पति को शादी के बाद मिलने वाली सेक्स की छूट को खत्म किया जाता है तो एक नए अपराध का जन्म हो जाएगा- SC

नई दिल्ली मैरिटल रेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पतियों को पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने की छूट देने वाले प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को लेकर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान सवाल किया कि क्या अगर पति को शादी के बाद मिलने वाली सेक्स की छूट को खत्म किया जाता है तो एक नए अपराध का जन्म हो जाएगा? सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिशअरा की बेंच ने आईपीसी (अब बीएनएस) की धारा 375 के अपवाद वाले क्लॉज पर सुनवाई की। इसके तहत अगर पत्नी नाबालिग नहीं है तो उसके साथ पति के शारीरिक संबंध बनाने को मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा, आपका कहना है कि मैरिटल रेप से जुड़े अपवाद को खत्म करने पर नए अपराध का जन्म नहीं होगा। अपवाद के चलते अगर कोई महिला 18 साल से ज्यादा उम्र की है तो शादी के बाद पति को उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की छूट मिलती है। मान लीजिए अगर इस अपवाद को खत्म कर दिया जाता है तो क्या नया अपराध पैदा हो जाएगा? क्या कोर्ट को स्वतंत्र रूप से इस अपवाद की संवैधानिक वैधता जांचने का अधिकार है? कुछ याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील करुणा नुंडी ने कहा कि इस तरह के सवाल निजी विचार बनाम भारत सरकार हो सकते हैं। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि संवैधानिक आदेशों में स्त्रीविरोध और पुरुषवाद का कोई स्थान नहीं है। सीजेआई ने कहा, अगर पति को मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया जाता है तो यह अपराध सामान्य प्रावधानों के अंतरगत ही आएगा या फिर कोर्ट को अलग अपराध का निर्माण करना होगा। सीजेआई ने कहा, उनका कहना है कि वैवाहिक संबंध में आने के बाद पति को खुद ही शारीरिक संबंध बनाने की छूट मिल जाती है। लेकिन इन तथ्यों को भी मानते हैं कि सहमति जरूरी है। बेंच ने इस बात की भी आशंका जताई की इस अपवाद को खत्म करने पर वैवाहिक संस्था में भी अस्थिरता आने की गुंजाइश है। इसपर नुंडी ने कहा, शादी सांस्थानिक नहीं बल्कि निजी होती है। इसको इस तरह से हिलाया नहीं जा सकता। वहीं सीनियर वकील कोलिन गोंसालवीस ने कहा कि कई अन्य देशों में इस तरह के अपवाद संवैधानिक नहीं हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग भी किया जा सकता है क्योंकि यह साबित करना ही मुश्किल हो जाएगा कि शारीरिक संबंध सहमति से बनाया गया था या फिर असहमति से। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया जिसमें याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति दी गई थी। recent visitors 85

22 बिलियन डॉलर की वैल्यू वाली बायजू की कीमत अब ‘शून्य’ है, रवींद्रन ने दुबई में अपने घर से की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली मुसीबतों में घिरी एडटेक स्टार्टअप बायजू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस तरह की अफवाहों का बाजार गरम है कि कंपनी के फाउंडर और सीईओ बायजू रवींद्रन देश छोड़कर दुबई भाग गए हैं। इस बीच बायजू रवींद्रन चार साल में पहले बार मीडिया से रूबरू हुए। दुबई से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह भागकर दुबई नहीं आए हैं और जल्दी ही स्वदेश लौटेंगे। बायजू पिछले करीब एक साल से दुबई में ही रह रहे हैं। इस बीच उनकी कंपनी को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कभी देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप रही बायजू की वैल्यू आज जीरो हो चुकी है। उस पर भारी कर्ज है। 44 साल के बायजू रवींद्रन ने दुबई में अपने घर से कहा, 'लोगों का यह सोचना दुर्भाग्यपूर्ण है कि मैं भागकर दुबई आया हूं। मैं अपने पिता के इलाज के लिए पिछले एक साल से यहां हूं। लेकिन मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि मैं भागकर नहीं आया हूं। मैं भारत आऊंगा और मैं स्टेडियमों को भरकर रख दूंगा। इस समय अभी तय नहीं हुआ है लेकिन जल्दी ही ऐसा होगा। मैं इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता निकाल लूंगाI' जीरो हो गई वैल्यू कुछ साल पहले बायजू 22 अरब डॉलर की वैल्यू के साथ देश की सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप थी लेकिन आज इसकी कीमत जीरो रह गई है। बायजू रवींद्रन ने इसके लिए निवेशकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब वह कंपनी को आगे बढ़ा रहे थे तब निवेशक उनके साथ खड़े थे लेकिन संकट आते ही उन्होंने मुंह मोड़ लिया। बायजू पर आज भारी कर्ज है, उसे रेगुलेटरी जांच से गुजरना पड़ रहा है और उनसे अपनी फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में देरी की है। इससे कंपनी की वित्तीय हालत और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। बायजू रवींद्रन ने कहा कि दिसंबर 2021 में जब कंपनी पर संकट आया तो उसके बाद से निवेशकों ने कोई निवेश नहीं किया है। Prosus समेत कुछ निवेशकों ने पिछले 4-5 साल में कंपनी में कोई निवेश नहीं किया है। यह संकट कैश की कमी के चलते शुरू हुआ। आज कंपनी कई तरह की परेशानियों से घिरी है। कई कर्जदारों ने उसे एनसीएलटी में घसीट रखा है। कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं सब कारणों से इन अफवाहों को हवा मिली है कि कार्रवाई से बचने के लिए बायजू रवींद्रन दुबई भाग गए हैं। recent visitors 79

