28 हेक्टेयर में 53 लाख रूपए की लागत से बनाई गई है पर्यावरण वाटिका

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया में पर्यावरण वाटिका का किया लोकार्पण खूबसूरत प्राकृतिक परिवेश में निर्मित वाटिका में औषधीय पौधे, एडवेंचर जोन, तितली जोन बनाए गए : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 28 हेक्टेयर में 53 लाख रूपए की लागत से बनाई गई है पर्यावरण वाटिका रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया में पर्यावरण वाटिका का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया में पर्यावरण वाटिका का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया में पर्यावरण वाटिका का किया लोकार्पण अगर आप प्रकृति के बीच स्वच्छ वातावरण में अपने परिवार के साथ समय बिताने आना चाहें तो बगिया में बनी पर्यावरण वाटिका आपका इंतजार कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में स्थित अपने गृहग्राम बगिया में पर्यावरण वाटिका का लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वाटिका परिसर में नारियल, सुपाड़ी और सीता अशोक का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।    सुरम्य प्राकृतिक परिवेश में 53 लाख रुपए की लागत से 28 हेक्टेयर में निर्मित पर्यावरण वाटिका में एडवेंचर जोन, औषधीय गुणों से भरपूर पौधे, चिल्ड्रन पार्क, वाटर फॉल, मेडिटेशन हट, तितलियों के जीवन चक्र को प्रदर्शित करता तितली जोन और कई निर्माण कराए गए हैं, जो लोगों को प्रकृति के और भी करीब ले जाकर आनंदमय अनुभव कराती है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद ग्रामीणों से कहा कि इसके बन जाने से यहां पर रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। वाटिका में लगाये गए हैं औषधीय गुणों से भरपूर पौधे         पर्यावरण वाटिका में जंगल ट्रेल का निर्माण किया गया है। जहां योग जोन, आरोग्य वन पथ, जंगल जिम, तितली जोन, मोगली एडवेंचर जोन, ऑक्सीजन बूथ, पैगोडा, गजराज जोन, तालाब, नेचुरल झूले, किड्स प्ले जोन बनाया गया है। यहां पर औषधीय गुणों से भरपूर हर्रा, गिलोय, बेली बांस, सर्पगंधा, अश्वगंधा, बारबाडोस लिली, पुदीना, लेमन ग्रास, पत्थरचट्टा, आंवला आदि अनेक प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।    वाटिका में निर्मित तितली जोन में तितली के पर्यावरण में योगदान को प्रदर्शित करते हुए तितली के सम्पूर्ण जीवन चक्र को दर्शाया गया है। यहां पर जशपुर में पाई जाने वाली सभी तितलियों की प्रजातियों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य तितलियों के बारे में लोगों को जानकारी देने के साथ उनके संरक्षण के महत्व के बारे में भी बताना है। मोगली एडवेंचर जोन में बच्चों के लिए हैं विभिन्न साहसिक खेल वाटिका में बने किड्स प्ले जोन में बच्चों के लिए आकर्षक झूले लगाए गए हैं। जिसमें प्राकृतिक झूले भी बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के मनोरंजन के लिए मोगली एडवेंचर जोन बनाया गया है। जहां कमांडो नेट, टायर वॉक, बैलेंस ब्रिज, टायर क्लाइम्बिंग, रोप वॉक, इंक्लाइंड लॉग, कार्गाे नेट, सिंगल लाइन ब्रिज, बर्मा ब्रिज आदि बनाये गए हैं।        वाटिका में सरई छांव प्राकृतिक पैगोडा का निर्माण किया गया है। जहां परिवार के साथ प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है। यहां पर आदिम कलाकारों द्वारा आदिम संस्कृति को प्रदर्शित करती कास्ट मूर्तियां भी लगाई गई हैं। इस वाटिका में पर्यावरण के प्रति जागृति दिखाते हुए बांस के बने आकर्षक डस्टबिन भी लगाए गए हैं।       मुख्यमंत्री बच्चों से पूरी आत्मीयता से मिले, दिए फल और ड्राई फ्रूट्स मुख्यमंत्री जब भी बच्चों से मिलते है पूरे वात्सल्य भाव से मिलते हैं। आज जब मुख्यमंत्री पर्यावरण वाटिका का अवलोकन कर रहे थे, तब उन्होंने वहां खेल रहे बच्चों को अपने पास बुलाया और उनसे प्रेम भाव से बात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें फल और ड्राय फ्रूट्स भेंट किए। प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले दीपांशु यादव, नीतू देवार, भीम विश्वकर्मा, रितेश राम सहित अन्य बच्चे मुख्यमंत्री से मिलने के बाद काफी खुश नजर आए। इस अवसर पर विधायक और सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, पीसीसीएफ अरुण पांडेय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी अंकित गर्ग, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, वनमंडलाधिकारी जितेन्द्र उपाध्याय, आईएफएस निखिल अग्रवाल, सर्वरामप्रताप सिंह, भरत सिंह, सुनील गुप्ता सहित अधिकारीगण और जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे। 84 recent visitors 32

