जनजाति समाज के क्रांतिकारियों का देश के अस्तित्व की रक्षा में अहम योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Revolutionaries of tribal society have made an important contribution in protecting the existence of the country: Chief Minister Dr. Yadav समाज के विकास के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी जनजाति समाज की गतिविधियों के लिए जमीन और धर्मशाला के लिए पाँच करोड़ रुपये की घोषणा भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजाति समाज के क्रांतिकारियों का देश के अस्तित्व की रक्षा में अहम योगदान रहा है। समाज के क्रांतिकारियों और महापुरूषों के व्यक्तित्व और कृतित्व को समाज में स्थापित किया जा रहा है। क्रांतिकारी टंट्या मामा की स्मृति में इंदौर संभाग में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। जनजाति समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है इसके विकास के लिए कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में जनजाति समाज की गतिविधियों के लिए जमीन उपलब्ध कराने और निर्मित की जा रही धर्मशाला के लिए 5 करोड़ रुपए दिये जाने की घोषणा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में आयोजित भिलाला समाज समागम एवं युवक-युवती परिचय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ईमानदारी, कर्मठता, लगनशीलता एवं परिश्रम जनजाति समाज की विशेष पहचान है। इसी पहचान से समाज में अपना अलग स्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत एवं परंपराओं को सहज के रखा है। इस समाज ने “जो प्राप्त है उसी को पर्याप्त” मानकर आनंद से जीवन जीने की शैली अपनायी है। यह समाज कृषि एवं पशुपालन पर आधारित है। भोलापन भी इस समाज की विशेष पहचान रही है। उन्होंने कहा कि वे इस भोलापन को कमजोरी नहीं बनने दें और किसी भी दुष्चक्र में नहीं आये। कुरीतियों से दूर रहें। अपनी सांस्कृतिक, विरासत और परम्परा को सहज कर रखें। बदलते दौर में इन्हें सुरक्षित जरूर रखें। जो समाज अपनी विरासत, परम्परा और संस्कृति से दूर होता है, वह कमजोर बन जाता है। जड़ों से जुड़े रहें, एक दूसरे को साथ लेकर आगे बढें। आगे बढ़ने के लिए राज्य शासन द्वारा उन्हें हर संभव मदद दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति समाज के विकास के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस समाज के समग्र विकास के लिए कारगर प्रयास किए जा रहे है। हाल ही में इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना स्वीकृत की गई है। यह परियोजना मालवा-निमाड़ क्षेत्र के चहुँमुखी विकास में बड़ी मददगार होगी। परियोजना जिन्दगी बदलने का माध्यम भी बनेगी। इस परियोजना से विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदला जाएगा। सिकलसेल जैसी घातक बीमारी से समाज को मुक्त करने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे है। समाज के शैक्षणिक और आर्थिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए अनेक योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि समाज के लोग आगे आए और इन योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ लें। छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे है। मैं स्वयं भी छात्रावासों का दौरा कर व्यवस्थाओं को देखूंगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज के क्रांतिकारियों और महापुरूषों का जिक्र करते हुए कहा कि समाज में इनके कार्यों को जन-जन तक पहुंचाया जायेगा। आगामी 15 नवम्बर को बिरसा मुण्डा जंयती पर धार में विशाल कार्यक्रम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूरे प्रदेश में दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा पूरी आस्था एवं हर्षोंल्लास से की जायेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज के प्रतिभावान बच्चों का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री का स्वागत समाज की परंपरा के अनुरूप किया गया। उन्हें समाज के प्रतीक चिन्ह भी भेंट किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम स्थल पर लगे स्टाल से स्थानीय स्व-रोजगारी युवा से स्वेटर भी खरीदा। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। इस समाज के विकास एवं कल्याण के साथ ही समाज की संस्कृति एवं परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रयासों से अनुसूचित जनजाति के लोग तेजी से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। समाज को नशा मुक्त किए जाने की जरूरत है। समाज में व्याप्त अन्य कुरीतियों को भी दूर किया जाएगा। उन्होंने आहवान किया कि समाज के लोग आगे आये, जागरूक बने और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर तेजी से आगे बढ़े। सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि जनजाति समुदाय की कुरीतियों को दूर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन में जनजाति समुदाय का बड़ा योगदान है। कार्यक्रम के प्रारंभ में जय ऊँकार आदिवासी भिलाला समाज संगठन के अध्यक्ष  बी.एस. जामोद ने स्वागत भाषण दिया और आयोजन की रूपरेखा बताई। इस अवसर पर  जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट,  सासंद गजेंद्र सिंह पटेल तथा श्रीमती अनिता चौहान, विधायक  रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला,  कालू सिंह ठाकुर,  राजन मंडलोई, सुश्री मंजू दादू, पूर्व मंत्री श्रीमती रंजना बघेल, जय ऊँकार आदिवासी भिलाला समाज संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष बी. एस. जामोद सहित समाज के पदाधिकारी और जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे। recent visitors 197

