मध्य प्रदेश बिजली की कुल आवश्यकता की 50 फीसदी पूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा, सरकार ने बनाई कार्ययोजना

भोपाल मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी बिजली की आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम रही है। आठ हजार मेगावाट सौर ऊर्जा की परियोजना मुरैना, शिवपुरी, सागर और धार में स्थापित करने पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सहमति बनी है। आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर में साढ़े सात हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। बता दें कि प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है। इसमें से सौर ऊर्जा से सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति हो रही है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 में जब 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी, तब आधी बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो जाए। इसे ध्यान में रखते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने कार्ययोजना बनाई है। इस योजना के तहत आठ हजार मेगावाट सौर ऊर्जा की परियोजना मुरैना में स्थापित की जाएगी। इस सौर ऊर्जा संयंत्र से बनने वाली बिजली का छह माह उपयोग उत्तर प्रदेश तो शेष छह माह मध्य प्रदेश करेगा। साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। इसके लिए 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी सौ मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में मध्य प्रदेश में तेजी से काम हो रहा है। कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त हो।– मनु श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग recent visitors 63

जापान को 2035 तक प्रतिदिन 17.75 मिलियन घंटे का नुकसान होगा : रिपोर्ट

टोक्यो एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जापान को 2035 तक 3.84 मिलियन श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि प्रतिदिन 17.75 मिलियन घंटे का नुकसान होगा। जिजी प्रेस ने पर्सोल रिसर्च एंड कंसल्टिंग कंपनी और चुओ यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में दावा किया है, ”2023 की तुलना में श्रमिकों की कमी 1.85 गुना बढ़ने का अनुमान है, ऐसा इसलिए क्योंकि देश में कामगारों के पक्ष में कार्यशैली सुधार नीति बनाई गई है। ये कार्य और जीवन के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए किया गया है, इसकी वजह से ही व्यक्तिगत कार्य घंटों में कमी आई है।” समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने जिजी प्रेस के हवाले से बताया कि मजदूरों की जरूरत जो 2023 में 67.47 मिलियन थी वो 2035 में बढ़कर 71.22 मिलियन होने की उम्मीद है। इसमें महिलाएं, बुजुर्ग कर्मचारी और विदेशी नागरिक शामिल होंगे। इसके साथ ही विदेशी श्रमिकों की संख्या में भी वृद्धि होने का अनुमान है और ये 2.05 मिलियन से बढ़कर 3.77 मिलियन हो जाएगा। हालांकि, 2035 तक प्रति व्यक्ति औसत काम के घंटों में 8.8 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण कामगारों की ढलती उम्र और जापानी सरकार द्वारा कार्य शैली सुधार नियम है। श्रमिकों की कमी से निपटने के लिए रिपोर्ट में कार्यशैली सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।   recent visitors 86

किसान नरवाई ना जलाएं, सुपर सीडर का उपयोग करें, 25 अक्टूबर से होगी सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी