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है

रायपुर  दाऊ अमृष कुमार लक्ष्मेश्वर दयाल, छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन पुरानी बस्ती के लोकार्पण समारोह, छत्तीसगढ़ में दान की अनोखी परंपरा स्थापित करने वाले दानदाताओं के वंशजों और छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के केंद्रीय पदाधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह मैं पहुंचे प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है। कोरोना काल में जब सब अपने घरों से निकल नहीं पा रहे थे तब छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज ने सबके भोजन की, विश्वास की और मुस्कान की चिंता की इस समाज ने धर्म शिक्षा स्वास्थ्य शुद्ध पेयजल जैसे विभिन्न आयाम में दान किया। यह अनुकरणीय है।  कोई सोच भी नहीं सकता था ऐसा दान दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने किया है। 1728 एकड़ जमीन कृषि विश्वविद्यालय को दान अद्भुत है। अस्पताल का निर्माण आज भी लोगों को लाभ पहुंचा रहा है और एम्स की जमीन दाऊजी की दूर दृष्टि को साबित करती है। ऐसे दाऊजी को नमन है।  लोगों को संबोधित करते हुए रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने कहा कि आज का कार्यक्रम एक समाज के दायरे में बंद कार्यक्रम नहीं है आज के कार्यक्रम में शहर को शिक्षा स्वास्थ्य संस्कृति धर्म शादी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने वाले व दान करने वालों का सम्मान किया जा रहा है कहीं ना कहीं उसकी इस दान के पीछे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जी की प्रेरणा है। और यह परंपरा लगातार आगे बढ़े ऐसा इस आयोजन का उद्देश्य है।   इस पूरे आयोजन में रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा महापौर मीनल चौबे व नान  अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव भाजपा प्रवक्ता नालिनेश ठोकने भी उपस्थित थे। ।  कार्यक्रम के आयोजक छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने बताया कि दानशीलता दिवस का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी जो आभासी दुनिया में जी रही है उन्हें उनके पूर्वजों के योगदान से अवगत कराना है। पूर्वजों ने दान की जो परंपरा रखी थी वर्तमान पीढ़ी उसे बहुत आगे अच्छे से आगे बढ़ा रही है भविष्य की पीढ़ी भी उससे प्रेरणा ले इसलिए ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। अनुराग अग्रवाल ने बताया कि रायपुर अब महानगर हो गया है महानगर के लोगों को यह पता लगे की रायपुर के निर्माण में अग्रवाल समाज, मराठी समाज, ब्राह्मण समाज, बंगाली समाज, सिंधी समाज, सिख समाज सब समाजों ने मिलकर बिना भेदभाव के योगदान दिया है इसलिए यह आयोजन किया गया है।   छत्तीसगढ़ी दाऊ अग्रवाल समाज की तरफ से केंद्रीय अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने मुख्यमंत्री जी से दानवीर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल के नाम से राज्य अलंकरण प्रारंभ करने की मांग रखी है। क्योंकि प्रथम मंत्रालय दो कल्याण सिंह मंत्रालय था अतः नया रायपुर में किसी चौराहे या सड़क का नाम दाऊ कल्याण सिंह के नाम से रखने की मांग भी की गई है।   छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की अध्यक्ष पद पर  दाऊ अनुराग अग्रवाल सचिव पद पर दाऊ  डॉ जेपी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पद पर  दाऊ अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष पद पर दाऊ अजय दानी, उपाध्यक्ष पद पर दाऊ श्याम अग्रवाल, दाऊ गजेंद्र अग्रवाल, दाऊ डॉ राजेश अग्रवाल, श्रीमती सीता अग्रवाल, सह सचिव पद पर दाऊ यशवंत अग्रवाल, दाऊ संतोष अग्रवाल, दाऊ केशव मुरारी अग्रवाल,श्रीमती निहारिका अग्रवाल, महिला प्रतिनिधि के पद पर श्रीमती विंध्य अग्रवाल और युवा प्रतिनिधि के तौर पर दाऊ आशीष अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के द्वारा महाराज अग्रसेन के नाम से शपथ ली।   कार्यक्रम आभार प्रदर्शन केंद्रीय सचिव डॉक्टर दाऊ जेपी अग्रवाल ने किया। recent visitors 27

