सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीमाएं लांघ रही

तमिलनाडु तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन में हुए कथित घोटाले की जांच कर रही ED यानी प्रवर्तन निदेशालय को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीमाएं लांघ रही है। उन्होंने ईडी पर संविधान के उल्लंघन के भी आरोप लगाए। कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही एजेंसी से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। दरअसल, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिका में मद्रास हाईकोर्ट की तरफ से ईडी को मिली जांच की स्वतंत्रता को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने TASMAC में ईडी को कथित 1 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के लिए खुली छूट दे दी थी। सीजेआई ने कहा, 'यह अपराध निगम के खिलाफ कैसे हो सकता है? निगम के खिलाफ आपराधिक मामला। आपका प्रवर्तन निदेशालय सभी सीमाएं लांघ रहा है। कार्यवाही पर रोक लगाएं। जब अधिकारियों के खिलाफ FIR हैं, तो वहां ईडी क्यों जा रही है। ईडी हलफनामा दाखिल करे।' उन्होंने आगे कहा, 'ईडी संविधान का उल्लंघन कर रही है। ईडी वाकई सीमाएं लांघ रही है।' इसपर एएसजी एसवी राजू ने कहा, 'यहां एक बहुत बड़ा घोटाला है। मुझे जवाब दाखिल करने दें।' सीजेआई ने यह भी कहा कि ईडी संघीय ढांचे को तबाह कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी सीमाएं लांघी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। ED की जांच मार्च में एजेंसी ने दावा किया था कि TASMAC के काम में कई अनियमितताएं मिली हैं। साथ ही एजेंसी ने कहा था कि 1000 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी भी मिली थी। ईडी ने कीमत तय करने में भी धोखाधड़ी किए जाने की बात कही थी। इसके साथ ही एजेंसी लगातार छापे भी मार रही थी। बीते सप्ताह ही रेड की गई थी और उस दौरान PMLA के तहत 10 ठिकानों की तलाशी ली गई थी। ईडी का दावा था कि उसे छेड़छाड़ किया गया डेटा मिला था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि टेंडर वितरण के समय धोखाधड़ी गई थी। इसके बाद तमिलनाडु के एक्साइज मंत्री एस मुत्थुस्वामी ने ईडी पर सरकारी अधिकारियों को परेशान करने और राजनीतिक प्रतिशोध के तहत कार्रवाई के आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि ईडी के पास अनियमितताओं को लेकर कोई सबूत नहीं है।   recent visitors 52

याचिका पर SC का केंद्र को नोटिस, पिछले साल हीटवेव से मरे 700 लोग, इस बार भी खामोश बैठे राज्य

नई दिल्ली भारत में गर्मी की लहर (हीटवेव) के बढ़ते खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में जारी किया गया, जिसमें पिछले साल हीटवेव और गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण 700 से अधिक लोगों की मौत का हवाला दिया गया। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से हीटवेव प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गृह मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने ‘पूर्वानुमान, गर्मी की चेतावनी जारी करने/पूर्व चेतावनी प्रणाली और चौबीसों घंटे निवारण हेल्पलाइन आदि के लिए सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश देने की भी मांग की।’ तोंगड़ की ओर से पेश हुए वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि पिछले साल भीषण गर्मी के कारण 700 से अधिक लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि बार-बार भविष्यवाणियां की गई हैं कि ‘हीट स्ट्रेस’ (गर्मी का प्रकोप) अधिक तीव्र होता जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। वशिष्ठ ने कहा, ‘‘पहले, भीषण गर्मी और लू की स्थिति उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत सहित तीन क्षेत्रों में रहती थी, लेकिन अब यह पूर्वी तट, पूर्व, उत्तर-पूर्व, प्रायद्वीपीय, दक्षिणी और दक्षिण-मध्य क्षेत्रों में फैल गई है और यह आईएमडी की एक रिपोर्ट में खुद कहा गया है।’’ याचिका में इस बात पर जोर डाला गया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी की गई कार्य योजना की तैयारी के लिए 2019 में राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए जाने के बावजूद, कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अनिवार्य ग्रीष्म कार्य योजना को लागू नहीं किया है। इसमें आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 35 के तहत केंद्र की वैधानिक जिम्मेदारियों का भी जिक्र किया गया है, जिसके तहत सरकार को आपदा प्रबंधन के लिए उचित उपाय करने की आवश्यकता होती है। याचिका में बढ़ते तापमान के संकट को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा गया है और गर्मी से संबंधित बीमारी के पीड़ितों को मुआवजा देने और अत्यधिक गर्मी की अवधि के दौरान कमजोर वर्गों को न्यूनतम मजदूरी या अन्य सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।   recent visitors 47

