संसद में दोनों दल संभल हिंसा की आड़ में मुस्लिम वोट बैंक को साधने में लगे हैं: मायावती

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख व पूर्व मुख्य मुख्यमंत्री मायावती ने संभल हिंसा को लेकर कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संसद में दोनों दल संभल हिंसा की आड़ में मुस्लिम वोट बैंक को साधने में लगे हैं, जबकि वंचितों पर हो रहे अत्याचार की आवाज कोई नहीं उठा रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में वंचित समाज पर अत्याचार किया जा रहा है। मायावती ने इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि देश के बंटवारे से पहले बंगाल के जेस्सोर खुलना क्षेत्र से डॉ. भीमराव आंबेडकर को संविधान सभा में भेजा गया था, लेकिन कांग्रेस ने षड्यंत्र के तहत पहले इस क्षेत्र को पाकिस्तान को दे दिया, जो बाद में बांग्लादेश का हिस्सा बन गया। संभल मुद्दे पर हंगामा, बांग्लादेश मामले में चुप्पी क्यों- मायावती बहुजन समाज पार्टी मुख्यालय में शनिवार को मायावती ने पत्रकारों से वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में वंचितों पर हो रहे अत्याचार को लेकर कांग्रेस व समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के अन्य दलों ने चुप्पी साध रखी है, जबकि संभल के मुद्दे पर लगातार संसद में हंगामा किया जा रहा है।   मायावती ने केंद्र से बांग्लादेश के वंचितों की मदद की मांग की उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ-साथ वंचितों की भी सुरक्षा का इंतजाम करें। बांग्लादेश में हो रही हिंसा में पिस रहे वंचितों को भारत लाने का प्रबंध किया जाना चाहिए। बसपा प्रमुख ने कहा कि अगर केंद्र सरकार बांग्लादेश के वंचितों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाती है तो इससे सिद्ध हो जाएगा कि वह भी कांग्रेस जैसी ही है। कांग्रेस और सपा वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं- मायावती उन्होंने कहा कि संसद में कांग्रेस व सपा दलितों व देशहित के मुद्दों को उठाने की बजाय संभल-संभल चिल्ला रहे हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि जिस प्रकार कांग्रेस व सपा संभल में तुर्क व गैर तुर्क मुसलमानों को बांटकर वोट बैंक की राजनीति कर रही है, उससे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने वंचित समुदाय के सांसदों पर सियासी हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाले ऐसे सांसदों ने भी अपनी पार्टियों के आकाओं को खुश करने के लिए वंचितों के मुद्दों को लेकर चुप्पी साध रखी है। recent visitors 91

40 साल बाद अमेरिकी संसद में उठा भोपाल गैस त्रासदी का मामला, पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग भी की गई

