यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 9 सीट पर होने वाला उपचुनाव बेहद रोचक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस उपचुनाव में भी जहां लोकसभा चुनाव की तरह इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच कांटे की फाइट होने की संभावना जताई जा रही थी। वहीं सीट बंटवारे को लेकर फंसे पेंच ने मामला और गरमा दिया है। दोनों गठबंधनों में तमाम बैठकों के बाद भी सीट बंटवारे का मामला सॉल्व नहीं हो पाया है। यहीं वजह है कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस और बीजेपी ने निषाद पार्टी को एक भी सीट ना देकर उपचुनाव से पहले करारा झटका दे दिया है। सपा और बीजेपी के इस कदम के बाद सूबे का राजनीति पारा बढ़ गया है। चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने यूपी उपचुनाव की 9 में से 7 विधानसभा सीट पर कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने उन दो सीट पर भी उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिसको लेकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष व यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में जमे हुए हैं। संजय निषाद के बीते दिनों दिए एक बयान से राजनीति गरमा गई थी। निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने साफ-साफ शब्दों में कहा था कि कार्यकर्ताओं की मंशा है कि निषाद पार्टी अपने सिंबल पर चुनाव लड़े। भले ही उम्मीदवार बीजेपी का हो। संजय ने कटेहरी और मझवां सीट पर दावा किया था। ऐसा कहकर संजय निषाद दिल्ली निकल गए थे। कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित संजय निषाद ने दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं से मुलाकात भी की थी। इन सबके बावजूद बीजेपी ने कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। बाकी बची दो सीट में से एक आरएलडी को दी है। जबकि एक सीट पर बीजेपी में मंथन चल रहा है। वहीं बीजेपी के टिकट घोषित होने के बाद से संजय निषाद की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ गया है। फिलहाल सबकी निगाहें निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के अगले कदम पर टिकी हुई है। सपा ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका उधर इंडिया गठबंधन में भी सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पाई है। समाजवादी पार्टी ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका दे दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सभी 9 सीट पर सपा सिंबल पर प्रत्याशी उतारने का एलान कर दिया है। इसके बाद इंडिया गठबंधन में भी उपचुनाव से पहले फूट पड़ती नजर आ रही है। हालांकि अखिलेश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट कर मामला मैनेज करने की पूरी कोशिश की है। सपा कांग्रेस को दो सीट देना चाहती थी। लेकिन यूपी कांग्रेस के नेता 5 सीट पर दावा ठोक रहे थे। तमाम प्रयासों के बाद भी दोनों दलों के बीच सीट पर बात नहीं बन पा रही थी। इसी क्रम में अखिलेश यादव ने बुधवार रात को एक लंबा-चौड़ा पोस्ट कर सभी 9 सीट पर सपा के सिंबल पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग मैनपुरी की करहल, मिर्जापुर की मझवां, कानपुर की सीसीमऊ, प्रयागराज की फूलपुर, अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर, अंबेडकरनगर की कटेहरी, गाजियाबाद सदर, अलीगढ़ की खैर, मुरादाबाद की कुंदरकी और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर उपचुनाव होना है। इन 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। बीजेपी ने अभी सात सीटों पर उम्‍मीदवारों की घोषणा की है। कुंदरकी सीट से रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद सीट से संजीव शर्मा और खैर (अजा) सीट से सुरेंद्र दिलेर को ट‍िकट द‍िया गया है। जबकि करहल सीट से अनुजेश यादव, फूलपुर सीट से दीपक पटेल, कटेहरी सीट से धर्मराज निषाद और मझवां सीट से सुचिस्मिता मौर्या को कैंडिडेट घोषित किया है। recent visitors 89

प्रदेश के नगरीय निकायों में भू-जल संरक्षण और प्रबंधन के लिये 33 नगरीय निकायों में भू-जल प्लान तैयार किया

भोपाल प्रदेश के नगरीय निकायों में भू-जल संरक्षण और प्रबंधन के लिये 33 नगरीय निकायों में भू-जल प्लान तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के 24 नगरीय निकाय ऐसे हैं, जिन्होंने भू-जल प्रबंधन प्लान तैयार भी कर लिया है। भू-जल प्रबंधन प्लान में क्षेत्र के जल स्त्रोतों की पहचान कर उनके वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण के उपाय किये जा रहे हैं। इनमें क्षेत्र के बोरवेल, बावड़ियां, नदी, तालाब, कुंऍ आदि शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत पिछले दिनों आयोजित कार्यशाला में भू-जल विशेषज्ञों ने तैयार किये गये भू-जल प्रबंधन प्लान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों को जन-भागीदारी से शहरी क्षेत्रों में पौध-रोपण पर विशेष ध्यान देना होगा। वृक्ष, जल-संरक्षण के उपाय में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। प्रदेश के 418 नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों ने भू-जल प्रबंधन प्लान तैयार करने पर गहन विचार-विमर्श किया। recent visitors 64