‘मंदिर एक सदी से अधिक पुराना है लेकिन दबंगों ने इस पर कब्जा कर लिया, अब अवैध निर्माण शुरू कर दिया

कराची पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो जाम कस्बे में 100 साल पुराने एक हिंदू मंदिर पर कब्जे का आरोप लगा है। हिंदू समुदाय के एक प्रतिनिधि ने गुरुवार को बताया कि जिस जमीन पर 100 साल पुराना शिव मंदिर है, उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इसके अलावा उसके आसपास निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। पाकिस्तान में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘दरावर इत्तेहाद पाकिस्तान’ के प्रमुख शिव काच्छी ने कहा, ‘मंदिर एक सदी से अधिक पुराना है लेकिन दबंगों ने इस पर कब्जा कर लिया है और मंदिर के आसपास की भूमि पर अवैध निर्माण शुरू कर दिया है। साथ ही शिव मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग और प्रवेश को बाधित किया है।’ काच्छी ने सोशल मीडिया में एक वीडियो जारी करके घटना की जानकारी दी। काच्छी ने कहा कि शिव मंदिर के कामकाज और मंदिर के आसपास लगभग चार एकड़ जमीन की देखरेख का जिम्मा एक समिति के पास था। यह स्थान कराची से लगभग 185 किलोमीटर दूर टांडो जाम कस्बे के पास मूसा खटियन गांव में है। उन्होंने कहा कि मंदिर के ऐतिहासिक महत्व के कारण सिंध विरासत विभाग की एक टीम ने पिछले वर्ष इसका जीर्णोद्वार किया था। उन्होंने बताया कि मंदिर के निकट ही समुदाय के लोगों के अंतिम संस्कार के लिए एक शमशान भी है। मंदिर में प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु भजन-कीर्तन भी करते हैं। संगठन प्रमुख ने कहा, ‘भू-माफिया ने मंदिर के आसपास की काफी भूमि पर कब्जा कर लिया है और इसके चारों ओर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।' सिंध में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कल्याण के लिए कार्य करने वाले और कानूनी सहायता प्रदान करने वाले काच्छी ने पाकिस्तान सरकार से मंदिर के चारों ओर अवैध निर्माण को रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सिंध में कई ऐतिहासिक हिंदू मंदिर हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है। बता दें कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी अब एक फीसदी से भी कम बची है। इनमें भी ज्यादातर लोग सिंध प्रांत में ही बसे हैं। ऐतिहासिक तौर पर भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ही हिंदुओं की संख्या अधिक थी।   recent visitors 59

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं का परिणाम किया जारी, अनुप्रिया 99.60% लाकर किया टॉप

जयपुर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा का रिजल्ट जारी। रिजल्ट शाम 5 बजे जारी किया गया. परिणाम की घोषणा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट्स rajeduboard.rajasthan.gov.in और rajresults.nic.in पर की जाएगी। RBSE 12वीं का रिजल्ट रोल नंबर से चेक करना बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले छात्रों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा. इस वर्ष भी आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम्स का रिजल्ट एक साथ जारी किया जाएगा। इसके साथ ही वरिष्ठ उपाध्याय (Senior Upadhyay) परीक्षा का परिणाम भी घोषित होगा। रिजल्ट जारी करने के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि बोर्ड प्रशासक व संभागीय आयुक्त महेश चंद्र शर्मा रिजल्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे। इस साल कुल 8,93,616 छात्र परीक्षा के लिए पंजीकृत थे, जिनमें साइंस संकाय से 2,73,984, कॉमर्स से 28,250, आर्ट्स से 5,87,475 और वरिष्ठ उपाध्याय पाठ्यक्रम से 3,907 छात्र शामिल हैं।   परीक्षा में शामिल हुए कुल छात्र इस साल साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम को मिलाकर कुल 8,93,616 छात्रों ने राजस्थान 12वीं बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया था। इनमें से साइंस स्ट्रीम से 2,73,984 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। कॉमर्स स्ट्रीम से 28,250 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। आर्ट्स स्ट्रीम से सबसे ज़्यादा 5,87,475 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 6 मार्च से 7 अप्रैल, 2025 तक आयोजित की गई थीं। तीनों ही स्ट्रीम का रिजल्ट एक साथ जारी किया गया है।   किस स्ट्रीम में कितने फीसदी छात्र हुए पास? साइंस (विज्ञान) स्ट्रीम में पास प्रतिशत: 94.43% कॉमर्स (वाणिज्य) स्ट्रीम में पास प्रतिशत: 99.07% आर्ट्स (कला) स्ट्रीम में पास प्रतिशत: 97.70% 12वीं आर्ट्स टॉपर्स लिस्ट अनुप्रिया 99.60% प्रगति अग्रवाल 99.60% प्रियंका 99.60% उर्मिला 99.60%   recent visitors 58

