मंत्री शाह ने बताया पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं के बड़ी तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे

सबके उपचार का पुख्ता प्रबन्ध पीएम जन-मन में 7 लाख से अधिक पीवीटीजी आबादी के बने आयुष्मान कार्ड पीएम जन-मन में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के विशेष प्राथमिकता से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे मंत्री शाह ने बताया पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं के बड़ी तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे भोपाल प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के विशेष प्राथमिकता से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। प्रदेश में निवासरत बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजातियां पीवीटीजी में आती हैं। नवम्बर 2024 के अंत तक पीवीटीजी समुदाय की कुल 7 लाख 85 हजार 324 लक्षित आबादी में से 7 लाख 969 आबादी के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। लक्ष्य के विरूद्ध करीब 90 प्रतिशत सफलता हासिल कर ली गई है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं के बड़ी तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। अब तक 7 लाख से अधिक पीवीटीजी आबादी के कार्ड बनाये जा चुके हैं। इससे अब इन सबको 5 लाख रूपये तक के नि:शुल्क उपचार की स्थायी सुविधा उपलब्ध हो गई है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि पीएम जन-मन योजना प्रदेश के 24 पीवीटीजी बहुल जिलों में संचालित है। इन पीवीटीजी बहुल जिलों में शिवपुरी जिले में 1 लाख 33 हजार 369, श्योपुर 95 हजार 593, शहडोल 69 हजार 832, उमरिया 69 हजार 460, अशोकनगर में 49 हजार 613, गुना 44 हजार 622, मंडला 32 हजार 952, ग्वालियर 30 हजार 386, डिंडोरी 28 हजार 147, सिंगरौली 25 हजार 374, छिंदवाड़ा 24 हजार 854, विदिशा जिले में 22 हजार 140, सीधी 20 हजार 312, बालाघाट में 17 हजार 365, अनूपपुर में 16 हजार 197, दतिया 7 हजार 406, जबलपुर 5 हजार 65, सिवनी 2 हजार 215, नरसिंहपुर 2 हजार 126, मुरैना 1 हजार 625, रायसेन 1 हजार 269, कटनी में 780, भिंड में 214 तथा मैहर जिले में 53 पात्र पीवीटीजी व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड तैयार कर हितग्राहियों को वितरित भी किये जा चुके हैं। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि मैहर, रायसेन, कटनी एवं भिंड जिले के शत-प्रतिशत पीवीटीजी हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड़ बना दिये गये हैं। बाकी 20 जिलों के शेष रह गये पीवीटीजी हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड भी जल्द से जल्द तैयार कर वितरित कर दिये जायेंगे। आयुष्मान भारत (निरामयम) योजना में सभी को 5 लाख रूपये तक के नि:शुल्क उपचार का लाभ दिया जाता है। राज्य सरकार सभी पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड तैयार कर सबके नि:शुल्क स्वास्थ्य उपचार की दिशा में बेहद संवेदनशील होकर इस दिशा में प्रयासरत है।   recent visitors 45

रोहिंग्या शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जम्मू कश्मीर सरकार की जिम्मेदारी: अब्दुल्ला

