मोहली गांव में अटका विस्थापन: बाघों और चीतों के बीच असुरक्षित 8 हजार ग्रामीण

मोहली गांव में अटका विस्थापन: बाघों और चीतों के बीच असुरक्षित 8 हजार ग्रामीण

Displacement stuck in Mohli village: 8 thousand villagers unsafe between tigers and leopards सागर। नौरादेही टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बसे मोहली गांव के करीब 8 हजार लोगों का विस्थापन पिछले चार महीने से अधर में लटका हुआ है। ग्रामीण बंटी यादव बताते हैं कि उन्होंने विस्थापन की औपचारिकताएं पूरी कर लीं, लेकिन अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। उनका कहना है— “बाघों की आबादी बढ़ रही है, खेती-बाड़ी और रोजगार ठप हो चुके हैं। हम सुरक्षित जगह जाना चाहते हैं।” गांव की लगभग 80% आबादी विस्थापन के लिए तैयार है, लेकिन ग्राम सभा की सहमति न मिलने से काम अटक गया है। इस बीच बाघों की संख्या बढ़ने और भविष्य में अफ्रीकी चीतों के आगमन को देखते हुए इंसान और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा पर संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों की मांग एक्टिविस्ट की राय वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि— “नौरादेही में बाघों और चीतों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित होगी, जब ग्रामीणों को उचित पैकेज और रोजगार से जोड़ा जाए। पर्यटन और स्वावलंबन योजनाओं से विस्थापित परिवारों को नई बसाहट में टिकाया जा सकता है।” प्रबंधन का पक्ष नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए. ए. अंसारी ने कहा—“मोहली एक बड़ा गांव है, जहां अधिकतर लोग विस्थापन को तैयार हैं। लेकिन ग्राम सभा की सहमति के बिना प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। सहमति मिलते ही बजट की मांग कर विस्थापन पूरा किया जाएगा।” recent visitors 112

गुढ़ विधायक ने टीबी रोगियों को वितरित किए पोषण आहार के पैकेट

गुढ़ विधायक ने टीबी रोगियों को वितरित किए पोषण आहार के पैकेट

Gudh MLA distributed nutritional food packets to TB patients रीवा ! जिले में टीबी उन्मूलन में प्रयास निरंतर जारी हैं. जिला स्तरीय टीम के साथ ब्लॉक स्तरीय टीम सामाजिक प्रतिनिधियों एवं स्वसहायता समूहों के समन्वय से टीवी उन्मूलन की दिशा में कार्य किया जा रहा है. टीबी उन्मूलन के लिए निक्षय मित्रों की श्रृंखला भी बनाई जा रही है. इसी क्रम में रायपुर कर्चुलियान में आयोजित समारोह में गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह ने टीबी रोगियों को पोषण आहार के 50 पैकेट वितरित किए. पोषण आहार के रूप में चार किलो आटा, दो किलो मूंगफली, एक किलो दाल तथा एक किलो भूना चना टीबी रोगियों को वितरित किया गया. विधायक श्री सिंह ने निक्षय मित्र के रूप में प्रतिबद्ध होकर टीबी उन्मूलन को अपने समाज से जड़ से मुक्त करने का संकल्प लिया. उन्होंने टीबी रोगियों के पोषण आहार के लिए 30 हजार रुपए रेडक्रास सोसायटी रीवा के खाते में जमा कराया. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजीव शुक्ला ने बताया कि समारोह में टीबी रोगियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने वाले स्वयंसेवकों तथा निक्षय मित्रों को भी सम्मानित किया गया. समारोह में सचिव रेडक्रॉस राजेन्द्र पाण्डेय, जनपद सीईओ संजय कुमार सिंह, जिला छय अधिकारी डॉ अनुराग शर्मा, बीएमओ डॉ कल्याण सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, रेनू सिंह का विशेष सहयोग रहा. recent visitors 97

ग्वालियर नगर निगम में बवाल, अध्यक्ष और भाजपा पार्षद आमने-सामने, बर्खास्तगी की नौबत

ग्वालियर नगर निगम में बवाल, अध्यक्ष और भाजपा पार्षद आमने-सामने, बर्खास्तगी की नौबत