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन में नवनिर्मित आडिटोरियम का लोकार्पण करते हुए दानदाताओं को किया सम्मानित

रायपुर मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन में नवनिर्मित आडिटोरियम का लोकार्पण करते हुए दानदाताओं को किया सम्मानितमुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन में नवनिर्मित आडिटोरियम का लोकार्पण करते हुए दानदाताओं को किया सम्मानित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज द्वारा दानशीलता दिवस पर आयोजित सम्मान एवं शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन में समाज द्वारा नवनिर्मित 200 सीटर ऑडिटोरियम का लोकार्पण और  दान दाताओं का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अग्रवाल समाज की दानशीलता के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि मानवता की सेवा और दानशीलता के लिए अग्रवाल समाज हमेशा ही आगे रहा है। छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज का छत्तीसगढ़ से काफी पुराना नाता रहा है। लगभग 400 साल पहले जब से अग्रवाल समाज का छत्तीसगढ़ में पदार्पण हुआ है,  तब से छत्तीसगढ़ के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज व्यापार व्यवसाय से जुड़ा हुआ है जो कठिन परिश्रम  तथा लगन से कार्य करते हुए मानवता की सेवा में जुटा रहना वाला समाज है। अग्रवाल समाज के द्वारा कोविड की विषम परिस्थिति में भी मानव सेवा सम्बंधी किए गए कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के दानदाताओं के सहयोग का उल्लेख किया। इनमें उन्होंने डीकेएस अस्पताल, एम्स, शीतलबांधा तालाब सहित अनेक  कार्यों का उल्लेख किया। कृषि विश्वविद्यालय के लिए 1900 एकड़ भूमि समाज के दानदाताओं द्वारा दी गई है। अनेक धर्मशाला, तालाब, मंदिर, गौशाला, छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के द्वारा बनाई गई है। इन कार्यों से समाज का हर वर्ग लाभान्वित है। सामाजिक समरसता का इससे अनूठा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के लोगों ने सेवा के ऐसे काम किए हैं, जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कन्या विवाह, रोजगार जैसे अनेक क्षेत्रों में आप सभी ने जरूरतमंदों की सेवा की है। हमारा प्रदेश छत्तीसगढ़ देश-दुनिया में सामाजिक समरसता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के अनुरूप 2047 में विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को पाने में अग्रवाल समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहेंगी। इस दौरान उन्होंने समाज के नव निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ भी दिलाई। साथ ही मुख्य मंच से दान देने वाले अग्रणी परिवारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर श्रीमती मीनल चौबे, संजय श्रीवास्तव, दाऊ अनुराग अग्रवाल  सहित समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। recent visitors 41

