प्रसाद विवाद के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति सतर्क, भोग-प्रसाद के लिए बनी SOP

 देहरादून  तिरुपति मंदिर प्रसाद में मिलावट का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भी सतर्क हो गयी है। समिति ने बद्रीनाथ, केदारनाथ धाम के अलावा बीकेटीसी के अधीन आने वाले मंदिरों में भोग और प्रसाद की गुणवत्ता और शुद्धता के लिए एसओपी जारी कर दी है। जिसके बाद साल भर में कम से कम एक बार फूड सेफ्टी ऑडिट होगा। तिरुपति मंदिर प्रसाद विवाद का नाता उत्तराखंड से जुड़ने के बाद यहां के मंदिरों में प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य मंदिरों के प्रसाद को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश सरकार ने दिए थे। वहीं बद्री-केदार मंदिर समिति ने भी बद्रीनाथ, केदारनाथ धामों के साथ समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में भोग और प्रसाद की गुणवत्ता-शुद्धता के लिए एसओपी जारी कर दी है। इस एसओपी के तहत मंदिरों के लिए बनने वाले भोग-प्रसाद को तैयार करने, उसमे इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री भंडारण के साथ ही निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि साल भर में एक बार भोग प्रसाद का फुल सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। इसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से अधिकृत प्रयोगशाला में खाद्य सामग्री की जांच कराई जाएगी। प्रसाद और भोग में इस्तेमाल होने वाले चावल, तेल, मसाले और केसर की जांच करने के साथ ही सभी सामग्री किसी भरोसेमंद व्यापारी से खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। भोग और प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल में आने वाले तेल को ज्यादा से ज्यादा तीन बार प्रयोग में लाये जाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि भोग और प्रसाद तैयार करने के लिए कर्मचारियों को स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना होगा। मंदिर समिति ने साफ किया है कि खाद्य सामग्री का स्टॉक लंबे समय तक ना रखा जाए। गुणवत्ता और शुद्धता की जांच के लिए नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए। recent visitors 71

कंगना रनौत ने ट्रंप ने पीएम मोदी को सबसे अच्छा इंसान बताते हुए उन्हें ‘टोटल किलर’ करार दिया

नई दिल्ली  अभिनेत्री से राजनेता बनीं कंगना रनौत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक पॉडकास्ट को अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। इस पॉडकास्ट में ट्रंप ने पीएम मोदी को सबसे अच्छा इंसान बताते हुए उन्हें ‘टोटल किलर’ करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर पॉडकास्ट को शेयर करते हुए कंगना रनौत ने कैप्शन में लिखा, “पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लैग्रेंट पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री मोदी को सबसे अच्छा इंसान बताया, लेकिन साथ ही उन्हें ‘टोटल किलर’ (ऐसे शख्स जो सफल हैं, आक्रामक हैं और किसी भी स्थिति से निपटने में पारंगत) बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक जवाबी कार्रवाई की धमकी देकर उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया, जब उन्होंने कहा कि हम उनसे निपट लेंगे, भारत ने सैकड़ों वर्षों से उन्हें हराया है। इसकी तुलना मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की बेरुखी से करें। भारत का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि नरेंद्र मोदी के आने से पहले भारत में हर साल पीएम बदला जाता था। वहां बहुत ज्यादा अस्थिरता थी। इसके बाद वह आए। वह महान हैं। वह मेरे मित्र हैं। बाहर से वह ऐसे दिखते हैं, जैसे वह आपके पिता हैं। वह सबसे अच्छे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कॉमेडियन एंड्रयू शुल्ट्ज और आकाश सिंह के साथ ‘फ्लैग्रैंट’ नामक पॉडकास्ट में ये बातें कही। 88 मिनट लंबे साक्षात्कार के लगभग 37 मिनट तक उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। ट्रंप ने आगे कहा कि ‘हाउडी मोदी’ 2019 में टेक्सास के ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय का एक कार्यक्रम था। एनआरजी स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ी और दोनों देशों के बीच संबंधों को दर्शाया गया। उन्होंने कहा कि स्टेडियम में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग पागल हो रहे थे और हम घूम रहे थे..हम उनके बीच में थे, हर किसी को हाथ हिला रहे थे। आपको बताते चलें, ट्रंप इससे पहले भी कई मौके पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘शानदार व्यक्ति’ बता चुके हैं।     recent visitors 92

