अब प्रदेशभर के अस्पतालों में ऐसी मशीनों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा, जो धूल खा रही

भोपाल मध्य प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ऐसी सैकड़ों मशीनें हैं, जिनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ये मशीनें कमरों में पड़ी धूल खा रही हैं। कई जगह वजह यह बताई जा रही है कि नया बजट मिलने के कारण नई मशीन खरीद ली गई है और अच्छी-भली मशीन को पुरानी बताकर उसे बंद कर दिया गया। इस स्थिति को देखते हुए अब प्रदेशभर के अस्पतालों में ऐसी मशीनों का युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। यानी उद्देश्य यह कि जिन अस्पतालों में इनकी जरूरत है, वहां स्थानांतरित किया जाएगा। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से मांगी मशीनों की जानकारी भोपाल से चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों को पत्र भेजकर अस्पतालों में उपलब्ध तथा काम नहीं आ रहीं सभी मशीनों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि किन मशीनों की कहां आवश्यकता है। छोटे शहरों के अस्पतालों में काम आ सकेंगी ये मशीनें यह जानकारी मिलने के बाद जहां मशीनें बेकार पड़ी हैं, उन्हें वहां भेजा जाएगा, जहां उसकी आवश्यकता है। इससे प्रदेश के बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में धूल खा रही मशीनें छोटे शहरों के अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में काम आ सकेंगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि मशीनों को संचालित करने के लिए जो भी उपकरण लगते हैं, उन्हें पहले से ही खरीद लें ताकि मरीजों को असुविधाओं का सामना न करना पड़े। साथ ही डॉक्टरों के लिए निर्देश हैं कि सीटी स्कैन और एमआरआई के प्रिस्क्रिप्शन स्पष्ट लिखे जाएं। कई अस्पतालों में मशीनों की आवश्यकता मध्य प्रदेश के कई अस्पतालों में मशीनों की आवश्यकता है। खासतौर पर जो नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं, वह कम संसाधनों के बीच संचालित हो रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि कई छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों को महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की आवश्यकता है। बजट की कमी के कारण ग्रामीण अस्पताल नहीं खरीद पा रहे मशीन बजट की कमी के चलते ग्रामीण अस्पताल इन्हें खरीद नहीं पा रहे हैं। ऐसे में बड़े शहरों के अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में काम नहीं आ रहीं मशीनों को वहां स्थानांतरित किया जाएगा, जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे उन क्षेत्रों के मरीजों को सुविधाएं मिलने लगेंगी। अभी सुविधा के अभाव में कई जांचों के लिए मरीजों को बड़े शहरों में आना पड़ता है। recent visitors 95

राइजिंग राजस्थान शहरी क्षेत्र प्री-समिट में 76 हजार 400 करोड़ रुपये के नए निवेश एमओयू पर हुए हस्ताक्षर