महाकाल मंदिर में सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे की विवादास्पद पूजा: नियमों की अनदेखी

Worship of CM Eknath Shinde’s son in Mahakal temple: Question on ignoring rules उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आम और खास सभी के लिए एक ही नियम का दावा किया जाता रहा है, लेकिन वीआईपी कल्चर और प्रभावशाली लोगों के नियम तोड़ने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं. अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने परिवार सहित गर्भगृह में पूजा अर्चना कर मंदिर के नियम को तोड़ा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले में बिना अनुमति दर्शन के लिए गर्भगृह में जाने का दावा किया है. गुरुवार (17 अक्तूबर) की शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और मुंबई से सांसद श्रीकांत शिंदे परिवार के साथ महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने वीआईपी पॉइंट के जरिए दर्शन के लिए अधिकारियों से आग्रह किया. इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर समिति के बड़े अधिकारी के पीए के साथ श्रीकांत शिंदे का परिवार गर्भगृह तक पहुंच गया. इस दौरान उनके साथ उज्जैन जिले के एक बीजेपी विधायक भी मौजूद रहे. यहां सभी ने उस समय गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना की, जब भगवान महाकाल का भांग से श्रृंगार चल रहा था. इस घटना के बाद हंगामा मच गया है. कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, “भगवान के दरबार में भी बीजेपी सरकार आम और खास के बीच मतभेद कर रही है. यह न्यायोचित नहीं है.” महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने क्या कहा?महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में नियम सबके लिए बराबर है. उन्होंने कहा, किसी को भी अनुमति नहीं दी गई है कि वह गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना करे. प्रोटोकॉल के तहत जिन्हें अनुमति है, केवल वही प्रवेश कर सकते हैं. इनमें महामंडलेश्वर, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित वीआईपी शामिल हैं. महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ का भी कहना है कि उन्होंने भी किसी को गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी थी. महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश बंद हुए कई महीने हो गए हैं. महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. ऐसे में सभी को गर्भगृह से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. यदि महाकालेश्वर मंदिर समिति गर्भगृह दर्शन शुरू करवा देती है, तब भी 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को अंदर से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. जबकि गर्भगृह में जब दर्शन शुरू होते हैं तो बाहर से श्रद्धालुओं के दर्शन में परेशानी होती है. इस वजह से मंदिर समिति ने गर्भगृह दर्शन को पूरी तरह बंद कर रखा है. पहले 750 रुपये की रसीद कटवा कर श्रद्धालुओं को अंदर प्रवेश दिया जाता था. ऐसा नहीं है कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में जाकर पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने नियम तोड़ा है. पहले भी कई बार इस तरह की तस्वीरें आ चुकी हैं. मंदिर समिति द्वारा आम लोगों के गर्भगृह में प्रवेश की कोशिश करने पर भी एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, लेकिन रसूखदार लोगों पर अभी तक महाकालेश्वर मंदिर समिति का नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि शिव भक्तों में भी मंदिर समिति की दोहरी नीति को लेकर आक्रोश है. महाकालेश्वर मंदिर के भक्त राजेश प्रजापति का कहना है कि मंदिर में सभी के लिए नियम बराबर होना चाहिए. recent visitors 195

इंदौर के विजयनगर में फ्लैट से नीचे गिरी थी MBA छात्रा, पुलिस को बताया मोबाइल पर बात करते समय फिसला पैर

