सिवनी में दर्दनाक हादसा, पलटी एंबुलेंस, चार लोगों की मौत, पांच लोग घायल

सिवनी मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में बड़ा हादसा हुआ है। यहां एंबुलेंस पलटने से चार लोगों की मौत हो गई और पांच लोग घायल हैं। हादसे के बाद से घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसा धूमा पुलिस थाना क्षेत्र में जबलपुर-नागपुर राजमार्ग पर हुआ है। एंबुलेंस आंध्र प्रदेश के कुरनूल से बिहार के पश्चिमी चंपारण जा रही थी। एक पैदल यात्री को टक्कर मारने के बाद एंबुलेंस खंभे से टकराकर पलट गई। इन लोगों ने गंवाई अपनी जान एसडीओपी अपूर्व भलावी ने बताया कि, "एंबुलेंस आंध्र प्रदेश के कुरनूल से अनीश शाह (18) नाम के एक घायल व्यक्ति को बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित उसके पैतृक गांव ले जा रही थी। एंबुलेंस में दो चालक और उसके छह रिश्तेदार सवार थे। रास्ते में एंबुलेंस ने पैदल यात्री रंगलाल कुलस्ते को टक्कर मार दी। इसके बाद अनियंत्रित होकर एक खंभे से टकराकर पलट गई। हादसे में प्रतिमा शाह (35), प्रिंस शाह (4), मुकेश शाह (36) और सुनील शाह (40) की जान गई है।   recent visitors 111

सरकार ने वीजा नियमों में किया बड़ा बदलाव- सऊदी सरकार ने वीजा नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए

दुबई सऊदी सरकार ने वीजा नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका असर खासकर उन लोगों पर पड़ेगा जो दुबई में अपने परिवार या दोस्तों के साथ रुकने की योजना बनाते हैं। नए नियम 8 दिसंबर से लागू होंगे और क्रिसमस व नए साल के मौके पर दुबई की यात्रा करने वाले हजारों भारतीयों को प्रभावित करेंगे। इन नियमों के चलतेअब भारतीयों के लिए दुबई की यात्रा करना  आसान नहीं रहेगा।  यह नियम 8 दिसंबर से 14 जनवरी तक लागू रहेगा, जब दुबई में शॉपिंग फेस्टिवल और छुट्टियों का मौसम होता है।   पर्यटकों की बढ़ेंगी मुश्किलें और खर्च इन नियमों के कारण जो यात्री अपने परिचितों या दोस्तों के घर पर रुकना चाहते हैं लेकिन जरूरी दस्तावेज नहीं जुटा पाते, उन्हें मजबूरन होटल में रुकना पड़ेगा। दुबई में होटल का खर्च प्रति रात ₹20,000 से ₹1,00,000 तक हो सकता है। दस्तावेज़ न जुटा पाने के कारण कई लोग अपनी यात्रा रद्द करने पर मजबूर हो सकते हैं। बता दें कि  8 दिसंबर से शुरू होने वाले दुबई शॉपिंग फेस्टिवल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक शामिल होते हैं। लेकिन इन कड़े नियमों के कारण इस बार पर्यटकों की संख्या में गिरावट की संभावना है।  जबकि दुबई प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा को मजबूत करने और अनधिकृत प्रवास को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इसके कारण भारतीयों समेत अन्य देशों के पर्यटकों और निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा।  recent visitors 148

अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की 33वीं आमसभा हुई आयोजित, इस बार नहीं होंगे भाव काम

अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि इस आमसभा में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह था कि इस सहकारी वर्ष के अंत तक दूध का भाव कम नहीं किया जाएगा और भाव 54.47 रुपए प्रति लीटर ही रहेगा। अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की 33वीं आमसभा आयोजित की गई, जिसमें डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने सभी को संबोधित किया और दुग्ध पालकों व उनके मवेशियों के हित में वार्ता की। यह कार्यक्रम पुष्कर की जात विश्रामस्थली में हुआ। आमसभा में सरस डेरी को सर्वश्रेष्ठ बनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।   डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि इस आमसभा में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह था कि इस सहकारी वर्ष के अंत तक दूध का भाव कम नहीं किया जाएगा और भाव 54.47 रुपए प्रति लीटर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि सर्दियों में आमतौर पर दूध के भाव गिरते हैं, लेकिन इस बार दूध के भाव में कोई गिरावट नहीं होगी। आगामी वित्तीय बजट में 1677 करोड़ का बजट रखा गया है, जिसके तहत अगले साल 1 अप्रैल से दूध का भाव 60 रुपए प्रति लीटर हो जाएगा और पशुपालकों की आय दोगुनी हो जाएगी। पशुपालकों को एक वर्ष के अंतर्गत 1017 करोड़ रुपए का भुगतान प्रतिवर्ष किया जाएगा। डेयरी अध्यक्ष ने बताया कि पशुपालकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना दूध सरस डेरी को दें, ताकि उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सके। आने वाले सहकारी वर्ष के अंतर्गत दूध की मात्रा को 3 लाख लीटर से बढ़ाकर 5 लाख लीटर करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, एक संकल्प के तहत अजमेर डेयरी के अंदर जो भी अधूरे काम हैं, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। अजमेर डेयरी के अंदर व्याप्त रिक्त पदों को भी भरा जाएगा, और अजमेर डेयरी को डेनमार्क की तरह विकसित करने की हमारी कोशिश रहेगी। अजमेर शहर छोटे क्षेत्रफल वाला शहर है, जिसके कारण गरीब तबके के पशुपालकों के लिए जल्द से जल्द लोन की व्यवस्था की जाएगी। recent visitors 95

भारत के संत श्री नारायण गुरु की सराहना करते हुए संदेश को पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक बताया: पोप फ्रांसिस

तिरुअनंतपुरम दुनिया के शीर्ष ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने भारत के संत श्री नारायण गुरु की सराहना की है और उनके संदेश को पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक बताया है। पोप फ्रांसिस ने कहा कि नारायण गुरु का समाज सुधारक का संदेश ‘आज की हमारी दुनिया के लिए प्रासंगिक है, जहां हमें लोगों और देशों के बीच असहिष्णुता तथा नफरत बढ़ने के उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।’ एर्नाकुलम जिले के अलुवा में श्री नारायण गुरु के सर्व-धर्म सम्मेलन के शताब्दी समारोह के अवसर पर शनिवार को वेटिकन में जुटे धर्मगुरुओं और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पोप ने यह बात कही। पोप ने कहा कि आज दुनिया में जो अशांति का माहौल है उसके लिए धर्मों की शिक्षाओं को न अपनाना भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि गुरु ने अपने संदेश के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक जागृति को बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पोप ने कहा कि गुरु ने अपने संदेश में कहा था कि सभी मनुष्य, चाहे उनकी जाति, धर्म और सांस्कृतिक परंपराएं कोई भी हों, एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं। पोप ने कहा, ‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह से और किसी भी स्तर पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘दुख की बात है कि कई समुदायों और लोगों को नस्ल, रंग, भाषा और धर्म के आधार पर रोजाना भेदभाव तथा तिरस्कार झेलना पड़ रहा है और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ऐसा उन लोगों और समुदाय के साथ हो रहा है जो गरीब और कमजोर तबके के हैं।’ पोप ने कहा, ‘धर्मों की महान शिक्षाओं को नहीं अपनाना दुनिया में अशांति के लिए जिम्मेदार कारणों में से एक है।’ नारायण गुरु को भारत के उन महान संतों में शुमार किया जाता है, जिन्होंने समानता का संदेश दिया। आज भी बहुजन राजनीति और सामाजिक वर्ग के लोगों के लिए वह एक नायक की तरह हैं। 22 अगस्त, 1956 को केरल के तिरुअनंतपुरम के पास एक गांव चेमपजंथी में मदन असन और कुट्टियम्मा के घर हुआ था। उनका परिवार एझावा जाति से संबंध रखता था और उस समय के सामाजिक मान्यताओं के अनुसार इसे 'अवर्ण’ माना जाता था। छोटी उम्र से ही उनका आकर्षण तप की ओर था जिसके चलते वे संन्यासी के रूप में आठ वर्षों तक जंगल में रहे थे। उनको वेद, उपनिषद, साहित्य, हठ योग और अन्य दर्शनों का ज्ञान था। उन्होंने समानता का संदेश देते हुए 'एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर' (ओरु जति, ओरु माथम, ओरु दैवम, मानुष्यानु) का प्रसिद्ध नारा दिया। उन्होंने वर्ष 1888 में अरुविप्पुरम में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर बनाया, जो उस समय के जाति-आधारित प्रतिबंधों के खिलाफ था। उन्होंने एक मंदिर कलावन्कोड में अभिषेक किया और मंदिरों में मूर्तियों की जगह दर्पण रखा। यह उनके इस संदेश का प्रतीक था कि परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है। मंदिर प्रवेश आंदोलन के वह अग्रदूत थे। recent visitors 71