दिसंबर में MP BJP को नया अध्यक्ष: नरोत्तम, राजेंद्र, रामेश्वर प्रमुख दावेदार

MP BJP to get new president in December: Narottam, Rajendra, Rameshwar main contenders भोपाल। मध्यप्रदेश बीजेपी का नया मुखिया कौन होगा, ये दिसंबर में तय हो जाएगा। प्रदेश की दो विधानसभा सीटों- बुधनी और विजयपुर में उपचुनाव हो रहा है, इसके नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। इसके बाद बीजेपी संगठन की चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हर बार की तरह ही पार्टी की कोशिश अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध कराने की है। सूत्रों के मुताबिक, नए अध्यक्ष का चुनाव जातीय, क्षेत्रीय और वोट बैंक को साधने के तीन क्राइटेरिया को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सूत्र ये भी बताते हैं कि नया अध्यक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का करीबी होगा। केंद्रीय नेतृत्व कोई चौंकाने वाला नाम सामने लाए, इस बात की भी संभावना है। पार्टी के इस क्राइटेरिया में कौन से नेता अध्यक्ष पद के लिए फिट बैठ रहे हैं,  जातीय समीकरण के फॉर्मूले में फिट ये दो नेता  बीजेपी यदि जातीय समीकरण का फॉर्मूला अप्लाय करती है तो प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा सामान्य वर्ग से हो सकता है। केंद्रीय कैबिनेट में एससी-एसटी चेहरे के तौर पर सावित्री ठाकुर, दुर्गादास उइके और वीरेंद्र खटीक शामिल हैं। प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर ओबीसी चेहरा है। विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी क्षत्रिय समुदाय से आने वाले नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपी गई है। ऐसे में पार्टी सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण नेता को फिर मौका मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो दो नेता इस क्राइटेरिया में फिट बैठते हैं। इनमें से एक हैं वरिष्ठ विधायक रामेश्वर शर्मा और दूसरे हैं पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा। रामेश्वर शर्मा, विधायक: आक्रामक हिंदूवादी छवि रामेश्वर शर्मा भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से 3 बार के विधायक हैं। इस बार वे मंत्री पद के दावेदार थे, मगर उन्हें मौका नहीं मिला। साल 2020 में जब कमलनाथ सरकार गिरी और फिर बीजेपी की सरकार बनी तो वे प्रोटेम स्पीकर बनाए गए थे। recent visitors 161

मध्य प्रदेश में दिन का तापमान 3° गिरा: अक्टूबर के अंत में पूर्वी हिस्सों में गरज-चमक, नवंबर से बढ़ेगी ठंडक