वाशिंगटन आज से 40 साल पहले 1984 में 2 और 3 दिसंबर की रात न केवल भोपाल बल्कि देश के इतिहास की सबसे भयावह रात है। इसी रात को भोपाल में गैस त्रासदी हुई थी। 2 दिसंबर की रात भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड पेस्टिसाइड प्लांट से जहरीली गैस मिथाइल आइसो साइनाइट का रिसाव शुरू हुआ। देखते ही देखते त्रासदी में 3787 लोगों की जान चली गई। मगर यह सरकारी आंकड़ा था। सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल त्रासदी में 15,724 से ज्यादा लोगों की जान गई है। राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस मनाने का प्रस्ताव भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल पूरे होने पर अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके तहत 3 दिसंबर को अमेरिका में राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को मर्कले, रॉन वाइडन और पीटर वेल्च ने पेश किया। अब इसे न्यायपालिका संबंधी समिति को भेजा गया है। प्रस्ताव में डॉव इंक और यूनियन कार्बाइड को जिम्मेदार माना गया है। पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग भी की गई है। प्रस्ताव में क्या है प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के भोपाल शहर में 3 दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड की एक कीटनाशक फैक्ट्री से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ थाी। इस हादसे के 72 घंटों के भीतर ही 8,000 लोगों की जान चली गई थी और 500,000 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदा थी। त्रासदी का लोगों पर पीढ़ीगत प्रभाव प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि भोपाल जैसी त्रासदी का आर्थिक और पीढ़ीगत बुरा प्रभाव पड़ा है। भोपाल में हादसे से बचे लोगों की मृत्यु दर काफी अधिक है। वहीं 150,000 से अधिक बचे लोग दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। लगभग 500,000 लोग शारीरिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। बचे पीड़ितों को कैंसर का खतरा अधिक प्रस्ताव में सैन डिएगो विश्वविद्यालय के एक अध्ययन का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति आपदा के समय भोपाल में थे। उनमें कैंसर और विकलांगता की दर अधिक है। इसका असर रोजगार और शिक्षा के स्तर पर भी पड़ा है। एंडरसन के प्रत्यर्पण की उठी मांग प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत सरकार ने यूनियन कार्बाइड और उसके पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी वॉरेन एंडरसन पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाया है। यह अमेरिका के कानून के तहत यह हत्या के बराबर है। ऐसे में एंडरसन का कृत्य एक प्रत्यर्पणीय अपराध है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना अहम है कि दुनिया में किसी भी समुदाय को दोबारा भोपाल जैसे हादसे का सामना नहीं करना पड़े। कंपनी ने भारतीय अदालतों के समन को किया अनदेखा यूनियन कार्बाइड को खरीदने वाली कंपनी डॉव इंक के खिलाफ भारत सरकार के अनुरोध पर समय पर कदम उठाने की मांग भी की गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड और उसके प्रतिनिधियों ने भारत में अदालत में उपस्थित होने के समनों की अनदेखी की है। भारत और अमेरिका के बीच 1942 में दो प्रत्यर्पण संधियां हुईं। इसके तहत भारत ने आवेदन भी किए। मगर कंपनी के प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी। recent visitors 91

महाराष्ट्र में विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन करीब 173 विधायकों ने ली शपथ, फिर विधानसभा स्थगित

मुंबई नवगठित 15वीं महाराष्ट्र विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन शनिवार को करीब 173 विधायकों ने शपथ ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजीत पवार, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटिल, पूर्व मंत्री छगन भुजबल, चंद्रकांत पाटिल, गिरीश महाजन, हसन मुश्रीफ, पहली बार विधायक बनी श्रीजया चव्हाण (पूर्व सीएम अशोक चव्हाण की बेटी), सना मलिक (पूर्व मंत्री नवाब मलिक की बेटी) सहित अन्य ने शपथ ली।इसके बाद विधानसभा स्थगित कर दी गई। विधानसभा रविवार को सुबह 11 बजे फिर से शुरू होगा और शेष विधायक शपथ लेंगे। प्रोटेम स्पीकर कालिदास कोलंबकर ने कार्यवाही की अध्यक्षता की। उन्होंने चैनसुख संचेती, जयकुमार रावल, माणिकराव कोकाटे और आशीष जायसवाल सहित पीठासीन अधिकारियों के एक पैनल की घोषणा की। अधिकांश विधायकों ने ईश्वर और अल्लाह के नाम पर शपथ ली, जबकि अजीत पवार सहित कुछ ने भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखने की शपथ ली। कुछ विधायकों ने संस्कृत भाषा में शपथ ली। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले और बाद में महायुति विधायकों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जय, जय श्रीराम और वंदे मातरम के नारे लगाए। इससे पहले भाजपा विधायकों का एक समूह भारत माता की जय जैसे नारे लगाते हुए विधान भवन में दाखिल हुआ, जबकि पार्टी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी विधायक गुलाबी पगड़ी पहनकर आए। लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था और पार्टी के बैनर और पोस्टर में गुलाबी रंग का इस्तेमाल किया गया था। उपमुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना विधायक भगवा पगड़ी पहनकर आए। इसके बाद फडणवीस, शिंदे और पवार के नेतृत्व में महायुति विधायकों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शनिवार को शपथ न लेने के महाविकास अघाड़ी के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें रविवार को शपथ लेनी होगी, क्योंकि उसके बाद ही वे सोमवार को कार्यवाही में भाग ले पाएंगे। एमवीए विधायकों ने कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद सदन से वॉकआउट कर दिया। बाद में उन्होंने घोषणा की कि उन्होंने सोलापुर के मालशिरस निर्वाचन क्षेत्र के मरकडवाड़ी में ग्रामीणों द्वारा आयोजित मॉक पोलिंग की अनुमति न देने के प्रशासन के फैसले के विरोध में शपथ नहीं ली। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार, नाना पटोले, शिवसेना-यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी-एसपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने भी ईवीएम से मतदान के विरोध में शपथ नहीं ली। अजित पवार ने कहा, "विपक्ष को पूरी विधायी प्रक्रिया पता है। यह उनके द्वारा अपना अस्तित्व दिखाने का एक खराब प्रयास है। ईवीएम को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। मैंने महाविकास अघाड़ी में भी काम किया है। जब उन्होंने लोकसभा चुनाव में 31 सीटें जीती तब ईवीएम अच्छी थी। लेकिन विधानसभा के नतीजों के बाद वे ईवीएम को दोष दे रहे हैं।" एनसीपी नेता छगन भुजबल ने कहा, "महाविकास अघाड़ी विधायकों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए शपथ लेनी होगी। मैं 1985 से विधायक हूं, लेकिन मैंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी। अगर वे सदन में शपथ नहीं लेंगे तो उन्हें स्पीकर के कक्ष में शपथ लेनी होगी।" recent visitors 65