आतिशी सरकार का बजटीय अनुमान से घटकर 62,415 करोड़ रुपये रह सकता है

नई दिल्ली  दिल्ली में वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री आतिशी को सूचित किया है कि शहर का वित्त 2024-25 के अंत तक पहली बार घाटे में आ सकता है। साथ ही इसका खर्च इसकी प्राप्तियों से अधिक होने की संभावना है। दिल्ली की कमाई- टैक्स रेवेन्यू, नॉन-टैक्स रेवेन्यू, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत प्राप्तियां और केंद्र से अनुदान के माध्यम से – वित्त वर्ष 25 के अंत तक 64,142 करोड़ रुपये के बजटीय अनुमान से घटकर 62,415 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। 1993 के बाद घाटे का पहला मामला राजस्व व्यय 60,911 करोड़ रुपये से बढ़कर 63,911 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, शहर सरकार को विभिन्न पूंजी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 7,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसका बजट में प्रावधान नहीं किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली ऐतिहासिक रूप से रेवेन्यू सरप्लस वाला राज्य रहा है। 1993 में विधान सभा के पुनर्गठन के बाद से घाटे का यह पहला मामला होगा। 3000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जरूरत दिल्ली के वित्त विभाग के बजट डिविजन ने 2024-25 वित्तीय वर्ष के लिए संशोधित अनुमान तैयार करते समय ये अनुमान लगाए। सूत्रों से पता चलता है कि वित्त विभाग ने हाल ही में मुख्यमंत्री आतिशी के साथ शहर की वित्तीय स्थिति पर एक नोट साझा किया है। सीएम के पास वित्त विभाग भी है। इसमें विभिन्न श्रेणियों के तहत टैक्स, नॉन-टैक्स रेवेन्यू और खर्च का विवरण दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग ने चालू वित्त वर्ष में विभिन्न राजस्व व्यय के लिए 3,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता की पहचान की है। 'राजस्व घाटा तो निश्चित है' इनका 2024-25 के बजट अनुमानों में हिसाब नहीं लगाया गया। इसमें राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग के अनुसार बढ़ी हुई पेंशन और भत्ते, बिजली सब्सिडी, इलेक्ट्रिक बसों के लिए व्यवहार्यता निधि, नालों की सफाई, सड़कों की मरम्मत और कोविड के वर्षों के दौरान दिल्ली मेट्रो के परिचालन घाटे के हिस्से को कवर करने के लिए धन शामिल है। एक अधिकारी ने कहा कि राजस्व घाटे की प्रबल संभावना है, जो दिल्ली सरकार की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। पटरी पर रेवेन्यू कलेक्शन सूत्र ने कहा कि कर राजस्व संग्रह लगभग पटरी पर है, केंद्र दिल्ली के परिचालन घाटे और अन्य प्रतिबद्ध देनदारियों के खिलाफ 951 करोड़ रुपये समायोजित कर सकता है, जैसा कि पिछले वित्तीय वर्ष में किया गया था। इसका अर्थ है कि राशि जारी नहीं की जा सकती है। इसी तरह, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए निर्धारित 3,224 करोड़ रुपये में से केवल 1,000 करोड़ रुपये ही केंद्र से प्राप्त होने की उम्मीद है, क्योंकि दिल्ली सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रही है। 2024-25 के लिए संशोधित अनुमान मांगे अधिकारियों ने कहा कि विभागों से 2024-25 के लिए संशोधित अनुमान मांगे गए हैं और बढ़ती मांगों के कारण खर्च की गति तेज हो सकती है। हालांकि सरकार का कैश बैलेंस वर्तमान में लगभग 4,471 करोड़ रुपये है, लेकिन औसत मासिक खर्च 5,000 करोड़ रुपये से अधिक है। वर्तमान उपलब्ध सरप्लस सिर्फ 2 महीने के वेतन को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। recent visitors 72

प्रियंक कानूनगो ने कहा NCPCR आयोग ने बाल विवाह के मुद्दे को प्राथमिकता दी

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के नाम एक पत्र लिखा। इस पत्र में 2023-2024 के दौरान भारत में बाल विवाह के प्रतिबंध के संबंध में एक समग्र रिपोर्ट तैयार करने का उल्लेख किया गया है। प्रियंक कानूनगो ने अपने पत्र में कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) देश में बाल अधिकारों और अन्य संबंधित मामलों की सुरक्षा के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 की धारा 3 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। आयोग के पास यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012; किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के उचित और प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करने का भी अधिकार है। प्रियंक कानूनगो ने बताया कि आयोग ने अपने कार्यों के तहत, बाल विवाह के रोकथाम के लिए 2006 के बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम के तहत प्रमुख हितधारकों के साथ एक महीने में कई वर्चुअल समीक्षा बैठकें की। इन बैठकों का उद्देश्य बाल विवाह को रोकना, सामाजिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और बच्चों के कल्याण नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में योगदान देना था। उन्होंने कहा कि आयोग ने बाल विवाह के मुद्दे को प्राथमिकता दी है और जिलों द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में किए गए कार्यों को संकलित करने के लिए एक प्रारूप विकसित किया है। पिछले तीन वर्षों से बाल विवाह की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करने वाली समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप बाल विवाह की रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है, जबकि मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि इन समीक्षा बैठकों के निष्कर्षों और एनसीपीसीआर के बाल विवाह पोर्टल के माध्यम से संबंधित हितधारकों द्वारा प्रस्तुत डेटा के आधार पर, आयोग ने बाल विवाह के प्रतिबंध अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा किए गए प्रयासों का विवरण देने वाली एक समग्र रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने पत्र में आगे लिखा कि इस रिपोर्ट में जिला स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों और बाल विवाह की प्रथा को रोकने के लिए लागू की गई निवारक उपायों का विस्तृत उल्लेख है। इसके अलावा, आयोग नियमित रूप से राज्य और जिला अधिकारियों के साथ संवाद करता है ताकि 2006 के बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम (पीसीएमए) के तहत उपायों को प्रभावी रूप से लागू और प्रवर्तन किया जा सके। रिपोर्ट में 27 राज्यों और 7 संघ शासित प्रदेशों के 596 जिलों से प्राप्त डेटा को ध्यानपूर्वक संकलित किया गया है। यह रिपोर्ट राज्य स्तर पर बाल विवाह को रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए उपायों को मजबूत करने के लिए एक संसाधन के रूप में कार्य करेगी। कानूनगो के मुताबिक रिपोर्ट में पिछले एक वर्ष में किए गए कार्यों और उपायों का विस्तृत विवरण शामिल है, जो जिला अधिकारियों, बाल विवाह प्रतिबंध अधिकारियों, और अन्य हितधारकों की मेहनत को दर्शाता है।     recent visitors 112