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत की प्राचीन विधा योग को विश्वपटल पर किया स्थापित – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 योग आयोग के नवनिर्वाचित अध्यक्ष के शपथ ग्रहण में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय योग आयोग के नवनिर्वाचित अध्यक्ष के शपथ ग्रहण में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  ने भारत की प्राचीन विधा योग को विश्वपटल पर किया स्थापित – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय स्वस्थ तन-मन के लिए योग को करें अपनी दिनचर्या में शामिल – मुख्यमंत्री रायपुर योग आत्मा, मन और शरीर को संतुलित करने का सबसे बड़ा माध्यम है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने योग को विश्वपटल पर स्थापित किया और आज पूरी दुनिया भारत की इस प्राचीन विधा को अपनाकर आरोग्य की प्राप्ति कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री रूपनारायण सिन्हा के शपथ ग्रहण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित गरिमामयी समारोह में अध्यक्ष श्री रूपनारायण सिन्हा ने आज शपथ ग्रहण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने संतों का अभिवादन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने योग आयोग के नव-नियुक्त अध्यक्ष श्री सिन्हा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री सिन्हा को छत्तीसगढ़ को जोड़ने और स्वस्थ रखने की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। जनसेवा को समर्पित उनका सामाजिक जीवन और सांगठनिक दायित्वों के लंबे अनुभव का लाभ योग आयोग के साथ ही प्रदेशवासियों को भी मिलेगा। 2017 में स्थापित योग आयोग की अब तक की यात्रा शानदार रही है और श्री सिन्हा के नेतृत्व में यह नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री  श्री साय ने कहा कि भारत में योग ऋषि-मुनियों की देन है और वे इस सुंदर परंपरा के संवाहक भी हैं। योग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है और इसका अर्थ है जुड़ना या एकजुट होना, जो शरीर और चेतना के मिलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से ही योग रूपी इस चेतना का विश्वभर में विस्तार हुआ और संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने को मान्यता दी। श्री साय ने कहा कि योग विश्वभर में विभिन्न रूपों में प्रचलित है और इसकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी से अपील करते हुए कहा कि हमें स्वस्थ तन-मन के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए और भावी पीढ़ी को योग से जोड़कर इसका महत्व समझाना चाहिए। योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री रूपनारायण सिन्हा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि योग सभी के लिए है और सभी को जोड़ने का काम करता है। संगठन में काम करते हुए सदैव मैंने लोगों को जोड़ने का कार्य किया है और आज मुझे योग आयोग के माध्यम से सभी को जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। श्री सिन्हा ने कहा कि प्रकृति में अनेक महत्वपूर्ण संपदाएं उपलब्ध हैं, परंतु इनमें सर्वश्रेष्ठ मानव संपदा है। मुख्यमंत्री जी ने मुझे मानव संपदा को स्वस्थ रखने का जिम्मा सौंपा है और इसे पूरा करने के लिए योग को जन-जन तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।हमारे प्रधानमंत्री जी नियमित योग करते हैं। उनकी ऊर्जा और कार्यक्षमता से आज सारी दुनिया वाकिफ है। श्री सिन्हा ने योग की विश्वव्यापी लोकप्रियता और प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री संपत अग्रवाल, विधायक श्री अनुज शर्मा, डॉ. रामप्रताप सिंह, श्री संजय श्रीवास्तव, महामंडलेश्वर श्री हरिहरानंद महाराज, पूज्य संत उदयनाथ जी महाराज, श्री वासु देवानंद जी महाराज, समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, संचालक समाज कल्याण श्रीमती रोक्तिमा यादव सहित पूजनीय संत समाज, योग आचार्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 28