Day temperature dropped by 3° in Madhya Pradesh: Thunderstorms in eastern parts at the end of October, cold will increase from November भोपाल। अक्टूबर के आखिरी दिनों में मध्यप्रदेश में मौसम के 3 रंग देखने को मिल सकते हैं। राज्य के पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम संभाग में दिन में गर्मी का असर बना रहेगा जबकि ग्वालियर-चंबल संभाग में रात के समय ठंड का असर ज्यादा रहेगा। नवंबर से सभी जिलों में सर्दी बढ़ने लगेगी। अभी प्रदेश में रात के समय सर्दी का असर है जबकि दिन में तेज धूप निकल रही है। हालांकि, रविवार को कई जिले ऐसे रहे, जहां दिन का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। ज्यादातर जिलों में पारा 32 डिग्री से नीचे ही रहा। इनमें बैतूल, खंडवा, खरगोन, पचमढ़ी, रायसेन, शिवपुरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, नौगांव, रीवा, सिवनी, सीधी, उमरिया और मलाजखंड शामिल हैं। सबसे ठंडा पचमढ़ी रहा। यहां अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसलिए पूर्वी हिस्से में बदला रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव है। जिसका असर मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से में देखने को मिलेगा। कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। दूसरी ओर, बाकी जिलों में मौसम साफ रहेगा। इस वजह से धूप खिलेगी। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ठंड-गर्मी का ट्रेंड अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में रात में ठंड का असर बढ़ जाता है। पिछले 10 साल से यही ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। भोपाल, इंदौर-ग्वालियर समेत कई शहरों में रात का टेम्प्रेचर 17 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। वहीं, हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा है। यहां दिन और रात दोनों ही ठंडे हैं। दूसरी ओर, दिन में तापमान बढ़ा हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर का महीना चेंज ओवर पीरियड रहता है। इस महीने मानसून विदाई पर होता है। इससे आसमान साफ हो जाता है। इस कारण दिन में गर्मी और रात में ठंड पड़ती है। उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होने से बारिश होती है। इस साल 23 अक्टूबर के बाद बारिश थमी और ठंड का असर बढ़ गया। अक्टूबर के आखिरी 4 दिन रातें और ठंडी होंगी। recent visitors 131

अजित पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की

मुंबई अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की। इस लिस्ट से पूर्व मंत्री नवाब मलिक का नाम गायब है। एनसीपी ने निफाड़ निर्वाचन क्षेत्र से दिलीप बनकर को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि गेवराई से विजयसिंह पंडित, फलटण से सचिन पाटिल और पारनेर से काशीनाथ दाते को मैदान में उतारा है। अब तक एनसीपी ने 49 उम्मीदवारों की घोषणा की है। तीसरी सूची की घोषणा करते हुए राज्य इकाई प्रमुख सुनील तटकरे ने कहा, "नवाब मलिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और हमारे सहयोगी हैं। हम उनसे मिलेंगे और चर्चा करेंगे। अभी तीन दिन और हैं। 29 अक्टूबर नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है। पार्टी जल्द ही शिवाजी नगर-मानखुर्द निर्वाचन क्षेत्र के लिए उम्मीदवार की घोषणा करेगी।" एनसीपी ने नवाब मलिक की बेटी सना मलिक को अणुशक्ति नगर से उम्मीदवार बनाया है, जहां से वर्तमान में नवाब मलिक ही प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी बीच मुंबई भाजपा इकाई के आशीष शेलार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पार्टी नवाब मलिक का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि, "हम नवाब मलिक के खिलाफ हैं। उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करना या न करना उनके पार्टी नेताओं को तय करना है। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता नवाब मलिक के लिए काम नहीं करेंगे, जिन पर दाऊद से संबंध रखने का आरोप है। हम अपने फैसले पर अडिग हैं।" फलटण विधानसभा सीट पर एनसीपी और बीजेपी के बीच कड़ी बातचीत चल रही थी, क्योंकि दोनों ने ही सीट पर अपना दावा ठोका था। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद एनसीपी को फलटण सीट मिल गई और सचिन पाटिल को मैदान में उतार दिया। हाल ही में एनसीपी विधायक दीपक चव्हाण पार्टी छोड़कर शरद पवार गुट में वापस चले गए। जिन्हें एनसीपी एसपी ने फलटण से उम्मीदवार बनाया है, जो राजघराने से ताल्लुक रखने वाले रामराजे निंबालकर का गढ़ है। वहीं रामराजे अजित पवार गुट के साथ बने हुए हैं, लेकिन उनके भाई और समर्थक हाल ही में फलटण निर्वाचन क्षेत्र से चव्हाण को जिताने के संकल्प के साथ शरद पवार गुट में शामिल हो गए हैं। एनसीपी ने निफाड़ से दिलीप बनकर को दूसरी बार फिर से उम्मीदवार बनाया है, हालांकि पहले घोषित दो सूचियों में उनका नाम नहीं था। एनसीपी ने पारनेर से काशीनाथ दाते को उम्मीदवार बनाया है, जहां उनका मुकाबला रानी लंके से है, जो एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार हैं और शरद पवार गुट के सांसद नीलेश लंके की पत्नी हैं। recent visitors 80

