‘मोहन सरकार ने जंगली जानवरों के हमलों के कारण मौत पर मुआवजे की राशि आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का फैसला किया

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत जंगली जानवरों के हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। राज्य सरकार ने उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पास एक हाथी द्वारा दो व्यक्तियों को कुचलकर मार डालने की घटना के एक दिन बाद यह घोषणा की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया, ‘‘हमने जंगली जानवरों के हमलों के कारण मौत के लिए मुआवजे की राशि आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का फैसला किया है। हमने उमरिया में (हाथियों के हमले में) मारे गए दो लोगों के परिवारों को भी इसके दायरे में शामिल किया है।’’ वन मंत्री प्रदीप अहिरवार द्वारा उमरिया जिले के पीड़ितों के परिजनों को 8-8 लाख रुपये का मुआवजा सौंपने के कुछ घंटों बाद ही मुआवजा राशि में तीन गुना की वृद्धि की गई। उधर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) के बफर जोन के बाहर शनिवार को जंगली हाथियों के हमले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई थी। अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक की पहचान रामरतन यादव (65) के रूप में हुई है। बीटीआर के अधिकारी ने बताया, "आज सुबह जब वह रिजर्व के बाहर शौच के लिए गए थे तो जंगली हाथियों ने उन्हें कुचल दिया।’’ उमरिया के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) विवेक सिंह ने को फोन पर बताया कि यह घटना देवरा गांव में हुई। इस हफ्ते की शुरुआत में तीन दिनों के अंतराल में बीटीआर में दस हाथियों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को रिजर्व (बीटीआर) के खितोली रेंज के अंतर्गत सांखनी और बकेली में चार जंगली हाथी मृत पाए गए, जबकि बुधवार को चार और बृहस्पतिवार को दो की मौत हो गई। अधिकारियों ने पहले बताया था कि 13 सदस्यीय झुंड में से अब केवल तीन हाथी ही जीवित हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या व्यक्ति को शेष तीन हाथियों ने मारा है, तो अधिकारी ने कहा कि उनकी पहचान का पता लगाना मुश्किल है। बीटीआर के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि झुंड के शेष तीन हाथी कटनी जिले के वन क्षेत्र की ओर बढ़ते देखे गए। वन अधिकारी ने कहा, “यह गतिविधि असामान्य है क्योंकि बीटीआर में पहले कभी ऐसा नहीं देखा गया है।” बीटीआर पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया और कटनी जिलों में फैला हुआ है। recent visitors 130

मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: नवंबर में ठंड ने ढाया कहर कई शहरों में तापमान 20 डिग्री से नीचे

Madhya Pradesh weather update: Cold wreaked havoc in November, temperature below 20 degrees in many cities भोपाल। नवंबर शुरू होते ही गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। एमपी के अधिकांश शहरों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। अनूपपुर के अमरकंटक और नर्मदापुरम के पचमढ़ी में ठंड का असर सबसे ज्यादा है। सोमवार रात यहां का तापमान 13 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे रहा।  ग्वालियर-चंबल संभाग में ठंड का असर तेज होता है, लेकिन शुरुआत में अभी भोपाल और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर थोड़ा गर्म है। रविवार-सोमवार की रात भोपाल और जबलपुर में तापमान 17 डिग्री रहा। जबकि, ग्वालियर में 17.3 डिग्री, उज्जैन में 18.3 डिग्री और इंदौर में 18.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।  मंडला, रीवा और राजगढ़ में तापमान  मंडला, मलाजखंड, रीवा, उमरिया सहित अन्य शहरों में भी रात का पारा लुढ़का है। रविवार सोमवार की रात अमरकंटक में 12.2 डिग्री, पचमढ़ी में 12.4 डिग्री, मंडला में 13.6 डिग्री, रीवा में 14.4 डिग्री और मलाजखंड में 14.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। उमरिया में तापमान 15.3 डिग्री, राजगढ़ में 16 डिग्री और बैतूल-सतना में 16.7 डिग्री सेल्सियस रहा। अगले सप्ताह बढ़ेगी ठंड मौसम विभाग की मानें तो नवंबर के दूसरे सप्ताह ठंड का असर बढ़ेगा। इस दौरान उत्तर भारत में बर्फबारी की संभावना है। इसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।   बड़े शहरों में नवंबर का मौसम भोपाल में नवंबर महीने में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 30 नवंबर 1941 को सबसे कम 6.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था। इंदौर में नवंबर के दूसरे सप्ताह से ठंड बढ़ने लगती है। रात का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। 25 नवंबर 1938 को इंदौर में  5.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया था  ग्वालियर में पिछले 10 साल में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री तक गिरा है। 1970 में यह 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।  जबलपुर में न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री तक जा चुका है। 12 नवंबर 1989 को यह 3.9 डिग्री सेल्सियस रहा।  उज्जैन में न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री के बीच रहता है। 30 नवंबर 1974 को 2.8 डिग्री सेल्सियस रहा है।  recent visitors 194