 इंदौर  विजयनगर थाना क्षेत्र में गुरुवार तो एमबीए की छात्रा तीसरी मंजिल से गिर गई। छात्रा को कमर और हाथों में चोट आई है। बयानों में छात्रा ने कहा मोबाइल पर बात करते समय पैर फिसल गया था। उसने विवाद से इनकार कर दिया है। टीआइ सीके पटेल ने बताया कि घटना स्कीम-54 की है। युवती का नाम नंदनी धनोतिया निवासी नेहरूनगर है। नंदनी एमबीए की पढ़ाई कर रही है। दोपहर को वह दोस्त दीपेश जैन से मिलने गई थी। अचानक तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई। गनीमत रही नंदनी नीचे बनी दुकान के शेड गिरी, जिससे उसकी जान बच गई। युवती के गिरने से लोग घबरा गए। इंदौर में हिंदू लड़कियों के साथ फ्लैट में मिले फैजान को पुलिस ने किया गिरफ्तार, नशा करवाता थाइंदौर में हिंदू लड़कियों के साथ फ्लैट में मिले फैजान को पुलिस ने किया गिरफ्तार, नशा करवाता था लोगों ने तुरंत ही पुलिस को मामले का सूचना दी। उसके बाद उसको लेकर अस्पताल पहुंच गए, जहां उसका इलाज चल रहा है। नंदनी के कमर और हाथों में चोट आई है। पैर फिसलने से नीचे गिरी लड़की टीआइ ने जानकारी दी कि नंदनी ने बयान में बताया कि दीपेश उसी के कॉलेज का छात्र है। वह उसका सीनियर है।वह उससे मिलने के लिए गई थी। इस दौरान मोबाइल पर फोन आ गया, तो वह बातचीत कर रही थी। मेरा ध्यान न होने की वजह से पैर फिसल गया और नीचे गिर गई। हादसे के समय रूम में था दीपेश दीपेश जैन ललितपुर का रहने वाला है। वह यहां किराये से रहकर पढ़ाई कर रहा है। उसने पुलिस को जानकारी दी कि हादसे के समय वह रूम में ही मौजूद था। नंदनी के मोबाइल पर कॉल आने से पहले वह बातचीत कर रहे थे। recent visitors 95

इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट

इजरायल मानवीय मिशनों को गाजा तक पहुंचने की अनुमति दे:डब्ल्यूएचओ लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत :स्वास्थ्य मंत्रालय इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट जिनेवा/ बेरूत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इजरायल से आग्रह किया है कि वह उत्तरी गाजा तक मानवीय मिशनों को महत्वपूर्ण खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति पहुंचाने की अनुमति दें, जो वहां जारी हिंसा के कारण पहुंच नहीं पा रही हैं। डब्ल्यूएचओ और उसके सहयोगियों ने  पोलियो टीकाकरण अभियान का दूसरा दौर शुरू किया, जिसका लक्ष्य पाँच लाख से ज़्यादा बच्चों को पोलियो से बचाना है।डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने  ‘एक्स’ पर लिखा, “दो दिनों के टीकाकरण के बाद मध्य गाजा में पोलियो वैक्सीन की दूसरी खुराक पाने वाले बच्चों की कुल संख्या 156,943 हो गयी है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल, जारी हिंसा से करीब 90 प्रतिशत बच्चों को टीका लगाने के अभियान के लक्ष्य को खतरा है। प्रमुख ने बताया कि पोलियो के टीकों के अलावा, बच्चों को उनकी प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिए विटामिन ए की खुराक दी जा रही है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर में उत्तरी गाजा में संयुक्त राष्ट्र के 54 निर्धारित मिशनों में से केवल एक ही सफलतापूर्वक पूरा हुआ है, अन्य संघर्ष के कारण रद्द कर दिए गए हैं या बाधित हैं। लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत : स्वास्थ्य मंत्रालय  लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजरायली हवाई हमलों के कारण उनके देश में 2,367 लोग मारे गए हैं वहीं 11,088 घायल हो गए हैं। ये आंकड़ा 8 अक्टूबर 2023 से अब तक का है।  मंत्रालय ने बताया कि 15 अक्टूबर को लेबनान के अलग-अलग इलाकों में हुए इजरायली हवाई हमलों में मृतकों की संख्या 17 और घायलों की संख्या 182 हो गई। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की मानें तो, दक्षिण में तीन लोग मारे गए और 92 लोग घायल हो गए। नबातियेह प्रांत में नौ लोग मारे गए और 49 घायल हो गए। वहीं, बेका घाटी में पांच लोग मारे गए और 26 लोग घायल हो गए। इसके अलावा, बालबेक हरमेल प्रांत में 15 लोग घायल हो गए। 23 सितम्बर से इजरायली सेना हिजबुल्लाह के साथ बढ़ते तनाव के बीच लेबनान पर ताबड़तोड़ हवाई हमला कर रही है। 8 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायली सेना की ओर से लेबनानी-इजरायली सीमा पर गोलीबारी की जा रही है। जबकि, गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्ध जारी है। यह हवाई अभियान पिछले वर्ष हमास के इजरायली हमले के बाद बढ़े हैं। गाजा पट्टी पर इजरायली हमले में 42,400 से अधिक लोग मारे हए। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। दुनिया के बड़े देशों और संगठनों ने मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात को लेकर कई चेतावनी जारी की। तमाम कोशिशों के बीच भी शांति वार्ता पर बात नहीं बन पाई। इस बीच इजरायल की ओर से गाजा और लेबनान पर हवाई हमले जारी रहे। हालात ने गंभीर मोड़ तब और ले लिया जब इजरायल ने 1 अक्टूबर को दक्षिण लेबनान में प्रवेश कर जमीनी कार्रवाई शुरू की। इजराइल के हवाई हमले से दहला लेबनान, 16 मारे गए, हिजबुल्लाह ने भी दागे रॉकेट गाजा में हमास के आतंकवादियों का सामना कर रहे इजराइल को अब ईरान समर्थिक आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह से जूझना पड़ रहा है। इजराइली सुरक्षाबल लेबनान में छुपे हिजब्बुलाह आतंकियों को चुन-चुनकर ढेर कर रहा है। इजराइली सुरक्षाबलों (आईडीएफ) के ताजा हमले में 16 लोग मारे गए हैं। आईडीएफ ने दावा किया है कि दक्षिण लेबनान में उसके हमले में दर्जनों आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया गया। लेबनान के समाचार पत्र द नेशनल न्यूज की खबर में स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि  दक्षिण लेबनान के शहर नबातिह में एक नगरपालिका भवन पर हुए इजराइली हवाई हमलों की शृंखला में कम से कम 16 लोग मारे गए और 52 घायल हो गए। मृतकों में नबातिह का मेयर अहमद काहिल भी शामिल है। इस हमले पर लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने कहा कि अहमद काहिल स्थानीय संकट समिति की बैठक में थे। उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा अगर दुनिया इजराइल को आक्रमण करने से नहीं रोक सकती तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने युद्धविराम की गुहार लगाने का कोई मतलब नहीं। इजराइल ने  सुबह नबातीह और आसपास के इलाकों पर करीब 12 स्थानों पर हमले किए। संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक जीनिन हेनिस-प्लास्चार्ट ने कहा कि इजराइल ने पूरे लेबनान में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इजराइल अब बेरूत पर हमले कम करेगा। द टाइम्स ऑफ इजराइल ने आईडीएफ के हवाले से कहा है कि कुछ समय पहले उत्तरी इइराइल में लेबनान से दो रॉकेट दागे गए। इनमे से वायुसेना ने एक रॉकेट को मार गिराया। दूसरा रॉकेट खुले क्षेत्र में गिरा। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उधर, इराक में इस्लामिक प्रतिरोध ने दावा किया है कि उसने इलियट पर ड्रोन हमला किया है। इस बीच अमेरिकी सेना ने कहा है कि हूथी हथियार भंडारण केंद्र पर हमले में बी-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया गया। आईडीएफ के एक्स हैंडल पर कहा गया है कि दक्षिणी लेबनान में  उसके सैनिकों ने जमीन और आसमान से हमले कर दर्जनों हिजबुल्लाह आतंकियों का सफाया किया। नागरिक क्षेत्र में छुपाकर रखे गए हथियारों के जखीरा (कोर्नेट मिसाइलों, एटी-3 सैगर मिसाइलों, गोले और 100 मोर्टार) को भी नष्ट कर दिया गया। एक जगह एंटी टैंक मिसाइल दागने के बाद आतंकवादी भाग गए। बेरूत टाइम्स के अनुसार, हिजबुल्लाह के उप महासचिव नईम कासेम ने फिर दोहराया है कि मौजूदा लड़ाई का समाधान युद्धविराम है। हमास के समर्थन में शुरू किया हमला अब युद्ध में बदल गया है। हिजबुल्लाह ने इजराइल पर आक्रमण के लिए नई रणनीति और नया समीकरण तय किया है। अगर इजराइली अधिकारी युद्धविराम नहीं चाहते, तो हिजबुल्लाह आखिरी दम तक लड़ेगा। कासेम ने लेबनान के विस्थापितों से वादा किया कि उनकी … Read more

दुनिया में जल संकट के कारण आधे से अधिक खाद्य उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है: शोध