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि (03 अप्रैल) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज एक नाम नहीं, बल्कि भारतमाता की आत्मा में रचा-बसा वह स्वाभिमान हैं, जिन्होंने स्वराज्य का स्वप्न देखा और उसे यथार्थ में परिणत किया। वे साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति की सजीव प्रतिमूर्ति थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृति, नीति और नेतृत्व के अमिट प्रतीक हैं। उन्होंने न केवल धार्मिक सहिष्णुता, जनकल्याण और न्यायप्रिय शासन की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि एक सच्चा शासक केवल तलवार से नहीं, नीति, मूल्य और जनसेवा से पहचाना जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जब देश नए भारत के निर्माण की दिशा में बढ़ रहा है, तब शिवाजी महाराज की सोच, उनका साहस और स्वराज्य का दर्शन हमारे लिए प्रेरणापुंज बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के जीवन से हमे यह प्रेरणा मिलती है कि जब संकल्प अडिग हो और ध्येय राष्ट्रहित, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को प्रेरित किया कि शिवाजी महाराज के राष्ट्रप्रेम के आदर्श का अनुसरण करते हुए राष्ट्र की उन्नति में अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और समय को समर्पित कर सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें। recent visitors 28

भगवान श्रीराम के आदर्श गुणों को आत्मसात करना ही मन की अयोध्या को सजाना है – सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर

रायपुर : स्वदेश पत्र समूह ने समाज में भारतीयता की भावना को पुष्ट किया – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय 'स्वदेश' द्वारा आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम में हुए शामिल भगवान श्रीराम के आदर्श गुणों को आत्मसात करना ही मन की अयोध्या को सजाना है – सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर "समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का" विषय पर हुआ विशेष व्याख्यान "राम काजु कीन्हें बिनु" एवं छत्तीसगढ़ की लोक कला संस्कृति पुस्तक का विमोचन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय विचार पत्रिका "स्वदेश" द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम "विमर्श" में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। "समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का" विषय पर आयोजित इस विमर्श व्याख्यान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। सह सरकार्यवाह चक्रधर ने अपने व्याख्यान में कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों एवं गुणों को मन में आत्मसात करना ही “मन की अयोध्या” को सजाना है। उन्होंने कहा कि केवल मन ही नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज, गांव और राष्ट्र को भी राममय बनाना है। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन वचन-पालन, धैर्य, करुणा भाव, परामर्श, श्रेय, न्याय, अहंकार का त्याग, मित्रता और दूसरों के प्रति सम्मान एवं समभाव जैसे गुणों से परिपूर्ण था। इन गुणों को अपनाकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। चक्रधर ने आगे श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं के छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से उनके आदर्श गुणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि श्रीराम वचन के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ थे—राजतिलक की घोषणा के अगले ही दिन उन्होंने पिता दशरथ द्वारा दिए गए वचन के सम्मान में सहर्ष वनवास स्वीकार किया। इसी प्रकार उन्होंने हर सुख-दुख की परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा, कभी भी अहंकार को अपने पास नहीं आने दिया और सभी के साथ समभाव रखते हुए सम्मान का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन गुणों को आत्मसात कर हम अपने मन, परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं और 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। इस अवसर पर अयोध्या आंदोलन पर केंद्रित ग्रंथ "राम काजु कीन्हें बिनु" एवं छत्तीसगढ़ की लोक कला-संस्कृति पर आधारित पुस्तक का विमोचन मंच से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, स्वदेश पत्रिका समूह के संपादक अतुल तारे एवं प्रबंध संपादक यशवर्धन जैन मंच पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेश पत्र समूह ने अपनी सात दशकों की अविरल यात्रा में समाज में भारतीयता की भावना को पुष्ट करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि स्वदेश समाचार पत्र आज भले ही नए कलेवर में है, लेकिन इसका इतिहास अत्यंत समृद्ध है। देश की आजादी के तुरंत बाद 1948 में अंत्योदय और एकात्म मानवतावाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की परिकल्पना से इस पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भी इसके संपादक रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब स्वदेश समाचार पत्र समूह के अधिकांश लोगों को जेल में डाल दिया गया। इसके बावजूद यह पत्र भारतीयता की भावना को लोगों तक पहुँचाता रहा और अडिग रहा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या की गई और लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया। अनेक परिवार उजड़ गए। ऐसे मीसाबंदियों को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने सम्मान निधि देना प्रारंभ किया था, जो पिछले 5 वर्षों से बंद थी, जिसे हमारी सरकार ने पुनः प्रारंभ किया है। साथ ही विधानसभा में विधेयक लाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि मीसाबंदियों को यह सम्मान राशि निरंतर मिलती रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का व्याख्यान विषय – "समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का" – अत्यंत प्रासंगिक है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि है और भगवान श्रीराम को यहां भांजा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ है—जनता की सेवा। हमारी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर जनसेवा का कार्य कर रही है। भ्रष्टाचार के प्रति हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। हम श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप रामराज्य की कल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना समूह संपादक अतुल तारे ने रखी। आभार प्रदर्शन योगेश मिश्रा (स्थानीय संपादक) ने किया तथा संचालन शशांक शर्मा ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक अभयराम, प्रांत संघचालक डॉ. टॉपलाल वर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक किरण देव, पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, खुशवंत साहेब, पवन साय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 25