जयपुर निवेश के लिहाज से राजस्थान देश का सबसे मुफीद और संभावनाओं से लबरेज राज्य है। यह कहना है नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह का। राजस्थान ने आज जयपुर में ‘राइजिंग राजस्थान’ शहरी क्षेत्र प्री-समिट में 400 से अधिक निवेशकों के साथ 76 हजार 400 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश एमओयू पर हस्ताक्षर किए। शहरी विकास एवं आवास मंत्री श्री झाबर सिंह खर्रा और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव सुधांश पंत की गरिमामयी उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। रियल एस्टेट, डेटा सेंटर और आईटी पार्क, टाउनशिप और शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण के क्षेत्रों में हस्ताक्षरित निवेश एमओयू राज्य में सतत शहरीकरण, किफायती और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लक्ष्य को आगे बढ़ाएंगे। आज निवेश करारों पर हस्ताक्षर करने वाली प्रमुख कंपनियों में हीरानंदानी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, के रहेजा कॉर्प, कस्तूरी ग्रुप और विराज ग्रुप शामिल हैं। राइजिंग राजस्थान से पहले आयोजित प्री इन्वेस्टमेंट समिट को संबोधित करते हुए शहरी विकास एवं आवास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा, “ मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार अगले पांच वर्षों में राजस्थान की अर्थव्यवस्था के आकार को मौजूदा 180 बिलियन डॉलर से दोगुना करके 350 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की लगभग 26% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है और राजस्थान के सभी जिले महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र हैं जो राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने जा रहे हैं। इसलिए, शहरी बुनियादी ढांचे का कायाकल्प और सुदृढ़ीकरण, बसों और मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और किफायती आवास में परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।” ‘राइजिंग राजस्थान’ ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के महत्व के बारे में बात करते हुए राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा, “ मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अपने कार्यकाल के पहले ही वर्ष में राइजिंग राजस्थान सम्मेलन की मेजबानी करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राइजिंग राजस्थान के तहत हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों को अगले 2-3 वर्षों में जमीन पर उतारा जाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में ईज़ आफ़ डूइंग बिज़नेस को प्रोत्साहित करने, फाइल-प्रोसेसिंग समय को कम करने और उद्योगों के विस्तार और स्थापना के लिए विकेन्द्रीकृत-स्तर के निर्णय लेने को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।” प्री-समिट इवेंट में निवेशकों के सामने प्रेजेंटेशन देते हुए शहरी विकास और आवास विभाग के प्रमुख सचिव वैभव गालरिया ने कहा, “राजस्थान राज्य में देश में सबसे अधिक भूमि है, जो बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की घोषणा से राज्य की पानी की जरूरतों को भी कम किया जा रहा है। राज्य निवेशक-अनुकूल नीतियों जैसे कि किफायती आवास नीति और समान टाउनशिप नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से सतत शहरीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री खर्रा ने इस अवसर पर शहरी विकास और आवास विभाग के नए विकास प्रोत्साहन और नियंत्रण विनियमों का भी शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में 'भविष्य के लिए तैयार शहरों के लिए स्मार्ट बुनियादी ढांचे का निर्माण' पर एक पूर्ण सत्र भी आयोजित किया गया था, जिसमें आवास, स्मार्ट शहरों, शहरी नियोजन के लिए आईटी समाधान, सतत शहरों, शहरी गतिशीलता, सार्वजनिक परिवहन, औद्योगिक टाउनशिप जैसे क्षेत्रों पर समृद्ध चर्चा हुई। यूडीएच विभाग के प्री-समिट से पहले, राजस्थान सरकार ने 08 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की गरिमामयी उपस्थिति में अपने पर्यटन विभाग का प्री-समिट आयोजित किया। निवेशकों तक व्यापक पहुंच के परिणामस्वरूप राजस्थान सरकार को 12.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव (एमओयू) प्राप्त हुए हैं (आज के प्री-समिट में हस्ताक्षरित एमओयू को छोड़कर), जो राज्य के प्रयासों में निवेशक और व्यापार समुदाय के दृढ़ विश्वास को दर्शाता है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अधिकारियों में राजेश यादव, प्रमुख सचिव, स्थानीय स्वशासन, राजस्थान सरकार, डीएलबी निदेशक कुमार पाल गौतम, आनंदी आयुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण, राजस्थान सरकार, डॉ. रश्मि शर्मा, आयुक्त, आवास बोर्ड, राजस्थान सरकार और राजस्थान सरकार के अन्य अधिकारी शामिल थे। recent visitors 83

आदिलाबाद गांव के लोगों ने सोनियां गांधी और राहुल गांधी को पत्र लिखकर छह गारंटियों को तत्काल लागू करने की मांग की