छिंदवाड़ा की सीवरेज परियोजना का प्रायोगिक परीक्षण नवम्बर माह में होगा शुरू

छिंदवाड़ा नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा विश्व बैंक की सहायता से छिंदवाड़ा में सीवरेज परियोजना का कार्य तेज गति से चल रहा है, जो लगभग पूर्णता की ओर है। परियोजना में 20 हजार 100 घरों को जोड़ने का लक्ष्य है। लक्ष्य के विरूद्ध 15 हजार से अधिक घरों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। परियोजना की कुल लागत लगभग 237 करोड़ रुपये है। इस में 10 वर्षों का संधारण और संचालन भी शामिल है। मल-जल के उचित निस्तारण के लिए छिंदवाड़ा के सर्रा क्षेत्र में 28 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्मित किया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। सीवरेज निस्तारण को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए 257 किलोमीटर की सीवरेज लाइन बिछाई गई है। स्थायी रोड रेस्टोरेशन का कार्य भी पूर्णता की ओर है। नागरिकों को सीवरेज कनेक्शन लेने के लिए स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया है। इसका परिणाम यह हुआ कि जन-सामान्य स्वेच्छा से सीवरेज कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित हुए हैं। परियोजना की एक और विशेषता यह भी है कि सीवरेज के शोधित जल का उपयोग बागवानी, अग्निशमन, और सिंचाई जैसे कार्यों में भी किया जाएगा। आगामी नवम्बर माह से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना का प्रायोगिक परीक्षण शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।   recent visitors 58

जल्द मिलेगी महंगाई से राहत, सरकार साबुत चना और मसूर दाल को कम दाम पर उपलब्ध करवाएगी

नई दिल्ली  भारत में दालों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी बीच भारत ब्रांड के तहत सरकार देश में बाजार से 20 से 25 प्रतिशत कम कीमत पर सस्ती दाल उपलब्ध करवा रही है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अपने सब्सिडी वाले दाल कार्यक्रम का विस्तार करते हुए साबुत चना और मसूर दाल को कम दाम पर उपलब्ध करवाने की पेशकश रखी है। सरकार की इस पहल के साथ चना, मूंग और मसूर दाल को कीमतों में छूट के साथ खरीदा जा सकेगा। इन दालों की खरीदारी कॉपरेटिव रिटेल नेटवर्क और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से की जा सकेगी। साबुत चना 58 रुपये प्रति किलोग्राम, चना दाल 70 रुपये प्रति किलोग्राम, मूंग दाल 107 रुपये प्रति किलोग्राम, साबुत मूंग दाल 93 रुपये प्रति किलोग्राम और मसूर दाल को 89 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत पर खरीदा जा सकेगा। ‘भारत दाल’ के तहत मोबाइल वैन के जरिए बिक्री की जाएगी। ‘भारत दाल’ के दूसरे चरण की शुरुआत को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “यह पहल उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य पर आवश्यक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि है।” राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और केंद्रीय भंडार जैसी सहकारी समितियों और अन्य चैनलों के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। ‘भारत दाल’ पहल के दूसरे चरण के तहत सरकार मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने बफर स्टॉक से दालें बेच रही है। सरकार ने खुदरा हस्तक्षेप के जरिए वितरण के लिए 3 लाख टन चना और 68,000 टन मूंग आवंटित किया है। ‘भारत दाल’ की बिक्री दोबारा शुरू होने के साथ त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के लिए सप्लाई बढ़ने की भी उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा, सस्ती सब्जियों की बिक्री के लिए सरकार ने एनसीसीएफ और नेफेड के माध्यम से मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए रबी फसल से 4.7 लाख टन प्याज खरीदा है। सरकार ने 5 सितंबर से बफर से प्याज का निपटान शुरू किया और अब तक 1.15 लाख टन बेचा जा चुका है। एनसीसीएफ ने 21 राज्यों में 77 केंद्रों और नेफेड ने 16 राज्यों में 43 केंद्रों पर प्याज बेचा है।     recent visitors 76