बस मार्शल्स की नियुक्ति को लेकर CM आतिशी ने LG को लिखी चिट्ठी, कहा, अभी तक नहीं मिली आपकी मंजूरी

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने बस मार्शलों की नियुक्ति के मुद्दे पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। आतिशी ने पत्र में लिखा है कि दिल्ली सरकार ने 13 नवंबर को मार्शलों की फिर से नियुक्ति का प्रस्ताव आपके पास भेजा था, लेकिन अब तक उस प्रस्ताव को आपकी मंजूरी नहीं मिली है। मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि इस प्रस्ताव को मंजूरी दें। सरकार, मार्शल और पूरी दिल्ली की महिलाएं आपकी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। आतिशी ने पत्र में लिखा कि पूरी दिल्ली कभी नहीं भूल सकती वो दिन जब हमारी माताएं बहनें और बेटियां बसों में असुरक्षित महसूस करती थीं। छेड़खानी और गलत नजरों का शिकार होना जैसे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। बच्चियों का स्कूल और कॉलेज जाना किसी चुनौती से कम नहीं था और महिलाएं काम पर जाने से पहले सौ बार सोचती थीं कि क्या वे सुरक्षित लौट पाएंगी। ये दर्द हर घर में महसूस किया जाता था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बसों में 10,000 से ज्यादा मार्शल तैनात किए इन मार्शल ने ईमानदारी से अपना काम करते हुए बहुत से उपद्रवियों को पकड़ा था। उसके बाद से ही हर महिला ने पहली बार बसों में खुद को सुरक्षित महसूस किया था। बसों में तैनात हमारे मार्शल हर उस मां-बहन, बेटी के लिए उम्मीद थे जो रोज अपने घर से निकलती हैं। इन मार्शलों ने न सिर्फ महिलाओं को सुरक्षा दी बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी दिया। उनमें ये भरोसा भी जगाया कि अब कोई भी असामाजिक तत्व उनको तंग नहीं करेगा। लेकिन फिर केंद्र सरकार के इशारों पर दिल्ली सरकार में बैठे कुछ अफसरों ने एक सजिश के तहत पहले तो इन सभी मार्शलों की तनख्वाह रोकी और फिर 31 अक्टूबर 2023 को इन बस मार्शलों को उनकी नौकरी से भी हटा दिया गया। हमारी सरकार ने आपसे तब भी गुजारिश की थी कि ऐसे अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, लेकिन दुर्भाग्यवश उन पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें तरक्की देकर और भी बड़े पदों पर बैठा दिया गया। आतिशी ने आगे लिखा कि इन गरीब मार्शलों की नौकरी छीनने से न केवल उनके परिवारों का सहारा छिन गया, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का वह कवच भी कमजोर हो गया जो हर दिन लाखों महिलाओं को निडर होकर बसों में सफर करने की ताकत देता था। इन सभी मार्शलों को दोबारा नियुक्ति देकर इन्हें वापस नौकरी पर रखने के लिए 13 नवम्बर 2024 को हमारे सभी मंत्रियों ने एक प्रस्ताव पास करके आपके पास आपके कार्यालय में भेजा। अब लगभग दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी इस प्रस्ताव पर आपकी ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये देरी क्यों हो रही है। आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि इस प्रस्ताव पर जल्द से जल्द अपनी स्वीकृति दें ताकि उन 10,000 परिवारों में फिर से रौशनी लौट आए और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में मार्शल तैनात हो सकें। आपकी स्वीकृति का इंतजार केवल इन मार्शलों को ही नहीं बल्कि मुझे और हमारी पूरी सरकार इन मार्शलों के परिवार और दिल्ली की सभी महिलाओं को है। हम सब आपकी सहमति का इंतजार कर रहे हैं। recent visitors 87

