पीएम विश्वकर्मा योजना ने काफी प्रगति, अब तक 2.58 करोड़ आवेदन जमा किए गए : NSDC

नई दिल्ली  केंद्र सरकार द्वारा बढ़ई, राजमिस्त्री और दर्जी जैसे पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों के उत्थान के लिए लाई गई पीएम विश्वकर्मा योजना ने काफी प्रगति की है और अब तक 2.58 करोड़ आवेदन जमा किए गए हैं। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 23.75 लाख आवेदकों को तीन चरण की वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए सफलतापूर्वक रजिस्टर किया गया है। इस योजना के तहत करीब 10 लाख लोगों को अपने व्यवसाय के लिए आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ई-वाउचर के माध्यम से 15,000 रुपये तक के टूलकिट प्रोत्साहन मिले हैं। इस साल 29 जुलाई तक, 56,526 आवेदनों को 551.80 करोड़ रुपये के कुल ऋण स्वीकृत किए गए हैं। ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज दर है, जिसे सरकार सब्सिडी देती है। भारत सरकार 8 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान करती है, जिससे कुल ऋण लागत कम हो जाती है। ऋण की पहली किस्त 18 महीने में तथा दूसरी किस्त 30 महीने में चुकाई जा सकती है। बीते साल 17 सितंबर को पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य 18 व्यवसायों के कारीगरों और शिल्पकारों को उनके हाथों और औजारों से काम करने में सहायता प्रदान करना है। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को उद्यमी और आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है। देश के 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों के पारंपरिक कौशल को अपग्रेड और मॉर्डन बनाने के लिए बेसिक स्किल ट्रेनिंग के रूप में फॉर्मल ट्रेनिंग शुरू की गई है। इस योजना के तहत पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड, स्किल अपग्रेडेशन, टूलकिट प्रोत्साहन, ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और मार्केटिंग सहायता प्रदान की जाती है। उम्मीद है कि इस योजना से कारीगरों और शिल्पकारों के लिए आजीविका के अवसर पैदा होंगे, उनके कौशल में वृद्धि होगी और उनके काम में आधुनिक उपकरण और तकनीक को लाया जा सकेगा। इसके अलावा, उन्हें घरेलू और वैश्विक बाजारों से जुड़ने के अवसर मिलेंगे।     recent visitors 122

अक्टूबर में भारत को एशिया, यूरोप,अमेरिका से ऑर्डर मिले, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी देखी गई

नई दिल्ली  मैन्युफैक्चरिंग पर इतराने वाला चीन अब इसमें काफी पीछे हो गया है। एक तरफ जहां चीन की इकनॉमिक ग्रोथ काफी धीमी है वहीं भारत को अच्छी खबर मिली है। एचएसबीसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी आई है। भारत ने इस मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है। इस तेजी का कारण विदेशी मांग है। दुनिया के कई देशों से भारत को न केवल नए ऑर्डर मिले बल्कि बिक्री में भी तेजी आई। इस कारण अक्टूबर में नौकरियों की संख्या भी बढ़ गई। अक्टूबर में भारत को एशिया, यूरोप, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से ज्यादा ऑर्डर मिले, जिस कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी देखी गई।   चीन से कितना आगे निकला भारत? एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 57.5 पॉइंट हो गया। यह सितंबर में 56.5 पॉइंट था जो आठ महीने का निचला स्तर था। पीएमआई बढ़ने से पता चलता है कि परिचालन स्थितियों में काफी सुधार आ रहा है। वहीं दूसरी ओर चीन की पीएमआई 50.30 पॉइंट है। हालांकि अक्टूबर में चीन के पीएमआई में भी कुछ तेजी आई है। लेकिन कुल पॉइंट में यह भारत से पीछे रह गया है। भारत में बनी चीजों की बढ़ी मांग पिछले कुछ समय में भारत में बनी चीजों की दुनियाभर में मांग बढ़ी है। कई विदेशी कंपनियों ने काफी संख्या में ऑर्डर बुक किए हैं। जितने औसतन ऑर्डर पिछले 20 साल में मिले हैं, मौजूदा दौर में ऑर्डर की संख्या उससे ज्यादा हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नए प्रोडक्ट की शुरुआत और सफल मार्केटिंग ने चीजों की बिक्री बढ़ाने में मदद की है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ी मांग बढ़ने से कर्मचारियों की संख्या में भी तेजी आई है। यानी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। डेटा के मुताबिक मैन्युफैक्चरर्स ने अक्टूबर में अतिरिक्त कर्मचारियों को जॉब दी। यह संख्या सितंबर के रखे गए नए कर्मचारियों के मुकाबले ज्यादा थी। अक्टूबर का डेटा कलेक्शन करीब 20 वर्षों में सबसे अधिक रहा। एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स भविष्य के प्रोडक्शन की मात्रा के बारे में अधिक आशावादी हो गए हैं। recent visitors 131