राशिफल मंगलवार 5 नवंबर 2024

मेष राशि-आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन परेशान भी रहेगा। माता की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। खर्चों में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर मिलेंगे। वृषभ राशि-मन परेशान रहेगा। धैर्यशीलता में कमी रहेगी। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। पिता का साथ मिलेगा। कारोबार में कठिनाई आ सकती है। परिवार का साथ रहेगा। मिथुन राशि-मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में भी संतुलन बनाए रखें। कारोबार में बदलाव के योग बन रहे हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कर्क राशि-प्रसन्नता रहेगी और आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। पठन-पाठन में रुचि रहेगी। शैक्षिक व बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। सेहत के प्रति सचेत रहें। सिंह राशि– मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। बौद्धिक कार्यों से आय के साधन बन सकते हैं। कारोबार से लाभ में वृद्धि होगी। किसी मित्र के सहयोग से आय में वृद्धि हो सकती है। कन्या राशि-मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आय में वृद्धि होगी। खर्चों में वृद्धि होगी। तुला राशि-मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ में भी वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों के लिए किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। वृश्चिक राशि-किसी अज्ञात भय से परेशान हो सकते हैं। मन में नकारात्मक विचारों से बचें। नौकरी में बदलाव के साथ तरक्की के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। सेहत के प्रति सचेत रहें। धनु राशि-मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। वाणी के प्रभाव में वृद्धि होगी। किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। पिता से धन की प्राप्ति हो सकती है। आय में वृद्धि होगी। मकर राशि-अशांति महसूस होगी। आत्मसंयत रहें। क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। सप्ताह के प्रारंभ में संतान की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। कुंभ राशि-आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। आत्मसंयत रहें। क्रोध से बचें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। परिवार से दूर रहना पड़ सकता है। मीन राशि-आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे, परंतु संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। वाहन सुख में वृद्धि होगी। recent visitors 188

भेल दशहरा मैदान पर भोजपाल महोत्सव 15 नवंबर से, लगेंग 500 दुकानें

 भोपाल  शहर के भेल दशहरा मैदान पर 15 नवंबर से भोजपाल महोत्सव मेला शुरू हो रहा है। इसकी तैयारियां मैदान पर शुरू हो गई हैं। झूले लगाए जाने लगे हैं। इस बार शहरवासियों को मेले में रशियन और अफ्रीकन कलाकारों के साथ द ग्रेट जैमिनी सर्कस देखने को मिलेगा। दूसरी ओर रफ्तार की दुनिया का बादशाह, बच्चों और बड़ों के लिए अत्याधुनिक रोमांचक झूले होंगे। मेले में देश का सबसे बड़ा झूला रोलर कोस्टर, टावर, रेंजर, आक्टोपस रहेगा। भेल जनसेवा समिति द्वारा आयोजित भोजपाल महोत्स्व मेला की शुरुआत शाम सात बजे से भजन संध्या के साथ की जाएगी। भोजपाल महोत्सव मेला समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि विगत आठ वर्षों से मेले का सफल आयोजन किया जा रहा है। मेले का यह नौ वां वर्ष है। 15 नवंबर से 29 दिसंबर तक 45 दिन तक चलने वाले इस मेले में राजधानी सहित आसपास के क्षेत्रों व जिलों से लोग आएंगे। वहीं महामंत्री हरीश कुमार राम ने बताया कि तेज भागता झूला ट्वीस्टर व्हील सहित कई प्रकार के झूले आकर्षक का केंद्र होंगे। मेले में आटोमोबाइल, इलेक्टानिक, टेलीकाम, फर्नीचर, हैन्डी क्राफ्ट, हैन्डलूम, महासेल, विभिन्न प्रकार के स्वादिस्ट व्यंजन, बैंकिंग इंश्योरेंस, आर्ट गैलरी, इंटीरियर, महिलाओं की सौंदर्य सामग्री, खूर्जा क्राकरी, कपड़े सहित विभिन्न प्रकार की दुकानें लगेंगी। recent visitors 227