रबी के लिए किसानों को समय से मिलें उत्तम उर्वरक और बीज : एपीसी सुलेमान प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता डीएपी के समान ही गुणवत्ता युक्त है एनपीके किसान नरवाई ना जलाएं, सुपर सीडर का उपयोग करें 25 अक्टूबर से होगी सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) ने खरीफ-2024 के संबंध में भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग की बैठक ली भोपाल रबी फसलों के लिए किसानों को समय से उत्तम उर्वरक और बीज मिलना सुनिश्चित किया जाए। प्रदेश में सभी उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। डीएपी के समान ही एनपीके गुणवत्ता युक्त है। इसमें फसलों के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व हैं। किसान नरवाई ना जलाएं, सुपर सीडर का उपयोग करें। प्रदेश में कहीं भी खाद, बीज का अवैध भंडारण, कालाबाजारी अथवा अमानक विक्रय न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। समर्थन मूल्य पर सोयाबीन विक्रय के लिए किसानों को हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाए। एपीसी मोहम्मद सुलेमान ने यह निर्देश आज नर्मदा भवन में संपन्न भोपाल एवं नर्मदापुरम संभागों के लिए खरीफ-2024 की समीक्षा एवं रबी 2024- 25 की तैयारियों के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में कृषि, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, उद्यानिकी आदि विभागों के कार्यों की समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव सहकारिता अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव मत्स्य पालन डी.पी. आहूजा, प्रमुख सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन, सचिव कृषि एम. सेलवेंद्रन, संभागायुक्त भोपाल संजीव सिंह, संभागायुक्त नर्मदापुरम के.जी. तिवारी, संबंधित जिलों के कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। विभिन्न योजनाओं के सफल हितग्राहियों ने अपने अनुभव भी बैठक में साझा किए। एपीसी सुलेमान ने कहा कि प्रदेश में सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन का कार्य जारी है। आगामी 25 अक्टूबर से सोयाबीन की खरीदी की जाएगी, जो 31 दिसंबर तक चलेगी। खरीदी केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें। सोयाबीन खरीदी के लिए किसानों को टोकन दिए जाएं, जिससे उन्हें अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। किसानों की सुविधा के लिए आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त केंद्र एक-दो दिन में खोल दिए जाएंगे। खरीदी में शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों का प्रयोग किया जाए। सचिव कृषि सेलवेंद्रन ने बताया कि कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है। दालों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में 24 प्रतिशत उत्पादन के साथ प्रथम है। अनाजों के उत्पादन में 12% उत्पादन के साथ देश में द्वितीय और तिलहन के उत्पादन में 20% उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश की कृषि विकास दर 19 प्रतिशत है। देश में मध्यप्रदेश के सर्वाधिक 16.5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती होती है। उन्होंने बताया कि रबी 2024-25 के लिए प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। रबी के लिए प्रदेश में कुल 16.43 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें 6.88 यूरिया, 1.38 डीएपी, 2.70 एनपीके, 4.08 डीएपी +एनपीके, 4.86 एसएसपी और 0.61 लाख मीट्रिक टन एमओपी उर्वरक उपलब्ध है। प्रदेश में रबी फसलों के अंतर्गत मुख्य रूप से चंबल एवं ग्वालियर संभागों में सरसों 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, सागर संभागों में चना, मसूर 20 अक्टूबर से 10 नवंबर तक, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, चंबल, सागर, नर्मदापुरम में गेहूं 1 नवंबर से 30 नवंबर तक तथा जबलपुर, रीवा एवं शहडोल संभागों में गेहूं एवं चना की फसलों की बोनी 15 नवंबर से 31 दिसंबर तक की जाती है। एपीसी सुलेमान ने सभी कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि वे सुनिश्चित करें कि उनके जिलों में नरवाई न जलाई जाए। किसानों को सुपर सीडर के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाए। इसके प्रयोग से फसल कटाई के साथ ही बोनी भी हो जाती है। इससे खेतों में बची हुई नमी का अगली फसल में उपयोग हो जाता है, कम बीज लगता है और फसल पहले आ जाती है, जो किसानों के लिए अत्यधिक लाभदायक है। सभी जिलों में सुपर सीडर मशीन की किसानों को उपलब्धता सुनिश्चित करायें। अपर मुख्य सचिव सहकारिता अशोक बर्णवाल ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में रबी फसलों के लिए भी किसानों को शासन की शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण योजना का लाभ दिए जाना सुनिश्चित करें। हर जिले में "वन स्टॉप सेंटर" बनाए जाएं, जहां किसानों को सारी सुविधाएं मिल सकें। समिति स्तर पर अल्पावधि ऋणों की वसूली बढ़ाई जाए। जो प्राथमिक सहकारी समितियां ठीक से कार्य नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने निर्देश दिए की पैक्स के ऑडिट का कार्य अक्टूबर तक पूर्ण किया जाए तथा नवीन पैक्स के गठन की कार्रवाई की जाए। बताया गया कि ऋण महोत्सव के अंतर्गत आगामी 6 नवंबर तक किसानों को अ-कृषि ऋण वितरित किए जा रहे हैं। मत्स्य विभाग की समीक्षा में प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा ने बताया कि मध्यप्रदेश में 4.42 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र, जिसमें से 99% भाग में मत्स्य पालन किया जाता है प्रदेश में 2595 मछुआ समितियां पंजीकृत हैं, जिनसे 95417 मत्स्य पालक जुड़े हुए हैं। मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति मत्स्य उपलब्धता 7.5 किलोग्राम है। प्रदेश का पहला इंटीग्रेटेड एक्वापार्क भदभदा रोड भोपाल में स्थित है। प्रदेश में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना और मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना संचालित है। सभी योजनाओं में निर्धारित लक्ष्य प्राप्ति के निर्देश कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा दिए गए। मछुआ पालन की नई तकनीकी के इस्तेमाल के लिए मत्स्य पालक किसानों को प्रेरित किया जाए। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा में बताया गया कि भारत में दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। प्रदेश में 591 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध का उत्पादन होता है। राष्ट्र का 9% दुग्ध उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है। मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 644 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 459 ग्राम प्रतिदिन का है। प्रदेश में 7.5% पशुधन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.05 का है। वर्ष 2019 की पशु संगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में गौ-वंश पशु संख्या देश में तीसरे स्थान पर 187.50 लाख है, वही भैंस वंश पशु संख्या चौथे स्थान पर 103.5 लाख है। प्रदेश में पशुओं के उपचार के लिए चलित पशु चिकित्सा वाहन (1962) संचालित है, जो कि स्थान पर जाकर पशुओं का इलाज करते हैं। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीकी से … Read more