ब्रिटिश के पूर्व राजनयिक टॉम फ्लेचर को संयुक्त राष्ट्र सहायता प्रमुख नियुक्त किया गया

संयुक्त राष्ट्र  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने पूर्व ब्रिटिश राजनयिक टॉम फ्लेचर को विश्व निकाय का नया मानवीय प्रमुख नियुक्त किया। वर्तमान में ऑक्सफोर्ड के हर्टफोर्ड कॉलेज के प्रिंसिपल और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कॉन्फ्रेंस ऑफ कॉलेजेज़ के उपाध्यक्ष फ्लेचर अपने ब्रिटिश साथी मार्टिन ग्रिफिथ्स का स्थान लेंगे। ग्रिफिथ्स ने जून के अंत में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मानवीय मामलों के अवर महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। नियुक्ति की घोषणा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि कार्यवाहक संयुक्त राष्ट्र मानवीय प्रमुख जॉयस मसूया तब तक इस पद पर बने रहेंगे जब तक कि फ्लेचर कार्यभार नहीं संभाल लेते। हक ने फ्लेचर को “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक संचारक बताया जिन्होंने अपनी पुस्तकों और लेखन संबंधी कार्यों के माध्यम से विकास, कूटनीति, प्रौद्योगिकी और लोकतंत्र के क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता और सार्वजनिक कूटनीति का मिश्रण प्रस्तुत किया है।” अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा कि अमेरिका “तत्काल मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने और तेज करने के लिए” फ्लेचर के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है। उन्होंने एक बयान में कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि जीवन रक्षक सहायता सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे – सूडान से लेकर गाजा, हैती, यूक्रेन और अन्य जगहों पर।”     recent visitors 78

महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की महत्वपूर्ण भूमिका

   उज्जैन  महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका ·  सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है। ·  कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें। ·  चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है। ·  मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है। ·  पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान करता है। ·  आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।        प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी। क्रमांक 1881          recent visitors 62

उत्तर प्रदेश को 31 हजार 962 हजार करोड़ टैक्स डिवोल्यूशन मिला

लखनऊ केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को  1,78,173 करोड़ रुपये का टैक्स डिवॉल्यूशन जारी किया है. इसमें सबसे ज्यादा यूपी को 31हजार 962 करोड़ रुपये मिले हैं. सभी राज्यों के संदर्भ में देखें तो इस टैक्स डिवॉल्यूशन में अक्टूबर, 2024 में देय नियमित किस्त के अलावा ₹89,086.50 करोड़ की एक अग्रिम किस्त भी शामिल है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आगामी त्यौहारी सीज़न को देखते हुए और राज्यों को पूंजीगत खर्चे में तेजी लाने और उनके विकास/कल्याण संबंधी खर्चे को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाने के लिए अग्रिम किस्त जारी की गई. केंद्र के इस फैसले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया भी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कर हस्तांतरण के तहत उत्तर प्रदेश को समय पर 31,962 करोड़ रुपये करने के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय का हार्दिक आभार. यह अग्रिम किस्त हमारे त्यौहारी सीजन की तैयारियों को काफी बढ़ावा देगी और पूरे राज्य में विकास और कल्याणकारी पहलों को गति देगी. हम सब मिलकर एक मजबूत और अधिक समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण कर रहे हैं. बता दें इन रुपयों को राज्य सरकार उन अलग-अलग योजनाओं और स्कीम्स में खर्च करेगी जिनका ऐलान किया गया है. सरकार ने बीते दिनों कर्मचारियों को बोनस देने, बीपीएल श्रेणी वालों को त्यौहारी सीजन में दो सिलेंडर मुफ्त देने का ऐलान किया था. इन योजनाओं में राज्य सरकार का करोड़ों रुपया खर्च होता है. ऐसे में केंद्र से टैक्स डिवॉल्यूशन का रुपया मिलने पर राज्य सरकार को काफी राहत मिलेगी.   recent visitors 92