हैदराबाद तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के एक गांव के लोगों ने कांग्रेस नेता सोनियां गांधी और राहुल गांधी को पत्र लिखकर छह गारंटियों को तत्काल लागू करने की मांग की है। आदिलाबाद जिले के एचोडा मंडल के मुखरा गांव के ग्रामीणों ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पोस्टकार्ड भेजकर उनसे पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के द्वारा दी गई गारंटियों को तत्काल लागू करने की अपील की है। मुखरा गांव की रहने वाली वैष्णवी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लिखे पत्र में बताया कि आपने चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में जो छह वादे किए थे, उनको आपने और आपकी पार्टी ने अब तक पूरा नहीं किया है। महालक्ष्मी योजना के तहत 2,500 रुपये महिलाओं को देने का जो वादा था वह भी पूरा नहीं किया है। मैं सोनिया गांधी मैडम से अनुरोध करती हूं, आपकी पार्टी ने चुनाव के समय जो 6 वादे किए गए थे। उन्हें जल्द लागू किया जाए। महिला ने सोनिया गांधी को भी पोस्टकार्ड भेजा है। उन्होंने उसमें लिखा, "सोनिया गांधी मैडम, तेलंगाना में विधानसभा चुनाव के दौरान तुक्कुगुडा में जनसभा में कहा था कि पहली गारंटी महालक्ष्मी योजना के तहत हर महिला को प्रति महीना 2,500 रुपये देने का है। 100 दिन में छह गारंटी अमल में लाने की बात कही गई थी। सरकार को सत्ता में आए 300 दिन हो गए लेकिन, अभी तक छह गारंटी को अमल में नहीं लाया गया है। अब तक महालक्ष्मी योजना के तहत किसी भी महिला को 2500 रुपये नहीं मिले हैं। आपसे अनुरोध है कि आप अपने वादे को तुरंत अमल में लाएं। इसके अलावा एक और पोस्टकार्ड में नवले प्रवमिका ने लिखा कि तेलंगाना में 100 दिन में छह गारंटी अमल में लाने की बात कांग्रेस के द्वारा बोली गई थी। लेकिन, आपकी सरकार को सत्ता में आए 300 दिन हो गए हैं, मगर अभी तक छह गारंटी अमल में नहीं लाई गई। आपसे अनुरोध है कि अपने वादे तुरंत लागू करें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को भी पोस्टकार्ड भेजकर छह गारंटियों के लागू करने में देरी पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने राहुल गांधी को याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी ने 100 दिनों में गारंटियों को लागू करने का वादा किया था, लेकिन, सत्ता में 300 दिन पूरे होने के बाद भी वह ऐसा करने में विफल रही। recent visitors 80

छोटे से विवाद के चलते एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी, बेटे पर लेटी मां, हाथ जोड़ते रहे पिता

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है। यहा कुछ लोगों ने एक छोटे से विवाद के चलते एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी। जानकारी के मुताबिक, विवाद गाड़ी को ओवरटेक को लेकर हुआ था। जिसमें कुछ लोगों ने युवक को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान आकाश माइन के रूप में हुई है। इस घटना को लेकर वायरल हो रहा वीडियो दिल को झकझोर देने वाला है। दिंडोशी पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताय कि मृतक का नाम आकाश है। आकाश का रास्ते में गाड़ी ओवरटेक करने को लेकर कुछ लोगों से विवाद हुआ था। इसी बीच लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। मारपीट होते देख मौके पर काफी संख्या में भीड़ जमा हो गई। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने भी मृतक पर हाथ साफ किया। बेटे के ऊपर लेटी मां, फिर भी पीटते रहे लोग आकाश की जब लोगों द्वारा पिटाई की जा रही थी, तब उसकी मां और उसके पिता बचाने के लिए आए। पिता जहां हाथ जोड़कर रहम की भीख मांग रहा था तो वहीं बेटे को बचाने के लिए मां उसके ऊपर लेट गई, ताकि उसके बेटे को मार न लगे, लेकिन इस दौरान उग्र भीड़ ने फिर भी उसे मारना नहीं छोड़ा। बुजुर्ग पिता को भी लोगों ने पीटा वीडियो में ये भी देखा जा सकता है कि हाथ-पैर जोड़ रहे बुजुर्ग पिता पर भी लोगों ने हाथ साफ किया। वह लोगों से काफी मिन्नत कर रहा था, लेकिन लोग उसके बेटे को पीटे जा रहे थे और अंत में आकाश की मौत हो गई। फिलहाल दिंडोशी पुलिस ने इस घटना के बाद हत्या का मामला दर्ज कर नौ आरोपियों को किया गिरफ्तार किया है। वहीं मामले की जांच जारी है। लोग कितने बेरहम होते जा रहे हैं। किसी की जिंदगी की अब कोई कीमत नहीं रही। आए दिन लड़ाई-झगड़ों में लोग अपना धैर्य खो दे रहे हैं। एक समाज के रूप में हम कहां आकर खड़े हो गए हैं। भीड़ युवक को पीटती रही, फिर भी नहीं दिखी पुलिस वहीं इस वीडियो के वायरल होने के बाद कई तरह के सवाल खेड़ हो रहे हैं। अगर इतनी देर तक भीड़ युवक को पीटती रही तो पुलिस कहां पर थी, क्या दिंडोशी इलाके में उस समय एक भी गश्त की टीम नहीं घूम रही थी। अगर पुलिस समय से पहुंचती तो शायद युवक को जान बच जाती। भीड़ ने जिस तरह से युवक की पीट-पीटकर हत्या की, उससे राजधानी मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। युवक का मां का रो-रोकर बुरा हाल है। recent visitors 79