केजरीवाल को RSS का छोटा रिचार्ज बताते हुए कहा कि मुसलमानों ने उन्हें खूब वोट दिया लेकिन उन्हें सिर्फ धोखा मिला: ओवैसी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भी तैयारियां शुरू करते हुए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। जिसकी कमान दिल्ली AIMIM प्रमुख शोएब जमई ने संभाल रखी है और वे इन दिनों 'कौमी इंसाफ यात्रा' निकाल रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने शहर में मुसलमानों की खराब स्थिति को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने केजरीवाल को RSS का छोटा रिचार्ज बताते हुए कहा कि मुसलमानों ने उन्हें खूब वोट दिया लेकिन उन्हें सिर्फ धोखा मिला। अपने 'एक्स' अकाउंट पर लिखी पोस्ट में शोएब जमई ने लिखा, 'जिस अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के मुसलमानों ने पिछले दस सालों में भर भर कर वोट दिया, उसी केजरीवाल ने ना सिर्फ दिल्ली दंगों और मरकज के मामले में धोखा दिया बल्कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में कोई भी तरक्की का काम नहीं होने दिया। RSS के छोटा रिचार्ज से और क्या उम्मीद करें।' इस पोस्ट के साथ ही जमई ने अपना एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वे कह रहे हैं, 'सालों से केजरीवाल को वोट दे रहे हैं, उसका ये सिला मिला है। इसलिए हम ये कहते थे, ये केजरीवाल किसी का नहीं हो सकता। इसमें संघ के लोग घुसे हैं, RSS के लोग घुसे हैं और इन्होंने दिल्ली के मुसलमानों को बर्बाद और तबाह कर दिया है। ना सिर्फ मरकज के मामले में, ना सिर्फ दंगों के मामले में इन्होंने धोखा दिया, बल्कि विकास की भी जो बात आएगी तो मुसलमानों की बस्तियों को उठाकर देख लीजिए, जहां-जहां केजरीवाल के विधायक हैं वो बस्तियां बैकवर्ड लेवल पर आ गई हैं। उन बस्तियों की हालत ऐसी है कि चलना मुश्किल हो रहा है। लिहाजा मजलिस (AIMIM) ने ये ठाना है कि दिल्ली को एक नया ऑप्शन दिया जाएगा और दिल्ली की जो अवाम है वो मजलिस के साथ खड़ी रहेगी।' आगे जमई ने कहा, 'लोग चाहते हैं कि मजलिस को वोट करें, लेकिन इतने दिनों में वो एक ऑप्शन तैयार होने में समय लग रहा था। इस बार दिल्ली विधानसभा के चुनाव में मजलिस मजबूती के साथ लड़ेगी। बैरिस्टर ओवैसी साहब के पैगाम को हमने लोगों तक पहुंचाया है। ये पहला चरण है, आगे के चरणों में तमाम एरियों को कवर किया जाएगा। हम 10 तारीख को इम्तियाज जलील और हमारी टॉप लीडरशिप के साथ एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दिल्ली के लिए कुछ घोषणाएं करेंगे। मुझे ऐसा लगता है कि लोग प्यासे हैं तड़प रहे हैं, एक नए विकल्प की तलाश में थे और इस बार उनको मजलिस के तौर पर एक ऑप्शन मिला है।' AIMIM के तीसरा विकल्प बनने के बारे में उन्होंने कहा, 'आम आदमी पार्टी की नैय्या डूब चुकी है। आम आदमी पार्टी कहीं दिख नहीं रही है। उस पार्टी की तो इतनी नेगिटिविटी है, कि जब मैं इमरान हुसैन के घर के पास से भी गुजरा तो उसके पड़ोसी भी उसकी बुराई कर रहे हैं। जो विधायक का पड़ोसी है उसका ही विकास नहीं हुआ हो तो बताइए बाकी लोगों का कैसे विकास होगा।' recent visitors 69