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा- असम में अब तक जितने भी घुसपैठिये चिन्हित किए गए हैं, उसमें कोई भी हिंदू नहीं है

दिसपु असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा रविवार को घुसपैठियों की बढ़ती आमद पर सख्त दिखे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब तक जितने भी घुसपैठिये चिन्हित किए गए हैं, उसमें कोई भी हिंदू नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने अन्य राज्यों की सरकारों से भी घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “पिछले दो महीने से हम लोग राज्य में कई घुसपैठियों को पकड़ रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ लोग हमारे देश की सीमा में दाखिल हो रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में राज्य सरकार की भूमिका अहम हो जाती है। यही नहीं, असम के अलावा त्रिपुरा में भी घुसपैठियों को चिन्हित किया जा चुका है। हालांकि, इस पर रोक लगाने की दिशा में पूरी कोशिश जारी है।” उन्होंने कहा, “हम लोग सीमा सुरक्षा बल के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया को हम लोग सीमा सुरक्षा बल की मदद से अंजाम दे रहे हैं। हमारी यही कोशिश है कि कोई घुसपैठियां हमारे राज्य में दाखिल ना हो। पिछले दो महीनों में हम लोगों ने 138 घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें वापस भेजा है, क्योंकि राज्य में बढ़ते घुसपैठियों के आमद से हमारे संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। लेकिन, मैं एक बात यहां पर कहना चाहूंगा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे थे कि बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए महज हिंदुओं की ही आमद हमारे राज्य में बढ़ेगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब तक जितने भी घुसपैठिये राज्य में चिन्हित किए गए हैं, वो सभी रोहिंग्या मुस्लिम ही हैं, बंगाली हिंदुओं को लेकर बनी धारणा पूरी तरह से गलत है।” उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा आंकड़े यह साफ जाहिर कर रहे हैं कि रोहिंग्या मुस्लिम न महज असम, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी घुसपैठ करने की तैयारी में जुट चुके हैं। ऐसी स्थिति में सभी राज्य सरकार को सीमा सुरक्षा बल के साथ पूरी सजगता और सतर्कता के साथ काम करने की आवश्यकता है। असम और त्रिपुरा सरकार पूरे तालमेल के साथ मिलकर काम कर रही है।” उन्होंने कहा, “अब तो बंगाल सरकार भी अपने राज्य में घुसपैठियों को चिन्हित करने की कवायद में जुट चुकी है और यह सब कुछ व्यवस्थित ढंग से किया जा रहा है। मुझे लगता है कि मेघालय, असम, त्रिपुरा और बंगाल की सरकारों को सीमा सुरक्षा बल के साथ मिलकर घुसपैठियों को चिन्हित करने की कवायद में जुट जाना चाहिए। हमने देखा था कि बीते दिनों एक लड़की ने पहले अपना हिंदू नाम बताया था। लेकिन, जांच में पता चला कि वह मुस्लिम थी। ऐसी स्थिति में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि किस स्तर पर इस काम को किया जा रहा है। मुझे लगता है कि हम तालमेल के साथ मिलकर काम करें, तो बड़ी संख्या में घुसपैठियों को चिन्हित कर सकते हैं। मेरा सीधा-सा कहना है कि अगर कोई गैर-कानूनी ढंग से बांग्लादेश से हमारे देश में आता है, तो उसे चिन्हित कर वापस भेजने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।” recent visitors 82