कल से WTSA की बैठक : अब 6G की रेस में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत, 190 देशों के प्रतिनिधि करेंगे चर्चा

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में कल से वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन असेंबली (WTSA) की बैठक शुरू हो रही है, जो 24 अक्टूबर तक चलेगी। इस सम्मेलन में 190 देशों के प्रतिनिधि 6G और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। यह पहली बार है जब भारत में इतने देशों के प्रतिनिधि एक साथ आकर टेक्नोलॉजी पर बात करेंगे। एशिया में भी इससे पहले ऐसा आयोजन नहीं हुआ है। आजकल हाई स्पीड इंटरनेट की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोग और तेज स्पीड चाहते हैं। भारत में फिलहाल 4G और 5G इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हैं, और अब देश 6G इंटरनेट सर्विस की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत जल्द से जल्द 6G हाई स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू करने की योजना बना रहा है। भारत ने ग्लोबल पेटेंट फाइलिंग में शीर्ष-6 देशों में अपनी जगह बना ली है, जो दिखाता है कि देश तकनीक के क्षेत्र में कितना आगे बढ़ चुका है। कई कंपनियां 5G इंटरनेट सेवाएं शुरू कर चुकी हैं, जबकि अन्य कंपनियां 4G सेवाएं दे रही हैं और जल्द ही 5G में प्रवेश करेंगी। दिल्ली में इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के सहयोग से WTSA का यह सम्मेलन आयोजित हो रहा है, जो सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। भारत के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश को अन्य देशों के साथ सहयोग करने का मौका मिलेगा और अपने तकनीकी मानकों को विकसित करने में मदद मिलेगी। 6G मोबाइल नेटवर्क टेक्नोलॉजी भविष्य की नई पीढ़ी है, जो 5G से कई गुना तेज और अधिक सुरक्षित होगी, जिससे काम करना और भी आसान हो जाएगा।   recent visitors 95

पहले एयर इंडिया की फ्लाइट को धमकी, इसके बाद मुंबई-हावड़ा मेल को मिली बम से उड़ाने की धमकी