बस्तर पंडुम 2025 के उ‌द्घाटन दिवस में होगा कार्यक्रम : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा होंगे शामिल

रायपुर, बस्तर क्षेत्र की कला, संस्कृति और परंपराओं के उत्सव 'बस्तर पंडुम' में  डॉ. कुमार विश्वास द्वारा "बस्तर के राम"  कथा वाचन किया जाएगा। आगामी 3 अप्रैल को होने वाला यह आयोजन, बस्तर क्षेत्र में शांति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए सोपान तय करेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  ने “बस्तर पंडुम 2025” को बस्तर की आत्मा से जुड़ा एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण बताते हुए कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, आस्था और आकांक्षाओं का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर के राम’ जैसे कार्यक्रम बस्तर की धरती को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ते हैं और यह सिद्ध करते हैं कि विकास का सबसे सशक्त मार्ग संस्कृति और परंपरा से होकर जाता है। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि यह उत्सव बस्तर को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा और हमारी जनजातीय परंपराएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। उल्लेखनीय है कि दंडकारण्य क्षेत्र का रामायण काल में विशेष स्थान रहा है और राम ने अपने वनवास काल का कुछ समय दंडकारण्य के जंगलों में व्यतीत किया था। डॉ. कुमार विश्वास बस्तर क्षेत्र के परिपेक्ष्य में राम के महत्व पर अपनी राम कथा "बस्तर के राम" का वाचन करेंगे। बस्तर पण्डुम आयोजन में डॉ. कुमार विश्वास की वाणी में जब राम कथा की गूंज बस्तर की वादियों में फैलेगी तो इसमें सिर्फ शब्द नहीं बल्कि एक भावना होगी शांति, एकता और पुनर्जागरण की। इस आयोजन के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में राम के प्रवास का स्मरण कर अपनी समृद्ध पौराणिक विरासत का अनुभव कर सकेंगे। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा  ने "बस्तर के राम” के आयोजन पर कहा कि  "बस्तर पण्डुम" और "बस्तर के राम” जैसे आयोजन बस्तर क्षेत्र को भारत और विश्व से जोड़ते एक सांस्कृतिक सेतु की तरह है, जो हमारे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बस्तर क्षेत्र के समेकित विकास के संकल्प का परिचायक है। बस्तर क्षेत्र आज गर्व से साक्षी बन रहा है कि हिंसा का अंत संभव है और शांति का मार्ग संस्कृति से होकर गुजरता है। उल्लेखनीय है कि जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग के स्थानीय कला, संस्कृति एवं जीवन शैली संरक्षण-संवर्धन एवं प्रोत्साहन के लिए राज्य शासन द्वारा “बस्तर पण्डुम 2025" का आयोजन किया जा रहा है जिसके उ‌द्घाटन सत्र में शाम 6 बजे "बस्तर के राम" कार्यक्रम किया जाना निर्धारित है। recent visitors 36