अबू धाबी टी10 का आठवां सीज़न 21 नवंबर से, खेले जाएंगे 40 मैच

अबू धाबी  अबू धाबी टी10 का आठवां सीज़न 21 नवंबर से शुरू हो रहा है, टूर्नामेंट का पहला मैच टीम अबू धाबी और अजमान बोल्ट्स के बीच खेला जाएगा। इस साल के टूर्नामेंट में एक विस्तारित प्रारूप है जिसमें 10 टीमें एक रोमांचक सीज़न में प्रतिस्पर्धा करेंगी, जहां शीर्ष पांच टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए कड़ी लड़ाई में शामिल होंगी। प्रतिष्ठित जायद क्रिकेट स्टेडियम, अबू धाबी क्रिकेट और स्पोर्ट्स हब में केवल 12 दिनों में 40 से अधिक मैचों का आयोजन करेगा। प्लेऑफ़ सप्ताहांत के दौरान होंगे, जिसकी शुरुआत 1 दिसंबर को क्वालीफायर 1 से होगी, जिसमें शीर्ष दो टीमें शामिल होंगी। चौथे और पांचवें स्थान पर रहने वाली टीमें एलिमिनेटर 1 में भिड़ेंगी, उसके बाद एलिमिनेटर 2 होगा, जहां टीम 3 एलिमिनेटर 1 के विजेता से भिड़ेगी। क्वालीफायर 1 की उपविजेता फिर क्वालीफायर 2 में एलिमिनेटर 2 के विजेता से भिड़ेंगी। ग्रैंड फिनाले 2 दिसंबर को होगा, जहां क्वालीफायर 1 और क्वालीफायर 2 के विजेता खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। 2024 संस्करण में 18 विभिन्न देशों के खिलाड़ी शामिल हैं। जोस बटलर, जॉनी बेयरस्टो, मार्कस स्टोइनिस, लॉकी फर्ग्यूसन और राशिद खान जैसे क्रिकेट सुपरस्टार सभी टीमों के स्टार-स्टडेड रोस्टर में शामिल होंगे, जो क्रिकेट के एक अविस्मरणीय सीज़न का वादा करेंगे।     recent visitors 138

भारतीय टीम की न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में करारी हार सेकोच गौतम गंभीर पर भी सवाल उठने लगे

मुंबई  भारतीय टीम की न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में करारी हार से टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पर भी सवाल उठने लगे हैं। गंभीर को अभी तीन माह पहले ही कोच बनाया गया था। उसके बाद से ही भारतीय टीम का प्रदर्शन कुछ विशेष नहीं रहा है। गंभीर को टीम चयन मामलों में भी पूरे अघिकार दिये गये थे उसके बाद भी वह परिणाम नहीं दे पाये हैं। अब गंभीर की ऑस्ट्रेलिया दौरे में कड़ी परीक्षा होगी। वहीं अगर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता तो गंभीर की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय टीम 27 साल में पहली बार श्रीलंका से एकदिवसीय सीरीज हारी। इसके बाद अब उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप का शिकार होना पड़ा है। इससे पहले भारतीय टीम कभी भी तीन या उससे अधिक मैचों की सीरीज में नहीं हारी है। हालांकि उनके बचाव में कहा जा रहा है कि टीम के साथ कोच केवल योजना ही बना सकता है पर स्पिनरों के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी जानने के बाद भी मुंबई में पूरी तरह से स्पिनरों की सहायक पिच बनाने पर भी सवाल उठे हैं। मुंबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट के दूसरे दिन तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को नाइटवाचमैन के रूप में भेजने और पहली पारी में सरफराज खान को आठवें नंबर पर भेजने पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा, ‘गंभीर को ऐसा अधिकार दिया गया है जो इससे पहले कोच रहे रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ को नहीं मिला था। बीसीसीआई के नियम कोच को चयन समिति की बैठकों का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं देते हैं पर ऑस्ट्रेलिया दौरे की चयन बैठक के लिए गंभीर को अपने सुझाव देने का अवसर दिया गया।’ बोर्ड के इस अधिकारी ने कहा, ‘दौरे के महत्व को देखते हुए मुख्य कोच को इसमें भाग लेने की अनुमति दी गई थी।’ दिल्ली और केकेआर के तेज गेंदबाज हर्षित राणा और आंध्र और एसआरएच के ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी को मुख्य कोच की मांग पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए शामिल किया गया है।     recent visitors 120