स्कॉट बोलैंड ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम में जगह बनाने की पूरी कोशिश करेंगे

नई दिल्ली गर्मियों की शुरुआत में चोटों से परेशान रहने के बाद स्कॉट बोलैंड मैदान में वापसी करने के लिए तैयार हैं। वो शेफील्ड शील्ड में वापसी करने के साथ और ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में जगह बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। भारत के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी श्रृंखला से पहले स्कॉट बोलैंड अपनी फॉर्म और ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं। बोलैंड एमसीजी में शील्ड में वापसी करेंगे, जहां उनकी विक्टोरिया टीम स्टार-स्टडेड मुकाबले में न्यू साउथ वेल्स से भिड़ेगी। 35 वर्षीय यह तेज गेंदबाज चोटिल होने के कारण टीम से बाहर है। लेकिन अब यह तेज गेंदबाज टीम में जगह बनाने और यह साबित करने के लिए बेताब है कि वह भारत के खिलाफ खेलने का मौका पाने का हकदार है। बता दें, टीम इंडिया के खिलाफ स्कॉट पहले ही बड़े मैचों में अपनी क्षमता दिखा चुके हैं। बोलैंड ने क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू से कहा, “पहले मैच में वापसी के बाद शायद थोड़ी थकान महसूस हो, लेकिन कोई बात नहीं। मुझे पता है कि एक बार जब मैं अपने लय में आ जाऊंगा तो चीजें बदल जाएंगी। मैंने पिछले चार या पांच महीनों में अपने शरीर पर काफी काम किया है। मुझे शील्ड गेम में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होना चाहिए।” बोलैंड की वापसी पर सबकी नजर रहेगी, खासकर तब जब वह ऑस्ट्रेलिया में भारत की पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के चौथे टेस्ट मैच, एमसीजी में होने वाले बॉक्सिंग डे टेस्ट के लिए संभावित कॉल-अप पर नजर रखते हैं। उन्होंने 2022 एशेज में इंग्लैंड के खिलाफ इसी मैदान पर 6-7 का रिकॉर्ड बनाया था। उन्हें उम्मीद है कि वह भारत के खिलाफ भी वही कारनामा दोहराएंगे। बोलैंड की सबसे हालिया अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के यूके दौरे के दौरान हुई थी, जहां उन्होंने टीम को भारत के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल जीतने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।     recent visitors 83

भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम आज 12वें सुल्तान जोहोर कप के शुरुआती मैच में जापान से भिड़ेगी

जोहोर भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम शनिवार को यहां 12वें सुल्तान जोहोर कप के शुरुआती मैच में जापान से भिड़ेगी तो उसका लक्ष्य पूर्व दिग्गज गोलकीपर और अपने सम्मानित कोच पीआर श्रीजेश से प्रेरणा लेना होगा। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता श्रीजेश के लिए कोच के तौर पर यह पहला कार्यकाल होगा। उन्होंने इस साल अगस्त में पेरिस ओलंपिक के बाद खिलाड़ी के तौर पर खेल को अलविदा कहा था। भारत ने मई 2023 में जूनियर एशिया कप में अपने आखिरी मुकाबले में जापान पर 3-1 से जीत हासिल की और 2022 के सुल्तान जोहोर कप में भी इस टीम को 5-1 से हराया था। कप्तान आमिर अली ने यहां जारी विज्ञप्ति में कहा, ‘‘टीम नए मुख्य कोच पीआर श्रीजेश के नेतृत्व में अच्छी ट्रेनिंग कर रही है और हम उनके साथ अपना पहला टूर्नामेंट खेलने के लिए उत्साहित हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पिछली बार जर्मनी से हारने के बाद, हम अपने खिताब का बचाव नहीं कर सके थे। इस बार हमारी तैयारी अच्छी है और हम प्रतियोगिता में किसी भी टीम से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।’’ जापान के बाद भारतीय टीम 20 अक्टूबर को ग्रेट ब्रिटेन, 22 अक्टूबर को मेजबान मलेशिया और फिर 23 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया से खेलेगी। भारतीय टीम ग्रुप चरण में 25 अक्टूबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना आखिरी मुकाबला खेलेगी। लीग चरण में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें 26 अक्टूबर को फाइनल में भिड़ेंगी। भारतीय उपकप्तान रोहित ने कहा, ‘‘हम सुल्तान जोहोर कप से पहले सर्वश्रेष्ठ स्थिति में पहुंचने के लिए पिछले कुछ दिनों से कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस बार टीम में कई नए खिलाड़ी हैं जो मैदान पर अपनी क्षमता दिखाने के लिए उत्साहित हैं। सभी खिलाड़ी अपने खेल में सुधार के साथ एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हमारी नजरें इस प्रतियोगिता के साथ नवंबर में मस्कट में खेले जाने वाले जूनियर पुरुष एशिया कप पर भी हैं।’’     recent visitors 119