नेशनल हेराल्ड केस में 2 जुलाई से रोजाना होगी सुनवाई, बुरे फंसे Sonia और Rahul

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय ने  दिल्ली की एक अदालत को बताया कि नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी तथा अन्य के खिलाफ पहली नजर में धन शोधन का ‘प्रथम मामला बनता है। ईडी ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष मामले का संज्ञान लेने के संबंध में प्रारंभिक दलीलें पेश कीं। इस बीच, न्यायाधीश ने ईडी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अपने आरोपपत्र की एक प्रति भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को उपलब्ध कराए, जिनकी निजी शिकायत के आधार पर ईडी ने वर्तमान मामला दर्ज किया था। इस मामले में बहस अभी चल रही है। हाल ही में आरोपपत्र दाखिल करने वाली ईडी ने 2021 में अपनी जांच शुरू की थी, जब एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 26 जून 2014 को स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत पर संज्ञान लिया था। नेशनल हेराल्ड धन शोधन मामले में संघीय एजेंसी का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि आरोपी तब तक "अपराध की आय का आनंद ले रहे थे" जब तक कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नवंबर 2023 में नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त नहीं कर ली। ईडी ने आगे दावा किया कि गांधी परिवार ने न केवल अपराध से प्राप्त धन को अर्जित करके धन शोधन किया, बल्कि उस पेसे को अपने पास भी रखा। ईडी ने बताया कि नेशनल हेराल्ड के संबंध में सोनिया गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और अन्य के खिलाफ प्रथम दृष्टया धन शोधन का मामला सामने आया है। इस बीच, न्यायाधीश ने संघीय एजेंसी को शिकायतकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी को एक प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया। ईडी ने 2021 में अपनी जांच शुरू करने के बाद हाल ही में अपना आरोपपत्र दाखिल किया। पिछली 3 सुनवाई में क्या-क्या हुआ…     8 मई: कोर्ट ने कहा था- आरोपी का पक्ष सुने बिना कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकते जस्टिस विशाल गोगने ने ED की दलीलें सुनने के बाद कहा कि पिछले आदेश के अनुसार सभी आरोपियों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। लेकिन उन्हें नोटिस 8 मई को ही भेजा गया, इसलिए उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा सकते। 21 और 22 मई को पहले उनका पक्ष सुना जाएगा।     2 मई: कोर्ट ने कहा था– सुने जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई में जान फूंकता है नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को नोटिस दिया। कोर्ट में मामले की दूसरी सुनवाई हुई थी। स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा, किसी भी स्तर पर बात सुने जाने का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई में जान फूंकता है। क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? नेशनल हेराल्ड मामले में पहली शिकायत 2012 में दर्ज की गई थी। हालांकि, ईडी ने 2014 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच शुरू की। यह तब हुआ जब एक ट्रायल कोर्ट ने 2012 में स्वामी की ओर से दायर एक निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर अनियमितताओं की आयकर जांच का संज्ञान लिया था। आरोपों के अनुसार 2010 में, नेशनल हेराल्ड प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) में 1,057 शेयरधारक थे। स्वामी की शिकायत के अनुसार, गांधी परिवार ने धोखाधड़ी, आपराधिक गबन और विश्वासघात के जरिए यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) का इस्तेमाल कर एजेएल का अधिग्रहण किया। 2008 में भारी कर्ज के बोझ तले दबी एजेएल ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन बंद कर दिया। दो साल बाद वाईआईएल बना। सोनिया और राहुल गांधी के पास इसके 38-38 फीसदी शेयर थे, जो संयुक्त रूप से 78 फीसदी था। चूंकि एजेएल पर कांग्रेस का 90.25 करोड़ रुपए बकाया था, इसलिए पार्टी ने 50 लाख रुपए में इस लोन को वाईआईएल को हस्तांतरित कर दिया। इस हस्तांतरण के साथ ही एजेएल का नियंत्रण वाईआईएल को हस्तांतरित हो गया, अब इस पर अब एजेएल का 99 प्रतिशत स्वामित्व है। ये सारे बदलाव राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) या किसी अन्य नियामक संस्था की निगरानी के बगैर किया गया। जिससे इस लेनदेन पर सवाल उठने लगे। recent visitors 55