देश में अक्टूबर में हर दिन बिकी 16,550 कारें, बना नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली  त्योहारी माह में देश में कारों की बिक्री का नया रिकॉर्ड बना है। अक्टूबर 2024 में कारों की खुदरा बिक्री पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। वाहन डेटा के अनुसार, 31 अक्टूबर तक कुल 5.13 लाख कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, यानी हर दिन औसतन 16,550 कारें बिकीं। इससे पहले जनवरी 2024 में 3.99 लाख कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जो एक रिकॉर्ड था। मौजूदा वित्तीय वर्ष में हर महीने औसतन 3.33 लाख गाड़ियां बिकीं हैं, जो पिछले साल की तुलना में 5 फीसदी ज्यादा है। पिछले वर्ष कुल 38 लाख कारें बिकी थीं। पहली बार इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री भी 10 हजार के आंकड़े को पार कर गई, जो सालाना आधार पर 38 फीसदी की वृद्धि है। वाहनों के होलसेल डेटा से यह भी पता चलता है कि खरीदारों का रुझान अब एसयूवी और प्रीमियम कारों की ओर अधिक है। कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पहली बार किसी महीने में दो लाख से ज्यादा कारों की बिक्री की। कंपनी की कुल बिक्री 4 फीसदी बढ़कर 2,06,434 यूनिट्स पर पहुंच गई, जिसमें से 33,168 कारें एक्सपोर्ट की गईं। मारुति की एसयूवी सेगमेंट की बिक्री में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि छोटी कारों की बिक्री में 20 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। कंपनी ने देश में सबसे ज्यादा 1,59,591 कारों की बिक्री की, हालांकि डोमेस्टिक होलसेल में कुल मिलाकर 5 फीसदी की गिरावट रही। इस तरह के आंकड़े भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में स्थिरता और वृद्धि का संकेत देते हैं। कारों की बढ़ती मांग, विशेष रूप से एसयूवी और इलेक्ट्रिक वाहनों में, यह दर्शाती है कि उपभोक्ता अब ज्यादा सुविधा और प्रीमियम अनुभव की ओर रुख कर रहे हैं।     recent visitors 117

‘ अगर हिंदू जाति में बंटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे’, वाराणसी में BJP युवा मोर्चा ने लगाए पोस्टर तो मचा हंगामा

वाराणसी  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान “बंटेंगे तो कटेंगे” पर लगातार प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मुख्य द्वार के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा ने एक विशाल बैनर लगाया है। इस बैनर पर लिखा है, “हिंदू जाति में बटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे… फैसला आपका।” बैनर लगाने वाले ने अपनी तस्वीर और नाम भी इसमें शामिल किया है। विवेक सिंह भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी महानगर अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस बैनर के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अगर हिंदू लोग जातियों में बंटते हैं, तो इसका परिणाम देश के लिए गंभीर हो सकता है। विवेक सिंह ने बैनर के माध्यम से कहा कि हमें एकजुट रहना होगा, अन्यथा हम अपने ही देश में बांग्लादेश जैसे हालात का सामना कर सकते हैं। विवेक सिंह ने कहा कि इस बैनर के माध्यम से वह यह संदेश देना चाहते हैं कि एकजुटता में ही शक्ति है। उनका मानना है कि अगर हिंदू समाज जातियों में विभाजित होता है, तो यह देश के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “हमें सभी हिंदुओं को एकजुट करना चाहिए, ताकि हम किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति से बच सकें।” इस बैनर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विवेक सिंह की तस्वीर भी लगाई गई है। बता दें कि योगी आदित्यनाथ के “बंटेंगे तो कटेंगे” वाले बयान के बाद से इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी राज्यों और उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर इस नारे के विभिन्न वर्जन दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। भाजपा के इस बैनर ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि यह मुद्दा देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। वहीं, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर सियासी हलचल बढ़ चुकी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर पोस्टर वार किए जा रहे हैं।     recent visitors 95

विधायक निर्मला सप्रे के विधानसभा की सदस्यता निरस्त कराने कांग्रेस हाईकोर्ट की शरण में जाएगी

भोपाल  मध्य प्रदेश के बीना से विधायक निर्मला सप्रे के विधानसभा की सदस्यता निरस्त करने की मांग लगातार कांग्रेस कर रही है.अब कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए हाईकोर्ट की शरण लेने का निर्णय लिया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने इसकी जानकारी दी है. कार्रवाई का रास्ता खुला विधायक की विधानसभा सदस्यता निरस्त करने की मांग की जा रही है.नेता प्रतिपक्ष की याचिका के 90 दिन पूरे होने के बाद कांग्रेस के पास कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला गया है.नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष की  सदस्यता रद्द करने की याचिका लगाई थी . इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक किसी तरह का फैसला नहीं हुआ है.ऐसे में अब कांग्रेस कोर्ट का रूख करेगी .सबूत के साथ कोर्ट में कांग्रेस अपना पक्ष रखेगी. पार्टी की गतिविधियों में लिप्त है उमंग सिघार ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि भाजपा इस बारे में कोई निर्णय लेना चाहती है, ऐसे में हम इस मामले में हाईकोर्ट जा रहे हैं.वे भाजपा की बैठकों में जा रही हैं. बयानबाजी कर रही हैं. ऐसे कई तथ्य हैं, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में पूरी तरह से लिप्त हैं. ऐसे में उन्हें बर्खास्त करने की मांग को लेकर कोर्ट में जा रहे हैं. दल बदल कानून के तहत कांग्रेस इस्तीफे पर जोर दे रही है. बता दें कि निर्मला सप्रे बीजेपी की बैठक में भी नजर आई थी. हालांकि निर्मला ने एक बयान में कहा था कि न तो मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न ही बीजेपी ज्वाइन की है. recent visitors 93