कठुआ/जम्मू नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि क्षेत्र में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जम्मू कश्मीर सरकार की जिम्मेदारी है। अब्दुल्ला ने कठुआ के दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘भारत सरकार शरणार्थियों को यहां लेकर आई। हम उन्हें यहां नहीं लाए। उन्होंने उन लोगों को यहां बसाया है और जब तक वे यहां हैं, उनके लिए पानी और बिजली मुहैया कराना हमारा कर्तव्य है। यह हमारी जिम्मेदारी है।’ उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू शहर में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों के बसने को एक बड़ी ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया था और इसमें शामिल लोगों की पहचान के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की थी। जम्मू में उन्हें पानी और बिजली कनेक्शन देने संबंधी टिप्पणी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा ने यह भी आरोप लगाया था कि ऐसा उन्हें बचाने के लिए किया गया है, क्योंकि वे (रोहिंग्या और बांग्लादेशी) एक विशेष समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 13,700 से ज्यादा विदेशी जम्मू और दूसरे जिलों में बसे हुए हैं जिनमें से अधिकतर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक हैं। वर्ष 2008 से 2016 के बीच उनकी आबादी में 6,000 की वृद्धि हुई है। अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की भी जोरदार वकालत की और कहा कि जम्मू कश्मीर में केवल एक ही सत्ता केंद्र होगा। उन्होंने कहा, ‘डबल इंजन वाली सरकार यहां काम नहीं करेगी। राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सत्ता का केवल एक ही केंद्र होगा।’ बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, ‘भारत सरकार को इस पर गौर करना चाहिए। यह आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार है। हमें इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है।’ जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के सवाल पर अब्दुल्ला ने फिर से कहा, ‘राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। यह भारत सरकार का वादा है और उच्चतम न्यायालय के सामने भी इसका वादा किया गया है। जिस तरह उनके चुनावी वादे पूरे किए गए, उसी तरह उच्चतम न्यायालय की प्रतिबद्धता का भी सम्मान किया जाएगा और राज्य का दर्जा वापस आएगा।’ अब्दुल्ला ने क्षेत्र में बिजली कटौती के मुद्दे पर कहा कि इसके लिए बारिश और बर्फबारी की कमी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, ‘हम बिजली कटौती को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। बर्फबारी या बारिश न होने की वजह से बिजली की कमी है। बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती के हिंदुत्व पर दिए गए हालिया बयानों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘मुझे उनके बयानों पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।’ जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ईवीएम को लेकर सवाल आज ही नहीं उठे हैं, बल्कि जब से ये मशीनें आई हैं, तब से उठ रहे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोग इन मशीनों पर भरोसा करें।’ जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘कई शिक्षित लड़के और लड़कियां बेरोजगार हैं। कई रिक्तियां हैं, लेकिन उन्हें भरा नहीं गया है। सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए ताकि हमारे युवाओं को काम मिल सके।’ अब्दुल्ला ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा और शैक्षिक बुनियादी ढांचे की स्थिति की भी आलोचना की और कहा कि इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।   recent visitors 105

प्रियंका चतुर्वेदी ने अमित शाह को पत्र है, बेलगावी (बेलगाम) को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र है, जिसमें उन्होंने बेलगावी (बेलगाम) को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग की है। प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में कहा कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर बेलगावी सहित कई शहरों और गांवों को लेकर सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही तनाव बढ़ गया है, जिसके कारण बेलगावी में महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) के कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि एमईएस की महा मेलावा रैली और अन्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति दी जाएगी, लेकिन पुलिस ने अब रैली को रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था की है, जिससे शहर में तनाव और बढ़ गया है। उन्होंने पत्र में आगे कहा कि 2022 में, केंद्र ने दोनों राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक कोई भी कार्रवाई न करें। इसके बावजूद, कर्नाटक विधानसभा ने महाराष्ट्र को किसी भी प्रकार की जमीन देने से रोकने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। इसके जवाब में, महाराष्ट्र विधानसभा ने मराठी भाषी गांवों को अपने राज्य में शामिल करने के लिए कानूनी रूप से आगे बढ़ने के लिए एक जवाबी प्रस्ताव पारित किया, जो इस विवादास्पद मुद्दे पर आम सहमति की कमी को उजागर करता है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई लंबित है, एमईएस की ओर से प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए बार-बार अनुरोध किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि दोनों राज्य सरकारों के बीच आम सहमति की कमी और आगे भी अशांति की संभावना को देखते हुए, मैं आपसे (अमित शाह) बेलगावी को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने पर विचार करने का आग्रह करता हूं। इससे शहर में सीमा विवाद को सुलझाने में मदद मिलेगी और नागरिकों को न्याय सुनिश्चित होगा, साथ ही केंद्रीय शासन के माध्यम से सभी भाषाई समुदायों को समायोजित किया जा सकेगा। बता दें कि बेलगाव या बेलगावी विवाद महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच एक लंबे समय से चली आ रही सीमा विवाद है। यह विवाद मुख्य रूप से बेलगावी जिले को लेकर है। वर्तमान में यह जिला कर्नाटक का हिस्सा है। 1956 में जब भारत में राज्यों का पुनर्गठन भाषाई आधार पर किया गया, तब बेलगावी जिले को कर्नाटक को आवंटित किया गया था। महाराष्ट्र का कहना है कि इस जिले में मराठी भाषी लोगों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए यह क्षेत्र भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से महाराष्ट्र का हिस्सा होना चाहिए। जबकि कर्नाटक का तर्क है कि बेलगावी सदियों से कर्नाटक का हिस्सा रहा है। यहां की संस्कृति कन्नड़ संस्कृति से गहरे जुड़ी हुई है।   recent visitors 149