2024-25 में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकेंगे

पीएम-यूएसपी योजना की छात्रवृत्ति के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर 31 अक्टूबर तक हो सकेंगे ऑनलाइन आवेदन PM-USP छात्रवृत्ति योजना के लिए सत्र 2024-25 के आवेदन प्रक्रिया आरम्भ, 31 अक्टूबर अन्तिम दिनांक 2024-25 में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकेंगे भोपाल केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग ने प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना (PM-USP) के अंतर्गत केन्द्रीय क्षेत्रीय छात्रवृत्ति योजना के लिए सत्र 2024-25 के आवेदन प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। योजना में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के पात्र विद्यार्थी, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल https://scholarships.gov.in पर 31 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। सत्र 2024-25 में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। नवीनीकरण के लिए पात्र लाभान्वित विद्यार्थियों के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार ऐसे विद्यार्थी, जिन्होंने 4 अकादमिक सत्र 2020-21, 2021-22, 2022- 23 एवं 2023-24 में योजना अंतर्गत लाभ प्राप्त किया है, वह भी अकादमिक सत्र 2024-25 में नवीनीकरण के लिए 31 अक्टूबर तक आवेदन कर सकेंगे। साथ ही ऐसे विद्यार्थी, जो पिछले सत्र 2023-24 में छात्रवृत्ति नवीनीकरण के आवेदन नहीं कर पाए थे, उन्हें भी सत्र 2024-25 में नवीनीकरण के लिए अवसर दिया गया है। नवीनीकरण के लिए पात्र विद्यार्थियों को 31 अक्टूबर तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से आवेदन करना होगा एवं इस आवेदन का अपने संस्थान और राज्य नोडल अधिकारी से सत्यापन भी कराना होगा। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन (पीएम-यूएसपी) योजना सम्बंधित समस्त जानकारी, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल https://scholarships.gov.in पर उपलब्ध है, विद्यार्थी छात्रवृत्ति के सम्बन्ध में आवश्यक सभी जानकारी का पोर्टल पर अवलोकन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन (पीएम-यूएसपी) योजना प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन (पीएम-यूएसपी) योजना केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय अन्तर्गत उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की केंद्रीय क्षेत्रीय छात्रवृत्ति योजना है। योजना का प्राथमिक उद्देश्य गरीब परिवारों के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा पाने के दौरान अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। छात्रवृत्तियॉ उच्चतर माध्यमिक/कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों के आधार पर प्रदान की जाती हैं। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने और मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 82 हजार नई छात्रवृत्तियॉ प्रदान की जाती हैं। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन (पीएम-यूएसपी) योजना में पात्र विद्यार्थियों को महाविद्यालय और विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों के पहले तीन वर्षों के लिए स्नातक स्तर पर 12 हजार रुपए प्रति वर्ष एवं स्नातकोत्तर स्तर पर 20 हजार रुपए प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाती है। व्यावसायिक पाठ्यक्रम करने वाले विद्यार्थियों को चौथे और पांचवें वर्ष में (यदि पाठ्यक्रम की अवधि पांच (5) वर्ष/एकीकृत पाठ्यक्रम है, 20 हजार रुपए प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाती है। बी.टेक और बी.ई. जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को केवल स्नातक स्तर तक ही छात्रवृत्ति दी जाती है अर्थात प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के लिए 12 हजार रुपए प्रति वर्ष तथा चौथे वर्ष में 20 हजार रुपए प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाती है। छात्रवृत्ति की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से सीधे लाभार्थियों के बैंक बचत खातों में वितरित की जाती है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना अंतर्गत छात्रवृत्ति के लिए पात्रता प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति के लिए संबंधित बोर्ड की शीर्ष 20 पर्सेंटाइल वाले विद्यार्थी, आवेदन के लिए पात्र होंगे हैं। आवेदक को नियमित डिग्री पाठ्यक्रम में अध्ययनरत होना चाहिए। आवेदक को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और संबंधित नियामक निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों/संस्थानों में पाठ्यक्रम करना चाहिए। आवेदक की सकल पैतृक/पारिवारिक आय 4 लाख 50 हजार रूपये सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए। अध्ययन के प्रत्येक वर्ष में छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए वार्षिक परीक्षा में कम से कम 50% अंक प्राप्त करने के अलावा कम से कम 75 प्रतिशत की पर्याप्त उपस्थिति बनाए रखना आवश्यक है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना अंतर्गत छात्रवृत्ति के लिए ऐसे विद्यार्थी, जो पत्राचार या दूरस्थ शिक्षा या डिप्लोमा पाठ्यक्रम में अध्ययन कर रहे हैं, वे पात्र नहीं हैं। ऐसे विद्यार्थी, जो पहले से ही राज्य द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं/शुल्क माफी एवं प्रतिपूर्ति योजनाओं सहित किसी अन्य छात्रवृत्ति योजना का लाभ उठा रहे हैं, वे भी पात्र नहीं हैं।   recent visitors 156