इंडिगो की एक फ्लाइट को लैंडिंग के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, पायलट की सूझ-बूझ से टला हादसा

चेन्नई चक्रवात फेंगल के बीच चेन्नई एयरपोर्ट पर एक बड़ा विमान हादसा टल गया। रविवार को इंडिगो की एक फ्लाइट को लैंडिंग के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि पायलट की सूझ-बूझ से एक बड़ा हादसा टल दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि विमान रनवे पर छूने के तुरंत बाद फिर से हवा में ऊपर उठ गया। ऐसी संभावना है कि तेज हवाओं और रनवे पर पानी जमा होने के कारण पाइलट को अचानक लैंडिंग के फैसले को कुछ समय के लिए टालना पड़ा। आपको बता दें कि एयरलाइंस की भाषा में इसे गो-अराउंड कहा जाता है। यह स्थिति तब अपनाई जाती है जब लैंडिंग सुरक्षित रूप से पूरी नहीं की जा सकती। इस घटना ने पायलट की और सही निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाया है। चक्रवात फेंगल का प्रभाव पुदुचेरी के पास लैंडफॉल करने वाले चक्रवात फेंगल ने भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ मौसम की स्थिति को विकराल कर दी है। चेन्नई में इसका विशेष असर हुआ है। इसके कारण हवाई अड्डे पर परिचालन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। इससे कई उड़ानें प्रभावित हुईं। अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एहतियातन कदम उठाए और यात्रियों से अनुरोध किया कि वे अपनी उड़ानों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करके ही यात्रा के लिए निकलें। recent visitors 72

हिंदू पक्ष ने बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर दावा किया है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था, कोर्ट पंहुचा मामला

संभल यूपी में संभल जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के बाद सर्वे के दौरान हुआ विवाद अभी सुर्खियों में है। इस बीच बदायूं में नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम जामा मस्जिद विवाद भी कोर्ट में पहुंच गया है। यहां हिंदू पक्ष ने बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर दावा किया है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। यह मामला फिलहाल फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है जहां तीन दिसम्‍बर को सुनवाई होनी है। बदायूं के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अमित कुमार की अदालत ने इस मामले में 30 नवंबर को मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्‍ता की बहस सुनी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तीन दिसम्‍बर की तारीख दी है। क्‍या है दावा? यह मामला सबसे पहले 2022 में चर्चा में आया था। तब अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने दावा किया था कि वर्तमान में जिस जगह पर बदायूं की जामा मस्जिद है वहां पहले नीलकंठ महादेव का मंदिर था। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की इजाजत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। जबकि मुस्लिम पक्ष बदायूं जामा मस्जिद के 850 साल पुरानी होने का दावा करता है। जामा मस्जिद पक्ष का कहना है कि इस मामले में हिंदू महासभा को ऐसी याचिका दायर करने का कोई अधिकार ही नहीं है। यहां पूजा-अर्चना की इजाजत देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। शनिवार को न्यायालय में मस्जिद पक्ष की इंतजामिया कमेटी ने अपनी बहस शुरू की। इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता अनवर आलम ने बहस की, जो आगे भी जारी रहेगी। सरकार की ओर से पूरी हो चुकी है बहस इस मामले में सरकारी पक्ष और पुरातत्‍व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। पुरातत्‍व विभाग की रिपोर्ट भी कोर्ट में पूरी हो चुकी है। मामले में शाही मस्जिद कमेटी की तरफ से भी बहस पूरी कर ली गई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तीन दिसम्‍बर की तारीख तय की है। recent visitors 81