बांग्लादेश में एक बार फिर इस्कॉन मंदिर को निशाना बनाया गया है और इसमें आग लगा दी, जलकर खाक हुईं मूर्तियां

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं अब आम हो गई हैं। बांग्लादेश में एक बार फिर इस्कॉन मंदिर को निशाना बनाया गया है और इसमें आग लगा दी गई। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने मीडिया को बताया कि शनिवार तड़के ही एक इस्कॉन में आग लगा दी गई। आग की वजह से भगवान कृष्ण की मूर्ति तक जल गई। उन्होंने बताया कि इस्कॉन के एक सेंटर को भी निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार थम नहीं रहा है। हम इसको लेकर बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि सुबह 2 से तीन बजे के बीच ही मंदिरों मे तोड़फोड़ और आगजनी की गई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, बांग्लादेश में इस्कॉन नामहाट सेंटर को आग लगा दी गई। श्री लक्ष्मी नारायण की मूर्ति जल गई। यह मंदिर ढाका में है। दास ने कहा, सुबह 2 से तीन बजे के बीच ही उपद्रिवियों ने नामहाट संघ के तहत आने वाले राधा कृष्ण मंत्रि और महाभाग्य लक्ष्मी नारायण मंदिर में आगलगा दी। मंदिर के टिन शेड को हटाकर पहले पेट्रोल डाला गया और फिर आग लगा दी गई। बता दें कि बांग्लादेश में इस्कॉन पुजारी चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद भारत में पहले से ही आक्रोश व्याप्त है। पश्चिम बंगाल में भी इसका विरोध हो रहा है। चिन्मय दास पर राजद्रोह का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया था। इस्कॉन ने पहले भी दावा किया था कि बांग्लादेश में उसके कई केंद्रों और मंदिरों को जबरन बंद करवा दिया गया है। दास ने बांग्लादेश के इस्कॉन पुजारियों को यह भी सलाह दी थी कि खुद को बचाने के लिए वे भगवा वस्त्र पहनना छोड़ दें। माथे पर तिलक ना लगाएं और तुलसी की माला को भी छिपाकर रखें। यह मामला संसद में भी उठा। संसद में सरकार से अपील की गई कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हिफाजत के लिए कोई कदम उठाया जाए। recent visitors 74