नई दिल्ली दुनिया में जल संकट के कारण आधे से अधिक खाद्य उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है और 2050 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इसके कारण औसतन आठ प्रतिशत का नुकसान हो सकता है जबकि निम्न आय वाले देशों को 15 प्रतिशत तक की हानि का सामना करना पड़ सकता है। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। नेताओं और विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ‘ग्लोबल कमीशन ऑन द इकोनॉमिक्स ऑफ वॉटर’ की रिपोर्ट में बताया गया कि कमजोर आर्थिक प्रणाली, अंधाधुंध भूमि का इस्तेमाल, जल संसाधनों का निरंतर कुप्रबंधन तथा बिगड़ती जलवायु के कारण वैश्विक जल चक्र पर काफी असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘जल संकट के कारण 2050 तक दुनिया के आधे से अधिक खाद्य उत्पादन पर असर पड़ सकता है और इसके कारण वैश्विक स्तर पर देशों के सकल घरेलू उत्पाद में आठ प्रतिशत तक तथा निम्न आय वाले देशों में 15 प्रतिशत तक हो नुकसान हो सकता है। साथ ही इसके बड़े आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं।’’ रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग तीन अरब लोग और दुनिया का आधे से अधिक खाद्य उत्पादन ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां पानी की उपलब्धता कम है या अस्थिर है। कई शहरों को भूजल की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। पोट्सडैम जलवायु प्रभाव अनुसंधान संस्थान (पीआईके) के निदेशक और ‘ग्लोबल कमीशन ऑन द इकोनॉमिक्स ऑफ वॉटर’ के चार सह-अध्यक्षों में से एक जॉन रॉकस्ट्रोम ने बताया, ‘‘आज दुनिया की आधी आबादी पानी की कमी का सामना कर रही है। जैसे-जैसे महत्वपूर्ण संसाधन दुर्लभ होते जा रहे हैं वैसे-वैसे खाद्य सुरक्षा और मानव विकास खतरे में पड़ रहा है और हम ऐसा होने भी दे रहे हैं।’’ रॉकस्ट्रोम ने कहा, ‘मानव इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि हम वैश्विक जल चक्र को प्रभावित कर रहे हैं।’’ रिपोर्ट में बताया गया कि जल प्रबंधन के लिए अभी तक जो भी तरीके अपनाए गए हैं वे विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में जल के विविध मूल्यों तथा महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण में इसकी भूमिका की अनदेखी करने के कारण विफल रहे हैं।     recent visitors 53

सीयूटीएस ने tobacco advertisements पर प्रस्तावित योजना की प्रभावशीलता को लेकर आपत्ति जताई

नई दिल्ली  अनुसंधान कंपनी सीयूटीएस इंटरनेशनल ने तंबाकू सेवन के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के सरकार के इरादे का  स्वागत किया, लेकिन प्रस्तावित योजना की प्रभावशीलता को लेकर आपत्ति जताई। संस्था ने सरकार से ओटीटी प्लेटफार्मों पर ऑडियो-विजुअल अस्वीकरण के रणनीतिक उपयोग की सिफारिश की। यह सिफारिश प्रस्तावित सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का निषेध और व्यापार और वाणिज्य उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2023 के बारे में दिए गए सुझावों में शामिल है। पिछले महीने, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफार्मों पर प्रसारण के दौरान तंबाकू के उपयोग से पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में कम से कम 30 सेकंड के लिए ‘नॉन-स्किपेबल’ चेतावनी और 20 सेकेंड का एक ऑडियो-विजुअल अस्वीकरण अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का प्रस्ताव रखा था। नॉन स्किपेबल चेतावनी का मतलब ऐसी चेतावनी से है, जिसे देखना अनिवार्य है। तंबाकू सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का स्वागत करते हुए, सीयूटीएस इंटरनेशनल ने कहा कि उसे प्रस्तावित नियमों के प्रभाव और अनुपात के बारे में कुछ चिंताएं हैं। सीयूटीएस ने ‘उपयोगकर्ता द्वारा बार-बार देखी जाने वाली सामग्री के आधार पर ऑडियो-विज़ुअल अस्वीकरण और चेतावनी के रणनीतिक उपयोग’ की सिफारिश की है। संस्था ने हितधारकों को लक्षित समूहों की पहचान करने और उसके अनुसार इन चेतावनियों के प्रसारण की संख्या निर्धारित करने का सुझाव दिया है। एक बयान में कहा गया, ‘आयु-आधारित फिल्टर यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि दर्शकों को परेशान किए बिना चेतावनियां उचित रूप से प्रदर्शित की जाएं।’   recent visitors 80