Chaos in Gwalior Municipal Corporation, chairman and BJP councillor face to face, near dismissal ग्वालियर। नगर निगम परिषद की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक के दौरान निगम अध्यक्ष मनोज सिंह तोमर और बीजेपी पार्षद मोहित जाट के बीच तीखी बहस हो गई। हालात इतने बिगड़े कि अध्यक्ष ने मोहित जाट को सदन से बर्खास्त करने और संभाग आयुक्त से पार्षद का चुनाव शून्य घोषित करने तक की चेतावनी दे डाली। बीजेपी पार्षद मोहित जाट का कहना है कि, “हम जनता के मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन हमारी बात सुनी ही नहीं जा रही। हमारी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।” वहीं निगम अध्यक्ष मनोज सिंह तोमर ने पलटवार करते हुए कहा, “बार-बार हंगामा करने वाले पार्षद अधिकारियों का समय बर्बाद कर रहे हैं, सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं और आसंदी का अपमान कर रहे हैं।” बैठक में बढ़ते विवाद को देखते हुए माहौल काफी गरमाया और परिषद में अव्यवस्था का माहौल बन गया। recent visitors 91

हैंडपंप मेंटेनेंस का बिल पास करने मांगें 24 हजार रु.; EOW ने कार्यपालन यंत्री और क्लर्क को किया गिरफ्तार 

Demanded 24 thousand rupees to pass the bill of hand pump maintenance; EOW arrested the executive engineer and clerk  जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता  जबलपुर । आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की टीम ने बुधवार को पीएचई विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री को 24 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। EOW की टीम ने अकाउंटेंट क्लर्क को भी पकड़ा है। कार्यपालन यंत्री ने हैंडपंप मेंटेनेंस का बिल पास करने के लिए ठेकेदार से रिश्वत मांगी थी। दमोह के रहने वाले ठेकेदार रोहित बरौलिया ने सिहोरा ब्लॉक में हैंडपंप मेंटेनेंस का काम लिया था। जिसे पूरा करने के बाद उन्होंने दमोह नाका स्थित मुख्य कार्यालय में 2 लाख 47 हजार रुपए का बिल लगाया था। बिल पास करने के लिए कार्यपालन यंत्री द्वारा 10% रिश्वत की मांग की जा रही थी। जिसकी शिकायत रोहित ने जबलपुर आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो के एसपी अनिल विश्वकर्मा से लिखित में शिकायत दी। शिकायकर्ता का कहना है कि उसने सिहोरा ब्लॉक के कई क्षेत्रों में हैंडपंप मेंटेनेंस का काम किया था। उसका बिल पास करवाने के लिए कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह और क्लर्क विकास पटेल 24 हजार रुपए मांग रहे थे। यह काम का 10 प्रतिशत होता है। शिकायत का सत्यापन करने के बाद बुधवार दोपहर को EOW ने यह ने कार्रवाई की ।  recent visitors 105

ऑनलाइन मनी गेम्स पर संसद की सख्ती: 3 साल की सजा और 1 करोड़ जुर्माना

Parliament’s strictness on online money games: 3 years imprisonment and 1 crore fine strictness online money games लोकसभा ने बुधवार को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य ऑनलाइन गेम्स की लत, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी बढ़ती समस्याओं पर अंकुश लगाना है। क्या है विधेयक की खास बातें? strictness online money games किन गेम्स पर लगेगा प्रतिबंध? strictness online money gamesयह कानून सभी प्रकार के ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ गतिविधियों पर लागू होगा। इसमें शामिल हैं: संसद में विरोध और पारित होने की प्रक्रिया strictness online money gamesविपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संक्षिप्त टिप्पणी के बाद इसे सदन में प्रस्तुत किया। बहस के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। Read More: सरकारी स्कूल की किताबें कबाड़ी के पास कैसे पहुंचीं? ग्रामीणों ने पकड़ी गड़बड़ी, प्राचार्य कटघरे में आगे का रास्ताराज्यसभा से भी विधेयक पारित होने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा। इसके बाद देशभर में ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी। लोकसभा ने ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित किया। अब जुआ, सट्टा, पोकर, रम्मी और फैंटेसी गेम्स अवैध होंगे। उल्लंघन पर 3 साल कैद और 1 करोड़ रुपये जुर्माना। recent visitors 116

सरकारी स्कूल की किताबें कबाड़ी के पास कैसे पहुंचीं? ग्रामीणों ने पकड़ी गड़बड़ी, प्राचार्य कटघरे में

सरकारी स्कूल की किताबें कबाड़ी के पास कैसे पहुंचीं? ग्रामीणों ने पकड़ी गड़बड़ी, प्राचार्य कटघरे में