अब बिना संपत्ति गिरवी रखे किसानों को आसानी से मिलेगा लाखों का लोन

केंद्रीय बैंक ने किसानों के लिए कोलैटरल फ्री लोन की लिमिट बढ़ा दी है। Colleteral Free Loan For Farmers इसका फायदा मध्य प्रदेश के 80 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने देशभर के किसानों को नए साल से पहले ही बड़ा तोहफा दे दिया है। इसका फायदा मध्य प्रदेश के 80 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा। दरअसल शुक्रवार को केंद्रीय बैंक ने किसानों के लिए कोलैटरल फ्री लोन(Colleteral Free Loan For Farmers) की लिमिट बढ़ा दी है। अब जिन किसानों को लोन की जरूरत होगी वे बिना कुछ गिरवी रखे 2 लाख रुपए तक का लोन आसानी से ले सकेंगे। छोटे और सीमांत किसानों को क्रेडिट लाइन में लाने के लिए ये फैसला लिया गया है। शुक्रवार को आरबीआई(RBI) ने कहा कि, कृषि इनपुट लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए कोलैटरल फ्री लोन(Colleteral Free Loan For Farmers) की लिमिट को बढ़ा दिया गया है। इस कदम से छोटे और सीमांत किसानों का कवरेज बढ़ेगा। इसका सर्कुलर जल्द ही जारी किया जाएगा। बता दें कि पहले किसानों के लिए कोलैटरल फ्री लोन की लिमिट सिर्फ 1 लाख 60 हजार रुपए ही थे, जिसे आरबीआई ने 2019 में तय किया था। अब कोलैटरल फ्री लोन की लिमिट बढा़कर 2 लाख कर दिया गया है। किसान बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे ये लोन ले सकते है। इसके लिए कई जरूरी दस्तावेज की जरूरत पड़ेगी। Read More :- https://mysecretnews.com/solar-energy-will-be-the-center-point-of-future-economy/ कोलैटरल फ्री लोन किसान किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक से ले सकते हैं। इसके लिए तय ब्याज दर 10.50 फीसदी से अधिक होती है। इसकी खास बात ये है कि इसका फायदा बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे उठाया जा सकता है। कब आएगी 19वीं किस्त किसानों को अब तक 18 किस्तों का लाभ मिल चुका है। अब 19वीं किस्त की बारी है। ये किस्त लगभग 4 महीने के अंतराल पर जारी होती है। ऐसे में 18वीं किस्त अक्तूबर में जारी हुई और इसलिए 19वीं किस्त के चार महीने का समय जनवरी में पूरा हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि जनवरी महीने में 19वीं किस्त जारी हो सकती है। हालांकि, अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। [/more] recent visitors 229

INDIA गठबंधन की लीडरशिप पर ममता बनर्जी ने ठोका दावा, भाजपा ने कहा- राहुल गांधी पर किसी को नहीं भरोसा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने INDIA गठबंधन और राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाया है। भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, "INDIA गठबंधन का कोई भी नेता राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व पर भरोसा नहीं करता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है। उन्होंने कहा, "कभी अखिलेश यादव कहते हैं कि वह नेता हैं, कभी ममता बनर्जी कहती हैं कि वह नेता हैं और कभी स्टालिन कहते हैं। लेकिन सभी एक स्वर में कहते हैं कि राहुल गांधी नेता नहीं हैं।" भंडारी ने आगे कहा कि भाजपा राहुल गांधी को 'बालक बुद्धि' नहीं कहती, बल्कि यह INDIA गठबंधन के नेता ही हैं जो इस तरह के विचार रखते हैं। ममता बनर्जी का बयान यह बयान ममता बनर्जी की टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने गठबंधन के भीतर नेतृत्व की स्पष्टता पर जोर दिया। ममता बनर्जी ने कहा था कि INDIA गठबंधन को एक समन्वित और सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है, जो चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर काम कर सके। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने इंडिया गठबंधन का गठन किया था। अब इसे प्रबंधित करना मोर्चे का नेतृत्व करने वालों पर निर्भर है। अगर वे यह नहीं कर सकते तो मैं क्या कर सकती हूं? मैं बस यही कहूंगी कि सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है।’’ यह पूछे जाने पर कि एक मजबूत भाजपा विरोधी ताकत के रूप में अपनी साख को देखते हुए वह गठबंधन का प्रभार क्यों नहीं ले रही हैं, ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘यदि अवसर दिया गया तो मैं इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करूंगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बंगाल से बाहर नहीं जाना चाहती, लेकिन मैं इसे यहां से संचालित कर सकती हूं।’’ आपको बता दें कि प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी को 'राजनीतिक फ्लेयर' बताते हुए कहा कि उनका नेतृत्व गठबंधन के भीतर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, "INDIA गठबंधन राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर एकमत नहीं है। यह स्पष्ट दिखता है।" राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर भाजपा के इस तंज ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। गठबंधन के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन भाजपा का दावा है कि भीतरखाने असहमति की स्थिति बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि INDIA गठबंधन इस आलोचना का कैसे जवाब देता है और क्या वह नेतृत्व को लेकर स्पष्टता प्रदान कर पाएगा। recent visitors 88