महाराष्ट्र चुनाव को लेकर EC ने खारिज किए विपक्ष के दावे, कहा- VVPAT और EVM के आंकड़ों में कोई भी असमानता नहीं

मुंबई हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में विपक्ष द्वारा लगाए गए वोटों में गड़बड़ी के आरोपों को मुख्य चुनाव अधिकारी ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि VVPAT (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) और EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के आंकड़ों में कोई भी असमानता नहीं पाई गई है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने अपने बयान में कहा, "हमने प्रत्येक मतदान केंद्र पर EVM और VVPAT का मिलान किया है और सभी परिणाम एकदम सटीक पाए गए हैं। यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है।" सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चयनित पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गिनती करना और ईवीएम में संख्याओं के साथ उसका मिलान करना अनिवार्य है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में मतगणना के दिन 23 नवंबर को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चयनित 5 मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गणना, मतगणना पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के सामने की गई। अधिकारी ने कहा, "इसके अनुसार, महाराष्ट्र राज्य के 288 विधानसभा क्षेत्रों से 1440 वीवीपीएटी यूनिट की पर्ची काउंट को संबंधित नियंत्रण इकाई डेटा के साथ मिलान किया गया है। संबंधित जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार वीवीपीएटी पर्ची गणना और ईवीएम नियंत्रण इकाई गणना के बीच कोई विसंगति नहीं पाई गई है। ईसीआई द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है।"   विपक्ष ने उठाए थे सवाल विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मतदान के दौरान EVM में छेड़छाड़ की गई है और VVPAT की पर्चियों से वोटों का मिलान नहीं हो रहा है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव परिणाम की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि, मुख्य चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है। महाराष्ट्र विधानसभा के 95 निर्वाचन क्षेत्रों के 104 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग से ईवीएम और वीवीपैट डेटा का सत्यापन और मिलान करने की मांग की थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक 31 जिलों को कवर करने वाले 95 विधानसभा क्षेत्रों से पुनः सत्यापन की मांग की गई थी। पिछले महीने आए चुनावी नतीजों में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी तथा एमवीए को हाशिये पर धकेल दिया। महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति गठबंधन को 230 सीट और एमवीए को केवल 46 सीट मिलीं। ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 20 सीट जीतकर विपक्षी खेमे में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, उसके बाद कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं, जबकि राकांपा (शरदचंद्र पवार) 10 सीट के साथ सबसे पीछे रही। recent visitors 79

कुलदीप सिंह सेंगर को मेडिकल ग्राउंड पर दी अंतरिम जमानत, दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को 20 दिसंबर तक के लिए मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत दी है। कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है। जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने मेडिकल ग्राउंड पर कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को 20 दिसंबर तक के लिए अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में जेल की सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को एम्स में भर्ती होने और मेडिकल बोर्ड की देखरेख में जांच कराने का निर्देश दिया था। इससे पहले साल 2023 में कुलदीप सिंह सेंगर को बेटी की शादी में शामिल होने के लिए जमानत दी गई थी। कुलदीप सिंह सेंगर पोक्सो मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। कुलदीप सिंह सेंगर ने मेडिकल ग्राउंड पर सजा के अंतरिम निलंबन की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अधिवक्ता कन्हैया सिंघल ने अपनी दलील में कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर को इससे पहले पोक्सो मामले में मेडिकल ग्राउंड पर दो हफ्ते के लिए राहत दी गई थी। उनकी सजा पर अदालत ने दो हफ्ते के लिए अंतरिम रोक लगाई थी। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर को मेडिकल आधार पर कुलदीप सिंह सेंगर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी लेकिन वह बाहर नहीं आ सके थे। वकील सिंघल ने अपनी दलील में कहा कि हिरासत में मौत के मामले में सजा निलंबित होने का आदेश नहीं होने के कारण कुलदीप सिंह सेंगर जेल से बाहर इलाज के लिए नहीं आ सके थे। कुलदीप सेंगर को 2018 में उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराया गया था। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने इलाज के लिए कुलदीप सिंह सेंगर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी। हालांकि कुलदीप सेंगर के वकील ने इलाज के लिए 30 दिनों के लिए सजा को निलंबित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सेंगर को कम से कम 2 से 3 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाए। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, वह जांच अधिकारी के संपर्क में जानकारी वाली जगह पर रहेंगे। वह दिल्ली नहीं छोड़ेंगे। recent visitors 143