How did government school books reach the junk dealer? Villagers caught the discrepancy, principal in the dock books reach junk dealer सागर जिले के बंडा विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मगरदा में सोमवार को उस समय हंगामा मच गया, जब ग्रामीणों ने स्कूल से पिकअप वाहन में किताबें ले जाते हुए पकड़ लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा वितरित की गई ये किताबें रद्दी में बेचने के लिए भेजी जा रही थीं। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया और मौके पर नायब तहसीलदार, बीईओ और बीआरसीसी पहुंचे। अधिकारियों ने किताबों को जब्त कर पंचनामा तैयार किया और स्कूल प्राचार्य आर.के. रोहित सहित अन्य संबंधितों के बयान दर्ज किए। प्राचार्य पर संदेह की सुई ग्रामीणों का कहना है कि पिकअप वाहन कबाड़ी का था, जिससे यह शक और गहरा हो गया कि किताबें बेचने की कोशिश की जा रही थी। जब्त पुस्तकों में पिछले वर्ष की किताबें भी थीं, जिनमें इस वर्ष कोई बदलाव नहीं हुआ है और इन्हें पुनः छात्रों को वितरित किया जा सकता था। Read More : छतरपुर का गौरव: धुबेला की ऐतिहासिक धरोहरें और महाराजा छत्रसाल की विरासत प्रशासन की कार्यवाही books reach junk dealer तहसीलदार विजयकांत त्रिपाठी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही जांच शुरू कर दी गई है। उनके अनुसार—“प्राचार्य का कहना है कि जहां किताबें रखी थीं, वहां लैब का निर्माण होना है, इसलिए पुस्तकों को अतिरिक्त भवन में शिफ्ट किया जा रहा था। हालांकि वाहन कबाड़ी का था, इस पर प्रतिवेदन तैयार कर लिया गया है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।” प्राचार्य की सफाई और उठते सवाल प्राचार्य आर.के. रोहित ने सफाई दी कि किताबों को बेचा नहीं जा रहा था, बल्कि उन्हें केवल दूसरी जगह रखने के लिए भेजा जा रहा था। लेकिन सवाल यह है कि यदि किताबें बच्चों के लिए थीं, तो उन्हें समय रहते बांटा क्यों नहीं गया? ग्रामीणों और अभिभावकों का यही गुस्सा अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। recent visitors 137

छतरपुर का गौरव: धुबेला की ऐतिहासिक धरोहरें और महाराजा छत्रसाल की विरासत

छतरपुर का गौरव: धुबेला की ऐतिहासिक धरोहरें और महाराजा छत्रसाल की विरासत

Pride of Chhatarpur: Historical heritage of Dhubela and legacy of Maharaja Chhatrasal छतरपुर ! Maharaja Chhatrasal in Chhatarpur मध्यप्रदेश का छतरपुर जिला न केवल प्राकृतिक सौंदर्य बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास के लिए भी जाना जाता है। यही वह भूमि है जहां वीर योद्धा महाराजा छत्रसाल ने मुगलों के खिलाफ संघर्ष कर बुंदेलखंड में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी। उनकी राजधानी रहा धुबेला गांव, आज भी अतीत की कहानियां समेटे खड़ा है। बुंदेलखंड में छत्रसाल का साम्राज्य Maharaja Chhatrasal in Chhatarpur 17वीं शताब्दी में स्थापित धुबेला गांव, महाराजा छत्रसाल की वीरता, कला और प्रेम का साक्षी है। कहा जाता है कि छत्रसाल ने मुगल सम्राट औरंगजेब को परास्त कर अपना स्वतंत्र राज्य खड़ा किया था। यही कारण है कि बुंदेलखंड की धरती पर आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। Read more: कांग्रेस के शहरी और ग्रामीण अध्यक्ष ने रखा लक्ष्य, ग्राउंड जीरो तक पहुंचेगा संगठन अद्भुत धरोहरें और स्थापत्य कला धुबेला की ऐतिहासिक धरोहरें आज भी अपनी भव्यता से लोगों को आकर्षित करती हैं। इनमें छत्रसाल महल, रानी कमलापति स्मारक, मस्तानी महल, हृदय शाह महल और शीतल गढ़ी प्रमुख हैं। धुबेला का ऐतिहासिक महत्व Maharaja Chhatrasal in Chhatarpur इतिहासकार मानते हैं कि धुबेला केवल छत्रसाल की राजधानी ही नहीं, बल्कि उनकी कर्मभूमि भी थी। यहां की धरोहरें न केवल स्थापत्य की उत्कृष्टता दिखाती हैं, बल्कि बुंदेलखंड की संस्कृति और वीरता की गाथा भी सुनाती हैं। छतरपुर का धुबेला गांव आज भी पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। महाराजा छत्रसाल की गाथा, मस्तानी और बाजीराव की कहानी, तथा रानी कमलापति का स्मारक—ये सभी मिलकर बुंदेलखंड की पहचान को और भी मजबूत बनाते हैं। recent visitors 119