्ट्री होना आश्चर्यजनक है। संपदा 2.0 पोर्टल के जरिए हुई रजिस्ट्री सब रजिस्ट्रार आशीष श्रीवास्तव ने इस रजिस्ट्री की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 पोर्टल के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया जिले के तीन और शहडोल जिले के दो गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन की 30 साल की लीज पर रजिस्ट्री हुई है। इससे सरकार को 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उमरिया जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने आगे कहा कि और जहां तक मैं समझता हूं कि शहडोल संभाग की सबसे बड़ी रजिस्ट्री है। जब उनसे प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वहीं पूंछा गया कि प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री सुनने को नही मिली है तो बोले कि शहडोल संभाग में तो नहीं है लेकिन प्रदेश की जानकारी नहीं है। शहडोल संभाग के लिए है रेकॉर्ड यह रजिस्ट्री न केवल उमरिया जिले के लिए, बल्कि पूरे शहडोल संभाग के लिए भी एक रिकॉर्ड हो सकती है। संपदा 2.0 के लागू होने के बाद से यह प्रदेश की सबसे बड़ी एकल रजिस्ट्री भी हो सकती है। इससे उमरिया जिले का नाम प्रदेश भर में चर्चा में आ गया है। यह रजिस्ट्री भविष्य में जमीनों की रजिस्ट्री के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है। इससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी काफी मदद मिलेगी। यह एक मिसाल है कि कैसे छोटे जिले भी बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं। recent visitors 67