रामनिवास रावत का एक पुराना वीडियो शेयर करने के आरोप में दिग्विजय सिंह समेत तीन कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज

भोपाल मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार रामनिवास रावत का एक पुराना वीडियो शेयर करने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत तीन कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। श्योपुर जिले के एक थाने में श्योपुर निवासी भाजपा नेता अरविंद सिंह ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने रावत की छवि खराब करने के लिए उनका छह साल पुराना वीडियो शेयर किया है। दिग्विजय सिंह के अलावा शिकायत में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उप नेता हेमंत कटारे का भी नाम है। सिंह ने दावा किया कि तीनों कांग्रेस नेताओं ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर रावत का वीडियो शेयर किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “तीनों कांग्रेस नेताओं पर बीएनएस-2023 की धारा 223 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें एक महीने की कैद या 200 रुपये का जुर्माना हो सकता है।” मध्य प्रदेश भाजपा प्रमुख वी.डी. शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के पास उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को चुनौती देने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे पुराना वीडियो लेकर आए हैं। शर्मा ने कहा, “अगर उनमें (कांग्रेस में) हिम्मत है तो विकास के मुद्दे पर उपचुनाव लड़ें। लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उनके पास भाजपा उम्मीदवार रामनिवास रावत को चुनौती देने के लिए कुछ नहीं है। इस तरह की गतिविधियां कांग्रेस को दिन-ब-दिन नीचे ले जा रही हैं।” वीडियो में रामनिवास रावत किसी से बहस करते हुए कह रहे हैं कि उन्हें वोट न दें। वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत 1990 से 2023 के बीच कांग्रेस के टिकट पर छह विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कांग्रेस और राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। रावत लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए और बाद में उन्हें मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में राज्य वन मंत्री बनाया गया। भाजपा ने रावत को उनके गढ़ विजयपुर से कांग्रेस उम्मीदवार विजयपुर मल्होत्रा के खिलाफ मैदान में उतारा है, जो कुछ महीने पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों – विजयपुर और बुधनी – पर 13 नवंबर को उपचुनाव होने हैं और नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।   recent visitors 158

9 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए लड़ाई अब भाजपा और सपा के बीच ही लड़ी जाएगी , BJP की नई चाल