ज्यादा काम करने की जरूरत : श्रीमती तृप्ता ठाकुर

भोपाल. भारत सरकार विद्युत मंत्रालय के ख्यातिलब्ध प्रशिक्षण संस्थान नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट एवं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेन्टर के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के अंतर्गत ‘‘परिचालन सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन‘‘ पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की महानिदेशक श्रीमती तृप्ता ठाकुर एवं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने किया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की महानिदेशक श्रीमती तृप्ता ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2047 तक विद्युत मांग अत्यधिक बढ़ने वाली है और किसी भी विकसित देश के लिए प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत को एक महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है। श्रीमती ठाकुर ने कहा कि भारत में विद्युत वितरण क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत है। इनमें विद्युत हानियों को कम करना, शत-प्रतिशत राजस्व संग्रह करना, विद्युत वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना और नई टैक्नोलॉजी को आत्मसात करने की चुनौती की पूर्ति के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सार्थक और अर्थपूर्ण साबित हो सकते हैं। प्रशिक्षण सत्र में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री सिंघल ने कहा कि प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ट्रेनिंग के अलावा व्यवहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में विभिन्न व्यवहारिक प्रशिक्षण कैम्प लगाये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लाइनकर्मियों को लाइनों पर कार्य करते समय विद्युत सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करते हुए सुरक्षा जोन बनाकर कार्य करना चाहिए। श्री सिंघल ने पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए कंपनी द्वारा प्रदाय किये गये आधुनिक रूप से डिजाइन सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर बल दिया। निदेशक (वाणिज्य) श्री सुधीर कुमार श्रीवास्वत, निदेशक (पीडीटीसी) श्री अनिल कुमार खत्री एवं पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इडिया (भारत सरकार का उपक्रम) के उपमहाप्रबंधक श्री संजेश कुमार ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल एवं नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की महानिदेशक श्रीमती तृप्ता ठाकुर ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण किट वितरित की। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के प्रारंभ और अंत में एक परीक्षा आयोजित की जाएगी ताकि यह देखा जा सके कि प्रशिक्षणार्थियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को किस हद तक ग्राह्य किया है। गौरतलब है कि भोपाल शहर के गोविन्दपुरा स्थित मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेन्टर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सेन्ट्रल इंडिया का सबसे बड़ा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान है। recent visitors 78

मध्यप्रदेश: शिक्षा विभाग में बड़ा खेल, 1.46 लाख सरकारी कर्मचारी किए गए इनएक्टिव, जांच शुरू

Madhya Pradesh: Big game in education department, 1.46 lakh government employees made inactive, investigation started भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसमें राज्य के अलग-अलग जिलों में लगभग 1 लाख 46 हजार 333 सरकारी कर्मचारियों को अचानक “इनएक्टिव” कर दिया गया है। कर्मचारियों द्वारा इस मामले की शिकायत किए जाने के बाद ही विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और अब जांच की तैयारी की जा रही है। जांच के बाद दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कैसे हुआ यह मामला? एजुकेशन पोर्टल पर यह अनियमितता तब सामने आई जब लगभग 2 लाख शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को इनएक्टिव कर दिया गया। विभाग ने अपनी ओर से कर्मचारियों को इनएक्टिव करने के लिए विभिन्न कारण दिए। इनमें 22 हजार 672 कर्मचारियों को मृत घोषित किया गया, जबकि 1 लाख 2 हजार 637 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त मानकर इनएक्टिव किया गया। इसके अलावा, 2781 कर्मचारियों को “टर्मिनेट” यानी सेवा समाप्त बताकर हटा दिया गया, और 18 हजार 243 कर्मचारियों को इस्तीफा देने का हवाला देकर उनके नामों को पोर्टल से हटा दिया गया। कर्मचारियों की शिकायत के बाद विभाग हरकत में इस बड़े पैमाने पर हुई इनएक्टिव कार्रवाई के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की, जिसके बाद ही विभाग ने अपनी गलती मानी और इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया। विभाग ने इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम और पदों की जानकारी मांगी है। आगे की कार्रवाई और विभाग पर उठ रहे सवाल जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को एक साथ इनएक्टिव किया गया है। शिक्षा विभाग पर सवालों की बौछार इस मामले के बाद शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आ गया है कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। कर्मचारियों को अचानक इनएक्टिव करने का कारण समझ से परे है, और इससे यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि पोर्टल पर डेटा एंट्री और सत्यापन में भारी गड़बड़ी हुई है। इस तरह की अनियमितता ने कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है और पूरे प्रदेश में इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है। अब देखना होगा कि जांच में कौन दोषी साबित होता है और क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितता न हो। recent visitors 136