महाकुंभ से पहले प्रयागराज एयरपोर्ट पर दीप्तिमान 84 स्तंभों की स्थापना होगी

प्रयागराज महाकुंभ को दिव्य स्वरूप देने के लिए कुंभ नगरी के कोने-कोने में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की स्थापना की जा रही है । शहर की सड़क, चौराहे और शहर की प्रमुख दीवारें सज संवर रही हैं। प्रयागराज का सिविल एयरपोर्ट भी इससे अछूता नहीं है। यहां दीप्तिमान 84 स्तंभों की स्थापना इसी का हिस्सा है। सृष्टि जीवन का क्रमिक विकास है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह 84 लाख योनियों से होकर गुजरता है। प्रयागराज के सिविल एयरपोर्ट में सृष्टि के इसी विकास क्रम को 84 आलोकित स्तंभों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन डिवीजन इसकी कार्यदाई संस्था है। सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राना का कहना है कि एयरपोर्ट के बाहर सड़क के दोनो तरफ इन स्तंभों की स्थापना की जा रही है। 21 करोड़ 30 लाख के बजट से ये विशेष आलोकित स्तंभ तैयार हो रहे हैं। इसके लिए 10 करोड़ की पहली किश्त जारी की जा चुकी है। नवंबर तक इसका निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। देश विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को ये स्तंभ आकर्षित करेंगे। एयरपोर्ट टर्मिनल के सामने से जाने वाली सड़क में ये 84 स्तंभ स्थापित किए जाएंगे। ह स्तंभ की लंबाई 6 मीटर होगी और यह खास स्टोन से बनाया जा रहा है । प्रोजेक्ट मैनेजर के मुताबिक लगभग 525 मीटर की लंबाई में सीधी रेखा में स्थापित होने वाले इन 84 स्तंभों में जीव 84 लाख योनियों का संकेत होगा, जिससे सृष्टि का सार होगा। एक स्तंभ से दूसरे स्तंभ की दूरी 12 मीटर रखी गई है। हर स्तंभ में भगवान शिव के सहस्त्र नाम भी लिखे जाएंगे। रात के समय इन स्तंभों में स्पेशल लाइटिंग का इंतजाम किया है ताकि अंधेरे में भी ये उतनी ही चमक के साथ आलोकित होते रहें। स्तंभ के पास फूलदार सजावटी पौधे भी रोपित किए जाएंगे। नजदीक बैठने के लिए विशिष्ट बेंच का भी निर्माण किया जायेगा।     recent visitors 78

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं का शुभारंभ, तीन पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

नई दिल्ली राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार ने इस्पात उत्पादन में हरित हाइड्रोजन के उपयोग के लिए तीन पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे पहले नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस पहल के तहत इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने  एक बयान में कहा कि पायलट परियोजनाओं के माध्यम से परियोजना का लक्ष्य इस्पात निर्माण में हरित हाइड्रोजन का उपयोग करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों की पहचान करना है। ये परियोजनाएं हरित हाइड्रोजन आधारित इस्पात निर्माण प्रक्रियाओं के सुरक्षित संचालन को प्रदर्शित कर सकती हैं, तकनीकी व्यवहार्यता और दक्षता स्थापित कर सकती हैं और कम कार्बन वाले लौह एवं इस्पात उत्पादन को सक्षम करने के लिए उनकी आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन कर सकती हैं। प्राप्त प्रस्तावों के मूल्यांकन के आधार पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस्पात क्षेत्र में कुल तीन पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके लिए केंद्र सरकार की कुल वित्तीय सहायता 347 करोड़ रुपये है। इन पायलट परियोजनाओं के अगले 3 वर्षों में चालू होने की संभावना है, जिससे भारत में ऐसी प्रौद्योगिकियों का विस्तार होगा। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन आंदोलन 4 जनवरी 2023 को शुरू किया गया था। वित्त वर्ष 2029-30 तक इसके लिए 19,744 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इस कदम से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी, डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा, जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत को हरित हाइड्रोजन में प्रौद्योगिकी और बाजार का नेतृत्व करने में मदद मिलेगी।   recent visitors 173