लखनऊ यूपी में 9 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा और सपा के प्रत्याशी नामाकंन दाखिल कर चुके हैं। प्रदेश में इतना तो साफ हो चुका है कि यह लड़ाई अब भाजपा और सपा के बीच ही लड़ी जाएगी। अब राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि यह लड़ाई पार्टियों की नहीं बल्कि CM योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के स्वाभिमान की लड़ाई है। खैर हम बात करेंगे गठबंधन की उस PDA के बारे में जिसका काट अभी तक भाजपा को नहीं मिला था और उसका खामियाजा लोकसभा के चुनाव में भुगतना पड़ा था। लेकिन अब भाजपा सपा के PDA का मुकाबला करने के लिए तैयार है और इस बार प्रदेश में PDA का सामना अपने PDA से करने वाली है। इस उपचुनाव में आपको दो PDA नजर आने वाले हैं एक वो गठबधंन का PDA जिसका पूरा नाम है पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है और दूसरा PDA भाजपा का है। इस का फुल फॉर्म है पिछड़ा, दलित और अगड़ा। भाजपा ने इस PDA का अविष्कार यूं ही हवा में नहीं किया है बल्कि इस फॉर्मुले का परिक्षण हरियाणा के विधानसभा चुनाव में किया और परिणाम आया तो वक्त, हालात, जज्बात सब कुछ एक साथ बदल गया। अब भाजपा अपने इस PDA का इस्तेमाल टिकट बंटवारा हो या देश का कोई भी चुनाव अल्पसंख्यक को छोड़कर पिछड़े, दलित और अगड़ा फर अपना फोकस कर रही है। उपचुनाम में टिकट का बंटवारा इस उपचुनाव में सपा और भाजपा ने जिस हिसाब से टिकट का बंटवारा किया है उसी से साफ दिखाई दे रहा है कि किस कदर प्रदेश में PDA बनाम PDA की लड़ाई चल रही है। पहले सपा के प्रत्याशियों को देख लेते हैं। सपा ने कुल नौ प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चार पर अल्पसंख्यकों को टिकट दिया है। तीन ओबीसी और दो दलित प्रत्याशियों को टिकट दिया है। भाजपा ने 4 आबीसी प्रत्याशी इतारे वहीं, अब भाजपा के प्रत्याशियों को देख लेते हैं कि वह अपने PDA यानि पिछड़ा दलित अगड़ा के आधार पर किस तरह से टिकट दिया गया है। भाजपा ने आठ प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा चार ओबीसी को टिकट दिया है। इसके अलावा तीन सवर्ण और एक दलित को प्रत्याशी बनाया है। सहयोगी पार्टी आरएलडी ने ओबीसी को मैदान में उतारा है। इस तरह देखा जाए तो ओबीसी और दलित पर सपा और भाजपा दोनों ने दांव लगाया है। सपा ने अल्पसंख्यकों को महत्व दिया है लेकिन भाजपा को भलीभांति पता है कि अल्पसंख्यक वोटर उसके तरफ कभी नहीं जाएंगे इसलिए BJP ने अल्पसंख्यक की जगह पर अगड़ा यानि सवर्णों को महत्व दिया है। क्यों PDA की पड़ी जरूरत अब सवाल है कि प्रदेश में आखिर PDA बनाम PDA कैसे हो गया… इसकी क्या वजह थी। दरअसल, PDA जो शब्द है वह अपने अंदर एक विशालकाय वोट बैंक को समेटा हुआ है। चलिए इसकी तह में घुसते और जानते हैं कि प्रदेश में पार्टियों को PDA की जरूरत कैसे पड़ गई…. भाजपा ने की सपा के वोट बैंक में सेंधमारी एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश में ओबीसी एक बड़ा वोट बैंक समाजवादी पार्टी का हुआ करता है और जो दलित वोट था वह बसपा का हुआ करता था। लेकिन समय बदला वक्त बदला और आज का दिन देखा जाए तो आलम यह है कि भाजपा ने गैर यादवों को अपनी तरफ करके सपा के ओबीसी वोटबैंक में सेंध लगा दी है। इसी तरह गैर जाटवों को अपनी तरफ करके बसपा के वोटबैंक में सेंध लगाई। इसका लाभ भी भाजपा को मिला। PDA के दम पर गठबंधन अब अपने इन वोटरों को पाने के लिए इंडिया गठंधन ने फिर से पिछले लोकसभा के चुनाव में PDA का नारा बुलंद किया। पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को अपनी ओर करने के लिए PDA का नारा तो दिया ही था, इसके साथ ही सपा ने संविधान और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों को उठाया और परिणाम सबके सामने था कि किस कदर लोकसभा में भाजपा की सीटे कम हुई । सपा कांग्रेस दोनों ने 80 में से 43 सीटें जीतीं और भाजपा को भारी नुकसान हुआ। PDA बनाम PDA तब से भाजपा को इस बात की चुभन थी कि इंडिया के PDA का कैसे काट निकाले… फिर लोकसभा चुनाव के ठीक बाद हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुछ प्रयोग किया। भाजपा को लगा कि जाट वोटर उससे कुछ नाराज हैं और अल्पसंख्यक I.N.D.I.A. का वोटबैंक है। ऐसे में उसने सबसे ज्यादा पिछड़ों पर फोकस किया और दलितों के साथ ही सवर्णों को साधा। वहां की बड़ी जीत के बाद अब भाजपा यूपी में ओबीसी, दलित और अगड़े प्रत्याशी उतार कर PDA की काट PDA करने की कोशिश की है। recent visitors 80