अचल संपत्ति गाइडलाइन नियम: संशोधन, प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल

Real Estate Guideline Rules: Amendments, Procedures and Administrative Questions भोपाल। मध्यप्रदेश में अचल संपत्ति के बाजार मूल्य का निर्धारण “मार्गदर्शक बाजार मूल्य सिद्धांत” के आधार पर किया जाता है। यह सिद्धांत राज्य में वर्ष 2000 में लागू हुआ था, और इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन दरें निर्धारित की जाती हैं। हाल ही में इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुछ संशोधन किए गए हैं, जिनमें नए गजट नोटिफिकेशन और संभावित अध्यादेशों की बात सामने आई है। इसके संदर्भ में जनहित के कुछ सवाल और मुद्दे उठे हैं। गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया और केंद्रीय मूल्यांकन समिति केंद्रीय मूल्यांकन समिति का गठन गाइडलाइन दरों का निर्धारण करने और उनकी समीक्षा के लिए होता है। इंदौर में गाइडलाइन दरों को लेकर अंतिम बैठक 20 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुई, लेकिन इसके बावजूद गाइडलाइन दरें कई स्थानों पर मीडिया में पहले ही लीक हो गईं। इसे लेकर यह सवाल उठता है कि मीडिया तक यह सटीक जानकारी कैसे पहुंची। जिला मूल्यांकन समिति और दावे-आपत्तियों का समय इस बार गाइडलाइन पर दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि 4 नवंबर 2024 को निर्धारित की गई है। लेकिन यह समय दीपावली पर्व के अवकाश के बीच आता है, जो कि मध्यप्रदेश में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान लगातार अवकाश होने के कारण यह प्रश्न उठता है कि क्या अवकाश के दिनों में संबंधित कार्यालय खुले थे और क्या लोगों को दावे-आपत्ति दर्ज करने का पूरा अवसर मिला। जनसंपर्क विभाग या जिला प्रशासन ने इस संबंध में क्या सूचनाएं दीं और क्या संबंधित अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था थी, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित गाइडलाइन के मैन्युअल अवलोकन और सूचना पटल पर जानकारी प्रस्तावित गाइडलाइन को आम जनता के अवलोकन हेतु कहां रखा गया था, क्या मैन्युअल रूप से इसका निरीक्षण संभव था, और क्या सूचना पटल पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के संदर्भ में वैधानिकता और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। संपदा प्रणाली और बाजार मूल्य के संबंध प्रश्न यह भी उठता है कि यदि बाजार मूल्य गाइडलाइन दर से कम है, तो क्या संपदा प्रणाली इसे मान्यता देती है? धारा 31 के तहत मूल्य निर्धारण में उपपंजीयक गणों की भूमिका क्या है और कितने जिला पंजीयकों ने इस नियम के तहत दस्तावेज स्पष्ट किए हैं? आयकर विभाग और गाइडलाइन का संबंध आयकर विभाग संपत्ति का मूल्य निर्धारण गाइडलाइन दर के अनुसार करता है। क्या यह कानून आयकर विभाग के लिए अब भी लागू है या इसमें किसी प्रकार का संशोधन हुआ है? साथ ही, यदि गाइडलाइन दर को जिला पंजीयक के आदेश से मान्यता मिलती है, तो क्या व्यवहार मूल्य की मान्यता आयकर नियमों के अनुरूप है? मौखिक निर्देश और वैधानिक नियम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कानून की दृष्टि से मौखिक निर्देशों की तुलना में लिखित और वैधानिक नियम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह गाइडलाइन किस कानून, किस वर्ष और किस विधान के अंतर्गत आती है। इन प्रश्नों का तथ्यात्मक और नीतिगत उत्तर देकर प्रशासन को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी, ताकि आम जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके और गाइडलाइन प्रक्रिया के बारे में भ्रम दूर हो सके। recent visitors 184