पहले करेंसी नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई गई और अब ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे के दर्जे से भी हटाया

ढाका बांग्लादेश में एक के बाद एक शेख मुजीबुर्रहमान की निशानियों को मिटाया जा रहा है। पहले करेंसी नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई गई और अब 'जय बांग्ला' को राष्ट्रीय नारे के दर्जे से भी हटा दिया गया है। यह कदम अंतरिम सरकार द्वारा हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देने के बाद उठाया गया। दरअसल 'जय बांग्ला' नारा 1971 के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहा है और इसे बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान ने जन-जन में लोकप्रिय बनाया। 2020 में शेख हसीना सरकार के दौरान हाई कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय नारा घोषित किया था। अदालत ने कहा था कि सरकारी कार्यक्रमों, राष्ट्रीय दिवसों और शैक्षिक संस्थानों में इसका उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने लगाई हाई कोर्ट के फैसले पर रोक मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की अपील डिवीजन ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाते हुए 'जय बांग्ला' को राष्ट्रीय नारे का दर्जा समाप्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सैयद रिफात अहमद की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय बेंच ने यह निर्णय लिया। अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल अनिक आर हक ने कहा, "'जय बांग्ला' अब राष्ट्रीय नारे के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं रहेगा।" पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश के राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीकों में बदलाव तेजी से हुआ है। शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को पहले ही बैंक नोटों से हटा दिया गया था। अब 'जय बांग्ला' पर हुई कार्रवाई से यह सवाल उठने लगा है कि क्या बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार शेख मुजीब की विरासत को खत्म करने की कोशिश कर रही है? हसीना के जाते ही बदलने लगी बांग्लादेश की तस्वीर 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर बदलाव देखे जा रहे हैं। 'जय बांग्ला' को हटाए जाने को इस बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह नारा न केवल राजनीतिक पहचान था बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम का भावनात्मक प्रतीक भी था। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इस कदम ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। मुजीब समर्थक इसे स्वतंत्रता संग्राम और उनकी विरासत के खिलाफ साजिश मान रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार इसे 'न्यायिक प्रक्रिया' का हिस्सा बता रही है। क्या 'जय बांग्ला' का हटना महज एक कानूनी निर्णय है, या यह इतिहास बदलने की एक सोची-समझी रणनीति? यह सवाल बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम है। recent visitors 87

जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा, इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

नई दिल्ली इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के बयान का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जवाब मांगा है। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट ने समाचार पत्रों में छापे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश शेखर कुमार यादव के भाषण का संज्ञान लिया है। उच्च न्यायालय से ब्योरा मंगवाया गया है। मामला विचाराधीन है। वीएचपी के कार्यक्रम में दिया था भाषण आठ दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना है। एक दिन बाद न्यायाधीश एक वीडियो सामने आया। शाहबानो केस का किया जिक्र जस्टिस शेखर यादव ने कहा कि जब देश और संविधान एक हैं तो कानून एक क्यों नहीं है? अपने भाषण में जस्टिस यादव ने शाहबानो केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीन तलाक गलत है। मगर उस समय की सरकार को झुकना पड़ा। recent visitors 63