नई दिल्ली एयर इंडिया की फ्लाइट के बाद अब मुंबई-हावड़ा मेल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह संदेश आज सुबह करीब चार बजे ऑफ-कंट्रोल को मिला। इसके बाद ट्रेन अधिकारियों ने तुरंत ट्रेन नंबर 12809 को जलगांव स्टेशन पर रोककर इसकी जांच की। करीब दो घंटे तक ट्रेन की बारीकी से जांच की गई, लेकिन उसमें कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद ट्रेन को उसके गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया। धमकी का संदेश सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दिया गया था।  फजलुद्दीन नाम के एक अकाउंट के माध्यम से ट्रेन को उड़ाने की धमकी दी गई। पोस्ट में लिखा था कि "क्या रे हिंदुस्तानी रेलवे, आज सुबह खून के आंसू रोओगे तुम लोग। आज फ्लाइट में भी बम रखा गया है और 12809 ट्रेन में भी। नासिक आने से पहले बड़ा धमाका होगा।" आज सुबह मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके चलते विमान को तुरंत दिल्ली की तरफ डायवर्ट कर दिया गया। इसे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कराया गया। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और मामले की जांच जारी है। सभी यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस ट्रेन को पलटाने की साजिश, पायलट ने बचाई जान इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस ट्रेन को पलटाने की एक गंभीर साजिश का खुलासा हुआ है। मंगलवार की देर रात मखदुमपुर और बेला स्टेशन के बीच नेयामतपुर हाल्ट के पास पटरी पर एक बड़ा पत्थर रखा गया था। ट्रेन के पायलट ने समय रहते पत्थर पर नजर डालकर इमरजेंसी ब्रेक लगाई, जिससे ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई। जीआरपी (राजकीय रेल पुलिस) के थाना प्रभारी दीपनारायण यादव ने बताया कि यह काम किसी असामाजिक तत्व का था, जिसने जानबूझकर पटरी पर पत्थर रखा था। पायलट की सजगता के कारण बड़ा हादसा टल गया। एयर इंडिया की फ्लाइट को भी मिली धमकी इसके अलावा रात करीब 2 बजे एयर इंडिया का एक विमान मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से न्यूयॉर्क जा रहा था, जिसको बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी के तुरंत बाद फ्लाइट को दिल्ली की ओर डायवर्ट किया गया। इन घटनाओं ने यात्रियों के बीच चिंता बढ़ा दी है और सुरक्षा एजेंसियां इन साजिशों के पीछे के लोगों की पहचान के लिए जांच कर रही हैं। सभी यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।   recent visitors 88

अर्थशास्त्र पुरस्कार को पहले बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार के रूप में जाना जाता था, हुई नोबेल पुरस्कार की घोषणा

नई दिल्‍ली डैरोन ऐसमोग्लू, साइमन जॉनसन और जेम्स रॉबिन्सन को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार इस बात पर रिसर्च के लिए मिला है कि संस्थान कैसे बनते हैं और लोगों की खुशहाली को कैसे प्रभावित करते हैं। उनकी रिसर्च बताती है कि मजबूत और निष्पक्ष संस्थान जैसे-अच्छी सरकारें और कानून व्यवस्था लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डालते हैं। नोबेल पुरस्कार समिति ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्ट में बताया कि संस्थाओं के गठन और परिवर्तन की परिस्थितियों को समझाने के लिए पुरस्कार विजेताओं का मॉडल तीन फैक्‍टरों पर आधारित है। पहला है संसाधनों के बंटवारे और समाज में निर्णय लेने की शक्ति (अभिजात वर्ग या जनता) को लेकर संघर्ष। और क्‍या कहती है र‍िसर्च? सम‍ित‍ि ने आगे बताया, 'दूसरा यह है कि जनता को कभी-कभी सत्ता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है। वे संगठित होकर और शासक वर्ग को धमकी देकर ऐसा कर सकते हैं। इसलिए समाज में सत्ता केवल निर्णय लेने की शक्ति से कहीं अधिक है। तीसरा है प्रतिबद्धता की समस्या, जिसका मतलब है कि अभिजात वर्ग के पास जनता को निर्णय लेने की शक्ति सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।' क्‍या है नोबेल पुरस्‍कार का इतिहास? ऐसमोग्लू और जॉनसन मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में काम करते हैं और रॉबिन्सन शिकॉगो विश्वविद्यालय में अपना शोध करते हैं। अर्थशास्त्र पुरस्कार को पहले बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार के रूप में जाना जाता था। आर्थिक विज्ञान का यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति दिया जाता है। बैंक ऑफ स्वीडन ने 1968 में नोबेल की स्मृति में इसकी शुरुआत की थी। नोबेल 19वीं सदी के व्यवसायी और रसायनज्ञ थे, जिन्होंने डायनामाइट का आविष्कार किया था और पांच नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की थी। हालांकि, कुछ लोग इस बात पर जोर देते हैं कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल पुरस्कार नहीं है। लेकिन, इसे हमेशा 10 दिसंबर को अन्य पुरस्कारों के साथ प्रदान किया जाता है। इस दिन नोबेल की पुण्यतिथि है। पिछले सप्ताह चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई थी। recent visitors 81