हिमाचल प्रदेश के शिमला के राम मंदिर में साई की मूर्ति होने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भड़क गए

शिमला हिमाचल प्रदेश के शिमला के राम मंदिर में साई की मूर्ति होने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भड़क गए और उन्होंने यहां पर होने वाले कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सीधे शिमला के जाखू मंदिर पहुंचे और यहां से संदेश जारी किया। बता दें कि शिमला के लोअर बाजार में प्रभु श्रीराम का मंदिर है। यहां पर एक तरफ साई की मूर्ति भी स्थापित की गई है। यहां पर गुरुवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पत्रकार वार्ता होनी थी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि यहां पर साई की मूर्ति भी रखी गई है तो उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। शंकराचार्य ने राम मंदिर में पूजा अर्चना भी करनी थी और उसके बाद वह मीडिया से बातचीत भी करने वाले थे। जानकारी के मुताबिक शंकराचार्य गुरुवार सुबह सबसे पहले शिमला के प्राचीन मंदिर जाखू पहुंचे। यहां उन्होंने गो ध्वज की स्थापना की और इसी दौरान उन्हें राम मंदिर में साई की प्रतिमा न हटाने की जानकारी मिली। जिसके बाद उनके स्टाफ ने जाखू मंदिर से ही एक संदेश दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि मन्दिर में साई की मूर्ति होने की वजह से शंकराचार्य राम मंदिर नहीं गए, उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया है। मूर्ति हटाने के आश्वासन के बाद गौ ध्वज हुआ स्थापित जाखू मंदिर से शंकराचार्य ने कहा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी अध्यक्ष ‌राजीव सूद व अन्य पदाधिकारियों के आश्वासन पर कि वह अतिशीघ्र साई की मूर्ति को हटा देंगे। इसी बात पर शंकराचार्य ने एक प्रतिनिधिमंडल को भेज कर एक दूसरा गौ ध्वज भी श्री राम मंदिर में गोपाल मणी व देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा स्थापित करवाया। जिस दिन गौ हत्या रुकेगी, उस दिन हमारा सारा कर्ज उतरना शुरू हो जाएगा ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने कहा कि जिस दिन गौ हत्या रूकेगी उस दिन हमारा सारा कर्ज उतरना शुरू हो जाएगा। इसी को लेकर पूरे देश में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए सरकार से मांग की जा रही है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि देश व प्रदेश की सरकारें गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करें। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज गौरक्षकों को ही वोट दें। हिन्दू समाज गौ हत्यारी पार्टियों को वोट देकर गौ हत्या का पाप न लें। recent visitors 116

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार फिर से सत्ता में आई तो यह राज्य में तबाही मचा देगी : शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को झारखंड में झामुमो नीत गठबंधन सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह ‘‘भीषण चक्रवाती तूफान ‘दाना' से भी ज्यादा घातक है।'' उन्होंने आगाह किया कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार फिर से सत्ता में आई तो यह राज्य में तबाही मचा देगी। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधानसभा चुनाव प्रभारी ने झामुमो सरकार के पांच साल के शासन के दौरान ‘‘भ्रष्टाचार, विनाश और लूट'' के लिए गठबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने पहले ही झारखंड को काफी नुकसान पहुंचाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने रांची में एक रैली में कहा, ‘‘हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ‘दाना' से भी ज्यादा घातक है। हालांकि भीषण चक्रवाती तूफान दो दिन बाद गायब हो जाएगा, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार अगर दोबारा सत्ता में आई तो तबाही मचाएगी।'' उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। झारखंड में दो चरणों में विधानसभा चुनाव 13 नवंबर और 20 नवंबर को होने वाले हैं और मतगणना 23 नवंबर को होगी। recent visitors 71