क्या एक दूसरे से खेलेंगे भारत-पाकिस्तान?, आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और उसे सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी। दोनों देशों के बीच अब तनावभरी शांति है। इस तनाव का असर खेल पर भी पड़ा है। इस बीच इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) का जुलाई में सिंगापुर में वार्षिक सम्मेलन होना है। यह 17 जुलाई से 20 जुलाई तक चलेगा। इसमें आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसी अटकलें लग रही थीं कि भारत सितंबर में एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में नहीं खेलेगा जिसमें पाकिस्तान को भी हिस्सा लेना है। हालांकि, बीसीसीआई ने इन अटकलों को खारिज किया है। अगले महीने श्रीलंका में होने वाला महिला एशिया कप इस वजह से रद्द हो चुका है कि उसमें भारत हिस्सा नहीं लेगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के वार्षिक सम्मेलन के दौरान खेल की संचालन संस्था की प्रतियोगिताओं में भारत-पाक क्रिकेट के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना है जो 17 से 20 जुलाई तक सिंगापुर में होगी। दोनों देश केवल उन्हीं प्रतियोगिताओं में ही एक-दूसरे के साथ खेलते हैं जिसमें कई टीमें खेलती हैं। लेकिन हाल में हुए सैन्य संघर्ष ने आईसीसी प्रतियोगिताओं में दोनों के बीच मुकाबले के भविष्य को लेकर अटकले लगाई जा रही हैं जिसकी शुरूआत अगले साल भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाले टी20 विश्व कप से होगी। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘यह मुद्दा वार्षिक सम्मेलन में चर्चा के लिए आना तय है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के आईसीसी नॉकआउट में नहीं खेलने की संभावना कम है, लेकिन उन्हें एक ही ग्रुप में नहीं रखना आईसीसी प्रतियोगिताओं में आम बात रही है और इसकी ही संभावना है।’   recent visitors 65

कांग्रेस के कद्दावर नेता आनंद शर्मा ने नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ, जानें क्या कहा

नई दिल्ली पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से शशि थरूर लगातार मोदी सरकार के पक्ष में बात कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी द्वारा इशारों में समझाने के बाद भी थरूर ने अपनी बात को सार्वजनिक रूप से रखना जारी रखा। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भी मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की है। शर्मा ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की पोल खोलने और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत की राय रखने के लिए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजने के फैसले को महत्वपूर्ण पहल बताया है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसे एक भटकाने वाली योजना के रूप में रेखांकित किया था। कांग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए चार नामों में से केवल आनंद शर्मा को ही केंद्र सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है। आने वाले दिनों में शर्मा अपनी टीम के साथ मिस्र, कतर और इथियोपिया की यात्रा करेंगे।  बात करते हुए शर्मा ने कहा, "हमारा क्षेत्र दशकों से सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित है। ऐसे में इसे लेकर वैश्विक जनमत को संवेदनशील बनाना महत्वपूर्ण है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई द्वारा पोषित आतंकवादी संगठनों ने भारत का बहुत खून बहाया है। हमने इस आतंकवाद की एक बड़ी कीमत चुकाई है। लेकिन इसके बाद भी हमने अपनी प्रतिक्रियाओं में संयम बरता.. आतंकवाद को लेकर बहुत कम देश ऐसे होते हैं, जो संयमित हो सकते हैं .. लेकिन भारत ने ऐसा किया। पहलगाम के बाद हमने जवाबी कार्रवाई की लेकिन यह एक मापी हुई कार्रवाई थी, जिसे हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था।" आपको बता दें शशि थरूर के बाद अब आनंद शर्मा ने भी ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की कार्रवाई पर सरकार के प्रति नरम रुख अपनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर केंद्र पर हमलावर बनी हुई है। बुधवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सर्वदलीय सांसदों को विदेश भेजने के फैसले को केंद्र सरकार द्वारा सवालों से बचने और ध्यान भटकाने का तरीका बताया। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि 1950 के बाद हर अक्टूबर-नवंबर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का दौरा करता था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में इस परंपरा को खत्म कर दिया। अब जबकि वैश्विक स्तर पर वह हताश हैं और उनकी छवि को धक्का लग चुका है तब वह दोबारा से सर्वदलीय सांसदों को विदेशों में भेजने का फैसला ले रहे हैं। recent visitors 72